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Thursday, June 14, 2018

कुछ खास


कुछ खास हैं,क्यो की वो हमारे आसपास हैं।हम बहोत सारी चीजें ऐसी देखते हैं कि जिस की वजह से हमे उसे बार बार याद करने का मन करता हैं।कुछ बाते ऐसी होती हैं जो हमे कुदरत के करिश्मो की तरह होती हैं।
आज का ये फोटो भी वैसा ही हैं।एक बच्चा स्कूल बैग के साथ निकला हैं, उसने जैसे सूरज को अपने पैरों के नीचे पकड़ लिया हैं।
अगर सूरज सिद्धि हैं तो वो बच्चा एक प्रयत्न कर्ता हैं।हो सकता हैं ये फोटो खींचने के लिए समय और समझ को खर्चा होगा एमजीआर उसका संदेश अच्छा मिलता हैं।आप भी ऐसे फोटोग्राफ हैं तो मुझतक पहुंचाए।आप के फोटो के लिए फोटो लाइन लिखके 'Bee The Change' में शेर करेंगे।

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आज की ये पोस्ट आप के सहयोग के लिए हैं।रोज लिखना पसंद हैं मगर कभी कभी विषय नहीं मिलता।मुजे या मुझसे लिखवा ने के लिए सहयोग करें।

Friday, April 27, 2018

दुआ ओर ख़ुशी



ऐसी कोई चीज हैं जो बाटने से बढ़ती हैं।हम कहेंगे ज्ञान।जी हाँ, ज्ञान ऐसा हैं जो बाटने से बढ़ता हैं।आज मेरे दोस्त अवनीश जी ने मुजे एक पोस्टर भेजा। उसमें 2 बाते ऐसी लिखी हैं जो एकदम से अलग हैं।मगर फिरभी वो जानकारी सही हैं।
उन्होंने कहा हैं कि मुस्कुराहट ओर दुआ ऐसी चीज हैं,जो बाटने से बढ़ती हैं।मुस्कुराहट तब आती हैं,जब हम खुश होते हैं।तब हम किसी ओर को भी खुशी दे सकते हैं।में अगर किसी ओर की बजह से खुश हूं तो इसका मतलब सीधा ये होता हैं,की मुझेभी किसी को खुश करना चाहिए।
दूसरी दुआ...

मेरी दुआ आप के साथ हैं।
किसी ने कहा हैं कि दुआओ मेण्याद रखना।हमे मालूम हैं कि ज्यादातर हम दुआ अपने लिए या अपनो के लिए मांगते हैं।में भी मेरे अपनो को खुश देखना चाहता हूं।उनके लिए दुआ करना चाहता हूं और करता हूँ।आप भी ज्ञान को छोड़ के ऐसी दो नई बातो को फेल सकते हैं,जिससे आपका जीवन भी आगे बढ़ेगा।

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मुस्कुराहट...आप की बढ़ेगी क्योकि आप के पीछे किसी की दुआ होगी।आप के पीछे जिनकी दुआ होगी उनकी खुशी की जिम्मेदारी आपकी होगी।

Friday, March 30, 2018

Ssa or भावी आयोजन

केंद्रीय स्तर पर SSA और RMSA एक हो गए। कार्यक्रम हुआ सबको शिक्षा अच्छी शिक्षा। ये कार्यक्रम नर्सरी से 12 वीं तक होगा लागू।

मंत्रिमंडल ने 1 अप्रैल, 2018 से मार्च, 2020 के लिए नई एकीकृ‍त शिक्षा योजना बनाने को मंजूरी दी 

 प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल  समिति ने 01 अप्रैल 2018 से 31 मार्च, 2020 के लिएनई एकीकृत शिक्षा योजना बनाने के स्‍कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग क ेप्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्‍तावित योजना में, सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए), राष्‍ट्रीय माध्‍यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) और शिक्षक शिक्षण अभियान समाहित होंगे। 
प्रस्‍तावित योजना के लिए 75 हजार करोड़ रूपए मंजूर कियेगये है। यह राशि मौजूदा आवंटित राशि से 20 प्रतिशत अधिक है।

      प्रस्‍तावित योजना प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के ‘सबको शिक्षा, अच्‍छी शिक्षा’ के विज़न के परिप्रेक्ष्‍य में लाई गई है तथा इसका लक्ष्‍य पूरे देश में प्री-नर्सरी से लेकर बारहवीं तक की शिक्षा सुविधा सबको उपलब्‍ध कराने के लिए राज्‍यों की मदद करना है।

योजना की प्रमुख विशेषताएं :

योजना का मुख्‍य उद्देश्‍य शिक्षा के क्षेत्र में सतत विकास के लक्ष्‍यों के अनुरूप नर्सरी से लेकर माध्‍यमिक स्‍तर तक सबके लिए समान रूप से समग्र और गुणवत्‍ता युक्‍त शिक्षा सुनिश्‍चित करना है। 
एकीकृत स्‍कूली शिक्षा योजना में शिक्षकों और प्रौद्योगिकी पर ध्‍यान केंद्रित करते हुए स्‍कूली शिक्षा की गुणवत्‍ता को सुधारने पर खास जोर दिया गया है। शिक्षा के सभी स्‍तरों के लिए योजना के मुख्‍य उद्देश्‍य इस प्रकार है :

1. गुणवत्‍ता युक्‍त शिक्षा की व्‍यवस्‍था और छात्रों के सीखने की क्षमता में वृद्धि,

2. स्‍कूली शिक्षा में सामाजिक और लैंगिक असमानता को पाटना,

3. स्‍कूली शिक्षा के सभी स्‍तर पर समानता और समग्रता सुनिश्‍चित करना,

4. स्‍कूली व्‍यवस्‍था में न्‍यूनतम मानक सुनिश्‍चित करना,

5. शिक्षा के साथ व्‍यवसायीकरण प्रशिक्षण को बढ़ावा देना,

6. नि:शुल्‍क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार, 2009 को लागू करने के लिए राज्‍यों की मदद करना तथा,

7. राज्‍यों की शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषदों, शिक्षण संस्‍थाओं और जिला शिक्षण और प्रशिक्षण संस्‍थाओं (डीआईईटी) को शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए नोडल एजेंसी के रूप में सशक्‍त और उन्‍नत बनाना।

प्रभाव :
इस योजना से राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों को अपने उपलब्‍ध संसाधनों के हिसाब से अपनी प्राथमिता तय करने और योजना के प्रावधान लागू करने का अवसर मिलेगा। इससे स्‍कूली शिक्षा के विभिन्‍न चरणों में बच्‍चों के आगे शिक्षा जारी रखने के मामलो में बढ़ोतरी होगी तथा बच्‍चों को अपनी स्‍कूली शिक्षा पूरी करने के लिए सार्वभौमिक रूप से मौकामिलेगा। योजना का उद्देश्‍य बच्‍चों को गुणवत्‍ता युक्‍त शिक्षा उपलब्‍ध कराने के साथ ही उन्‍हें विभिन्‍न तरह के कौशल और ज्ञान में दक्ष बनाना है जो उनके सर्वांगीण विकास के साथ ही भविष्‍य में कार्यजगत में जाने और उच्‍च शिक्षा ग्रहण करने के लिए आवश्‍यक है। योजना से बजटीय आवंटन का बेहतर और मानव संसाधन तथा पूर्ववर्ती योजनाओं के लिए तैयार की गई संस्‍थागत संरचनाओं का प्रभावी इस्‍तेमाल हो सकेगा।

लाभ :

◆ शिक्षा के संदर्भ में समग्र दृष्टिकोण,पहली बार स्‍कूली शिक्षा के लिए उच्‍चतर माध्‍यमिक और नर्सरी स्‍तर की शिक्षा का समावेश,सम्‍पूर्ण इकाई के रूप में स्‍कूलों का एकीकृत प्रबंधन,
◆ गुणवत्‍ता युक्‍त शिक्षा पर ध्‍यान, 
◆ सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने पर जोर,
◆ शिक्षकों के क्षमता विकास को बढ़ाना,
◆ शिक्षक प्रशिक्षण गुणवत्‍ता सुधार के लिए एससीईआरटी जैसे शिक्षक शिक्षण संस्‍थाओं और डीआईईटी को सशक्‍त बनाना,
◆ डीटीके चैनल, डिजिटल बोर्ड और स्‍मार्ट क्‍लासरूम के जरिए शिक्षा में डिजिटल प्रौद्योगिकी के इस्‍तेमाल को बढ़ावा देना,
◆ स्‍वच्‍छ विद्यालय की मदद के लिए स्‍वच्‍छता गतिविधयों की विशेष व्‍यवस्‍था,
◆ सरकारी स्‍कूलों में बुनियादी ढांचे की गुणवत्‍ता सुधारना,
◆ बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओअभियान की प्रतिबद्धता को बढ़ावा देने के लिए, कक्षा 6-8 से लेकर 12वीं कक्षा तक, कस्‍तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का उन्‍नयन,
◆ स्‍कूलों में कौशल विकास पर जोर,
◆ खेलो इंडिया के समर्थन में स्‍कूलों में खेलों और शारीरिक रूप से इस्‍तेमाल किए जाने वाले उपकरणों की व्‍यवस्‍था,
◆ शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े ब्‍लॉकों, चरमपंथ प्रभावित राज्‍यों, विशेष ध्‍यान देने वाले राज्‍यों/जिलों और सीमावर्ती इलाकों औरविकास की आकांक्षा वाले 115 जिलों को प्राथमिकता।

 (@EducationNewsG1): https://twitter.com/EducationNewsG1?s=09
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Tuesday, March 6, 2018

हनी बी नेटवर्क

Honey bee iim innovation डर भवेशपांड्या education record world record
हनी बी नेटवर्क।
मुजे गर्व हैं कि में उससे जुड़े हु।
महाराष्ट्र सोलापुर में कुछ दिनों पहले में गया था।इनोवेटिव टीचर्स का एक फाउंडेशन है।नाम हैं स्टेट इनोवेशन ऐंड रिसर्च फाउंडेशन (SIR) की 12 वी सालगिराह पर वहा जाना हुआ।
हम वहां बैठे थे।एक ब्लेक बोर्डमें कुछ नहीं था।मेरे साथ चेतन पटेल थे।मेने उन्हें कहा बोलो कोनसा चित्र बनाऊ, उसने कहा हनी बी नेटवर्क का सिम्बोल बनाओ।
बस,थोड़ी देरमें सिम्बोल तैयार।उसने फोटो खींचा,मुजे शेर किया।मेने आपको शेर किया।

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कुछ तय करना मुश्किल नहीं हैं।मुश्किल हैं तय हुई चीज को याद करके निभाना।




Thanks
#चेतन पटेल
#हनी बी नेटवर्क
#Love you हनी बी

Tuesday, February 27, 2018

इस्तेमाल ओर इनोवेटर्स



शिक्षा आज महत्वपूर्ण हैं।आधुनिक समय मे शिक्षा के लिए सरकार से समाज और संस्था चिंतित है।आज के दिनोंमें जो शब्द हमे ज्यादा सुनने को मिलता हैं वो शब्द है innovation जिसे हम नवाचार कहते हैं।
शिक्षा में नवाचार की खोज करना  आईआईएम ने शुरू किया था।आज इस बात को 25 साल खत्म हुए हैं।
आज गुजरात में पिछले 3 सालों से स्टेट इनोवेशन फेस्टिवल का आयोजन होता हैं।इस बार का आयोजन पोरबंदर में हुआ।गांधी और सुदामा यहाँ के हैं।राज्य के 165 नवाचार करने वाले शिक्षकों के लिए सांदीपनि आश्रम में स्टेट इनोवेशन फेस्टिवल का आयोजन 26 फरवरी से 1 मार्च 2018 तक हुआ हैं।आज पहली बार ये हुआ हैं कि DIET ने आने नवाचार भेजे हो। 
GCERT गांधीनगर,एस्सार ऑइल ओर सांदीपनि आश्रम के संयुक्त सहयोग और आयोजन से ये फेस्टिवल आज शुरू हुआ हैं।
पोरबंदर DIET के सभी साथी और प्राचार्य श्री अल्ताफ राठौर के मार्गदर्शन से ये फेस्टिवल को चार चांद लगे हैं।
सबसे बड़ी बात ये हैं,जो आप स्क्रीन को देख रहे हैं।148 नवतर कार्य करने वाले नवतर शिक्षकों के बारे में एक किताब लिखी गई।सभी इनोवेटर्स के बारेमें इस पुस्तक में लिखा गया हैं।
डॉ गिजुभाई भराड,श्रीमती ज्योतिबेन थानकी,डॉ टी.एस.जोशी, श्री आई.वी.पटेल और अन्य व्यक्तियो की विशेष उपस्थिति इस किताब को विमोचित किया।कुछ दिनों में ये ये बुक सभी को मिल जाएगा।
 3rd स्टेट फेस्टिवल को सफल बना ने के लिऐ बहोत सारे लोग काम कर रहे हैं।मुजे इस दौड़मे सामिल होने का अबसर प्राप्त हुआ हैं।  मेने इसे दौड़ में किताब बनाई हैं।मेरे साथ ओर भी दस साथी है..!  हम ने मिलकर इसे पूरा किया।उसका विमोचन भी हुआ।
सबसे पहले में GCERT का आभार व्यक्त करता हूँ।एस्सार ओर साई zerox का शुक्रिया।मेरी टीम के लिए मेरे द्वारा सुचित्व किया गया काम सरकार का जैसे हुकुम हो,सभी एक साथ काम पे जुड़े हैं।लास्ट केस मिलने के बाद आज 10 दिनों में ये किताब टीम के सहयोग से हो पाई हैं।
स्टेट इनोवेशन फेस्टिवल का मौका ओर एक अभिनव किताब का विमोचन।
वाह वाह
बहोत खूब।


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Friday, August 25, 2017

मेरे गणेशा...

जय गणेश।
ॐ गं गणपतये नमः
आज गणेश चतुर्थी हैं।मेरे आराध्य गणेश हैं।हमारा घर 'ऋचार्मी' में पिछले कई सालों से गणेश जी आते हैं।इस बार से हमने ऋचार्मी में मिट्टीके गणेश जी लाये हैं।इस बार पहली बार मिट्टी के गणेश जी लाये हैं।हमारे घर मंदिर में दगड़ू जी स्थापित हैं।रोजाना दगड़ू जी की पूजा करते हैं।
हर साल एक गणपति की स्थापना करते हैं।गणपति विसर्जन के दौरान एक साल तक हमारे महेमाम रहे गणेश जी का ऋचार्मी परिवार से विसर्जन होता हैं।
#मेरे दगड़ू
#हमारे दगड़ू

Friday, August 11, 2017

खेल...गीत और मनो मावजत

पिछले कुछ दिनों से कुछ अच्छा हो रहा हैं।बारिश के बाद जो समस्याए सामने आई उसमें एक समस्या विद्यार्थियो की थी।जहां कुदरती आपदा नहीं हैं वो समज नहीं पाएंगे।मगर समजीए।जिसके मा बापू या छिड़े बड़े भाई बहन गुजर गए हैं।किसीका खिलौना या खिलोने ओर अन्य सामग्री तहस नहस हो चुकी हैं।किसीके स्कूल की सामग्री बह चुकी हैं।ऐसे कई सारी बातें ऐसी हैं जिसकी बजह से बच्चों के मन में जैसे कोई डर हैं।उस डरको निकलना आवश्यक हैं।वो निकलने के लिए एक ही व्यवस्था हैं।जिसे GCERT ने शुरू किया हैं।
मेने उस विकल्पमें एक स्कूलमें इस प्रकारकी प्रवृत्ति को बच्चो के साथ किया।हपुजी वपुजी की एक कहानी बच्चो को सुनाई।इस कहानी में गाना... रटना... सुनना...समजना...बोलना...वाह रे वाह।मनो सामाजिक मावजत के माध्यम से मेरी भी मावजत हो पाई।जैसे भूकंप के बाद कच्छ के अलग पहचान बनी वैसी ही बनासकांठा अपनी नई पहचान बना पायेगा।
#आफत एक अवसर
#सन्मान GCERT

Monday, June 12, 2017

સારો દિવસ...હું છું..

એક માણસનો દિવસ બહુ ખરાબ ગયો.
તેણે રાત્રે ઈશ્વર જોડે ફરિયાદ માંડી.

માણસે કહ્યું,
‘ભગવાન, ગુસ્સે ન થાઓ તો એક પ્રશ્ન પૂછું?’

ભગવાને કહ્યું,
‘પૂછ, જે પૂછવું હોય એ પૂછ.’

માણસે કહ્યું,
‘ભગવાન, તેં આજે મારો આખો દિવસ એકદમ ખરાબ શું કામ કર્યો?’

ભગવાન હસ્યા..... 

 પૂછ્યું,
‘પણ શું થયું?’

માણસે કહ્યું,
‘સવારે અલાર્મ વાગ્યું નહીં, મને ઊઠવામાં મોડું થયું...’

ભગવાને કહ્યું,
‘અચ્છા પછી...’

માણસે કહ્યું,
‘પછી મોડું થતું હતું
એમાં સ્કૂટર બગડી ગયું.
 માંડ-માંડ રિક્ષા મળી.’

ભગવાને કહ્યું,
‘અચ્છા પછી...’

માણસે કહ્યું,
‘ટિફિન લઈ ગયો નહોતો, કૅન્ટીન બંધ હતી... 
એક સૅન્ડવિચ પર દિવસ કાઢ્યો. એ પણ ખરાબ હતી.’

ભગવાન માત્ર હસ્યા.

માણસે ફરિયાદ આગળ ચલાવી, ‘મને કામનો એક મહત્વનો ફોન આવ્યો હતો અને ફોન બંધ થઈ ગયો.’

ભગવાને પૂછ્યું,
‘અચ્છા પછી...’

માણસે કહ્યું,
‘વિચાર કર્યો કે જલદી ઘરે જઈ AC ચલાવીને સૂઈ જાઉં, પણ ઘરે પહોંચ્યો તો લાઇટ ગઈ હતી. 
ભગવાન.... 
, બધી તકલીફ મને જ. 
આવું કેમ કર્યું તેં મારી સાથે?’

ભગવાને કહ્યું,
‘જો, મારી વાત શાંતિથી સાંભળ.
 આજે તારી ઘાત હતી.
 મારા દેવદૂતને મોકલીને મેં એ અટકાવી.
 અલાર્મ વાગે જ નહીં એમ કર્યું. સ્કૂટરમાં ઍક્સિડન્ટ થવાનો ભય હતો એટલે સ્કૂટર મેં બગાડ્યું. કૅન્ટીનના ખાવાથી ફૂડ-પૉઇઝન થઈ જાત.
 ફોન પર મોટા કામની વાત કરનાર પેલો માણસ તને મોટા ગોટાળામાં ફસાવી દેત. 
એટલે ફોન બંધ થયો.
 તારા ઘરે સાંજે શૉર્ટ સર્કિટથી આગ લાગત અને તું સૂતો હોત એટલે તને ખબર જ ન પડત. એટલે મેં લાઇટ જ બંધ કરી ! 
હું છુંને..... , 
તને બચાવવા જ મેં આ બધું કર્યું.’

માણસે કહ્યું,
‘ભગવાન, મારી ભૂલ થઈ. 
મને માફ કરો. 
આજ પછી ફરિયાદ નહીં કરું.’

ભગવાન બોલ્યા,
‘માફી માગવાની જરૂર નથી, પરંતુ વિશ્વાસ રાખ કે હું છું.
 હું જે કરીશ, જે યોજના બનાવીશ એ તારા સારા માટે જ હશે.
જીવનમાં જે કંઈ સારું-ખરાબ થાય એની સાચી અસર લાંબા ગાળે સમજાશે. 
મારા કોઈ કાર્ય પર શંકા ન કર, શ્રદ્ધા રાખ.
 જીવનનો ભાર તારા માથે લઈને ફરવાને બદલે મારા ખભે મૂકી દે.

હું છુંને......

Whats aep માં એક મિત્રએ મોકલેલ પ્રસંગ.

Tuesday, March 14, 2017

मजबूरी में भी शिक्षक...

मुझे अब तक यह याद नहीं पड़ता कि कभी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, दोनों ने एक ही दिन एक ही विषय पर सार्वजनिक भाषण दिया हो।

लेकिन इस बार शिक्षक दिवस के मौके पर, इसके एक दिन पहले दोनों ने देश के बच्चों को संबोधित किया। क्या इसका अर्थ यह निकाला जाए कि सरकार को अचानक शिक्षकों या शिक्षा का महत्व समझ में आ गया है और उनकी समस्याओं को लेकर वह बेहद सचेत हो गई है?


आज शिक्षकों की सबसे बड़ी समस्या यही है कि बिना अधिकार के वह केवल कार्यपालिका के आदेशों का पालन करने वाले बने हुये हैं जहां उन्हें केवल आए हुये ऊपर के नियम कानून और फरमान  का पालन भर करना होता है। और सबसे बड़ा अजूबा यह कि हर नीति के फेल होने का भी वह एकमात्र उत्तरदायी भी। ऐसे नकारात्मक माहौल में आपको नौकरी करने वाले ही मिलेंगे, शिक्षक कतई नहीं। 

अफसोस कि न तो पीएम और न ही महामहिम की बातों से लगा कि सरकार के पास शिक्षकों को लेकर कोई ठोस योजना है। प्रेजिडेंट ने अपने बचपन के संस्मरण सुनाए और राजनीतिक इतिहास का पाठ पढ़ाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षक कुम्हार की तरह बच्चों का जीवन संवारता है, उनमें अच्छे संस्कार भरता है। शिक्षकों को महान बताने वाली ऐसी उक्तियां दुनिया भर में सदियों से कही-सुनी जाती रही हैं। भारत में इसके लिए एक दिन तय है, लिहाजा यहां रस्म अदायगी कुछ ज्यादा ही धूमधाम से की जाती है।



जबकि  सचाई यह है कि समय बीतने के साथ आज भारत में शिक्षक के पेशे की प्रतिष्ठा जड़ से खत्म हो चुकी है और इसका जनाजा निकालने में सरकारों की और सरकारी नीतियों की एक बड़ी भूमिका रही है। 

सरकारों  के नजरिए से शिक्षकों की योग्यता कोई मुद्दा नहीं है। उनका चयन और पदस्थापन केवल चुनावी एजेंडा से ज्यादा कुछ नहीं। 

आज कोई बच्चा मजबूरी में भी शिक्षक नहीं बनना चाहता है, आखिर यह स्थिति की ज़िम्मेदारी और जवाबदेही सरकारें लेने को क्यों तैयार नहीं?


कई जगह आज ये सुनने को मिलता हैं की हम कुछ भी करेंगे!शिक्षक नहीं बनेगे!इस विचार के चलते आज कोई पाठ शालामे शिक्षक बन्ने को तैयार नहीं!हां...फिरभी शिक्षक बन्ने के लिए हजारो लाखो उम्मीदवार सरकारी नोकरी की उम्मीद में फॉर्म भरते हैं! क्यों सब सरकारी नोकरी के लिए शिक्षक बनाते हैं! वैसे तो दूसरी नोकरी में दैनिक अपडेट होता हैं! देखा जाए तो शिक्षामे भी अपडेट आवश्यक हैं! मगर वो सालाना करने की व्यवस्था के चलते कुछ सरकारी अब असरकारी नहीं रहा हैं!

सरकारी स्कुलो में कई नवाचार हो रहे हैं! मगर कोई आज ऐसा नहीं बोलते की में शिक्षक बनाना चाहता हूँ!ऐसा क्यों हो रहा है! हमें मालुम हैं फिरबी हम उसका सही सही जवाब नहीं दे सकते हैं! सरकारी स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर और कार्यपालन इतना खराब है कि किसी शिक्षक में पढ़ाई-लिखाई को लेकर कोई स्वत:स्फूर्त प्रेरणा हो तो वह भी दो-चार साल में जाती रहती है। दूसरी तरफ हर तरफ कुकुरमुत्तों की तरह खुल रहे प्राइवेट स्कूल बिना किसी नियम कानून के चलते हैं। बेरोजगारी के मारे हुए जो लोग इनमें टीचर बनने जाते हैं, उनसे प्राय: बेहद कम पैसे में काफी ज्यादा काम कराया जाता है। ऐेसे में उनसे कुछ बेहतर या क्रिएटिव करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

स्कूलों की बजाय अब प्रोफेशनल शिक्षक अब प्राइवेट ट्यूशन लेने या कोचिंग इंस्टिट्यूट में पढ़ाने को ज्यादा तरजीह देने लगे हैं, क्योंकि वहां पैसे ज्यादा मिलते हैं। उच्च शिक्षा की स्थिति इससे कुछ अलग नहीं है। बड़े विश्वविद्यालयों को छोड़ दें, तो प्राय: सभी जगह कुलपति से लेकर शिक्षकों तक की नियुक्ति में कोई न कोई ‘जुगाड़ लिंक’ चलता है। सबसे बुरा हाल तकनीकी शिक्षण संस्थानों का है। प्रोफेशनल कॉलेजों में तो गिनती के प्रोफेसर गेस्ट का चोला ओढ़कर एक साथ कई संस्थानों में पढ़ा रहे हैं।

''कहने का आशय यह है कि सरकारें अगर शिक्षकों और शिक्षा को लेकर वास्तव में चिंतित है तो उसे शिक्षा का एक लंबा अजेंडा बनाकर काम करना ही होगा। नहीं तो शिक्षक दिवस आते रहेंगे, भाषण होते रहेंगे। ''

Tuesday, February 7, 2017

भाषा शिक्षा क लिए...

अगर हमे कोई पूछे के भाषा क्या है?और उसका वैज्ञानिक अध्ययन क्यों जरूरी है! ये आधारभूत एवं महत्त्वपूर्ण
प्रश्न विचारणीय हैं।जीवन और जगत से जुड़ी भाषा मानव जाति की अमूल्य सम्पदा है, उसका स्वायत्त अèययन हमें अपनी पहचान तो देता ही है, साथ ही विश्व में अपनी पहचान बनाने में सहायक और महत्वपूर्ण है।
भाषा को जानना और समाज में उसवेफ सपफल प्रयोग की जानकारी वस्तुत: संप्रेषण ही दृषिटयों से जरूरी है। भाषा वेफ प्रति सजग चेतना और उसकी समझ इसमें सहायक सिहोती हैं क्योंकि भाषा मानव समाज वेफ आंतरिक भेदों की अभिव्यकित का सशक्त और सक्षम माध्यम है। यह भी स्मरणीय है कि अपने प्रयोग में जहाँ भाषा नर्इ सर्जनात्मक संभावनाओं से युक्त लचीली और नव्यता लिए हुए होती है, वहीं मानवीय विशेषता वेफ रूप में भाषा जाति-विशिष्ट और सर्जनात्मक-अनुकरण से युक्त भी होती है। हमारी चिंतन प्रक्रिया, भाव और विचाराभिव्यकित का साथ होने होकर भाषा हमारे भाव जगत और बाहय-जगत वेफ बीच तादात्म्य स्थापित करती है। अपने प्रयोजन में बहुमुखी भाषा मन की सर्जनात्मक तथा व्यवहार की सामाजिक शकित वेफ साथ हमारे सामने आती है। 
सरल शब्दोमे कहा जाये तो भाषा हमारी बात पहुँचाने या किसी की बात को हम तक आने का एक तरीका हैं!कोई एक से अधिक तरीके से अपनी बात रख सकता हैं!कोई कवी अपनी बात चार पंक्तिमे कह जाता हैं!वो हो बात कोई वक्ता दस मिनित्मे भी नहीं समजा सकता!ऐसा क्यों होता हैं!?ऐसा कैसे होता हैं!एक ही बात को क्यों एक समजा सकता हैं और एक नहीं समजा सकता या नही समज सकता!
भाषा वस्तुत: वर्ग, आयु, जाति, धर्म, शिक्षा आदि सभी से नियंत्रित होती है क्योंकि समाज की अपनी व्यवस्था और परिसिथति वेफ अनुकूल ही समाज में प्रचलित स्तर भेद होते हैं। भाषा विज्ञान भाषा की अमूर्त-जटिल तथा उसवेफ प्रयोजनपरक प्रकार्य की समझ में सहायक होता है। भाषा की परिभाषा में भी पक्ष यानी उसवेफ मानव के मुख द्वारा उच्चरित यादृचिछक ध्वनी प्रतीकों की व्यवस्था होने तथा उसवेफ प्रयोजनपरक पक्ष यानी उसवेफ भाषा-समुदाय विशेष वेफ विचार-विनिमय दो पक्षों का समाहार दिखार्इ देता है।
भाषा को अगर शात्रीय रूप से देखा जाय तो हम उसका पहले इस्तमाल करिंगे!बाद में उसके नियम समजा के उसे ग्रहण करवाएंगे!शिक्षा शत्र्मे उसे आगमन निगमन प्रक्रिया कहते हैं!सुनने में और कहानेमे हम ऐसा करना चाहिए!ऐ हो सकता हैं!मगर कोई अपनी बात को अमली कारन का जामा पहना के समजा नहीं पता हैं!अपने विचारो को व्यक्त करने का कौशल्य हम केसे बढ़ा सकेंगे!इस के लिए बच्चो के साथ कैसे काम करना चाहिए?

Sunday, December 11, 2016

में हेंडसम नहीं...मेरे Hand में सम हैं...!

अब्दुल कलाम कहते थे!में भले ही हेंडसम नहीं,मेरे हेंड (हथोमे ) सम (कुछ) हैं!एक किताब में मेने देखा!कुछ ऐसे ही वाक्य के साथ एक अच्छा फोटोग्राफ दिया गया हैं!

आसमे जो आप देख रहे हैं!बहोत खूब लिखा हैं!उसका अनुवाद करके मजा किरकिरा होगा!मगर एक बात तय हैं की कुछ अच्छा लिखा हैं!

कोलकत्ता से मेरे दोस्त सुबोध बाबुभी कभी कभी अच्छा भेजते हैं!ढूँढ़ ते हैं और भेजते हैं!उन्होंने 500 की नोट के बारेमे चलते समय के बारे में कहा की...मेरी बुत पोलिश की दूकान हैं!मुझे आज तक कभी कोई दिक्कत नही आती.मेरे घरमे दिनका खर्च 300 का हैं!में रोज तिनसो रूपए कामके घर चला जाता हूँ!तिनसो मिलने के बाद ज्यादातर वो  काम नहीं करते!भोलू नामके इस छोटेसे पोलिश करने वालेने बदिया बात बताई!उसने कहा: 'अगर घरमे कोई महेमान आने वाले हिं तो थोडा पैसा ज्यादा जरूर पड़ती हैं!मगर मुझे क्या मालूम मगर उस दिन 100 ज्यादा भी मिल जाते हैं !500 और 1000 की बंधी की असर जब वो चलातिथि तब या आज बांध हैं तब भी भोलुको नहीं पड़ा!

जिसके पास ब्लेक का पैसा हैं उसका तो मालूम नहीं!हां,आज जोभी परेशानी हैं वो ऐसे लोगोको हैं जिसके पास जरूरत से ज्यादा पैसा हैं!ब्लेक मणि क्या हैं वो कोई किसी को नहीं समाज सकता!में कर्मचारी हूँ!मे इनकम टेक्ष पे करता हूँ!मेरा कोई करप्शन नहीं हैं!अगर मेने एक फ्लेट लिया!10 लाख का दस्तावेज करवाया!मगर पैसा देना पड़ा 15 लाख! ऐ पांच लाख कर्मचारी के लिए!वाईट इनकम वाले के लिए वाईट में से ब्लेक होनेकी बात हैं!

यहाँ आज में यही लिखूंगा की में मेरे जीवनमे कभी ब्लेक मणि नहीं रखूँगा!आज मेभी सब्जी वाले से उधारमें  सब्जी  लेके आया हूँ!आज जिस तरीके से टेक्नोलोजी आगे बढ़ रही हैं !में मनाता हूँ कुछ महीनो बाद कुछ सेटल होगा! आप और हम ओन  लाइन पेमेंट या नेट पेमेंटके किसी तरीको से पेमेंट करते होंगे!

क्या आप 15 रूपये देके 10 रूपये की प्याज लेंगे?अगर ना तो बिल्डर से ही क्यों ?जरा सोचिए?में ब्लेक का पैसा नहीं रखूँगा!न रखने दूंगा!मगर यहाँ बात ऐ आती हैं की अगर मेरी कोई ओकात हैं और मुझे कोई पैसा दे रहा हैं तो क्या में न कमाऊ?मुझे कोई लिखनेका पैसा देगा तो में वो पेमेट बेन्कमें  लूँगा!और किसीकोभी छोटीसी रकम भी बेंक के माध्यम से दूंगा!थोडा मुश्किल हैं!मगर वो आमदनी को कई ऐसे माध्यम में हम दे सकते हैं जिससे की सरकार हमें बांड भी दे और इंटरेस्ट भी मिले!

क्या हमारा पैसा कहा रखनेसे हमे इनकम में रहत मिलेगी अब आपको जानना हैं!क्या आप अवगत नही हो पाएंगे?चलो एक साथ मिलके देश के विकासमे और अपनी आमदनी में बढ़ावा करे!केश लेस प्रोसेस से खुद चले खुद चलाए!


स्माइल:
अगर कोई गुस मांगे तो उन्हें पैसा एकाउंट पे में चेक लिखके दो....

Thursday, November 10, 2016

राष्ट्रपति भवन और सृष्टि परिवार...

आइआइएम अमदावाद से 2001 से जुडा हूँ! धीरे धीरे अनेक प्रोजेक्ट से जुड़नेका मोका मिला! सृष्टि से 2002 से आज तक जुड़ा हूँ,और जुड़े रहना चाहूँगा! मेने महसूस किया हैं की सृष्टि सिर्फ एक ऑर्गेनाइजेशन ही नहीं एक वैश्विक परिवार हैं!
मुझे राष्ट्रपति पुरस्कार तक पहुचाने से लेकर मुझे दिल्ही स्थित चिल्ड्रन क्रिएटीवीटी और को क्रिएटीविटी एंड इनोवेशन कार्यशाला में पिछले तिन सालोसे जुडनेका और बच्चो के साथ काम करने का मौका दिया हैं!
डॉ. अनिल गुप्ता! मुझे उनसे लगाव हैं क्योकि वो मेरे दादा जी  जैसे दिखते हैं!मगर एक बात और भी हैं की वो खुद काम करते हैं बादमे किसीको सूचित करते हैं!उनके साथ या उनके पास रहके काम करनेका अनुभव ही कुछ अलग हैं!
बड़े समरोह्मे भी छोटी छोटी बतोका सृष्टि परिवार के सभी साथी फोलोप लेते हैं!करते हैं!टिकट के कन्फोरमेशन जेसी बात के लिएभी वो हमारे लिए सुविधा खड़ी करते हैं!सुविधा देते हुए हमें प्यारसे सँभालते हैं!ग्रास रूट से जुड़े हुए लोगोको राष्ट्रपति भवन तक पहुँचना....वाह एक मिशन हैं!में चार सालसे देखता आया हूँ, कई लोग जो अपने गाव के बहार नहीं निकले वो राष्ट्रपति भवन के निमंत्रण से दिल्ही पहुंचे वो बड़ी बात हैं!
ऐसे कई सरे लोगोको जोड़ना,उनकी कदर करना और उन्हें सन्मान देना और दिलवाना बहोत बड़ी बात हैं!सहज और सरल सेक्रेटरी श्री रमेशभाई पटेल! मेरा साथी और दोस्त चेतन पटेल! सागर पंचाल!केयुर पनारा और हिरल जी!वाह क्या टीम थी.जिन्होंने ऐसे कई सरे छोटे बड़े काम किये की जिस के बिना यह काम संपन न हो पता!में इन सबसे और इस वैश्विक परिवार से जुड़ा हूँ इस का मुझे गौरव हैं!

# Thanks Dr ANIL GUPTA Sir

# Thanks chetan patel 

Monday, October 3, 2016

મારો નિર્ણય સાચો છે કે ખોટો....?



એક વિચારકે સરસ વાત કરી છે.તેમને કહ્યું છે કે એક સાચો નિર્ણય લેવામાં લાંબો સમય પસાર કરવા કરતાં એ નિર્ણય એક જ કલાકમાં લઇ લો.સાચું કે ખોટું એક જ દિવસમાં સમજાશે.હિન્ધીના શાયર જહેરીલા એ કહ્યું હતું કે ‘ સોચ ગહરી હો જાયે તો ફેંસલે કમજોર હો જાતે હૈ.’આપણે કેટલીય વખત એવું સાંભળ્યું હોય છે કે ‘આ નિર્ણય ખોટો હતો.મને કહ્યું હોત તો હું આ નિર્ણય ન લેવાની જ સલાહ આપું.

વાત જાણે એમ છે કે કયો નિર્ણય લેવા કોને પૂછવું તે જ નિર્ણય લઇ શકતો નથી.નિર્ણય લેવા માટે મુખ્યત્વે બે પ્રકારની વિગત સામે આવે છે.એક તુરંત નિર્ણય અને બીજો સમય પસાર કરીને લેવાયેલ નિર્ણય.આ બંને પ્રકારના નિર્ણય જ છે.પણ કેવી પરિસ્થિતિમાં કેવો નિર્ણય લેવાય તે બાબત તો નિર્ણય લેનારે જ નક્કી કરવી પડે.

અહી એ કહી શકાય નિર્ણય લેવામાં ક્યારેય મોડું થતું હોતું નથી.હા,એને માટે એમ કહી શકાય કે નિર્ણય લેવાનો હજુ ચોક્કસ સમય આવ્યો નથી.આ ચોક્કસ સમય એ માનસિક વ્યવસ્થા છે.માનસિક રીતે ક્યારેક આપણે કશું સ્પષ્ટ કહી કે કરી શકતા નથી.એ માટે એવું કહી શકાય કે પિતાજીને પપ્પા,બાપુ કે બાપા કહી શકાય પણ માનસિક અને સામાજિક વ્યવસ્થાના ભાગરૂપે આપણે બા...મમ્મી કે માના પતિ એવું કહેતા નથી.એ સંભાળવું પણ યોગ્ય ન લાગે.અને એટલાજ માટે આપણે કેટલીક બાબતોનો આમ જ સ્વીકાર કરીએ છીએ.એવું જ નિર્ણય લેવાની બાબતમાં છે.કેટલીક વખત બોલી શકાય તેવું ન હોવા છતાં આપણે બોલીએ છીએ અને ક્યારેક બોલવાનું બોલતા નથી.બોલનાર બોલતા પહેલાં વિચાર કરે છે.આ વિચાર એટલે નિર્ણય.આ નિર્ણય સાચો કે ખોટો એવું કહેવા માટે ક્યારેય આપણે અધિકૃત નથી.

નિર્ણય માટે નિર્ણય કરનાર જ જવાબદાર રહે છે.અહી એ કહ્હી શકાય કે નિર્ણય ખોટો હોય તો તે અંગે સાચો નિર્ણય લેવાય તે જ એક મહત્વનો નિર્ણય બને છે.નિર્ણય ખોટો હોય તે અલગ બાબત છે પરંતુ પછીથી પણ સાચો નિર્ણય લેવાય તો જ સાચાનો આનંદ પ્રાપ્ત થાય.

નિર્ણય હમેશા પવિત્ર હોય છે.સંગ્રહાયેલું પાણી પવિત્ર નથી.નદીનું વહેતું પાણી કાયમ માટે પવિત્ર હોય છે.વિચાર માટે એવું જ છે.વહેતો વિચાર એટલે સતત બદલાતો વિચાર નહિ.વહેતો વિચાર એટલે સતત આગળ ધપતો વિચાર.એક વખત નિર્ણય લીધા પછી તેમાં આગળ વધવાથી જ વિચાર અંગેની સફળતા પ્રાપ્ત થાય છે.



Sunday, July 3, 2016

ઐતિહાસિક નિર્ણય લીધો.


આખી દુનિયામાં એક સમયે તેનું શાસન હતું. એવું કહેવાતું કે તેની સત્તાનો સૂરજ ક્યારેય અસ્ત પામતો નથી.દુનિયામાં એક હથ્થુ રાજ ચલાવનાર બ્રિટન આજે કટોકટીમાં છે.’યુનાઈટેડ કિંગડમ’ એટલે કે યુ.કે.માં થોડા દિવસ પહેલાં એક ઐતિહાસિક ઘટના બની.
વાત એમ છે કે આજથી તેતાલીસ વર્ષ પહેલાં યુરોપિયન યુનિયન સાથે બ્રિટન જોડાયું હતું.આ સંગઠનમાં અઠ્યાવીસ દેશ હતા.આ બધા જ દેશ એક જ છત્ર નીચે આવ્યા હતા.આપ આ વાંચી રહ્યા હશો ત્યારે બ્રિટન યુરોપિયન યુનિયનનો હિસ્સો રહ્યું નથી.૨૩ તારીખે થયેલ રાષ્ટ્રીય મતદાનમાં પચાસ ટકા કરતાં વધારે લોકોએ બ્રિટનને સંયુક્ત રાષ્ટ્ર્સંગમાંથી છૂટ થવાનો અભિપ્રાય આપ્યો.રાજનીતિ તેને લોકમત માંગ્યો કહેવાય.
બ્રિટનમાં રાણીના નામે સરકારનું સંચાલન ચાલે છે.જનમત સંગ્રહના પરિણામની અસર થઇ.સરકારના વડાપ્રધાન પ્રધાન યુરોપિયન યુનિયનમાં રહેવાની તરફેણમાં હતા.લોકમત કે જનસંગ્રહમાં સરકારના આયોજન અને તેની નીતિના વિરોધમાં ૫૧.૯ ટકા મત પડ્યા.આ કારણે હવે બ્રિટનના વડાપ્રધાન કેમરુન રાજીનામું આપશે.વૈશ્વિક ચલણ એવાં પાઉન્ડમાં છેલ્લા એકત્રીસ વર્ષનો સૌથી મોટો કડાકો જોવા મળ્યો છે.અર્થતંત્રના જાણકારો કહે છે કે આને લીધે ભારતનો રૂપિયો પણ નબળો પડશે.
એક વાત સ્પષ્ટ કરાવી જરૂરી છે બે દાયકામાં અનેક દેશો કે દેશ સમૂહો આ રીતે સ્વતંત્ર થયા છે.પ્રથમ અને બીજા વિશ્વ યુદ્ધ પછી આ પ્રકારની વૈશ્વિક વ્યવસ્થા ઉભી થઇ હતી.જેમ વિશ્વ નજીક આવતું ગયું.આંતર રાષ્ટ્રીય નીતિમાં ધરખમ ફેરફાર થયા. જે દેશો સંયુક્ત રાષ્ટ્ર કે રાષ્ટ્ર્સંઘ સાથે જોડાયા હતા તે આજે,આજની પરિસ્થિતિને આધારે જુદા પડતા થયા છે.લેખની શરૂઆતમાં લખ્યું તેમ બ્રિટનની સરકાર આ જનમત સંગ્રહમાં હારી ગઈ. હવે એકાદ દિવસમાં બધું ગોઠવાઈ જાય તેવું નથી.સંયુક્ત સંગમાંથી બ્રિટન ભલે જનમત ધ્વારા અલગ થવાનું વિચારે.હા,તેને અલગ થવા માટે અને તે માટેની બધી જ પ્રક્રિયા પૂર્ણ કરવા માટે હજુ બે વર્ષ લાગશે.

અહી વાંચકોને એ વાત પણ જણાવી દઈએ કે એકઠા થયેલ અઠ્યાવીસ દેશોની એક સંયુક્ત સરકાર ચાલતી હતી.આ સરકારમાં દરેક દેશના વડા છ મહિના માટે આ સંયુક્ત સરકારના વડા બનતા હતા. સૌની ભાગીદારી પેઢી.આ પેઢીમાંથી હવે બ્રિટન જુદું થયું છે.જોઈએ હવે સમય વિશ્વને કઈ તરફ લઇ જશે.હા,એ નક્કી કે અત્યાર સુધીમાં બંને વિશ્વ યુદ્ધમાં અને વિશ્વના સંચાલનમાં અગ્રેસર એવો એક દેશ આજે કોઈ કારણોથી અલગ થયો છે.કહેવાય કે કોઈનો સૂરજ કાયમી તપતો નથી.

Tuesday, June 21, 2016

બિલ્લા મહારાજની જય.....


 એક બિલાડી.તેને આગળ કોઈ નહિ.બિલાડીની પાછળ પણ કોઈ નહિ.બિલાડી એકલીહતી.બિલાડી જે ઘરમાં રહેતી હતી તે જ ઘરમાં એક ઉંદર પણ રહેતો હતો.એક દિવસની વાત તેઓ જે ઘરમાં રહેતા હતા તે ઘરમાં કથા વંચાવવાનું આયોજન કર્યું હતું.મહેમાનો પણ આવવાના હતા.મહારાજ પણ આવી ગયા અને તેમને કથાની વસ્તુઓ આમતેમ ગોઠવી દીધી.

આ બાજુ ઉંદર આ બધું જોતો હતો.ઉંદર જે જોતો હતો એ બધું જ અને સાથોસાથ ઉંદરને આ બિલાડી જોતી હતી.બિલાડીને હતું જ કે આ ઉંદર બહાર આવશે.એ જેવો બહાર આવશે હું તેને પકડી લઇશ.થયું પણ એવું જ...થોડો સમય પસાર થયો.સૌ મહેમાનોની થોડી રાહ જોવામાં વ્યસ્ત હતા.ઉંદરડો એકદમ દોડતો આવ્યો.એ જેવો કુદીને ભગવા ગયો ત્યાં કથામાં ભગવાનના ફોટા વાળા પાટલાના આસન ઉપર જી પડ્યો.આગળ ઉંદર અને પાછળ બિલાડી.બિલાડી પણ થોડી વાર પછી એ જ પાટલીના મુખ્ય આસન કે પાટ ઉપર ચડી ઉંદર પાછળ ભાગતો થઇ ગયો.

આ બાજુ કથાનું કામ તો સારું થયું.બધાને ગમ્યું. મહેમાન પણ આવીને  બધા જ ગયા.આ તરફ ઉંદર અને બિલાડી જ્યાં થાળીઓ ધોવાતી હતી તે તરફ ગયા.બંને ભૂખ્યા હતા.બંને થાક્યા હતા.તેઓ સામસામે બેસી ખાતા હતા.હા,કોઈ કોઈની નોધ લેતું ન હતું.થોડુક ખાધા પછી જોર આવતા ઉંદર બિલાડીને કહે”આપણે શા માટે લડવું.જો ખાવા માટે જીવવું જરૂરી છે.જીવ હોય તો કોઈ મારી શકે ને.મરેલાને કોણ મારે છે.લાવો પહેલા જીવીએ.શું કામ મારાવવાની કે મારવાની ચિંતા કરીએ?

આમ થોડો સમય પસાર રહ્યો.એક શહેરમાં ફરતા ફરતા બિલ્લા મહારાજની કથાનું આયોજન હતું.સાથે તેમના અંગત સેવક અને કારભારી શ્રી ઉંદરલાલ કાયમ તેમની સાથે રહેતા દર્શાવ્યા હતા.આસ પાસમાંથી તેમના અનેક બીલ્લાડા ભક્તો આ તરફ આવવાના હતા.પોલીસે પણ ખાસ વ્યવસ્થા ગોઠવી હતી.નાના ઉંદરો માટે સીધા મંડપ સુધીની વાહનની વ્યવસ્થા હતી.એક નવો પ્રભાત લાવવાની આશા સાથે તેમના બેનરમાં ‘સત્યનારાયણ ભગવાનના આસન ઉપર બેઠેલ ભક્ત શ્રી બિલાડા દસના મુખે અભય કથા’લખ્યું હતું

એક પત્રકારે પ્રશ્ન કર્યો.આપ કઈ રીતે આવું અનોખું કાર્ય કરી શક્યા.આ સાંભળી બીલ્લારામ કહે: ‘ભૂખ...ભૂખ...ધર્મની ભૂખે અને અને મારા સેવકને આ તક આપી.સૌએ બિલ્લા મહારાજની વાહવાહી બોલાવી.

બોલો બિલ્લા મહારાજની જય....

Tuesday, December 30, 2014

ગાંધીજી અને ચોખ્ખાઈ

આખા દેશમાં સ્વચ્છતા અભિયાન ચાલે છે.આખા દેશમાં અનેક રીતે ઉજવાય છે.કોઈ પ્રેસમાં ફોટા પડાવવામાં આવે છે.કોઈ ખરેખર સેવા કરે છે.મહાત્મા ગાંધી ચોખ્ખાઈ માટે ગણું કહી ચુક્યા છે.તેમના વિશે લખનાર અનેકો એ પણ આ બાબતને કેન્દ્રમાં રાખી લખ્યું છે.આવી અનેક વિગત એકઠી કરી કેટલાંક વિધાનો અહીં મુકું છું.આશા છે આપણે કામ લાગશે.

·         સંયમની શરૂઆત સ્વચ્છતાથી થાય છે.
·         દરેક રીતે ગંદકી જ રાષ્ટ્રનો પ્રથમ દુશ્મન છે.
·         કેળવણીનો પહેલો મુદ્દો વ્યક્તિગત સ્વચ્છતા છે.

·         સ્વછતાનો અમલ કરનાર જ સ્વચ્છતાનો દૂત છે.
·         ધર્મસ્થાન જેવી સ્વચ્છતા રાખવામાં જ ધર્મ શોભે છે.
·         ગંદકી કરનાર પોતાની જાત સાથે પણ ગદ્દારી કરે છે.

·         સ્વચ્છતા રાખનાર દરેક વ્યક્તિ પ્રભુનો પ્રતિનિધિ છે.
·         સુખ પ્રાપ્ત કરવા માટે સ્વચ્છતા પ્રાપ્ત કરવી જરૂરી છે.
·         કર્મયોગ એટલે પોતાની આસપાસનું સ્વચ્છ વાતાવરણ.

·         ગંદકી કોઈ ને ગમતી નથી, છતાં સફાઈ બધાં કરતાં નથી.
·         કોઈ પણ પ્રકારની ગંદકી ફેલાવનાર કોઈનો મિત્ર ન હોઈ શકે.
·         દરેકે સુખની જેમ જ સ્વચ્છતાનું સુખ મેળવવા જાતે જ મથવું પડે.

·         પર્યાવરણ બચાવવા માટેની શરૂઆત સ્વચ્છતાથી જ થઇ શકે છે.
·         આપણું ચોખ્ખાઈ તરફનું દૂર્લક્ષ આપણી સમસ્યાઓનું કેન્દ્ર સ્થાન છે.
·         ગંદકી ફેલાવનાર ને જાહેર ગુહ્નેગાર માની તેનો બહિષ્કાર કરવો જોઈએ.

·         જીવનની સાહ્યભી સ્વચ્છતા,સ્વચ્છતાની સાહ્યભી એટલે નીરોગી જીવન.
·         કપડાંમા ભપકા કરતાં લોકો જ મોટે ભાગે સ્વચ્છતા માટે પ્રતિકૂળ હોય છે.
·         જીવનમાં ધ્યેય જરૂરી છે. દરેકનો પ્રથમ ધ્યેય  ચોખ્ખાઈ જ હોવો જોઈએ.

·         પ્રાર્થનાનું સ્થળ ચોખ્ખું રાખવા કરતાં દરેક સ્થળે પ્રાર્થના થાય તેમ કરવું રહ્યું.
·         આરોગ્યપ્રદ વાતાવરણ એ અભણ અને ભણેલા બંને માટે સમાન અધિકાર છે.
·         ચોખ્ખી હવા,ચોખ્ખું પાણી અને ચોખ્ખો ખોરાક દરેક જીવનો પ્રથમ અધિકાર છે.

·         પોતાને માટે, પોતાનાં હોય કે પોતાનાં ન હોય તેમને માટેની પ્રાર્થના એટલે સ્વચ્છતા.
               જાહેર જીવનમાં દરેકની જાહેર પ્રવૃત્તિની શરૂઆત ચોખ્ખાઈ વડે જ થવી જોઈએ.
·         ભણતરની શરૂઆત શાળામાં અને આરોગ્યનું જતન જન્મ લેતાં જ શરૂં થઇ જાય છે.

·         કોણ કેટલું ચોખ્ખું તે સમજવા માટે વ્યક્તિના ઘરનું આંગણું જોવાથી જ સમજી શકાય.
·         વ્યક્તિ ચોખ્ખું બોલે,ચોખ્ખું લખે અને ચોખ્ખું જીવે એટલું જ મહત્વનું છે વ્યક્તિ ચોખ્ખું રાખે.
·         આરામ અને આરોગ્ય ને ખલેલ પહોંચાડવા માટે ગંદુ વાતાવરણ મોટી અસર છોડી જાય છે.

·         કોઈ આપની સામે ગંદકી ફેલાવે અને આપણે જોઈ રહીએ તે સામૂહિક હિંસાનો એક ભાગ છે.
·         પર્યાવરણ ભલે કુદરતની દેન છે,તેની સુંદરતા ન જળવાય તે માટે આપણે જ જવાબદાર છીએ.
·         સામાજિક,શૈક્ષણિક અને આર્થિક ભિન્નતા વચ્ચે સામ્યતા માત્ર સ્વચ્છતાના વિચારથી જ આવી શકે.

·         જનાવર કોઈ ને સીધું જ નુકશાન કરતુ નથી.માણસ ગંદકી વડે જનાવર ને પણ મુશ્કેલીમાં મુકે છે.
  
   એક પ્રસંગ અહીં યાદ આવે છે.ગાંધજી બિહારમાં હતાં.અનેક કામ માટે તેમણે અહીં રોકાવાનું હતું.લાંબો સમય રોકાવાનું હતું.કસ્તુરબા આખો દિવસ શું કરે?તેમણે બાપુ ને કહ્યું મને કશુંક કામ આપો.હું અહીં કામ કરું.

   બા ની વાત સાંભળી બાપુ કહે: 'તમે અહીં છોકરાં ને ભણાવો.'બા કહે: 'પણ મને તો વાન્ચ્વ્હાતા ય નથી આવડતું.હું તો ગુજરાતી પણ વાંચી શકાતી નથી.આ નવી ભાષા કઈ રીતે શીખવું.બા ની વાત સાંભળી ગાંધી જી કહે: 'જુઓ....શિક્ષણ એટલે કાઈ ભાષા કે અન્ય વિષયનું શિક્ષણ નહિ.પહેલું શિક્ષણ એટલે સ્વચ્છતા.આ વિશે શીખવો એટલે ભણાવ્યું જ કહેવાય.

   આજે મોદીજીના વિચારને અનેક રીતે મૂલવાય છે.મને મોદીજીના વિચારમાં બાપુના વિચારના દર્શન થાય છે.



આ વિચારો કે વિધાન નીચે પૈકીના કેટલાંક પુસ્તકમાંથી લીધા છે.ક્યાંક વાક્ય કે વિગતની રીતે લખવાનો પ્રયત્ન કર્યો છે.
-ગાંધી વિચાર...
- અડધી સદીની વાચન યાત્રા...
- આફ્રિકાનો સત્યાગ્રહ...
- સત્યના પ્રયોગો...
- ગાંધી એટલે કોણ???
- ગાંધી હમારી સોચ...
- ધેટ સ્ટ્રેન્જ લીટલ બ્રાઉન મેન...
લેખક: ફ્રેડ્રરીક બોહ્ન ફીશર ૧૯૩૨(અંગ્રેજ સરકારે આ પુસ્તક પર પ્રતીબંધ મુકીને અટકાવ્યું હતું)
-      પ્રોફાઈલ્સ ઓફ ગાંધી
(અમેરીકાના કેટલાક અતી ખ્યાતનામ લેખકોએ ગાંધીજી અંગે લખ્યું હતું તેનું સંકલન)