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Friday, October 5, 2018

संकल्प ओर सफलता


जीवन-निर्माण के प्रत्येक क्षेत्र में संकल्प शक्ति को विशिष्ट स्थान मिला है। यों प्रत्येक इच्छा एक तरह की संकल्प ही होती है, किन्तु तो भी इच्छायें संकल्प की सीमा का स्पर्श नहीं कर पातीं। उनमें पूर्ति का बल नहीं होता, अतः वे निर्जीव मानी जाती हैं। वहीं इच्छायें जब बुद्धि, विचार और दृढ़ भावना द्वारा परिष्कृत हो जाती हैं तो संकल्प बन जाती हैं। ध्येय सिद्धि के लिये इच्छा की अपेक्षा संकल्प में अधिक शक्ति होती है। संकल्प उस दुर्ग के समान है जो भयंकर प्रलोभन, दुर्बल एवं डाँवाडोल परिस्थितियों से भी रक्षा करता हैं और सफलता के द्वार तक पहुँचाने में मदद करता है। शास्त्रकार ने “सकल्प मूलः कामौं” अर्थात् कामना पूर्ति का मूल-संकल्प बताया है। इसमें संदेह नहीं है, प्रतिज्ञा, नियमाचरण तथा धार्मिक अनुष्ठानों से भी वृहत्तर शक्ति संकल्प में होती है।
महान विचारक एमर्सन ने लिखा है, “इतिहास इस बात का साक्षी है कि मनुष्य की संकल्प शक्ति के सम्मुख देव, दनुज सभी पराजित होते रहे हैं।”

सरकुम:
बस, आप खुश ओर हमे होश रहे...

Wednesday, September 19, 2018

स्किल ओर खोज


हरेक के पास स्किल का होना असंभव हैं। स्किल के लिए महेनत ओर लग्न से शुरू करते हुए उसके पीछे आयोजन पूर्वक श्रम करना पड़ता हैं।

कुछ दिनों पहले की बात हैं। त्रिपदा इंटरनेशनल स्कूल में मुजे जाना था। जैसे गाड़ी पार्क कर के मुजे गेट से एंटर होना था। एक व्यक्ति ने हमे रोका। उन्होंने मेरा नाम और किसे मिलना हैं,जैसे सवाल किए। मुझसे बात करते समय वो अपने हाथ में कुछ कर रहे थे।
मेने भी उनसे बात की।
वो चोक से गणेश जी की मूर्ति बना रहे थे।बहोत कम समय में वो एक मूर्ति बना लेते हैं। त्रिपदा स्कूल के सिक्योरिटी जवान जो करते थे। में देखता रह गया। जैसे में स्कूल में जाने को था,की जैसे मुजे गणेश जी ने दर्शन दिए। में खुश हुआ। आप उनकी बनाई मूर्तिया देख सकते हैं।

संपर्क:
जितेंद्र राजपूत
जवाहर चोक, साबरमती।
अमदावाद:5
Phone no: 
9824598650


@#@
स्किल को खोजने में नजर चाहिए।
नजर में कुछ और आता हैं तो स्किल नजर नहीं आएगी।
आप को नजर ओर नजरिया दोनो बदलने पड़ेंगे तो ही आगे सफलता मिलेगी।

Wednesday, September 12, 2018

GRFR ओर 7रंगी स्किल..

जब कुछ शुरू करते हैं। उस वख्त लगता हैं ये कैसे होगा। मगर नेकी ओर लगन से कुछ काम करने शुरू होते हैं तो आजही बढ़ते होते हैं।
पिछले कुछ सालों से में बच्चों के कीर्तिमान के लिए में कुछ करने के बारे में सोच रहा था।काम भी किया। सारे काम खत्म किये आज से 2008 से मेरे दोस्त और मुजे एशिया इर गिनिस रिकार्ड तक पहुंचाने वाले मनमोहन जी का जैसे मुजे सहकार मिला।उनके साथ अब हम नेशनल किड्स रिकॉर्ड के लिए जुड़ेंगे।
कुछ दिनों से हम आपसमें बात कर रहे थे।कल पूरे दिन उस काम से जुड़े रहने के बाद उनसे मेरी वार्ता हुई।
अब 7रंगी स्किल के GRF से जुड़कर ग्लोबली स्किल्ड बच्चो को खोजने का काम करेंगे। कुछ दिनों में इस बात को हम ओन पेपर ले रहे हैं। दोनो कंपनियों के  करार करके हम आगे बढ़ेंगे। यहां तक पहुंचने में अभी चार महीने लगेंगे। मगर बगैर लिखे हम इस काम को 2008 से श्री मनमोहन जी के मार्गदर्शन में सिखाते आये हैं।अब उनसे जुड़कर आगे बढ़ेंगे।

आशा हैं।
आप समजेंगे।
करने वाले बहोत हैं।
दौड़ने वाला में अकेला।
कुछ कमियां होगी हमारी सोच में, इरादे कोई कमजोर नहीं हैं।सो आप दुनिया में कही से भी कुछ भी सजेश करेंगे तो हम उसे अवश्य मानेंगे।


@#@
मेरी सोच हैं कि
स्किल वाले बच्चे स्किल से कमाए,ओर शिक्षा के माध्यम से रोजगारी के बजाय स्किल से रोजगार प्राप्त करें...

@आमीन

Tuesday, July 3, 2018

साथ चलो...संघ चलो...

गांधीजी
सरदार पटेल
जवाहरलाल नेहरू
सुभाषचंद्र बोझ ओर शहीद भगतसिंह।ये ऐसे नाम हैं जिन्हें हम नेता के रूप में देखते ओर समझते आये हैं।आज कल नेता यानी सबसे सफेद कपड़ो के साथ  महंगी गाड़ी में गुमने वाली व्यक्ति जिस के पास सिर्फ नेता होने का ड्रेस कोड ओर कुछ प्राथमिक जानकारी हैं जिसे वो दिखा सके।अब होता ये हैं कि हम मानते हैं कि नेता जो होता हैं वो कहे वैसे करना हैं।
मगर ऐसा नहीं हैं।
बापु या सरदार ने कभी किसी को कोई रास्ता दिखाया नहीं कि आप ऐसा करो।उन्हों ने वो रास्ता देखा और उसके ऊपर वो चले।अगर बापु कुछ भी न करते तो वकील का काम करके वो पूर्ण वस्त्र पहन सकते थे।
भूटान के एक दोस्त का मेल आया।उसने कहा 'में मेरी स्कूल में नेतृत्व के लिए कुछ काम करना चाहता हु।में क्या करूँ?मेने कहा आप के दिल में जो ख्वाइश हैं,उसे आप आचरण में डाले।बच्चे अध्यापक या गुरु की नकल करते हैं।जब छोटे बच्चे घर आकर टीचर टीचर खेलते हैं तब उनके टीचर को वो फॉलो करते हैं।टीचर उनके लिए ज्ञानी ओर मार्गदर्शक हैं।टीचर जो ओर जैसे करते हैं,बच्चे वैसे ही करते हैं। एक टीचर की जर्नी से बच्चे जुड़ते हैं तो वो टीचर जैसा बनते हैं।
बस,लीडरशिप में ऐसा ही कुछ हैं,किसी को फॉलो करने के लिए दबाव नहीं डालना हैं,उन्हें हमारी जर्नी में जोड़ना हैं।

@#@
हमे भी किसी को फॉलो नहीं करना हैं,उस व्यक्ति को जानने के लिए उसकी जर्नी से जुड़ना हैं।बाद में तय करें कि...

Sunday, June 10, 2018

कौशल्यो का संग्रह...


आज कल स्किल का जमाना हैं।कुछ साल पहले ऐसा नहीं था।कोई भी व्यक्ति किसी भी पदवी को प्राप्य करता और उसे काम मिल जाता था।कुछ सालों से हम देख रहे हैं कि हमारी सरकार और हमारा समाज भी स्किल वाले दामाद या बहु खोज रहे हैं।
मेरा सबसे पहला रिकॉर्ड 2008 में हुआ।वो लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड था।मुजे कहानिया लिखने के लिए आए सन्मान मिला था।उसके बाद 2014 तक तो मैने गिनीज़ बुक ऑफ रिकोर्डमें मेरा नाम दो बार दर्ज करवा लिया।
मेरे रिकॉर्ड के बाद मुजे अहसास हुआ कि क्यो न बच्चो के स्किल को एक रिकॉर्ड बुक के स्वरूप में बनाया जाय।
2015 में जब मुजे ब्रिटिश काउंसिल से मानद डॉक्टर्ड का सन्मान मिला तो अहसास हुआ कि संयुक्ताक्षर के बगैर कहानी लिखने का अगर मुजे इतना सन्मान मिला तो क्यो न में बच्चो से जुड़े काम को आगे बढाने का काम न करू।
ऐसा सोच कर मेने भारत के बच्चो के कौशल्य को खोजने का ओर उसे प्रकाशित करने का ठान लिया।मेने उसके लिए जानकारी इकट्ठा की हैं।सारे देश में क्रिएटीविटी वर्कशॉप करते हुए ऐसे बहोत सारे बच्चो को मैने खोजा हैं।
आप से अनुरोध हैं कि किसी भी प्रकारकी नवीनतम कार्य व्यवस्था या स्किल अगर किसी बच्चे में आप देखते हैं तो कृपया इस जानकारी को आप मुजे तक पहुंचाए।
ये किताब साल में एक बार छपेगी।हम उसे 12 दिसम्बर को लॉन्च करेंगे।इस काम के लिए पिछले 6 महीनों से मैने संपर्क अभियान ओर खोज का काम किया हैं।जैसे रिकॉर्ड बुक में नवीनतम रिकॉर्ड ओर रोचक बातें छपती हैं,वैसे ही यहाँ बच्चो के बारे में ये जानकारी छपेगी।

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मेघालय ओर उत्तराखंड जैसे भारत के कुछ प्रान्तों में हमने हमारे प्रतिनिधि की  घोषणा भी कर दी हैं।पहले चरण में हम गुजरात,राजस्थान और महराष्ट्र के प्रत्येक डिस्ट्रिक्ट में हमारे प्रतिनिधियो की जानकारी आपशे शेर करेंगे। ये स्किल खोजने का काम हैं।उसमें प्रतिनिधि से ज्यादा व्यक्तिगत अवलोकन भी उपयोगी बन सकते हैं।

12 दिसम्बर को आप हमारी साइड को ऑन लाइन देख पाएंगे।आप से अनुरोध हैं जी 12 दिसम्बर 2018 में शुरू होने वाले इस अभियान से आप आजसे जुड़े।

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विचार हमेशा हमारे आगे चलते हैं।उसे पकड़पाना मुश्किल हैं,पकड़कर भी आप उसे ठहरा नहीं सकते हैं।इसका एक अर्थ ये हैं कि हम विचारों को समजीए ओर वैसे आगे बढ़े।