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Friday, September 29, 2017

नवाब की नवाबी...

कुछ दिन पहले की बात हैं।राजस्थानी संगीत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले नवाब जी।गुजरात के महेमान थे।केसर आइडल के माध्यम से वो गुजरात आये थे।इस फोटोग्राफ में जो सेल्फी ले रहे हैं वोही नवाब जी हैं।विश्व के कई देशमें उन्होंने संतूर बजाय हैं।आप को होगा कि संतूर बजाने में क्या बड़ी बात हैं।मगर इनके संतूर में जैसे भगवान का ठिकाना हैं।सिर्फ 20 मिनिट के अंदर हमे अनुभूति करवाते हैं।
संगीत की मुजे विशेष जानकारी नहीं हैं।मगर संतूर से मुझेभी शांति की अनुभूति हुई।कुछ महीनों तक वो यूरोप के प्रवास में हैं।इन कार्यक्रम के आयोजन के लिए आप इनका संपर्क कर सकते हैं।

श्री तेजश शाह
डिरेक्टर,केसर आइडल
MO:+91 9998004433

Wednesday, September 13, 2017

सप्तरंगी संगीत

संगीत ईश्वरकी शक्ति हैं।
संगीत एक स्किल हैं और भगवानका आशीर्वाद हैं।पिछले 15 सालोंसे संगीत की शाम के बारेमें यहाँ सब सोच रहे थे।कई बार प्लानिग हुआ,कई लोगोने सहयोग दिया।मगर ये हो नहीं पाया।कहते हैं कि अच्छे विचार होने से परिणाम मिलता हैं।कल 9 सेप्टेंबर को ये प्रोग्राम संपन हुआ।
डिसा के 19 कलाकारों को पसंद किया गया।सभी ने रिहर्सल किया।गाने ओर बजाने वाले सभी आर्टिस्ट डीसा के ही थे।श्री आशुतोष दवे,श्री दीपक भाऊ,श्री हितेश जोशी ने संगीत का आयोजन किया।हमारे सप्तरंगी फाउंडेशन ने सभी को एवॉर्ड से सन्मानित किया।
सप्तरंगी फाउंडेशन के सात स्किल मेंसे एक संगीत के लिए ये पहला कार्यक्रम हम कर पाए।जुड़ने वाले,सभी सहयोगी ओर बड़ी संख्यामें उपस्थित संगीत प्रेमीयो का शुक्रिया।
#संगीत:सप्तरंगी।

Wednesday, April 5, 2017

डांगी संगीत

राज्य स्तरीय नवाचार फेर का आयोजन हुआ था!मुझे वहा जाने का न्योता मिला था!मेरा सन्मान होने वाला था!पिछले तिन सालो से राष्ट्रपति भवन में आयोजित क्रिएटिव कार्यशाला और आइडिया कोम्पीटीशन में मुझे काम करने का मौका मिला हैं!समग्र भारत से पसंद किए जाने वाले सभी बच्चे यहा आते हैं! उनके साथ नए विचारो को सोचना और समजना एक अनूठा काम हैं! 

इस गौरव पूर्ण कार्य के बारे में गुजरात शैक्षणिक संशोधन एवं तालीम परिषद् को जब मालुम हुआ!बीएस..डॉ.टी.एस.जोशी सर के आदेश से मुझे वहा जाना था!25 मार्च के उद्घाटन समारोह में हमारा सन्मान होना था!मेरे साथ दुसरे चार साथीओ काभी सन्मान होना था!सन्मान समारोह के बाद हम भार निकले!

उद्घाटन में जो डांगी नृत्य हुआ था उसके प्रमुख कलाकारों से हम मिल पाए!देश वोदेश्में अनेक शो कर चुके इस ग्रुप के मुखिया एक स्थानीय संगीत का साधन बजा रहे थे!इस साधन का नाम देशाली और कलाकार का नाम शेमरा जी था!पशु,पंखी और सब्जी के सहाय से यह साधन बना था!

उसके निर्माण में बैल की सिंग,सब्जी में दूधि और मूर के पिंछ का उपयोग किया गया था! इसे सुनने के लिए आप यहाँ क्लिक करें!  सिर्फ हवा के दबाव और उपरी और निचे के सूर के लिए दिए गए दो होल के साथ निचे दिए गए पांच सूर के माध्यम से यह बजता हैं!जेसे तेसे उसके बारें में जानकारी इकठ्ठा की और हम चले उसे बजाने में!थोड़ी देर तक तो उसे पकड़ भी नहीं पाए!बाद में थोडा बहोत बजाने का आनद ले पाए!ऐसी कलाओं और कलाकारों के लिए कुछ करने की आवश्यकता दिखाती हैं!देखते हैं क्या होता हैं! 

Tuesday, April 4, 2017

हम तुम्हे चाहते हैं ऐसे...


एक जबर जस्त गाना!मेने कई बार उसे गाया हैं! आज भी में कभी कभी गाता और गुनगुनाता हूँ!मेरे दोस्त प्रशांत शर्मा  ने मुझे ये वीडियो भेजा! कइ  बार वो मुझे ऐसे गाने या ट्रेक भेजते हैं!आज उन्हों ने मुझे यह भेजा!उनका मानना हैं की में फिर से बेन्जो बजाना शुरू करू!आज उन्हों ने मुझे कहा की तुम्हे बेन्जो बजाना ही हैं! वो मुझे मुंबई से एक बेन्जो भेज रहे हैं! आप इसे क्लिक करें!

जब में भावनगर पढ़ता था!उस वख्त मेने बेन्जो प्ले किया था! गुजरात में बेन्जो प्ले करने में नवाचार करने वाले आर्टिस्ट के तोर पे दूरदर्शन ने मेरा इंटरव्यू भी किया था!वर्ष 1995 के करीब की ये बात हैं! कुछ ऐसा हुआ की मेने उस दिन से बेन्जो बजाना छोड़ दिया!

डॉ.प्रवीन महेता के साथ जब में गुजरात के ट्रायबल बेल्टमें काम करता था!तब एक ऑडियो केसेट बनानी थी!डॉ.प्रशांत शर्मा हमारे को.ऑर्डिनेटर थे! कम खर्च में हमे ये काम ख़तम करना था!मुंबई शिमारो स्टूडियो में रिकोर्डिंग था! मुंबई में आर्टिस्ट तो मिलते थे! हां,उनका चार्ज ज्यादा था!तिन दिन तक रिकोर्डिंग में अगर आर्टिस्ट आएगा तो कम से कम 3000 रूपया चार्ज था! हम ने तय किया की कुछ ऐसा जुगाड़ हो की पैसा भी कम लगे और काम भी अच्छा हों!प्रशांत को मालूम था की में बेन्जो प्लेयर हूँ! उन्हों ने बेन्जो का ऑर्डर दिया!श्याम को मुझे अवगत करवाया की कल रिकोर्डिंग में मुझे बेन्जो बजाना हैं! क्यों मगर मेरे हाथ बेन्जो की स्ट्रिप पकड़ ने को तैयार नहीं थे!मेरे सामने डॉ विकल्प थे!एक की में बेन्जो प्ले न करू!

दूसरा ये की में बेन्जो प्ले करू!अगर में बेन्जो नहीं बजाता तो डांग,नवसारी,वलसाड और कपराडा जेसे ट्रायबल बेल्ट के बच्चे कब ऐसे साधन की मदद से शिखते?मेने दुसरे दिन बेन्जो बजाने से पहले सारी रात मेरे मन और तन को मजबूत और मजबूर किया! आज से 13 साल पहले आज ही के दिन मेने फिर से बेन्जो बजाया! क्या कोई संकेत हैं की और कुछ!मगर प्रशांत जी ने उस दिन को याद करके मुझे जो गाना बेन्जो मास्टर  का हैं! कहते हैं की कौशल्य कुदरत देती हैं मगर उसका मंचन समय के आधीन हैं! 

Saturday, February 25, 2012

Italiyan opera music


એક અનોખો સંગીત પ્રકાર...

ઓપેરા એટલે સંગીત.આ સંગીતની સાથે જ ચોક્કસ નિયમો સાથેનો અભિનય પણ હોય.આમ ખાસ સંગીત અને અભિનયનો સંગમ એટલે ઓપેરા.ઈટાલી એટલે અનોખી સંસ્કૃતિનો પ્રદેશ.ઇટાલિયન ઓપેરા ઇન મ્યુઝિકના નામ પરથી આ કલાનો  વિકાસ થયો હોઈ તેણે ઓપેરા સંગીત કહેયાય છે.આ કળા પણ સંગીતની ભાષામાં લખાયું છે.તેનો અભ્યાસ કરવો એટલે જ ખૂબ કપરો છે.તેણે સમજવામાં ખૂબ મુશ્કેલી વરતાય છે.
ગ્રીક નાટકોને જીવતા કરવા અને તેના બચાવ માટે આ પ્રકારની શોધ થઇ.૧૫૮૨માં ગ્રીક નાત્યને પુનર્જીવિત કરવા અનેક લોકો જોડાયા હતા.આ પ્રકારમાં શબ્દો અને સંગીત બધું જ હતું.સૌથી પહેલું ઓપેરા હતું ડોફની.૧૬૦૭માં રજુ થયેલું ઓરફીયો હજુ આજે પણ એવુંજ ભજવાય છે.૧૬૩૭માં  દુનિયાનું પહેલું ઓપેરા હાઉસ બન્યું હતું.આજે પણ તેનું ગૌરવ અકબંધ છે.ઇતલીમાથી ઓપેરા ફ્રાંસ અને જર્મનીમાં ફેલાયું.રોસીની,વરદી,પુસીની,મોઝાર્ટ,વેગનર ઉપરાંત ગ્લીકા અને ચેકોસકી પણ એક નામ અને ઓળખ ધરાવે છે.બોરોદીન અને રીજ્સકી કોરસ્કાકોવ આ બધામાં વિશેષ સ્થાન શોભાવે છે.