Friday, December 21, 2018

सुंदरता या...



नमस्कार दोस्तों आप सभी का एक बार फिर से मेरे लेख में स्वागत है, तो दोस्तों जैसे की आप सभी तो जानते ही है की इस दुनिया में कितने प्रकार के लोग रहते है और हर एक प्रकार के लोग जो है उनका रहन सेहन और सभी कुछ अलग अलग होता है. तो आज जो तस्वीरें में आप सभी के सामने ले कर आया हुं उन्हें देखकर आप सभी की समझ में भी आ जायेगा की जैसे आज के जमाने में महिलाये मेकअप करती है और अपने आप को सुंदर सोचती है तो वैसे ही दुनिया में कई ऐसी प्रथाएं है जिन्हें अगर कोई देख ले तो हैरान ही रह जाए ये देखकर की महिलाओ को सुंदर दिखने के लिए क्या क्या करना पड़ता है. चलिए दोस्तों तो शुरू करते है और दिखाते है आपको कुछ ऐसी ही तस्वीरें.


दोस्तों अापने लोगों को देखा होगा जो की ऐसी लड़की ढूंढते है जो की सुंदर हो और सुंदर से उनका अभीपराये होता है की गोरी हो और सुंदर हो देखने में. पर हर जगह ऐसा नहीं होता है, इंडोनेशिया में एक ऐसी जगह है जहाँ पर आज भी महिलाओ की सुंदरता को उनके दाँतो के हिसाब से आँका जाता है. जिस महिला के दाँत जितना नोकीले होंगे वो महिला उतनी ही सुंदर. और अपने दाँतो को ऐसे करवाने के लिए महिलाओ को गांव में ही किसी ऐसे आदमी के पास जाना पड़ता है जो की ये काम करता हो. और इस काम को किसी डॉक्टर द्वारा ढंग से नहीं बल्कि एक तेज़ धार हथियार और हथोड़े से किया जाता है. अभी आप खुद ही अंदाजा लगा लो की इसमें कितनी ज्यादा तकलीफ़ होती होगी.

आज भी पतली कमर की औरतों को ज्यादा सुंदर माना जाता है मतलब की औरत की सुंदरता का आकलन जिस आधार पर किया जाता है ये उसका एक हम हिसा माना जाता है. पर क्या आप में से कोई ये जानता है की पहले के समय में औरतों को पतली कमर पाने के लिए क्या क्या करना पड़ता था. कुछ महिलाये तो ऐसी थी जिन्होंने एक ऐसे कपड़े को हमेशा पहन कर रखा होता था जिससे की उनकी कमर उस जैसी हो जाए और जैसी शेप वो अपनी कमर को देना चाहती है वैसी हो जाए. में तो ये सोच भी नहीं सकता हुं की महिला को अपना जीवन जीने में ऐसे में कितनी ज्यादा दिक्कत आती होगी. सास भी लेना मुश्किल हो जाता होगा ऐसे में महिला का.

दोस्तों सबसे ज्यादा दर्दनाक जो है वो यही है, चीन में एक ऐसा समय था जब ऐसी महिलाओ को सुंदर का दर्जा दिया जाता था जिनके पैर छोटे हो और ऐसे आगे से बिलकुल ही पतले. और इसे चायनीज़ फुट बाइंडिंग कहाँ जाता था. और आप कभी अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते हो की ऐसे जूते पहन पहन कर महिलाओ के पैरो का हाल क्या हो जाता था. अगर आप इंटरनेट के ऊपर सर्च करोगे और देखोगे, तो आपको समझ आएगा की ऐसे जूते पहनने के चक्कर में महिलाओ के पैर ऐसे हो जाते थे जिसका कोई हिसाब ही नहीं है. मुझे तो देखकर ही डर लग गया है था जब मैंने इनके पैर देखे थे. में तो ये सोच रहा था की जिस महिला के साथ ऐसा हुंआ होगा उसका हाल क्या हुंआ होगा.


हर लड़की का एक सपना होता है की उसका राजकुमार आएगा और उसे ब्याह कर अपने घर ले जायेगा. पर अगर लड़की सुंदर ना हुयी तो फिर उसे अच्छा लड़का कभी भी नहीं मिलता है. तो ऐसे में जो होता है वो तो आप सभी के सामने ही है, म्यांमार में एक ऐसा स्थान है जहाँ पर लड़कियों की सुंदरता का आकलन उनकी गर्दन की लम्बाई देखकर लगाया जाता है. जितनी लम्बी गर्दन होगी उतनी ही लड़की सुंदर होगी. और अपनी गर्दन को लम्बी करने के लिए यहाँ पर महिलाये हर समय अपनी गर्दन में ऐसे स्प्रिंग डाल कर रखती है ताकि उनकी गर्दन लम्बी हो जाए. और मर्दों की इस इच्छा को पूरी करने के लिए ये महिलाये अपने आप को हर दिन इतना कष्ट में रखती है. मुझे तो देखकर ही बुरा लग रहा है तो जिसके साथ होता होगा ऐसा उसका हाल क्या होता होगा.

दोस्तों दुनिया में भी कैसे कैसे लोग रहते है ये तो सोचने की बात है, पर कुछ लोग तो ऐसे है जिनकी ये प्रथाएं तो बिलकुल ही अलग है. जैसे की अफ्रीका में एक ऐसी जगह है जहाँ पर ऐसे लोग रहते है जो की अपने होठ के आकार से आकलन करते है की वो कितने सुंदर है. जैसे की आप देख रहे है इस महिला को, इस महिला की शादी जब होगी तो इसके होंठ के बीच में ये जो बड़ा सा गोला लटका रखा है इसी के आधार पर होगी की उसके होंठ में कितना बड़ा गेप है. अभी आप बताओ दोस्तों की आपके साथ ऐसा हो तो आपको कैसा फील होगा. ये तो अच्छा है हम भारत में पैदा हुंए हुंए है नहीं तो ऐसी चीज़े तो हम लोग झेल ही नहीं सकते है.

सरकुम:

प्यार विचारो से ओर उद्देश्य के साथ हो तो प्यार हैं।अगर शारीरिक सुंदरता का मोह हैं तो कभी आप विश्वास को नहीं जीत सकते।

Thursday, December 20, 2018

जीवंत जीवन ऐसा होता हैं...

बच्चे को माता-पिता ने राक्षस समझ कर छोड़ दिया था,एक महिला ने सहारा दिया,फिर क्या हुआ पढ़े।

नाइजीरिया के एक गांव में एक 2 साल का लड़का बिलकुल हड्डियों के ढ़ांचे में तब्दील हो गया था. उसके माता-पिता ने उसे अशुम, राक्षस मानकर सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया था. माता -पीता के अंधविश्वास की सज़ा एक मासूम बच्चे को यह मिली की वह बच्चा भूख के मारे कचराकुंडियों जो कुछ मिल जाता था खा लेता और अपनी भूख मिटाने की कोशिश करता रहता था.

नाइजेरिया में मानवतावादी संघठन में काम करनेवाली अंजा रिंगरेन लोवेन ने इस बच्चे (होप) को जब देखा तो भूख और प्यास से बेताब था. अंजा ने उसे पानी पिलाया और खाना खिलाया. फिर उसे अस्पताल ले गई उसका इलाज करवाया. बच्चे के शरीर में कीड़े पड़ चुके थे.

अंजा ने फिर उसे अपने 'अफ्रीकन चिल्ड्रेन्स ऐड एजुकेशन एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन' द्वारा चलायें जा रहे बाल विकास केंद्र में शामिल किया और अब वह वहां दूसरे बच्चों के साथ खुश और स्वस्थ हैं. अंजा ने उसे स्कूल में भी दाखिल कर दिया हैं और वह अब पढ़ाई कर रहा हैं.


अंजा ने स्वंय एक नाइजेरियाई व्यक्ति से विवाह किया हैं और उनको एक लड़का हैं. आज दुनिया में चारों तरफ मानवता की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं ऐसे में अंजा जैसे कुछ लोग मानवता के लिए उम्मीद का किरण साबित होते हैं. ऐसे लोगों से हर किसी ने सबक लेने के ज़रूरत हैं।

सरकुम:

क्या हम ऐसे बच्चों के लिए कुछ कर सकते हैं? सोचा तो हैं, ऐसा काम कुछ हो भी रहा हैं। इसे फैलाने के लिए हमारे पास पैसा नहीं हैं। आज 14 बच्चे ऐसे हमारे पास हैं। पेसो के बगैर समस्या कम नहीं होती। कभी कभी बढ़ती हैं।

Wednesday, December 19, 2018

एक IDEA...


में रोजाना 300 से 400 Km यात्रा करता हूँ।कम्पनी ओर बात करने हेतु में यात्रिओ को गाड़ी में बिठाता हु। ज्यादातर लोग गाड़ी में बंध कांच के साथ यात्रा कर सकते हैं। मगर कुछ लोगो को दिक्कत होती है।  यात्रा के दौरान गाड़ी में उल्टी होना आजकल आम बात हो गई है। पहले से ज्यादा इस समस्या के बढ़ने की वजह है हमारा खानपान और हाल ही में बढ़ा प्रदुषण और गाड़ी में होने वाली घुटन।

मुजे बन्ध कांच की आदत हैं।
कुछ लोगो को आदत नहीं होती हैं।
आपको पता ही है कि उल्टी होने की समस्या के कारण बहुत से लोग सर्दियों व गर्मियों में चाहते हुए भी वातानुकूलित बसों या गाड़ियों में सफर नहीं कर सकते, क्योंकि गाड़ी के पूरी तरह से बंद होने से घुटन महसूस होने लगती है और उल्टी होने की संभावना बढ़ जाती है। आप इससे परेशान ना हों क्योंकि हम आज आपको बतायेंगे कि कैसे आप सफर में होने वाली उल्टी को रोक सकेंगे।

इस बात के जवाब में एक उपाय है।

सफर के दौरान होने वाली उल्टी को रोकने के लिए आपको चाहिए सिर्फ माचिस की एक तीली। तीली के आगे का लाल वाला हिस्सा जो फास्फोरस से बना होता है, उसको तोड़कर फेंक दें और बाकी बचे हिस्से को अपने मुंह में दांतो के नीचे दबा लें। इससे आपको उल्टी बिल्कुल भी नहीं होगी। यह बहुत ही प्रभावी तरीका है उल्टी रोकने का, एक बार अपना कर जरुर देखें। अगर आपको इससे फायदा होता हैं तो मुजे अवगत करें।

सरकुम:
कुछ लोग ऐसे होते हैं।
कुछ को समस्या होती हैं।
मेरे साथ रहने वालों को समस्या हो वो मेरी समस्या हैं।में उसे सहयोग करूँगा।
मेरे साथ जो हैं , मेरे हैं।
मेरे साथ जो नहीं वो मेरे नहीं हैं।
जो मेरे हैं उनके लिए में रहूँगा ओर हु भी।

Friday, December 14, 2018

एक व्यवस्था: किन्नर

आम आदमी के जन्म से लेकर मृत्यु तक अलग अलग धर्मों के अलग अलग रीती रिवाज होते हैं। जो लग भग हर कोई जानता है क्योंकि इनके रीती रिवाज को हर कोई देख सकता है। लेकिन आज आपको किन्नरों के अंतिम संस्कार को लेकर कुछ जानकारी देंगे जो बहुत ही कम लोग जानते हैं। जी हाँ दोस्तों, कहा जाता है कि किन्नर की दुआओं में बहुत जल्दी असर होता है। 

अगर किसी घर में किसी बच्चे का जन्म होता है तो वहां किन्नर जरूर जाते हैं और बच्चे को अच्छे जीवन की दुआएं देते हैं। आपको बतादें किसी किन्नर के मरने पर उसके अंतिम संस्कार आम आदमी के अंतिम संस्कार के विपरीत होता है और इनका अंतिम संस्कार रात में किया जाता है ताकि आम आदमी देख न सके।


इनका मानना है यदि कोई व्यक्ति किन्नर का अंतिम संस्कार को देखेगा तो वो किन्नर फिर से किन्नर का ही जन्म पाता है। किन्नर के अंतिम संस्कार के पहले मजूद सभी किन्नर बॉडी को जूते चप्पल से भी पीटते हैं। अब आपके मन में ये सवाल जरूर उठेगा कि आखिर किन्नर के अंतिम संस्कार के पहले बॉडी को क्यों पीटते हैं जूते चप्पल से। 

दोस्तों, ये सच्चाई जानकर आपको हैरानी होगी कि किन्नर ऐसा इसलिए करते हैं ताकि उस जन्म में किए सारे पापों का प्रायश्चित हो सके और वो इंसान दोबारा किन्नर के रूप में वापस न आये।

@#@
साथ जीना हैं तो दोबारा भी पैदा होंगे,
अकेले रहने को तो पल भी एक जीवन हैं।
क्यो आस लगाए बैठेंगे किसी के कारण,
हमे जिंदा रहने का वजूद आपसे मिला हैं।

Monday, December 10, 2018

दो बहनें

एक और ऐसी कहानी दो बहनों पूनम और कोमल की है । इनकी भी स्थिति बहुत खराब थी। दोनों बहनों की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि ये लोग अपनी शिक्षा भी जारी नहीं रख पाए थे, घर की हालात भी ठीक नहीं थी। 

ऐसे में इनके लिए PMKVY एक उम्मीद की किरण बनकर आया। दोनों बहनों ने पीएमकेवीवाई से कौशल प्रशिक्षण पाठ्यक्रम किया। कौशल प्रशिक्षण के बाद अब दोनों बहने कपड़ा कंपनी के कर्मचारी के रूप में काम कर रही हैं । अब न केवल वे खुशी से अपने परिवारों का समर्थन व सहयोग करते हैं लेकिन बल्कि दोनों बहने उन महिलाओं के लिए एक आदर्श मॉडल बन गईं हैं जो अपने कौशल के माध्यम से आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना चाहते हैं।

कुल मिलाकर कहें तो पीएमकेवीवाई, हर युवा और भारतीय महिला के लिए उज्ज्वल कल का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। यह सिर्फ परिवर्तन और उपलब्धियों की कहानियां भर नहीं हैं, बल्कि हर युवाओं/ महिलाओं को सही दिशा के साथ उन्हें कौशल युक्त और बेहतर आजीविका संपन्न बनाना है।
सरकुम:
सरकार के लिए कोई पार्टी का मतदार नहीं होता। योजना सब को मिलती हैं। हमें उसका लाभ लेना चाहिए। फिर ऐसा न हो कि कोई कहे ' सरकार ने उसे ' समजा नहीं।

एक ऐसी भी कहानी...

हमारा देश सभी धर्मों का सन्मान करता हैं। हर धर्म को पहचानने के लिए हम सब ने अपने दिमाग में कई तस्वीरें बना रखी हैं। अगर किसी व्यक्ति ने पगड़ी पहन रखी हैं तो वह पंजाबी ही होगा या किसी ने अगर धोती पहनी हैं तो वह हिन्दू होगा या फिर किसी व्यक्ति ने अगर टोपी लगायी हैं और दाढ़ी रखी हैं तो वह मुसलमान ही होगा लेकिन यह सब हमारे दिमाग का सिर्फ एक मज़हबी फ़ितूर मात्र हैं।पर कभी आपने सोचा कि मुस्लिम सिर्फ दाढ़ी क्यों रखते हैं मूछें नहीं? आईएं आज हम आप को बताते हैं मुस्लिम धर्म से जुड़ी एक दिलचस्प बात। कहा जाता हैं कि हिन्दू धर्म ही सबसे पुराना और सनातन धर्म हैं। 
हिन्दू धर्म का इतिहास कितना पुराना हैं इस बात की पुष्टि अभी तक नहीं हुई हैं, वही इस्लाम धर्म लगभग 1400 साल पुराना हैं।वेद व्यास जी अभी तक 18 पुराण लिख चुके हैं और भविष्य पुराण उनमे से एक हैं। हिन्दू धर्म के अंतर्गत कई तरह के पुराण और ग्रन्थ लिखे गए हैं और उन्ही ग्रन्थों में से एक भविष्य पुराण में इस्लाम से जुड़ी भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी। इस पुराण में लगभग 50000 श्लोक थे लेकिन तक्षशिला विश्व विद्यालय में रखे इस ग्रन्थ को मुग़ल शासन काल में जला दिया गया पर उस किताब में से 129 अध्याय और लगभग 14000 श्लोक बच गए थे।इस किताब में यह पहले से ही उल्लेखित था कि उस वक़्त के तात्कालीन राजा हर्षवर्धन के साथ और कई राजा, अलाउदीन, तुगलक, तैमुर, बाबर, और अकबर जैसे मुगलों का इस काल आना होगा। इस पुराण में ईसाई धर्म के प्रमुख ईसा मसीह के जन्म का भी प्रमाण मिलता हैं।लेकिन इससे पहले भी अपने भारत देश की शक्ति कम होती देख एक और राजा हुए, जो राजा भोज के नाम से जाने गए और उन्होंने तय किया कि अपनी मातृभूमि की रक्षा करने के लिए दुनिया जीतने निकलना ही पड़ेगा। अपनी दस हज़ार सेना को साथ लेकर कई विद्वानों और कालीदास जैसे बुध्हिजीवी राजा के साथ आगे बढ़े।सिन्धु नदी पार करके गंधार और कशमीर में शठ राजाओं को हरा कर राजा भोज की सेना ईरान और अरब होते हुए मक्का पहुची। वहां के मरुस्थल में पहुच कर जब वहां उन्होंने एक शिवलिंग देखा तो उसकी पूजा करते हुए वह भगवान् शिव का ध्यान करने लगे।भगवान् शिव भी राजा भोज की प्रार्थना सुनकर उनसे बात करने आये और उनसे कहा कि तुम्हे यहाँ नहीं आना चाहियें था वत्स। तुम्हे मक्केश्वेर , जिसे आज हम मक्का के नाम से जानते हैं उसके बजाये उज्जैन महाकालेश्वेर को पूजना चाहियें। 

आगे कहा गया हैं कि, इस स्थान पर अब एक राक्षस त्रिपुरासुर, जिसका मैंने वध किया था, उसके मानने वालें लोगों को असुरराज बाली से संरक्षण प्राप्त हो रहा हैं और इस समुदाय का प्रमुख उत्पात मचा रहा हैं इसलिए तुम इस मलेच्छ जगह से चले जाओ।भगवान् शिव की बात सुनकर राजा भोज जब लौटने लगे तब “महा-मद” नामक व्यक्ति वहा आ गया और राजा भोज से कहा कि आप का आर्यधर्म विश्व का सर्वश्रेष्ट धर्म हैं, लेकिन मैं आपके शिव की मदद से ही एक ऐसे धर्म की स्थापना करूँगा जो अपनी क्रूरता के लिए जाना जायेगा। इसे मानने वालो को अपना लिंगाछेदन (खतना) कर के, बिना तिलक और बिना मुछों के सिर्फ दाढ़ी रखना अनिवार्य होगा। मेरा यह सम्प्रदाय उन्हें बहुत प्रिय होगा जिसे कुछ भी खाना ,जिसमे मांस स्वीकार्य होगा और अपनी इस बात का यकीन दिलाने के लिए मैं आपके देश में आकर अपने मूंछ के बाल को त्याग दूँगा।

कश्मीर के हजरत बल मज्जिद में आज भी हजरत मोहम्मद के मुछों के उन बालों को सुरक्षित रखा गया हैं। हजरत के उस बाल को “मोई-ए-मुकद्दस” के नाम से जाना जाता हैं। हर मुस्लिमों के लिए उस बाल का दर्शन हो सके इसके लिए साल में एक या दो बार ही उस बक्से को खोला जाता हैं।

कुछ बाते देखी और पढ़ी हैं।कुछ बाते कहासे खोजी गई हैं।बात सिर्फ यरे हैं कि सभी धर्म एक दूसरे के सहयोग से बढ़ सकते हैं।

 और ग्रन्थ लिखे गए हैं और उन्ही ग्रन्थों में से एक भविष्य पुराण में इस्लाम से जुड़ी भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी। इस पुराण में लगभग 50000 श्लोक थे लेकिन तक्षशिला विश्व विद्यालय में रखे इस ग्रन्थ को मुग़ल शासन काल में जला दिया गया पर उस किताब में से 129 अध्याय और लगभग 14000 श्लोक बच गए थे।
इस किताब में यह पहले से ही उल्लेखित था कि उस वक़्त   
लेकिन इससे पहले भी अपने भारत देश की शक्ति कम होती देख एक और राजा हुए, जो राजा भोज के नाम से जाने गए और उन्होंने तय किया कि अपनी मातृभूमि की रक्षा करने के लिए दुनिया जीतने निकलना ही पड़ेगा। अपनी दस हज़ार सेना को साथ लेकर कई विद्वानों और कालीदास जैसे बुध्हिजीवी राजा के साथ आगे बढ़े।
सिन्धु नदी पार करके गंधार और कशमीर में शठ राजाओं को हरा कर राजा भोज की सेना ईरान और अरब होते हुए मक्का पहुची। वहां के मरुस्थल में पहुच कर जब वहां उन्होंने एक शिवलिंग देखा तो उसकी पूजा करते हुए वह भगवान् शिव का ध्यान करने लगे।
भगवान् शिव भी राजा भोज की प्रार्थना सुनकर उनसे बात करने आये और उनसे कहा कि तुम्हे यहाँ नहीं आना चाहियें था वत्स। तुम्हे मक्केश्वेर , जिसे आज हम मक्का के नाम से जानते हैं उसके बजाये उज्जैन महाकालेश्वेर को पूजना चाहियें। 

आगे कहा गया हैं कि, इस स्थान पर अब एक राक्षस त्रिपुरासुर, जिसका मैंने वध किया था, उसके मानने वालें लोगों को असुरराज बाली से संरक्षण प्राप्त हो रहा हैं और इस समुदाय का प्रमुख उत्पात मचा रहा हैं इसलिए तुम इस मलेच्छ जगह से चले जाओ।
भगवान् शिव की बात सुनकर राजा भोज जब लौटने लगे तब “महा-मद” नामक व्यक्ति वहा आ गया और राजा भोज से कहा कि आप का आर्यधर्म विश्व का सर्वश्रेष्ट धर्म हैं, लेकिन मैं आपके शिव की मदद से ही एक ऐसे धर्म की स्थापना करूँगा जो अपनी क्रूरता के लिए जाना जायेगा। इसे मानने वालो को अपना लिंगाछेदन (खतना) कर के, बिना तिलक और बिना मुछों के सिर्फ दाढ़ी रखना अनिवार्य होगा। मेरा यह सम्प्रदाय उन्हें बहुत प्रिय होगा जिसे कुछ भी खाना ,जिसमे मांस स्वीकार्य होगा और अपनी इस बात का यकीन दिलाने के लिए मैं आपके देश में आकर अपने मूंछ के बाल को त्याग दूँगा।

कश्मीर के हजरत बल मज्जिद में आज भी हजरत मोहम्मद के मुछों के उन बालों को सुरक्षित रखा गया हैं। हजरत के उस बाल को “मोई-ए-मुकद्दस” के नाम से जाना जाता हैं। हर मुस्लिमों के लिए उस बाल का दर्शन हो सके इसके लिए साल में एक या दो बार ही उस बक्से को खोला जाता हैं।

कुछ बाते देखी और पढ़ी हैं।
कुछ बाते कहासे खोजी गई हैं।
बात सिर्फ यरे हैं कि सभी धर्म एक दूसरे के सहयोग से बढ़ सकते हैं।

सरकुम:

मुजे धर्म पसंद हैं।
धर्म के द्वारा मेने जो कर्म किये हैं वो भी मेने ही किये हैं। हिन्दू हु, ओर गणेश जी को सामने रखकर जो कहा हैं, निभाया हैं।

धर्म मेरी आस्था, आस्था से जीवन।
जीवन से सरोकार, जीवन ही सरकार।

Sunday, December 9, 2018

स्किल ओर योजनाए

दुनिया  ये  मानकर चल रही रही है कि एक अरब का देश भारत  …आने वाले दौर में शक्तिशाली होने वाला है।  लेकिन वास्तविकता ये है कि  देश की आधी आबादी अब भी कुशल होने के लिए संघर्ष कर रही है,…इसलिए लगता है कि ये  ये सपना बहुत दूर है। इस वास्तविकता को हकीकत में बदला जा सकता था और यही वजह है कि भारत सरकार ने इस चुनौती को प्रमुखता के साथ स्वीकार कर लिया है
किसी  ने एक प्रसिद्ध कहावत  कहा है कि ‘ एक बार को  मोटर्स के बिना उड़ना संभव है, लेकिन ज्ञान और कौशल के बिना ये असंभव है “।  यही स्किल यानी कौशल ,सभी मिशनों की रीढ़ की हड्डी या कहें  अहम भूमिका अदा करती है और एक देश विकास  केवल तभी कर सकता है जब उसके कर्मचारियों में तकनीकी, औद्योगिक और सॉफ्ट स्किल का सबसे अच्छा ज्ञान हो। या कहें वो तकनीकी रूप से कौशल हो।
2015 में, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने कौशल भारत कार्यक्रम  का आगाज किया । इस मिशन के तहत, भारतीय युवाओं के लिए उनके पेशेवर कौशल को  और बेहतर तरीके से पॉलिश करने का सर्वोत्तम मंच पेश किया । स्किल इंडिया का मकसद ही भारत भर में  व्यावसायिक प्रशिक्षण देना है  …इस योजना का मकसद भारत के युवाओं को अच्छी तरह से स्किल बनाने या कहें तैयार करना मकसद  है। इस कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) की शुरुआत की गई, ये योजना  मूल रूप से उन छात्रों के लिए है, जो अपने कौशल प्रशिक्षण का खर्च नहीं उठा सकते।
भारत सरकार का ये कदम मील का पत्थर साबुत हुआ। इस योजना ने उद्योग-संबंधित कौशल प्रशिक्षण के साथ लाखों भारतीय युवाओं को जोड़ने और  उन्हें सशक्त बनाने में मदद किया। साथ ही उनके लिए इस प्रशिक्षण ने बेहतर आजीविका के लिए द्वार खोल दिए । आइए  कुछ ऐसे ही  सफलता की कहानियों पर एक नज़र डालते हैं-
उदाहरण के तौर पर हम लाइफ सांइंस को देख सकते हैं। ये मौजूदा दौर में शीर्ष मांग वाले क्षेत्रों में से एक है जो फिलवक्त  17 फीसद  सीएजीआर की गति से बढ़ रहा है।  लेकिन अभी भी  इस सेक्टर  में कुशल काम करने वालों की कमी है, हम इसी उभरते क्षेत्र से एक प्रेरणा दायक कहानी बताते हैं-
ये हैं हेमंत झा| आप हेमंत झा से मिलिए। जब तक पीएमकेवीवाई की शुरूआत   नहीं हुई थी , तब वे बिहार के कटिहार जिले के एक सामान्य  युवा थे। लेकिन इन्होंने पीएमकेवीवाई के साथ कौशल प्रशिक्षण लिया, प्रशिक्षण के बाद इनका जीवन इस तरह से बदल जाएगा या कहें इतने बड़े पैमाने पर बदलाव आएगा …ऐसा उन्होंने सोचा नहीं था।  पीएमकेवीवाई के तहत झा को लाइफ साइंस स्किल डेवलपमेंट कोर्स के तहत  प्रशिक्षित किया गया, प्रशिक्षण के बाद वे एक सफल चिकित्सा प्रतिनिधि बनने के लिए तैयार किए गए। पीएमकेवीवाई ने उन्हें एक बेरोजगार युवक से एक शीर्ष अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा ब्रांड के कर्मचारी  के रूप में बदल दिया । फिलवक्त वे सन फार्मा के कर्मचारी हैं। एक तरह से कहें कि पीएमकेवीवाई से झा के सपनों को पंख मिला और उनका जीवन बदल गया।
इस योजना के तहत ना केवल पुरूषों बल्कि इन संभावित विकास पाठ्यक्रमों ने भारतीय महिलाओं के लिए भी अद्भुत काम किया। पिछले 3 वर्षों में, 3 लाख महिलाओं को अपनी आजीविका अर्जित करने के लिए इस योजना के तहत प्रशिक्षित किया गया । एक छोटे से प्रशिक्षण ने इन महिलाओं के जीवन को बदल दिया या कहें अब तक की ये साधारण महिला , अब खुद हीरो बन चुकी हैं।
अब सफलता की दूसरी कहानी देश के पूर्वी छोर से सुनिए । पूर्वोत्तर से सफलता की ये पहली खबर है। त्रिपुरा के एक दूरदराज के गांव से एक आदिवासी महिला ने खेती के क्षेत्र में बेहतरीन काम किया । किसी ने सोचा भी नहीं था कि ये लोग अब तक की पारंपरिक खेती में बदलाव करेंगे। इन इलाकों में पारंपरिक खेती तब पर्याप्त नहीं थी,अब भी यह पर्याप्त नहीं है। यही वजह है जब एक पूरा गांव अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे थे.. ऐसे दौर में बदलाव जरूरत थी और इन महिलाओं ये बदलाव किया भी ।
अब आप नित्या देवी निहोतिया से मिलें, इन्होंने सफलता के लिए कम दूरी की यात्रा तय की है। निहोतिया ने पीएमकेवीवाई के जरिए ही रबड़ बागान कार्य में प्रशिक्षण लाया। प्रशिक्षण के बाद उसने रबर बागान नर्सरी की शुरूआत की । इस नर्सरी के जरिए अब निहोतिया को 4,000 रुपये प्रति माह का मुनाफा होता है । अब निहोतिया ना केवल पीएमकेवी के लिए आभारी हैं, बल्कि अब वो अपने अनुभव को साझा भी करना चाहती है। निहोतिया के मुताबिक दूसरों को सही समय पर सही जानकारी मिल जाए तो कई समस्याओं का निदान हो जाता है।

सरकुम:
शिक्षा को सीखने से जोड़ना जरूरी है,उसे गुणाकन से जोड़कर देखने से बाहरी समस्या बढ़ जाती है।