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Wednesday, July 11, 2018

ऐसा भी होता हैं।


आज कल शिक्षा में बहोत सारी नई बाते जुड़ चुकी हैं।आजकल शिक्षा व्यवस्था इतनी तेजी से बदल रही हैं।मगर में आप को कुछ नई बात बताने जा रहा हूँ।क्या हमें एडमिशन लेने में मुश्किल हैं।कोई कहेगा हा तो कोई कहेगा ना।
अगर हम एडमिशन किसी शहर में लेना हैं तो ये मुश्किल हैं।
अब पढ़िए...

अमदावाद में एक स्कूल हैं।
आप कहेंगे तो तो महेगा होगा।प्ले ग्रुप में एडमिशन के लिए लाखों रुपया खर्च करना पड़ता होगा।
मगर यहाँ बात कुछ अलग हैं।सभी सुविधाओं के साथ चलने वाली स्कूल महंगी नही हैं।अनर्थकारी  शिक्षा व्यवस्था के नाम से चलने वाली स्कूल कुछ अलग हैं।अखिलभाई यहां के संचालक हैं।वो कहते हैं कि एडमिशन के लिए हम 15 दिन के  लिए बच्चो को साथ में रखते हैं।वैसे तो हम 15 दिन में बच्चों को समझ सकते हैं,खोज लेते हैं मगर सबसे अलग बात ये हैं कि यह एडमिशन के लिए जन्म कुंडली के चौथे ओर पाँचमें स्थान में विद्या ओर कला का स्थान हैं।अगर ये स्थान जन्म समय अलग हैं तो ही आपको एडमिशन मिलेगा।
यश,शिक्षा कला और संस्कार का दावा करने वाला ये शिक्षा संकुल आज भी जन्म पत्रिका की मदद से आगे एडमिशन देता हैं।बॉस की कलम ओर शाही से लिखने वाला बच्चा इसी स्कूल से होगा वो तय हैं।इस संकुल का फ्लोर गोबर से लीपा हुआ हैं।यहां गायो की सेवा और धार्मिक प्रतिकृति की झलक से ये संकुल कार्यरत हैं।
जितेंद्र नामक संसहलक हैं वो कहते हैं कि अगर कोई कहता हैं कि ऐसी शिक्षा से नोकरी नहीं मिलेगी ऐसा मानने वाले पेरेंट्स को सिलेबस बगैर स्कूल में पढ़ाने में विश्वास नहीं है तो उन्हें घर वापस भेजा जाता हैं।
इस स्कुल का एक बच्चा जो मेथ्स की कॉम्पिटिशन में वर्ल्ड चेम्पियन हैं।वो नेशनल चेम्पियन बन चुका हैं।संगीत,चित्र ओर ऐसी सभी स्किल के लिए यहाँ अच्छा वातावरण और आयोजन हैं।बच्चे यहाँ संस्कृत में चर्चा और संवाद करते हैं।यहां पड़ने वाले बच्चे सिर्फ दो या तीन महीने की तैयारी के बाद बोर्ड एक्जाम देते हैं और उतीर्ण हुए हैं।आप भी अमदावाद में हेमचंद्राचार्य गुरुकुल में जाये तो आप को आए सब सच में देखने को मिलेगा।

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ऐसी स्कूल होनी चाहिए।में सिर्फ इतना कहूंगा कि जन्म पत्रिका के विचार को छोड़कर सब चलता हैं।

Monday, July 9, 2018

वर्ल्ड हेरिटेज ओर हम


कुछ दिनों से हम वर्ल्ड हेरिटेज के बारे में सुन रहे हैं।पढ़ रहे हैं।कहि कहि चर्चा हो रही हैं।कुछ साथियों के मन में सवाल हैं कि ये वर्ल्ड हेरिटेज साइड को तय करता हैं।इस का जवाब हैं  ययूनेस्कों।खत्म हो रही संस्कृति,कुदरती विरासत का संरक्षण और उसके रखरखाव हेतु यूनेस्को ये जिम्मेदारी निभा रहा हैं।UNESCO का पूरा नाम यूनाइटेड नेशन्स एज्यूकेशनल साइंटिफिक ऐंड कल्चरर ऑर्गेनाइजेशन हैं।वैश्विक संस्थान के रूप में उसकी पहचान हैं।1978 में यूनेस्को की स्थापना हुई थी।इस साल उसे 40 साल खत्म हो रहे हैं।इस बार बहरीन में 4 जुलाई को वर्ल्ड हेरिटेज समिति की बैठक संम्पन हुई हैं।इस बार जो बैठक हुई वो 42 वी बैठक थी।इस साल विश्व के नए 19 साइड्स को पसंद किया गया हैं।इस बार भारत में मुम्बई के विक्टोरियन युग के स्थापत्य को पसंद किया गया हैं।
दुनियामें सबसे अधिक साइड्स इटाकी से हैं।यहां से 54 साइड्स हैं।दूसरे नंबर पे चिन्हित।चीन की 53 साइड्स हैं।46 साइड्स के साथ स्पेन तीसरे स्थान पर हैं।हमारे देश 37 हेरिटेज साइड्स के साथ विश्व में छठे स्थान पर हैं।विश्व के 167 देश में वर्ल्ड हेरिटेज साइड्स हैं।

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वर्ल्ड हेरिटेज के लिए विश्व में बहोत कुछ हो रहा हैं।हम हमारे घर की तरह ही अपनी धरोहर से प्यार करे तो ऐसी साइड्स का महत्व बढ़ेगा।

Friday, June 15, 2018

14 जून ओर क्रांति


थोड़े दिनों पहले की बात हैं।14 जून की बात हैं।उस दिन विश्व के समृद्ध क्रांतिकारी की जन्म जयंती थी।उनका नाम हैं चे ग्वेरा।अपने देश के सन्मान को उन्होंने इतना ऊंचा चढ़ाया की आज विश्वमें उन्हें याद किया जाता हैं।उनकी फोटो हमारे लिए पहचानी हुई होगी।टीशर्ट वे ये फोटो आपने अवश्य देखी होगी।

'चे ग्वेरा ने कहा था :-

"एक क्रांतिकारी डॉक्टर बनने के लिए, या फिर कहें कि एक क्रांतिकारी ही बनने के लिए, एक क्रांति की जरूरत होती है। अलग थलग रह कर किये गए निजी प्रयास, अपने तमाम आदर्शों की पवित्रता के बावजूद, किसी काम के नहीं होते, और अगर कोई आदमी अकेले ही काम करते हुए, अमेरिका के किसी कोने में किसी बुरी सरकार और प्रगतिरोधी सामाजिक परिस्थितियों के खिलाफ लड़ते हुए, किसी महान आदर्श के लिए पूरी जिंदगी का बलिदान भी कर देता है तो भी उससे कोई फायदा नहीं होता। एक क्रांति को पैदा करने के लिए हमारे पास वह होना चाहिए, जो आज क्यूबा में है, यानि पूरी जनता की लामबंदी।
और अंततः आज आपके सामने, अन्य सभी बातों से ऊपर, एक क्रांतिकारी डॉक्टर, यानि कहें तो वह डॉक्टर जो अपने पेशे से सम्बंधित तकनीकी ज्ञान को लोगों और क्रांति की सेवा में लगाता हो, बनने का अधिकार भी है और कर्तव्य भी।"

यूँ तो चे एक डॉक्टर थे, लेकिन उन्होंने मानवता की बीमारी, पूंजीवाद, को पहचान लिया था और इस बीमारी के खिलाफ जीवन पर्यन्त संघर्ष में लगे रहे थे।वे आजीवन एक क्रांतिकारी रहे और एक क्रांतिकारी के रूप में ही शहीद हुए। 14 जून को  र्नेस्टो चे ग्वेरा का जन्मदिवस है। डॉक्टर्स फॉर सोसाइटी की तरफ से हम उन्हें क्रांतिकारी सलाम करते हैं।

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क्रांति जीवन का हिस्सा होनी चाहिए,जिस व्यवस्था को बदलने से समाज को शांति मील वोही क्रांति कहि जाएगी।

Friday, June 8, 2018

छोटी शोधयात्रा: बड़े विचार

हनी बी नेटवर्क।सृष्टि 25 साल से शोधयात्रा के शोधक ऐसी संस्थाए जो शोधयात्रा स्थापक भी कह सकते हैं। हनी बी नवतवर्क के हमारे साथी और हरियाणा शैक्षिक नवाचार के जोईए काम करने वाले श्री दर्शन लाल बवेजा हमारे साथ काम करते हैं।उन्होंने थोड़े विचार अपने तरीके से अमल किये हैं।उन्होंने बड़ी शोध यात्रा के बदले छोटी छोटी शोधयात्रा का आयोजन किया हैं।उन्होंने ऐसा ही एक आयोजन तैयार किया हैं।

उनका कहना हैं कि, हम 
ना जाने कितनी ही बार एक रास्ते पर गुजरते हैं, परन्तु आसपास की वनस्पतियां, जैव-विविधता, और प्रकृतिक व मानवीय गतिविधियाँ नजरअंदाज करते हुए निकल जाते हैं। शोध यात्रा गतिविधि नेचर वाच गतिविधि से थोड़ा भिन्न होती है यहाँ तक भी कहा जा सकता है कि नेचर वाच, क्षेत्र भ्रमण शोध यात्रा की ही एक शाखा है, क्षेत्र भ्रमण शोध यात्रा का दायरा विस्तृत होता है, क्षेत्र भ्रमण शोध यात्रा में विद्यार्थियों द्वारा 4-6 के समूह में एक ख़ास मार्ग का चयन किया गया हैं।
इस मार्ग पर अध्यापक के साथ पैदल या सायकिल पर चलना प्रारम्भ करते हैं, मार्ग श्री दर्शनलाल बावेजा जी रुक-रुक कर विभिन्न गतिविधियों-घटनाओं-परिवर्तनों का अवलोकन करते हुए जाते हैं और उनसे सम्बन्धितों से सवांद भी स्थापित करते हैं । जिस में कृषक को काम करते हुए देख कर यह पूछना न भूलें की वो खेत में क्या काम कर रहे हैं या क्या फसल लगाई है? चरवाहे को संवाद में शामिल करते हुए उस से उसकी भेड़-बकरियों की बाते, बालों का उत्पादन व स्थानीय विविधताओं के बारे में चर्चा करते हैं। पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों, कीट-पतंगों, खेत-खलिहानों, फल-फूलों बेल-बुटों, कवक-फफूंदी, बिल-घोंसलों, पैरों के निशानों, अंडें-चूजे, बीज-पत्ते, जंगली फल व पानी के स्रोतों का निरिक्षण-प्रेक्षण करते चलें। अध्यापक से निरंतर संवाद करते प्रश्न पूछते चलें और अपने थैले में बीज, पत्ते, मिटटी, केंचुली, अंडे के खोल, पक्षी के पंख आदि एकत्र करें। एकत्रित सामान व अर्जित अनुभवों को विद्यालय में अन्य सहपाठियों के साथ सांझा कर रहे हैं। 

इसी गतिविधि के मद्देनजर एक  विद्यालय के विद्यार्थी इतेश, अभिषेक, सूर्यकांत, कर्ण और अरुण विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल बावेजा के साथ क्षेत्र भ्रमण लघु शोधयात्रा को निकले जहां मार्ग में अरंड के पौधे पर लगे बीजों ने आकर्षित किया तो अरंडी के पत्तों के चिकित्सा हेतु प्रयोग उस पर चर्चा की गयी विज्ञान अध्यापक ने बताया की इसके बीजों से निकलने वाले तेल का प्रयोग साबुन बनाने में किया जाता है जबकि बीजों का प्रयोग भी विभिन्न आयुर्वैदिक दवाइयां बनाने में किया जाता है।

उनके मार्ग में विभिन खरपतवार पौधों का जिक्र किया गया तो बीजों के उड़ कर एक स्थान से दुसरे स्थान पर जाना व पक्षियों द्वारा फल को समेत बीज खाने से अपाचन की स्थिति में उनकी बीट द्वारा सीड स्प्रेडिंग बालकों के लिए नया अनुभव था। जंगली खजूर पर पीपल के पेड़ का उगना उनकी समझ में आ चुका था कि यह पीपल के बीज को ना पचा पाने वाले पक्षियों की करामात के कारण हुआ है। आम के पेड़ की नस्ल और गत वर्षों व इस वर्ष के उत्पादन व गुणवत्ता को मौसम से तुलनात्मक अध्यन से तुरंत निष्कर्ष पर पहुचना कि इस बार वर्षा और आंधी की कमी के कारण फल झड़ा नहीं जिस कारण पेड़ पर फल अधिक है। पानी वाले खेत में पक्षियों की गिनती करना व उनकी नस्ल को पहचानना भी गतिविधि में शामिल होता हैं। बालकों ने आपस में भी अच्छा संवाद बनाये रखा और स्वयं द्वारा सम्पन्न की जाने वाली कृषि क्रियाओं के बारे में चर्चा की। कुछ जंगली फलों कंदूरी, रसभरी व वाइल्ड डेट आदि पर भी चर्चा हुई और इन जंगली फलों के उपभोक्ताओं की भी गिनती की गयी, साथ ही पक्षियों के पंखों को एकत्र किया गया।

विद्यार्थियों के सीखने की दृष्टि से उस क्षेत्र भ्रमण से क्या हासिल हुआ इस पर उनकी चर्चा में निकल कर आया कि बहुत सी नयी बातें उन्होंने देखी समझी जिसमें मुख्यतः प्रकृती का महीन अध्ययन करना व अनुभव सहेजना रहा। बच्चो ने कहा कि हमने आज विज्ञान परियोजना-आधारित ज्ञानार्जन और स्वतंत्र छानबीन का अनुभव हासिल किया। क्षेत्र भ्रमण द्वारा परियोजना-आधारित सीखना उनके लिए एक नया अनुभव था। इसमें विद्यार्थियों को कोई भी प्रश्न सामने रखना था और फिर सवांद-चर्चा-प्रेक्षण से उसकी पुष्टि करनी थी प्रकृति के विशाल परिसर में छोटे वैज्ञानिकों की तरह कार्य करना उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव था। अनुभव से सिखनमें जो मजा हैं।ऐसा ही मजा उंनके माध्यम से बच्चो को नए तरीके से शिखने का मौका मिल रहा है।

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आज शोधयात्रा एक संस्कार बन चुका हैं।हरियाणा ने छोटी छोटी शोधयात्रा की शुरुआत की हैं।

Monday, June 4, 2018

25 साल के बाद...

सृष्टि संस्थान।
एक ऐसी संस्था जिसे अब हम ग्रासरूट इनोवेशन के लिए जानते हैं।पद्मश्री अनिल गुप्ता ने हनी बी नेटवर्क को खड़ा किया।धीरे धीरे नेटबर्क बढ़ता गया।उसे संवार ने ओर सजा ने के लिए सृष्टि की स्थापना हुई।1 जून 2018 को 25 साल पूरे हुए।
25 साल का समारोह ओर इस साल के सृष्टि सन्मान का समारोह ग्रामभारती अमरापुर में संपन हुआ।2018 के जून में दिनांक 1 से तीन तक इनोवेटर्स का जैसे जमावड़ा हुआ।समग्र देश से आये 500 से अधिक लोगो ने इस समारोह को जैसे रोशनी प्रदान की।

एक जून को सृष्टि के साथियो की उपस्थिति में उद्घाटन समारोह के साथ इनोवेटर्स की संस्था की सिल्वर ज्युबिली का समारोह शुरू हुआ।भारत के सन्मानिय वैज्ञानिक एवं नेशनल इनोबेशन फाउंडेशन के चेरमेंन पध्म विभूषण  डॉ. रघुनाथ माशेलकर ने इस समारोह का अध्यक्ष बनके इसे चार चांद बनालिए।ग्रासरूट इनोवेशन में विश्व में अपनी पहचान पहचान बनाने वाले शिक्षाविद,आईआईएम अमदावाद के पूर्व प्रोफेसर पद्मश्री डॉ. अनिल गुप्ता विशेष उपस्थित रहे।मुजे इस समारोह में उपस्थित रहके भारत के सभी इनोबेटर्स के साथ मुजे सृष्टि के माध्यम से संवाद करने का मौका मिला।मुजे इस स्थान पे योग्य समाज ने वाले डॉ. अनिल गुप्ता और श्री रमेशभाई पटेल का में शुक्रिया ओर  आभार व्यक्त करता हूँ।मुजे ख़ुशी हैं कि में हनी बी नेटवर्क का  हिस्सा हु।मुजे खुशी हैं कि मुजे पे सृष्टि ने भरोसा किया हैं।मेने 2021 तक 100000 शिक्षकों को भारत से जोड़ने का ओर 25000 शिक्षा से जुड़े नवाचार इक्कठा करने का जिम्मा लिया हैं। हनी बी नेटबर्क में 2 साल में 100000 अध्यापको को जोड़ने की जिम्मेदारी मुजे निभानी हैं।शिक्षा से जुड़े नवाचार करने वाले भारत के नव सर्जकों के बीच ये तय किया हैं।
पहले छ महीनों में गोवा ओर ओडिसा के साथ...
गुजरात
महाराष्ट्र
कश्मीर
हरियाणा
आंध्रप्रदेश
तमिलनाडु
ओर राजस्थान के अध्यापको के संपर्क अभियान को शुरू करेंगे।साथ में अगले साल सृष्टि के माध्यम से आंतर राष्ट्रीय नवविचारक अध्यापक समारोह का आयोजन करने जा रहे हैं। नवविचारक शिक्षकों का नेटबर्क बढ़ाते हुए 25000 नव विचार खोजने के काम शुरू कर दिया हैं।आप भी इस मिशन में जुड़  सकते हैं।आप हनी बी नेटवर्क के माध्यम से जुड़के अपने देश और विश्व को शांति एवं समृद्धि दे सकते हैं।आप को सिर्फ जुड़ना हैं, आप के काम,विचार और ज्ञान की आवश्यकता हैं।एक कदम आगे कीजिए।एक साथ सो लोग एक कदम बढ़ाएंगे तो एक साथ सो कदम आगे होंगे।
सृष्टि के माध्यम से सृष्टि की सेवा करें।

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ज्ञानपीठ सन्मान प्राप्त पध्म श्री रघुवीर चौधरी दूसरे दिन विशेष उपस्थित रहे।उन्हों ने इस संस्था के काम और व्यवस्था को अनूठा बताया।

Sunday, May 13, 2018

मानव श्रम और श्रम



गन्ने का रस।
गर्मियों में सबको भाता हैं।
गमयो में ओर वैसे भी में लिक्विड लेना पसंद करता हूँ।गर्मियों में गन्ने का रस पीने के अनेक लाभ हैं।में अधिक से अधिक गन्ने का रस पीना पसंद करता हूँ।
पहले तो हम गन्ने को चूसते थे।बाद में ऐसे मशीन आये की जिसमें रस निकलता।बिजली या डीजल से चलता था।कुछ सालों से हमे लकड़े के बड़े मशीन देखते हैं।पिछले दो सालों से ऐसे मशीन में डीजल का जनरेटर लगाकर गन्ने का रस निकाल जाता हैं।कुछ महीनों पहले मेने एक ऐसा मशीन देखा जिसमे से रस निकलता हैं मगर गन्ना बहार नहीं आता।
कुछ दिनों पहले में ओर मेरे दोस्त गन्नेका रस पी रहे थे।मेने उन्हें एक सवाल किया।लकड़े के मशीन में डीजल जनरेटर लगाने से क्या रस के स्वाद में कुछ परिवर्तन होगा।उन्हों ने कहा कि 'नही गन्ने को लकड़े के गोल पिंड के बीच दबाया जाता हैं,इस लिए रस के स्वाद में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।मेरा मानना हैं कि मानव श्रम के बजाय मशीन का श्रम होता हैं तो काम आसान होता हैं मगर स्वाद बदल ही जाता हैं।घरघण्टी उसका उदाहरण हैं।पहले घर में मानव श्रम से घंटी के  द्वारा औरते अनाज से आटा बनाती थी।उस समय दो पथ्थर के बीच में ही अनाज से आटा निकलता था।आज घरघंटी में दो पथ्थर के बीच ही आटा मिलता हैं।मगर उस के स्वाद में फर्क हम महसूस करते हैं।

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कुछ तो होगा मानव श्रम का महत्व,वरना स्वाद न बदल जाता।

Monday, March 26, 2018

प्रज्ञा ओर गृहकार्य

वैसे तो हम सभी इस शब्द से अवगत हैं।कुछ सालों से हम गृहकार्य को होमवर्क के नाम से अधिक सुनते हैं।होमवर्क के दरमियान कुछ सवाल सामने आते हैं।
होमवर्क को तीन चीजो में बांटा गया हैं।जो कुछ दिनों पहले सीखा हैं।जो आज ही सीखा हैं,ओर जो कल सीखने वाला हैं।ये तीन प्रकार हम कक्षा तीन से ही अमलीकृत करते हैं।कक्षा एक ओर दो में गृहकार्य का कोई प्रावधान नहीं हैं।मुम्बई अधिनियम के तहत हम आपनी व्यवस्था का आयोजन कर रहे हैं।कक्षा 3 से 8 के लिए भी गृहकार्य कितना देना हैं उसके बारे में भी मार्गदर्शन दीया गया हैं।

जो क्लास हैं उसको 10 गुना मानके इतने समय के लिए गृहकार्य देना हैं।इस बात को समजेंगे तो आप भी खुश हो जाओगे।कक्षा 3 के लिए 30 मिनिट।कक्षा 4 के लिए 40 मिनिट ओर 5 के लिए पचास।कक्षा 8 के लिए 80 मिनिट।याने आएक घंटा 20 मिनिट से अधिक  गृहकार्य नहीं दे सकते हैं।
राइट टू एज्युकेशन के अंतर्गत कहा गया हैं कि विद्यार्थी को स्वगती से ही प्रगति के रास्ते पे ले जाना हैं।जब तक भारतीय संविधान में कलम 29 के आधार पर सरकार कुछ नया नहीं करती हैं,तब तक SCE के तहत ही मूल्यांकन करना हैं।करना पड़ेगा।ये मूल्यांकन व्यवस्था सिर्फ रटा हुआ या याद रखहुआ नहीं,उसने जो जानकारी प्राप्त की हैं उसे ही समजना हैं।
आज हम प्रज्ञा में दो कक्षाओं को एक साथ जोड़ के पढाने का आयोजन कर रहे हैं।आज अगर कुछ शिक्षक कहते हैं तो उन्हें 3 सवाल हैं।

1.क्या हम पीटीसी करते थे तब संयुक्त पाठ नहीं देते थे?

2.क्या आज से पहले श्रेणी विहीन घटक योजना में हमने शिक्षा कार्य नहीं करवाया हैं।
(आज 1998 के बाद जो शिक्षक बने हैं,वो जब पढ़ते होंगे तब श्रेणी विहीन घटक योजना के दौर में पढ़े होंगे.)

3.ट्यूशन के दौरान एक शिक्षक एक से अधिक कक्षा के भिन्न भिन्न विद्यार्थी को लेके शिक्षा कार्य करता हैं।उस समय कक्षा ओर विषय भी भिन्न होते हैं।उस वख्त एक घंटे में जो परिणाम हमे मिल रहा हैं,क्या हम सिर्फ दो क्लास के बच्चों को साथ लेके एक विषय का शिक्षा कार्य नहीं कर सकते?

आज ABL को हम नए रूप में गुजरात की सभी सरकारी स्कूल में रन करने जा रहे हैं।आज से पहले जो डिजाइन से प्रज्ञा का काम हो रहा था,आठ साल के गुजरात के शिक्षकों का अनुभब,उनके सवाल ओर समस्या के लिए जो भी सवाल सामने आए उसे हमने यहां सुधारा हैं।एक अच्छा और टीचर्स फ्रेंडली मॉडल इस बार चल ने वाला हैं।

कुछ नया हैं तो अच्छा नहीं हैं,ये बात हम सुविधा के लिए,अपने आप में खरीदी के लिए मानते हैं।उस बातमें हम सबसे नया ओर अपडेट किया हुआ लेते या खरीद ते हैं।शिक्षा में ऐसा नहीं हैं।नया होता तो हैं,मगर स्कूल में काम करने वाले व्यक्ति कभी इसे अच्छे से एक्सेप्ट नहीं कर सकते।और सवाल सामने आते हैं।

जी ठीक हैं।
आज बात शुरू हुई,गृहकार्य से।हम ने उसे कहीं और खत्म किया हैं।आप इस के लिए कॉमेंट में आपके सवाल भी भेज सकते हैं।

गृहकार्य।
वैसे तो हम सभी इस शब्द से अवगत हैं।कुछ सालों से हम गृहकार्य को होमवर्क के नाम से अधिक सुनते हैं।होमवर्क के दरमियान कुछ सवाल सामने आते हैं।
होमवर्क को तीन चीजो में बांटा गया हैं।जो कुछ दिनों पहले सीखा हैं।जो आज ही सीखा हैं,ओर जो कल सीखने वाला हैं।ये तीन प्रकार हम कक्षा तीन से ही अमलीकृत करते हैं।कक्षा एक ओर दो में गृहकार्य का कोई प्रावधान नहीं हैं।मुम्बई अधिनियम के तहत हम आपनी व्यवस्था का आयोजन कर रहे हैं।कक्षा 3 से 8 के लिए भी गृहकार्य कितना देना हैं उसके बारे में भी मार्गदर्शन दीया गया हैं।जो क्लास हैं उसको 10 गुना मानके इतने समय के लिए गृहकार्य देना हैं।इस बात को समजेंगे तो आप भी खुश हो जाओगे।कक्षा 3 के लिए 30 मिनिट।कक्षा 4 के लिए 40 मिनिट ओर 5 के लिए पचास।कक्षा 8 के लिए 80 मिनिट।याने आएक घंटा 20 मिनिट से अधिक  गृहकार्य नहीं दे सकते हैं।
राइट टू एज्युकेशन के अंतर्गत कहा गया हैं कि विद्यार्थी को स्वगती से ही प्रगति के रास्ते पे ले जाना हैं।जब तक भारतीय संविधान में कलम 29 के आधार पर सरकार कुछ नया नहीं करती हैं,तब तक SCE के तहत ही मूल्यांकन करना हैं।करना पड़ेगा।ये मूल्यांकन व्यवस्था सिर्फ रटा हुआ या याद रखहुआ नहीं,उसने जो जानकारी प्राप्त की हैं उसे ही समजना हैं।
आज हम प्रज्ञा में दो कक्षाओं को एक साथ जोड़ के पढाने का आयोजन कर रहे हैं।आज अगर कुछ शिक्षक कहते हैं तो उन्हें 3 सवाल हैं।
1.क्या हम पीटीसी करते थे तब संयुक्त पाठ नहीं देते थे?

2.क्या आज से पहले श्रेणी विहीन घटक योजना में हमने शिक्षा कार्य नहीं करवाया हैं।
(आज 1998 के बाद जो शिक्षक बने हैं,वो जब पढ़ते होंगे तब श्रेणी विहीन घटक योजना के दौर में पढ़े होंगे.)

3.ट्यूशन के दौरान एक शिक्षक एक से अधिक कक्षा के भिन्न भिन्न विद्यार्थी को लेके शिक्षा कार्य करता हैं।उस समय कक्षा ओर विषय भी भिन्न होते हैं।उस वख्त एक घंटे में जो परिणाम हमे मिल रहा हैं,क्या हम सिर्फ दो क्लास के बच्चों को साथ लेके एक विषय का शिक्षा कार्य नहीं कर सकते?

आज ABL को हम नए रूप में गुजरात की सभी सरकारी स्कूल में रन करने जा रहे हैं।आज से पहले जो डिजाइन से प्रज्ञा का काम हो रहा था,आठ साल के गुजरात के शिक्षकों का अनुभब,उनके सवाल ओर समस्या के लिए जो भी सवाल सामने आए उसे हमने यहां सुधारा हैं।एक अच्छा और टीचर्स फ्रेंडली मॉडल इस बार चल ने वाला हैं।

कुछ नया हैं तो अच्छा नहीं हैं,ये बात हम सुविधा के लिए,अपने आप में खरीदी के लिए मानते हैं।उस बातमें हम सबसे नया ओर अपडेट किया हुआ लेते या खरीद ते हैं।शिक्षा में ऐसा नहीं हैं।नया होता तो हैं,मगर स्कूल में काम करने वाले व्यक्ति कभी इसे अच्छे से एक्सेप्ट नहीं कर सकते।और सवाल सामने आते हैं।

जी ठीक हैं।
आज बात शुरू हुई,गृहकार्य से।हम ने उसे कहीं और खत्म किया हैं।आप इस के लिए कॉमेंट में आपके सवाल भी भेज सकते हैं।

@706@
शिक्षा कोई व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं हैं।शिक्षा में कोई सर्वगुण नहीं हैं।किसी को आने आप को संपन नहीं मानना चाहिए।सोसियल मीडिया में लिखना ओर काम करके बताना दोनों में फर्क हैं।हम सिर्फ काम करेंगे,परिणाम अवश्य मिलेगा।

Friday, March 9, 2018

अपना घर


घर क्या हैं।
घर कैसा होना चाहिए।
घर कैसे बनता हैं,घर की क्या आवश्यकता हैं।
एस सवाल हम सुनते हैं।ऐसे सवाल के जवाब हम देते भी हैं।
आज के समय में पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन सबसे बड़ा सवाल हैं।ये सवाल भी ऐसा की जिसका सहिमें कोई जवाब नहीं हैं।
कुछ दिनों पहले मुजे महाराष्ट्र जाना था।भंडार डिस्ट्रिक्ट से सटे एक छोटे से गाँव में हम गए।यहां एक घर देखने जाना था।आप को होगा कि घर देखने के लिए भांडार...!
जी...
आप ने कई सारे मकान देखे होंगे।क्या आपने प्लास्टिक से बना मकान देखा?!प्लास्टिक की बोटल से ये मकान बनाया गया।आशियाना नामक NGO ये काम कर रहे हैं।तीन चार महिनो तक बोतल इकठ्ठा करते हैं।इसमें मिट्टी भरते हैं।उसे सीमेंट से चिपकाते हैं।इस घर में न गर्मी लगती हैं, न ठंडी लगती हैं।वातानुकूलित व्यबस्था यहां देखने को मिलती हैं।
भूकंप आने पर भी जानहानि नहीं होती हैं।आसपास बिखरने वाला कचरा यहां उस होता हैं।एक छोटासा घर बनाने के लिए 30 से 40000 बोतल चाहिए।
ये बोतल का अगर इस्तमाल नहीं होता तो प्लास्टिक कितना नुकसान कर सकता हैं,इस के बारे में आप जानते ही हैं।सारे लोग अगर ऐसे मकान बनाये तो मकान सस्ता होता हैं।एक ईंट की किंमत 4 रुपये हैं।10 रुपये में एक किलो प्लास्टिक की बोतल मिलती हैं।16 से 22 बोतल होती हैं।अगर हम एक किलो में 15 बोतल कहे तोभी 60 रुपये के करीब खर्च करना पड़ता हैं।
सोचिए,
कितना अच्छा विचार हैं।
सब के पास अपना घर,
अपना घर,अपना परिवार।

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शहर में अपना घर होतो, वो शहर भी अपना ही लगता हैं।
भले दौड़ के आये सारे जहांन में,अपना अपना ही होता हैं।
जय हो...

Friday, March 2, 2018

रूरल फेस्ट...

आज के दिन शिक्षा से जुड़ी संस्थाए भी नवाचार के प्रति जागृत हुई हैं।दिनांक 4 एवं 5 मार्च के दौरान ईडर में भी ऐसा कुछ होगा।बच्चो के नव विचारों को खोजने का इर फैलाने का काम यहाँ हो रहा हैं।आज के दौर में समस्याओ के सामने उसके समाधान ओर खोज के लिए ये महत्वपूर्ण है।
इस फेस्टिवलमें जो बच्चे आएंगे उनके विचार प्रदर्शित करेंगे उनको इजनेर या संशोधकों से मिलवाया जाएगा।टेक्नोकोजी या ऐसी कोई व्यवस्था के सामने उन्होंने जो काम किया है उसे स्थानीय क्षेत्रमें इस्तमाल करने का ओर परखनेका उन्हें मौका भी मिलता हैं।

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मुजे जब भी मौका मिला हैं,मेने कहा हैं।
अगर भावेश नामक लड़के की उम्र 5 साल हैं,उसे दाढ़ी मुछ नहीं हैं तो कोई बात नहीं।मगर वो ही भावेश जब 20 सालका होगा और उसे मुछे नहीं हैं तो सबसे बड़ी समस्या हैं।

Innovation में भी ऐसा ही हैं।पहले आवश्यकता नहीं थी या कम जरूरत थी,आज उसके बगैर नहीं चलेगा।

Tuesday, February 13, 2018

Jack ओर अलीबाबा...


व्यक्ति अगर चाहे तो क्या नहीं कर सकता।आज हम ऐसे ही एक व्यक्ति के बारे में बात करेंगे।उनका नाम हैं 'Jack ma।'उनका जन्म 10 सितंबर 1964 में चीन में हुआ था।उनका बचपन  उनका बहोत गरीबी में व्यतीत हुआ।उनका बचपन बहोत संघर्षो से गुजरा था। उनकी उम्र सिर्फ 13 साल की थी।इतनी छोटी उम्र में उन्होंने अपने आप से अंग्रेजी भाषा सीखने की शुरुआत की। आज भी चीन की प्रमुख भाषा चाइनीज हैं।उस समय भी चीन की प्रमुख भाषा चाइनीज थी। अंग्रेजी सीखने के लिए उन्होंने  किसी व्यक्ति का सहारा नही लिया,उन्होंने टूरिस्ट गाइड बन कर अपने आप से अंग्रेजी सीखना ओर बोलना शुरू किया। टूरिस्ट्स के साथ वो अंग्रेजी भाषा में ही बाते कर ते थे। अंग्रेजी सीखने के लिए उन्होंने ये काम किया।उन्होंने 22 साल की आयु तक टूरिस्ट गाइड का काम किया।
हम जिनके बारे में चर्चा करते हैं।सारी दुनिया जिन्हें Jack के नाम से जानते हैं उनका  सही नाम Ma-y-n है। जब वो टूरिस्ट गाइड का काम करते थे तभी एक विदेशी व्यक्ति से उनकी गहरी मित्रता हुई थी।उस मित्र ने उन्हें अपने देशमें जाकर एक खत लिखा।उस खत में उस विदेशी मित्र ने उनका नाम jack लिखा था।वो उन्हें Jac के नाम से ही बुलाते थे।
बचपन से उनका पढ़ाई में मन नही लगता था। कहते हैं न कि विफलता से ही व्यक्ति सीखता हैं।jac 4थी कक्षा में 2 बार , 8वी कक्षा में 3 बार फेल हो गए।अरे... ग्रेज्युएशन में भी वो 5 बार असफल रहे थे।बचपन से वो सिर्फ असफलता के बारे में ही सोच रहे थे।उन्होंने असफलता ही देखी थी।
अपने परिवार के निभाव के लिए उन्होंने कही जगह पे नोकरी के लिए आवेदन देते रहे,मगर असफल रहे। हर बार उनके हाथों में उन्हें निराशा ही मिलती रही।

वो अपने उस दोस्त को मिलने के लिए अमेरिका गए।अपने जीवन में उन्होंने  वहां पहली बार इंटरनेट देखा।उन्होंने इसे पहले कभी भी इंटरनेट नही देखा नहीं चलाया था। पहलीबार इंटरनेट पे उन्होंने  Beer शब्द को खोजा।नेट के माध्यम से सर्च करने में उन्हें कई सारे देशो से जानकारी मिली।उन्होंने देखा कि दिखाए जाने वाली जानकारी में चीन का नाम कही भी नहीं मिला।आप को ये जान के हैरानी होगी कि पहले से चीन में साम्यवादी साशन हैं।साम्यवादी लोग भगवान में नहीं मानते या कम मानते हैं।अर्थव्यवस्था में चीन हमारे पश्चिमी देशों का विरोधी हैं।वो नेट के इस्तेमाल को सहज नहीं मानते हैं।उस वख्त चीन के बारे में सामान्य जानकारी खोज ने की कोशिश की वो जानकारी नही मिली तब से उन्होंने इस के बारे में सोचना शुरू किया।

उन्होंने अपने देश को इंटरनेट से जोड़ने का ठान लिया। उन्होंने छोटे बड़े व्यवसाय को जोड़ ने के लिए एक वेबसाइट बनाई जिसका नाम "चाइना - येल्लो पेज" रखा। उनका कॉन्सेप्ट अच्छा होने के बाद भी चीन मे उन्हें फंडिग नही  मिला।क्यो की वो समान अर्थ व्यवस्था में मैंने वाले साम्यवादी विचारधारा के देश में थे।अब... उन्हें उसेे भी बंध करना पड़ा।

अपने पहले काम की असफलता के बाद भी उन्होंने " alibaba.com " को तैयार किया।जीवन में कोई भी काम आसानी से होते तो महेनत कोंन करता।पहले पहले उन्हें बहोत दिक्कतो का सामना करना पड़ा।अपने आप में विश्वास रखने वाले Jac ने कुछी सालो में दुनिया की सबसे बड़ी  e - commerce कंपनी का निर्माण कर लिया।आज alibaba का नेटवर्क face book से भी कई गुना ज्यादा है। उनकी आमदनी e- bay + amazon की आमदनी से कई गुना ज्यादा कमाती है।

Jack कहते हैं कि...उन्होंने हमेशा प्रयास किया ऐसे व्यक्ति खोज ने का जो उनसे ज्यादा स्मार्ट हो। उन्होंने कहा हैं कि 'वो पहले थे जो टेक्नोलॉजी ओर मैनेजमेंट के बारे में कुछ भी जानते नहीं थे। वो मानते हैं कि साथ जुड़ के स्मार्ट व्यक्ति काम करेगे तभी ध्येय सरल बनेगा। उनका मानना हैं कि स्मार्ट लोगो को साथमे काम करवा ना कठिन है।

क्योंकि...

स्टुपिड लोग सरलता से साथ में काम कर सकते है।उन्होंने आयुष्य के नजरिये से कुछ अलग करने को कहा हैं।वो मानते हैं कि  20- 30 साल की उम्र हो तभी आपको अच्छे गुरु को अनुसरना चाइये।

जभी आप 30-40 साल के हो तभी आप खुद कुछ करना चाहते है वो करे। ज्यादा प्रयत्न करने चाहिए।

जभी आप 40-50 साल के हो  तभी आप वो काम करे जिसमे आप परफेक्ट है। कुछ नया करने का सोचोगे तो वो भयानक है।

जब आप 50-60 साल के है तभी आप का समय नेक्स्ट जनरेशन को ट्रेनिग ओर डेवलोपमेन्ट करने में देना चाहिए।

जभी आप 60- से ज्यादा साल के हो जाये तभी आप आपके पौत्र के साथ समय पसार करे।

वो सोचते हैं कि वैश्वीकरण कभी बंध नही होगा। वैश्वीकरण ने पिछले 30 सालों में बहुत अच्छा काम किया है। बहुत सारे देश समृद्ध हुए है।

किन्तु...

वैश्विककरन से बहोत सारे प्रोब्लेम्स भी पैदा हुए है। युवानो के पास मौका नही है। छोटे व्यवसाईको को तक नही मिल रही है। विकासशील देशो की आज अवगणना हो रही है। आज हमारे पास टेक्नोलॉजी है अच्छा ज्ञान है। मगर स्किक वाले व्यक्ति नहीं हैं।वो आज कल की शिक्षा व्यवस्था को   सबसे बड़ी चेलेंज मानते हैं।

आज हम जो पद्धति से सिखते ओर सिखाते है वो बदलने की आवश्यकता हैं।आज हम शिक्षा व्यवस्था बदलेंगे नही तो हम 30 साल बाद बड़ी मुश्किल में फस जायेगे।

क्योंकि...

उनका मानना हैं कि हम जो पद्धति से सीखते है वो 200 साल पुरानी है। हमारी वर्तमान शिक्षा व्यवस्था knowledge - based है। हम अपने बच्चोको मशीन के साथ कैसे स्पर्धा करनी है वो हम नही सिखाते । बच्चोको कुछ अलग सीखाने की जरूरत है।

वो कहते हैं उन्होंने ये  कभी नही सोचा था कि वो CEO बनेंगे।

शिक्षकों के प्रति उन्हें बहुत सन्मान हैं।वो मानते हैं कि टीचर एक महत्व पूर्ण cherechter है। टीचर हमेशा ऐसा सोचता है कि उसका विद्यार्थी एक अच्छा व्यक्ति बने।

अब दुनिया में नेट के व्यवसाय में सबसे बड़े बननके वाले Jack ने अपने जीवन को बनाया हैं।उनके जीवन मे आये एक दोस्त ने इंटरनेट दिखाया और Jack विश्व के सरताज बन पाए।हमारे जीवन में भी आने वाले दोस्त हमे सफलता दिलवा सकते हैं।सिर्फ हमे उसके प्रति आस्था होनी चाहिए।


अगर तृप्ति या संतोष नहीं हैं तो शांति नहीं हैं।शांति नहीं हैं तो सुख नहीं हैं।सुख नहीं हैं तो प्रेम कैसे होगा।प्रेम नहीं हैं तो आनंद की अनुभूति नहीं होगी।तो चलो तृप्त होने के रास्ते खोजे।

We can मुमकिन हैं...


Saturday, February 10, 2018

हाथ की सहाय



आज हम देखते हैं।
कई लोग अपना काम कर रहे हैं।
कुछ लोग ऐसे भी हैं जो किसी न किसी समस्या के चलते वो काम नहीं कर पाते।शारीरिक रूप से पैर न होना या देखन पाना भी विकलांगता हैं।
समस्या तब समाने आती हैं जब हम दोनों हाथ या पैर के साथ जी रहे होते हैं।किसी अकस्मात में जब वो नही रहते तब हमें उसकी आवश्यकता होती हैं,हम उसका महत्व समझते हैं।
ऐसी बहोत सारी संस्थान हैं जो हाथ या पैरो के लिए कुछ अलग कर रहे हैं।अमदावाद में ऐसी समस्याओ से जूझने वाले लोगो के लिए कुछ हो रहा हैं।पोस्टरमें नंबर और अन्य जानकारी भी दी गई हैं।आप भी इसे फैलाए ओर किसी को अपना सामान्य जीवन व्यतीत करने में सहयोग करे।
#we can मुमकिन हैं...!

Thursday, February 1, 2018

એવું જ હોય...


એક અદભૂત ખગોળીય ઘટના તા. ૩૧ જાન્યુઆરી, ૨૦૧૮ ના રોજ જોવા મળી.સંપૂર્ણ ચંદ્ર ગ્રહણની ઘટના જોવા મળી. આ ઘટનામાં ચંદ્રને ૩ કલાક અને ૧૯ મિનીટ માટે નભમાં જોઈ શકાશે. વિશ્વભરના અનેક ખગોળવીધો દ્વારા આ દિવસની રાહ વર્ષોથી જોવામાં આવી રહી છે. કારણકે આ ઘટના ૧૫૦ વર્ષે બાદ એક સાથે બે અદભુત ઘટનાનું નયન રમ્ય સંયોજન થયુ. જેમાં ગ્રહણની  સાથે ચંદ્ર લાલશ પડતો જોવા મળ્યો.

જેને બ્લુ મુન કહેવામાં આવે છે. બ્લુ મુન એટલે  એક જ કેલેન્ડર વર્ષમાં ભારતીય માસની બે પુનમ આવે તેવી ઘટના. આ દિવસે ચંદ્ર પૃથ્વીની નજીકથી પસાર થશે. જેથી તે ૧૪% મોટો અને ૩૦% વધુ તેજસ્વી દેખાશે. જેને વિશ્વમાં ‘સુપર મુન’ તરીકે ઓળખવામાં આવે છે. આ ઘટના સાથે જ પણ બનવા  જઈ રહી છે. 

કલ્યાણ પ્રાદેશિક લોક વિજ્ઞાન કેન્દ્ર, ભાવનગર પ્રેરિત ભાવનગર એસ્ટ્રોનોમી ક્લબ દ્વારા તા. ૩૧ જાન્યુઆરી,૨૦૧૮ ના રોજ સાંજે ૫. ૩૦ કલાક થી ૧૦.૦૦ દરમ્યાન તખ્તેશ્વેર મંદિર ખાતેસુપરમુન અને ચંદ્રગ્રહણનો નજરો કુલ ત્રણ ટેલીસ્કોપ ઉપરાંત પ્રોજેક્ટર દ્વારા લાઈવનિહાળવા માટેની વ્યવસ્થા કરવામાં આવી હતી. ભાવનગરના ખગોળરસીક જનતાને આ આદભૂત ઘટનાના નિહાળવા માટે કલ્યાણ પ્રાદેશિક લોક વિજ્ઞાન કેન્દ્ર, ભાવનગરના ચેરમેન દ્વારા જાહેર નિમંત્રણ પાઠવવામાં આવેલુ અને અનેકો એ તેનો લાભ લીધો હતો.

Saturday, January 27, 2018

इनोबेशन : गुरु शिष्य



 पालनपुर विद्यामंदिर।जय नहीं करता।कुछ दिन पहले राज्य गणित,विज्ञान एवं पर्यावरण प्रदर्शन संम्पन हुआ।डॉ अनिल गुप्ता एक दिन विशेष उपस्थित रहे।उन्होंने नाव विचारको के लिए क्या क्या दिशाए हैं और क्या संम्भावना हैं उसके बारे में चर्चा की।साथ में चेतन पटेल भी थे।चेतन पटेल ने नव विचारक ओर खास करके बच्चो के विचारों और अन्य इनोवेशन के बारे में जानकारी देते हुए ऐसे नव विचारको को खोज ने में सहयोग करने का आह्वान किया।

पद्म श्री अनिल गुप्ता सर को सुनने के लिए डॉ जे.जे.रावल विशेष उपस्थित रहे थे।दोनों महानुभावो ने मिलकर बच्चो के कार्यक्रम को देख ओर सराहा।
Bnoवेशन:sristi

डॉ नलिन पंडित ओर गिजुभाई भराड



दो नाम हैं।
श्री नलिन पंडित
ओर
श्री गिजुभाई भराड
दोनों ऐसे नाम हैं जिन से में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में सीखता आया हूँ।श्री नलिन पंडित सर।मुजे याद है,उन दिनों कक्षा 3 में पर्यावरण विषय की बैठक थी।सर भी उपस्थित थे।गुजरात के शिक्षा जगत के दिग्गज यहाँ उपस्थित थे।स्व.दीपकभाई ओर प्रवीण डाभी के साथ ओर भी कई साथी थे।मेने तब तक जितने लोगो के नाम लेखक के रूप में देखे या पढ़े थे उनमें से कई सारे लोग यहाँ थे।पर्यावरण के लेखकों के बीच में खड़ा था।सभी लोग अपनी अपनी बात रख रहे थे।में देखने और सुनने के अलावा और कुछ नहीं कर रहा था।किसी इकाई के ऊपर चर्चा थी।मेने कहा,क्षमता विधान(आज लर्निग आउट कम)में लिखा हैं कि प्राणियो के खाने पीने की आदत को देखना!श्री प्रवीणभाई डाभी ने कहा,जी...आप ने सही पढ़ा।तो मुझ से निकल गया 'आप ने सही नहीं लिखा हैं,आप ने तो को क्या खाता हैं उसीकी चर्चा की हैं।आप अवलोकन के माध्यम से पढ़ाया जा सके वैसे लिखो।'
मेने बहोत सहज कहा था।20 साल की उम्र में मैने 55 साल से लिखने वालों को चैलेंज किया।बात बढ़ी,गर्म हुई।किसी ने मुजे कहा 'अवलोकन से कैसे पढ़ाया जा सकता हैं।मेने उसके उदाहरण उस इकाई के लिए कहे।'बात में स्वमान ओर अपमान की बात थी।मेरा कोई इरादा नहीं था।जो था वो बोला।कई लोग मुजे समजाने ओर डाटने लगे।मेरी हालत घर की छोटे बहु जैसी थी।मगर तब कुछ हूआ।एक गभीर व्यक्तित्व वाले एक अधिकारी ने खाफी होकर कहा'મિત્રો,આ છોકરો ખોટો નથી.આવું બધા એકમ માં હોય તો ન ચલાવી શકાય.'(साथियो,आए लड़का गलत नहीं हैं।ऐसा प्रत्येक इकाई में हैं तो वो नहीं चलने दे सकते।)अब तो क्या था।अवलोकन के माध्यम से कैसे इकाई लिखी जाए उसपे चर्चा हुई।मेरी बात को अब गंभीरता से लिया गया।एक छोटी बहू की तरफदारी करने वाले वो अधिकारी हैं श्री नलिन पंडित।उसके बाद प्रज्ञा ओर होल क्लास पेटन के लिए जब जब पर्यावरण लिखा गया मुजे लेखक या कन्वीनर के तौर पे जिम्मेदारी मिली।
मेने श्री नलिन पंडित सर के प्यार,दुलार ओर गुस्से को भी देखा हैं।मेरे जैसे कई लोगो को उन्हों ने सही मायने में रास्ता दिखाया हैं।आज शिक्षा के व्यवसाय में में जो भी हु,'क्यो की नलिन पंडित सर GCERT के नियामक थे।

दूसरे हैं श्री गिजुभाई भराड।

जब में शिक्षक बना।किसी कार्यक्रम में मेने श्री गिजुभाई को सुना।उन्हों ने कहा कि अगर 6 का नाम चार रखेंगे तो संख्या कैसे बोली जाएगी।उन्हों ने थोड़ी देर खेल ने को उकसाया।मुजे बड़ा मजा आया।मेने मेरी स्कूल में आके बच्चो को कहा 'आज मेने गिजुभाई बधेका को सुना।'मेरो स्कूल थी।किसी बच्चे ने मुजे टोका ओर कहा गिजुभाई बधेका को आप नही मिल सकते।वो तो मर शुके हैं।मुजे अपमान के साथ इस बात को स्वीकार ते हुए थोड़ी जिल्लत लगी।मेने सही बात को माना।तब से मुजे गिजुभाई भराड ओर बधेका का अंतर जानने को मिला।तब से उनकी किताबो के माध्यम से मैने सिख हैं।समजा हैं।

बात ये की इस दोनों महानुभाव के साथ ,उनको बाते सुनने का ओर चर्चा करने का मौका मिला।खास कर श्री नलिन पंडित सर से दो दिन में  फिरसे जैसे एनर्जी मिली।पंडित सर ने मुजे कभी गुरु दक्षिणा नहीं दी हैं।हा, उन्होंने मुजे दक्षिणा मूर्ति तक पहुंचा के मेरे गुरु होनेका मुजे अवसर दिया हैं।
#नलिन पंडित(एक नवाचार)

नया सवेरा...

आप भी जुड़े...

कोई कुछ भी कहे।
बच्चे सदैव बच्चे होते हैं।
हमारी आसपास कई सारे बच्चे ऐसे हैं जिन्हें हम विशेष रूप से नहीं जानते या पहचानते हैं।कुछ बच्चे पढ़ने लिखने में तेज नहीं होते।वो कुछ अलग करना चाहते हैं और अलग करते हैं।इस दोनों बातो में ये स्वयं स्पस्ट हैं कि केंद्र में बच्चे होते हैं।
क्या सभी को हम डॉक्टर या इजनेर बनाये या वकील बनाएंगे तो अच्छे लेखक और अन्य व्यवसाय कर्मी हमे कैसे मिलेंगे!?
नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन की किसी कार्यशाला में मुजे काम करना था।वक्ताओं में एक थे डॉ अनिल गुप्ता।उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा 'किसी समस्या का अगर समाधान खोजना हैं तो उसके बारे में बच्चों से सवाल जवाब करो।वो ही नए विचार या आविष्कार कर सकते हैं।पढ़े लिखे लोग तो विज्ञान में स्वीकृत अवधारणाओं से ही अपनी बात रखेंगे।
इस बार 26 जनवरी ओर शुक्रवार था।2001 में भी ऐसा ही एक शुक्रवार था।भूकंप तब भी आया था।भूकंप 2018 में भी आया।फर्क इतना कि इस बार राष्ट्र्पति जी के राष्ट्रजोग निवेदन में उन्होंने बच्चों के ओर ग्रासरूट इनोवेटर्स के बातें में अपनी बात रखी।उनका भाषण सुनते ही मेरे ओर मेरे साथ जुड़े ऐसे नवचारका काम करने वाले लोगो के मन में भूकंप आया।
अब तो राष्ट्रपति महोदय भी अपने वक्तव्य में देश को नवाचार की बात कर रहे हैं।हनी बी नेटवर्क 30 साल से ये काम करता हैं।हम भी उसमें जुड़ के जो काम करते हैं उससे आज मालूम पड़ा कि ये काम भी राष्ट्रवाद ही हैं।आप भी आपकी आसपास के ऐसे प्रतिभावान बच्चो के लिए कुछ कर सकते हैं।आप भी जुड़े हनी बी के नेटवर्क से ओर राष्ट्रविकास में अपना सहयोग प्रदान करें।

Sunday, November 12, 2017

एक इतिहास...

कुछ दिन खास हैं।
कुछ दिन खासम खास हैं।
आप एक कैलेंडर के पेज को देख रहे हैं।कहा जाता हैं कि इतिहास उन्हीका लिखा जाता हैं,जो विजेता होते हैं।काला बाजारी को रोकने के लिए श्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंधी करवाई।लंबी योजनाओं को हम शार्ट टाइम में नहीं नाप सकते।वैसा कुछ आज दिख रहा हैं।आज कैलेंडर बनाने वाली किसी कम्पनी ने अपने कैलेंडर में आज के दिन को खास दिन माना हैं।
देखते हैं।आगे आगे क्या होगा।आज में बाबूजी महाराज का शुक्रिया अदा करूँगा जिन्होंने मुजे आए फोटो भेजा हैं।कुछ दिन हमे पुराने अच्छे लगते हैं।जे.कृष्णामूर्ति कहते थे के पुराने दिनोंमें से अच्छी बातें हमे याद रखनी चाहिए।और बुरी चीजे फिरसे अपने जीवन में न आये वैसा होना चाहिए।मगर हमे आज ही अपने कर्मो का फल चाहिए।
मेने एक कहानी लिखी थी।कहानी में था...'भगवान मयजे धीरज चाहिए ,मगर आज ही'।आज आम का पेड़ लगाएंगे तो आज ही आम मिलेंगे क्या।आज अगर कोई बच्चा साइकल सिखते समय चोट खाता हैं तो क्या उसे साइकिल नहीं सिखानी?
देखेंगे...
समजे गे...
#नोटबंदी

Monday, October 9, 2017

राज्यसभा Live...


कोई कहेगा।भावेश ने भाजपा के लिए लिखा।कोई कहेगा आर.एस.एस का चमचा।में इतनी बड़ी व्यक्तिभी नहीं हुन की कोई भी मुजे मुसलमान विरोधी कहे।ये सन्मान कमाने के लिए बहोत कुछ गवाना पड़ता हैं।वो में अब गवाना नहीं चाहता।में राजकीय टिप्पणी नहीं करता मगर आज की बात संवैधानिक हैं।सो मयजे हुआ आपको जानकारी शेर करू।
आपको मालूम होगा कि राज्यसभा ओर लोकसभा में जीवंत प्रसारण के लिए दो स्पेशियल चेनल हैं।राज्यसभा के सभापति उप राष्ट्रपति होते हैं।कहते हैं कि राष्ट्रपति से अधिक कार्य उपराष्ट्रपति को करना पड़ता हैं।उन्हें राज्यसभा के संचालन की संवैधानिक जिम्मेदारी मिलती हैं।उपराष्ट्रपति की तनख्वा नही हैं।उन्हें राज्यसभा के संचालन की पगार मिलती हैं।अब आगे क्या हुआ उस बात को समझने के लिए आप निम्न जानकारी को पढ़े।

हामिद अंसारी:

आपको याद ही होगा कि पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को जाते-जाते भारत में मुस्लिम असुरक्षित लगने लगे थे. उन्होंने इस बात का जिक्र भी किया था. जिसके बाद हमने खुलासा करके बताया था कि कैसे हामिद अंसारी के कार्यकाल के दौरान राज्यसभा टीवी के नाम पर करोड़ों रुपयों की लूट की गयी और अब उन्हें पकडे जाने का डर सताने लगा है. अब इस लूट की जांच के आदेश दे दिए गए हैं.

अंसारी के कगमचो पर संकट 

नए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने घोटालों की इन रिपोर्ट्स पर संज्ञान लेते हुए राजयसभा टीवी में हुए पूरे खर्च का ईमानदारी से ऑडिट कराने को कहा है. यह जानकारी सामने आई है कि 2011 में राज्यसभा टीवी शुरू होने से लेकर अब तक इस पर 375 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. इतना ज्यादा बजट तो बड़े-बड़े प्राइवेट चैनलों का भी नहीं होता.

इस चैनल को राज्यसभा की कार्यवाही दिखाने के लिय शुरू किया गया था, लेकिन भ्रष्टाचार और लूट का आलम देखिये कि हामिद के करीबियों को नौकरियाँ बाँट दी गयी. राजयसभा टीवी सीधे उप-राष्ट्रपति के अंडर ही आता है. हद तो तब हो गयी, जब इस चैनल ने बाकायदा कमर्शियल फिल्मों का प्रोडक्शन भी शुरू कर दिया था और इसके लिए प्राइवेट प्रोड्यूसर को बिना किसी औपचारिकता के करोड़ों रुपये दे दिए.

 जनता के पैसों की ‘महालूट’
नए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने इस बात पर हैरानी जताई है कि राज्यसभा टीवी के फंड से 12.50 करोड़ रुपये एक कमर्शियल फिल्म ‘रागदेश’ बनाने के लिए दे दिए गए. ये तो सरासर गलत है. फिल्म बनाने के बाद फिल्म के प्रमोशन इत्यादि के नाम पर भी काफी लूट की गयी. इस फिल्म का प्रोड्यूसर राज्यसभा टीवी को नहीं, बल्कि इसके सीईओ गुरदीप सप्पल को बनाया गया. मानो फिल्म के लिए पैसे उन्होंने अपनी जेब से दिए हों.

गुरदीप सप्पल हामिद अंसारी के ओएसडी भी थे. जनता के पैसों से बनी इस फिल्म में दिग्विजय सिंह की दूसरी पत्नी अमृता राय को बतौर हीरोइन लिया गया. राजयसभा टीवी को चलाने के लिए संसद भवन के बाहर एक जगह किराये पर ली गई थी, जिसका किराया 25 करोड़ रुपये था. ये अपने आप में एक बड़ा घोटाला है. इसके अलावा 3.5 करोड़ रुपये कर्मचारियों को लाने-ले-जाने के लिए कैब सर्विस पर फूंक दिए गए. मतलब जहाँ-जहाँ से हो सकता था, वहां-वहां से लूट की गयी.

कांग्रेसी पत्रकारों पर लुटाए पैसे !
कोंग्रेसियों की ख़ास बात ये भी है कि सभी मिल-बाँट के खाते हैं. बिकाऊ मीडिया का भी ख़ास ख़याल रखते हैं. राजयसभा टीवी की लूट में भी पत्रकारों का ख़ास ख्याल रखा गया.कांग्रेस के वफादार पत्रकारों को राजयसभा टीवी में गेस्ट एंकर बनाकर हर महीने लाखों रुपये बांटे गए. इसके अलावा हामिद अंसारी जितनी बार भी विदेश यात्रा पर गए, उनके साथ राज्यसभा टीवी की एक के बजाय दो टीमें भेजी जाती थीं.

भाई कौन सा पैसा अपनी जेब से जा रहा था. पीएम मोदी की विदेश यात्रा से मीडिया इसीलिए तो चिढ़ा रहता है, क्योंकि वो पत्रकारों को अपने साथ ले जा कर मौज नहीं करवाते. इसके अलावा राजयसभा टीवी में नौकरी कर रहे पत्रकारों ने जनता के पैसों से विदेशों में पढ़ाई और स्कॉलरशिप पर भी खूब ऐश की. इन पत्रकारों में दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय, द वायर के एमके वेणु,  कैच के भारत भूषण, इंडियास्पेंड.कॉम के गोविंदराज इथिराज और उर्मिलेश जैसे नाम थे. ये सभी कांग्रेस के तनखैया पत्रकार माने जाते रहे हैं.

कांग्रेस का ‘आखिरी घोटाला’ !                                           
राज्यसभा टीवी घोटाले को कांग्रेस का आखिरी घोटाला कहा जा सकता है, क्योंकि 2014 में सत्ता जाने के बाद राज्यसभा वो आखिरी संस्था थी जिस पर कांग्रेस का कब्जा बना रहा. अगस्त 2017 में हामिद अंसारी के रिटायर होने के बाद ये कब्जा खत्म हुआ. इस दौरान उनकी अगुवाई में राज्यसभा में कांग्रेस के चाटुकार पत्रकारों की गतिविधियां हमेशा विवादों के साये में रहीं. इस टीम में कांग्रेसियों के अलावा बड़ी संख्या में वामपंथी और जिहादी सोच वाले पत्रकार शामिल थे. जिन्होंने सत्ता की मलाई का जमकर मजा उठाया.

मगर अब तो जांच शुरू हो गयी है. पोल-पट्टी भी खुलेगी. दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. इसके बाद क्या होगा हम आपको अभी से बताये देते हैं. कांग्रेस इसे राजनीतिक साजिश बता देगी. हामिद अंसारी क्योंकि मुस्लिम समुदाय से आते हैं, लिहाजा इसे मुस्लिम समुदाय से जोड़ दिया जाएगा, इसकी कोशिश वो पहले भी कर चुके हैं. वामपंथी पत्रकारों की फ़ौज, जिन्होंने कांग्रेस के वक़्त खूब ऐश की थी, अपनी वफादारी निभाते हुए बीजेपी और पीएम मोदी पर टूट पड़ेंगे.

टीवी की स्क्रीन काली कर दी जायेगी. कोंग्रेसी चमचे खैरात में मिले अपने-अपने अवार्ड वापस करने के लिए लाइन लगा लेंगे. दिग्विजय सिंह सरीखे नेता इसके पीछे आरएसएस का हाथ बताएँगे. कोंग्रेसी गैंग इसे लोकतंत्र पर हमला बताएगा और मोदी को तानाशाह कहा जाएगा. इस मामले से मीडिया का ध्यान हटाने के लिए किसी छोटी सी खबर का हव्वा बनाकर जनता के सामने परोस दिया जाएगा।
क्या आप इस भड़का हिस्सा बनना चाहते हो।अगर हा, तो इसे ओर फैलाने जिम्मेदारी सभी की हैं।आप भी इसे आगे शेर करेंगे।

Saturday, July 8, 2017

रोल नंबर:56


आज से कुछ साल पहले फिल्म आई थी!नाना पाटेकर ने अभिनय किया!एक अनूठी फिल्म थी!
उस फिल्म का नाम था, अब् तक 56!आज जो में बात करने जा रहा हूँ उस फिल्मका नाम हैं 'रोल नंबर 56'ऐ फिल्म ऐसे बच्चों के लिए हैं जो पढ़ाई छोड़ देते हैं!
कई लाख बच्चे ऐसे हैं जो पढाई छोड़ते हैं!सावल ये हैं कि पढाई छूट क्यां जाती हैं!
कई सारी इंटरनॅशनल फिल्म फेस्टिवल में इसे चुना गया था!कई सन्मान भी इस फिल्म और इसके किरदार को मिले हैं!कोई प्रस्थापित कलाकार नहीं हैं!फिरभी यह कहानी हमे पकड़के रखेगी!
आप से अनुरोध हैं कि...
जिनके बच्चे पढते हो!
जो शिक्षा से सीधे या किसीभी प्रकार से जुड़े हो!
प्लीज... आप ऐ फिल्म देखें!