Wednesday, October 24, 2018

मेरी माँ


मा

जो पैदा करती हैं।
मा जो सिखाती हैं।
मेरे लिए मा एक हैं जिसनके मुजे पैदा किया और सिखाया भी हैं।

सबको शिक्षक मा के स्तर पे मिलने चाहिए।जिसे हम 'मास्तर' कहते हैं। मेरे लिए तो इस कारण मास्तर ओर मा दोनो एक मिली।

1997 के आसपास उसने मुजे फिरसे पढ़ाया। आज मुजे उनके जन्म दिवस पर एक बात ही कहेंनी हैं। जितना जिए स्वास्थ्यप्रद जिए। 

आज मेरे गुरु शिक्षक जिन्हें आज भी में बेन कहता हूं क्यो की उन्होंने मुजे पढ़ाया है। आज को उनको शुभ कामना नहीं मेरा जीवन अर्पित करता हूँ।


लव यू बेन
लव यू ह.बा




सरकुम:


मेरा अभिमान यही हैं कि आप मेरी माँ हो...

आखरी मौका...


वो रिश्ता ही नहीं जो एक तरफा हो। सोच और रिश्ते बदलने के लिए नहीं बदलाव लाने के लिए होते हैं।अगर कोई एक व्यक्ति किसी बात को अपने स्वाभिमान से जोड़ता हैं तो उसे भी समझना चाहिए के स्वाभिमान हर किसी का होता हैं।

अगर कोई जवाब नहीं दे रहा हैं उसका मतलब ये नहीं कि वो बोलेगा नहीं। हो सकता हैं अभी वो बोलना नहीं चाहते। कोई भोंकता हैं तो उसके सामने भोंकना आवश्यक नहीं हैं।

एक फोटो किसी की औकात दिखा देती हैं।
कुछ दिनों पहले की बात हैं। में एक कॉंफ़र्न्स में था। वहां किसी जे मेरे साथ फोटो खिंचवाई। जिस ने सवाल उठाया वो तो #मी2 तक पहुंच गए। 
वहाँ बहोत सारे लोग थे।
मेरे साथ किसी ने प्यार से तो किसी ने दोस्ती में या तो किसी ने भड़ास निकालने के लिए फोटो खिंचवाई होंगी। बहोत सारे कॉमन दोस्त आज कल सोसियल मिडियामें हैं। किसी ने वो फोटोग्राफ देखे होंगे। बड़े लोगो को दिखाने वाले भी सेवक होते हैं। 

अब हुआ ये की...
वो फोटो शेर किये गए।
बस, ग्रुप में बैठे हुए फोटो थे।
शायद उस दिन मेरे 500 से अधिक फोटो शेर हुए होंगे।मगर अपनी विफलताओं को छुपाने वाले मुजे सवाल करने लगे। 

1.क्या आइआइएम आप का हैं। 
2. आप आईआईएम से कैसे जुड़ सकते हैं।
3.आप आईआईएम में दूसरों को चांस क्यो नहीं देते हैं।


सोसियल मीडिया में बहोत सारी कॉमेंट हुई। उसमें से कुछ कॉमेंट भद्दी कही जा सकती हैं। जो लोगो ने अच्छी नजर से उसे देखा उन्होंने अच्छी कॉमेंट की।कुछ लोगो ने अपने विचार मुझपे प्रस्तुत किये। एक महानुभव जिनके पास मेरे लिए सोचने के अलावा कोई काम नहीं हैं। उन्होंने तो #मी2 तक का सोच डाला। मेने उस वाकिए को बहोत दिनों तक जेला ओर महसूस किया।

500 फोटोग्राफ खिंचवाए होंगे।
5 की चर्चा करने वाले बहोत थे। उसमें 1 की तो सलोने हद करदी। आईआईएम के बारे में सवाल थे।

तो जानिए...


आईआईएम एक ऐसी संस्था हैं जो नए विचारों को पुरस्कृत करता हैं। किसान से लेकर कलेक्टर ओर कोई भी वहाँ अपेक्षित हैं, अगर कुछ अच्छा और नया किया हैं। वहां किसी के बाप की नहीं चलती। 

आज मेरे पास समय नहीं हैं।
मुजे ये भी मालूम हैं की मुजे से भिड़कर तुम्हारा ही सन्मान बढ़ेगा। में ये तक तुम्हे देना नहीं चाहता। ओर हा स्कूल छोड़ा नही हैं। आज भी कक्षा 1 से 10 के किसी भी विषय में (मुजे से सवाल करने वाले से अधिक) जनता हूं। 

2 गिनिस रिकॉर्ड
3 एशिया रिकॉर्ड
4 नेशनल रिकॉर्ड
3 नेशनल एवॉर्ड

पूरे भारत के 70 हजार शिक्षक और 40 हजार बच्चो का नेटवर्क बना पाए हैं।2020 तक 1 लाख शिक्षक और 75 हजार बच्चो तक पहुंचने का इरादा हैं।

मुजे जो सन्मान मील हैं वो 2014 तक के हैं।

ये सब 2014 तक का हैं।
ब्रिटिश काउंसिल ने 4 साल रिसर्च करके मुजे होनाररी डॉक्टरेट दिया हैं। आज तक कभी आईआईएम में मेरा सन्मान नहीं हुआ। न होगा न होने दूंगा। 

गूजरात के 3 टीचर्स को राष्ट्रपति भवन की गेलेरी में स्थान दिलवा पाए हैं। आईआईएम के माध्यम से 16 टीचर्स राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा पाए हैं। 40 को नेशनल इनोबेशन तक पहुंचा पाए हैं।

जो सिर्फ बाते करते हैं।
वो सिर्फ बाते करे। काम करना हैं तो साथ में जुड़जाओ। समय आने पर आपका भी सन्मान होगा। आज जिनका हुआ हैं या हो पाया हैं उन्होंने सिर्फ FB में बाते नहीं कि ओर भी बहोत किया हैं। आज कुछ नहीं कहता हूं,उसका मतलब ये नहीं कि कह नहीं पा रहा हूँ। मानलो की आप को मौका दे रहा हूँ। आज के बाद बोलने में ओर लिखने में मुजे सीधा बीचमें न गुसेटो, वरना आप कुछ भी करने के काबिल न रहोगे। मुजे रोज पढ़ने वालों को बुरा लग सकता हैं। ऐसा पढ़ने की ओर मुजे लिखने की आदत नहीं हैं।


बस,
प्यार से...


सरकुम:
संवाद के तरीके होते हैं।
आप जैसा करोगे,वैसा ही में करूँगा।



शरद का स्वागत



चारुचंद्र की चंचल किरणें,
खेल रहीं हैं जल थल में,


स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है
अवनि और अम्बरतल में।

पुलक प्रकट करती है धरती,
हरित तृणों की नोकों से,

मानों झूम रहे हैं तरु भी,
मन्द पवन के झोंकों से।

सरकुम:
बोलने से बात शुरू होती हैं।
न बोलने से बात खत्म नहीं होती।
समय तो आता ओर जाता रहता हैं,
कभी यादे तो कभी अहसास से हाश होती हैं।

Tuesday, October 23, 2018

Satvik:2018

SATTVIK  the festival to celebrate traditional nutritious food and associated knowledge systems was started fourteen years ago at the IIM-A, to provide market based incentives for conserving agro-biodiversity. Creation of demand for rarely or less cultivated nutritionally rich crops and varieties may stimulate their cultivation. The paradox of development is that the food rich eat, is often poor. While food that poor grow in poorer regions is richer. In less rainfall regions, soil minerals dont leach much and thus crops grown there like millets, sorghum pulses, etc., are richer. This festival aspires to put the lesser known but nutrient-rich food from various states on the plate of urban communities helping them to adopt healthier food habits and lifestyle. The festival also hopes to encourage the farmers to grow such crops and augment their incomes. Thus, we seek your presence and participation in the event. Sattvik also hosts an innovation exhibition by National Innovation Foundation, and Gujarat Grassroots Innovation Augmentation Network.

#sattvik2018

Saturday, October 20, 2018

मेरा प्यार गणेशा...

मेरे पास प्यार हैं।
मेरे पास गणेश जी हैं।
मेरे पास गणेश जी का प्यार हैं। डीसा में एक गणेश मंदिर हैं। में कई सालों से में दर्शन करने जा रहा हूँ। आज भी गया।आज कुछ बिचार से गणेश जी के मंदिर में स्थित मूर्ति देख रहा था। आज बहोत देर तक देखने के बाद मुजे मालूम हुआ की, इसी मंदिर में गणेश जी के साथ रिद्धि ओर सिद्धि को भी स्थापित किया गया हैं।

2001 से गणेश जी ने मुजे आशीर्वाद दिए हैं। जहाँ भी रुका हूं, जहा भी टूटा हु बस, गणेश जी ने मुजे रास्ता दिखाया हैं। आज एक ऐसा काम लेके निकला हु, पहले कुछ लोग जुड़े थे। इन्हों ने मेरे पीछे कुछ ऐसा किया उन्हें छोड़ना पड़ा। आज भी अब वो मेरे साथ नहीं हैं कुछ लोग मानने को तैयार नहीं हैं। मगर गणेश जी केलिए मेने डीसा से एथॉर चलकर गया था। तब मुजे शांति मिली थी। जब में बेचेंन होता हूं गणेश जी पे छोड़ता हु। वो जो हुकुम करते हैं,वैसे आगे बढ़ता हु।

सरकुम:

जय गणेश

Friday, October 19, 2018

उत्तर प्रदेश: ‘टीचर चेंजमेकर समिट-

उत्तर प्रदेश के जौनपुर ज़िले के वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में रविवार को राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एससीईआरटी), लखनऊ और स्टर एजुकेशन के संयुक्त तत्वाधान में ‘टीचर चेंजमेकर समिट-2018’ का आयोजन किया गया। इसमें जौनपुर 10 ब्लॉक बदलापुर, बक्सा, धर्मापुर, मछली शहर, करंजाकला, मड़ियाहूं, सिकरारा, महाराजगंज, शाहगंज, जलालपुर के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाने वाले 750 शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

सम्मानित होने वाले शिक्षकों को मिला रोहैम्पटन यूनिवर्सिटी, लंदन का प्रमाण पत्र

इन शिक्षकों ने अपने-अपने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की कक्षाओं में समूह आधारित शिक्षण के जरिये बच्चों की समस्याओं की पहचान करने के बाद उसका समाधान भी खोजा। इसके लिए 750 शिक्षकों को एससीईआरटी, स्टर एजुकेशन और  लंदन की रोहेम्पटन यूनिवर्सिटी का प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
रोहैम्पटन यूनिवर्सिटी लंदन, विश्व की अग्रणी शिक्षक प्रशिक्षण संस्थाओं में से एक है। इस कार्यक्रम के दौरान जौनपुर जिले के राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक श्री कृष्ण देव दुबे और सत्य प्रकाश पाण्डेय मौजूद रहे। उन्होंने शिक्षक साथियों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर जौनपुर शिक्षक चाह लें तो शिक्षा की तस्वीर बदल सकते हैं।

‘शिक्षकों के ऊपर है बड़ी जिम्मेदारी’

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री गिरीश चंद यादव, नगर विकास राज्यमंत्री उत्तर प्रदेश थे। उन्होंने समिट में सम्मानित होने वाले शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा, “शिक्षकों के ऊपर बच्चों को शिक्षित करने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। अगर शिक्षक स्वतःस्फूर्त ढंग से प्रेरित होकर काम करें तो शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव जरूर होंगे। यह कार्य देश के निर्माण में योगदान करने वाला कार्य है। सम्मानित होने वाले शिक्षकों को बहुत-बहुत बधाई।“

इस समिट में शिक्षकों द्वारा नवाचार प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया। जिसमें उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कक्षा के नवाचारों की प्रदर्शनी लगाई। इसका अवलोकन उत्तर प्रदेश के नगर विकास राज्यमंत्री, श्री गिरीश चंद यादव और जौनपुर के जिलाधिकारी श्री सर्वज्ञराम मिश्र द्वारा किया गया।

‘महिला शिक्षकों को बदलाव के लिए आगे आना चाहिए’


जौनपुर के जिलाधिकारी श्री सर्वज्ञराम मिश्र ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा, “महिला शिक्षकों को अपने आपको पुरूष शिक्षकों से कम नहीं समझना चाहिए। अगर वे ठान ले तों जौनपुर जिले में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति निश्चित रूप से बेहतर हो सकती है। इस तरह के प्रयासों से जौनपुर से पूरे प्रदेश और देश में एक सकारात्मक संदेश दिया जा सकता है कि अगर शिक्षक प्रतिबद्धता के साथ बच्चों को पढ़ाएं तो उनके अधिगम स्तर में सुधार हो सकता है।“
सरकुम:
शिक्षा में सुधार हमारी संयुक्त जिम्मेदारी हैं।इस जिम्मेदारी के लिए सभी सामान अधिकार पाते हैं।हम अपनी जगह रहकर जो बनपड़े करना हैं।

Wednesday, October 17, 2018

मेरे रंग मेरे सपने...


मेरे सपने,मेरे अपने।
आज तक बहोत सपने देखे हैं।बहोत सारे सपने यरे हुए हैं। जो मिजे मिला हैं,उसे पाने को लोग तरसते हैं। आज भी में उसे महसूस करता हूँ। आज में आप को मेरे ऐसे ही एक ख्वाब की बात करूंगा। ये ख्वाब वैसे मेरा हैं मगर बहोत सारे साथियो ने उसे पूरा करने में सहयोग रहा हैं। बहोत सारे साथी आज भी जुड़े हुए हैं। कुछ छूट गए कुछ को छोड़ना पड़ा। कुछ लोगो ने मुजे भी रिजेक्ट किया।मगर वो ख्वाब के करीब में पहुंचा हूँ।18 साल के संपर्क ओर बच्चो से सरोकार के कारण आज हम ये कर पाए हैं।

7रंगी स्किल फाउंडेशन जो आज से सात साल से कार्यरत हैं।राज्य और देश के कई हिस्सों में इस फाउंडेशन ने शिक्षा के लिए काम किया हैं। आईआईएम के साथ मिलकर हमने नेपाल और बांग्लादेश के अध्यापको के साथ काम किया। हमे ओर उन्हें सीखने को मिला। 7 रंगी क्या हैं...?

जीवन हो विचार...
अच्छे होने चाहिए। सुख दुख,क्रोध, गम ओर खुशी।हर एक भाव के लिए एक रंग हैं।कहते हैं मूल तह 3 रंग हैं।
रेड
ब्लू
ओर
ग्रीन

इन तीन रंग में से कोई भी रंग बन सकता हैं। अब 7 रंगी तो मेघ धनुष में दिखाई देते हैं। उन सैट रंग को हम जा...नी...वा...ली...पी...ना...रा...के नाम से जानते हैं।हमने इस रंगों के पहले अक्षर को लेकर कुछ नए नाम दिए हैं। जैसे

जा: व्यक्तिगत रूप में करेगा(गुजराती में कहते हैं जाते करे)
नी: निखारेंगे
वा: वाद संवाद
ली: लीन रहेंगे(ध्यान मग्न रहेंगे)
पी: पिछाने गे...
ना:नाटक या अभिनय
रा: राग रागिनी संगीत


ऐसे स्किल में बच्चों को खोजना ओर उन्हें प्रस्थापित करने के लिए एक फाउंडेशन तैयार किया गया हैं।आज तक ये फाउंडेशन उन फॉर्मल था,उसे अब कुछ दिनों में एक रजिस्टर्ड फाउंडेशन के तौर पे तैयार करने जा रहे हैं। आज पूरे देश के प्रतिनिधि को होंगे और उन्हें उन के राज्य में को सपोर्ट करेगा उसका मामला तय होने के अंतिम पड़ाव में हैं।

आप भी जुड़िये ओर आगे सहयोग भी देते रहिए।छोटे बच्चे हमारी राष्ट्र की पहचान हैं।विश्व में हमारे देश की पहचान देने के लिए इस मिशन में आप अवश्य जुड़े।

सरकुम:
क्या होगा मालूम नहीं।
कैसे होगा,ओर क्यो  पता नहीं।
जो भी होगा, जैसे होगा,मेरा होगा अच्छा होगा।
आज को देखा हैं, कल को नहीं, सब जुठ हैं यही सही।
कल जो होगा ,देख लेंगे।जो होगा अच्छा होगा बुरा नहीं।