Sunday, November 19, 2017

बीता हुआ कल



बुद्ध भगवान एक गाँव में उपदेश दे रहे थे. उन्होंने कहा कि “हर किसी को धरती माता की तरह सहनशील तथा क्षमाशील होना चाहिए. क्रोध ऐसी आग है जिसमें क्रोध करनेवाला दूसरोँ को जलाएगा तथा खुद भी जल जाएगा.”

सभा में सभी शान्ति से बुद्ध की वाणी सून रहे थे, लेकिन वहाँ स्वभाव से ही अतिक्रोधी एक ऐसा व्यक्ति भी बैठा हुआ था जिसे ये सारी बातें बेतुकी लग रही थी . वह कुछ देर ये सब सुनता रहा फिर अचानक ही आग- बबूला होकर बोलने लगा, “तुम पाखंडी हो. बड़ी-बड़ी बाते करना यही तुम्हारा काम. है। तुम लोगों को भ्रमित कर रहे हो. तुम्हारी ये बातें आज के समय में कोई मायने नहीं रखतीं “

ऐसे कई कटु वचनों सुनकर भी बुद्ध शांत रहे. अपनी बातोँ से ना तो वह दुखी हुए, ना ही कोई प्रतिक्रिया
की ; यह देखकर वह व्यक्ति और भी क्रोधित हो गया और उसने बुद्ध के मुंह पर थूक कर वहाँ से चला गया।

अगले दिन जब उस व्यक्ति का क्रोध शांत हुआ तो उसे अपने बुरे व्यवहार के कारण पछतावे की आग में जलने लगा और वह उन्हें ढूंढते हुए उसी स्थान पर पहुंचा , पर बुद्ध कहाँ मिलते वह तो अपने शिष्यों के साथ पास वाले एक अन्य गाँव निकल चुके थे .

व्यक्ति ने बुद्ध के बारे में लोगों से पुछा और ढूंढते- ढूंढते जहाँ बुद्ध प्रवचन दे रहे थे वहाँ पहुँच गया। उन्हें देखते ही वह उनके चरणो में गिर पड़ा और बोला , “मुझे क्षमा कीजिए प्रभु !”

बुद्ध ने पूछा : कौन हो भाई ? तुम्हे क्या हुआ है ? क्यों क्षमा मांग रहे हो ?”

उसने कहा : “क्या आप भूल गए। .. मै वही हूँ जिसने कल आपके साथ बहुत बुरा व्यवहार किया था. मै शर्मिन्दा हूँ. मै मेरे दुष्ट आचरण की क्षमायाचना करने आया हूँ.”

भगवान बुद्ध ने प्रेमपूर्वक कहा : “बीता हुआ कल तो मैं वहीँ छोड़कर आया गया और तुम अभी भी वहीँ अटके हुए हो. तुम्हे अपनी गलती का आभास हो गया , तुमने पश्चाताप कर लिया ; तुम निर्मल हो चुके हो ; अब तुम आज में प्रवेश करो. बुरी बाते तथा बुरी घटनाएँ याद करते रहने से वर्तमान और भविष्य दोनों बिगड़ते जाते है. बीते हुए कल के कारण आज को मत बिगाड़ो.”

उस व्यक्ति का सारा बोझ उतर गया. उसने भगवान बुद्ध के चरणों में पड़कर क्रोध त्यागका तथा क्षमाशीलता का संकल्प लिया; बुद्ध ने उसके मस्तिष्क पर आशीष का हाथ रखा. उस दिन से उसमें परिवर्तन आ गया, और उसके जीवन में सत्य, प्रेम व करुणा की धारा बहने लगी.


Saturday, November 18, 2017

कुछ लोग...कुछ खास लोग...

Bhavesh pandya dr bhavesh dr kalaam dr bhavesh pandya world record, iim इनोवेशन
कुछ लोग खास होते हैं।
कुछ लोग सहज होते हैं।
वैसे ही खास ओर सहज व्यक्ति से मिलना हुआ।हम दिल्ही से आनेवाली फ्लाइट का इंतजार करके खड़े थे।तभी भारत के जानेमाने प्ले बेक गायक श्री नितिन मुकेश जी भर आते दिखे।आज से पहले में उनसे 3 बार मिल चुका हूं।हमारी नजरे मिली।मैंने तो उन्हें पहचान लिया था।उन्होंने भी मुजे पहचान।मेरे बच्चे को उनके साथ फोटो लेने की इच्छा जताई।वो तुरंत तैयार हुए।मेरा बच्चा भी खुश।
नितिन जी की वो सरलता और सहजता मुजे पसंद आई।आजसे पहले भी मेने उन्हें पब्लिक के साथ, पब्लिक के सामने देखा था।उतने ही सहज और सरल आज थे।
अपनी पहचान कपड़ो से नहीं,काम से होती हैं।फ़िल्म इंड्रस्ट्री में तीन पीढ़ी से जो परिवार हैं वो इतने सहज आज देखे।में फिरसे कहूंगा कि सदाई सदैव हैं।दिखावा कुछ पलका।
कुछ लोग सब्जी लेने के समय भी नए वस्त्र परिधान करते हैं जैसे शादिमें जाना हो।कुछ लोग किसी की नकल करने में अपना समय खर्च करते हैं।और अपनी नकल कोई करे उतनी ऊंचाई पे पहुंचने में देरी करते हैं।
श्री मुकेश
श्री नितिन मुकेश
आज
श्री नील नितिन मुकेश...
क्या वो मेकप नहीं कर सकते?क्या उनके पास पैसा नही होगा।जी नहीं जहां आवश्यकता हैं वहां व्व करते ही होंगे।एमजीआर हम...
जी आशा रखते हैं।जो आगे बढ़ रहे हैं वो अपने काम को महत्व दे अपने ड्रेस कोड या,मेकप को नही।गांधी जी पूरे विश्व में सिर्फ धोती वाले ही जाने जाते हैं।उनकी शट वाली फोटो को देखके तो बच्चे भी उन्हें बापू नहीं मानते।
आप सांजे गए होंगे।
#शुभमस्तु...

सफलता कैसे...!

आप की सफलता।
आप की विफलता।
आप के पूरे भविष्यको बनाने में आपकी दिन चर्या बहोत महत्वपूर्ण हैं।आयोजन के साथ काम करने से ओर धीरज रखने से हमे सबकुछ प्राप्त हो सकता हैं।हमारी दिनचर्या में ही हमारी भावी सफलता छुपी हैं।गांधी जी दोनों हाथोंसे लिख सकते हैं।वो जब अपने सही हाथ से लिख के थक जाते थे तब वो अपने उलटे हाथों से लिखते थे।अगर एक हाथ से थकने के बाद कोई भी आराम करेगा।तब जाके बापू रुकने के बजाय दूसरे हाथ से लिख ते थे।उनकी दिनचर्या ऐसी थी कि वो सारे काम करने के बाद ही सोते थे।उस वख्त आज़ादी की बजह से उन्हें बहोत लिखना पड़ता था।और तब जाके विश्व में सबसे अधिक पत्र लिखने का कीर्तिमान बापू के नाम से जुड़ा हैं।
जिन के जीवन में कोई ध्येय हैं तो इस पोस्टर को अवश्य अपना साथी बनाले।आए बात उन्हें कुछ कम समय में सफलता देगी।किसी को दिखाने के लिए नहीं,कोई देख पाए इतने मजबूत इरादे होने चाहिए।

#में ओर मेरी सोच

Thursday, November 16, 2017

शिक्षामें सुधार...

आजकल शिक्षामें बहोत कुछ नया हो रहा हैं।कुछ लोग नएपन को स्वीकार नहीं सकते हैं।एक समय था कि जब अध्यापक एक मात्र ज्ञान का स्त्रोत था।आज ऐसा नहीं हैं।कुछ लोग आधुनिक शिक्षा व्यवस्था ओर उनमे आनेवाले बदलाव को स्वीकृति नहीं दे सकते या देना नहीं चाहते।
जैसे प्रत्येक व्यक्ति सर्वगुण संम्पन नहीं हैं,वैसे प्रत्येक व्यक्ति सभी बातोंमें जानकारी रखता हो ऐसा नहीं हो सकता।आज पोस्टरमें जो लिखा हैं।वो संदेश शिक्षा से जुड़े सभी व्यक्तियो को उपयोगी हैं।सच्चा शिक्षक व्व नहीं जो बच्चो को पढाये,सच्चा शिक्षक वो हैं जो बच्चोंको शिखने के प्रति लगाव पैदा करे।मेण्य कभी मेरे ब्लोगमें ऐसा नहीं लिखता की में सर्वगुण संम्पन हु।मेनेतो कभी किसीका पोस्टर या बात भी लिखी हो तो उनके नाम से शेर किया हैं।
कुछ लोग ऐसे हैं जो अपनी सोच को बढ़ाने के बदले,जो सोच बदलने का प्रयत्न करते हैं उसे ही पागल गोशित करने का प्रयत्न करते हैं।कुछ लोग ऐसी वाहियात बातोंमें कहते हैंना कि चलती गाड़ी में चढ़ जाते हैं।ऐसे लोगो के लिए ओर शिक्षामें सुधार चाहने वाले सभी को आजका पोस्टर अर्पण करता हूँ।

दिल्ही दूर नहीं...


आजकल सब दिल्ही की चरवाहा कर रहे हैं।वैसेभी 
गुजरात चुनाव हो और दिल्ही की बात न हो ऐसा हो नहीं सकता।में तो आपको चुनाव के अलावा दिल्ही की बात करना चाहता हूं।
आप पोस्टरमें देख सकते हैं कि नेताजी पौधा लगा रहे हैं।साथमें जो लिखा हैं उसपे ध्यान देना हैं।हम सिर्फ पेड़ या पौधे लगाने नहीं हैं।हमें उसका संरक्षण और संवर्धन करना हैं।कहते हैं कि अब दिल्ही डोर नहीं।बस,में भी कहूंगा दिल्ही डोर नहीं हैं।हम सब साथ मिलके सहिमें दिल्ही को दूर कर सकते हैं।
#पेड़ लगाए...

Tuesday, November 14, 2017

ऊबन2




कुछ नाम ऐसे होते हैं,जिनका अर्थ कुछ अलग होता हैं।कुछ अर्थ भी ऐसे होते हैं कि जिसके बारेमें बादमें मालूम पड़ता हैं।वैसा एक नाम हैं,उबुन्टु ( UBUNTU ) के नाम के बारे में एक सुंदर जानकारी हैं।
उबुन्टु ऑपरेटिंग सिस्टम
( Ubuntu Operating System )जिसे हम कम्प्यूटर के बारे में जुड़ी हुई बात के स्वरूपमें देखते हैं।बात ऐसी थी कि
कुछ आफ्रिकन आदीवासी बच्चों के ऊपर एक मनोविज्ञानी प्रयोग कर रहे थे।उन्होंने बच्चो से एक खेल खेलने को कहा।

खेलमें ऐसा था कि  एक टोकरी में मिठाइयाँ और कैंडीज एक वृक्ष के पास रख दिए गए थे।बच्चों को वृक्ष से या कहें कि मिठाई से  100 मीटर दूर खड़े कर दिया गया था।

फिर बच्चो को कहा गया कि, जो बच्चा सबसे पहले पहुँचेगा उसे टोकरी के सारे स्वीट्स मिलेंगे।जैसे ही जानकारी दी गई, रेड़ी... स्टेडी ...ओर गो कहा...तो कुछ नया सामने आया।

सभी ने एक दुसरे का हाँथ पकड़ा और एक साथ वृक्ष की ओर दौड़ गए, पास जाकर उन्होंने सारी मिठाइयाँ और कैंडीज आपस में बराबर बाँट लिए और मजे ले लेकर खाने लगे।

जब मनोविज्ञानी ने पूछा कि, उन लोगों ने ऐंसा क्यों किया ?तो उन्होंने कहा" उबुन्टु ( Ubuntu )"जिसका मतलब होता हैं,कोई एक व्यक्ति कैसे खुश रह सकता है जब, बाकी दूसरे सभी दुखी हों ? "

उबुन्टु ( Ubuntu ) का उनकी भाषा में मतलब है,में कहूँगा  की " मैं हूँ क्योंकि, हम हैं! "आइए उबुन्टु ( Ubuntu ) वाली जिंदगी जिएँ...मैं हूँ क्योंकि, हम हैं!
#साथ बना रहै...!

Monday, November 13, 2017

परखे या समजें....

किसीको परखने की नहीं,
समजने की कोशिश करें।

मेरे एक दोस्त हैं।
उनका नाम रामजी भाई।
रामजी भाई किसान हैं।वो अपने खेतमें कुछ नया करते रहते हैं।एक दिन की बात हैं।हम साथमें थे।मेने उन्हें कहा,'में आपको परख नहीं पाता,आप किसान हैं कि शिक्षक।हाला की वो किसान हैं मगर उनके फार्म में शिखने वाले आते रहते हैं।
मेरा सवाल सुनते उन्होंने कहा,'में किसान हूँ, मेरा काम हैं कि में ऋतु आधारित व्यवस्था को समजू ओर उसके साथ कुछ नया करू।उन्हों ने कहा 'में समज ने की नहीं परखने की कोशिश करता हूँ!'
मेने उनके जीवन और जीवन व्यावस्थाको करीब से देखा हैं।वो किसान हैं,नवाचार करते हैं।उनके बच्चे और परिवार उन्हें सहाय नहीं करते हैं।इस बात के लिए उन्हें जब पूछा तो उन्होंने बताया कि 'वो मुजे परख रहे हैं,में उन्हें समज रहा हूँ।उनका परखने का या मेरा समज ने का जब खत्म होगा तब में कुछ नहीं कर पाऊंगा।मेने जो किया या कर रहा हूँ,वो इस लिए की में उन्हें जता सकू में कुछ कर सकता हूँ,ओर अपने आप से कुछ करता रहूंगा।
पारिवारिक सहाय अगर न होतो कुछ नहीं हो सकता।परिवार को परखने के बजाय उन्हे समज ने का प्रयत्न हमे करना चाहिए।
रामजी भाई ने मुजे एक प्रसंग कहा...।
उनका कहना था कि,जब हम सफल होंगे तो लोग कहेंगे 'नसीब वाला या वाली हैं'।उस सफलत के पीछे हमने क्या छोड़ा या क्या तकलीफ जेली हैं।उस बात का कोई जिक्र नहीं करता।तब हम हमारे नसीब को देखते हैं।हम हमारे नसीब को सांजे ने की बजाय परखने का काम करते हैं।हम सिर्फ काम करना हैं।परखने में समय बर्बाद न करें।जब हम सफल होंगे तब लोग हमें समझने का ढोंग करेंगे।
आज हम नाटक  के मुख्य किरदारमें भले न हो।एक दिन हमें केन्द्रमें रखके किरदार लिखे जाएंगे।तब तक हम समजेंगे, परखेंगे नहीं।
#देखेंगे...समजेंगे...नए तरीके...

Sunday, November 12, 2017

एक इतिहास...

कुछ दिन खास हैं।
कुछ दिन खासम खास हैं।
आप एक कैलेंडर के पेज को देख रहे हैं।कहा जाता हैं कि इतिहास उन्हीका लिखा जाता हैं,जो विजेता होते हैं।काला बाजारी को रोकने के लिए श्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंधी करवाई।लंबी योजनाओं को हम शार्ट टाइम में नहीं नाप सकते।वैसा कुछ आज दिख रहा हैं।आज कैलेंडर बनाने वाली किसी कम्पनी ने अपने कैलेंडर में आज के दिन को खास दिन माना हैं।
देखते हैं।आगे आगे क्या होगा।आज में बाबूजी महाराज का शुक्रिया अदा करूँगा जिन्होंने मुजे आए फोटो भेजा हैं।कुछ दिन हमे पुराने अच्छे लगते हैं।जे.कृष्णामूर्ति कहते थे के पुराने दिनोंमें से अच्छी बातें हमे याद रखनी चाहिए।और बुरी चीजे फिरसे अपने जीवन में न आये वैसा होना चाहिए।मगर हमे आज ही अपने कर्मो का फल चाहिए।
मेने एक कहानी लिखी थी।कहानी में था...'भगवान मयजे धीरज चाहिए ,मगर आज ही'।आज आम का पेड़ लगाएंगे तो आज ही आम मिलेंगे क्या।आज अगर कोई बच्चा साइकल सिखते समय चोट खाता हैं तो क्या उसे साइकिल नहीं सिखानी?
देखेंगे...
समजे गे...
#नोटबंदी

Saturday, November 11, 2017

मेरे दोस्त...मेरे साथी...

भावेष पंड्या dr bhavesh pandya iim innovation teacher education वर्ल्ड record


लाइट...
साउंड...
एक्शन और बाइट...
पिछले कुछ सालों से ये काम शुरू हुआ हैं।आज मेरे एक दोस्तने मेरे कुछ वीडियो,प्रोग्राम ओर ऐसी क्लिप भेजी जो मेने किसी न्यूज़ चैनल या संस्था के लिए रिकॉर्ड किये थे।
आज तक मेरे सभी वीडियो मयजे भेजने वाले मेरे दोस्त राकेश पटेल का में शुक्रिया अदा करता हूँ।कुछ वीडियो आज से 10 साल पहले के हैं।इस वीडियो में में भी अपने आपको नहीं पहचान पाता।
पहले कुछ डर लगता था।अब केमेरे से डर नहीं लगता।हा, कुछ निजी कारणों से में खुद को टी.वी. के कार्यक्रमो से दूर रखता हु।फिरभी आज 30 से अधिक इंटरव्यू ओर 80 से अधिक live डिबेट या रिकॉर्डेड कार्यक्रम हैं।
#Love You राकेश...टेक्निकली सपोर्टर ओर मेरे टेक्निकली एडवाइजर का शुक्रिया जिसने मुजे मेरा डॉक्यूमेंट कुछ अच्छे तरीके से पहुंचाया।

UNICEF ओर शिक्षा

भावेष pandya pandya bhavesh dr bhavesh pandya iim innovation education वर्ल्ड record लिम्का record

आज शिक्षा का बहोत महत्व हैं।कुछ दिन पहले वडोदरा से मुजे निमंत्रण मिला।UNICEF के साथ बरोडा की स्थानिक संस्थाभी इसमें जुड़ी थी।बच्चियो के लिए वैश्विक स्तर पे क्या संभावना हैं।कोनसी व्यवस्था का निर्माण करना चाहिए।कैसे शिक्षामें छोटी बातों को इम्प्लीमेंट करके परिणाम प्राप्ति तक पहुंच सकते हैं।इन महत्वपूर्ण विषयो के साथ मुजे भी निमन्त्रित किया गया था।
मेण्य मेरी बात रखी।सभी को पसंद आई।बहोत लोगोने उसे शेर भी किया।दीपक जो की इस कार्यक्रम के फोटोग्राफर थे।उन्हों ने मेरे साथ ये फोटो शेर किये हैं।
UNICEF गुजरात की लक्ष्मी भवानी मेम के साथ 91.1 RJ जाह्नवी के साथ मेरा पहला परिचय हुआ।91.1 के माध्यम से मुजे कहानी कहने का मौका मिला।शिक्षा में नवाचार ओर मेरी समजाई बातों के साथ चर्चा करके मुजे अच्छा लगा।
कुमार मनीष जो मेरे दोस्त हैं।जिन्होंने Times of India में मेरे इनोवेशन की स्टोरी की थी।उनके सहयोग से मुजे ये मौका मिला।
#UNICEF
#Bnoवेशन
#Innovation