Sunday, October 1, 2017

गांधीजी...


आज गांधी जयंती हैं।
विश्व विभूति गांधी जी।
सारे विश्वमें अहिंसा के विचार को फैलाया।उनकी विचारधारा को पूरी दुनियामे स्वीकार किया गया हैं।दुनियामें कोई ऐसा देश नहीं जहाँ मोहनदास गांधी की प्रतिमा या रास्ता न हो।शांति के नोबल पुरस्कार विजेता ऐसे हैं जिन्होंने गांधी जी के विचार को अपनाया।सफल हुए और शांति का नोबल पुरस्कार मिला हो।मगर शांति और अहिंसा का संदेश सिखाने वाले बापू को आजतक नोबल पुरस्कार नहीं मिला हैं।और एक बात जो आपको बतानी आवश्यक हैं कि आजतक नोबल पुरस्कार के लिए गांधीजी का नाम चार बार कमिटी के सामने आया हैं।मगर अबतक गांधीजी को ये सन्मान नहीं मिला या,नहीं दिया गया हैं।
आजकल गांधी जी को मजाक बनाया जाता हैं।आप इस पोस्टरमें देख सकते हैं।मजाक ठीक हैं।बापू भी मजाक करते थे।उनका सेंस ऑफ ह्यूमर बहोत अच्छा था।सबसे ज़्यादा पत्र लिखने का रिकॉर्ड भी बापुके नाम हैं।
आज तो बापू नहीं हैं,उनके विचार और बाते आज भी हमारे आसपास देखने,सुनने को मिलती हैं।
आज के इस पावन दिवसपर बापू को वंदन।
#राम राज।

में रावण हूँ...

में राम नहीं,रावण बनाना पसंद करूँगा।एक विद्वान और शक्ति के उपासक थे रावण।जिन्हें हम आजभी जलाते हैं।एक राजा जिसने किसीके कहने पर आपनी बीबी को निकाल दिया।अरे,बीबी को पूछते की क्या सही हैं,क्या गलत।ऐसे राजा की हम पूजा करते हैं जो अपनी सगर्भा बीबी को छोड़ते हैं।आज तक चीर हरण करने वाले दुर्योधन को किसीने कहीं भी जलाया हैं?

435 दिन तक सीता रावण के पास थी।रावण ने उसे छुआभी नहीं।रावण पंडित था।अभिमानी हो सकता हैं।उसमें भक्ति थी तो हिमालय उखाड़ दिया।उसमें अभिमान आया तो वो अंगद का पेरभी न हिला पाया।में महापंडित रावण को पसंद करूँगा।मेने ऊनको आज से नही,बचपन से आदर्श माना है।

मेरे एक करीबी दोस्त हैं।आज हम एक दुसरे से बात नहीं करते या नहीं करना चाहते।कुछ साल ऐसेही गुजरेंगे।हा, एक सामाजिक तौर पे प्रतिष्ठित हैं।मुजे मालूम हैं वहाँ तक वो भी रावण के करीब हैं।वो भी रावण को सन्मान देते हैं।मगर उनके पास राम के भी गुण हैं।सिर्फ सुनी हुई बात पे यकीन करते हैं।करने के लिए कारण भी होंगे।आज बात ये हैं कि रावण इस लिए की उन्होंने कोई गलती दूसरी बार नहीं की,एक बार की गलती कोई भी माफ करता हैं।मगर गलती फिरसे न हो तो।रावण भी इस बात को मानते थे।एक समय की मेरी गलती से मैने कुछ छोटे विचारक को मेरी टीम से दूर होते देखा हैं।में उन बच्चों से फिरसे जुड़ना चाहूंगा जो आज मेरे साथ नहीं हैं।मेरे पास नहीं हैं।मेरे पास उन बच्चों के लिए आयोजन हैं मगर बच्चे नहीं हैं।मुजे भी विश्वास हैं कि मेने तय किये हैं वो बच्चे फिरसे मुझसे जुड़ेंगे।क्या कोई महत्वपूर्ण क्रिकेट मेचमें कोई एक खिलाड़ी एक गलती से रनआउट होता हैं तो क्या उसे दूसरी बार नहीं खिलाना सही हैं।
किसीने कहा हैं...

में राम नहीं तो सीता कहासे लाउ।


में गलती का स्वीकार करूँ,मगर में तो कभी गलत होही नहीं सकता।ऐसी सोच रखने वाले गलती करते हैं और अपने आप को राम के सांजेमें डाल के मर्यादा का नाम देते हैं।मर्यादा तो रावण ने भी निभाई थी।मगर,जो जीतेगा वोही इतिहासमे अमर होता हैं।में अमर होना नहीं चाहता,क्योकि में राम बनना नहीं चाहता।

मुजे यकीन हैं कि दुर्योधन,शकुनि को छोड़ने वाले ये लोग रावण को जला रहे हैं।ऐसे लोग ही एक दिन मुजे भूल जाएंगे।और मुजे कोई भूले वोभी मुजे पसंद नहीं सो में रावण बनके ही मरना चाहूंगा।में हर साल जलना चाहूंगा।में रावण बनना चाहुगा।में रावण बनूँगा।
रावण के पास सोना था।पूरी लंका सोनेकी थी।रावण सोने में सुगंध डालना चाहता था।रावण मंदिर में से दुर्गंध दूर करना चाहता था।आज भी सुगंधित सोना नहीं मिलता।नहीं बना हैं।शराब में से गंध भी नहीं दूर हो पाई।रावण अपनी गलती को समझता ओर सुधरता।में भी समझता हूं और सुधारने का प्रयत्न करूँगा।
में ब्राह्मण हूं।और ब्राह्मन जैसा बनुगा।में राम की पूजा करूँगा मगर रावण बनुगा।मेरे जीवन में एक गलती दूसरी बार नहीं करूंगा,में रावण बनुगा।रावण पंडित था।उसके पास पुष्पक था।वो विज्ञान और टेक्नोलॉजी के उपयकर्ता थे।वो 32 कलामें निपुण थे।में भी निपुण होना चाहूंगा,में रावण बनना चाहूंगा।

में राम की पूजा करूँगा,मगर रावण बनना चाहूंगा।





फरकडी:1


आज में शिक्षक हूँ।
उस से पहले में कार्टूनिस्ट था।गुजरात के कई दैनिक पत्र और मेगेजीन में मेरे कार्टून छपते थे।उस समय सभी कैरेक्टर बनाने पड़ते थे।आज ऐसा नहीं हैं।आज तो कम्प्यूटर पे काम होता हैं।में तो आज भी स्केच करके कार्टून बनाता हूँ।नवरात्री के दिनोंमें मेने रोजाना 1 कार्टून बनाया और शेर किया।अब से जब भी कार्टून बनाऊंगा आप को शेर करूँगा।
#फरकडी...

इस नवरात्री से...


में अध्यापक हूं।
में इजनेर बनना चाहता था।में तबीब बन पाता,अगर मेरी माजी हालत अच्छी होती।मेरे लिए तो मेरे सपने चकना चूर हो गए।में पढ़ाई में भी शार्प था।में डॉक्टर बनता मगर बन नहीं वाया।अब में शिक्षक बनके क्या करू।मेरी दुनिया अब उजड़ चुकी हैं।
मेने जो यहाँ लिखा हैं वो मेरा नहीं हैं।हमारे आसपास कई शिक्षक हैं।वो कभी कभी ऐसी बाते करते हमने सुनी हैं।आजका ये पोस्टर हमे एक सुंदर संदेश देता हैं।
हम जो नहीं कर पाए हैं,उसका हमे दु:ख हैं में डॉक्टर नहीं बन पाया,मगर में अब ऐसे काम करूंगा जो कई डॉक्टर पैदा होंगे।हम जो नहीं कर पाते हैं,उनके पीछे चिंता न करें। अब जो हम कर पाएंगे उसका परिणाम हमारी जिंदगी बदलेगा।
#नई सोच,नया विचार।

Saturday, September 30, 2017

अब ऐसा होगा...

आज कल चर्चा चलती हैं।पर्यावरण के लिए हर कोई व्यक्ति चर्चा कर सकता हैं।पेड़ लगाए और पेड़ों की सुरक्षा करें।आए ऐसे सुजाव हैं कि हर कोई दे सकता हैं।एक पोस्टर मुजे मिला।उसमें कुछ लिखा नहीं था।मगर जो चित्र ओर उसका विवरण लिखा हैं।उसे देखते ओर कुछ नहीं लिख सकते।एक पंखी पौंधे को कह रहा हैं।तुम्हारे पास अगर पानी नहीं हैं तो मेरे आंसु हैं।मेरे आंसुओ से ये तुम्हारा काम होगा।पोस्टर तो अच्छा हैं,मगर एक संदेश भी हैं की हमे पौंधे को पानी पिलाना होगा।वरना पोस्टर सही होगा।
#पोंधो वाली सरकार।

INDIA Tv



बच्चो के साथ काम किया।बच्चो के साथ काम करता हूँ।बच्चो के साथ काम करता रहूंगा।ये तीन विधान मेरे जिंदगी के विधान हैं।वर्ष 2016 में मुजे सृष्टि सन्मान मिला।मुजे राष्ट्रपति भवन पहुंचने के लिए निकलना था।बुखार के कारण हाल बेहाल था।में हैदराबाद से आया और दूसरे दिन दिल्ही के लिए निकलना था।
बुखार हैदराबाद से ही मेरे साथ था।में घर पहुंचा।रात के 8 बजे होंगे।श्री विश्वास बासु ओर आनंद जयसवाल मेरे घरपे थे।INDIA Tv ओर LIVE न्यूज़ के लिए मुजे इंटरव्यू देना था।बुखार की उपस्थिति में मैने इंटरव्यू दिया।आप भी इसे पसंद करेंगे।आप को भी पसंद आएगा।
आप के विचार महत्वपूर्ण हैं,इस लिए विचार और सुजाव मुजे भेजे।

Friday, September 29, 2017

नवाब की नवाबी...

कुछ दिन पहले की बात हैं।राजस्थानी संगीत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले नवाब जी।गुजरात के महेमान थे।केसर आइडल के माध्यम से वो गुजरात आये थे।इस फोटोग्राफ में जो सेल्फी ले रहे हैं वोही नवाब जी हैं।विश्व के कई देशमें उन्होंने संतूर बजाय हैं।आप को होगा कि संतूर बजाने में क्या बड़ी बात हैं।मगर इनके संतूर में जैसे भगवान का ठिकाना हैं।सिर्फ 20 मिनिट के अंदर हमे अनुभूति करवाते हैं।
संगीत की मुजे विशेष जानकारी नहीं हैं।मगर संतूर से मुझेभी शांति की अनुभूति हुई।कुछ महीनों तक वो यूरोप के प्रवास में हैं।इन कार्यक्रम के आयोजन के लिए आप इनका संपर्क कर सकते हैं।

श्री तेजश शाह
डिरेक्टर,केसर आइडल
MO:+91 9998004433

Thursday, September 28, 2017

अन्नपूर्णा....

क्या आप कभी भूखे सोये हैं।शायद ये सवाल ही गलत हैं।कोई भूखा नहीं सो सकता।भूख किसी को सोने नहीं देती।रोटी फ़िल्म में एक संवाद था इसमें रोटी के महत्व को राजेश खन्ना ने बहोत खूब पेश किया हैं।साउथ इंडियामें कुछ स्टेट ऐसे हैं जहाँ के लोगो को सरकार द्वारा भरपेट इडली मिलती हैं।
मेने वो इडली तमिलनाडु में खाई हैं।गुजरात के बनासकांठा में ऐसाही कुछ हैं।अन्नपूर्णा रथ के माध्यम से श्री केसर सेवा की तहत ये काम चालू हैं।बनासकांठा जिला पंचायत के पूर्व प्रमुख ओर राजकीय व्यक्तित्व के स्वामी राजेन्द्र जोशी(राजू जोशी)इसे क्रियान्वित किये हुए हैं।
केसर सेवा के नाम से एक रथ बनाया गया हैं।इस रथ के निर्माण में 6 से 8 लाख रुपया लगता हैं।ऐसे चार रथ आज पालनपुर ओर डीसा में चल रहे हैं।सबसे बड़ी बात ये हैं कि सिर्फ 2 रूपयो में भरपेट खिचड़ी मिलती हैं।एक बार दो रूपया देके आप भरपेट  खा सकते हैं।
मेरी जब श्री राजू जोशी से बात हुई तो उन्होंने कहा,मेरी माँ का नाम केसर हैं।उन्हों गरीबो को,भूखे लोगो को खिलाने का शोख था।अब सही वख्त पे पोषणयुक्त खाना नहीं मिलेगा तो लोग अशक्त बनेंगे।होटल में मिलने वाला नास्ता 20 से 25 रुपये में मिलता हैं।अब 20 रूपिया दे के बाजार के नाश्ते के सामने 2 रूपयो में भरपेट बादाम,काजू ओर पिस्ता वाली खिचड़ी कोंन नहीं लेगा।
ये पूरा काम राजू जोशी की ऑफिसमें श्रीमती सोनल मोढ देख रही हैं।उन्होंने बताया कि कई लोग तो अन्नपूर्णा रथ की राह देखते हैं।शहर में अस्पताल या ऐसे किसी कचेरी के काम से आये लोगो के लिए अन्नपूर्णा रथ आशीर्वाद समान हैं।
आप भी इस काम में सहयोग दे सकते हैं।किसी एक दिन के लिए आप 2100 रूपया दे सकते हैं।2100 रूपया ओर 2 रूपये में प्लेट की आमदनी से रथका एक दिनक  खर्च निकलता हैं।
मेने एक विधवा औरत को डीसा में अपने भानजे के लिए रोज ये खिचड़ी लेते देखा हैं।कई लोगो के लिए ऐ बचत हैं।जिस 20 रूपये में वो कचोरी समोसा खाके न पेट भर सकते हैं न स्वास्थ्य प्राप्त करते हैं।आज ये खिचड़ी रोजाना 18 रूपये बचाती हैं।ऐसे तो महीने में 540 कई बचत होती हैं।कुल मिलाके सालाना 6 हजार रुपया एक गरीब का बचता हैं।श्रो राजू जोशी ऐसे नए चार रथ के लिए आयोजन कर सकते हैं।
#Bनोवेशन
#GoG

Wednesday, September 27, 2017

चौथा कोंन...?

आज तक तीन बंदर के बारे में सुना था।आज से पहले तीन बंदर की बाते ओर कहानियां सुनते आ रहा हूँ।सुनाते आ रहा हूँ।आज किसी ने मुझे चार बंदर वाले पोस्टर भेजा।तीन तो हमे मालूम हैं।आए चौथा वाला मोबाइल लेके बेठा हैं।आज कल हर चार व्यक्ति में से तीन मोबाइल पे व्यस्त होते हैं।कई लोग काम भी करते होंगे।एमजीआर ज्यादातर लोग बस ऐसे ही डेटा ओर समय बरबाद करते हैं।आप के आसपास ऐसे कुछ नए ओर दूसरे साथी होंगे जो हमारे चौथे बंदर होंगे।आप भी इसे चौथे बंदर तक पहुंचाए।
#मेरे बंदर,मेरे विचार...


Tuesday, September 26, 2017

कोंन लिखेगा...?



एक फोटोग्राफ मिला।
किसी दोस्त ने भेजा हैं।
श्री रविन्द्र अँधारिया ने इसके बारे में फोटो के साथ कुछ लिखा था।अब मेरी बात।में भी लिखता हूं।139 से अधिक पुस्तक लिखे हैं।बच्चो का साहित्य तो यहाँ किलो के भाव से बिकते हैं।
में तो खुश हूं कि इस तरीके से भी तो ये बेचते हैं।और हा, किताबो का इस तरीके से बिकना कोई नई बात नहीं हैं।मगर में खुश हूं कि बच्चो की किताब बेची जा रही हैं।