Monday, June 8, 2020

हम पढकर दिखलायेंगे


कोरोना....
कोविद :2019...
चीन से आया...दुनिया में फेला...
सब कुछ बांध हो गया, कहिए सारा भारत बंध !
कहिए की साडी दुनिया को लोक करदिया एक वयारासने!
मार्च से लेकर आज तक हमारी गमती निशाल बांध रही, हम कुछ कर भी नहीं सकते थे!बच्चे प्यारे होते हैं, जिन के कारण हम और हमारे घर चलते है, वो बच्चे क्यों प्यारे न हो? मगर आज से हमारी स्कुल शुरू होंगी! बच्चे अभी शायद नहीं आयेंगे! सबसे पहले हम घर घर जाकर बच्चो को और उन के माता पिता को अब से कैसे स्कुल चलेंगी इस के बारे में जानकारी देंगे बाद में बच्चो को स्कुल में लायेंगे!

हमारी गमती निशाल मे हम क्या करेंगे वो तो अब बच्चो से मिलकर तय करेंगे! आप के पास कोई सुजाव है तो आप हम तक इसे अवश्य पहुंचाए! में आशा रखता हूँ की हमारी संस्थान कुछ इस तरीके से आगे बढ़ेगी की बच्चो के स्वास्थ्य को हम अच्छे से संभाल पाए और उन से जुडकर शिक्षा का कार्य क्र पाए!

एक पुरानी याद भी आज आप से शेर क्र रहा हु, एक सुनहरी याद देखने के लिए यहाँ क्लिक करें!

Friday, June 5, 2020

7 स्किल फाउंडेशन की कार्य शाला


कौशल्य  की आज मांग हैं। 
जिन के पास कौशल्य है,वो कभी बेरोजगार नहीं रहते। पीछले दस सालो से हम ऐसे व्यक्तिओ को खोज रहे हैं,जिन के पास कोई ख़ास स्किल हो। छोटी छोटी कार्यशालाओ के माध्यम से हम इस काम में लोगो को नजदीक से देखते और समजते हैं। सोसियल मिडिया एवं एक दुसरे से अवगत होकर हम ऐसे स्किल्ड पर्सन से जुड़े रहे हैं। 7 स्किल फाउन्डेशन के चेरमेन श्री प्रवीन माली दोगुने उत्साह से इस काम को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर रहते हैं। ऐसी ही एक कार्यशाला का आयोजन हमने २७ जनवरी को किया। महेसाणा के पास नानी दाऊ स्थित उत्कर्ष विद्यालय में इसका आयोजन हुआ था। हमारे पार्टनर के तोर पे युवा ग्रीन फाउडेशान  सरे देश से कई सरे स्किल वाले साथी जुड़े थे।  गुजरात सहित देश के एनी १७ स्टेट से स्किल्ड पर्सन आये और उन के काम के बारें में उन्हों ने अपनी बात रखी।  

हम उन के बारें में एक किताब भी बनाने जा रहे हैं। जो की अगली कोंफ्र्न्स में विमोचित होगी।  इस कार्यशाला में हमारे साथी एवं पार्टनर बने 90.4 fm पालनपुर के साथी।  उन्हों ने प्रचार प्रसार में हमे अच्चा सहयोग दिया और हमारी कोंफ्र्न्स हम सबकी हो गई।  इस कोंफ्रंस के हेतु एवं हमारे कार्य को समाज ने के लिए आप इस वीडियो को पूरा देखे। इस के बारें में  जान ने के लिए यहाँ  यहाँ क्लिक करें  और हमारे काम के बारें में अवगत हो और दूसरो तक भी ये जानकारी फेलाए।  




विश्व पर्यावरण दिवस




आज विश्व पर्यावरण दिवस हैं। पर्यावरण में असंतुलन हमे परेशानी और समस्या के साथ नई बीमारी के सामने खड़ा करता हैं।पर्यावरण का संरक्षण एवं संवर्धन हमे आगे का जीवन आसान कर के देता हैं। एक समय था जब हम कम जरूरत के साथ जीते थे। आज की लाइफ स्टाइल ऐसी हो गई है कि जिस में हम हर पल पर्यावरण को नुकशान पहुंचाते आ रहे हैं। और इसी बजह से जागृति के लिए सारे विश्व में इसे आज के दिन मनाया जाता हैं।

हमारा खाना,पीना और जीवन जरूरत की सारी चीजें हमे पर्यावरण से मिलती हैं। आप ने महसूस किया होगा की पिछले कुछ सालों से भूकंप के झटके ज्यादा हो रहे हैं। कितनी क्षमता वाला भूकंप है वो महत्व पूर्ण नहीं हैं। मगर भुस्तर शास्त्रीयो का कहना हैं की एक छोटा सा भूकंप पानी के स्तर को 80 से 100 फिट नीचे ले जाता हैं, अब सवाल ये है कि भूकंप आते क्यों हैं। इस का एक मात्र जवाब हैं पर्यावरण में अस्थिरता । अस्थिरता क्यों हैं? जवाब हैं हमारी बेदारकारी और पर्यावरण के प्रति हमारी जाग्रति का अभाव।

सो हमे आज के दिन प्रयत्न करना है कि हम कम से कम पर्यावरण को नुकशान करेंगे। आज के दिन मेरे और आप के द्वारा लिया गया संकल्प हमे आगे की जिंदगी में सुविधा एवं स्वास्थ्य प्रदान करेगा। गुजरात में वलसाड के हमारे साथी श्रीमती मीना पटेल ने आज के दिन के लिए एक कविता लिखी हैं,मीना जी सरकारी पाठशाला में अध्यापिका हैं  आप को अवश्य पसंद आएगी.


मीना पटेल की रचना 

આજ કરો વાત,
વાયરા સંગે,
પાંચમી જૂન,
'પર્યાવરણ દિન ' ઉજવણી ની. ,
શાને જરૂર પડી ભાઈ ?
આપી ઈશ્વરે દુનિયા,
આપ્યા પ્રકૃતિ નાં 'ઋતુચક્ર ',
આપ્યો સજીવોના પોષણવૃદ્ધિ કરતો,
વાયુ હવા સ્વરૂપ.
પાણી નું બુંદ આપે છે જિંદગી,
જળ ન હોય તો ?
સળગી જાય દુનિયા જળ વગર.
સ્વાર્થી માણસે જરૂરિયાત પોષવા,
કર્યું ખંડન કુદરત નાં નિયમોનું.
સગવડતાની દોટ માં,
ભૂલ્યો માનવી બધું.
નદી -સમુદ્ર ને બનાવ્યા,
સાર્વજનિક ઉકરડા,
વૃક્ષ નું કર્યું પતન.
સાન ઠેકાણે લાવી ,
હવે સમજ્યો માનવી,
કુદરતી સંશાધનો,
કુદરતની અમૂલ્ય ભેટ.
હવે હર વર્ષે કરતો ઉજવણી,
પર્યાવરણ નાં પાપ ધોવા.... !
જોઈતું હોય જો જીવન બીજીવાર,
પ્રદુષણ મુક્ત રાખો પર્યાવરણ.



Thursday, June 4, 2020

पढ़े लिखो ने मजाक किया: गर्भवती हथनी की मौत


केरल,  शिक्षा  में समग्र देश में सबसे पहले नंबर पर आता हैं। अब सवाल ये हैं की क्या शिक्षा याने पढाई लिखाई और उस के ग्रेड को ही हम मानते हैं? केरल जैसे शिक्षित राज्य में एक गर्भवती हथिनी मल्लपुरम की सड़कों पर खाने की तलाश में निकलती है। क्यों की वहा अब जंगल ज्यादा नहीं हैं, n ही सर्कस के माध्यम से उन्हें खाने को मिल रहा हैं । समजिए की आज जो हालत गरीब एवं माध्यम वर्ग की है, वैसी ही हालत केरल में हाथियों की हैं । हमारी बात करे तो हम लोक डाउन के बाद शायद फंसे हुए हैं मगर ये हाथी जेसे विराट प्राणी तो जब से मेनका गाँधी ने सर्कस या खेल में प्राणियो के काम करने पर पाबंदी लगे हैं तबसे उन के यही हालत हैं । कुछ बेशर्म लोग गुमने गए थे, उन्हें एक भद्दा मजाक सुजा ।उन्होंने हथनी को  उसे अनन्नास ऑफर किया। वह हथनी उन मनुष्य पर भरोसा करके खा लेती है। वह नहीं जानती थी कि उसे पटाख़ों से भरा अनन्नास खिलाया जा रहा है। पटाख़े उसके मुँह में फटते हैं। उसका मुँह और जीभ बुरी तरह चोटिल हो जाते हैं।

बात यहाँ ख़त्म नहीं होती। 
अब हुआ ये की मुह में जख्म के कारण वो विवश थी । मुँह में हुए ज़ख्मों की वजह से वह कुछ खा नहीं पा रही थी। उस के पेट में एक बच्चा था। गर्भ के दौरान मनुष्भूय की भाति पशुओ को भी ज्खयादा खाना जरूरी हैं। उसे भूख अधिक लगती मगर मुह में पटाखे फूटने के कारण वो खा नहीं सकती थी। उस के लिए प्हैरवाही पीना भी संभव नहीं था।। उसे अपने पेट में पल रहे बच्चे का भी ख़याल रखना था। लेकिन मुँह में ज़ख्म की वजह से वह कुछ खा नहीं पाती है। घायल हथिनी भूख और दर्द से तड़पती हुई सड़कों पर भटकती रही। इसके बाद भी वह किसी भी मनुष्य को नुक़सान नहीं पहुँचाती है, कोई घर नहीं तोड़ती। पानी खोजते हुए वह नदी तक जा पहुँचती है। मुँह में जो आग महसूस हो रही होगी उसे बुझाने का यही उपाय उसे सूझा होगा। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को जब इस घटना के बारे में पता चलता है तो वे उसे पानी से बाहर लाने की कोशिश करते थे, लेकिन हथिनी को शायद समझ आ गया था कि उसका अंत निकट है। और कुछ घंटों बाद नदी में खड़े-खड़े ही उसने दम तोड़ दिया ।फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के जिस ऑफिसर के सामने यह घटना घटी उन्होंने दुःख और बेचैनी में इसके बारे में फेसबुक पर लिखा। जिसके बाद यह बात मीडिया में आई।  पढ़े-लिखे मनुष्यों की सारी मानवीयता क्या सिर्फ मनुष्य के लिए ही हैं? ख़ैर पूरी तरह तो मनुष्यों के लिए भी नहीं। हमारी प्रजाति में तो गर्भवती स्त्री को भी मार देना कोई नई बात नहीं। हम तो गर्भ में ही आने वाले जिव को मारकर अपने आप को सभी समजते हैं।

इन पढ़े-लिखे लोगों से बेहतर तो वे आदिवासी हैं जो जंगलों को बचाने के लिए अपनी जान लगा देते हैं। जंगलों से प्रेम करना जानते हैं। जानवरों से प्रेम करना जानते हैं।  वह ख़बर ज़्यादा पुरानी नहीं हुई है जब अमेज़न के जंगल जले। इन जंगलों में जाने कितने जीव मरे होंगे। ऑस्ट्रेलिया में हज़ारों ऊँट मार दिए गए, यह कहकर कि वे ज़्यादा पानी पीते हैं। कितने ही जानवर मनुष्य के स्वार्थ की भेंट चढ़ते हैं। और एक हम है जो बड़ी बड़ी बाते ही करते हैं।

भारत में हाथियों की कुल संख्या 20000 से 25000 के बीच है। भारतीय हाथी को विलुप्तप्राय जाति के तौर पर वर्गीकृत किया गया है।फिर भी ऐसे समाचार आते रहते हैं। एक ऐसा जानवर जो किसी ज़माने में राजाओं की शान होता था आज अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा है। धरती का एक बुद्धिमान, समझदार याद्दाश्त में सबसे तेज़, तृणाहारी जीव, क्या बिगाड़ रहा है हमारा जो हम उसके साथ ऐसा सलूक कर रहे हैं? हम धर्म के नाम पर गणेश जी की पूजा करते हैं और कुछ लफंगे ऐसा क्र के धर्म, शिक्षा एवं संस्कार को पछाड़ने में जुड़े हैं।

कोरोना ऐसे ही कारणों से फेलता हैं। जब जब पर्कोयावरण में असंतुलन बढ़ेगा, ऐसी समस्याए  और वाइरस और शक्तिमान  होकर हमारे सामने आयेंगे, जिस से लड़ने के लिए n दवाई हैं,n हमारे पास कोई इलाज।कोरोना ने हम इंसानों का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है। यह बता दिया है कि हमने प्रकृति के दोहन में हर सीमा हमने लाँघ दी है। लेकिन अब भी हमें अकल नहीं आई। हमारी क्रूरता नहीं गई। मनुष्य इस धरती का सबसे क्रूर और स्वार्थी प्राणी गोषित हो चूका है। दुआ है, यह हथिनी इन निकृष्ट मनुष्यों के बीच फिर कभी जन्म ना ले। उसे सद्गति प्राप्त हो कुछ लोग विज्ञान की पढ़ाई पर ज्यादा जोर देते है.. देखिए आज के आधुनिक पढ़ाई का नतीज़ा.।

अगर इसे कहा जाए तो ये जधन्य अपराध ही हैं,एक साथ दो जीवो की हत्या का आरोप लगाना चाहिए और उस व्यक्ति को पकड़कर उस के मुह में भी पटाखे डाले जाय। कहा गई मेनका गाँधी, जिन्हों ने सर्कस से पशु पंखी हटाने पर आन्दोलन किए और अधिनियम पारित करवाया। अब फारेस्ट डिपार्टमेंट एफ.आई.आर क्र चुके होंगे। कुच्छ दिनों बाद वो बन्दे पकडे नहीं जाने पर कोर्ट में समर्पण करेंगे। कोर्ट उन्हें जमानत देगी। जहांतक मेरी जानकारी हैं, राष्ट्रिय प्राणी या पक्षी को मारने की जो सजा है, उस से दुगनी सजा के वो नपुंसक हकदार हैं।हर छोटी बात पर, करोड़ पतिओ के कुत्तो के लिए ट्विट करने वाली मेनका जी कुछ बोली हो या हम कडक कदम उठाएंगे ऐसा सिर्फ बोली हो वैसा अभीतक मेरी जानकारी के लिए अभी किसी ने नहीं कहा हैं। क्या इस हथनी को मरने के बाद इंसाफ मिलेगा,या केरल सरकार साम्यवादी विचार से ही आगे देखेगी?
सवाल ये नहीं हैं की हथनी मर गई,या उस के पेट में एक बच्चा था। सवाल जरा उल्टा हैं, अगर ये हथनी ने शहर में आकर किसी की जान ली होती तो सरकार मुआब्ना देती क्यों की वो तो मतदार हैं। हाथी थोड़े मतदान करते हैं,
इसीलिए  कहा गया हैं की अक्षर ज्ञान  के साथ आध्यात्मिक ज्ञान भी देना चाहिए। किसी नॅशनल न्यूज़ चेनल ने फटाफट न्यूज़ में इस समाचार को लिया हो और आप ने देखा हैं तो कहिएगा,उन्हें में धन्यवाद का मेल करना चाहूँगा। में ब्राह्मण हु, गणेश जी मेरे आराध्य हैं, में सभी जिव का सन्मान करता हु। कल डिजिटल जुम्बेश में मेने सिग्नेचर किए है की ह्थनी के दोषियों को सजा मिले। मगर यहा तो आज के महामारी के समय भी चेनलो में राजकीय लोग बताते हैं,क्या आज कल चेनल की डिबेट में स्वस्थ एवं वाइरस के जानकार होने चाहिए या केसरी,हरी,ब्लू और एनी रंग के सिम्बोल की पार्टी के प्रतिनिधि?आप भी आवश्यकता आने पर ऐसे लोगो को प्होक्तीद्वाने में मदद करे। आप कहेंगे हमारा क्या हैं? आप ने आप के आसपास कुत्ते या गधे की पूंछ पर पठाखे या डिब्बे बंधने वाले देखे होंगे। अगर ये अपराध हैं तो कुत्ते और गधो के लिए आवाज़ उठाने वाले और मुख्यत:मेनका गाँधी की हलचल का मुझे ख़ास इन्तजार रहेगा 

Wednesday, June 3, 2020

सोचेंगे हम सोचेंगे...नई राह को पाएंगे

गाना गाने में सहयोगी दो बाल कलाकार- रुचा एवं चारमी  

बच्चो के साथ काम करने का मजा कुछ और होता हैं । बच्चे सब से अलग हटकर सोचते हैं,हम जब किसी समस्या के समाधान के बारें में सोचते हैं तब हम विज्ञानं और पिजिक्स को सामने रखकर सोचते हैं! बच्चो में ऐसा नहीं होता  

समग्र देश से नवाचार भेजने वाले बच्चे और उनके सन्मान में हम कुछ जरा हटकर करना चाहते थे! हम ऐसा क्या करे, की बचचो को भी मजा आये और वो भी कुछ मजा कर  पाए। 

इस सोच ने हमे एक गाना तैयार करने का रास्ता दिखाया हमारे लिए कुच्छ सवाल थे ओ सब के सामने खड़े थे। हमारी पहली समस्या थी के समग्र देश के लिए अगर कोई गीत बनाना है तो इसे किस भाषा में बनाया जाएहमने इस गाने को हिंदी में बनाने का तय  किया मेने गीत के शब्द लिखे, मेरे साथ काम करने वाली हमारी टीम के सदस्यों को ये गाना सुनाया गया। सृष्टि ओर्गेनाइजेशन  के चेतन को ये लिखा हुआ गीत हमने भेजा  चेतन ने ये गाना पद्अमश्भीरी अनिल गुप्ता को दिखाया। श्री अनिल गुप्ता ने सुजाव दिया की इस में अब्दुल कलाम से जुदा कुछ जोड़ा जाए । अंतिम पद में इस लाइनों को भी जोड़ा गया  तक इस का कोम्पोजीशन तैयार नहीं किया था! ये काम भी हमे करना था! मेने इस गाने को कोम्पोज किया, अब इस गाने को रिकोर्ड करना था मेरे साथी,सहयोगी एवं मित्र श्री के.वि.पटेल (महेसाणा) ने इस के लिए तैयारी दिखाई। हमने महेसाणा में स्टूडियो बुक किया। हमारे साथ गाने वाले बच्चे जुड़े। बच्चो ने एक साथ मिलकर इस गाने को पांच घंटो में फाइनल रिकोर्ड कर दिया।आप को ये गाना सुनने में अवश्य मजा आएगा। में सभी साथियों का नाम इस लिए नहीं लिख रहा की,आप जो वीडियो देखेगे उस में सभी के नाम दिए गए ।हैं हमारी ' गमती निशाल ' में बच्चे इस गाने को रोज सुबह गा रहे हैं।  नई दिशा और नि सोच के लिए प्रोत्साहित करने वाला ये गीत आप सुने और इसे अवश्य फेलाए । आप इस गाने को सुनने एवं देखने के लिए करें

गीत सुनने के लिए क्लिक करे।

सोचेंगे हम सोचेंगे...

પપેટ શૉ.


પપેટ શૉ.
પપેટ એટ્લે શું?
પપેટના પ્રકાર કેટલા?
પપેટના પ્રકાર ક્યા કયા?
પપેટ  કેવી રીતે બનાવી શકાય?
આ અને આવી અનેક બાબતો અંગે જાણવા માટે આ કાર્યક્રમનું નિર્માણ થયું. #GIET દ્રારા ચાર કાર્યક્રમની શ્રેણી તૈયાર કરી દૂરદર્શન પર રજૂ થઈ હતી. આશરે 15 વર્ષ પહેલાં તૈયાર કરેલ કાર્યક્રમનો વિડીયો મને મળ્યો. આપને શેર કરું છું. કદાચ આપ ન ઓળખી શકો એવુંય બને.

પપેટના મુખ્ય પ્રકારમાં ગ્લોઝ પપેટ, ફિંગર પપેટ,સ્ટીક પપેટ અને લાકડાનાં દોરી વડે ચલાવવામાં આવતાં પપેટ.આ બધાં જ પ્રકારના પપેટ બનાવવા માટે શું જોઈએ અને શું કરીએ તો પપેટ બની શકે તે અંગે આ કાર્યક્રમમાં  આપ જોઈ શકશો. એ સમયે દૂરદર્શન ઉપર સવારે દસ થી અગિયાર વાગ્યા સુધી  શૈક્ષણિક કાર્યક્રમ આવતા હતાં. અમદાવાદ  132 ફૂટ રીંગ રોડ ઉપર હેલ્મેટ સર્કલ પાસે આવેલ ગુજરાત શૈક્ષણિક અને ટેકનોલોજી ભવન આવેલ છે. ત્યાં એક વિશાલ સ્ટુડિયો આવેલ છે. મારા મિત્ર અને મોટા ભાઈ એવા જયેશભાઈ પટેલ (રાજ વિદ્યાનગર પ્રાથમિક શાળા,કાંકરેજ. બનાસકાંઠા) સાથે અમે ચાર ભાગ બનાવ્યા. જો આ વિડીયો ઉપયોગી થયો હોય તો મને જાણ કરશો. બાકીના ત્રણ ભાગ હું શોધી રહ્યો છું. મળશે એટ્લે આપ ને અવશ્ય શેર કરીશ. ત્યાં સુધી જુઓ અને પપેટ બનાવતાં શીખો.આપ પણ આ કાર્યક્રમ જોઈ પપેટ બનાવતાં અને તેનો ઉપયોગ કરતાં શીખી શકો છો.

ભાગ:1 જોવા માટેઅહીં ક્લિક કરો... 
ભાગ:2 જોવા માટે અહી ક્લિક કરો...

અકબર ભલે હો મહાન ....


ઍક રાજા.
એનું નામ અકબર.
અકબર ઍક મહાન રાજા.
ના... અહીં વાર્તા લખવાની નથી.


પણ...

કેમ અકબર કરતાં હું મહાન.
આ અંગે આપ આ સાંભળશો તો જ સમજાશે. મારી ઍક કવિતા. અનેક વખત જાહેરમાં બોલવાનો અવસર મળ્યો છે. થયુ એવું કે મારા મિત્ર કાંતિભાઈ પરમાર મારા ઘરે આવ્યાં. સાથે એમનાં બાળકો લાવ્યા. પછી કહે પેલી અકબર વાળી કવિતા કહો ને...! મે કહ્યુ ભાઇ અત્યારે આ નાનાં બાળકો ને એ શું સમજાય. હુ બોલ્યો એટ્લે તુરંત એ નાનો કિરણ આખી કવિતા મારી સામે બોલી ગયો. છેવટે મે બોલી એનું એણે રેકોર્ડિંગ કર્યું અને મને મોકલી આપ્યું. આ કવિતા અનેક વખત અનેક મારા વકતવ્યોમાં બોલવાનો મને  અવસર મળ્યો છે. મારાં અનેક બાળગીતો અને ખાસ કવિતા પૈકી એક આ કવિતા આપને ગમે તો મને જણાવશો. જો આપને પસંદ ન પડે તો ક્યાં અને શું સુધારો કરવો એ અંગે પણ જાણ કરશો તો ગમશે.

ભલે અકબર હો મહાન, એથી મહાન હું છું.
એ હતો નવ નવનો ચાલીસનો સરતાજ હું છું.

આ કવિતા સંભાળવા માટે અહીં ક્લિક કરો. 

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