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Tuesday, July 4, 2017

कश्मीर:अमरनाथ नहीँ गयेतो...





कश्मीर हमारा हैं!
कश्मीर हमारा स्वर्ग हैं!
हमारा दुर्भाग्य की स्वर्गमें भी शांति नहीं हैं!आज में जो लिखने वाला हूँ शायद किसीको पसंद न आये!

हमे कश्मीर का विरोध करना हैं!में फिरसे कहता हूँ की कश्मीर का विरोध यानी कश्मीर की चीजों का विरोध!हम न कश्मीरी चीजे खरीदेंगे!न हम दो तीन साल कश्मीर गुमने जायेंगे!

हम कश्मीर जाके गुमके वापस आते हैं!मगर हमारे माध्यमसे हुई आमदनी आज हमारे सैनिकों के सामने इस्तमाल होती हैं!
एक छोटासा मेसेज whats aep में आया था!यह मैसेज मुझे whats aep पे मिला था!उसमें भारतीय सौनिको के नाम से कहा गया हैं!

370 के बारेमें पहले भी यहाँ लिखा हैं!कश्मीर में #RTE#RTI लागु नहीं हैं!अरे आज से लागु होने वाला #GST भी कश्मीर में लागु नहीं होगा!

कश्मीर की आर्थिक व्यवस्था के ऊमत जाना कश्मीर घूमने
मत जाना!हमारे पैसे हमारे सैनिको को मारने वाले तक हमारी सहायतासे ही पहुंचाता हैं!

अमरनाथ यात्रा...हिन्दू धर्ममें सर्वोच्च हैं!कई लाख लोग जाते हैं!कश्मीर तो कश्मीर, अरे!चीन भी डराता हैं!अमरनाथ यात्रा के मार्ग को लेकर चीन आज गड़बड़ी में हैं!वो पैसा भी कश्मीर तक वैसे ही पहुंचता हैं जैसे कश्मीर गुमने का पैसा पहुँचता हैं!

ऐसी जानकारी हमारे सैनिकों के नाम के साथ दी गई हैं!
अगर हम दो चार साल अमरनाथ यात्रा नहीं करेंगे तो  क्या मर जाएंगे ?कश्मीर नहीं जायेंगे तो कच्चा खाएंगे?

अगर नहीं तो...आप इस छोटे से सन्देश को पढ़ें और फेंलाये!

हम लोग कश्मीरियों की आमदनी का जरिया खुद तैयार कर रहे हैं!
और वही कश्मीरी लोग हमारे
सुरक्षाबलों BSF, SRPF, IAS,  IPS, के ऊपर हमला कर देते हैं,
पत्थर मारते हैं,भारतीय सेना का विरोध करते है

कश्मीर में धर्मशाला नहीं बनने देते हैं!
सिर्फ 2 साल के लिए कश्मीर का आर्थिक बहिष्कार कर दो,
सारी "आज़ादी"  यासीन मालिक और गिलानी के तम्बू में धरी रह जाएगी।

फिर देखते है, पाकिस्तान और चीन कितना कश्मीरियो को पैसा पुराता है!

मत जाओ कश्मीर घूमने,
शिमला जाओ,
दार्जिलिंग जाओ,
केरल जाओ
कन्याकुमारी जाओ
ऊंटी जाओ, उड़ीसा जाओ
उत्तराखंड, गुजरात जाओ
 कही भी जाओ...

कश्मीर में जाने का मतलब आतंवादियों के हाथ मजबूत करना.....

किसी भी कश्मीर एम्पोरियम से कोई सामान न खरीदें,
गली मोहल्ले में घूमने वाले कश्मीरियों से कोई सामान न खरीदें...

राष्ट्र हित के लिए सिर्फ दो साल के लिए  कर के देखें.
सारा दृश्य बदल जायेगा!

कृपया आगे प्रसारित कर हमारी फौज के आग्रह को सम्मान...कश्मीरका समाधान खूब हैं आसान!

Tuesday, April 25, 2017

तेजबहादुर से तेज सोसियल मिडिया


हमारा देश लोकतान्त्रिक देश हैं!विश्व में सबसे बड़ी लोकशाही हमारे देश में हैं! जब भारत का सामान्य चुनाव होता हैं तब विश्व के सबसे अधिक मतदार मतदान करते हैं!हमारे देशमें सभी नागरिको को विचार और वाणी स्वतंत्रता का अधिकार मिला हैं!कोई कुछ भी बोल सकता हैं! आज कल सोसियल मिडिया में ऐसे निवेदन आ रहे हैं!कभी नेताओ के बारें में तो कभी कोई व्यवस्था के बारें में!कई बार तो हम सोचे समजने के अलावा इसे सिर्फ फोरवर्ड करते हैं!

आधुनिक समय में सोसियल मीडिया में कुछ ऐसा दिखता हैं की हम सिर्फ उसे मजाक में ले लेते हैं!यहाँ एक जानकारी देना चाहूँगा की अपने देश में एक बार इमर्जन्सी लगी थी!समग्र देश के सभी विपक्षी नेताओ को जेल में बांध करदिया गया था!उस वख्त कोंग्रेस की सरकार थी!श्रीमती इंदिरा गाँधी प्रधानमत्री थी!इस बात को लेके आज भी राजकीय नेता और पक्ष अपनी बाते करते हैं!उस वख्त ऐसा था!आज ऐसा हैं!मगर एक बात तय हैं की आज एक नया शब्द मिला हैं!इस शब्द को हम सोसियल मिडिया के नाम से जानते हैं!आज भारत में जनसँख्या से अधिक सिमकार्ड उस हो रहे है!

आज ये बात करने का एक अलग अंदाज है! अलग विचार हैं!कुछ दिन पहले एक समाचार मिला हैं!तेज बहादुर नाम के एक सिपाही की यहाँ बात हैं!उन्हों ने खाने के बारेमें शिकायत की थी!उनकी शिकायत में उन्होंने कहा था की हमें खाना अच्छा नहीं मिल रहा हैं!उसने फोटो और वीडियो वायरल किया था!उसने यह विडिओ प्रधानमत्री को शेर किया था!बात चली!भारत सरकार के गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने तुअरांत कारवाही की!चीफ सेक्रेटरी ने इसकी रिपोर्ट बनाई और तेज बहादुर को सस्पेंड किया गया!रिपोर्ट में तेज बहादुर को अनुशाशन हीनता के लिए जिम्मेदार मना गया!बीएसएफ ने अपना एक निवेदन जारी किया!

यहाँ तक अगर देखा जाए तो एक प्रोसेस हैं!फ़रियाद,उसके आधार पर तपास और रिपोर्ट को देखने के बाद निर्णय या सजा!ऐसी प्रोसेस में कोई विरोध नहीं हैं!यहाँ में एक बात पूछूँगा की क्या आपने कभी संसद की केंटिन में खाया हैं!जितने पेसे हम भिखारी को देते हैं सिर्फ उतने पेसो से हमारे गरीब संसद सदस्य केंटिन में खाना खाते हैं! आज बाजपा की सरकार हैं!इस से पहेले किसी और की सरकार थी!आगे भी सरकारे आएँगी मगर बदलेगी!ऐ जो सिपाही तेज बहादूर हैं उसको निलंबित किया गया हैं!सही बात ये हैं की सरकार ने अपने खिलाफ आवाज को दबाने की कोशिश की हैं!इस से पहेले हमारे पुलिस और ऐसी फ़ोर्स के कई जवान मानसिक रूप से परेह्सं हो के आत्महत्या कर चुके हैं!इस वख्त क्यों जिम्मेदार अधिकारी को निलंबित नहीं किया जाता!हमें मरने से बचने वाला सिपाही अगर मरता हैं!किसी का नाम लिख के मरता हैं!उस के खिलाफ न कोई जांच होती हैं न कोई सवाल!बात ये हैं की आज से पहेले भी तेज बहादुर अपनी शिकायत कई बार कर चूका हैं!उसको इतना परेशां किया गया हैं की उसने विआरएस के लिए भी अरजी दे राखी हैं!

कुछ साल पहले की बात हैं!हमारे मिडिया कर्मी जो भी बात चलाते हैं!लोग इसे भूल जाते हैं!थोड़ी बहोत चर्चा होती हैं!आज से कई साल पहले बोफोर्स का गोताला आया था!इसे ऐसे उठाया की दूसरे चुनाव में राजिव गाँधी की सरकार बुरी तरह से हारी!मिडिया ने वाह वाही करली!थोड़े सालो बाद जब कारगिल युध्ह हुआ!हम जीते अटल बिहारी बाजपाई जी उस वख्त प्रधानमंत्री थे!उस चुनाव में उन्हों ने कारगिल की जित को केश करना चाह!हाला की शाइनिंग इण्डिया नहीं चला!मगर पाकिस्तान से जो हम जीते थे उसमें बोफोर्स के ही तोप थे जिस की बजह से हम युध्ह जीते थे!

हमारे सिपाही जो बोर्डर पे लड़ते हैं उनके लिए बखतर ख़रीदे गए यहे!समाजवादी नेता ज्योर्ज फर्नाडिस हमारे रक्षा मंत्री थे!उस समय किसी ने कहा ‘यह बख्तर सही  नहीं हैं!इस की खरीदी में गफला हुआ हैं!मिडिया में बात आई!किसीने पैसा खाया,किसी ने खिलाया!ऐ बात बांध हुई!थोड़े समय बाद किसी पाकिस्तानी हमले में हमारे सिपाही वोही बखतर लेके सामने से आने वाली गोली का इन्तजार कर रहे थे!मगर वो बख्तर ऐसा था की  गोली रुक ने के बजाय आरपार चली गई!इस बख्तर के भरोसे कई सिपाही शहीद हुए!उसकी खरीदी करने वाले नेता और अधिकारी को क्या हुआ!कहा गए हमारे सोसियल एक्टिविस्ट?

अब फिर से तेज बहादुर की बात पे आते हैं!उन्हें निकला गया!सही गलत की बात नहीं हैं!यहाँ बात हैं हमारे मिडिया की!ख़ास कर के सोसियल मिडिया में सक्रीय रहने वाले कई लोग इस से कोमेंट करने लगे!किसी ने लिखा की ‘घर में खाने के बारें में जबान न चलाए!नेता न बने वरना निकल दिए जाओगे!यह गलत हैं!क्या हम इस गंभीर मुद्दे को मजाक में लेंगे!क्या हमारे लिए घर परिवार छोड़ने वाले सिपाही को खाना अच्छा नहीं मिलना चाहिए?

इस बात को दो तरीको से देखते हैं!एक तो ये की तेज बहादूर का जो भी हुआ!इसे हमें एक सरकारी तंत्र के आधार पे समजना चाहिए!दूसरा ये की सिर्फ मजा लेने के लिए हमें ऐसे कोमेंट नहीं करने चाहिए!क्यों...सिर्फ लैक इकठा करना हमारा मकसद हैं!क्या हम कभी हमारी बहन के फिगर के बारेमें कोमेंट करते हैं!क्या हम कभी अपने माँ बाप के बारें में कुछ ऐसा लिखेंगे की जो मजाक बने!क्या तेज बहादुर को मालूम नहीं होगा की उस के उपरी अधिकारी के बारें में वो प्रधानमंत्री को कुछ बताएगा तो प्रधान मंत्री या गृह मंत्री खुद इन्क्वायरी नहीं करेंगे और इसे गुनहगार ठहराया जायेगा!आप सोचभी नहीं सकते की क्या बीती होगी उस परिवार में जिस ने सालो तक अपनी परिवार की जिम्मेदारी छोड़ के देश की सेवा की!क्या उसे ये बदला देना या तेज बहादुर की बात की मजा लेना सही हैं!


आज तो ऐ बात आप तय करें की देश के सिपाही,ऑर्ट और शिक्षा से जुड़े किसी भी मुद्दे को मजाक न बनाया जाए!जब तक ऐसा होगा हम हमारी जिम्मेदारी चुके ऐसा कहा जायेगा! आज से हम संकल्प करें की जिससे हमारे देशवासी ऐसी कोई कोमेंट करें तो हम उसे बढ़ावा न दे!और ऐसी जानकारी को न फेलाए! 

Monday, August 18, 2014

શીખનાર....શીખવનાર...


Diwali lamps are somewhere , let's invent a dive is somewhere holicalo true teaching.
 
bHaVeSh PaNdYa
Mr Anil Gupta (SRUSTI ) Pro. Vijaya Sherichand (IIM )Mr Purohit(gcert) and me @ 
INNOVATIVE CONFARNCE
Nowadays hundred percent of the profits from education to business to everyone chesiksanani chejivanamam Education is very important chekoi a thinker wrote , " Today if you think education is expensive to adopt the view that illiteracy. " This is a time dedicated to appeal saune think that the time for a walk along the much needed global chebajara been increasing cheavaka checina Japan toys Now the cost of India's villages   without padebhanatara why, why ?
India pachataahim mekoleno prabhavasiksanamam education and exercise in a contest to guess prakriyayada. Only clerk to prepare an analogous Student and Teacher Education pranaliekadharyum and pathyakramaahim malakhumekasarakho curriculum and between student and teacher 'self' as this increases between the 'vani true identity, his true identity be thainavi education policy Start thaiyasapala Committee recommendation "without the burden of   learning 'banyumgujarate implemented before the start of the decade kariakha country "without the burden of   learning 'in honor of the first implementation of karyuma Upper Education "project was to get larnigano base. been implemented. Today 'Right to Education: 2010ne based format cheajhadina right place to study so many years after   the Constitution be amended to enjoy something new government took accomplishment. " without the burden of   learning 'and the' Right to Education: Educational knows that the combination of 2010num padhdhatiaje malakhumsemestara with this method and it should be an occasion to learn and sikhavavunni karasumpahelam talk.
Event: A 
A chokarone chechokaro seventh class is taught by a teacher in the seventh grade pass mark-sheet cheteetale guruji who was the seventh class and became a teacher at hatamte sum of the three, and two were used. NaCl that   was salt aje It is also necessary to be shifted to the teaching of the tenth class pass to become a teacher two years have passed PTC PTC will be shifted to the twelfth pass specific exams to become a teacher can hatamaje could become a primary school teacher chebhanavavanum are the same. Is the sum of three and two. NaCl ie   salt cheaje curriculum also suggest that teacher qualifications to do the same if they have to change ?

Between the learning and teaching it is one. Similarly,  education - training in a ' q ' as more chejema sikhavavummam learn the importance of ' self ' , but also the importance of   education, training in the ' Q ' in the education and training of RTÉ cheaje much importance was given to Gujarat ' Gujarat Council of Educational Research and Training (GCERT) , Sarva Shiksha Abhiyan and other organizations having their purview proper planning and implementation of education, training and strives to be the best case, the instructor will be teaching the right way to thasea of education is organized by the Department.
In terms of education, training several significant factors that lead to these matters sakegujaratamam other states   in the past decade   observed in primary education schools materially rich cheindiyana Institute of Teachers Education that ' Teachers' University ' established. The result of specific training in teaching a few years malasecildrana University banaseha a global organization , like the one of the two competing vartaspardha and small group of University Teachers with teacher training project in the university's Children found nathigujaratana visionary Shri Narendra Modi Prime Minister. It is therefore certain that the Children's Global University is to prepare teachers and instructors that we sort , distinct or unique feel.
Education, training and other innovative works in Gujarat since chechella two primary schools in the state curriculum for children, teachers, instructors and teachers training in the writing of authors chepathyapustakana connects top to bottom.
Abhiyana SSA teachers and instructors in the entire section of the Teacher's Training Quality of primary education in Gujarat for the Sarva Shiksha Abhiyan ' quality of cell functioning " in a unique and dynamic approach ' activity by the knowledge that ' wisdom '. each child's pace sikhevisvana whose education is the demand factor ' eksiletara Learning ' and ' classmates learning ' approach and a properly nibhavato its convener Mr. Dinesh Desai pedagogy based approach that can stand in front of the world is running efficiently.
Admission and view programs such important work done by the government in the last decade, awareness and lenaraare who cheprasiksana question here! Education, the education of associated personal thing - to strengthen the training of five-year-plan specific to the Teachers' University other organization and responsibility must be fixed circular.
Gujarat Teacher Kai lost nathirajya , a unique identity to the nation and country level apavim Gujarat education and training of teachers to find innovative kamakarata aeaeema to Ahmedabad chesri Anil Gupta and Mr. Vijaya sericanda very large campaigns. aiaiema Vibrant Gujarat Ahmedabad , Gujarat Innovation Commission and GCERT eoyuthayachelle between the various and innovative applications that may stand in front of the teacher training can be combined and how the work is going on.
Here's the thing that I will say that pedagogy " in the same way sikhavavumsikhavyum learned judge in the same way. " Each sari is calm, everything would have been training cheprasna How did sikhelum ? instructor will be in this an ideal This training is very important for chesiksakani four-day training for more than two months since the state does not have a reputation teacher training somewhere it does not directly reach the classroom.
The importance of the education and training to primary education and to create a sound and can be very useful in India uparokya cheaje state's education and training system, with many things thought of innovative cheamala in the in the 've got a consequence .NOW time where there is a draw back toward improvement karavanite chejoisum work began a few years to get an excellent result.


Monday, June 16, 2014

FATHER

અરે!

મારા ફાધર જરા...
મારા ફાધરની આર્થિક પરિસ્થિતિ જરા....
જો મારા ફાધર આર્થિક રીતે નબળા ન હોત તો હું ડોકટર થઇ શકત.

આજે મારે ઘર છે.ગાડી છે.અમે તો ભણતા અને સાથે મજુરી કરતા.
બાપ ક્યારેય ગરીબ નથી હોતો.માં અને બાપ પોતાનાથી થાય તે બધું જ કરે છે.
આજે મારે ઘર છે.(ગૃહ ફાઈનાન્સ)
મારી પોતાની જ ગાડી છે.(એચડીએફસી)
તમે તો ભણતા અને સાથે મજૂરી કરતા.આજે આપનું બાળક!?
 આપ ડોકટર ન બની શક્યા કદાચ  એટલે જ મજૂરની માફક ભણે છે.
લીધેલી બધી જ લોન ભરી દો.બાપુજી બે ટંક ખવડાવતા હતા.એમાં પણ ફાંફા પડશે.આ ચિત્ર ફેસ્બુક્માથી મળ્યું.મને ગમ્યું.થોડો સમય જોયા પછી સમજાયું.કદાચ મારી આંખો નબળી.પણ,એક માત્ર ધ્યેય સાથે જીવનાર.સફળ ન થવા માટે અન્યને દોશ?
ઈ નો ચાલબે.પોતાની જાતને સફળ કે નિષ્ફળ માનનાર વ્યક્તિ.અન્યને એજ કારણો આપી માપદંડ નક્કી કરે છે.જો અને તો !હવે તો, રાજકારણમાં પણ નથી ચાલતું.આતો જીવન છે.મારા બાપા શિક્ષક.આજે હું શિક્ષક.મને ખબર છે.હું કશું પણ બની શકું તેમ ન હતો.આજે શિક્ષક છું.કારણ મારા પપ્પા શિક્ષક હતા.અને હા,હું એવા સમાજમાંથી આવું છું.જ્યાં તમે આઈએએસ કરો તો પણ સમાજ પૂછે 'પીટીસી નથી કર્યું?'મારા સમાજની આઈએએસની લાયકાત સુધી મારી મચડી ને પહોંચાડનાર મારા પપ્પાને ફાધર્સ ડે
ના બીજા દિવસે આ લેખ અર્પણ.
(તારીખ:૧૬ જુલાઈ 2014 )

Sunday, March 24, 2013

બગડો કે છગડો...


એક છોકરી.તેનું નામ ધારા.ખૂબ જ નાની.કે.જી.માં ભણવા જાય.અરે !ત્યાં તેનો સમય કડક શિસ્ત શીખવા પસાર કરે.તેની મમ્મી તેને ખાસી મદદ કરે.મમ્મીને એમ કે બેબીને બધું જ આવડે.ખાસું બધું હોમવર્ક હોય તો પણ મદદ કરે.ધરાને એક થી પાંચ સરળતાથી લખે.જયારે તેણે ૬(છ)લખવાના હોય ત્યારે તે ભરાઈ પડે.જયારે તેને ૬(છ)લખવાના હોય ત્યારે તે પૂછે:મમ્મી ‘ઉંધો?’તેની મમ્મી  હા પડે એટલે ધારા ઉંધો બે(૨) લખી નાખે.આવું ચાલતું જ હોય છે.ક્યારેય સાચી સમજ કેળવતા નથી.આવી સમજ આપવાને બદલે ટૂકો રસ્તો અપનાવીએ છીએ.કેટલાય સવાલો છે બાળકના મનમાં....

કેમ દિવસ રાત થાય?
કેમ ચાર પછી પાંચ?
કેમ પંખી ઉડતા હશે? 
કેમ ટ અને ડ સરખ જેવા છે?
કેમ ૨ અને ૬ સરખા જેવા છે?
કેમ?કેમ?કેમ?આવા કેમ તમારા ધ્યાનમાં આવે તો મોકલો.મજા પડશે.