Showing posts with label wah wah.... Show all posts
Showing posts with label wah wah.... Show all posts

Thursday, October 25, 2018

मोत ओर खाई...

वॉरेन बफेट 
विश्व में मैनेजमेन्ट के लिए उन्हें एक यूनिवर्सिटी माना जाता हैं।उनकी ये किताब मुजे किसी ने बहुत दी थी। बहोत दिनों से उसे साथ लेके गुमता रहा। आज में स्किल बुक के नेशनल सेंटर को खोज ने में ओर डेवेलोप करने के काम से जुड़ा हूँ। व्यवस्थापन की बहोत सारी समस्याओं का सामना कर रहा हु। जिन से काम की आशा हैं वो काम नहीं कर रहे हैं। जिन से सहज सहकार की आशा हैं वो वैसा नहीं कर पाते हैं।

ऐसे हालात वॉरेन के भी आये थे।
आज विश्व की 88 से अधिक कंपनी के सीईओ उन से समय लेके मिलने आते हैं। बफेट अगर समय देते हैं तो कोई भी कंपनी कहि भी अपने CEO को भेजने तैयार हैं।2.33.000 से अधिक कर्मचारी उनके साथ जुड़े हैं। इस किताब में पढ़ा कि उनकी किताब ध बटर फ्लाय बर्कबुक को भी पढ़ने की ख्वाइश हुई हैं। नेट में सर्च कर ने से मालूम पड़ा के उनकी ओर भी किताबे हैं। मगर बटर फ्लाय वर्क बुक को पढ़ने को मन तैयार हैं जल्द से उसे में प्राप्त करके पढूंगा।

घर से निकल चुका हूं।
मंजिल थी अब शायद नहीं रही हैं।
मंजिल का मालूम हैं मगर कुछ दूर दिखती हैं। बफेट कहते हैं जब ऐसा हैं तो मंजिल को पाने के इरादे छोड़ने नहीं चाहिए, जो गलतियां हो चुकी हैं उसे जानकर अलग से ऐसा न हो उसके लिए व्यवस्था करनी चाहिए।
कुछ काम नहीं था।
पैर में चोट थी। घर पे रहना था।
ऐसी समस्याओं और सवालो के साथ घर रहना पड़ा। ड्राइवर भी बहलाते हुए अम्बाजी जाने को निकल था।  घर से निकलना सम्भव नहीं था। कुछ काम सूज नहीं रहा था। तब इस किताब को पकड़ा। क्या किताब हैं। पूरे एक दिन में उसे ऊपर से पढ़ लिया। जब कुछ फीर से पढ़ने का मन हुआ पढ़ लिया। बाद में उसे ही अपनाया। एक तरफ मोत हैं, दूसरी तरफ खाई। वॉर्न बफेट का मानना हैं, खाई में कूद जाओ। मोत तुरंत आएगी, खाई में 2 या 4 सेकंड ज्यादा जीवन मिलेगा।
आज जीवन के नए पड़ाव को खोज ने के बजाय जो तय किया हैं उसे आगे बढाने के लिए व्यस्त हूं। कुछ निजी कारणों से त्रस्त हु, मगर स्वास के साथ  विश्वास  हैं कि 'जो होगा अच्छा होगा।

सरकुम:
कुछ मंजिले होती ही ऐसी हैं।
आसान होती तो हर कोई पा लेता।
मुश्किल नहीं हैं पाना, बस,उस के लायक बनना हैं।

Tuesday, September 25, 2018

शक्ति को सन्मान...

आज सबसे बड़ी पूनम हैं।
शक्ति की आराधना करने वालो के लिए आज का दिन महत्व पूर्ण हैं। शक्ति याने जो हमे साथ दे,विश्वास दे और अपने साथ रखे। अपने दुख को हम से छुपाए ओर सुख को हमसे बाटे।

मा अंबा, महाकाली या चामुंडा। शकि ओर भक्ति उपासको को अवश्य मिलती हैं। आज के दिन माँ से जो मांगते हैं,मिल जाता हैं। हमारे अंदर कोई पाप नहीं हैं तो शक्ति की देवियां हमे सहाय करती हैं।

किसी ने खूब कहा हैं,

गोकुल देखो,
मथुरा देखो।
कृष्ण की मूर्ति भी देखो तो काली हैं।
सारे जग के सुख देने वाली रात भी देखो काली हैं।
काली महाकाली वो तो सर्व शक्ति शाली हैं।

ऐसी सर्व शक्तिमान सिर्फ माँ हो सकती हैं। हर औरत शक्ति का स्वरूप हैं। जो शक्ति में आस्था रखते हैं, जो शक्ति की आराधना करते हैं। उनका दिल भी विशाल होता हैं।
जीवन मे बहोत सारे उतार चढ़ाव आते हैं।तब घर की शक्ति याने ऑरत ही घर को सजाती हैं, संवारती हैं। कुछ ऐसा नहीं जो औरत न कर पाए। पहाड़ को भी रौंदना शक्ति के लिए आसान हैं।बड़े पर्वत भी जहां शीश जुकाते हैं वहाँ में भी आज नतमस्तक हूं।


सरकुम:

जीवन में चाह हैं तो राह हैं,
वरना ये जीवन भी कंगाल हैं।

Friday, September 14, 2018

सर्जिकल स्ट्राइक ओर ...

कुछ बाते खास होती हैं।
हमारे लिए ऐसी एक न्यूज का मतलब हैं 'सर्जिकल स्ट्राइक'। कोई इसे पोलिटिकल रूप से बताता हैं, देखता या समजता हैं।ऐसी एक जानकारी जो सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़ा हैं।
एक तरफ हमारे सिपाही सर्जिकल स्ट्राइक के लिए तैयार थे।सबसे बड़ा सवाल ये था कि लाइन ऑफ कंट्रोल को क्रॉस करके कैसे गुसा जाय।ये सवाल इसी लिएभी महत्वपूर्ण था कि वहाँ रात का समय लेना था। क्योंकि दिनभर तो सिपाही की चहल पहल से सबको मालूम पड़ सकता था। होना क्या था... एक अभिनव रास्ता खोजा गया।

इस बात की जानकारी देते हुए लेफ्ट. कर्नल श्री राजेन्द्र निम्भोरकर ने बताया कि उस वख्त रात को गुसने में कुत्तो का डर था। अगर गुसते समय वो भौकना शुरू करते तो पकड़े जाते। अब कुट्टक5 को कैसे दूर किया जाये। राजेन्द्र ओर उनकी टीम ने जंगल का कानून याद किया। कुत्तो को खाने में तेंदुआ( चित्ता) पसंद हैं। कुत्ते शेर से ज्यादा तेंदुओं से डरते हैं। अब कुत्तो कोंकेसे जानकारी मिलेगी की आसपास में तेंदुआ हैं? और  अगर ऐसा कुत्तो को मालूम पड़ जायेगा तो होगा ये की कुत्ते न बोलेंगे,न भोकेंगे न बहार आएंगे। इस विचार को हमारे सिपाहियो ने एक नए तरीके से अमलीकृत किया। उन्होंने अपने कपड़ों में तेंदुए का पिशाब लगा कर रात को लाइन ऑफ कंट्रोल में गुसना शुरू किया।

अब आप समजय होंगे।
इस के कारण वहां पहुंचने तक कोई कुत्ता हमारी सेना के सामने नहीं आया। ओर हमारे देश की फतह हुई।

@#@

देश हमारा हैं।
हमे देश ने बहोत दिया हैं।
हम देश को क्या देना हैं और कब वो हमे ही तय करना हैं।

Sunday, August 5, 2018

मोदी सर ओर मेहुल:लादेन का ब्रेइन वॉश...




क्या किसी विचार की असर हमारे वर्तन में होती हैं।क्या कोई हमारा ब्रेन वॉश कर सकता हैं।क्या ब्रेन ट्रेनिग या ब्रेन हैकिंग हो सकता हैं।पढनेके शोख के कारण ओर मेरी जानकारी के लिए मुजे ऐसे विषय पर खोज करना पसंद हैं।आज तक मेने इसके बारे में बहोत पढा ओर सुना था।

कुछ महीनों पहले की बात हैं।
आज में मैंने लगा हु,छोड़िए अब मुजे यकीन हैं कि ब्रेइन वॉश हो सकता हैं।सबके लिए एक प्रचलित कहानी हैं।एक ब्राह्मण था।इसे किसी ने गाय का बच्चा दिया।कुछ चोर लुटेरे ब्राह्मण से ये गाय लेना चाहते थे।उन्हों ने एक ही बात को कई बार दोहराई।महाराज जी ये गाय का बछड़ा नहीं हैं।ये भेड के साथ आप क्या करेंगे।आप ब्राह्मण हैं,आप को ये सुंदर भेड़ का क्या काम।वो व्यक्ति ने आपसे गद्दारी की हैं।ये गाय का बछड़ा नहीं हैं।बस,उस ब्राह्मण का ब्रेन वॉश हो गया।उसने गाय के बछड़े को छोड़ दिया।वो चोर गाय के बछड़े को लेकर भाग गए।

इसे कहते हैं ब्रेन वॉश।
नरेंद्र मोदी के लिए  अगर कोई बात न सुने वैसा मेरा एक दोस्त हैं।दोस्त का नाम मेहुल सुथार।वो मोदी जी को भगवान मानता हैं।उनके खिलाफ वो एक भी शब्द नहीं सुन सकता।मोदी जो बोलते हैं उसका भविष्य कहा हैं वो मेहुल हमे उदाहरण सहित बता सकते हैं। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव में मोदीजी का वर्ताव ओर बातचीत सुनने लायक हैं।शायद आंख न मारते तो राहुल एक अच्छे नेता का परिचय दे जाते।मगर...
आंख बंद करने से चूहा बिल्ली को देख नहीं पाएगी,एमजीआर बिल्ली तो वहीं रहेगी।राहुल ने अपने आप को ऑन रेकोर्ड पप्पू कहा और आंख मारी।बस,अब मेहुल की बात आगे। में उसे चिढ़ाते समय में कहता हूं,मोदी जी ने तुम्हे गिफ्ट में अपनी पेन दी और तुम्हारा ब्रेन वॉश हो गया।वो मुजे कहेता हैं तेरा साम्यवादियों ने ब्रेन वॉश किया हैं।मेहुल एक अच्छे अध्यापक हैं। बारू स्कूल को उन्होंने आंतर राष्ट्रीय पहचान दिलाई हैं।

अब एक ओर बात...
फिर से ब्रेइन वॉश की बात चलाते हैं। लादेन की अम्मा जी पहली बार मीडिया से रूबरू हुई हैं।लादेन की अम्मा का नाम आलिया धानेम।उनकी पहली शादी से उन्हें लादेन पैदा हुआ।20 साल तक लादेन शरमाने वालो में से था।बहुत शर्मिला लादेन पढ़ने में भी अव्वल था।लादेन उसकी माँ धानेम को बहोत प्यार करता था।लादेन सऊदी अरेबियन यूनिवर्सिटी का विद्यार्थी था।वो इकोनॉमिक्स का विद्यार्थी था,बहोत प्रतिभावन्त विद्यार्थी के रूप में उसे देखा जाता था।वो यूनिवर्सिटी में कुछ लोगो से संपर्क में आया,यहां से बात बदली।यहाँ से एक तेजस्वी विद्यार्थी खूंखार आतंकी हो गया।1999 के दौरान धानेम लादेन से मिली थी।वो लादेन को मिलने सामने से गई थी,इस बातको मानते हुए उन्होंने कहा 'मुजे मालूम हैं कि लादेन एक अच्छा व्यक्ति था,उसका ब्रेइन वॉश किया गया था।
ऐसा होता हैं।
जब मा ओर बाप अपने बच्चों के प्यार में आते हैं।मगर जैसे ब्रेइन को पॉजिटिव रास्ता दिखाने के लिए पॉजिटिव सोच रखनी जरूरी हैं,वैसे ही अगर तय हैं कि ब्रेइन वॉश हुआ हैं तो उसका भी उपचार जरूरी हैं।
मनोचिकित्सक शायद ब्रेइन वॉश करते हैं।जिनका रास्ता भटक चुका हैं,जिन्हें रास्ता दिखता नहीं हैं उन्हें मनोचिकित्सक सहयोग करते हैं।सभी पेरेंटस को 'ध समर हिल' पढ़नी चाहिए।ये किताब हकरात्मक ओर हकरात्मक तरीको से किसी ओर के या अपने ब्रेइन को स्ट्रांग करने में सहयोग करेंगी।मेरे दोस्त और सहकर्मी मेहुल दुड़किया। बहोत सरल व्यक्ति। वो गुस्सा भी करते हैं तो प्यार जताते हैं।उन्होंने मुजे ये किताब दी है।
संभावना अपार हैं,
बस, तू ही आधार हैं।
कुछ तो होगा तेरा जमाने में कभी,
अभी तो जान हैं तो होंसला कम न होगा कभी।

साफ दिल से सोचना हैं।
हर वख्त हमारी समस्या ही सबसे बड़ी नहीं होती।एक गाना हैं, जो शायद आपने सुना होगा।

दुनिया में कितना गम है,
मेरा गम कितना कम हैं।
ओरो का गम देखा तो,
में अपना गम भूल गया।

बस

मन चंगा तो कथरोट में गंगा।
जो हैं उसे देखो,
जो होगा उसे देख लेंगे।
आज हमारा नहीं तो क्या हुआ कल सिर्फ हमारा होगा।

@#@
शुभमस्तु...
गब्बर इज़ बेक...

Tuesday, July 24, 2018

देशका नाम रवांडा



एक छोटा सा देश।देशका नाम रवांडा।यहाँ हुतु ओर तुत्सी नामके दो कबिले हैं।तुत्सी 15% के साथ अल्प संख्यक हैं।बाकी हुतु हैं।हुतु के एक नेता मलकियोर  जब प्रमुख बने तब उनकी हत्या करदी गई।हुतु कबीले ने पूरे देश को बंधी बना लिया।कहा जाता हैं कि सो दिनों में 10 लाख से अधिक तुत्सीओ की हत्या की गई थी।रवांडा के इतिहास का ये सबसे काला हिस्सा हैं।हमारे देश में अगर ऐसा होता तो आज तक वो बाते चलती।जब ऐसी बात रवांडा में हुई थी तो उसे भुलकर सब लोग साथ जुड़े ओर आज आफ्रिका में सबसे तेज आर्थिक प्रगति करने वाला देश बना हैं।7% GDP को संभाले हुए ये देश सबसे आगे और तेजी से बढ़ रहा हैं।आर्थिक विकास दर देखने वाली वैश्विक संस्थान इरोनॉमिक फ्रीडम ने कहा हैं कि इस देश की फ्रीडम स्कोर 69.10% हैं।ये फिगर किसी भी देश को आर्थिक सत्ता साबित करने के लिए काफी हैं। आज विश्वमें  39 वा स्थान इस एक से सवा करोड़ की वस्ती वाला देश हैं।


इस देश ने धर्म को कोसो दूर कर दिया हैं।ऐसा नहीं हैं कि यहां साम्यवादी शाशन हैं या धर्म को महत्व नहीं दिया गया।हा, नरसंहार के बाद कि किसीभी सरकार ने एक भी मंदिर या मस्जिद नया बनने नहीं दिया गया।तुत्सी के नेता पोल कगामे ने एकबार कहा था कि अपने छोटे देश की राजधानी में700 चर्च ज्यादा नहीं हैं?इन के इस विधान के बाद उन्होंने 6000 चर्च ओर 1 प्रतिशत मुसलमानों के 100 प्रतिषद मस्जिदों को बन्ध करवा दिया था।उनके देश में पादरी ओर मुल्लाओ के लिए धर्म को पढ़ने का ओर सरकार के नियमो में रहकर काम करने को ही इजाजत दी गई हैं।आज देश आगे हैं।आगे रहेगा।

@#@
अर्थशास्त्री इस देश को थर्ड वर्ल्ड कंट्री कहते हैं।अगर देखा जाए तो GDP संभाल कर प्रत्येक व्यक्ति की आयु बढ़ाने वाला देश फर्स्ट वर्ल्ड कंट्री में आता हैं।अमेरिका और यूरोप के देशों के साथ आज रवांडा खड़ा हैं।कोई भले इसे थर्ड कंट्री कहे।ये देश पहला नहीं सबसे पहला हैं।

Sunday, July 22, 2018

अंतर्मन

 घनघोर अंधेरा छाये जब
कोई राह नज़र ना आये जब
कोई तुमको फिर बहकाये जब
इस बात पे थोड़ी देर तलक
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा...।

जब लम्हा-लम्हा 'आरी' हो
और ग़म खुशियों पे भारी हो
दिल मुश्किल में जब पड़ जाये
कोई तीर सोच की 'अड़' जाये
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा...।

जब सच-झूठ में फर्क ना हो
जब गलत-सही में घिर जाओ
तुम नज़र में अपनी गिर जाओ
इस बात पे थोड़ी देर तलक
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा....।

ये जीवन एक छाया है
दुख, दर्द, मुसीबत माया है
दुनिया की भीड़ में खोने लगो
तुम खुद से दूर होने लगो
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा ......।

Wednesday, July 18, 2018

एक जवाब गलत हैं।

हम जो सोचते हैं।वैसा होता नहीं हैं।हमने जो नहीं सोचा हैं शायद हो जाता हैं,या करना पड़ता हैं।ऐसे हालात में हमे क्या करना चाहिए।
बच्चे उसका जवाब हैं।
बच्चो के लिए कोई समस्या नहीं रुकती। अगर बच्चा जिद पे बन आये तो हम उसे रोक नहीं सकते। जब बात खुदकी हो तो खुद को ही जवाब तय करना पड़ता हैं।किसी किताब में बिल्ली को दूध तक पहुंचना था।यहाँ पाठ्यक्रम निर्माण में जुड़े लोगों ने सोचा होगा कि बच्चे की स्किल डेवलोपमेन्ट के लिए ये काम आवश्यक लगा होगा।मगर हुआ कुछ अलग है।
जीवन में समस्या आये तो उसको सोचना ओर समझना चाहिए। हम सृस्टि के साथ जुड़े हैं।नव विचारक बच्चो को खोजने के काम में हम जुड़े हैं। समस्या का कोई समाधान खोजने के लिए बच्चे ही सही जवाब देते हैं। हमारे जैसे पढ़े लिखे लोग किसी की खोज के आधार पर जवाब खोजते हैं। मगर सवाल कितना भी मुश्किल हैं। जवाब जब हमें तय करना हैं तो हमारा ही जवाब माना जाना चाहिए।मुश्किल तब ही होगी जब हमें जो सवाल करेगा उसका जवाब तभी सही कहलायेगा जब तय किया गया जवाब मिलेगा।
समजीए...
सवाल सीधा हैं।
5+3 = ?

यहाँ सवाल करने वाले ने एक ही जवाब की अपेक्षा रखी हैं।जवाब तो ही सही हैं,अगर 8 मीले। सवाल ओर जवाब सही हैं। मगर मेरा मानना हैं कि अगर 8 सीखना ही सिद्धि हैं तो मेरा सवाल होगा(?)+(?)=8 में ऐसा सवाल करूँगा ओर इसके बहोत सारे जवाब होंगे मगर सभी सच हो सकते हैं।

सीखने वाले ने ये कहा कि बिल्ली को दूध तक पहुँचानेका ये भी तरीका हैं। सवाल करने वाले ने तो एक ही जवाब मिलता।जितने लोगो ने सही जवाब कहा होगा उनका उत्तर समान होगा। जैसे 8 जवाब तय हैं। मगर मेने बिल्ली को दूध तक पहुंचाया वो काफी नहीं हैं?

बच्चो की तरह जिद करो।
नियम बदल जाएंगे,जो सन्मान करते हैं,जो प्यार करते हैं वो नियम बदलने को तैयार हैं। हम भी बच्चों से प्यार करते हैं तो हमने भी किताबो में ऐसे नवाचार किये हैं।
सवाल मुश्किल गो सकता हैं।जवाब नहीं।क्यो की सवाल को जवाब चाहिए।जवाब देने के बाद आने वाले सवाल को हम नए तरीके से देख सकते हैं।सवाल सर्वस्व नहीं हैं।सवाल एक हैं।जवाब अनेक हैं।हमें सही ठहरना हैं चाहे जवाब को सही माना जाए या गलत। हमारी समझ हमे बनाए रखनी हैं।

@#@
जीवन एक सवाल हैं।
उसके जवाब हमे नहीं मिलते,जब जवाब मिलते हैं तो देर हो गई होती हैं।मरने के बाद जो हमारे होते हैं वो कहते हैं कि ये जवाब गलत था।

Monday, July 16, 2018

તું બસ તું...



નાના પાટેકર.
એક અદના અદાકાર.
મને ગમતા કલાકાર પૈકી એક અભિનેતા.એક ઉત્તમ ચિત્રકાર,સ્કેચર અને કાર્ટૂનિસ્ટ.મુંબઈ બ્લાસ્ટ વખતે આરોપીના સ્કેચ બનાવવામાં નાના પાટેકર દ્વારા મુંબઇ પોલીસ ને સહયોગ કર્યો હતો. ફિલ્મમાં નાના પાટેકર અને પત્રકારમાં રજત શર્મા.રજત શર્મા મને નાના પાટેકર જેટલા જ પસંદ છે.ઇન્ડિયા ટીવી ઉપર આપકી અદાલત કાર્યક્રમ આવે છે.વર્ષોથી હું તે જોવું છું.મને ગમે છે.કેટલાક દિવસો પહેલા નાના પાટેકરને આપકી અદાલતમાં બોલાવવામાં આવ્યા.અહીં એમણે સરસ વાત કરી.એક સુંદર વક્તા અને અદભુત અવાઝના માલિક શ્રી નાના પાટેકર દ્વારા અનેક ફિલ્મના સંવાદ બોલવા ઉપરાંત કેટલીય બાબતોની અહીં ચર્ચા કરવામાં આવી.માધુરી દીક્ષિત માટે અહીં નાના એ એક વાત કરી.જેમાં એમણે એક સંવાદ બોલી સંભળાવ્યો. એ ઇન્ટરવ્યૂ જોવામાં મજા પડી.મને મજા પડી એક તું વાળો સંવાદ સાંભળવામાં.એ મને ગુજરાતીમાં લખવાનું મન થયું.કશું જ યાદ ન હતું.ફિલ્મનું નામ કે એવું કોઈ જ વિગત યાદ નથી.યાદ છે નાના દ્વારા બોલાયેલ પેલી હિન્દી કવિતા.મનેય એવું લખવાનું મન થયું.મેં અહીં એ પેટનમાં ગુજરાતી લખ્યું છે.નાના પાટેકરની બોલાયેલ વિગતનો એક શબ્દ નથી.હા,વિચાર એમાંથી આવ્યો હતો.આ મારું લખાણ...

મારી તું...


નીચે તું.
ઉપર યુ.
પાછળ તું.
આગળ તું.

વિચાર તું.
આચાર તું.
વાત તું. સંવાદ તું.
મારો પ્રત્યેક શ્વાસ તું.

અંદર તું.
બહાર તું.
વાત તું વ્યવહાર તું.
આસપાસ બસ તુજ તું.


આંખ હું ને દૃશ્ય તું.
ઉડાન હું ને નભ છે તું.
ન દેખાય તો અંધારું તું.
દેખાય ત્યાં છે પ્રકાશ તું.

સંસ્કાર તું.
સંસ્કૃતિ તું.
જીવવા માટેનું કારણ તું.
મારવા માટેનું મારણ પણ તું.

તું છે તો હું છું.
હું નથી તોય છે તું.
મારા વગર નથી પૂર્ણ તું.
મારી પૂર્ણતામાં બસ એક તું.

જોડે તું.
પાસે તું.
નજીક તું.
દૂર પણ તું.


બે હિસાબ તું.
બે ખોફ બસ તું.
ભરચક પણ તું.
છલોછલ પણ તું.

બસ..
તું તું તું તું ને બસ તું.

તું આવે તો તું.
તું ન આવે તો તું.
મારું માને તોય તું.
મારું ન માને તોય તું.

છે મારૂ જીવન તું.
છે, મરણ મારું જ તું.
જીવન છે તું.
કવન છેતું જ તું.

સૂરજ હું ને તાપ તું.
અંધારું હું ને તારા તું.
નફરત હું ને બસ, પ્યાર તું.
ગુસ્સો હું ને વિશ્વની શાંતિ તું.

જીવનમાં એક ભાગ તું.
જીવન હોવાનો અહેસાસ તું.
આપે અનહદ મને વિશ્વાસ તું.
મારા દરેક શ્વાસમાં બસ તું જ તું.

મારો જ પ્રેમ તું.
મારો જ વહેમ તું.
મારી જાત તું.
મારી વાત તું.
મારું નામ તું.
બહુમાન પણ તું.


જીવવા માટે બસ કારણ તું.
મરવા માટેનું મારું મારણ તું.
હવે કાયમ મારું જીવન છે તું.
નામ છે બસ,પણ પાછળ મારા તું.

કરીલે વ્હેમનો દીવો તું.
પ્રેમ ને આપણા પ્રગટાવીશ તું.
કરે છે જે આજે મારી સાથે તું.
કારણ ખૂબ પ્રેમ મને કરે છે તું.

મારો તો શ્વાસ છે તું.
મારો તો વિશ્વાસ છે તું.
જીવવા માટે કારણ બસ તું.
જીતવા માટેની જીદ પણ તું.

વાત કરે તું.
પ્રેમ કરે છે તું.
વિશ્વાસ રાખ તું.
નોખા શ્વાસ રાખ તું.

છોડવા માટે એક કારણ તું.
મને મારનારનું મારણ બસ તું.
તને પૂછી જો જાતે જ તું.
તું...તું...તું..બસ તું જ તું.

હું છું તોય છે તું.
હું નથી તોય તું.
મારા પાછળ તું.
મારી સાથે પણ તું.
 અને તું.

ગુસ્સો તું.
સ્નેહ પણ તું.
વ્હાલ તું.
બબાલ પણ તું.

જાત તું.
ભાત તું.
વ્યવહાર તું.
વિશ્વાસ તું.

લવ તું...ભવ તું...
આવ તું.આવકાર તું.
બસ...જ્યાં જોવું ત્યાં તું જ તું.
બસ... ન દેખાય તોય બસ એક તું.


આ લખ્યું.પાછું આજે અહીં લખતા પહેલા થોડું મઠારી જોયું.આ મને ગમ્યું અને કાયમ શોધતાં અટકાય એ માટે આપ સૌ સામે બ્લોગમાં મૂકી દીધું.

@#@

હું...
તારો જ હું.

Monday, July 9, 2018

गुजरात:फुटबॉल ओर सन्मान

आज कल फुटबॉल फीवर चल रहा हैं।कई सारे अपसेट ओर चमत्कार फुटबॉल वर्ल्ड कप में देखने को मिले हैं।हमारे गुजरात के लिए भी एक गौरव हमे फुटबॉल से मिला हैं। ये सन्मान मिला हैं जोधपुर स्कूल से।ये एक सरकारी स्कूल हैं।यहां पे शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों के लिए स्कूल के सभी अध्यापक विशेष कार्य करतर हैं।जिसका परिणाम भी प्राप्त हुआ हैं।
इस स्कूल में पढ़ने वाले 
माया रबारी,माया चौहान ,साक्षी अंतानी ओर दिप प्रजापति के साथ थलतेज स्कूल के  પ્રાથમિક विद्यार्थियो के साथ स्वीडन जा रहे हैं।यहाँ गोथीया फुटबॉल कप में भाग लेने जा रहे हैं।पिछले तीन सालों से ये बच्चे इस टूर्नामेंट में खेलने जा रहे हैं।इन बच्चो को SKF कंपनीने स्पॉन्सर किया हैं। हमारे लिए गौरव इस बात का हैं कि पीछले साल माहिया चौधरी को बेस्ट प्लेयर का खिताब मिला था ।इन बच्चों को सन्मानित करने के लिए DPEO श्री महेश महेता के साथ शिक्षा से जुड़े अन्य अधुकारी ओर संघठन के प्रतिनिधि उपस्थित थे।खेल से जुड़ी संस्थानों के प्रतिनिधि ओर मीडिया कर्मियों की विशेष उपस्थिति में उनका सन्मान समारोह हुआ।
ये ब हहै स्टेट ओर नेशनल चेम्पियन शिप खेल चुके हैं।स्टेट चेम्पियन बन चुके हैं।और बहोत सारे सन्मान अपनी स्कूल को दिला चुके हैं।ऐसी स्कूल और ऐसे बच्चों को नमन।
@#@
कोन कहता हैं,गुजरात में सरकारी स्कूल काम नहीं करती।ऐसे रीपोर्ट ओर सन्मान कोई प्राइवेट स्कूल में भी नहीं हैं।

Saturday, July 7, 2018

नया रास्ता...

बेटी बचावो।
बेटी पढ़ाओ।
आज कल ये बात बहोत चल रही हैं।बहोत सारी संस्थाएं ओर व्यक्ति विशेष इस विषय के लिए कार्यरत हैं। इस में एक नई जानकारी मुजे मिली।श्री सूर्यकांत सिंह और श्री विमल सिंह पवार ने कुछ नया किया हैं।अगर आपको लड़की का बोझ लगता हैं तो आप उनतक लड़की को पहुंचाए।आप को पहचान देनेकी आवश्यकता नहीं हैं।
ऐसे लडकिया बचेगी ओर सही हाथोंमें उनका विकास हो पायेगा।लड़कियों के लिए नई हेल्पलाइन उनके जीवन को सुनहरा बना सकती हैं।

@#@
बच्चियों को बचाने के लिए नहीं,बच्चियों को बढ़ाने के लिए ये नई मुहिम चलाने के लिए नई मुहिम रंग लाएगी।

Thursday, July 5, 2018

हम करेंगे...



हमारे आगे पीछे हम देखते हैं।
कोई एक व्यक्ति या संस्थान बहोत सारे लोगो को नेतृत्व प्रदान करती हैं।एक अच्छा पिस्टर हैं।सभी समान थे मगर जिस ने को अपनी बात मनवाली वो आज सबका नेतृत्व कर रहा हैं।
लोकशाही का भी यही मॉडल हैं।सबको समजा ने के लिए हमारा कॉम्युनिकेशन स्किल का बहेतर होना जरूरी हैं।आए कौशल्य हमे नेतृत्व प्रदान करने के अवसर तक आसानी से पहुंचा सकती हैं।हमारी आसपास जो भी हो रहा हैं उसमें सबसे पहली बात ये हैं कि क्या हम हमारी बात मनवा पाएंगे!क्या हमारे में नेतृत्व के लक्षण हैं,जिसे हम आगे बढ़ा सकें।आज हमारी मांग हैं कि हमे हमारी बात रखने का मौका मिले।इसका सीधा मतलब हैं कि हमे ऐसी बात करनी होगी जो सब को सहज लगे।नेतृत्व का सबसे पहला नियम हैं,सबके साथ समानता।समानता ही काम में एक दूसरे से हमे जोड़े रखेगी।

@#@
हमे जो करना हैं,उसे तय करके।
क्योकि तय किये बगर जो कुछ होता हैं उसे अकस्मात कहा जाता हैं।

Sunday, June 17, 2018

કલામ સર : ઇફતાર

અબ્દુલ કલામ.
સિર્ફ નામ કાફી હૈ.
ભારત રત્ન,મિસાઈલ મેન અને પૂર્વ રાષ્ટ્રપતિ એ.પી.જે.અબ્દુલ કલામ. રાષ્ટ્રપ્રેમી અને વિચારક અબ્દુલ કલામ.એમનો ફોટો ઘરમાં રાખવો ગમે.હું એમને 5 વખત નજીક થી જોઈ અને મળી શક્યો છું.મારા માટે એ જાણે જન્નત છે.એમની સાથેના મારા ફોટો ક્યારેય શેર કર્યા નથી.કદાચ એ યોગ્યતા મારી ન હોવાનું માનું છું.રમજાન મહિનામાં ઇફતાર નું આયોજન થાય.રાજકીય પક્ષો અને સૌ કહેવાતા મોટા માથા ઇફતાર પાર્ટીનું આયોજન કરે અને વધુ મોટા થવા મહેનત કરે.આવું કરે એ કલામ નહીં.
આ વાત ક્યાંક વાંચેલી છે.આ વર્ષ 2002ની વાત છે.
ડો.એ.પી.જે. અબ્દુલ કલામ ભારતના રાષ્ટ્રપતિનો હોદો સંભાળ્યો અને થોડા સમય બાદ પવિત્ર રમઝાન માસ આવ્યો. વર્ષોથી રાષ્ટ્રપતિ ભવનની એક પ્રણાલીકા રહી છે કે રમઝાન માસમાં ભારતના રાષ્ટ્રપતિ દેશની ગણમાન્ય મોટી-મોટી હસ્તીઓને ઇફતાર પાર્ટી આપે.
આ વખતે તો રાષ્ટ્રપતિ પોતે જ મુસ્લીમ હતા એટલે રમઝાનની ઇફતારનું જોરદાર આયોજન કરવાનું રાષ્ટ્રપતિ ભવને નક્કી કર્યુ. ડો.કલામે એમના મિત્ર જેવા પી.એમ.નાયરને કહ્યુ, "આ ઇફતાર પાર્ટીમાં તો બધા ધનિક લોકો જ આવે. એ લોકોને જમાડો કે ન જમાડો એનાથી શું ફેર પડવાનો. આપણે ઇફતાર પાર્ટી કરીને આવા ધનવાનોને નથી જમાડવા એ તો રોજ સારુ-સારુ જમે જ છે. આપણે અનાથાલયના બાળકોને સરસ ભોજન કરાવીએ. તમે તપાસ કરો કે ઇફતાર પાર્ટીનું આયોજન કરીએ તો એનો કેટલો ખર્ચો થાય ?"
પી.એમ.નાયરે આ બાબતે તપાસ કરી અને ડો.કલામને કહ્યુ,"સર, ઇફતાર પાર્ટી માટે લગભગ 22 લાખ જેટલો ખર્ચો થાય". ડો.કલામે કહ્યુ, "તમે ટીમ બનાવો અને અનાથાલયોના બાળકો માટે કપડા, ધાબળા, મિઠાઇ વગેરેની વ્યવસ્થા કરાવો. આપણે નાના-નાના બાળકોને રાજી કરવા છે. બાળકો રાજી થશે તો અલ્લાહ રાજી જ છે. ગરીબ ઘરના બાલકોની ખુશી એ જ આપણા માટે ઇફતાર પાર્ટી."
આવું જ આયોજન એમને રાષ્ટ્રપતિ બન્યા ત્યારે પહેલા બાલ દિન મા કર્યું હતું.આખા ભારતના દરેક રાજ્યમાંથી 10 બાળકોની પસંદગી કરાઈ હતી.સરકારી શાળાના અને અન્ય તેજસ્વી ભારતના બાળકોને રાષ્ટ્રપતિ ભવનમાં નિમંત્રણ આપવામાં આવ્યું હતું.

@#@
2022 નું કલામ સરનું સ્વપ્ન આપણે પૂરું કરી શકીએ તો જ એમને આપણી અંજલિ.

Friday, June 1, 2018

बच्चे और हम

आप देखते हैं।
आप सोचते होंगे कि ये क्या हैं।
एक लड़के को शायद उसकी मम्मी ने दूध दीया हैं।किसी कारण से वो दूध फर्श पे पड़ा हैं।
कोई बच्चा होता तो शायद रो लेता,मगर इस ने तो कमाल कर दिया।
घर के 3 पालतू साथी के साथ बच्चा लेटकर दूध पी रहा हैं।बच्चे अपनी मनमानी करते हैं,कुछ हमे पसंद हैं और कुछ ना पसंद।मगर बच्चे तो बच्चे हैं।बच्चे क्यो ऐसा करते हैं,जो हमे पसंद नहीं हैं।बच्चे ऐसे क्यो होते हैं जो सब हमारी पसंद को ही ना पसंद करते हैं।हम मानते हैं कि हम जो चाहते हैं,वो ही हमारे बच्चे करे।मगर सवाल ये हैं कि क्या हम जब बच्चे थे तब हम हमारे मातापिता को पसंद आये ऐसा ही करते थे?अगर जवाब हा  तो हमे सोचना ओर संभालन हैं।कोई व्यक्ति सभी को सदैव खुश नहीं रख सकता हैं।आप भी ओर में भी।मगर आज सुबह ये फोटो देखकर अपने बचपनको याद करिए।

@#@
बच्चो को जब हम कुछ कहते हैं,हमारा कहा वो समज ही गए हैं ऐसा मानना गलती हो सकती हैं।

Thursday, April 26, 2018

INSPIRE awards


2018 Nominations open for INSPIRE awards-MANAK for Innovations by school children (class 6 to 10) sponsored by Department of Science and Technology, Govt of India.* Rs 10k per student to participate  if s/he gets selected for district level exhibition.  Top ideas from district exhibition get selected for state level.  The top ideas from states exhibition get selected for national level exhibition along with mentoring support from experts from IITs and other national labs for improvement and develop the prototype. The top 60 ideas are showcased in  Rashtrapati bhavan! Further, all 60 get a chance for 7 days education trip to Japan. Do not wait...lets encourage school children to participate to become future innovators. 

Requested to kindly forward this to school students, parents, teachers and principals of schools.

Please click hear...

Sunday, April 22, 2018

આજ અને કાલ


આજે આજ છે.કાલે કાલ હશે.આજે ભલે દુઃખ હોય,કાલે સુખ હશે જ હશે.આજે ભલે સુખ છે.કાલે દુઃખ આવશે જ.આપણે કાયમ આવતી કાલની ફિકર કરીએ છીએ.આજે જે આજ છે,એ એ જ કાલ છે જેની આપણે ગઈ કાલે ચિંતા કરતા હતા.
જ્યારે વ્યક્તિ દુઃખમાં હોય ત્યારે તે આવતી કાલના સુખ માટે મથામણ કરે છે.આવતી કાલ માટે ચિંતા કરે છે.એ ચિંતા એ હોય કે આજની ચિંતા આવતી કાલે દૂર થશે કે નહીં.
આજે જે દુઃખી છે એ આવતી કાલના સુખ માટે ચિંતા કરે છે.આજનું આ પોસ્ટર આપણાં માટે છે.સૌને સરખું લાગુપડે છે.આપણે જ્યારે આજે જીવતા હોઈએ છીએ ત્યારે કાલની ચિંતા કરીએ છીએ.આ ચિંતા દૂર  કરવી જરૂરી થઈ પડે છે. કેટલીક  વ્યક્તિ આજના દુઃખ ને દૂર કરવા કે આજના સુખ ને ટકાવી રાખવા સતત પ્રયત્ન કરે છે.
આજે જે આજ છે.
કાલે તે ગઈ કાલ હતી.
આજે જે આજ છે.
આવતી કાલે આજ હશે.આજે જે આજ છે એટલે જ આજે એ આવતી કાલ કહેવાય છે.કોણ રોજ આવે છે તો આજ રોજ આવે છે.આ એ જ આજ છે જેને આપણે ગઈ કાલે યાદ કરતા હતા.


@#@
આજ ને આજની જેમ જુઓ.
અકબર બીરબલ ની વાર્તામાં આવે છે એમ એમ 'यह वख्त गुजर जाएगा' સારો કે ખરાબ સમય આજે છે.કાલે બદલાશે એજ જીવન.

Wednesday, April 18, 2018

छोकु:दीकू


शरुआत ओर अंत।
समान होता हैं,समान नहीं हैं तो समस्या हैं।कुदरती या कृत्रिम किसी भी व्यवस्था में सेम सिस्टम काम करता हैं।कॉम्युटर जहाँ से शुरू होता हैं,वहीं पे खत्म होता हैं।वैसेही जीवन जब शुरू होता हैं,वहीं से वो खत्म भी होता हैं।
जब बच्चा पैदा होता हैं।तबसे कुछ साल उसे प्रत्येक कार्यमें किसी की सहायता चाहिए होती हैं।वैसे ही जब व्यक्ति वृद्ध होता हैं,आखिरी दिनों में उसे भी हर काम के लिए सहायक की आवश्यकता होती हैं।छोटा बच्चा अपने आप खाना नहीं खा सकता।वैसे ही वयस्क की भी यही समस्या हैं।
शुरू से अंत तक कि जो दौड़ हैं, उसमें हमने जो सजाया हैं,संवारा हैं या प्राप्त किया हैं उसी के आधार पर हमारे आखरी दिन खत्म होते हैं।
क्या हमने हमारे जीवन के बीच में मुसफरी करते समय ऐसे काम किये हैं जिससे अपना अंत शांति से हो।जीवन में व्यक्ति को हंसना सीखना पड़ता हैं,रोता तो तब भी हैं जब वो पैदा होता हैं।अगर हम पैदा हुए तब रोये थे,बाकी के सभी खुश थे।जब हम मरेंगे तो हम खुश होगे और बाकी के रोयेंगे।

अब बताइए...

हमने ये सोचा कि हम हंसते हंसते जीवन जिएंगे ओर इसे हंसते हंसते खत्म करेंगे।मगर रूल्स ऐसा हैं कि आप रोते हुए आये थे,सो आपका रोते हुए जाना तय हैं।मगर वो रोना अंतिम दिनों में न होते हुए,बीच में खत्म हो जाये वो हमारे हाथमें हैं।अब हमें ये देखना हैं कि हम कब रोयेंगे।हमे क्यो रोना आता हैं।क्या इस रोने को हम रोक नहीं सकते।रोने को रोकने के लिए हमे क्या करना पड़ेगा।इस सवालों के जवाब ही हमे शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए रास्ता दिखायेगा।

मेने जो तय किया,में उसे खत्म करता हूँ।उस के लिए मुजे जो करना हैं में करूँगा।हसूंगा, रोऊंगा किसी को हसाउंगा या रुलाऊंगा।मगर जो तय हैं,उसे पूर्ण करूँगा।आज परशुराम जयंती हैं।अक्षय तृतीया हैं।दो अच्छे दिनोंका आज संगम हैं।वैसा ही संगम हमारे जिंदगी में आये और हम शांति से जीवन पसर करे वैसी प्रार्थना करते हुए आज तय करना चाहता हूं कि में ख़ुशी से अपना जीवन जी रहा हूँ और उसे पूर्ण करूँगा।में हंसते हुए मरूँगा,मेरे पीछे जो रोयेंगे वैसा ही अंत उनका होगा।जो मेरे पीछे हसेंगे उनके पीछे उनके बाद उनके निधन के बाद  लोग हसेंगे। यहाँ हसने का मतलब हैं याद करना।अच्छे केंलिएबयाद करना। जो मेरे पीछे रोयेंगे,उनके पीछे भी कोई रोयेगा।जहां से स्टार्ट हुआ,वहीं खत्म होगा।


@#@
दो शब्द हैं।
किसी कहानी में थे।
एक छोकु ओर दूसरा दिकू।
छोकु का मतलब अगर शुरुआत है तो दिकुका अर्थ अंत हैं।हम छोकु से शुरू करके अपने जीवन में आगे बढ़ते हुए जिम्मेदारी ओर हुकुम को मानते हुए दिकू तक पहुंचना हैं।सो...आज के पावन अवसर पर आपको छोकु दिकू की शुभकामना।

Sunday, April 8, 2018

ગુણોત્સવ: ગુરુ ઉત્સવ

રાજ્ય પરીક્ષા બોર્ડ,ગાંધીનગર.અહીં શ્રી પ્રફુલ જલુ ચેરમેન છે.છેલ્લા થોડાક વર્ષોથી એક વિઝન સાથે રાજ્ય પરીક્ષા બોર્ડનું નવતર કાર્ય ચાલે છે.ગુણોત્સવ અંતર્ગત ચેરમેનશ્રી ને જૂનાગઢ જિલ્લાનાં કેશોદ તાલુકાનાં સોંદરડા ગામમાં જવાનું થયું.અહીં તેઓએ વિદ્યાર્થીઓનાં અભ્યાસનું બાહ્ય મુલ્યાંકન કરવાનું હતું.આ સમયે નાનકડી સોંદરડા પ્રાથમીક શાળાની મોટી કહી શકાય તેવી સિધ્ધીઓ સાથે વિદ્યાર્થીઓ બેઠા હતા. સોંદરડા પ્રાથમિક શાળાએ વર્ષ ૨૦૧૬માં એન.એમ.એમ.એસ.ની પરીક્ષામાં છ વિદ્યાર્થીને પરીક્ષા અપાવી જેમાંથી ચાર વિદ્યાર્થી ઉતિર્ણ થયા. વર્ષ ૨૦૧૭માં છ વિદ્યાર્થીએ પરીક્ષા આપી અને બધા વિદ્યાર્થી ઉતિર્ણ તો થયા પણ તેમાં બે વિદ્યાર્થી મેરીટમાં રેંક હાંસલ કરી શાળા અને ગામનું ગૈારવ વધાર્યું.

શાળાના આચાર્યશ્રી માલદેભાઇ કામરીયા અને સહાયક શિક્ષકશ્રી વિરમભાઇ તથા શ્રી દુધાત્રાએ શાળાની શેક્ષણિક પ્રવૃતિમાં વિદ્યાર્થી કેમ અવ્વલ બને તેની કાળજી દાખવી છે.એમના ખાસ આયોજન અહીં જોઈ શકાય છે.આ માટે તેમણે ખાસ પ્રયત્ન કર્યો છે. સાથે સહ શૈક્ષણિક પ્રવૃતિઓમાં વિદ્યાર્થીઓ કેમ રસ દાખવે તે દિશામાં પણ વિવિધ પરિણામલક્ષી કાર્યક્રમો અહીં હાથ ધરવામાં આવેલ છે. શાળામાં આધુનિક વ્યવસ્થાઓ સાથેની કોમ્પ્યુટર લેબમાં વિદ્યાર્થીઓને કોમ્પ્યુટરના અનુભવો પુરા પડાય છે. સર્વદિશામાં બાળકોની કાબેલીયત હાંસલ કરે તેવી વ્યવસ્થા દ્વારા અહીંનું શિક્ષણ કાર્ય ચાલી રહ્યુ હતું. લોકમાનસમાં ખાનગી શાળા તરફ એકતરફી લગાવ વધી રહયો છે. ખાનગી શાળામાં જ શ્રેષ્ઠ શિક્ષણ મળે તેવી ભ્રામક માન્યતાઓ વાલીઓ ધરાવે છે. આવા ખોટા ભ્રામક પ્રચાર સામે સોંદરડા જેવી શાળાઓ ખાનગી શાળા કરતાં પણ શ્રેષ્ઠ શિક્ષણ અને આયોજન શિક્ષકો દ્વારા થાય છે.શિક્ષકો દ્વારા અહીં જાને બધું જ આપવાનો પ્રયાસ થાય છર.જે દેખાઈ આવે છે.

આ શાળાની મુલાકાત પણ શ્રી પ્રફુલ જલુએ લીધી હતી.તેઓએ ગામડામાં જ શિક્ષણ મેળવ્યું હતું.પોતાની વાતમાં એમણે જણાવ્યું કે  કેશોદ તાબાનાં મઘરવાડા ગામની સરકારી શાળામાં જ અભ્યાસ કર્યો. કારકિર્દીનાં વિવિધ શિખર સિદ્ધ કરવામાં ડગલુ પણ પીછે હઠ કરી નથી.તેમના પ્રાથમિક શાળાના ગુરૂ શ્રી કાનજીભાઇ મક્કા મેસવાણ ગામે તંદુરસ્ત જીવન પસાર કરી રહ્યા છે. શ્રી પ્રફુલ જલુ તેમના ગુરૂજીને મળી અહોભાવ વ્યક્ત કરવા અને ગુરૂચરણ સ્પર્શવા મેસવાણ પહોંચ્યા. ગુરૂશિષ્યનાં અનેરા હેતની વર્ષા થઇ હતી. અને આજથી પાંત્રીસ વર્ષ અગાઉ જે વિદ્યાર્થીના જીવનમાં  શિક્ષણનાં ઓજસ આંજ્યા તે આજે ગુરુજીને મળવા આવ્યા હતા.આજનું નામ ભલે પ્રફુલ જલુ.પણ...કુટુંબમાં પોલાભાઇ.આ પોલાભાઈની યાદોને વાગોળતા ગુરુજી બોલ્યા. મારો વિદ્યાર્થી ક્યારેય કાચો ના હોય,શ્રી કાનજીભાઇએ તેમની શિક્ષક તરીકેની કારકિર્દીને વાગોળતા તેમના શિષ્યને શીખ આપતા જણાવ્યુ કે તૈયારી વિના વર્ગખંડમાં જવુ એ શિક્ષકની ઉણપ છે. દરેક બાળક દેશનો સૈાથી સર્વોચ્ચ નાગરીક બને તે દિશામાં તેમની શૈક્ષણિક ચિંતા કરવી એ જ ગુરૂધર્મ છે. મને ગૈારવ છે કે મારા છાત્રો આજે સુખી અને સાધન સંપન્ન છે. આ તકે ગુરૂ શીષ્યનું મીલન ખરા અર્થમાં સાંદીપની અને સુદામાની એક યાદ હતી.


@#@
ભણ્યા એટલા ભાગ્યશાળી.
કારણ એમને ત્રણ ભગવાનનો સાથ.એક ભગવાન...બીજા માતાપિતા અને ત્રીજા ગુરુ.

Saturday, February 24, 2018

आज हैं इसे देखो...


कुछ दिनों पहले की बात हैं।में अमदावाद में था।सुबह सुबह कुछ काम से में गाड़ी लेके निकला। आज के दौर में जानकारी प्राप्त करने के माध्यम में FM रेडियो भी बहोत बड़ा रोल अदा करता हैं।गाड़ी में रेडियो जॉकी ध्वनित का शॉ चल रहा था।ध्वनित के इस कार्यक्रम का नाम हैं, 'मॉर्निंग मंत्र'च₹। ध्वनित बात कर रहे थे।आज वो शीतल महाजन की बात कर रहे थे।शीतल महाजन ने एक कीर्तिमान हांसिल किया हैं।उन्होंने साडी पहनकर स्काई डायविंग की।उनके लिए सिर्फ ये बात नहीं हैं।उनके किए ऐसी बहोत सारी जानकारी थी जो ध्वनित ने बताई।


शीतल महाजन।बहुत कम लोगो स्काई डायविंग के बारे में मालूम होगा। हम उसे tv पे देखते हैं।बहोत ही हिम्मत का काम हैं स्काई डायविंग करना।

महाराष्ट्र के पुने में रहनेवाली शीतल महाजन  भारत की पहली महिला है जो स्काई डायविंग करती है। वो 21 साल की थी तब पहली बार जम्प लगया था। उन्होंने पहला जम्प बिना ट्रेंनिग के लगाया था।उनका पहला जम्प नार्थ  पोल से  लगाया गया था।करीब 2400 फिट से उन्होंने पहला जम्प लगाया था।शीतल महाजन ने दूसरा जम्प अंटार्कटिका साउथ पोल से 11600 फिट से लगाया था।

शीतल एक अकेली भारतीय महिला हैं जो दूसरे देशो में भी इसके लिए विविध ओर गौरवपूर्ण रीकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं। दुनिया के सात भूखंड में जम्प कर के उन्होंने नया कीर्तिमान आने नाम किया हैं।

विविध हेलीकॉप्टर ओर प्लेन से वो आजतक जम्प कर चुकी है। अभी तक उन्होंने 700 से अधिक जम्प लागए है। शीतल महाजन के नाम से आज 18 नेशनल अवॉर्ड ओर 6 वर्ल्ड रेकॉर्ड है। भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सन्मानित किया है।

आज वो भारत में स्काई डायविंग की कोच है ।वो कहती है के मेरा धेय्य कुछ अलग करना था। दुनिया को दिखाना था कि भारतीय महिला किसी भी फील्ड में कुछ न कुछ कर सकती है ।

अपनी सोच को बदलिए।सब कुछ मुमकिन हैं।एक महिला अगर ऐसा काम करती हैं तो हमे उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।सोच बदलो,विचारों से गिरे हुए आप ओर में ऐसी सोच रखते हैं जो सही नहीं हैं।एक अच्छा विचार हमे सफ़लताकी ओर ले जाता हैं।ऐसा ही एक नकारात्मक विचार हमे सफ़लतासे दूर करती हैं।

कृष्ण भगवान ने कहा हैं की,
जो हो गया हैं,वो फिरसे न होगा।
जो हो रहा हैं,वो ही अंतिम सत्य हैं।जो होगा, वो हमने तय किया होगा वैसा ही होगा।
अगर आप अकेले हैं तो वो अब ऐसा नहीं होगा क्यो की वो भूतकाल हैं।आज आप जो हैं,जिन के साथ हैं,जो भी कर रहे हैं वो ही सत्य हैं,क्योकी ये वर्तमान हैं।आप का कल जैसे आपने तय किया हैं वैसा ही होगा।
शीतल महाजन को ही देखलो।भूतकाल में किसी महिला ने स्काय डाइविंग नहीं की थी।अब ऐसा नहीं होगा, वो भूतकाल हैं।शीतल डाइविंग करती हैं,वो वर्तमान हैं और वो ही अंतिम सत्य हैं।कल वो ही होगा जो शीतल चाहेगी।उनकी चाह थी कि वो जरा हटके काम करें।वैसा ही होगा।वो कर रही हैं।
अपने आप में श्रद्धा रखने से ही हम किसी ऑर की श्रद्धा प्राप्त होगी।जो नहीं होने वाला हैं,या जो पहले हो चुका हैं इस बातो मे अपना वर्तमान बर्बाद न करें।
शीतल महाजन के माध्यम से आज जो संदेश में देना चाहता हूं वो स्पस्ट हैं।और वो मेरी टेग लाइन भी हैं।जो है इसे देखो,जो होगा उसे देखलेंगे।

#Thanks RJDhvanit
#waw shital mahajan

We can मुमकिन हैं...!

Thursday, February 22, 2018

मेरे बादभी...



मेरे बादभी इस दुनिया में,जिंदा मेरा नाम रहेगा,
जो  भी तुझको देखेगा, तुजे मेरा लाल कहेगा।
तेरे रूपमें मिलजायेगा,मुझ को जीवन दोबारा।
मेरा नाम करेगा रोशन,
जगमें मेरा राज दुलारा।

एक अद्भुत गाना।
ऐसा ही अद्भुत ये पोस्टर।
क्रिएटर सदैव कुछ नया क्रिएट करते रहते हैं।मेरे एक दोस्त हैं।दोस्त भी ऐसे की समजो के जीवन के अभीन्न व्यक्ति।उन्होंने मुजे ये फोटो भेजा हैं।वो एक क्रिएटर हैं,साथ में वो एक सर्जक को बढ़ावा देने वाली व्यक्ति हैं।आजतक उन्होंने मुजे सम्पूर्ण सहयोग दिया हैं।देते रहे है,ओर आजीवन देते रहेंगे।

आज उन्होंने मुजे एक smg के साथ ये फोटो भेजा।जिसमें लिखा था 'आप को जब भी गुस्सा आये आप इस फोटो को देखना।मुजे यकीन हैं 'आप भी जब गुस्सा होंगे ये फोटो देखेंगे तो शांत हो जाओगे।
सर्जक कुछ भी सर्जन कर सकता हैं।सर्जन याने बनाना।कुछ चीज या सामग्री बनाना ही सर्जन नहीं हैं।किसी व्यक्ति का निर्माण या उसमें सहयोग भी एक अनूठा सर्जन हैं।

# लव यू लाइफ...

Saturday, February 17, 2018

सैनिक परिवार को सलाम


हमारा देश।
विश्वमें सर्वाधिक युवक मतदार वाला देश।विश्व के सबसे युवान जनसंख्या वाला देश।हमारा देश प्रगति कर रहा हैं।आगे ही आगे बढ़ाएंगे कदम वाली बात हम ने स्वीकार की हैं।हमारे देश में आज इजनेर मिलेंगे,तबीब या वकील मिलेंगे एमजीआर देश के लिए सदैव खड़े रहने वाले सैनिक आज भी हमारे आसपास बहोत कम हैं।

चीन एक ऐसा देश हैं,जहाँ मिलेट्री ट्रेनिग करनी आवश्यक हैं।अगर आप के दो संतान हैं तो एक को देश के सैन्य में भेजना आवश्यक हैं।पंजाब,हरियाणा,उत्तर प्रदेश और ऐसे अन्य प्रान्त से सैनिक ज्यादा होते हैं।गुजरात से बहोत कम लोग देश के सैन्य में दाखिल होते हैं।

एक परिवार में दो भाई।सबसे बड़े भाई का नाम केतनसिंह चावड़ा।वो गुजरात के महेसाणा के करीब वसई के निवासी हैं।अपने घर के सबसे बड़े पुत्र।कुल मिलाके 3 भाई बहन हैं।सबसे बड़े केतनसिंह जो भारतीय फौज में काम करते हैं।बचपन से उन्हें देश भक्ति का माहौल मिला।उनका परिवार राऑल चावड़ा कुल हैं।उनके पिताजी गोजारिया स्थित छीटे से नगर में हाइवे के ऊपर गेरेज का संचालन कर रहे हैं।

उनका नाम महेंद्रसिंह।उन्होंने बचपन से उन्होंने अपने संतानों को देश की सेवा में लगाने का संकल्प किया।इस परिवार के सबसे बड़े पुत्र को देश सेवा में भेजा।उनके दूसरे बेटे जिनका नाम अनिरुद्धसिंह हैं।वो भी बचपन से  भाई के नक्शे कदम पर चल रहे हैं।वो देश सेवा में ही जुड़ना चाहते हैं।

यहाँ एक बात जानके आप को खुशी होगी की श्री केतनसिंह चावड़ा की मौसी के दो लड़के श्री सामंतसिंह ओर श्री अर्जुनसिंह देश के सैन्य में सेवा देते हुए निवृत्त हो चुके हैं।देश सेवा के लिए दो बहनें निरुबा चावड़ा के पुत्र केतनसिंह ओर ग़लबा बा के दोनों पुत्र जो सैन्यमें हैं।सोचिए ,उनकी माताओ को सलाम जिन्होंने अपने सभी संतान को देश सेवामें जोड़ा हैं।ऐसे परिवार के मुखिया को सलाम।में तो कहूंगा की स्व. मदारसिंह वाघेला को सलाम हैं।जिन्होंने ऐसी दो बेटियोंको जन्म दिया।अरे...अर्जुनसिंह जी ने तो पाकिस्तान के सामने लड़े गए कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों के दांत खट्टे करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

ज्यादातर लोग सैनिकों को एकदम शिस्त या कड़क स्वभाव के मान लेते हैं।हमारे देश के सैनिकों ने बहुत सारे खेलो में मेडल दिलवाने वाले सैनिक ही हैं।कुछ संगीत तो कुछ अन्य कौशलयो में निपुण होते हैं।वैसे ही श्री केतनसिंह चावड़ा अच्छी फ्लूट बजाते हैं।

जब हमारी सेना सर्जिकल स्ट्राइक या ऐसा कुछ विशेष सैन्य साहस दिखाती हैं तब उन्हें पैराग्लाइडिंग की सहाय की आवश्यकता होती हैं।श्री केतनसिंह आज पैराग्लाइडिंग के ग्रुप में आज अपनी सेवा प्रदान कर रहे हैं।देश के लिए जीने वाले ऐसे ही हमारे साथी और वीर जवान केतनसिंह कराते चेम्पियन भी हैं।

@#@

जिंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर,
जान देने की ऋतु रोज आती नहीं।
मरते मरते रहा बागपत साथियो,
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो।

# सैन्य को सलाम
# सैनिक को सलाम
#सैनिक परिवारों को सलाम।