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Wednesday, October 4, 2017

स्वास्थ्य की गेम

हमे सबसे अधिक आवश्यकता स्वास्थ्य की हैं।इसके बगैर हम अच्छी जिंदगी नहीं जी सकते हैं।मेरे किसी दोस्त ने मुजे ये फोटोग्राफ भेजा हैं।स्वास्थ्य के संदर्भमें ए खेल दर्शाया गया हैं।कोन कोंन सी बातें हमे तंदुरस्ती की ओर ले जाएगी।कोंन सी बातें हमे बीमार करेगी।ये ओर ऐसी कई सारी जानकारी इस गेम से हमे जाननेको मिल सकती हैं।PBL के आधार पे जब हम सामाजिक विज्ञान की पुस्तक बना रहे थे तब ऐसा खेल हमने किताब में दिया था।आप के पास भी ऐसे कोई खेल या सामग्री हैं तो मुझतक पहुंचाए।
#Bनोवेशन

Tuesday, October 3, 2017

बोलिए क्या बोलोगे...

आज आए चित्र सब कहेगा।मुजे देदो।भगवान पे नाम पे देदो।विश्वमें जितने धर्म हैं,उन सबके नाम से मांगने वाले हमे मिलेंगे।आज हम धर्म की नहीं कर्म की बात करेंगे।एक व्यक्ति जिसके दो हाथ नहीं हैं।वो मजदूरी करता हैं।एक जगह से दूसरी जगह इट ले जाता हैं।उसके सामने एक व्यक्ति भीख मांगता हैं।ऐसे चित्र जो शब्दो की कमी महसूस नहीं होने देते।ऐसे ही चित्र सटीक तरीके से अपना संदेश पहुंचाते हैं।
#चित्र संदेश


Friday, September 22, 2017

ICT में जोडाक्षर

पहले शब्द था विद्या।
बादमें शब्द मिला शिक्षा।
इस शब्द को मिलने के कुछ दसको के बाद नया शब्द मिला टेक्नोलॉजी।उसके बाद एक नया शब्द सुना ET याने एज्युकेशन ऐंड टेक्नोलॉजी।उसके बाद आया ICT याने इन्फॉर्मेशन एज्युकेशन टेक्नोलॉजी।
आज में आप को ICT के बारे में कहूंगा।12.09.2017 की बात हैं।भारत सरकार के MHRD से सेक्रेटरी श्री अनिल स्वरूप सर गुजरात के महेमान थे।गुजरात के ICT से जुड़े इनोवेटिव टीचर्स को यहाँ निमंत्रित किया गया था।
मुजे यहाँ प्रेजेंटेशन करने का समय मिला।मेने आज तक के मेरे नवाचार ओर उसके प्रचार प्रसार में ICT के सहयोग के बारे में बात की।में आप को में बताऊ की ICT  के काम के लिए बुलाए गए सभी में सबसे कम समज मेरी थी।
मेने यहाँ खूब सीखा।
#Thanks GCERT

Tuesday, September 19, 2017

मेरी खुशी...

एक खूबसूरत गाना हैं।
बच्चे तो भगवान की सूरत होते हैं।वैसा आप फोटोग्राफ में देख सकते हैं।एक छोटा बच्चा।कहते हैं कि बच्चा अनुकरण से भी शिखता हैं।ये बच्चा सुरेंद्रनगर के दसाडा के पास रहता हैं।उसकी सायकल में एक टायर नहीं था।टायर वाली साइकल भी रेतमें हम नहीं चला सकते।अपनी खुशी के लिए आए बच्चा आज निकला हैं।हो सकता हैं शायद गुनगुनाता हो...
छोड़ो कलकी बाते....नई बात पुरानी,
नए दौर में लिखेंगे....मिलकर नई कहानी।

Friday, September 15, 2017

इंडोजापान...

इंडिया....
जापान....
इंडोजापान।पिछले कुछ दिनोंसे जापान के बारेमें भारत के बारे में हम बात कर रहे हैं।बुलेट ट्रेन भारतमें भी शुरू होगी।हमभी चीन और जापान के साथ बुलेट ट्रेन वाले एशियाई देश बनेंगे।हम जापान जैसा करना चाहते हैं।मेरी शुभकामना हैं,में भी सरकार के प्रयत्नोमें सहयोग करूँगा।
जापान के बारेमें कुछ जानकारी हैं।ये रोचक जानकारी हैं।
जापान एक मात्र देश हैं जिसके ऊपर परमाणु बम दागा गया हो।हप्तेमें दो बार ही कूड़ा लेनेको व्यक्ति आता हैं।एक दिनमें 3 से 4 भूकंप के जटके आते हैं।जापान में रोड के ऊपर बिल्डिंग बनाई जाती हैं।नीचे से गाड़ी निकलती हैं।यहां 94%मोबाइल फोन वोटर प्रूफ हैं।जापान में पहले देश बादमें धर्म हैं।विश्वमें सर्वाधिक टेक्नोलॉजी जापान की हैं।जापान अपने आपमें एक महासत्ता हैं।
तकनीकी बातोंमें जापान को कोई नहीं पहुंच सकता हैं।आज बुलेट ट्रेन की चर्चा हैं।ये बुलेट ट्रेन ओर इसके लिए पैसा जापान देगा।राजनीतिक तौर पे ये चीनको चांटा हैं।आशा हैं इंडोजापान नया हिंदुस्तान बनाएगा।
#जापान सरकार

Sunday, September 3, 2017

जीवन की समज...

में तुमसे प्यार करता हूँ।
में तुम्हे पसंद करता हूँ।
ये दो शब्द आपने पढ़े होंगे।समजे होंगे और सुने होंगे।एक बार एक व्यक्तिने बुद्ध से कहा,भगवान में प्यार करता हूँ और चाहता हूं, इन दोनोंमें फर्क क्या हैं।ये सुनकर भगवान बुद्धने कहा 'अगर तुम किसी पौधें को पसंद करते हैं,उस समय आप उस पौधेंको हाथमें पकड़के देखते हैं।मगर जब आप पौधें को प्यार करते हैं तब आप उसे रोज पानी पिलाते हैं।
हाथमें पकड़के देखना उसे पसंद करना और उसे नियमिय रूपसे पानी देना हमारा प्यार हैं।सदैव अपने विचारोंको पानी देते रहना चाहिए,क्योकि हम उसे पसंद नही करते।हम हमारे विचारों को प्यार करते हैं।
#विचारो से प्यार...

Saturday, September 2, 2017

हग क्यो किया...


             कुुुछ दिन पहलेकी बातहैं।हमारे देश के उपराष्ट्रपतिपर के लिए चुने गए मुप्पावारपु वेंकैया नायडू अपने वाक चातुर्य और बुद्धिमानी के लिए जाने जाते हैं। उनके वाक चातुर्य का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रत्याशी घोषित होने से कुछ सप्ताह पहले मई में पार्टी के एक कार्यक्रम में उत्सुक पत्रकारों ने उनसे सवाल किया था। कुछ समाचारपत्रों और टीवी चैनलों द्वारा अप्रैल माह से ही नायडू को उपराष्ट्रपति पद के लिए संभावित दावेदार बताया जाने लगा था।

30 मई को पत्रकारों ने जब इस संदर्भ में उनसे सवाल किया था तो उन्होंने चिर-परिचित शैली में जवाब देते हुए कहा था, 'न मैं राष्ट्रपति बनना चाहता हूं, न उपराष्ट्रपति.. मैं सिर्फ 'उषा-पति' बनकर खुश हूं।' उषा नायडू की पत्नी का नाम है। किसान घर में जन्मे, युवा हुए तो संघ से जुड़े आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में एक किसान परिवार में पैदा होने वाले नायडू बचपन में खेलने के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। एक मामूली कार्यकर्ता से सफर शुरू करने वाले 68 वर्षीय नायडू भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद तक पहुंचे।
उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे करीबी माना जाता है। राजनीति के मैदान में भी नायडू जुझारू रहे हैं। 1975 से 77 के बीच आपातकाल में नायडू ने इंदिरा सरकार के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लिया था। गिरफ्तार होने तक भूमिगत रहे नायडू आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के स्कूलों में सरकार विरोधी पर्चे बांटा करते थे। किसी को संदेह नहीं हो इसलिए वह स्कूटर पर महिला कार्यकर्ता के साथ निकला करते थे। उनके खिलाफ संजय गांधी की सभा में व्यवधान करने का आरोप लगा था। एक जेल से दूसरी जेल में भेजने के क्रम में उन्हें हथकड़ी पहनाई जाती थी।
इंदिरा गांधी ने जब 1980 में आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री एनटी रामाराव को बर्खास्त किया था तब जनता पार्टी में रहे एस. जयपाल रेड्डी के साथ प्रमुख विपक्षी प्रवक्ता के रूप में नायडू राष्ट्रीय पटल पर आए। दक्षिण भारत में भाजपा एक कमजोर पार्टी मानी जाती थी।साउथ इंडियामें भाजपा को पहचान देने वाले नायडू जी आज उपराष्ट्रपति हैं।दक्षिण भारत से वो पहले व्यक्ति थे जो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हो।
अब बात करते है नायडू के हग की।
जब केजरीवाल दिल्ही के CM बने तब उनकी पत्नी ने उन्हें केमेरे के सामने किस किया था।केजरीवाल नायडू से 30 साल छोटे हैं।केजरीवाल हाई प्रोफाइल फेमेली से आते हैं।
व्यक्ति के पास अभिव्यक्त होने के लिए कोई शब्द नहीं रहते तब वो उसे बाहोंमे भर लेता है,हग करता हैं।विश्व के अन्य देश ओर हमारे देश के फ़िल्म ओर खेल से जुड़ी व्यक्ति किस ओर हग करती है,जाहिर जीवन में जुड़े लोग जाहिर स्थल पे ऐसा नहीं करते।
सन्मान देने के लिए हम चरणस्पर्श करते हैं।किसीका स्पर्श जीने की आशा बढाता हैं।चरणस्पर्श से सन्मान मिलता है।हग से प्राप्त होता हैं होंसला।जिन्होंने खेत से शुरू करके केंद्रीय नेता,मंत्री और अब उपराष्ट्रपति बनने की सफलता प्राप्त करने वाले को जीवन पर्यंत निभाने वाली व्यक्ति अगर हग करती हैं तो कुछ गलत नहीं है।
उषा पति आज उपराष्ट्रपति है।वो क्या इतजार करती के सभी मीडिया और व्यक्ति उनके घर से चले जाय तब जाकर एकांत में हग करू।हो सकता हैं मगर हर बार हुए हग को बुरी नजर से देखने की आवश्यकता नहीं हैं।
जिंदा रहने के लिए कभी कभी सिर्फ छूलेना भी कई दिन जिंदा रहने का जरिया होता हैं।और ऐसे जरियों के बाद ही हग करने का अधिकार मिलता हैं।छूलेने से अनंत तक के आनंद प्राप्त करने का एक ही सकल्प हैं सफलता के लिए बिना रुके काम।
#जय हो
#m. नायडू 
#love & Hug

Saturday, August 26, 2017

प्यार का संगीत

एक लड़का।
उसका नाम मेनुहिन।
यहूदी परिवार का लड़का।उसके पिताजी मशहूर वायोलिन वादक थे।वो पेलेस्टाइन में पैदा हुए थे।उन्होंने पेलिस्टेंइन लोकगीतों को वायोलिन पे बजाते थे।उनके इस कौशल्य के माद्यम से वो लोगोको इकठ्ठा करते थे।इन लोगो के समुहमें तब पेलेस्टाइन की आजादी की बाते होती थी।तब ब्रिटन सरकार ने उनके वायोलिन वादन पे प्रतिबंध लगाया था।उन्होंने पेलेस्टाइन से बहार जाकर अपने देश के लिए काम किया।
अब फिरसे लड़के की बात।इस लड़के को इस सालका जवाहरलाल नहेरु आंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार दिया गया हैं।विश्वमें वायोलिन बजाकर शांति का संदेश देनेवाले मेनुहिन को प्राप्त शांति पुरस्कार मिला तब वो 14 सालके थे।
मेनुहिन का एक इंटरव्यू उनकी माँ के साथ आया था।
इंटरव्यू भी बहोत अच्छा था।जिस में लिखी एक बात आपको पसंद आएगी...

जब मेनुहिन दो या तीन सालका था।घरमें वो वायोलिन बजाना चाहता था।उसकी मम्मी ने उसे तीन चार बार खिलोने वाला वायोलिन लेके दिया।अब उनके खिलोने से अच्छी आवाज नहीं आ रही थी।मेनुहिन ने फिरसे रोना धोना शुरू किया।उसके पापा ने उसे सच्चा वायोलिन देनेको कहा।इंटरव्यू में मेनुहिन की माँ ने कहा हैं कि उसके उसके पापा नेकहा,वो वायोलिन नहीं तोड़ेगा।उसे मालूम हैं।आंखोमें आंसू के साथ उन्होंने बताया कि मेरे मेनुहिन को वायोलिन की किम्मत मालूम हैं।उसके बाप ने देश छोड़ के वायोलिन बजाने की किम्मत अदा की हैं।
अपनी बात खत्म करने से पहले आंखों के आंसू न दिखाने के प्रयत्न के साथ वो बताती हैं कि'जवाहर पुरस्कार विश्वका शांति पुरस्कार हैं,अब पेलेस्टाइन नहीं ओर विश्व हमारा देश हैं।'
में भी ऐसे पुरस्कार देने वाले ओर लेनेवाले दोनो को अभिनंदन देता हूँ।
प्रत्येक व्यक्ति...
अगर किसी कला में रुचि रखता है।विश्व उसका परिवार बनता हैं।कोई भी चीज या घटना हमे कुछ दिन या महीनों पीछे रख सकती हैं।कोई परिस्थिति हमे अपने कार्य के प्रति रोक नहीं सकती।अगर लगाव हैं ।आज मेने वो देखा।आप भी देखे,सुने,पढ़े या महसूस करें।मेरा या हमारा कार्य के प्रति लगाव बना रहे,बढा रहेगा, यही हमे यकीन दिलाएगा की हम जिंदा हैं।
#love आर्ट &आर्टिस्ट

Friday, August 25, 2017

Good morning

मेरे कई दोस्त हैं।
वो कहते हैं कि में रोज लिखू।
में कहता हूं रोज कोई सब्जेक्ट मील तो लिखू।ऐसे कई सारे दोस्त मुजे कुछ भेजते हैं।
कोई दोस्त दो पहरको या शाम को Good Mornig भेजते हैं।मुजे ऐसे दोस्तो की कामनाक़ा इंतजार रहता हैं।आज जो आप देखते हैं वो मुजे भेजा हैं।आज मिच्छामि दुक्कडम का दिन हैं।ये पोस्टर में भी कुछ खास लिखा हैं।

"है प्रभु इच्छा नहीं मेरी की पूरा पथ जान सकुं,
दे प्रकाश इतना कि अगला कदम पहचान सकू।

बस जिन को भी मेने दुभाया हैं,उन सबको मिच्छामि दुक्कड़म।
#love friend
#जिंदगी दोस्तार

Tuesday, August 22, 2017

अनंत की कामना...

में अच्छा हूँ।
में अच्छा नहीं हूँ।
अच्छा बन्नेबके लिए मुजे क्या करना पड़ेगा?अच्छा व्यक्ति बनने के तरीके गूगलमें सर्च करोगे तो जो परिणाम आपको मिलेगा।आप निराश हो जाओगे।क्योकि इक्का दिक्का टॉपिक को छोड़ के आप कुछ नहीं कर पाओगे।ऐसा आप को लगेगा।
आप अच्छे हो।आप को मालूम हैं।इस को प्रूव करने के जोईए समय बर्बाद न करें।एक युवान अपनी प्रेमिका को कहता हैं 'I Love You'।प्रेमिका कहती हैं,'तुम मुजे समय नही दे रहे हो,तुम मुझसे बात नहीं करते हो।मेरे कार्यमें आपको रुचि नहीं है।ये सारी बाते सुनकर युवान ने कहा 'में ये सब नहीं करता और नहीं करूंगा।मगर इससे मेरा प्यार तो कम नहीं होता।प्यार ऐसी चीज नही।जिसको प्रूव करने के लिए समय बर्बाद करना पड़े।
मुजे यकीन हैं,सो मुजे समय बर्बाद करने की आवश्यकता नहीं हैं।आप भी ऐसे समय बर्बाद करने के बजाय आप के प्यार पे भरोसा रखें।समय बर्बाद करने से कुछ हांसिल नहीं होगा।अच्छा होना और उसे साबित करना दोनों अलग बात हैं।कोई खूनी खून के इल्जाम में साबित न करने के कारण बरी हो जाता हैं।इस वख्त हम सच्चाई और जुठ के करीब खड़े होते हैं।
बस,समय के साथ चले।
अपने आप पर भरोसा रखें।
जो साथ है अनंत  तक रहे ऐसी कामना।

Monday, August 14, 2017

ધર્મ અને વિજ્ઞાન:શીતળા સાતમ


આજે શિતળા સાતમ.
એક તહેવાર.ધાર્મિક મહત્વ અને અનેક અંધ શ્રદ્ધા વચ્ચે વર્ષોથી આપણે ઉજવીએ છીએ.ભલે વાર્તા ગમેતે હોય. મારા ઘરેય રાંધવામાં આવતું નથી.હું વિજ્ઞાન અને ધર્મ બન્નેને અલગ જોઈ એક સાથે સાથે જોવું છું.અનુભવું છું.આજે શીતળા સાતમને દિવસે એક વાત યાદ આવી.
એ વખતે ડાબા હાથે સૌને શિતળાની રસી આપવામાં આવતી હતી.આ રસીના શોધક એડવર્ડ જેનરને પણ યાદ કરીએ.આજે શીતળા સાતમના દિવસે શીતળા માતાને વંદન કરતા સાથે  આ વૌજ્ઞાનિકનું નામ યાદ કરીએ.આજે કોટી વંદન એટલે કે જો એ રસી ન શોધાઈ હોત તો કેટલાય લોકો આજે અંધ તરીકે કે અન્ય કોઈ વિકલાંગતા સાથે જીવતા હોત.
શીતળા માતાનું વાહન ગધેડું છે.એ માટે કોઈ વાર્તા કે વિગત હોઈ શકે.ભલે ગધેડાનેય પગે લાગજો પણ વૈજ્ઞાનિક વિચાર ની વાત ફેલાવજો.ડાબા હાથે જ કેમ તો એનો પાછો કોઈ વૈજ્ઞાન આધારિત જવાબ નથી.પણ, જ્યારે આ શીતળાની રસી આપવામાં આવતી હતી તે સમયે તાવ આવતો.કેટલાક બાળકોને આ રસી લીધા પછી બે દિવસ સુધી હાથ દુખાવાનું થતું.આ કારણે ખાસ અગવડ ન પડે તે માટે ઓછા કામમાં આવતા હાથ તરીકે ડાબા હાથમાં રસી આપતા હશે.છતાં બીજો એવો કોઈ જવાબ મને ધ્યાનમાં નથી.જેને ડાબો હાથ જ નહીં હોય તેને જમણે હાથેય આપતા જ હશે.નહિતર નાબૂત ન થાય.આજે શીતળા નાબૂત થયેલ છે.એ માટે ધર્મ સાથે વિજ્ઞાન નોય આભાર માનીએ.
અને હા...આજે ઠંડુ ખાવા માટે મહત્વ દર્શાવતી પેલી ચૂલો ઠારવાનું દેરાણીથી રહી ગયું ...વાળી વાર્તાના લેખકને મારા વંદન સાથો સાથ મારા સહિત મારા 'માતૃછાયા'પરિવારના સૌને જીવનમાં ઠંડક રહે તેવી આશા.મારા સૌને માનસિક રાહત હોય. પારિવારિક સ્નેહ, ઠંડકની આશા સાથે જીવનની अनंत ખુશી મળે તે માટે शुभमस्तु...

Tuesday, July 25, 2017

आप का साथ...

नए अस्पताल का उद्घाटन था!उस निमंत्रण में जो लिखा था,उसके ऊपर में लिख रहा हूँ!एक कदम आगे!ओर सहयोग के बारेमें लिखा था!जो आप बाजू में देख सकते हैं!
नया कदम आपके सहयोग और दुआ के बिना संम्भव नहीं हैं!कई लोग जब हमारे साथ होते हैं,तब जाके हम उनसे ऐसा सुनते हैं!हमने भी कई लोगो को कहा होगा, में तुम्हारे साथ हूँ!ऐसा बोलना ओर उसके ऊपर अमल करना एक बात हैं!ऐसा बोलके उसे निभाना दूसरी बात हैं!
इस बात को बोलके निभाना  मुश्किल तब होता हैं जब बात सिर्फ बोली गई हो!मेने कई ऐसे लोगो को देखा हैं वो हर पल,हर स्थिति,हर हाल में हमे सहयोग करते हैं!मेरे जीवनमें ऐसे कई सारे लोग हैं,जिन्होंने मुजे किसीभी हालमें मुजे नहीं छोड़ा हैं।किसीने पैदा किया,किसीने समजाया,किसीने सिखाया ओर किसीने मुजे निभाया ओर संवारा!
जो आज मेरे साथ हैं!सदैव मेरे रहे हैं!हर हालमें, हर सवाल में!गलती कोन नहीं करता?जो गलती को माफ करदे वो ही जिंदगी हैं!कई लोगो के बगैर जैसे हम नहीं हैं,वैसे ही कई सारे लोग भी हमारे बगैर न हो ऐसा कर्म करें!अगर नहीं करपाये तो सहयोग न करें।हा, उसे परेशान न करे,उसके कार्यमें आपत्ति न बने!
आप हैं तो में हूँ!
आप के सहयोग से ज्यादा हूँ!
आप के सहयोग से जल्द रखूंगा!
#Dr Bn

Friday, July 7, 2017

रिकार्ड दान...रक्तदान...

   

में किसी को कुछ दे नहीं सकता!
मेरी घर की जिम्मेदारी मुझे आर्थिक सहाय करने से रोकती हैं!में किसी के काम का नहीं?!

कई लोगो को ईसके बारें में बोलते आपने सुना ही होगा!ऐसे लोगो के लिए एक आज की ये जानकारी उपकारक होगी!आप के पास एक ऐसी चीज हैं जो आप एक व्यक्ति को नहीं,चार व्यक्ति को सहाय कर सकते हैं!एक सालमें चार बार और 16 व्यक्ति को ऐसी मदद करना जिससे उसे नया जीवन मिले!
हा, में ब्लड डोनेशन के बारे में कहना चाहता हूँ!आप ब्लड डोनेट कर एक साथ चार व्यक्ति को सहाय कर सकते हैं!

आज एक और बात भी आप जानेंगे तो खुश हो जाओगे!उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से कमल किशोर जी ने 130 से अधिक बार ब्लड डोनेट करके अप्रतिम उदाहरणप्रस्तुत किया हैं!उनका विस्तृत परिचय  आप क्लिक करें.... में सिर्फ ये कहूंगा कि उनके इस दान,रक्तदान को एशिया बुक ऑफ रेकॉर्ड में भी स्थान मिला हैं!कमल किशोर जी को रेकॉर्ड बुकमें स्थापित होने की बधाई!

Friday, November 11, 2016

राष्ट्रपति भवन और गाँधी पिस फाउंडेशन...

भावेश पंड्या DR BHAVESH PANDYA.BHAVESH PANDYA RECORD...RECORD BOOK PANDYA BHAVESH...IIM BHAVESH PANDYA...TEACHER BHAVESH PANDYA..DR KALAAM BHAVESH PANDYA..GUPTA...ANIL GUPTA...DR BHAVESH ANIL GUPTA..DR ANIL GUPTA BHAVESH ANIL GUPTA...IGNIT..RASHTRPATI BHAVAN..

सिध्धरामजी(महाराष्ट्र)में चेतन पटेल और निपा भट्ट
विश्व युवा केंद्र,दिल्ही 
राष्ट्रपति भवनका सन्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी यहाँ उपस्थित थे!कई बच्चो  को विशेष रूप से निमंत्रित किया गया था!इनके साथ हमें काम करना था!में खुश था और तैयाभी था! समग्र भारत से ये बच्चे आए थे!में और चेतन पटेल इस कार्यशाला में बच्चो से काम करने वाले थे!सृष्टि की टीम ने सभी छोटी बड़ी चीजे जमके राखी थी!यहाँ एक काम मुझे ये भी करना था की कोई नइ वाली गेम भी हम बच्चो से सीखे और खेले!हम इन गेम्स को इकठ्ठा करते हैं और उसे कुछ नए तरीके से खेलते हैं! आज कार्यशाला का पहला दिन था!सृष्टि के श्री चेतन पटेलने बच्चो के साथ नए विचारो के बारे में जानकारी दे रहे थे!उन्होंने ऐसे कई विचारो को प्रदर्शित किया!इन विचारो  के प्रति इन बच्चो से भी जानकारी प्राप्त कर रहे थे!बच्चे बहोत खुश दिखते थे!चेतन ने बच्चो से काम ख़तम कर लिया!फ्रेश टाइम के बाद फिरसे बच्चो के साथ काम शुरू हुआ!अध्यापक भी साथमे थे!

आत्म विश्वास को बढ़ने के लिए गेम्स खेले!बच्चे और अध्यापक सभी इसमें जुड़े!हम केसे सिखाते हैं...?बच्चे केसे सिखते हैं...?बच्चो की क्रिएटीविटी को बढ़ने के लिए क्या हो सकता हैं!इस के बारे में एक्टिविटी के माध्यमसे हम का कर रहे थे! कई प्रवृत्ति को यहाँ लिखके समजना बड़ा लम्बा होगा! !इसकी गेम्स की वीडियो क्लिप यु ट्यूब पे विडियो उपलोड करेंगे!

अब गेम आगे बढ़ रहा था!डॉ भावेश पंड्या आईआईएम नवाचार BHAVESH PANDYA DR BHAVESH NEEPA RECORD BHAVESH PANDYA...IIM AMADAVAAD BHAVESH PANDYA...LIMCA BOOK TEACHERS RECORD GUJARAAT TEACHER...INNOVATION BHAVESH PANDYA...WWW.BHAVESHPANDYA.ORG...IGNIT AWROD...



खेल:1
100  कोन बोलेगा!
इस गेम में बच्चो  को हमने 100 कोन बोलता हैं!
इस चेलेंज को थोडा हार्ड करने के लिए हमने बरी बारी  बोलनेका नियम रखा!दूसरा नियम ऐ था की पहेली बोली गई संख्या के बाद सामने वाले स्पर्धक ज्यादा से ज्यादा 10 जोड़ के बोल सकते हैं!
समजिए...

व्यक्ति:1 (4)
व्यक्ति:2 (14 ज्यादासे ज्यादा)
व्यक्ति:1 (20)
व्यक्ति:2 (21 कमसे कम एक जोड़ना आवश्यक हैं)
गेम चलता रहा!अरे! 8 से अधिक बार प्रयत्न किया!कोई 100 नहीं बोल पाया!ऐसा क्यों हुआ!में ही हर बार सो क्यों बोल पाया?ऐसे कई सवाल थे जो यहाँ बच्चो ने उठाए!इसके माध्यमसे गणित को रोचक तरीको से पढाए जाने का सन्देश भी हम दे पाए!
We Can मुमकिन हैं!
एक अनोखा गेम हम खेल रहे थे! सेम्पल पहचान ने के लिए हमने 8 बच्चो को पसंद किया था!उनको ऐसे सरल सवाल किए गए!
आप का नाम !
आप के पिताजी का नाम !
आप कोन सी कक्षा में पढ़ते हैं!
आप एक मिनिट में कितने केले खा सकते हैं!
आप एक मिनिट में कितने शब्द बोल सकते हैं!
ऐसे सवाल और बच्चोके जवाब! गेम का आखरी सवाल गेम का महत्त्व पूर्ण हिस्सा था! सभी बच्चो ने एक मिनिट में दस से लेके पच्चीस तक शब्द बोलने का विश्वास दिखाया!

बच्चो को हाथ की पहेले वाली उंगली से दुसरे हाथ में टच करना हैं!बच्चे जीतनी बार अपने एक हाथ की उंगलीसे  दुसरे हाथ को टच करेंगे उन्हें गिनना हैं!बच्चे अपने एक हाथ की उंगली से अपने दुसरे हाथ हो टच करते गए!काउंट करते गए!ऐ सिलसिला एक मिनिट तक चला!हमारे साथी पंकज ने एक मिनिट का समय समाप्त करने की जानकारी दी!अब क्या था!सभी बच्चो ने काउंट करना बंध कर दिया!

अब सभी बछो के लिए एक ही सवाल था!आप ने कितने काउंट किए!सभी बछोने 100 से 250 तक काउंट करने की बात की पुष्टि की!बछो ने एक साथ ताली बजाकर सभी को सन्मानित किया!मेने बताया आप तो दस से पच्चीस तक शब्द बोलनेका बताते थे!आप ने तो सो से अधिक कर लिया!क्या एक...दो...चार...दस...शब्द नहीं हैं!सोच बदलो...समज बदलो...समाज बदलो...सिर्फ शब्द याने... ?समजे ...देखनेका और समाज ने का तरिका बदलो....परिणाम हमारी फेवर में ही होगा!

देर श्याम तक बच्चो के साथ काम किया!सभी को अपने नियत स्थान में पहुँचाने की पुष्टि के बाद हमारापहेले दिन का काम संपन हुआ!

Monday, August 29, 2016

દર્દી તરીકે બાળક હોય તો બધું જ મફત.



આજથી અગિયાર વર્ષ પહેલાની વાત છે.વાત એમ બની કે એક છોકરીને હૃદયમાં કાણું હોવાનું નિદાન થયું.તેના બાપુજી ખેતરમાં મજુરી કરે.ગરીબ ઘરમાં આમ પણ જ્યાં બચતને નામે રોજની આવક કે મજુરી હોય ત્યાં આવી બીમારી આવે,બસ! પછીતો પત્યું.આ દીકરીને સરકારમાંથી સહાય મળે તેવી વ્યવસ્થા કરવામાં આવી.એ વખતે આ દીકરી ભણતી ન હતી.શાળામાં ભણનાર વિદ્યાર્થીઓ માટેની સરકારશ્રી ની સુવિધાનો લાભ લેવા આ દીકરીને શાળામાં દાખલ કરવામાં આવી. કેશોદ તાલુકામાં એક સરકારી શાળામાં અભ્યાસ કરે.દીકરીની સરકારી તબીબ ધ્વારા ચકાસણી થઇ.આ દીકરીને દાખલ કરવા,તેની સારવાર અપાવવા અને અન્ય વ્યવસ્થામાં ખૂબ જ સમય પસાર થઇ ગયો.રાધા નામની આ દીકરીને બચાવી ન શકાઈ.
***
આજથી બે ચાર વર્ષ પહેલાંની જો કોઈ આવી ઘટના હોય તો એમાં સરકારશ્રીની યોજનાને આધારે ખર્ચ કરવાનો થતો નથી.હા,બાળક શાળામાં ભણાતું હોય તે જરૂરી છે.અહીં બાળક માટે બધું જ મફત. ગામડાનો માણસ મજુરી કરીને કમાતો હોય તે દવાખાનામાં મજુરીય શું કરે અને કમાય પણ શું?એ કારણે ઓપરેશન ન થાય.બાળક સાથે આવનાર એકની તો વ્યવસ્થા થાય તે ખૂબ જ સારું કહેવાશે.પહેલાં રાહત દરે સારવાર.હવે મફત સારવાર થાય છે.ભવિષ્યમાં સાથે આવનારને પણ સરકાર ખાવા આપશે તેવી આશા રાખી શકાય.આજે વાત કરાવી છે એક દવાખાનાની.
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વાત છે છત્તીસગઢની રાજધાની રાયપુરની.આ હોસ્પીટલની ખાસિયત એ કે કોઈ કેશ કાઉન્ટર બનાવવામાં આવ્યું નથી.બાળકોના હૃદયની આ હોસ્પીટલનો આકાર પણ દિલ જેવો બનાવવામાં આવેલ છે. પાકિસ્તાન,નેપાળ,નાઈજીરિયા,બાંગ્લાદેશ અને શ્રીલંકા જેવા દેશના બાળકો પણ લાભ લઇ ચુક્યા છે.દર્દી સાથે આવનાર એક વ્યક્તિને પણ અહીં મફત સુવિધા આપવામાં આવે છે.આ હોસ્પીટલમાં રોજના ત્રણ ઓપરેશન થાય છે.ચાલીસ બેડની સુવિધા ધરાવતી આ હોસ્પિટલનું મેનેજમેન્ટ સચોટ છે.અહીં ક્યારેય બેડની કે અન્ય કોઈપણ પ્રકારની અછત ઊભી થતી નથી.ત્રણ વર્ષમાં ૭૭૬ કરતાં વધારે બાળકો લાભ લઇ ચુક્યા છે.સત્યસાંઈ ટ્રસ્ટ સંચાલિત હોસ્પિટના સંચાલકો અને તેની સાથે જોડાયેલ સૌને અનેકો વતી શુભકામના.
સેકટર:2,નવારાયપુર.છત્તીસગઢ...sanjeevanireport@gmail.comસંપર્ક: 07712970325/09424207140


Monday, August 1, 2016

બંસીલાલ વર્મા: ‘ચકોર’ ‘ચિત્રકાર અને લેખક ’ ઉત્તર ગુજરાતનું વૈશ્વિક ગૌરવ.


કાર્ટૂન ની એક મજા છે.કશુક કહેવા માટે કશુક કહેવું એક રસપ્રદ શૈલી છે.મને કાર્ટૂન ગમે છે.મને કાર્ટૂન બનાવવા ગમે છે.લાંબો સમય સુધી ગુજરાતના મોટા કદના કે સ્થાનિક દૈનિક પત્રો સાથે કામ કર્યું.કશુક કહેવા માટે સરસ ચિત્રનો ઉપયોગ.ગુજરાતના પ્રસિદ્ધ ચિત્રકાર એટલે બંસીલાલ વર્મા.’ચકોર’ તરીકે આગવી ઓળખ ધરાવે.સમગ્ર ગુજરાત જ નહિ આખા દેશ અને દુનિયામાં તેમની અને તેમના કાર્ટૂનની કાયમ ચર્ચા ચાલતી.
નરેન્દ્ર મોદીના વતન એવાં વડનગરમાં મેટ્રીકની પરીક્ષા પાસ કરી.૧૯૧૭ની ૨૩મી નવેમ્બરે જન્મેલ બંસીલાલ વર્મા ઉત્તર ગુજરાતનું રત્ન હતા.ચોટિયા ખાતે તેમનો જન્મ થયો હતો.અમદાવાદ વધુ સારું ચિત્ર શીખવા તેઓ આવ્યા હતા.લખનૌના
ઐતિહાસિક કોંગ્રેસ અધિવેશન વખતે મુખ્ય ધ્વાર શણગારવાની જવાબદારી બંસીલાલે નિભાવી હતી.અનેક પુસ્તકોના ચિત્રો બનાવનાર અને જન્મજાત ચિત્રકાર કે જેમના ચિત્રો આજેય વિશ્વ પ્રસિદ્ધ મૈસુરની આર્ટ ગેલેરીમાં જોવા મળે છે.વર્ષ ૧૯૪૧માં આંતર રાષ્ટ્રીય મોન્ટ્રીયલ એવોર્ડ ચકોરને પ્રાપ્ત થયો હતો.
ગુજરાતી બાળ સાહિત્યમાં નવીજ તરાહનું પ્રથમ પુસ્તક એટલે જાને પકડા પકડી.બાળકોને ગમી જ જાય એવો જાને ચિત્રનો લહેકો.ચિત્રની રચના.અરે!ઘરે કે કાર્યાલયમાં બે હાથ જોડીને દોરાયેલ સ્કેચ આ બંસીલાલ વર્માની દેન છે.સામાન્ય માનવીનો ખૂબ જ ઓછી રેખાથી તૈયાર કરેલા ‘કોમન મેન’તે સમયે ચૂંટણીમાં જનાધાર નક્કી કરી શકતો.આટલી તાકાત ધરાવતા આપણા ઉત્તર ગુજરાતના એ રત્ન નોખી માટીના કલાકાર હતા. સરકાર જયારે ભીંસમાં હોય ત્યારે સરકાર સામે કટાક્ષ કરતા ચિત્રો જોઈ જેતે સમયના વડાપ્રધાન કે મુખ્યમંત્રી ચકોરનું ચિત્ર જોઈ હસી જાય એવું બનતું.એ સમયે આવા સમાચાર સૌ માધ્યમો એક સરખા ભાવે ફેલાવતા.લાલ બહાદુર શાસ્ત્રીની તો તેમને ખાસ સીરીજ તૈયાર કરી એક પુસ્તક બનાવ્યું હતું.એટલા જ પ્રેમથી લાલ બહાદુર શાસ્ત્રીએ આ પુસ્તક માટે રાજીપો દર્શાવ્યો હતો.
કેટલાક ચિત્રકારો અનોખી ભાત બનાવે છે.કેટલાક સારા ચિત્રકારો ખરાબ ચિત્રો બનાવીને પ્રસિદ્ધી મેળવતા હોય છે.ચકોર માત્ર ગુજરાતના જ નહિ સમગ્ર ભારતના કાર્ટૂનીસ્ટ તરીકે ઓળખાતા હતા.ક્યારેય કોઈની શેહ શરમ વગર બસ સૌને મજા કરાવતા આ કલાકારને વંદન.
(વધુ ફરી ક્યારેક)


Saturday, July 4, 2015

બાલ કવિઓ સાથે...


ગુજરાતી  બાલ સાહિત્યના ભીષ્મ પિતામહ શ્રી યશવંત મહેતા સાથે ગુજરાતના બાલ કવિ,સર્જકો.
પાઠ્યપુસ્તક લેખક શ્રી મિનેશભાઈ વાળંદ


  



થયું એવું કે બાલ કવિ ટાગોર હોલ અમદાવાદ ખાતે હજાર થઇ ગયા હતાં.મુખ મંત્રી શ્રીમતી આનંદીબેન પટેલને આવવામાં વાર હતી.આ પસંદ થયેલ બાલ કવિઓના ફોટા અને પોસ્ટરથી આખો હોલ ભરચક હતો.આ બાલ કવિઓને પ્રદર્શન બતાવવાનું હતું.એની જવાબદારી મારી હતી.બસ...ગુજરાતના નવીન સર્જકો સાથે એક ફોટો.

વિશ્વ યોગ દિવસ:


આજે વિશ્વ યોગ દિવસ.ભારતના વડાપ્રધાન શ્રી નરેન્દ્ર મોદીજી.ભારતને વિશ્વમાં એક સાથે,અરે!એક જ વાતમાં જાણે જોડી લીધી.આવી જ એક વાત એક નરેન્દ્ર એ હિંદુ ધર્મ વિશે ધર્મ પરિષદમાં કરી હતી.આવી જ વૈશ્વિક સફળતા ૨૧ જૂન માટે માળી કહેવાય.
આમ તો નેશનલ ડે....અને વિશ્વ દિવસ તરીકે કેટલાક ખાસ દિવસો ને આપણે ઉજવીએ છીએ.આ દિવસો પસંદ કરતી વખતે અનેક બાબતોનું ધ્યાન રાખવામાં આવે છે.જયારે આ દિવસની ઉજવણી યુનો ના માધ્યમથી થતી હોય ત્યારે તેની ગંભીરતા અને નિષ્પક્ષતા જળવાય તે જરૂરી છે.શ્રી નરેન્દ્ મોદીજી ની વાત ને વિશ્વે સ્વીકારી અને ૨૧ જૂન ‘વિશ્વ યોગ દિવસ’તરીકે ઉજવવાનું નક્કી થયું.વિશ્વમાં પ્રથમ વખત આવા યોગ દિવસની ઉજવણી થવાની હતી.
નાનાં મોટા શહેરો અને ગામડાં પણ આ આયોજન કરતાં હતાં.આવું જ એક આયોજન ડીસા પાસે કાંટ ખાતે હતું.ડીસાના પૂર્વ ધારાસભ્ય અને નિગમના ચેરમેન સ્વ.શ્રી ગોરધાનાજી માળીના નામ સાથે સંકળાયેલ એક સંકુલમાં આયોજન હતું.ટ્રસ્ટના મેનેજીંગ ટ્રસ્ટી,ગુજરાત પ્રદેશ યુવા ભાજપાના મંત્રી અને ‘બેટી બચાવો બેટી પઢાવો’પ્રકલ્પના રાષ્ટ્રીય સમિતિના સભ્ય શ્રી પ્રવીણભાઈ જી.માળી એ આ કાર્યક્રમને યોગ્ય રીતે મઠારવા મને કામે લગાડ્યો.કદાચ ડીસા તાલુકાનો જ નહિ આખા જિલ્લામાં ગામડામાં ઉજવાયેલ ‘આંતર રાષ્ટ્રીય યોગ દિવસ’મા સૌથી પ્રભાવક રહ્યો હશે.
આ શાળા પરિવારના વડા અને આચાર્યા બેન અને સમગ્ર પરિવારે ખાસ જહેમત ઉઠાવી. શ્રેષ્ઠ શિક્ષકનો  રાષ્ટ્રીય એવોર્ડ વિજેતા શિક્ષક શ્રી ચંદુભાઈ મોદી ‘એટીડી’ ધ્વારા એક અનોખું પ્રદર્શન રજૂ થયું હતું.વિશ્વ યોગ દિવસે બેટી બચાવો,બેટી પઢાવો અને વ્યસનમુક્તિનું આ અનોખું પ્રદર્શન ખાસ નોધનીય હતું.

Saturday, January 24, 2015

चीफ सेक्रेटरी को पसंद आया भाषामें किया गया नवाचार...

भाषा के माध्यम से ही सरे विषय शिखाए जाते हैं! जो बच्चे भाषा नहीं पढ़ सकते वो बाकी के सभी सब्जेक्ट को भी नहि समज सकते.!मेने इस लिए भाषाको सरल किया!एटेच लेटर को छोडके ऐसी कहानिया लिखी की बच्चे पढ़ सके!ऐसी कहानिया लिखनेका एक ही रीजन था की बच्चे जो गुजराती पढ़ नहीं सकते थे, वो ज्यादातर जोडाक्षर ही पढ़ नहीं सकते थे! वो भी सभी विषय पढ़े एवं शिखे,समजे!असी कहानिया लिखनेके बाद मुझे कई सन्मान मिले! गुजरात साहित्य अकादमी एवं परीशद को ऐ बात समज नहि आती की बाल साहित्यके नाम से वो जो प्रकाशित करते हैं उसमे जोडाक्षर आते हैं !
 गुजरातके पाठ्यक्रम के विकासमे कक्षा तिन से ही बच्चे जोडाक्षर पढ़ सकते हैं ! समज सकते हैं!फिरभी सिर्फ कई लोगोको ही बाल साहित्यका पुरस्कार दिया जाता हैं !मेरा सवाल ये हैं की क्या कक्षा एक एवं दो के बच्चे बाल साहित्य नहीं पढने चाहिए?मेरा ऐ लिखनेका कोई ये मतलब न निकाले की मुझे परिषद और अकादमिने पुरस्कृत नहीं किया हैं !मेरा यहाँ लिखनेका मतलब ये हैं की ऐसे साहित्य को भी वो प्रकाशित करे!
अब जिस बजह से मेने ये लिखना शुरू किया हैं वो बात पे आता हू!मेंने ऐसी कहानिया और गीतों के ३९ पुस्तक लिखे हैं! में यहाँ गोषित करना चाहता हू की में कभी अकादमीमें  मेरी बुक्स स्पर्धामें  नहीं भेजने वाला हू!मुझे इस बात का संतोष हैं की मेरे इस काम को आई.आई.एम  जेसी विश्व प्रसिद्द प्रबंधन संस्था ने प्रमाणित किया हीं! यही  मेरे लिए सबसे बड़ा एवोर्ड हैं! 
आईआई एम में थर्ड कोंफरंस में जब मुझे मेरे इस काम की बजहसे आमंत्रित किया गया तो मुझे ऐसा था की वहाँ  जाऊंगा और मुझे कुछ इसके बारेमे बताना पड़ेगा!मगर यहाँ डॉ.कलाम जी ने मेरे काम की सराहना की.!दिनांक २२ को गुजरातके चीफ सेक्रेटरी श्री पांडियन सर आये!उन्होंने मेरे काम को,मेरी कहानी और गीतों को देखा!गणित एवं विज्ञान जेसे विषयो को पढ़ाने के लिए ये कहानिया कितनी उपयोगी हैं उसके बारेमे जानकारी प्राप्तकी!
मेरी लिखी हुई बुक्स में उन्होंने मुझे ऑटोग्राफ भी दिया ! बस यही मेरे काम की कदर हैं ऐसा मेरा मानना हैं!भारतरत्न डॉ.कलाम जी,पध्मश्री अनिल गुप्ताजी और गुजरात सरकार के चीफ सेक्रेटरी श्री पांडियन जी ने जब मेरे काम को सराहा तब मुझे लगाकी मुझे पागल कहनेवाले पागल हो सकते हैं में पागल नहीं हू.! गुजरात के बच्चो को पढना शिखाने के लिए गुजरातमे पिछले कई सालोसे वाचन,गणन एवं लेखन चलता हैं! क्या परिणाम प्राप्त हुआ वो हम जानते हैं!मगर मेरे इस कार्य से मेरी स्कुल के  सभी बच्चे पढ़ सकते हैं और समज के जवाब भी दे सकते हैं! 
आई.आई.एम ऐसे प्रयोगोको स्प्रेड करके अच्छा परिणाम प्राप्त करना चाहती हैं! क्यों न हम उस काम में जुड़े!ऐसे कई भाषसे जुड़े प्रयोग हैं जो गुजरात के सभी बच्चोको पढना सिखा सके!चलो साथ मिलके कुछ करे और गुजरातके सभी बच्चे गुजराती पढ़े,समजे एवं अभिव्यक्य हो सके ऐसा कुछ करे.!