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Sunday, November 12, 2017

एक इतिहास...

कुछ दिन खास हैं।
कुछ दिन खासम खास हैं।
आप एक कैलेंडर के पेज को देख रहे हैं।कहा जाता हैं कि इतिहास उन्हीका लिखा जाता हैं,जो विजेता होते हैं।काला बाजारी को रोकने के लिए श्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंधी करवाई।लंबी योजनाओं को हम शार्ट टाइम में नहीं नाप सकते।वैसा कुछ आज दिख रहा हैं।आज कैलेंडर बनाने वाली किसी कम्पनी ने अपने कैलेंडर में आज के दिन को खास दिन माना हैं।
देखते हैं।आगे आगे क्या होगा।आज में बाबूजी महाराज का शुक्रिया अदा करूँगा जिन्होंने मुजे आए फोटो भेजा हैं।कुछ दिन हमे पुराने अच्छे लगते हैं।जे.कृष्णामूर्ति कहते थे के पुराने दिनोंमें से अच्छी बातें हमे याद रखनी चाहिए।और बुरी चीजे फिरसे अपने जीवन में न आये वैसा होना चाहिए।मगर हमे आज ही अपने कर्मो का फल चाहिए।
मेने एक कहानी लिखी थी।कहानी में था...'भगवान मयजे धीरज चाहिए ,मगर आज ही'।आज आम का पेड़ लगाएंगे तो आज ही आम मिलेंगे क्या।आज अगर कोई बच्चा साइकल सिखते समय चोट खाता हैं तो क्या उसे साइकिल नहीं सिखानी?
देखेंगे...
समजे गे...
#नोटबंदी

Monday, October 9, 2017

राज्यसभा Live...


कोई कहेगा।भावेश ने भाजपा के लिए लिखा।कोई कहेगा आर.एस.एस का चमचा।में इतनी बड़ी व्यक्तिभी नहीं हुन की कोई भी मुजे मुसलमान विरोधी कहे।ये सन्मान कमाने के लिए बहोत कुछ गवाना पड़ता हैं।वो में अब गवाना नहीं चाहता।में राजकीय टिप्पणी नहीं करता मगर आज की बात संवैधानिक हैं।सो मयजे हुआ आपको जानकारी शेर करू।
आपको मालूम होगा कि राज्यसभा ओर लोकसभा में जीवंत प्रसारण के लिए दो स्पेशियल चेनल हैं।राज्यसभा के सभापति उप राष्ट्रपति होते हैं।कहते हैं कि राष्ट्रपति से अधिक कार्य उपराष्ट्रपति को करना पड़ता हैं।उन्हें राज्यसभा के संचालन की संवैधानिक जिम्मेदारी मिलती हैं।उपराष्ट्रपति की तनख्वा नही हैं।उन्हें राज्यसभा के संचालन की पगार मिलती हैं।अब आगे क्या हुआ उस बात को समझने के लिए आप निम्न जानकारी को पढ़े।

हामिद अंसारी:

आपको याद ही होगा कि पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को जाते-जाते भारत में मुस्लिम असुरक्षित लगने लगे थे. उन्होंने इस बात का जिक्र भी किया था. जिसके बाद हमने खुलासा करके बताया था कि कैसे हामिद अंसारी के कार्यकाल के दौरान राज्यसभा टीवी के नाम पर करोड़ों रुपयों की लूट की गयी और अब उन्हें पकडे जाने का डर सताने लगा है. अब इस लूट की जांच के आदेश दे दिए गए हैं.

अंसारी के कगमचो पर संकट 

नए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने घोटालों की इन रिपोर्ट्स पर संज्ञान लेते हुए राजयसभा टीवी में हुए पूरे खर्च का ईमानदारी से ऑडिट कराने को कहा है. यह जानकारी सामने आई है कि 2011 में राज्यसभा टीवी शुरू होने से लेकर अब तक इस पर 375 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. इतना ज्यादा बजट तो बड़े-बड़े प्राइवेट चैनलों का भी नहीं होता.

इस चैनल को राज्यसभा की कार्यवाही दिखाने के लिय शुरू किया गया था, लेकिन भ्रष्टाचार और लूट का आलम देखिये कि हामिद के करीबियों को नौकरियाँ बाँट दी गयी. राजयसभा टीवी सीधे उप-राष्ट्रपति के अंडर ही आता है. हद तो तब हो गयी, जब इस चैनल ने बाकायदा कमर्शियल फिल्मों का प्रोडक्शन भी शुरू कर दिया था और इसके लिए प्राइवेट प्रोड्यूसर को बिना किसी औपचारिकता के करोड़ों रुपये दे दिए.

 जनता के पैसों की ‘महालूट’
नए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने इस बात पर हैरानी जताई है कि राज्यसभा टीवी के फंड से 12.50 करोड़ रुपये एक कमर्शियल फिल्म ‘रागदेश’ बनाने के लिए दे दिए गए. ये तो सरासर गलत है. फिल्म बनाने के बाद फिल्म के प्रमोशन इत्यादि के नाम पर भी काफी लूट की गयी. इस फिल्म का प्रोड्यूसर राज्यसभा टीवी को नहीं, बल्कि इसके सीईओ गुरदीप सप्पल को बनाया गया. मानो फिल्म के लिए पैसे उन्होंने अपनी जेब से दिए हों.

गुरदीप सप्पल हामिद अंसारी के ओएसडी भी थे. जनता के पैसों से बनी इस फिल्म में दिग्विजय सिंह की दूसरी पत्नी अमृता राय को बतौर हीरोइन लिया गया. राजयसभा टीवी को चलाने के लिए संसद भवन के बाहर एक जगह किराये पर ली गई थी, जिसका किराया 25 करोड़ रुपये था. ये अपने आप में एक बड़ा घोटाला है. इसके अलावा 3.5 करोड़ रुपये कर्मचारियों को लाने-ले-जाने के लिए कैब सर्विस पर फूंक दिए गए. मतलब जहाँ-जहाँ से हो सकता था, वहां-वहां से लूट की गयी.

कांग्रेसी पत्रकारों पर लुटाए पैसे !
कोंग्रेसियों की ख़ास बात ये भी है कि सभी मिल-बाँट के खाते हैं. बिकाऊ मीडिया का भी ख़ास ख़याल रखते हैं. राजयसभा टीवी की लूट में भी पत्रकारों का ख़ास ख्याल रखा गया.कांग्रेस के वफादार पत्रकारों को राजयसभा टीवी में गेस्ट एंकर बनाकर हर महीने लाखों रुपये बांटे गए. इसके अलावा हामिद अंसारी जितनी बार भी विदेश यात्रा पर गए, उनके साथ राज्यसभा टीवी की एक के बजाय दो टीमें भेजी जाती थीं.

भाई कौन सा पैसा अपनी जेब से जा रहा था. पीएम मोदी की विदेश यात्रा से मीडिया इसीलिए तो चिढ़ा रहता है, क्योंकि वो पत्रकारों को अपने साथ ले जा कर मौज नहीं करवाते. इसके अलावा राजयसभा टीवी में नौकरी कर रहे पत्रकारों ने जनता के पैसों से विदेशों में पढ़ाई और स्कॉलरशिप पर भी खूब ऐश की. इन पत्रकारों में दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय, द वायर के एमके वेणु,  कैच के भारत भूषण, इंडियास्पेंड.कॉम के गोविंदराज इथिराज और उर्मिलेश जैसे नाम थे. ये सभी कांग्रेस के तनखैया पत्रकार माने जाते रहे हैं.

कांग्रेस का ‘आखिरी घोटाला’ !                                           
राज्यसभा टीवी घोटाले को कांग्रेस का आखिरी घोटाला कहा जा सकता है, क्योंकि 2014 में सत्ता जाने के बाद राज्यसभा वो आखिरी संस्था थी जिस पर कांग्रेस का कब्जा बना रहा. अगस्त 2017 में हामिद अंसारी के रिटायर होने के बाद ये कब्जा खत्म हुआ. इस दौरान उनकी अगुवाई में राज्यसभा में कांग्रेस के चाटुकार पत्रकारों की गतिविधियां हमेशा विवादों के साये में रहीं. इस टीम में कांग्रेसियों के अलावा बड़ी संख्या में वामपंथी और जिहादी सोच वाले पत्रकार शामिल थे. जिन्होंने सत्ता की मलाई का जमकर मजा उठाया.

मगर अब तो जांच शुरू हो गयी है. पोल-पट्टी भी खुलेगी. दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. इसके बाद क्या होगा हम आपको अभी से बताये देते हैं. कांग्रेस इसे राजनीतिक साजिश बता देगी. हामिद अंसारी क्योंकि मुस्लिम समुदाय से आते हैं, लिहाजा इसे मुस्लिम समुदाय से जोड़ दिया जाएगा, इसकी कोशिश वो पहले भी कर चुके हैं. वामपंथी पत्रकारों की फ़ौज, जिन्होंने कांग्रेस के वक़्त खूब ऐश की थी, अपनी वफादारी निभाते हुए बीजेपी और पीएम मोदी पर टूट पड़ेंगे.

टीवी की स्क्रीन काली कर दी जायेगी. कोंग्रेसी चमचे खैरात में मिले अपने-अपने अवार्ड वापस करने के लिए लाइन लगा लेंगे. दिग्विजय सिंह सरीखे नेता इसके पीछे आरएसएस का हाथ बताएँगे. कोंग्रेसी गैंग इसे लोकतंत्र पर हमला बताएगा और मोदी को तानाशाह कहा जाएगा. इस मामले से मीडिया का ध्यान हटाने के लिए किसी छोटी सी खबर का हव्वा बनाकर जनता के सामने परोस दिया जाएगा।
क्या आप इस भड़का हिस्सा बनना चाहते हो।अगर हा, तो इसे ओर फैलाने जिम्मेदारी सभी की हैं।आप भी इसे आगे शेर करेंगे।

Saturday, July 8, 2017

रोल नंबर:56


आज से कुछ साल पहले फिल्म आई थी!नाना पाटेकर ने अभिनय किया!एक अनूठी फिल्म थी!
उस फिल्म का नाम था, अब् तक 56!आज जो में बात करने जा रहा हूँ उस फिल्मका नाम हैं 'रोल नंबर 56'ऐ फिल्म ऐसे बच्चों के लिए हैं जो पढ़ाई छोड़ देते हैं!
कई लाख बच्चे ऐसे हैं जो पढाई छोड़ते हैं!सावल ये हैं कि पढाई छूट क्यां जाती हैं!
कई सारी इंटरनॅशनल फिल्म फेस्टिवल में इसे चुना गया था!कई सन्मान भी इस फिल्म और इसके किरदार को मिले हैं!कोई प्रस्थापित कलाकार नहीं हैं!फिरभी यह कहानी हमे पकड़के रखेगी!
आप से अनुरोध हैं कि...
जिनके बच्चे पढते हो!
जो शिक्षा से सीधे या किसीभी प्रकार से जुड़े हो!
प्लीज... आप ऐ फिल्म देखें!