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Friday, June 8, 2018

आसपास: किताब ओर जीवन


कुछ खास होता हैं।
कुछ आसपास होता हैं।
आसपास वैसेभी मुज से जुड़ा हैं।गुजरात में जब कक्षा 8 को प्राथमिक में लाया गया तब किताबे फिरसे लिखने की नोबत आई।कक्षा 5 में सामाजिक विज्ञान के बदले अब पर्यावरण आने वाला था।
3 से 5 तक पर्यावरण विषय को लिखने की जरूरत पड़ी।मेने इस किताब में काम किया,जब पर्यावरण के बदले कोई और नाम सोचना था तो हमने...

कक्षा:3 मारी आसपास
कक्षा:4 अमारी आसपास
कक्षा:5 सौनी आसपास

नाम तय किये।NCERT की किताबो से अनुवाद करके पर्यावरण विषय को लिखना था।स्थानीय परस्थिति के आधारपर पर्यावरण को लिखना था।हमने उसे गुजरात स्पेसिफिक बनाने की जहमत की।हम शायद उसमें सफल हो पाए।
मेरी पास एक अच्छी टीम थी।इस टीम में मेरे साथी भी थे।इस किताब का नाम भी हमने 'आसपास'रखा।इस किताब को बनाने में मेरे आसपास बहोत कुछ हो चुका हैं।इस किताब के साथ कुछ आसपास के साथी बहोत दूर हो गए हैं।सभी लोगो ने एक साथ मिलकर महेनत की थी।कुछ व्यवस्थामें ऐसा सुधार आया कि श्री जयेशभाई पटेल ओर श्री चांगाभाई काग (बनासकांठा) के साथ श्री मिनेशभाई वालन्द (अमदावाद) का नाम नहीं छप पाया।उन्होंने महेनत की थी।मगर उन्हें क्रेडिट नहीं मिली हैं।मुजे बहोत संशय ओर दुख हैं कि में उन्हें सन्मान न दिला पाया।उनका नाम लिखा होना चाहिए था,मगर नहीं हो पाया।
फिरभी लंबा सफर हैं।
दिन भी बहोत हैं कि काम कर पाए।आसपास लिखते समय बहोत कुछ सीखा हैं।बहोत कुछ सीखना अभी बाकी हैं।सभी को सीधा बोलने की नसीहत देने का आसान हैं,मगर उस नसीहत के आधार पर काम करना हमारी आदत में नहीं हैं।कोई ऐसी बात जो हमे पसंद नहीं हैं,किसी ओर को कैसे पसंद आएगी? आसपास वोही टिकते हैं,जो कुछ खास काम करते होते हैं।ऐसा खास काम करने वाले व्यक्ति या कहिए एक्सपर्ट अपने पास से चला जाये तो दुख होता हैं।क्यो की उनके ज्ञानका संचय इस किताब में मिला हैं।आशा हैं अगली किताब तक आसपास के सभी मनमुटाव कम हो जाएंगे।सभी बातें साफ हो जाएगी।

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आसपास के लोग।
अगर खास हैं तो काम खास ही होना हैं। अगर खास काम करना हैं तो खास लोगो को संम्भालना होगा।

Thursday, May 31, 2018

सुविधा मंत्र....

जैसा कि सभी को पता है कि भीषण गर्मी शुरू हो चुकी है और घर घर एयर कंडीशनर चलने लगे हैं। अधिकतर लोगों की आदत है कि वह अपने AC को 20-22 डिग्री पर चलाते हैं और ठंड लगने पर दोहर व कंबल आदि ओढ़ लेते हैं। इससे दोहरा नुकसान होता है। आईये जानते हैं कैसे:

क्या आपको पता है कि हमारे शरीर का तापमान 35 डिग्री सेल्शियस होता है। शरीर 22 डिग्री से 39 डिग्री तक का तापमान सह सकता है। इसे कहते हैं human body temperature tolerance. तापमान के इससे कम या अधिक होने पर शरीर प्रतिक्रिया करने लगता है जैसे छीकें आदि।

जब आप 20-21 डिग्री पर AC चलाते हैं तो यह तापमान शरीर के सामान्य तापमान से कम है और इससे शरीर में hypothermia नाम का एक process शुरू हो जाता है जो रक्त प्रवाह (blood circulation) को प्रभावित करता है और शरीर के कुछ अंगों में रक्त ठीक प्रकार से नहीं पहुंच पाता। इसके long term में बहुत नुकसान होते हैं जैसे गठिया आदि बीमारियां।

अधिकतर समय AC में बिताने से पसीना नहीं आता जिससे शरीर के toxins बाहर नहीं निकल पाते और long term में इससे भी कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है जैसे skin allergy or itching, high blood pressure आदि। जब आप AC इतने कम तापमान पर चलाते हैं तो उसका कंप्रेसर लगातार फुल एनर्जी पर चलता है फिर चाहे वह 5 स्टार ही क्यों न हो, अत्यधिक बिजली फूंकता है और उसका पैसा आपकी जेब से जाता है।इसमें क्या बुद्धिमानी है कि AC को पहले 20-21 पर चलाएं और फिर चादर ओढ़ लें। इससे बेहतर है कि AC को 25+ डिग्री पर चलाएं और पंखा भी चला लें।इससे बिजली भी कम खर्च होगी और आपका शरीर का तापमान भी सीमा में रहेगा और उसे कोई नुकसान भी नहीं होगा।

इसका एक और फायदा है कि जब AC कम बिजली खर्च करेगा तो बिजलोघरों पर भी दवाब कम होगा औऱ अंततः global warming में भी कमी आएगी।मान लीजिए AC को 26 पर चला कर आप लगभग 5 यूनिट बिजली प्रति AC प्रति रात्रि बचाते हैं और यदि ऐसा 10 लाख घरों में होता है तो आप 50 लाख यूनिट बिजली प्रतिदिन बचाते हैं।कृपया विचार करें और अपने AC को 25 डिग्री से नीचे बिल्कुल न चलाएं। अपने शरीर और वातावरण को स्वस्थ रखें।

आधुनिक समय में ये स्वयं स्पस्ट हैं कि तकनीक के साथ अगर स्वास्थ्य को भी आगे न बढ़ाया जाए तो बहोत सारी बीमारिया तो राह देखकर बैठी हैं।हमें अपने स्वास्थ्य के बारे में सोचना ओर समजना पड़ेगा।चलो हम धरती को हरियाली बनाये ओर जीवन को आसान करें।

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मेने ऐसे लोगो को देखा हैं जो AC के बिना नहीं रह पाएंगे।नही रह पाते।क्यो की वो अब उसके ऊपर निर्भर हैं।

Friday, May 25, 2018

कल का प्लान आज...

आज अच्छा हैं।
मतलब काल।अच्छा रहा होगा।आज अच्छा हैं,इसका सीधा मतलब हैं कि आने वाला कल भी अच्छा होगा।

कुछ लोग एकड़ दिन के लिए भर जाने वाले होते हैं तब कुछना कुछ तैयारी करते हैं।मगर सारी जिंदगी के लिए सिर्फ कर्म और बजगवां के भरोसे चलते हैं।किसीने कहा हैं कि 'नसीब वालो को उतनाही मिलता हैं जितना कर्म कण्व वाले छोड़ देते हैं।'

बॉस,आज को सँवारे जाइए,कल अपने आप संवर जाएगा।एक बहोत ही अच्छा वॉचर जो किसी के भी अंदर नई उमीद जगा सकता हैं।

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आज ओर कल।
न आगे न पीछे।,हर एक पल।
महेनत कर,महेनत से बढ़ हर एक पल। आज ओर कल।

Friday, May 18, 2018

સમજ એને કેવાય...


નાનું ગામ કંડાચ.
અહીં વિનોદભાઈ રહે.તેઓ ખેતી કરે.એમના વખતે એમણે આઈટીઆઈ કરી હતી.એ જમાનામાં 46 રૂપિયા પગાર હતો.એમના સ્વપ્ન અને જીવન શૈકી મુજબ એમણે આ નોકરી છોડી.મૂળ ખેડૂત અને એમાં જ જીવન પસાર કરવાનું વિચાર્યું.બસ...વિનોદભાઈ ની વાત આટલી જ.
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એક યુવાન.
એનું નામ ચેતન.
તે ગ્રાસરૂટ ઇનોવેશન સાથે કામ કરે.છેલ્લા કેટલાય વર્ષોથી એ આવા નવતર કાર્ય કરનારને શોધવાનું અને પ્રસ્થાપિત કરવાનું કામ કરે છે.ધોરણ એક થી 12 ની ઉંમરના બાળકોના નવચાર શોધવા માટે અમે અનેક વખત સાથે કામ કરવાનું થાય છે.આજે અમે બૂરે બેઠા હતા અને એક વાત થઈ.
અમારી ચર્ચાનો વિષય હતો કે જેને અનુભવ હોય તે પુસ્તક ઉપર ભરોસો ન રાખે.આવી એકાદ વાત કરી ત્યાં ચેતને એક પ્રસંગ કહ્યો.એમની વાત મારા શબ્દોમાં.

રાજાઓ હતી.
ચેતન ગામડે હતો.
એને થયું.લાવ ખેતર ખેડુ.
બળદ બાંધીને તૈયાર ઊભા હતા.ચેતન ને ખેડતા આવડેય ખરું.હવે થયું એવું કે ચેતન બળદ બાંધી ખેડતો ખેડતો આગળ વધતો હતો.થોડું સિદ્ધુ ખેડયા પછી સીધા ચાલતા બળદ ફંગોળાયા. ચેતન ને એમ કે બળદ સીધા ચાલતા નથી.હાથમાં લીધેલી સોટી નો ચેતને ઉપયોગ કર્યો.બળદ ઉંધા ચાલતા હતા.ચેતન બળદ ને મારતો હતો.આ જોઈ એના પપ્પા વિનોદભાઈ દોડતા આવ્યા.તેમણે બળદ ને મારવાનું કારણ પૂછ્યું.ચેતન કહે :'બળદ સીધા ચાલતા હતા,એકદમ બાજુના ચાસમાં પહોંચી ગયા.એટલે જ મેં એમને માર્યા.વિનોદભાઈ કહે 'એમ ન મરાય.ત્યાં જઈ ને જોઈ આવો.'ચેતન જયાંથી બળદ વળ્યાં હતા ત્યાં ગયો.અહીં જોયુતો એક પક્ષીએ ઈંડા મુક્યા હતાં. આ ટીટોડીના ઈંડા હતાં. આ ઈંડા બચાવવા માટે બળદ માર ખાઈને પણ આડું ચાલવાનું કર્યું હતું.આ જોઈ ચેતન ને બળદ અને તેના પપ્પા બંનેની સમજ માટે માં થયું.
અનુભવ જ શીખવે.
અનુભવ જ ઘડતર કરે.
અનુભવ હોય તો જ શીખવી શકાય.


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શીખવા માટે સ્થિતિ નહીં પરિસ્થિતિનું નિર્માણ કરવું પડે.જે શીખવનાર કરતાં શીખનાર માટે મહત્વનું છે.

Wednesday, May 9, 2018

हमारे तरीके

आज कल हम जो कर रह हैं,उसमें शायद हम ख़ुशी नहीं मिल रही हैं।हो सकता हैं कि रोजाना एक ही काम के कारण हम खुश नहीं हो पाते।खुशी दो तरफ से आती हैं।एक अंदर से दूसरी किसी की ओर से।खुश रहने के लिए हमे कुछ ऐसा करना हैं जो हम नहीं करते हैं।
आप पोस्टर में देखते हैं कि एक लड़की किसी को बिठा के उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाती हैं। खुशी दिखती नहीं,छलकती हैं।जब हमें किसी काम आ व्यवस्थामें ख़ुशी न मिलती हो तो हमे उसका तरीका बदलना चाहिए तरीक़े शिखने से नहीं मिलते,तरीके सामने से नहीं आते।तरीके सोचने पड़ते हैं।कभी हमने ये सोचा हैं कि अगर में हंसता हु तो कोई और भी हंस ने के लिए साथ में जुड़ता हैं।मगर जब हम रट हैं तब कोंन साथ में रोने को तैयार होता हैं।अगर तरीका बदलना हैं तो साथमें रोने वाले के लिए बदलो।रोना भी ऐसा  हैं कि खुशी और गम दोनों समय आता हैं।खुशी के आंसू तो ठीक हैं,मगर गम के आंसू अच्छे नहीं होते।हमे रोज खुश रहना हैं तो गम के आंसू को दूर करना आवश्यक हैं।आज का पोस्टर हमे तरीके बदलने के लिए कहता है।

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नजर बदलो नजारे बदलेंगे।
तरीक़े बदलो तकदीर बदलेंगी।

Thursday, April 26, 2018

खुश रहने के लिए खुशी बाटें....


कुदरत ने सारी दुनिया में हमे भी बनाया हैं।कोई कुदरत को भगवान या खुदा कहते हैं।आज कल हमारा जीवन पंखी की तरफ हो गया हैं।

आज भागदौड़ वाली जीवन शैलीमें सबसे अधिक अगर कोई अस्थिर हैं तो वो हम हैं।मनुष्य एक मात्र ऐसा जीव हैं,जो अपने लिए ही अपनो से दूर होता हैं।कोई काम या कोई व्यवस्था के कारण मनुष्य भागता रहता हैं।ये फोटोग्राफ किसी सिटी से लिया गया हैं।सुबह सुबह का समय हैं,फिरभी कितने सारे लोग अपने काम से या काम से वो निकले हैं।क्यो इतने सुबह में काम के लिए हमे निकलना पड़ता हैं।

कोई शांति के लिए जल्द निकलता हैं।कोई अशांति को पाने के लिए नहीं निकलता।अपने तय किये काम और आगेका जीवन व्यतीत करने के लिए निकलना पड़ता हैं।

जब अच्छे काम के लिए हम रातभर जागते हैं उसे जागरण कहते हैं।मगर कुछ तकलीफ,दुःख या अन्य बातों के लिए अगर हम जागते है तो हम उसे जागरण नहीं कहते।हमे अपने कर्म पे भरोसा रखना हैं,की हम अपने जीवन में शांति बनाए रखेंगे।शांति से ही समृद्धि प्राप्त होती हैं।

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मुजे शांति चाहिए।
मुजे सुख चाहिए।
अब आप इसके लिए किसी ओर को शांति और सुख देनेका प्रयत्न करें।

Sunday, April 8, 2018

સ્ટેટ્સ કે સેવા...


માનવતા પદ થી વધારે છે. હું સ્ટેટ્સ માટે પદ શબ્દ વાપરું છું.પોસ્ટર સ્વયં સ્પષ્ટ છે.કદાચ અંગ્રેજીમાં લખેલું વાક્ય ન હોય તોય સમજાઈ જાય એવું છે.શુંઆપણે આ રીતે જીવી શકીએ.ક્યારેય આપણી આસપાસનાનો આપણે વિચાર કરીએ છીએ? જો હા...તો અભિનંદન અને ના તો એવું વિચારજો.


મારી સાથે એક ભાઈ કામ કરે.ખૂબ જ સરળ.એ કશું વિચારે કે લખે તો મને સંભળાવે.મને શેર કરે જ.સહજ હોવાથી તે બીજાને અસહજ કે અમાન્ય માની જ ન શકે.એ બીજાને મદદ કરે.એમને કોઈ મદદ કરે એવું તે ન સ્વીકારે.એય માનવતા નથી.આપ કોઈ ને મદદ કરો,સહયોગ કરો કે સેવા આપો એ સામેની વ્યક્તિ ન સ્વીકારે તો!? એવી જ દશા તમે કોઈની સેવા ન લો ત્યારે સામેના ને થાય. 

આપણી આસપાસ સતત ખોટા અનુભવો આપણ ને ક્યારેક સારું કામ કરતાં રોકે છે.આ વખતે કોઈના અનુભવ ને બદલે જાતે યોગ્ય સમયે યોગ્ય વર્તન કરી લેવું.ક્યાંય નાના કામ ને કે નાની સેવાને ઓછી ન માનવી.આપનું બીજા માટે કરેલું કામ ચોક્કસ ક્યાંકતો સારી રીતે નોંધાશે.


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સ્ટેટ્સ ને લીધે આખો દિવસ જે કડક કડક ફરે છે.તે સાંજ પડતાં પહેલાં થાકી જાય છે.

Sunday, April 1, 2018

લિંકન: હું ફાંસી ન લખું...

અમેરિકા.
દુનિયાની મહાસત્તા.
જાણે જગત જમાદાર.
વિશ્વમાં પોતાની પકડ અને પહેચાન બનાવનાર અમેરિકાના પ્રમુખની આ વાત છે.
આ પ્રમુખનું નામ અબ્રાહમ લિંકન.આ એ સમયની વાત છે જ્યારે લિંકન પ્રમુખ હતા.અમેરિકામાં આંતર વિગ્રહ ભડકતો હતો.અમેરિકામાં આ સમય લોહિયાળ હતો.પ્રમુખ તરીકે લિંકન સાવચેતીથી કામ કરતા હતા.
આંતરિક વિગ્રહમાં ઉત્તર અને દક્ષિણ એમ બે ભાગલા પડી ગયા હતા.ઉત્તર અમેરિકાના લશ્કરમાંથી એક સાથે 25 સૈનિક ભાગી ગયા હતા.આ સૈનિક નું ભાગવું આંતર વિગ્રહ સાથે જોડાયેલું હતું.લશ્કરી અદાલતમાં આ સૈનિકો સામે કેસ ચાલ્યો.આ કેસની અંતે આ બધા જ સૈનિકો ને કડકમાં કડક સજા તરીકે ફાંસીની સજા ફરમાવવામાં આવી.
આ ચુકાદો લઈને સૈન્યના વડા લિંકન ને મળવા આવ્યા.એમને કહ્યું 'મિસ્ટર,પ્રેસિડેન્ટ.આ સૈનિકો મારા તાબામાં આવે છે.એમની શિસ્ત અને ફરજપાલન મારી જવાબદારી છે.આ સૈનિકો એ દ્રોહ કર્યો છે.આ સૈનિકો ને ફાંસી આપવાનું મિલિટરી કોર્ટે માન્યું છે.આપ આ નિર્ણય ને માન્યતા આપો.સેનાપતિ ની વાત સાંભળી અબ્રાહમ લિંકને કહ્યું.હું આપની વાત સમજુ છું.આજે અમેરિકામાં કેટલી મહિલાઓ રડે છે..!આ 25 ને મારી ને આપણે એમાં વધારો કરવો નથી.હું આ ચુકાદાને માન્યતા નહીં આપું,ભલે આ સૈનિકો એ આપણા વિરુદ્ધ કામ કેમ ન કર્યું હોય.

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એક વિચારક અને ચિંતક તરીકે અબ્રાહમ લિંકન અંગે આપણે અનેક પ્રસંગો જોયા કે સાંભળ્યા હશે.આપણે એવા પ્રસંગો સાથે મળીશું.

Friday, March 30, 2018

श्यामजी कृष्ण वर्मा

आज क्या हैं।आज के दिन में खास क्या हैं।हम कहेंगे आज गुड़ फ्राइडे हैं।कोई कहेगा आज मेरा जन्म दिवस हैं।या ओर भी कुछ हो सकता हैं।आज सब के साथ कुछ खास हैं।आज श्यामजी कृष्ण वर्मा की पुण्यतिथि हैं।गुजरात के गौरव समान क्रांतिकारी की पुण्यतिथि आज हैं।
उन्होंने ब्रिटिश शाशन के समय विदेश में रहकर देश को आज़ाद करने का काम किया था।बात हैं उस वख्त की जब हमारे देश में ब्रिटीशरी हुकूमत थी।श्यामजी वर्मा वकील थे।अंग्रेजो ने उन्हें सनद नहीं दी थी।वो अंग्रेजो के सामने केस न लड़पाये इस लिए उन्होंने ये किया था।वर्ष 2015 में जब नरेंद्र मोदी विदेशी दौरे पर थे,तब केमरॉन की सरकार ने ये सनद नरेन्द्र मोदी को दी।
आज उनके मृत्यु को 88 साल हुए हैं।आज फिरसे उन्होंने,अंग्रेजो ने अपनी गलती सुधारते हुए उन्हें मरण के 85 साल बाद फिरसे वकीलात करने का मानो लायसेंस दे दिया हैं।एक गुजराती क्रांतिवीर के लिए ओर हम सब के लिए ये महत्वपूर्ण और गौरव से भरी जानकारी हैं।अंग्रेजो ने 1909 में श्यामजी वर्मा की सनद रडी कर दी थी।अपनी गलती को उन्हों ने सुधारा भी हैं।हमारे देश को गुलामी से मुक्त करने के लिए उन्हों ने 1905 में 'इंडियन होमरूल सोसायटी' ओर 'ध इंडियन सोशियोलॉजीस्ट' नामक संस्थान की स्थापना की थी।1930 में स्विजरलैंड स्थित जिनीवा में उनका देहांत हुआ था।उन्हों ने अपनी अंतिम इच्छा जताते हुए कहा था कि उनकी अस्थियां स्वतंत्र भारत में भेजे जाय।आज हम आज़ादी के माहौल में जिंदा हैं।ऐसे देशभक्त ओर गुजराती क्रांतिकारी को सलाम।

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जब हम अंग्रेजो के गुलाम थे,
उस वख्त शाहिद होना या जेल में जाना याने देश भक्ति थी।आज के दिन जेल में न जाना पड़े वैसे काम करना देश भक्ति होगी।

Thursday, March 1, 2018

ऐसा भी है...

गुजरात स्टेट इनोवेशन फ़ेस्टिवल।पोरबंदर की बात कर रहा हूँ।25 तारीख से में पोरबंदर में हुँ।हमारे रहने का ओर खाने पीने का स्थान थोड़ा दूर था।बाजू में ही फेस्टिवल का टेंट था।165 से अधिक स्टोल में नवाचार सजाये गए थे।
सुबह से हमने शैक्षणिक नवाचार किताब के लिए कुछ जानकारी इकट्ठा करने की शुरुआत की।सभी इनोवेटर्स के बारेमें जानकारी  इकठ्ठा की।इसे मास्टर कॉपी में सुधार किया गया।मेरे साथ 5 साथी थे।उनके सहाय से हमने सभी इनोवेटर्स के सहयोग से उनकी जानकारी और काम के बारे में छपी हुई बातो को सुधार लिया।हम सारी जानकारी एक कर पाए और हमारा भोजन का समय हों गया।
में भोजन शाला पहुंचा।मेरे पैर में ज्यादा चलने से छाले पड़ जाते हैं।जब मेरे पेरमें छाले होते हैं तब में खुले पर चल नहीं सकता।में शूज पहन कर अंदर गया।सम्पूर्ण भूदेव के गणवेश में दो बच्चे मेरे सामने आए।उसमें से एक का नाम रोहित था।रोहित ओर उसके साथी ने मुजे शूज निकालने के लिए कहा।मेने मेरी दिक्कत के बारे में कहा।दोनों भूदेव मान गए।जब में भोजन करके वापस आया दोनों अपने काम मे वही पर खड़े थे।मेने उनके साथ फोटो खिंचवाई।

मुजे ऐसे भूदेव देख के ख़ुर्शी हुई।संस्कृत महा विद्यालय ओर इन संस्कृत के विद्यार्थी को देखकर, उन से बात करके ओर उनकी काम के प्रति जिम्मेदारी देखके में खुश हूं।


Thanks
#पोरबंदर...
# स्टेट इनोवेशन फेस्टिवल...

Monday, February 26, 2018

जहांगीर


जहांगीर शेख।
महाराष्ट्र के जलगाँव का बंदा हैं।
पहली कक्षा में एक महीने तक पढ़ने वाला ये व्यक्ति अनूठा हैं।
आपने 3 इडियट्स फ़िल्म देखी होगी।इस फ़िल्म के अंतमें एक स्कूल दिखाई गई हैं।उस स्कूल में जो इनोवेशन बताए हैं,सारे जहांगीर की पेदाश हैं।वो स्कूटर,नया वाला भेड़ बकरियों के बाल कटनेका मशीन ओर ऐसी अन्य सामग्री जो दिखाई गई हैं।जिस स्कूटर से जिसमें आटा पीसा जता हैं, वो स्कूटर भी जहांगीर ने बनाया हैं।

आज जहांगीर गुजरात में हैं।उन्होंने गुजरात में जहांगीर वर्कशॉप बनाने के बारेमें सोचा हैं।वो आजकल गुजरात में काम कर रहे हैं।आप भी उन्हें अपनी संस्थान में उन्हें बुलाना चाहते हैं तो उनका संपर्क कर सकते हैं।उनके नाम से 40 पेटन हैं।वो ज भी नई नई सामग्री का निर्माण कर रहे हैं।

नेशनल इनोबेशन फाउंडेशन,हनी बी नेटवर्क ओर सृष्टि इनोबेशन से वो सीधे जुड़े हैं।आप भी ऐसे नव विचारक को निमंत्रण दे सकते हैं।

#we can

Saturday, January 27, 2018

9 नहीं 11 ग्रह: IPS


आप जो मुजे रोज पढ़ते हैं।उन्हें कुछ नया दिखेगा।मेरी पोस्ट में राइट साइड फोटो होता हैं।और में फोटो की बाजू जगह भी नहीं रखता।

मगर आज कुछ खास हैं।
आज डॉ जे.जे.रावल सर के बारे में लिखा हैं।
हम कई सालोंसे,अगर कहे कि कई पीढ़ी से ये मानते आ रहे हैं कि 9 ग्रह हैं।हमारे धर्मशात्र में भी ऐसा ही लिखा हैं।धर्म के प्रति ओर भगवान के प्रति सम्पूर्ण श्रद्धा रखने वाले डॉ. रावल सर के साथ दो दिन तक रहने का मुजे अवसर प्राप्त हुआ।राज्य के गणित,विज्ञान एवं पर्यावरण के उपलक्ष्य में उनके साथ दो दिन गुजरने का अवसर मिला।
#thanks Dr TS Joshi सर।#

वो सायन्स के विद्यार्थियो से संवाद करने वाले थे।उन्हों ने सरल तरीके से अपनी बात रखी।बच्चो के साथ बच्चो जैसे व्यवहारिक उदाहरण के माध्यम से उन्होंने ब्रह्मांड के बारे में अपनी बातें रखी।
उन के बारे में अगर मुजे ओर कुछ नही लिखना हैं तो में सिर्फ उतना लिखूंगा गई उन्हों ने यूनिवर्स को 2 नए ग्रह खोज के दिखाए हैं।1972 में उन्होंने एक रिसर्च पेपर लिखा था।उस संशोधन में उन्होंने 2 नए उपग्रह के बारे में बताया था।1992 और 1996 में NASA ने क्रमश उस बात को स्वीकार किया और smily ओर एक पदार्थ के स्वरूप में दूसरे भी ग्रह को मान्यता दी।
हमारे लिए गौरव पूर्ण बात ये भी हैं कि वो गुजरात के सुरेंद्रनगर के हलवद के हैं।गुजरात में ऐसी शख्शियत हैं जिस ने अपना ओर गुजरतका नाम यूनिवर्स में प्रकाशित किया हैं।आज मुम्बई स्थित 'इंडियन प्लेनेटरी सोसायटी के वो अध्यक्ष हैं।एकदम सरल व्यक्तित्व के रूपमें में इन्हें नमन करता हूँ।
#we can मुमकिन हैं...!

Friday, August 11, 2017

बुधवार को KDS ड्रेस

शिक्षा से जुड़े लोग निवेदन करते हैं।कोई प्राइवेट स्कूल को अच्छी बुरी कहानी जोड़के अपनी बात रखता हैं।सरकारी और खानगी संकुल ओर उसकी व्यवस्था पे आज कोई बात नहीं करनी हैं।
आज एक संकुल के बारें में बात करनी हैं।बरसात के कारण जो समस्याए आई इसमें से जीतनी समस्याओ को दूर करने का प्रयत्न किया हैं।
खानगी संकुल ओर उसके संचालक सदैव पैसा कमाने के लिए स्कूल का उपयोग नहीं करते हैं।
बनासकांठा ओर पाटन डिस्ट्रिकमें जो नुकशान हुआ,उसे भरपाई करना संभव नहीं हैं।हा, कावेरी दे कर स्कूल के सहयोग से कई बच्चों को ऐसी किट दी गई जो उन्हें उपयोगी हों।हर बच्चे को KDS(कावेरी डे केर स्कूल)ने स्कूल का ड्रेस दिया है।ऐसे 3000 से अधिक बच्चो को ऐसी किट देनेका आयोजन KDS परिवारने किया है।
ऐसे संकुल को धन्यवाद ।ऐसी जरूरत वाली चीजें दे कर स्कूल के सहयोग में खड़े होने वाली KDS का शुक्रिया।


Wednesday, August 9, 2017

आदिवासी दिवस...

विश्व की भोली प्रजा।
विश्व की बहादूर प्रजा।
कुदरत के साथ कदम मिलाके सबसे ज्यादा जीने वाली प्रजा।जहाँ में पैदा हुआ,वो क्षेत्र तत्कालीन साबरकांठा डिस्ट्रिक्ट के ईशान कोनेमें पड़ता था।मेने उनकी संस्कृति को करीब से देखा,समजा ओर अहसास के साथ पालाभी हैं।
उनका रहन सहन,उनकी भाषा,उनकी बोली ओर उनके रिवाज़ ऐसे की उसे हमे कुछ नया सिखनेको मिले।पिछले कुछ सालोंसे उनको भी कई सारी सुविधा और शिक्षा प्राप्त हैं।जहांतक गुजरात का सवाल हैं,कुछ ऐसा हैं जो उन्हें दुनिया से जोड़ रहा हैं।डांग दरबार देखो,बांठीवाडा की होली देखो।कुछ एरिया बेज नई बाते हमे जोड़ती हैं।उनकी शादिमें मेने खेतमें जोते जाने वाले हल ओर कन्यादान में जीवंत गाय का दान मेने देखा हैं।अरे,गौ दान के बाद उसे ससुराल तकभी पहुंचाया जाता हैं।
आज जहाँ शिक्षित और अर्ध शिक्षित व्यक्ति विधवा विवाह से परहेज करता हैं।कुछ हिस्सों में पहेली शादी के बाद ससुराल वाले अपनी विधवा बहु को छोटे भाई या किसी ओर के साथ शादी करवाते हैं।शादी की रसम ओर गाने भी ऐसे की बात छोड़ो।हर छोटी बातकी खुशी उनके व्यवहारमें दिखती हैं।आज के दिनमें बस उनको पूर्ण शिक्षा और सुविधा प्राप्त हो रही हैं।उनका जीवन बदल रहा हैं।कुछ संस्था ओर संघठन उस व्यवस्था को संभालने का प्रयत्न करती हैं।बहोत सारे बदलाव के साथ आज हम सब को आदिवासी दिवस पर बधाई।

Wednesday, March 22, 2017

Bamhum music the new way

समग्र देश से फेस्टिवल ऑफ़ इनोवेशन में ग्रास रूट इनोवेटर्स उपस्थित थे!राष्ट्रपति भवन में उनके लिए विशेष आयोजन किया गया था!यहाँ नागालेंड से एक बम्बू म्यूजिकल ग्रुप आया था!उन्हों ने बम्बू से म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बनाये थे!सृष्टी के लिए हम डोक्युमेंट करते हुए वहां पहुंचे!यहाँ कई सरे लोग उनके प्रोग्राम के वीडियो और संगीत के निर्माण किए गए साधन का अध्ययन कर रहे थे!

मेने भी इस संगीत के नए साधन को देखा!मेने उसे बजा ने की इच्छा जाये!मुझे यह संगीत का साधन दिया गया!वो आर्टिस्ट बजा रहे थे!मगर वो उनके लोकल गाने बजा रहे थे!बाम्बू याने बांस!उससे बनाये गाए साधन जो अच्छा बज रहा था!मेने भी उसे बजाय!थोड़ी देर उसका अभ्यास करने के बाद में भी उसे अच्छी तरह से बजा पाया!

समग्र भारत से यहाँ लोग आये थे!मुझे कहा गया की कोई ऐसी धून बजावो की जो यहाँ खड़े हर कोई को आती हों! मैंने ‘वन्दे मातरम’बजाया! क्लिक करके आप भी देखिए और सुनिए... ग्रुप भारत और भारत के बहार जाके कार्यक्रम का आयोजन करता हैं! आप भी उनसे संपर्क करें!
संपर्क की जानकारी...
Moa Subong
Bambu,Haraminica,Guitar Composer
ABIOGENESIS
THE FOLK FUSION BAND
ABIOGENESIS CENTRE FOR PERFORMING ARTS & CRAFTS,
6,ANGAMI KHEL,NUTON BOSTI.
DHARAMPUR.797113.NAGALAND.INDIA



09436003009
07005245283


Monday, December 12, 2016

मैं भारत का नागरिक...


मैं भारत का नागरिक, मुझे लड्डू दोनों हाथ चाहिये।
बिजलीमैं बचाऊँगा नहीं, बिल मुझे पूरा माफ़ चाहिये ।

पेड़ मैं लगाऊँगा नहीं, मौसम मुझको साफ़ चाहिये।
शिकायत मैं करूँगा नहीं,कार्रवाई तुरंत ही  चाहिये ।

बिना लिए कुछ  न करूँ,पर भ्रष्टाचार नही चाहिये ।
घर-बाहर कूड़ा में फेकुंगा,मेरा गाँव  साफ चाहिये ।

काम करूँ न पलभर का,मुझे वेतन लल्लनटाॅप चाहिये ।
एक नेता कुछ बोल गया सो, मुफ्त में पंद्रह लाख चाहिये।

लाचारों वाले लाभ उठायें, फिर भी ऊँची साख चाहिये।
लोन मिले बिल्कुल सस्ता, बचत पर ब्याज बढ़ा चाहिये।

धर्म के नाम रेवडियां खाएँ, पर देश धर्मनिरपेक्ष चाहिये।
जाती के नाम पर वोट दे, अपराध मुक्त राज्य चाहिए।

मैं भारत का नागरिक हूँ ,मुझे लड्डू दोनों हाथ चाहिय।
बिजली मैं बचाऊँगा नहीं, बिल मुझे पूरा माफ़ चाहिये ।

हिरल व्यास द्वारा भेजी हुई कविता...

Saturday, January 24, 2015

मेरे पुस्तक को कलाम जी ने देखा...

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अब्दुल कलाम !सिर्फ नाम ही काफी हैं !फिरभी अगर लिखना हैं तो कह सकते हैं की भारतके रत्न,भारत रत्न!विश्व प्रसिद्द वैज्ञानिक !मिसाइल मेन एवं हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति !आजीवन शिक्षक एवं कई लोगोके मार्गदर्शक और प्रेरक !भारतीय प्रबंधन संस्थान में ‘थर्ड इंटर नॅशनल कोंफरंस में दिनाक २१ को डॉ.कलाम सर आये!विश्व प्रसिद्द व्यक्ति और सहज जीवन शैली के व्यक्ति कलाम जी इंटरनेशनल कोंफरंस में नवाचार करने वालोको प्रोत्साहित करने के लिए आये!
मेरा सौभाग्य था की में उनके साथ थोडा समय बात कर सका !मेरा नवाचार भाषा के लिए था! पिछले चौदा सालोसे में भाषा को बाल सहज एवं बालभोग्य बनाने के लिए काम कर रहा हूँ !मगर जब कलाम सर ने मेरे काम को देखा और सराहा तब मुझे अनोखी अनुभूति हुई ! अब मुझे यकीं हैं की हाँ,मेरा काम सही हैं और सही रस्तेपे जा रहा हैं !
कलाम सर ने मेरी गणित एवं विज्ञान सिखाने के लिए लिखी मिताक्षर (एटेच लेटर) के इस्तमाल के बिना की कहानियो के बारेमे जानकारी ली तब वो बहुत प्रभावित हुए!
पध्म श्री एवं सृष्टि के संयोजक अनिल गुप्ता सर ने मुजसे कहानिया लिखवाई! ये सारी कहानिया सृष्टि के मुखपत्र ‘लोक्सरावानी’के मुख पत्र पे छपे चित्रों के आधार पे थी !मेने उन चित्रों एवं उसकी बात को ध्यान में रखते हुए कहानियो को दो हिस्सों में बाटा !
कक्षा एक से पांच के बच्चो के लिए एटेच लेटर के आलावा बनी हुई कहानीयाँ और कक्षा छ से आठ के विद्यार्थियो के लिए बाल्भोग्य शैली में साडी कहानियाँ लिखी !ऐसे डॉ पुस्तक के आलावा एक तीसरी बुक  इग्नाईट एवोर्ड विनर बच्चो के बारे में थी !ये बच्चे वर्ष २००८ से २०१४ तक के एवोर्ड विनर थे!
अनिल गुप्ता जी एवं प्रो.विजया शेरिचंद जी ने मुझे यह जिम्मेदारी दी !मेने एक साथ ऐसी तिन अनोठी पुस्तक लिखी! दिनांक २१ तारीख को इन्टर नॅशनल सेमीनार में तिन पुस्तकों का विमोचन भी हुआ!पध्म्श्री अनिल जी एवं विजय शेरिचंद जी और अन्य राज्य के इनोवेटर के हाथो विमोचन हुआ!यह मुकाम मेरे लिए एक नया प्रोत्साहक एवं प्रेरक वाकिया था!
मेरे लिए ऐ भी गौरव पूर्ण बात थी की मुझे बहोत प्यार से प्रो. अनिल  गुप्ता जी ने बुक्स के अंदर आशीर्वाद के साथ ऑटोग्राफ भी दिया ! दसरे दिन भी जेसे मेरे लिए ही सूरज देव आये थे! कलाम सर ने जब मेरे स्टोल की मुल्ककत ली और उन्होंने इसके बारेमे मुझे पूछा तो गुप्ता सर ने मेरे नवाचार के बारेमे उन्हें जानकारी दी!डॉ कलाम प्रसन्न हुए!इग्नाईट में पसंद होने वाले बच्चो को कलाम सर के जन्म दिन पर पिछले छे सालो से सन्मानित किया जाता हैं ! उनके जन्म दिन पर यह समारोह होता हीं ! कलाम सर के हाथो सन्मानित होने वाले बच्चोको सृष्टि के मध्यमा से शोध के आधार पर पेटंट भी दिलवाया जाता हैं ! मेने ऐसे बच्चो के बारेमे भी एक पुस्तक प्रो.अनिल गुप्ताजी के मार्गदर्शन से लिखी ! इस पुस्तक में मुझे कलाम सर ने ऑटो ग्राफ के साथ आशीर्वाद भी दिया!
अब मुझे मेरे काम से संतोष हैं! मेरे इस एचीवमेंट के लिए में पद्म श्री अनिल गुप्ता सर,डॉ. विजया शेरीचंद,प्रकल्प हेड अवनीश भंडारी एवं चेतन पटेल के साथ सृष्टि से जुड़े हर किसीका आज शुक्रिया अदा करता हूँ!
मेरे लिए यह एक जीवनका सबसे बड़ा गौरवपूर्ण दिन हैं! और मुझे यह गौरव दिलाने वालोको में नम्रता पूर्वक याद करते हुए आभार व्यक्त करता हूँ...!

http://en.wikipedia.org/wiki/A._P._J._Abdul_Kalam

Tuesday, June 17, 2014

छत्तीसगढ़ में गुजरात...


સંગીતને કોઈ સીમા નથી.અમે છત્તીસગઢ ગયા.પ્રજ્ઞા ની શરૂઆત કરવા માટે ત્યાં એક્સપોઝર માટે જવાનું થયું.ત્યાં  શાળામાં શિક્ષક આજે ગૌરવથી રેડિયો ઉપર શૈક્ષણિક કાર્યક્રમો સંભળાવે છે.ત્યાં આ કામ અંગેની વ્યવસ્થા કરવા માટે મધ્યાહન ભોજન સંચાલક જવાબદારી નિભાવે છે.અમે ત્યાં ગયા.
છતીસગઢ રાજ્ય છેલ્લા દાયકામાં બનેલું રાજ્ય.તેનું રાજ્ય ફૂલ.આ ફૂલ એટલે ગુલમહોર.પીળા રંગનું ગુલમહોર.અહી મને થયું  લાવો ગીત ગવાડવું.કેતનભાઈ ઠાકર,કેતન વ્યાસ,રાકેશ પટેલ અને અમારા કેમેરા મેં ધર્મેશ રામાનુજ. ધ્વારા બધી તૈયારી થઇ.મેં ગીત ગવડાવ્યું.
લે શીંગની ચીકી....
અને ભાઈ,આશ્ચર્ય વચ્ચે છોકરાં એ ગાયું.આજે કેટલાય વર્ષો પછી કેતન ઠાકરના માધ્યમથી આ કલીપ  મળી.ઓડિયો અને વિડીયોમાં ખામી છે.છતાં ગમશે.
અને હા,
શાળાની ફરતે વરંડો નથી.અહી લાકડાની થાંભલીઓથી વરંડો બને છે.શિક્ષકો જાતે બનાવે છે.ગામડાં  પણ 'નિર્મળ ગ્રામ યોજના 'વગર ચોખ્ખા છે.એકાદ ગામ આવું હોય તો થાય કે હશે.બીજા રાજ્યના લોકો ને બતાવવા એકાદ ગામ હશે.અહી અમે ચોવીશ શાળાઓ જોઈ.બધે જ એક સરખું.શાળા અને ગામની ચોખ્ખાઈ ગમી.અહી દરેક ગામમાં એક પૂતળું હતું.આ પૂતળું શાહિદનું હતું.મને થયું દરેક ગામનો એક શહીદ?અમે અમારા ગાઈડ ને પૂછ્યું.તે કહે:'આ નકસલવાદથી પ્રભાવિત વિસ્તાર છે.આ બાવલાં નકસલવાદી ઓ ધ્વારા માંરીનાખાવામાં આવેલ વ્યક્તિઓના છે.
ત્યારે ખબર પડી કે અમે જ્યાં ઊભા હતા તે ગામમાં બે મહિના પહેલાં જ ત્રણ વ્યક્તિની  નકસલવાદીઓએ હત્યા કરી હતી.કદાચ તેમના બાવલાં અત્યારે લાગી ગયાં હશે.
કેતન ઠાકરના આભાર અને ધર્મેશની મહેનત સાથે નીચેની લીંક ઉપર ક્લિક કરો.


Monday, June 16, 2014

જય હિન્દ...

દેશ ભક્તિ.દરેક પોતાની રીતે અમલી કરે.દરેકને ગર્વ હોય.દેશ એ કોઈ એક વ્યક્તિનો નથી.દેશ દરેકનો છે.મને આજે એવી કલીપ મળી.તેમાં લખું હતું.દિલ થી જોશો તો રડી જવાશે.અને ખરેખર એવું જ થયું.મને ગમ્યું.આ કારણે જ મને થયું કે આપને પણ બતાવું.જુઓ.અને બને તેટલા વધુ લોકો ને બતાવો.આ કલીપ નથી દેશ પ્રેમ છે.અરે!આ ક્લીપમાં જોવા મળશે દેશ પ્રેમ.દેશ પ્રત્યેની લાગણી.એવી વ્યક્તિઓની લાગણી કે તેમને જાતે જ લાગણીની જરૂર છે.આવા અનેક આપણી આસપાસ હશે.આપણે તેને પ્રેમ આપીએ.દેશ સમૃદ્ધ કોઈ એક પક્ષની સરકારથી ન થાય.દેશના વિકાસમાં દરેકનો સરખો હિસ્સો છે.નરેન્દ્ર મોદી ગુજરાતમાં હતા ત્યારે તે કહેતા 'ગુજરાતનો પ્રત્યેક વ્યક્તિ એક ડગલું આગળ આવે તો ગુજરાત છ કરોડ ડગલાં આગળ  આવશે.'ગુજરાત સર્વોત્તમ છે એમ ન કહી શકાય.પણ ગુજરાત ચોક્કસ વિશેષ છે તે વાત આખી દુનીયા કરે છે.
અહી ગુજરાતનું માત્ર કોઈ એક વાતમાં અનુસંધાન છે.આપ એક દેશભક્ત છો.આપ દેશના આદર્શ નાગરિક છો.બીજું છોડો,આ કલીપ માં છે તેવા બાળકો ને હુંફ આપો.

Sunday, June 1, 2014

India PM

Patel rakesabhai., My friend. Textbook author. Teacher than an innovative experiment. Yeah, net of the human. Dropping a photo., I was writing. Maine remember seeing such a thing in this photo.'s Take the first one is characterized by the Congress, including the Prime Minister.

I attended kartunistanum. Observe the time and what facial characteristic., It was made to look very similar.'s Famous cartoon of a clear headed as a program. Inherent in the discussion, he said: "The Prime Minister of India is a resemblance., And the resemblance to the lip length.'s all very disappointed when I shared with the Prime Minister. my lips are small. rakesabhai your chances right. efforts. constantly and worked hard to make the claim that the Prime Minister of your long lips.

Prime Minister Jawaharlal Nehru and Sardar brother. Has a long history. Nehru's economic contributions. Gandhi thought that the political right to manage 'Jawahar jindabada' gulajari the acting Prime Minister of India Lal Nanda., And it's also twice. Confidentiality of honor. Gulajarilala Jay.

Development of Lal Bahadur Shastri, a man of clay. 'Jai Jawan, Jai Kisan .... ... Hey, give khasadam Hulk was not even sugar. Village administration and an ideal person. Seems that many things. Shastri Ji's sudden death and the controversy that still re gulajarilala : bijivakhata became acting prime minister.

It was indira idiya., Such as the development of the state. Doll. Would take us. Rabarastempa will become prime minister. Indira became chief minister. Eventually led to appearances in the first emergency. Delhi to win the party effectively. Bus with the same people in government. Morarji Desai became the first non-Congress Prime Minister Morarji 28 July 1979, both by the present political situation at that time was similar. still today many of the parties, the new name of the Janata Party's. many of the parties of the public in the.

A single day without having to deal with the Parliament on 28 July 1979 to 14 January 1980 the Prime Minister. Rajiv Gandhi, new education policy. Respiratory, and in many ways remind one of those rahijaya. Yes, Bofors also kharumvipi Singh and Chandrashekhar. Remember . holiday Aayega laega happiness. ete after VP Singh, the objective of which is the subject of the research. both governments and non-Congress and nothing was right. Council and Kamandalu ourselves to strengthen the party and the country. said that it BJP to come forward, with the authority to receive the adavani and Bajpai was vahdatum. thus has the political affairs of the time.

PV Narasimha Rao of the Congress government lagumati. Sibu Soren Jharkhand Mukti Morcha. Harshad Mehta and one crore cash bribe case. Yeah, foreign policy and economic liberalization that will be remembered forever. Daivagoda and aike Gujral. ​​Was a chief . other State Department official said. both take lottery.'s both the name is written next to the former prime minister.

Now as we are that hajapani strong opposition party in the government of his own identity. First time the Congress party as a direct or indirect participation in the government without. Bajpai of the government of the modern individuals continually TV And the other is through the familiar. Anymore .... Ravindra Modi's Gujarat proud grandfather. Gujarat state as the prime minister of the country. Most times. Deputy Prime Minister and Acting Prime Minister gave two times. Sardar Patel and LK Advani.'s Chief representative in Varanasi . Baroda to left. Ahmedabad. Baroda is also winning., I just say it again. party, majority, publicity or whatever. thodak sabho only relieves with the Prime Minister. majority take the prime candidates., but the one thing that Your lips should be long.