Monday, December 24, 2018

बेरहमी के उदाहरण...



दोस्तों इतिहास में कई ऐसे योद्धा हुए है जो दिल के बहुत ही उदार इंसान थे। जिनके मरने के बाद भी लोग उनको याद करते रहे हैं। लेकिन इसके विपरित कई सारे ऐसे भी क्रूर यौद्धा हुए हैं। जिनको खून की नदिया बहाना पसंद था। जिनके सामने जाने मात्र से ही इंसान की डरकर जान निकल जाती थी। इन योद्धाओं के इशारों पर कई लोगों का कत्ल कर दिया जाता था। आज आपको इस आर्टिकल के माध्यम से ऐसे कुछ लोगों के बारे में बता रहे है। जिनके पास रहम नाम की कोई चीज नहीं थी।


1-तैमूर लंग – तैमूर लंगड़े के बारे में बता दे कि वह किसी राजवंश की पैदाइश नहीं था। लेकिन इस लंगड़े ने अपनी तलवार के दम पर भारत सहित दक्षिण, पश्चिम और मध्य एशिया पर राज किया था। इसके बारे मे कहा जाता है कि इस लगंड़े ने दिल्ली में एक ही दिन मे लाखों लोगों को मार दिया था। लोग इसके सामने आने से भी कतराते थे।


2-गायक जूलियस सीज़र – यह शख्स कहने मात्र को तो एक गायक था। लेकिन इसकी क्रूरता इतनी थी कि इसने अपने आप को भगवान घोषित कर दिया था। कहा जाता है कि जिसने में भी इसको भगवान मानने से इंकार कर दिया। इसने उन लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी थी। कहा जाता है कि यह इतना क्रूर था। कि लोगों को शेर के पिंजरे में डलवा देता था। इसने चार साल तक शासन किया था। इस दौरान इसन  लाखों लोगों की हत्या कर दी थी।  


3-चंगेज खान –  दोस्तों अगर सबसे क्रूर शासक की बात कर तो  चंगेज खान का नाम सबसे पहले आता है। यह चंगेज खान मंगोलिया का महान योद्धा था। जिसने अपनी तलवार के दम पर पूरे एशिया पर कब्जा कर लिया था। यह भारत में भी आया था। लेकिन सिंधु नदी के तट से दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिस के द्वारा हार स्वीकार करने पर वापस लौट गया। कहा जाता है कि इसने अपने जीवन काल में लाखों लोगों को मौत की नींद सुलाई थी।

सरकुम:
बे रहमी से नफरत हो सकती हैं, प्यार नहीं।ऐसे शाशक जिन्हें हम सिर्फ शाशक के नाम से जानते हैं। ऐसे सशक्त लोगो की जरूरत हैं जो ऐसे सामने आए और अपने अधिकार मांगे।

Sunday, December 23, 2018

एक बच्चे की बात...


आपने हंसमुख लोग तो बहुत देखे होंगे। बात-बात पर हंसने वाले लोग भी देखे होंगे, लेकिन अगर आपके सामने कोई लगातार बस हंसता ही रहे तो? यकीनन आप उसे पागल बोलेंगे। लेकिन आज जो बात हम आपको बता रहे हैं, ये वाकया बहुत अलग है। इंग्लैंड की खबर ने सबके होश उड़ा दिए हैं। यहां एक 2 साल के बच्चे को आ रहा दौरा हर किसी के दिमाग को सन्न कर रहा है। चलिए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला। 

इंग्लैंड के सोमरसेट में एक बेहद ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां 2 साल के बच्चे के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। यहां बच्चे के लगातार हंसने का मामला सामने आया है। बच्चे की हंसी पिछले 17 घंटे से नहीं रूक रही थी। बच्चे को 17 घंटे तक लगातार हंसता हुआ देख माता-पिता डर गए। उन्होंने बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाना जरूरी समझा।

माता-पिता जब बच्चे को डॉक्टर के पास लेकर गए तो सामने आई वजह चौंकाने वाली थी। दरअसल, डॉक्टर ने बच्चे का सिटी स्कैन किया, सिटी स्कैन से पता चला कि वह ब्रेन ट्यूमर का शिकार है। ब्रेन में ट्यूमर होने की वजह से उसके दिमाग में लगातार हलचल पैदा हो रही थी। इसी वजह से बच्चा पिछले 17 घंटे से लगातार हंसते ही जा रहा था।
डॉक्टर का कहना है कि ऐसे केस बहुत कम देखने को मिलते हैं। इससे जान जाने का भी खतरा होता है। अगर इस ट्यूमर को जल्द से जल्द नहीं हटाया गया तो बच्चे की जान को भी खतरा हो सकता है। हालांकि बच्चे का ट्यूमर शुरूआती स्टेज में था इसलिए ऑपरेशन के जरिए इसे बाहर निकाल लिया गया। अब बच्चा पूरी तरह से सुरक्षित है और उसे हंसने के दौरे नहीं आते हैं।

सरकुम:
कुछ दर्द ऐसे जिसे निभाना पड़ता हैं।
कुछ दर्द ऐसे जिसे निभाने में ही खुशी होती हैं।

Friday, December 21, 2018

सुंदरता या...



नमस्कार दोस्तों आप सभी का एक बार फिर से मेरे लेख में स्वागत है, तो दोस्तों जैसे की आप सभी तो जानते ही है की इस दुनिया में कितने प्रकार के लोग रहते है और हर एक प्रकार के लोग जो है उनका रहन सेहन और सभी कुछ अलग अलग होता है. तो आज जो तस्वीरें में आप सभी के सामने ले कर आया हुं उन्हें देखकर आप सभी की समझ में भी आ जायेगा की जैसे आज के जमाने में महिलाये मेकअप करती है और अपने आप को सुंदर सोचती है तो वैसे ही दुनिया में कई ऐसी प्रथाएं है जिन्हें अगर कोई देख ले तो हैरान ही रह जाए ये देखकर की महिलाओ को सुंदर दिखने के लिए क्या क्या करना पड़ता है. चलिए दोस्तों तो शुरू करते है और दिखाते है आपको कुछ ऐसी ही तस्वीरें.


दोस्तों अापने लोगों को देखा होगा जो की ऐसी लड़की ढूंढते है जो की सुंदर हो और सुंदर से उनका अभीपराये होता है की गोरी हो और सुंदर हो देखने में. पर हर जगह ऐसा नहीं होता है, इंडोनेशिया में एक ऐसी जगह है जहाँ पर आज भी महिलाओ की सुंदरता को उनके दाँतो के हिसाब से आँका जाता है. जिस महिला के दाँत जितना नोकीले होंगे वो महिला उतनी ही सुंदर. और अपने दाँतो को ऐसे करवाने के लिए महिलाओ को गांव में ही किसी ऐसे आदमी के पास जाना पड़ता है जो की ये काम करता हो. और इस काम को किसी डॉक्टर द्वारा ढंग से नहीं बल्कि एक तेज़ धार हथियार और हथोड़े से किया जाता है. अभी आप खुद ही अंदाजा लगा लो की इसमें कितनी ज्यादा तकलीफ़ होती होगी.

आज भी पतली कमर की औरतों को ज्यादा सुंदर माना जाता है मतलब की औरत की सुंदरता का आकलन जिस आधार पर किया जाता है ये उसका एक हम हिसा माना जाता है. पर क्या आप में से कोई ये जानता है की पहले के समय में औरतों को पतली कमर पाने के लिए क्या क्या करना पड़ता था. कुछ महिलाये तो ऐसी थी जिन्होंने एक ऐसे कपड़े को हमेशा पहन कर रखा होता था जिससे की उनकी कमर उस जैसी हो जाए और जैसी शेप वो अपनी कमर को देना चाहती है वैसी हो जाए. में तो ये सोच भी नहीं सकता हुं की महिला को अपना जीवन जीने में ऐसे में कितनी ज्यादा दिक्कत आती होगी. सास भी लेना मुश्किल हो जाता होगा ऐसे में महिला का.

दोस्तों सबसे ज्यादा दर्दनाक जो है वो यही है, चीन में एक ऐसा समय था जब ऐसी महिलाओ को सुंदर का दर्जा दिया जाता था जिनके पैर छोटे हो और ऐसे आगे से बिलकुल ही पतले. और इसे चायनीज़ फुट बाइंडिंग कहाँ जाता था. और आप कभी अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते हो की ऐसे जूते पहन पहन कर महिलाओ के पैरो का हाल क्या हो जाता था. अगर आप इंटरनेट के ऊपर सर्च करोगे और देखोगे, तो आपको समझ आएगा की ऐसे जूते पहनने के चक्कर में महिलाओ के पैर ऐसे हो जाते थे जिसका कोई हिसाब ही नहीं है. मुझे तो देखकर ही डर लग गया है था जब मैंने इनके पैर देखे थे. में तो ये सोच रहा था की जिस महिला के साथ ऐसा हुंआ होगा उसका हाल क्या हुंआ होगा.


हर लड़की का एक सपना होता है की उसका राजकुमार आएगा और उसे ब्याह कर अपने घर ले जायेगा. पर अगर लड़की सुंदर ना हुयी तो फिर उसे अच्छा लड़का कभी भी नहीं मिलता है. तो ऐसे में जो होता है वो तो आप सभी के सामने ही है, म्यांमार में एक ऐसा स्थान है जहाँ पर लड़कियों की सुंदरता का आकलन उनकी गर्दन की लम्बाई देखकर लगाया जाता है. जितनी लम्बी गर्दन होगी उतनी ही लड़की सुंदर होगी. और अपनी गर्दन को लम्बी करने के लिए यहाँ पर महिलाये हर समय अपनी गर्दन में ऐसे स्प्रिंग डाल कर रखती है ताकि उनकी गर्दन लम्बी हो जाए. और मर्दों की इस इच्छा को पूरी करने के लिए ये महिलाये अपने आप को हर दिन इतना कष्ट में रखती है. मुझे तो देखकर ही बुरा लग रहा है तो जिसके साथ होता होगा ऐसा उसका हाल क्या होता होगा.

दोस्तों दुनिया में भी कैसे कैसे लोग रहते है ये तो सोचने की बात है, पर कुछ लोग तो ऐसे है जिनकी ये प्रथाएं तो बिलकुल ही अलग है. जैसे की अफ्रीका में एक ऐसी जगह है जहाँ पर ऐसे लोग रहते है जो की अपने होठ के आकार से आकलन करते है की वो कितने सुंदर है. जैसे की आप देख रहे है इस महिला को, इस महिला की शादी जब होगी तो इसके होंठ के बीच में ये जो बड़ा सा गोला लटका रखा है इसी के आधार पर होगी की उसके होंठ में कितना बड़ा गेप है. अभी आप बताओ दोस्तों की आपके साथ ऐसा हो तो आपको कैसा फील होगा. ये तो अच्छा है हम भारत में पैदा हुंए हुंए है नहीं तो ऐसी चीज़े तो हम लोग झेल ही नहीं सकते है.

सरकुम:

प्यार विचारो से ओर उद्देश्य के साथ हो तो प्यार हैं।अगर शारीरिक सुंदरता का मोह हैं तो कभी आप विश्वास को नहीं जीत सकते।

Thursday, December 20, 2018

जीवंत जीवन ऐसा होता हैं...

बच्चे को माता-पिता ने राक्षस समझ कर छोड़ दिया था,एक महिला ने सहारा दिया,फिर क्या हुआ पढ़े।

नाइजीरिया के एक गांव में एक 2 साल का लड़का बिलकुल हड्डियों के ढ़ांचे में तब्दील हो गया था. उसके माता-पिता ने उसे अशुम, राक्षस मानकर सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया था. माता -पीता के अंधविश्वास की सज़ा एक मासूम बच्चे को यह मिली की वह बच्चा भूख के मारे कचराकुंडियों जो कुछ मिल जाता था खा लेता और अपनी भूख मिटाने की कोशिश करता रहता था.

नाइजेरिया में मानवतावादी संघठन में काम करनेवाली अंजा रिंगरेन लोवेन ने इस बच्चे (होप) को जब देखा तो भूख और प्यास से बेताब था. अंजा ने उसे पानी पिलाया और खाना खिलाया. फिर उसे अस्पताल ले गई उसका इलाज करवाया. बच्चे के शरीर में कीड़े पड़ चुके थे.

अंजा ने फिर उसे अपने 'अफ्रीकन चिल्ड्रेन्स ऐड एजुकेशन एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन' द्वारा चलायें जा रहे बाल विकास केंद्र में शामिल किया और अब वह वहां दूसरे बच्चों के साथ खुश और स्वस्थ हैं. अंजा ने उसे स्कूल में भी दाखिल कर दिया हैं और वह अब पढ़ाई कर रहा हैं.


अंजा ने स्वंय एक नाइजेरियाई व्यक्ति से विवाह किया हैं और उनको एक लड़का हैं. आज दुनिया में चारों तरफ मानवता की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं ऐसे में अंजा जैसे कुछ लोग मानवता के लिए उम्मीद का किरण साबित होते हैं. ऐसे लोगों से हर किसी ने सबक लेने के ज़रूरत हैं।

सरकुम:

क्या हम ऐसे बच्चों के लिए कुछ कर सकते हैं? सोचा तो हैं, ऐसा काम कुछ हो भी रहा हैं। इसे फैलाने के लिए हमारे पास पैसा नहीं हैं। आज 14 बच्चे ऐसे हमारे पास हैं। पेसो के बगैर समस्या कम नहीं होती। कभी कभी बढ़ती हैं।

Wednesday, December 19, 2018

एक IDEA...


में रोजाना 300 से 400 Km यात्रा करता हूँ।कम्पनी ओर बात करने हेतु में यात्रिओ को गाड़ी में बिठाता हु। ज्यादातर लोग गाड़ी में बंध कांच के साथ यात्रा कर सकते हैं। मगर कुछ लोगो को दिक्कत होती है।  यात्रा के दौरान गाड़ी में उल्टी होना आजकल आम बात हो गई है। पहले से ज्यादा इस समस्या के बढ़ने की वजह है हमारा खानपान और हाल ही में बढ़ा प्रदुषण और गाड़ी में होने वाली घुटन।

मुजे बन्ध कांच की आदत हैं।
कुछ लोगो को आदत नहीं होती हैं।
आपको पता ही है कि उल्टी होने की समस्या के कारण बहुत से लोग सर्दियों व गर्मियों में चाहते हुए भी वातानुकूलित बसों या गाड़ियों में सफर नहीं कर सकते, क्योंकि गाड़ी के पूरी तरह से बंद होने से घुटन महसूस होने लगती है और उल्टी होने की संभावना बढ़ जाती है। आप इससे परेशान ना हों क्योंकि हम आज आपको बतायेंगे कि कैसे आप सफर में होने वाली उल्टी को रोक सकेंगे।

इस बात के जवाब में एक उपाय है।

सफर के दौरान होने वाली उल्टी को रोकने के लिए आपको चाहिए सिर्फ माचिस की एक तीली। तीली के आगे का लाल वाला हिस्सा जो फास्फोरस से बना होता है, उसको तोड़कर फेंक दें और बाकी बचे हिस्से को अपने मुंह में दांतो के नीचे दबा लें। इससे आपको उल्टी बिल्कुल भी नहीं होगी। यह बहुत ही प्रभावी तरीका है उल्टी रोकने का, एक बार अपना कर जरुर देखें। अगर आपको इससे फायदा होता हैं तो मुजे अवगत करें।

सरकुम:
कुछ लोग ऐसे होते हैं।
कुछ को समस्या होती हैं।
मेरे साथ रहने वालों को समस्या हो वो मेरी समस्या हैं।में उसे सहयोग करूँगा।
मेरे साथ जो हैं , मेरे हैं।
मेरे साथ जो नहीं वो मेरे नहीं हैं।
जो मेरे हैं उनके लिए में रहूँगा ओर हु भी।

Friday, December 14, 2018

एक व्यवस्था: किन्नर

आम आदमी के जन्म से लेकर मृत्यु तक अलग अलग धर्मों के अलग अलग रीती रिवाज होते हैं। जो लग भग हर कोई जानता है क्योंकि इनके रीती रिवाज को हर कोई देख सकता है। लेकिन आज आपको किन्नरों के अंतिम संस्कार को लेकर कुछ जानकारी देंगे जो बहुत ही कम लोग जानते हैं। जी हाँ दोस्तों, कहा जाता है कि किन्नर की दुआओं में बहुत जल्दी असर होता है। 

अगर किसी घर में किसी बच्चे का जन्म होता है तो वहां किन्नर जरूर जाते हैं और बच्चे को अच्छे जीवन की दुआएं देते हैं। आपको बतादें किसी किन्नर के मरने पर उसके अंतिम संस्कार आम आदमी के अंतिम संस्कार के विपरीत होता है और इनका अंतिम संस्कार रात में किया जाता है ताकि आम आदमी देख न सके।


इनका मानना है यदि कोई व्यक्ति किन्नर का अंतिम संस्कार को देखेगा तो वो किन्नर फिर से किन्नर का ही जन्म पाता है। किन्नर के अंतिम संस्कार के पहले मजूद सभी किन्नर बॉडी को जूते चप्पल से भी पीटते हैं। अब आपके मन में ये सवाल जरूर उठेगा कि आखिर किन्नर के अंतिम संस्कार के पहले बॉडी को क्यों पीटते हैं जूते चप्पल से। 

दोस्तों, ये सच्चाई जानकर आपको हैरानी होगी कि किन्नर ऐसा इसलिए करते हैं ताकि उस जन्म में किए सारे पापों का प्रायश्चित हो सके और वो इंसान दोबारा किन्नर के रूप में वापस न आये।

@#@
साथ जीना हैं तो दोबारा भी पैदा होंगे,
अकेले रहने को तो पल भी एक जीवन हैं।
क्यो आस लगाए बैठेंगे किसी के कारण,
हमे जिंदा रहने का वजूद आपसे मिला हैं।

Monday, December 10, 2018

दो बहनें

एक और ऐसी कहानी दो बहनों पूनम और कोमल की है । इनकी भी स्थिति बहुत खराब थी। दोनों बहनों की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि ये लोग अपनी शिक्षा भी जारी नहीं रख पाए थे, घर की हालात भी ठीक नहीं थी। 

ऐसे में इनके लिए PMKVY एक उम्मीद की किरण बनकर आया। दोनों बहनों ने पीएमकेवीवाई से कौशल प्रशिक्षण पाठ्यक्रम किया। कौशल प्रशिक्षण के बाद अब दोनों बहने कपड़ा कंपनी के कर्मचारी के रूप में काम कर रही हैं । अब न केवल वे खुशी से अपने परिवारों का समर्थन व सहयोग करते हैं लेकिन बल्कि दोनों बहने उन महिलाओं के लिए एक आदर्श मॉडल बन गईं हैं जो अपने कौशल के माध्यम से आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना चाहते हैं।

कुल मिलाकर कहें तो पीएमकेवीवाई, हर युवा और भारतीय महिला के लिए उज्ज्वल कल का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। यह सिर्फ परिवर्तन और उपलब्धियों की कहानियां भर नहीं हैं, बल्कि हर युवाओं/ महिलाओं को सही दिशा के साथ उन्हें कौशल युक्त और बेहतर आजीविका संपन्न बनाना है।
सरकुम:
सरकार के लिए कोई पार्टी का मतदार नहीं होता। योजना सब को मिलती हैं। हमें उसका लाभ लेना चाहिए। फिर ऐसा न हो कि कोई कहे ' सरकार ने उसे ' समजा नहीं।

एक चमत्कार