Saturday, April 27, 2019

उत्तराखंड LBSANa ओर सोनियाजी


labasana#lAbAsAnAiAsiasIASINNOVATION BHAVESH PANDYA BHAVESHPANDYA16@BHAVESHPANDYA
 उत्तराखंड कुदरती संसाधन वाला राज्य। भौगोलिक रूप से देखा जाए तो दिक्कतों के साथ लोग खुशी से जी रहे हैं। आज भी यहाँ लोग पहाड़ो पे रहते हैं।

मसुरी स्थित लालबहादुर शात्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर में 3 दिन के लिए आना हुआ। भारतके नव नियुक्त IAS ऑफिसर के साथ यहाँ संवाद और गोष्टी करने का अवसर प्राप्त हुआ।
How is The josh....

labasana#lAbAsAnAiAsiasIASINNOVATION BHAVESH PANDYA BHAVESHPANDYA16@BHAVESHPANDYA

हमारे नावचार के बारे में सुना और अपने विचार रखे। 26 अप्रैल को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री त्रिबेन्द्रसिंह रावत को मिलनेका मौका मिला। हमे था कि सिर्फ मुख्यमंत्री महोदय मिलेंगे। मगर वहाँ तो शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी उपस्थित थे। उन्हों ने अपनी बातें ओर समस्या रखी। बहोत अच्छा लगा जब एक मुख्यमंत्री 2 घंटे तक अपने राज्यो के भिन्न भिन्न सवाल ओर समस्या के लिए इनोवेटर से चर्चा विमर्श कर रहे हैं।
डॉ. अनिल गुप्ता जी की अगुवाई में हमे उनके साथ बात करने की ओर मेरे भाषा शिक्षा के नवाचार को प्रस्तुत करनेका मौका मिला। सोनिया सूर्यवंशी जो कि एक शक्ति हैं। कुछ खास हैं।हम ने IIM में साथ काम किया हैं। आज उन्हें यहां काम करते देखा। वाह सोनिया जी....भाषा या शिक्षा से जुड़े उत्तराखंड के किसी भी काम में सहयोग करने को मैने सहमती दिखाई हैं।

शिक्षा में सबसे बड़ा सवाल हैं MGML ।हम जहाँ रुके थे इस कि बगल में एक सरकारी स्कूल हैं।यहाँ 2 महिला शिक्षक ओर 40 बच्चो के साथ 5 तक कि स्कूल हैं। मेने पूछा आप का कोई एक सवाल जो आप को सताता हो। उन्हों ने कहा सर कोई ऐसी व्यवस्था हो जो एक साथ पढ़ा पाए। 
में मन में इंटिग्रेड मल्टीग्रेड की सोच के साथ बच्चों ने मेरे साथ वहाँ एक गेम खेलने को अपनी मेडमे से कहा। हम खेले ओर थोड़ी देर में केला खाके निकल लिए।

जय हिंद:

अगर कुछ हो सके तो इतना होना चाहिए। उत्तराखंड में 1 से 5 अपने स्टेट के अलग किताब होने चाहिए। NCERT की किताब ओर उत्तराखंड की स्थानीय परिस्थिति के आधार पर ये होना चाहिए। कुछ सालों बाद परिणाम सामने से दिखेगा।

Sunday, April 21, 2019

માવતર માટે જ...


એકવાર ઘરનાં મુખ્ય વ્યકિતએ સૌને બોલાવી એકઠા કર્યા. ભેગા કર્યા એટલે કહે:" અહીં અભરાઇ પર ચકલીનું બચ્ચુ કાલ સાંજ સુધી મેં જીવતુ જોયુ અને આજે મરેલુ છે. કેમ ? "

સૌ વિચારમાં પડી ગયા. કોઇએ એવુ કાંઇ કર્યું નહોતું .છેવટે રહસ્ય બહાર આવ્યું. નાની દીદીએ કહયું કે બચ્ચુ ઇંડામાંથી બહાર નીકળવા પાંખો હલાવી કોશિશ કરતું હતું. મે ઇંડુ તોડી બહાર કાઢયું.

વડીલ કહે: 'તો આ જ તેનાં મોતનું કારણ.' બચ્ચાને પાંખો ફફડાવવા દેવું પડે, જેથી તેના શરીરમાંથી પ્રવાહી ઝરે અને તે હલકું થાય અને પાંખો મજબુતાઇ પકડશે અને કોચલામાંથી બહાર નીકળી તે ઊડી શકશે. તમે મદદ કરી એટલે પાંખો ફફડાવ્યા વગરનું અપરીપકવ બચ્ચુ બહાર આવ્યુ ને મરી ગયું. ઊડી શકવા પાંખો મજબૂત અને શરીર હલકું જરૂરી છે.  કઇંક આવું જ આપણા સૌનુ છે. મોટે ભાગે માબાપ સંતાનોને સંઘર્ષથી દૂર રાખતા હોય છે. સંતાનોને દરેક માબાપ બે વસ્તુ ભેટ આપે.

પરિશ્રમ અને સંઘર્ષ.

પાંખો ફફડાવવાની તક આપો. 

આજે કેટલાક એવું વિચારે છે કે આપણાં સંતાનને સહેજ પણ તકલીફ ન પડવી જોઇએ. યાદ રાખજો, આ વિચાર સંતાન માટે નુકશાનકારક છે. આવું તૈયાર તજનાર પછી કયાંથી શેકેલો પાપડ પણ ભાંગે !

સુવિધાથી જ જો શિક્ષણ પ્રાપ્ત થતું હોત તો ઋષિમુનીઓના આશ્રમ જંગલમાં નહિ પરંતુ રાજાઓના મહેલમાં હોત.

जय हिंद:

अगर पुस्तक के माध्यम से सबकुछ सीखा जाता हैं तो आज तक कोई गाली बोलने के लिए,सीखने के लिए कुछ भी किताब में नहीं लिखा गया हैं। तो जरा बताइए की गाली हमे कोंन सिखाता हैं। पानी बचाने और प्रदूषण कम करने हेतु बहोत कुछ लिखा जाता हैं। मगर...

Thursday, April 18, 2019

अनूठा प्यार...कुंवारी माता...


महाराष्ट्र के अहमदनगर से हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसके बारे में जानकर आप हैरान हो जाएंगे. दरअसल यहां रहने वाली एक महिला की शादी को पांच साल से भी ज्यादा वक्त हो गया है लेकिन महिला ने इन पांच सालों में कभी भी अपने पति से शारीरिक संबंध नहीं बनाए हैं. हैरानी वाली बात तो यह है कि बिना सम्बन्ध बनाए ही ये महिला गर्भवती हुई. जी हां… महिला ने पिछले महीने ही एक बेटी को जन्म भी दिया है.
सूत्रों की माने तो महिला की उम्र 30 वर्ष है और उनका नाम रेवती है. बता दें रेवती की शादी साल 2013 में हुई थी. उनके पति चिन्मय से उनकी मुलाकात ऑनलाइन हुई थी, और उस समय वह अमेरिका में थे. शादी करने के बाद दोनों ही भारत से अमेरिका रहने चले गए थे. वहां शादी की पहली रात ही रेवती ने अपने पति को अपनी स्थिति के बारे में बता दिया. रेवती के पति को भी इससे कोई परेशानी नहीं थी. आपको बता दें रेवती वैजिनिज्म्स नाम की एक मेडिकल कंडीशन से जूझ रही हैं. इस कंडीशन में अपने पति के साथ शारीरिक संबंध बना पाना उनके लिए लगभग नामुमकिन है.

शादी के बाद रेवती ने डॉक्टरों को दिखाया और फिर उन्हें इस बारे में पता चला कि वो वैजिनिज्म्स से जूझ रही हैं. इस वजह से वह आज तक ‘वर्जिन’ ही हैं. हालांकि आईवीएफ के जरिए वो गर्भवती होने में कामयाब रहीं और पिछले महीने 9 फरवरी को उन्होंने नॉर्मल डिलीवरी से एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया. इस बारे में रेवती का कहना है कि, ‘उनकी शादी को पांच साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन उन्होंने आज तक अपने पति से संबंध नहीं बनाए हैं, लेकिन बच्चे के जन्म के बाद उन्हें ऐसा लगता है कि वो पहली बार अब अपने पति से संबंध बना पाएंगी.’ बात जो भी हैं, मगर विज्ञान आगे बढ़ गया हैं।

जय हिंद:

आज से पहले कुछ साल पहले मेने रेखाबा सरवैया के बारे में लिखा था। वो गुजरात की पहली और भारत की तीसरी कुँवारी माता बनी थी। उन के बारे में जानने के लिए रेखाबा सरवैया क्लिक करें।


Tuesday, April 16, 2019

बर्ड फिडर में नवाचार

हरे रंग की प्लेट


इनोवेशन क्या हैं।
इनोवेशन कैसे होते हैं।
मुजे अगर कुछ सोचना हैं तो किस ओर सोचु? आए और ऐसे अनेक सवाल होते हैं। ऐसे ही सवालों के लिए एक बात यहाँ में रखता हूँ।

संस्थान का नाम:
युवा ग्रीन फाउंडेशन,
खरसदा : महेसाणा

संस्थान का नाम:
कावेरी दे केर स्कूल, महेसाणा।


आप कहेंगे एक स्कूल और एक फाउंडेशन में क्या नवाचार हैं। बात ये हैं कि इन लोगोने पिछले साल 40.000 बर्ड फीडर दिए थे। उनकी लागत 38 रुपया थी,मगर वो सबको फ्री में दे रहे थे। अगर परिणाम लक्षी कार्यकर के लिए अगर कहे तो वो किये गए काम को पीछे मुड़कर देखते हैं। युवाग्रीन फाउंडेशन के सहयोगी एवं मार्गदर्शक श्री के.वी.पटेल ने इसे देखा। उनके लिए पिछले वर्ष के काम का परिणाम ओर गलतियां देखनेका यह समय था।उन्होंने देखा कि प्लास्टिक से बने पिछले साल का बर्ड फीडर थे वो 20%से ज्यादा लोगो के पास नहीं थे। वो टूट चुके थे या  कुडे के समानमें थे। अब सवाल ये था कि प्लास्टिक के इस्तेमाल ओर डिजाइन के कारण अगर उसका उपयोग नहीं हो रहा हैं तो वो सिर्फ प्लास्टिक हैं।प्लास्टिक पर्यावरण को नुकसान पहुंचता हैं। अगर ये पूरा प्लास्टिक स्पेरो या किसी पक्षी के लिए काममे नहीं हैं तो वो सिर्फ प्लास्टिक हैं। हर दाई में 70 ग्राम प्लास्टिक से बनी चीज। श्री के.वी.पटेल और KDS के डायरेक्टर श्रीमती जयश्रीजी पटेल ने साथ मिलकर सोचा। उन्होंने ऐसी डिजाइन के बारे में सोचा जो की एक्सट्रा प्लास्टिक का उपयोग हो और हमारी ओर से कमसे कम प्लास्टिक लगे। बस,क्या था। उन्हें ने एक ऐसा तरीका खोज लिया। उन्होंने इस साल के लिए जो मॉडल बनवाया उस में उन्होंने सिर्फ एक डिजाइन वाली प्लेट ही दी। उसमें दाने भरने के लिए बोटक व्यक्ति खुद की लगाएगा। उसका अर्थ ये हुआ की जितनी प्लेट वो देंगे,प्लास्टिक की उतनी बोटल स्थानीय प्रदूषण फैलाने से दूर रहेगी। उनका उपयोग पर्यावरण के प्रदूषण को कुछ हद तक बढने से  रुकेगा।
इस विचार को आप सांजे ओर ऐसा कुछ नया करे। सिर्फ नया नहीं, पुराने विचार में भी कुछ हम नया सोचे तो हो सकता हैं।

जय हिंद:

श्री के.वी.पटेल को वर्ष 2017 में राष्टपति भवन में आयोजित FOIN में विशेष निमंत्रण प्राप्त करने वाले शिक्षक हैं।उन्हें सृष्टि पुरस्कार भी मिल चुका हैं। शिक्षा से जुड़े नवाचार के लिए वो अपनी पहचान के साथ काम कर रहे हैं।

Sunday, April 14, 2019

आज मेने खुद से बात की...

आज मेने दोपहर खुद से बात की। मेने माना कि खुद को बढ़ती उम्र के साथ स्वीकारना मुजे  तनावमुक्त जीवन देता है। आप के काम के लिए आप को लोग याद करेंगे,आप की उम्र के लिए या ख़ूबसूरति के लिए नहीं। अगर आप खुद अकेले इतना सब कर पाए हो तो जो बाकी हैं, तुम खुद ही कर लोगे। किसी के ऊपर निर्भर न रहो। आप में बहोत लोग विश्वास कर चुके हैं, तुम खुद पे यकीन रखो।

मेने खुदसे कहा उम्र एक अलग तरह की खूबसूरती लेकर आती है, उसका आनंद लेने के बजाय दूसरी अड़चन को मुजे नहीं छूना हैं।

बच्चों की तरह अब में खिलखिलाउंगा, अच्छा माहौल रखूंगा। थोड़ी देर, शायद पांच मिनिट में शीशे में दिखते हुए अपने अस्तित्व को स्वीकारते हुए बोला 'अब मेरा भी कुछ करूँ'। 

कोई भी क्रीम मुजे गोरा नहीं बनाती, कोई शैम्पू बाल झड़ने से नहीं रोकता, मेरे बाल नहीं जड़ते हैं मगर मुजे मालूम हैं कि कोई तेल बाल नहीं उगाता,  कोई साबुन आपको बच्चों जैसी स्किन नहीं देता। जो हैं वो वैसेही रहेगा,मुजे भी बदलना जरूरी नहीं हैं।

जय गणेश...
जो होता हैं।
ये सब कुदरती होता है। 
आज जो हुआ अच्छा हुआ।
मेने नई सोचके साथ मेरे नए घर में प्रवेश किया। जो जनम से खुद के पास हैं वैसी पुरानी मशीन को maintain करके बढ़िया चला तो सकते हैं, पर उसे हम नई नहीं कर सकते। कोई बदलाव चाहे तो तुम खुद बदलो... क्यो? हर कोई सच्चा बदलाव लाने को समर्थ नहीं, न हमे किसी के लिए ऐसी आस रखके अपना खुदका यूनिक छोड़ना चाहिए। जो तुम्हे बदलाव के साथ स्वीकारने को तैयार हैं, वो सौदागर होता हैं।

कोई बात नहीं अगर आपकी नाक मोटी है तो, कोई बात नही आपकी आंखें छोटी हैं तो, कोई बात नहीं अगर आप गोरे नही हैं।मेरी सुंदरता मेरा जीवन होना चाहिए। मेने कितनो के जीवन मे खुशी फैलाई हैं। भले कुछ खाता हूं, किसी के जीवन के हर खुशी के मौकों को नहीं में नहीं चबाता।भले सामने वाले कि होंठों की shape perfect हैं और आप के नहीं हैं, कोई बात नहीं। हमे हमारे जीबन से परफेक्ट बन के दिखाना हैं। जो भी आज मेरे आसपास हैं, ज्यादातर अपने काम को निपटा के भूलने वाले ज्यादा हैं। कदर शायद कम करेंगे, मगर जब जब उन की सिद्धियों की बात चलेगी, न चाहते हुए हमारी बात होगी। में ऐसा नहीं कि कोई भी हमे जड़ से उखाड़ पाए। गब्बर का बाप 'खुद गब्बर' हूं।
दूसरों से मुजे वाहवाही लूटने के लिए सुंदर दिखने से ज्यादा ज़रूरी है, मेरे काम और सन्मान को बनाये रखकर खुद की सुंदरता को महसूस करना ओर समय को उत्तम तरीके से खर्च करना।

हर बच्चा सुंदर इसलिये दिखता है क्योंकि वो छल कपट से परे मासूम होता है। बडे़ होने पर जब हम छल व कपट से जीवन जीने लगते है तो वो मासूमियत खो देते हैं, बहोत दिनों पहले जब में ओर मेरी बेटी ऋचा हम एठोर गणेशजी के दर्शन करने गए तो मैने उसे कहा 'बेटे, मासूमियत से हमे जीना हैं।' बस, मुजे मेरी मासूमियत ओर मेरे इरादों पर भरोसा हैं। खुद पे भरोसा रखो। जहाँ तुम्हे जरूरत हैं, वहाँ अविश्वास आएगा। आप के ऊपर निर्भर आप पे विश्वास करने खड़े हैं,मगर आप कही और खोए हैं। आप की बच्ची बीमार हैं,आप बाहर है तो आप की फिकर कम करने के लिए वो नहीं बताते। अगर आप किसी को कहेंगे कि ऐसा हुआ। परिवार ने नहीं बताया।तब वो डॉक्टर का रिपोर्ट,फोटो मांगेंगे तो मतलब ये होता हैं कि आप आज तक गलत सोच पाले हुए हैं।जो आप के हैं, आप के पीछे हैं। जो साथ या सामने हैं, वो आप को पिछड़ा सकते हैं। 

मुजे आज क्यो...
ऐसे बहोत विचार आये...

अरे...

ये खाओ, वो मत खाओ 
ठंडा खाओ , गर्म पीयो, 
ये पीओ, ये नहीं पियकरों...
कपाल भाती करो,
सलून में जाओ, 
सवेरे नीम्बू पीयो ,
रात को दूध पीयो,
ज़ोर से सांस लो, 
लंबी सांस लो 
दाहिने से सोइये ,
बायें से उठिये,
हरी सब्जी खाओ, 
दाल में प्रोटीन है,
दाल से क्रिएटिनिन बढ़ जाएगा।

जो कुछ नहीं मानते,वो बहोत कुछ मनवाने का आग्रह रखते हैं। हम मानेगे तो भी साले यकीन नहीं करेंगे। हर नुकसान के लिए आप को ही जिम्मेदार ठहराएंगे।

अरे! अपन मरने के लिये जन्म लेते हैं, कभी ना कभी तो मरना है ही, अभी तक बाज़ार में अमृत बिकना शुरू नहीं हुआ। बस, हर चीज़ सही मात्रा में खाइये, हर वो चीज़ थोड़ी-थोड़ी जो आपको अच्छी लगती है। जो अच्छा न लगे उस से दूर रहें।

अब से में...

टहलने जा पाऊंगा, 
लाइट कसरत करूँगा।  
मेरे ही काम में व्यस्त रहूंगा।,  
खुश रहूंगा ,ओर खिशियो को फैलाने की कोशिश करूंगा। शायद में भूल रहा हूँ। मुजे मेरे ख्वाब पूरे करने हैं, कुछ लोगो के साथ रहने से मालूम पड़ता हैं कि उनके ख्वाब बदलते हैं। जैसे मेरी ऋचा... मेरा ख्वाब आज तक नहीं बदला। में कोशिश करता  रहूँगा मेरी जिंदगी जीने की।

फरकडी:

साहिल मेरी छत हैं, परवेज मेरा आकाश। साहिल लुधियानवी की बीबी ओर परवेज जी की माशूका अमृता प्रीतम ने ये किसी पत्रकार को सवाल के जवाब में ऐसा कहा था। मेंने पहले भी इस वाकये के बारेमें, अमृता प्रीतम के बारे में...  लिखा हैं।

Tuesday, April 9, 2019

होना चाहिए....




होना चाहिए एक साथी
ऐसा भी ज़िन्दगी मे,

जो अलग हो दायरों से
सामाजिक रिवाज़ों से।

बांट सके हर वख्त
जिससे अपना अंतर्मन,

ये ख़्याल ही न आये
की वो सखी है या सखा।

जो समझे आपको
आपकी ही तरह,

मिलकर जिससे लगे
जैसे हो गयी हो।

" ख़ुद से ही ख़ुद की मुलाकात"

Thursday, April 4, 2019

दशरथ मांझी सलाम...सलाम...



दशरथ मांझी एक साहसी या बॉडी बिल्डर नहीं थे। वह भारत में एक मजदूर थे। मांझी की पत्नी को चिकित्सा सुविधा की कमी के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी क्योंकि निकटतम अस्पताल गाँव से 70 किमी दूर था। गांव और शहर के बीच एक पहाड़ था जिसकी वजह से लोगों को घूमकर जाना पड़ता था। इस हादसे के बाद मांझी नहीं चाहते थे कि कोई अन्य व्यक्ति भी इसी तरह के दुर्भाग्य का शिकार हो, इसलिए, उसने पहाड़ के बीच एक मार्ग बनाया, जो 9.1 मीटर चौड़ा, 7.6 मीटर गहरा और 110 मीटर लंबा था। मांझी ने ऐसा करने के लिए लगभग 22 वर्षों तक प्रत्येक दिन और रात काम किया और गया क्षेत्र के वजीरगंज और अत्री क्षेत्रों के बीच की दूरी 75 किमी से घटाकर 1 किमी कर दी।
ऐसे ही लोग होते हैं, जो अपने विचार को अमल करते समय और कुछ नहीं देखते या किसी की नहीं सुनते।भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सन्मानित किया हैं।

सरकुम:
मेने जो सोचा हैं,
में वो कर रहा हु।
जो मेने ख्वाब देखे हैं,
इस के लिए में जागता हूं।
मेने जो वचन दिए हैं, उसे में निभाता रहा हूँ। क्योकी मेरा मानना हैं कि में जिन के लिए भी जो कुछ करू उस में वो अपने नहीं मेरे नजरिये से देखे।