Saturday, June 13, 2020

संकुल फ़ीस लेंगे या नहीं? महामंथन


आज VTv न्यूस पर महामंथन देखा।गुजरात की सब से पहली HD news चेनल के तौर पे इसे जाना जाता हैं। सदैव निष्पक्ष और ज्यादा जानकारी के कारण में सिर्फ एक ही लोकल चेनल देखता हूँ। जो है VTv। इस चैनल में सबसे लंबा रोजाना कोई कार्यक्रम है तो वो है ' महामंथन'। आज के महा मंथन कार्यक्रम में #BJP के श्री महेश कसवाला, कोंग्रेस से श्री नरेंद्र रावत,शिक्षाविद एवं कटार लेखक श्री अशोक पटेल और पूर्व शिक्षा अधिकारी श्री के.आर.पोटा जी भी उपस्थित थे। कुछ बाते हुई। मे  कार्यक्रम में जुड़ने के लिए 30 मिनिट तक कोल करता रहा। कार्यक्रम के शुरू से अंत तक। में मेरे सवाल नहीं पहुंचा पाया इस बात का मुझे खेद हैं। इस कार्यक्रम में #इसुदान गढवी अच्छा संचालन कर रहे हैं।सच को सच और जुठ को जुठ कहने में वो हिचकिचाहट नहीं रखते। मेने कई बार उन्हें किसी भी बड़े पैनलिस्ट को डांटते या रोकते हुए देखा हैं। आज की बात के लिए में  कहूंगा की चर्चा करनी थी गरीबी की रेखा पर और चर्चा चली रेखा की गरीबी पर। आज के महामंथन का विषय था स्कुल में फ़ीस लेने के लिए कुछ लोग दबाव बना रहे हैं। लोग याने संस्थान के संचालक।

मेरा कोल नहीं लग पाया सो मुझे हुआ की में मेरे सवाल और कुछ लोगो ने जो जानकारी छिपाई उस के बारे में कुछ लिखू। सबसे पहली बात है कोंग्रेस के नेता की। न उन की सरकार है न उनकी कोई शैक्षिक संस्थान होगी। वो सिर्फ लोगो को दबाव न करने के बारे में बोल रहे थे। वो और बोले भी क्या। उन्होंने अपनी बात रखी और 3 बार उन्हें चांस मिला, जो की एक पैटर्न होती है कि सभी पैनलिस्ट को चांस मिले। उन्होंने जो कहा में उस बात को नहीं लिखूंगा, क्यों की उन्होंने अपने पक्ष के बजाय सीधे व्यक्तिगत कैसे सुधार हो इस के बारे में कुछ जानकारी दी, जिसमें BJP  पेनलिस्ट नेताने उन से बड़ी आवाज में बिच बिच बोलते रहे। किसी स्वामीनारायण इंटर नॅशनल स्कुल के संचालक श्री बंकिम शाह भी पैनल में थे। 



उन का कहना था कि हमने हंमारे स्टाफ को 70% पगार लेने के लिए तैयार कर लिया और हमे कोई सवाल या समस्या नहीं। होती तो भी थोड़े live टी.वी. पर बोलते। गुजरात की TRP में सबसे पहली चार चेनल में से किसी एक चैनल पर तो अच्छी बातें करेंगे। डिबेट में वो क्या बोलते? मगर मेरा उन से सवाल था की अगर आप इंटर नेशनल स्कुल के संचालक है तो कृपया आप ये बताये की दुनिया के कोन से दूसरे देश में उन की दूसरी ब्रांच हैं। अगर दूसरे देश में कोई ब्रांच नही है तो इसे सिर्फ नाम से इन्टर नॅशनल के नाम से लोगो से धोखाधड़ी कर रहे हैं। कुछ तीन चार संकुल के बारे में उन्हों ने बताया जो सारे एक डिस्ट्रिक्ट या गुजरात के संकुल थे।मेरा सरकार एवं #इसुदान जी से अनुरोध है की ऐसी मुहीम चले की ऐसे संचालक इंटर डिस्ट्रिक संकुल नाम रखे ऐसा प्रावधान हो। ऐसे संचालक बाते बड़ी बड़ी करते है मगर सही बात नहीं बताते। जैसे की क्या इंटर नॅशनल स्कुल में कोई गरीब का बच्चा है। #RTE के तहत उन की कितनी स्कुल में उन्होंने प्रवेश दिया हैं, और कितने बच्चे RTE से पढ़ते हैं। उन की फीस तो सरकार देती हैं। RTE के प्रवेश के संदर्भ में किसी ने कहा कि कुछ पेरन्ट्स ऑडी लेकर गुमते हैं। ऑडी में गुमने पर चर्चा हुई। संचालक एवं वाली भी ऑडी वाले ही होंगे। 3 महीने पढ़ाया नही है, लोक डाउन में संकुल बंध थे,फिरभी 70% पगार दिया। फ़ीस तो पिछले साल की उन के पास पहले से थी। 

श्री अशोक पटेल जी जो शिक्षा विद बन के बैठे थे। उन को सदैव सरकार के प्रवक्ता के रूप में सुनता और पढ़ता आया हूँ। वो लिखते भी हैं। बाते बड़ी बड़ी करने को लेकर वो शिक्षाविद से ज्यादा उन की खुद की बाते करने आये ऐसा लगा। उन्होंने क्या दान दिया इस ऐ अच्छा इस हालत में कैसे काम किया जाय वो अपेक्षा रखी थी। 1 लाख से अधिक पगार लेने वाले 38 हजार दान में दिए वो गुजरात को सुनाकर बैठे रहे। उन्हों ने कहा कि अभी फ़ीस नहीं माग रहे है। मगर माफ़ भी नहीं कर रहे हैं। अरे उन्हें कहना चाहिए जब तक शिक्षा का काम रेग्युलर नहीं होता वो फ़ीस नहीं देनी या कुछ प्रतिशत ही देने को वो बोल सकते थे। एक अखबार में लिखने के बाद कोई कुछ सवाल करे तो कभी जवाब नही देते और जो आज जवाब दिए वो भी सामान्य थे। उन्हें मालूम नहीं है कि FRC (फ़ीस रेग्युलेशन कमिटी) के कारण 8 हजार लेने वाले संकुल आज 14 हजार के धनी बन पाए हैं। ये है FRC का फायदा। 

 योगा की फीस या खेल की फीस अभी माफ़ करें। अरे गधे को भी मालुम है कि सरकारी स्कूल भी बन्ध है, वो भी योगा करते रहे हैं। योगा की फीस, फला ढिंकना फ़ी का पत्र पठन करने वाले श्री के.आर. पोटा जी ये कैसे भूल गए की जब वो शिक्षा अधिकारी थे तब से एक नियम है, की संकुल में स्कुल की परमिशन चाहिए तो जितने कर्मचारी की जरूरत होती है, उन के सरकारी नियम की तहत एक साल का पगार स्कुल के बेलेन्स शीट या बैंक में दिखानी हैं। अगर ये नियम है तो 70% पगार शिक्षक क्यों ले? शायद पोटा जी ये भी भूल गए की ये फ़ीस की समस्या बड़ी फ़ीस वाली स्कुल की ही हैं। FRC के जानकार, बंधारण की कलम बार बार बोलने और लिखने वाले पोटा जी उन के पास में बैठे संचालक को ये पूछ सकते थे। श्री बंकिम शाह ने कहा की 10000 से अधिक प्राइवेट स्कूल के संचालक ये कार्यक्रम देखते हैं। गुजरात में 16368 प्राइवेट संकुल हैं। क्या श्री अशोक पटेल एवं श्री पोटा जी ये कैसे भूल गए की पिछले कितने सालो से प्री स्कुल से डीम्ड यूनिवरसीटी की मान्यता मिलनी शुरू हुई। एक समय था जब स्व. नलिन भट्ट शिक्षा मंत्री थे, उन्होंने आज तक के इतिहास में सबसे ज्यादा सरकारी ग्रांटेड आश्रम शाला एवं हाईस्कूल की परमिशन बन्ध करवाई थी।श्रीमती आनंदीबेन पटेल के शिक्षा मंत्री होते समय  प्राइवेट संकुल को सबसे अधिक परमिशन मिली हैं।

मेने स्क्रीन पर श्री महेश कसवाला जी को देखा तब से मुझे मालूम था। मुझे मालूम था कि वो  लंबे हाथ कर के,और केमेरे के सामने राइट हाथ की ऊँगली दिखाकर कोंग्रेस के व्यक्ति को कहेंगे की आप ने किया होता तो हमे न करना पड़ता।  में अगर कोल करपाता तो उनसे पूछता की वो कृपया  RTI से जानकारी प्राप्त करे की गुजरात की पहली प्राथमिक,पहली माध्यमिक,पहली कॉलेज या पहली प्राइवेट यूनिवर्सिटी की मान्यता किस साल में मिली, उसे कितने साल हुए? नलिन भट्ट आज जिन्दा नहीं हैं। उनके बारे में न लिखता। मगर तब वो शिक्षा मंत्री थे, जब अल्प विकसित और  अन्तरियाल विस्तार में चलने वाली कितनी आश्रम शाला बन्ध हुई।और इस के बाद कितनी प्राइवेट संकुल को मान्यता मिली।  तब सरकार में कोण थे। मुजें BJP या कोंग्रेस से नहीं। कहने वाले कहते है कोंग्रेस ने ये किया होता तो हम न करते। मगर शॉपिंग सेंटर में परमीशन  दिए हैं। वो भी PTC, Bed या BSC कॉलेज या संस्थान शॉपिंग सेंटर में खुले है जो आज भी हैं। सवाल सीधा था। फ़ीस का क्या करे। कोई दबाव कर सकता हैं? जवाब भी वही है, की पिछले 3 महीने से शिक्षा कार्य बन्ध है तो उसका रिबेट मिलेगा क्या? आप वापस करना नही चाहते। और वो अन्तर्राष्ट्रीय संचालक कहते है, आज नहीं तो 6 महीने बाद मगर फ़ीस देनी चाहिए।

अरे! 3 महीने के वापस दो या इन 3 महीने की छोड़ दो। श्रीमान महेश जी को जब देखता हूं हाथ लम्बा कर के बोलते हैं। आज तो मुझे ऐसा लगा की कोई बहार से उन्हें फोन पे जानकारी देता था। उन्होंने 3 बार डिबेट चालू होने पर भी कोल रिसीव किये। ठीक हैं। अगर इसुदान जी के बदले में होता तो चालू डिबेट में 3 से 4 बार फोन पे बात करने वाले को डिबेट से बहार भेज देता।


और अंतमें...

इंटर नॅशनल...???
एक देश में भी दो संकुल नहीं हैं।

CBSE संकुल....

उस की परमिशन की पहली शर्त है कि ट्रस्ट के पास 5 एकड़ जमीन होनी चाहिए। गुजरात की कितनी CBSC संकुल के नाम पे चलने वाले ट्रस्ट के पास इतनी जमीं हैं? बड़ा नाम रखने से बड़ी फ़ीस मिलती है।CBSE मतलब सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एज्युकेशन। पोटा सर ये कैसे भूले की सेकंडरी में कक्षा 1 से 5 नहीं गिने जाते। प्राथमिक शिक्षा के लिए राज्य सरकार स्वायत्त है। वो CBSC में कैसे आता हैं। सभी सिर्फ नाम देते है, CBSC या बड़े नाम इंटरनॅशनल  के नाम से लाखों में फ़ीस लेते हैं। लोकड़ाउँन से पहले  DPS का तो बड़ा गफला आया था। हाइकोर्ट तक बात आई थी। परमिशन केंसल करने का प्रस्ताव था, बिना डरे वो आज फ़ीस माग रहे हैं नाम बड़े और इंटरनेशनल रखते हुए,CBSE दिखाते हुए उनकी  परमिशन जिल्ला समिति से लेकर चलाते हैं। 

आज फ़ीस के लिए दबाव करने वाले क्या जब शिक्षा कार्य नही हुआ उन महीनों की फीस रिफंड देंगे। एक पपेट की तरह शिक्षा विद की जगह श्री अशोक पटेल ने  शिक्षामंत्री ने उन को सामने से कॉल किया। ये जानकारी को VTv  शेर करने के बजाय श्री अशोक पटेल कोई सुजाव देने में असमर्थ रहे। वैसे भी उन की कलम या कथन में कभी शिक्षाविद नहीं दिखा। शिक्षा से सवाल हैं तो ज्यादा विद्यार्थी एक से आठ में हैं। सरकारी शिक्षक को सवाल करते तो अच्छा होता। कोलेज से जुड़े अध्यापक को बात करने से कम विद्यार्थियो से जुडी जानकारी मिलेगी।

मेरा इसुदान जी से अनुरोध है कि फोन के साथ आप मेल आईडी भी दे, जब आप के मनो मंथन का विषय तय कर लो तो हम फोन के बजाय मेल या मेसेज दे, जिस से चर्चा गरीबी की रेखा पर हो,नहीं की रेखा की गरीबी पर। गढवी जी का दोष नहीं हैं।  जो  FB जैसे भद्दे सोसियल मिडिया जैसे चालु माध्यम पर बंधरणीय कलम और अधिनियम लिखने वाले आज 2 बार बाइट में भी ऐसा बोले की इसुदान जी को रोकना एवं टोकना पड़ा। भाई श्री महेशजी कसवाला बॉडी लेंग्वेज के जानकार केमेरे के सामने ऊँगली उठाकर बोलने वालों को गलत प्रभाव खड़ा करने को या दबाव बढ़ाने वाले व्यक्ति के रूप में मानते हैं। मेरी भी यही राय हैं।

कोई सच बोलेगा तो पोटा जी उसे FB से ब्लॉक करेंगे।श्रीमान महेश जी कोंग्रेस को कोसेंगे।श्री अशोक जी तो खुद का प्रचार कर के चले गए। संचालक छ महीनों बाद पूरी फ़ीस वसूलने को कहकर चले गए। मतलब चर्चा करने आये थे गरीबी की रेखापर और आधी जानकारी के कारण रेखा की गरीबी पर बोलते रहे। शिक्षाविद एवं पूर्व अधिकारी भी पूरी जानकारी देने में असमर्थ रहे.। VTv मेरा प्रिय चेनल हैं। गुजराती न्यूस चेनल में में सिर्फ Vtv देखता हूँ।इसुदान जी को मैने बहोत से लोगो को बुच मारने से दूर करते देखा हैं। इसुदान जी को मेरा अनुरोध है की अगर वो चाहे तो मेरे सवाल  कल के पैनलिस्ट को भेजे।

मेने जो लिखा है उस के लिए अगर  किसी पैनलिस्ट या किसी को भी इस बात पर सवाल है तो कृपया मुझे लिखे, संपर्क करें।


लास्ट अपडेट:

शिक्षा मंत्री का महत्वपूर्ण निर्णय:

શિક્ષણમંત્રીનો મહત્વનો નિર્ણય, સ્કૂલ સંચાલકો ફી માટે નહીં કરીશકે દબાણ. કોરોનાનાં કપરાં કાળમાં ઉદ્યોગ-રોજગાર બંધ હતા. તેવામાં સ્કૂલો પણ બંધ છે. જેને કારણે ફી ભરવા મામલે વાલીઓએ પણ વિરોધ કર્યો હતો. જે બાદ રાજ્યના શિક્ષણમંત્રી ભૂપેન્દ્રસિંહ ચૂડાસમાએ કહ્યું છે કે, સ્કૂલ સંચાલકો 3 મહિના સુધી ફી ભરવા મામલે દબાણ નહીં કરી શકે.

શિક્ષણમંત્રી ભૂપેન્દ્રસિંહ ચૂડાસમાએ જણાવ્યું કે, ચાલુ વર્ષની ફીમાં કોઈપણ જાતનો વધારો કરવામાં આવશે નહીં. 15 ઓગસ્ટ સુધી રાજ્યની શાળાઓ બંધ રહેશે. ત્રિમાસિક ફી ભરવા માટે સ્કૂલ સંચાલકો દબાણ કરી શકશે નહીં. ત્રિમાસિકને બદલે માસિક ફી ભરી શકાશે. કોરોના કાળમાં ફી લેવા માટે દબાણ કરાશે તો ચલાવી નહીં લેવાય અને શાળા સામે કાર્યવાહી કરવામાં આવશે.જો કોઈ ફરિયાદ કરશે તો તેના આધારે શિક્ષણ વિભાગ દ્વારા કાર્યવાહી કરવામાં આવશે. આ ઉપરાંત વાલીઓ માસિક હપ્તાથી ફી ભરી શકશે.સ્ટેશનરી અને ટ્રાન્સપોર્ટેશન સહિનાં ચાર્જ માગશે તો કાર્યવાહી કરવામાં આવશે. સપ્ટેમ્બર મહિનાની ફી ભરશો તો ચાલશે.યુનિફોર્મ અને પુસ્તકો માટે પણ પૈસા નહીં લઈ શકે.  
ખાનગી શાળાઓ પર નજર રાખવામાં આવશે.

https://m.dailyhunt.in/news/india/gujarati/abtak-epaper-abtak/shikshanamantrino+mahatvano+nirnay+skul+sanchalako+phi+mate+nahi+karishake+daban-newsid-n191112050;Skp

शायद मेरा लिखा सर ने पढ़ा होगा।

09925044848

Monday, June 8, 2020

हम पढकर दिखलायेंगे


कोरोना....
कोविद :2019...
चीन से आया...दुनिया में फेला...
सब कुछ बांध हो गया, कहिए सारा भारत बंध !
कहिए की साडी दुनिया को लोक करदिया एक वयारासने!
मार्च से लेकर आज तक हमारी गमती निशाल बांध रही, हम कुछ कर भी नहीं सकते थे!बच्चे प्यारे होते हैं, जिन के कारण हम और हमारे घर चलते है, वो बच्चे क्यों प्यारे न हो? मगर आज से हमारी स्कुल शुरू होंगी! बच्चे अभी शायद नहीं आयेंगे! सबसे पहले हम घर घर जाकर बच्चो को और उन के माता पिता को अब से कैसे स्कुल चलेंगी इस के बारे में जानकारी देंगे बाद में बच्चो को स्कुल में लायेंगे!

हमारी गमती निशाल मे हम क्या करेंगे वो तो अब बच्चो से मिलकर तय करेंगे! आप के पास कोई सुजाव है तो आप हम तक इसे अवश्य पहुंचाए! में आशा रखता हूँ की हमारी संस्थान कुछ इस तरीके से आगे बढ़ेगी की बच्चो के स्वास्थ्य को हम अच्छे से संभाल पाए और उन से जुडकर शिक्षा का कार्य क्र पाए!

एक पुरानी याद भी आज आप से शेर क्र रहा हु, एक सुनहरी याद देखने के लिए यहाँ क्लिक करें!

Friday, June 5, 2020

7 स्किल फाउंडेशन की कार्य शाला


कौशल्य  की आज मांग हैं। 
जिन के पास कौशल्य है,वो कभी बेरोजगार नहीं रहते। पीछले दस सालो से हम ऐसे व्यक्तिओ को खोज रहे हैं,जिन के पास कोई ख़ास स्किल हो। छोटी छोटी कार्यशालाओ के माध्यम से हम इस काम में लोगो को नजदीक से देखते और समजते हैं। सोसियल मिडिया एवं एक दुसरे से अवगत होकर हम ऐसे स्किल्ड पर्सन से जुड़े रहे हैं। 7 स्किल फाउन्डेशन के चेरमेन श्री प्रवीन माली दोगुने उत्साह से इस काम को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर रहते हैं। ऐसी ही एक कार्यशाला का आयोजन हमने २७ जनवरी को किया। महेसाणा के पास नानी दाऊ स्थित उत्कर्ष विद्यालय में इसका आयोजन हुआ था। हमारे पार्टनर के तोर पे युवा ग्रीन फाउडेशान  सरे देश से कई सरे स्किल वाले साथी जुड़े थे।  गुजरात सहित देश के एनी १७ स्टेट से स्किल्ड पर्सन आये और उन के काम के बारें में उन्हों ने अपनी बात रखी।  

हम उन के बारें में एक किताब भी बनाने जा रहे हैं। जो की अगली कोंफ्र्न्स में विमोचित होगी।  इस कार्यशाला में हमारे साथी एवं पार्टनर बने 90.4 fm पालनपुर के साथी।  उन्हों ने प्रचार प्रसार में हमे अच्चा सहयोग दिया और हमारी कोंफ्र्न्स हम सबकी हो गई।  इस कोंफ्रंस के हेतु एवं हमारे कार्य को समाज ने के लिए आप इस वीडियो को पूरा देखे। इस के बारें में  जान ने के लिए यहाँ  यहाँ क्लिक करें  और हमारे काम के बारें में अवगत हो और दूसरो तक भी ये जानकारी फेलाए।  




विश्व पर्यावरण दिवस




आज विश्व पर्यावरण दिवस हैं। पर्यावरण में असंतुलन हमे परेशानी और समस्या के साथ नई बीमारी के सामने खड़ा करता हैं।पर्यावरण का संरक्षण एवं संवर्धन हमे आगे का जीवन आसान कर के देता हैं। एक समय था जब हम कम जरूरत के साथ जीते थे। आज की लाइफ स्टाइल ऐसी हो गई है कि जिस में हम हर पल पर्यावरण को नुकशान पहुंचाते आ रहे हैं। और इसी बजह से जागृति के लिए सारे विश्व में इसे आज के दिन मनाया जाता हैं।

हमारा खाना,पीना और जीवन जरूरत की सारी चीजें हमे पर्यावरण से मिलती हैं। आप ने महसूस किया होगा की पिछले कुछ सालों से भूकंप के झटके ज्यादा हो रहे हैं। कितनी क्षमता वाला भूकंप है वो महत्व पूर्ण नहीं हैं। मगर भुस्तर शास्त्रीयो का कहना हैं की एक छोटा सा भूकंप पानी के स्तर को 80 से 100 फिट नीचे ले जाता हैं, अब सवाल ये है कि भूकंप आते क्यों हैं। इस का एक मात्र जवाब हैं पर्यावरण में अस्थिरता । अस्थिरता क्यों हैं? जवाब हैं हमारी बेदारकारी और पर्यावरण के प्रति हमारी जाग्रति का अभाव।

सो हमे आज के दिन प्रयत्न करना है कि हम कम से कम पर्यावरण को नुकशान करेंगे। आज के दिन मेरे और आप के द्वारा लिया गया संकल्प हमे आगे की जिंदगी में सुविधा एवं स्वास्थ्य प्रदान करेगा। गुजरात में वलसाड के हमारे साथी श्रीमती मीना पटेल ने आज के दिन के लिए एक कविता लिखी हैं,मीना जी सरकारी पाठशाला में अध्यापिका हैं  आप को अवश्य पसंद आएगी.


मीना पटेल की रचना 

આજ કરો વાત,
વાયરા સંગે,
પાંચમી જૂન,
'પર્યાવરણ દિન ' ઉજવણી ની. ,
શાને જરૂર પડી ભાઈ ?
આપી ઈશ્વરે દુનિયા,
આપ્યા પ્રકૃતિ નાં 'ઋતુચક્ર ',
આપ્યો સજીવોના પોષણવૃદ્ધિ કરતો,
વાયુ હવા સ્વરૂપ.
પાણી નું બુંદ આપે છે જિંદગી,
જળ ન હોય તો ?
સળગી જાય દુનિયા જળ વગર.
સ્વાર્થી માણસે જરૂરિયાત પોષવા,
કર્યું ખંડન કુદરત નાં નિયમોનું.
સગવડતાની દોટ માં,
ભૂલ્યો માનવી બધું.
નદી -સમુદ્ર ને બનાવ્યા,
સાર્વજનિક ઉકરડા,
વૃક્ષ નું કર્યું પતન.
સાન ઠેકાણે લાવી ,
હવે સમજ્યો માનવી,
કુદરતી સંશાધનો,
કુદરતની અમૂલ્ય ભેટ.
હવે હર વર્ષે કરતો ઉજવણી,
પર્યાવરણ નાં પાપ ધોવા.... !
જોઈતું હોય જો જીવન બીજીવાર,
પ્રદુષણ મુક્ત રાખો પર્યાવરણ.



Thursday, June 4, 2020

पढ़े लिखो ने मजाक किया: गर्भवती हथनी की मौत


केरल,  शिक्षा  में समग्र देश में सबसे पहले नंबर पर आता हैं। अब सवाल ये हैं की क्या शिक्षा याने पढाई लिखाई और उस के ग्रेड को ही हम मानते हैं? केरल जैसे शिक्षित राज्य में एक गर्भवती हथिनी मल्लपुरम की सड़कों पर खाने की तलाश में निकलती है। क्यों की वहा अब जंगल ज्यादा नहीं हैं, n ही सर्कस के माध्यम से उन्हें खाने को मिल रहा हैं । समजिए की आज जो हालत गरीब एवं माध्यम वर्ग की है, वैसी ही हालत केरल में हाथियों की हैं । हमारी बात करे तो हम लोक डाउन के बाद शायद फंसे हुए हैं मगर ये हाथी जेसे विराट प्राणी तो जब से मेनका गाँधी ने सर्कस या खेल में प्राणियो के काम करने पर पाबंदी लगे हैं तबसे उन के यही हालत हैं । कुछ बेशर्म लोग गुमने गए थे, उन्हें एक भद्दा मजाक सुजा ।उन्होंने हथनी को  उसे अनन्नास ऑफर किया। वह हथनी उन मनुष्य पर भरोसा करके खा लेती है। वह नहीं जानती थी कि उसे पटाख़ों से भरा अनन्नास खिलाया जा रहा है। पटाख़े उसके मुँह में फटते हैं। उसका मुँह और जीभ बुरी तरह चोटिल हो जाते हैं।

बात यहाँ ख़त्म नहीं होती। 
अब हुआ ये की मुह में जख्म के कारण वो विवश थी । मुँह में हुए ज़ख्मों की वजह से वह कुछ खा नहीं पा रही थी। उस के पेट में एक बच्चा था। गर्भ के दौरान मनुष्भूय की भाति पशुओ को भी ज्खयादा खाना जरूरी हैं। उसे भूख अधिक लगती मगर मुह में पटाखे फूटने के कारण वो खा नहीं सकती थी। उस के लिए प्हैरवाही पीना भी संभव नहीं था।। उसे अपने पेट में पल रहे बच्चे का भी ख़याल रखना था। लेकिन मुँह में ज़ख्म की वजह से वह कुछ खा नहीं पाती है। घायल हथिनी भूख और दर्द से तड़पती हुई सड़कों पर भटकती रही। इसके बाद भी वह किसी भी मनुष्य को नुक़सान नहीं पहुँचाती है, कोई घर नहीं तोड़ती। पानी खोजते हुए वह नदी तक जा पहुँचती है। मुँह में जो आग महसूस हो रही होगी उसे बुझाने का यही उपाय उसे सूझा होगा। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को जब इस घटना के बारे में पता चलता है तो वे उसे पानी से बाहर लाने की कोशिश करते थे, लेकिन हथिनी को शायद समझ आ गया था कि उसका अंत निकट है। और कुछ घंटों बाद नदी में खड़े-खड़े ही उसने दम तोड़ दिया ।फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के जिस ऑफिसर के सामने यह घटना घटी उन्होंने दुःख और बेचैनी में इसके बारे में फेसबुक पर लिखा। जिसके बाद यह बात मीडिया में आई।  पढ़े-लिखे मनुष्यों की सारी मानवीयता क्या सिर्फ मनुष्य के लिए ही हैं? ख़ैर पूरी तरह तो मनुष्यों के लिए भी नहीं। हमारी प्रजाति में तो गर्भवती स्त्री को भी मार देना कोई नई बात नहीं। हम तो गर्भ में ही आने वाले जिव को मारकर अपने आप को सभी समजते हैं।

इन पढ़े-लिखे लोगों से बेहतर तो वे आदिवासी हैं जो जंगलों को बचाने के लिए अपनी जान लगा देते हैं। जंगलों से प्रेम करना जानते हैं। जानवरों से प्रेम करना जानते हैं।  वह ख़बर ज़्यादा पुरानी नहीं हुई है जब अमेज़न के जंगल जले। इन जंगलों में जाने कितने जीव मरे होंगे। ऑस्ट्रेलिया में हज़ारों ऊँट मार दिए गए, यह कहकर कि वे ज़्यादा पानी पीते हैं। कितने ही जानवर मनुष्य के स्वार्थ की भेंट चढ़ते हैं। और एक हम है जो बड़ी बड़ी बाते ही करते हैं।

भारत में हाथियों की कुल संख्या 20000 से 25000 के बीच है। भारतीय हाथी को विलुप्तप्राय जाति के तौर पर वर्गीकृत किया गया है।फिर भी ऐसे समाचार आते रहते हैं। एक ऐसा जानवर जो किसी ज़माने में राजाओं की शान होता था आज अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा है। धरती का एक बुद्धिमान, समझदार याद्दाश्त में सबसे तेज़, तृणाहारी जीव, क्या बिगाड़ रहा है हमारा जो हम उसके साथ ऐसा सलूक कर रहे हैं? हम धर्म के नाम पर गणेश जी की पूजा करते हैं और कुछ लफंगे ऐसा क्र के धर्म, शिक्षा एवं संस्कार को पछाड़ने में जुड़े हैं।

कोरोना ऐसे ही कारणों से फेलता हैं। जब जब पर्कोयावरण में असंतुलन बढ़ेगा, ऐसी समस्याए  और वाइरस और शक्तिमान  होकर हमारे सामने आयेंगे, जिस से लड़ने के लिए n दवाई हैं,n हमारे पास कोई इलाज।कोरोना ने हम इंसानों का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है। यह बता दिया है कि हमने प्रकृति के दोहन में हर सीमा हमने लाँघ दी है। लेकिन अब भी हमें अकल नहीं आई। हमारी क्रूरता नहीं गई। मनुष्य इस धरती का सबसे क्रूर और स्वार्थी प्राणी गोषित हो चूका है। दुआ है, यह हथिनी इन निकृष्ट मनुष्यों के बीच फिर कभी जन्म ना ले। उसे सद्गति प्राप्त हो कुछ लोग विज्ञान की पढ़ाई पर ज्यादा जोर देते है.. देखिए आज के आधुनिक पढ़ाई का नतीज़ा.।

अगर इसे कहा जाए तो ये जधन्य अपराध ही हैं,एक साथ दो जीवो की हत्या का आरोप लगाना चाहिए और उस व्यक्ति को पकड़कर उस के मुह में भी पटाखे डाले जाय। कहा गई मेनका गाँधी, जिन्हों ने सर्कस से पशु पंखी हटाने पर आन्दोलन किए और अधिनियम पारित करवाया। अब फारेस्ट डिपार्टमेंट एफ.आई.आर क्र चुके होंगे। कुच्छ दिनों बाद वो बन्दे पकडे नहीं जाने पर कोर्ट में समर्पण करेंगे। कोर्ट उन्हें जमानत देगी। जहांतक मेरी जानकारी हैं, राष्ट्रिय प्राणी या पक्षी को मारने की जो सजा है, उस से दुगनी सजा के वो नपुंसक हकदार हैं।हर छोटी बात पर, करोड़ पतिओ के कुत्तो के लिए ट्विट करने वाली मेनका जी कुछ बोली हो या हम कडक कदम उठाएंगे ऐसा सिर्फ बोली हो वैसा अभीतक मेरी जानकारी के लिए अभी किसी ने नहीं कहा हैं। क्या इस हथनी को मरने के बाद इंसाफ मिलेगा,या केरल सरकार साम्यवादी विचार से ही आगे देखेगी?
सवाल ये नहीं हैं की हथनी मर गई,या उस के पेट में एक बच्चा था। सवाल जरा उल्टा हैं, अगर ये हथनी ने शहर में आकर किसी की जान ली होती तो सरकार मुआब्ना देती क्यों की वो तो मतदार हैं। हाथी थोड़े मतदान करते हैं,
इसीलिए  कहा गया हैं की अक्षर ज्ञान  के साथ आध्यात्मिक ज्ञान भी देना चाहिए। किसी नॅशनल न्यूज़ चेनल ने फटाफट न्यूज़ में इस समाचार को लिया हो और आप ने देखा हैं तो कहिएगा,उन्हें में धन्यवाद का मेल करना चाहूँगा। में ब्राह्मण हु, गणेश जी मेरे आराध्य हैं, में सभी जिव का सन्मान करता हु। कल डिजिटल जुम्बेश में मेने सिग्नेचर किए है की ह्थनी के दोषियों को सजा मिले। मगर यहा तो आज के महामारी के समय भी चेनलो में राजकीय लोग बताते हैं,क्या आज कल चेनल की डिबेट में स्वस्थ एवं वाइरस के जानकार होने चाहिए या केसरी,हरी,ब्लू और एनी रंग के सिम्बोल की पार्टी के प्रतिनिधि?आप भी आवश्यकता आने पर ऐसे लोगो को प्होक्तीद्वाने में मदद करे। आप कहेंगे हमारा क्या हैं? आप ने आप के आसपास कुत्ते या गधे की पूंछ पर पठाखे या डिब्बे बंधने वाले देखे होंगे। अगर ये अपराध हैं तो कुत्ते और गधो के लिए आवाज़ उठाने वाले और मुख्यत:मेनका गाँधी की हलचल का मुझे ख़ास इन्तजार रहेगा 

Wednesday, June 3, 2020

सोचेंगे हम सोचेंगे...नई राह को पाएंगे

गाना गाने में सहयोगी दो बाल कलाकार- रुचा एवं चारमी  

बच्चो के साथ काम करने का मजा कुछ और होता हैं । बच्चे सब से अलग हटकर सोचते हैं,हम जब किसी समस्या के समाधान के बारें में सोचते हैं तब हम विज्ञानं और पिजिक्स को सामने रखकर सोचते हैं! बच्चो में ऐसा नहीं होता  

समग्र देश से नवाचार भेजने वाले बच्चे और उनके सन्मान में हम कुछ जरा हटकर करना चाहते थे! हम ऐसा क्या करे, की बचचो को भी मजा आये और वो भी कुछ मजा कर  पाए। 

इस सोच ने हमे एक गाना तैयार करने का रास्ता दिखाया हमारे लिए कुच्छ सवाल थे ओ सब के सामने खड़े थे। हमारी पहली समस्या थी के समग्र देश के लिए अगर कोई गीत बनाना है तो इसे किस भाषा में बनाया जाएहमने इस गाने को हिंदी में बनाने का तय  किया मेने गीत के शब्द लिखे, मेरे साथ काम करने वाली हमारी टीम के सदस्यों को ये गाना सुनाया गया। सृष्टि ओर्गेनाइजेशन  के चेतन को ये लिखा हुआ गीत हमने भेजा  चेतन ने ये गाना पद्अमश्भीरी अनिल गुप्ता को दिखाया। श्री अनिल गुप्ता ने सुजाव दिया की इस में अब्दुल कलाम से जुदा कुछ जोड़ा जाए । अंतिम पद में इस लाइनों को भी जोड़ा गया  तक इस का कोम्पोजीशन तैयार नहीं किया था! ये काम भी हमे करना था! मेने इस गाने को कोम्पोज किया, अब इस गाने को रिकोर्ड करना था मेरे साथी,सहयोगी एवं मित्र श्री के.वि.पटेल (महेसाणा) ने इस के लिए तैयारी दिखाई। हमने महेसाणा में स्टूडियो बुक किया। हमारे साथ गाने वाले बच्चे जुड़े। बच्चो ने एक साथ मिलकर इस गाने को पांच घंटो में फाइनल रिकोर्ड कर दिया।आप को ये गाना सुनने में अवश्य मजा आएगा। में सभी साथियों का नाम इस लिए नहीं लिख रहा की,आप जो वीडियो देखेगे उस में सभी के नाम दिए गए ।हैं हमारी ' गमती निशाल ' में बच्चे इस गाने को रोज सुबह गा रहे हैं।  नई दिशा और नि सोच के लिए प्रोत्साहित करने वाला ये गीत आप सुने और इसे अवश्य फेलाए । आप इस गाने को सुनने एवं देखने के लिए करें

गीत सुनने के लिए क्लिक करे।

सोचेंगे हम सोचेंगे...

પપેટ શૉ.


પપેટ શૉ.
પપેટ એટ્લે શું?
પપેટના પ્રકાર કેટલા?
પપેટના પ્રકાર ક્યા કયા?
પપેટ  કેવી રીતે બનાવી શકાય?
આ અને આવી અનેક બાબતો અંગે જાણવા માટે આ કાર્યક્રમનું નિર્માણ થયું. #GIET દ્રારા ચાર કાર્યક્રમની શ્રેણી તૈયાર કરી દૂરદર્શન પર રજૂ થઈ હતી. આશરે 15 વર્ષ પહેલાં તૈયાર કરેલ કાર્યક્રમનો વિડીયો મને મળ્યો. આપને શેર કરું છું. કદાચ આપ ન ઓળખી શકો એવુંય બને.

પપેટના મુખ્ય પ્રકારમાં ગ્લોઝ પપેટ, ફિંગર પપેટ,સ્ટીક પપેટ અને લાકડાનાં દોરી વડે ચલાવવામાં આવતાં પપેટ.આ બધાં જ પ્રકારના પપેટ બનાવવા માટે શું જોઈએ અને શું કરીએ તો પપેટ બની શકે તે અંગે આ કાર્યક્રમમાં  આપ જોઈ શકશો. એ સમયે દૂરદર્શન ઉપર સવારે દસ થી અગિયાર વાગ્યા સુધી  શૈક્ષણિક કાર્યક્રમ આવતા હતાં. અમદાવાદ  132 ફૂટ રીંગ રોડ ઉપર હેલ્મેટ સર્કલ પાસે આવેલ ગુજરાત શૈક્ષણિક અને ટેકનોલોજી ભવન આવેલ છે. ત્યાં એક વિશાલ સ્ટુડિયો આવેલ છે. મારા મિત્ર અને મોટા ભાઈ એવા જયેશભાઈ પટેલ (રાજ વિદ્યાનગર પ્રાથમિક શાળા,કાંકરેજ. બનાસકાંઠા) સાથે અમે ચાર ભાગ બનાવ્યા. જો આ વિડીયો ઉપયોગી થયો હોય તો મને જાણ કરશો. બાકીના ત્રણ ભાગ હું શોધી રહ્યો છું. મળશે એટ્લે આપ ને અવશ્ય શેર કરીશ. ત્યાં સુધી જુઓ અને પપેટ બનાવતાં શીખો.આપ પણ આ કાર્યક્રમ જોઈ પપેટ બનાવતાં અને તેનો ઉપયોગ કરતાં શીખી શકો છો.

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