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Saturday, September 8, 2018

Thanks वख्त

किसी के जीवन में एक सा समय नहीं होता। भले वो कोई भी क्यो न हो। अपने ओर परायो के बीच हमारा क्या ओर कितना हैं वो समय से मालूम हो जाता हैं।

किसी का समय अकेला अच्छा या बुरा नहीं होता। नहीं ऐसा होना चाहिए। आज के दौर में को अपना हैं और कौन पराया ये सोचना ही नहीं हैं। समय ऐसा आएगा कि अपने पराये की पहचान अपने आप हो जाएगी।

आप दानवो को देखो।
आप देवो को देखो और हमारे आसपास के उदाहरण देखो।सदैव सब का समय समान नहीं होता हैं।चाहे वो भगवान हो या मनुष्य।

अगर एक बार हम किसीको पहचान ले तो ठीक हैं।मगर ऐसा भी न हो कि सामने वाले को पहचान ने के लिए बर्बाद करने का मौका दे या राह देखे। हमे ये सोचना नहीं हैं कि को क्या हैं,हमे ये सोचना हैं कि हमारा क्या हैं।


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वख्त अगर एक सा रहता,
न खुशी मिलती,
न खुश हो पाते।
न गम सामने आते,
न गमगीन कोई बनते।

वख्त एक सा रहता तो अच्छा न था।
क्यो कि हम परायो में से अपनो को खोज नहीं पाते।
@खुद गब्बर

Sunday, September 2, 2018

कृष्ण और जीवन



मुजे हिन्दू होने पर गर्व हैं।
मेरे जीवन को में कृष्ण के करीब देखता ओर समजता हूं। भारतीय संस्कृति के महानायक श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व के जितने रंग हैं उतने और किसी के भी नहीं हैं, कभी माखन चुराता नटखट बालक, तो कभी प्रेम में आकंठ डूबा हुआ प्रेमी जो दुनिया को प्रेम का पाठ पठाता है।

प्रेम को शक से नहीं समर्पण से जितने की सिख कृष्ण देते हैं। अगर कोई हमारी बात मानता हैं तो वो आपका प्रेमी हैं। उसे प्रेम अर्पण करना हमारी जिम्मेदारी हैं।

जरूरत पड़ने पर प्रेयसी की एक पुकार पर सबके विरूद्ध जाकर,अपनो को दूर करकर कृष्ण उसे भगा भी ले जाते है। कभी बांसुरी की तान में सबको मोह लेता है, संगीत से संस्कार तक कि बात कृष्ण हमे समजाते हैं। तो कभी सच्चे सारथी के रूप में गीता का उपदेश देकर दुनिया को नैतिकता और अनैतिकता की शिक्षा देता है। अपने मन की बात सुनाते समय सामने वाला क्या अर्थ निकलेगा वो सामने वाले को ही तय करने दो, जो सच होगा वो ही कहिए ये में नहीं कृष्ण ने कहा था।

ना जाने कितने रंग कृष्ण के व्यक्तित्व में समाए हैं। कृष्ण की हर लीला, हर बात में जीवन का सार छुपा है। कृष्ण के जीवन की हर घटना में एक सीख छुपी है। जो आगे का देख पाते हैं, उनके पास अभी के हालात का विवरण करवाना याने दुःख खड़े करना। संपूर्ण पुरुष माने जाने वाले भगवान श्रीकृष्ण ने जीवन को देखने का एक नया नजरिया अपने भक्तों को दिया। 

कृष्ण की जीवन के लिए महत्व पूर्ण पांच शिक्षाओं को अगर हम आत्मसात कर लें तो परमात्मा के निकट पहुंच सकेंगे.

1. निष्काम स्वधर्माचरणम् : 

बिना फल की इच्छा किए या उस कार्य की प्रकृति पर सोच-विचार किए अपना कर्म करते जाओ। जुड़े हैं तो जुड़े रहेंगे। आगे क्या फल मिलेगा वो अलग बात हैं। कृष्ण के इस काम के लिए कह सकते हैं 'जो हैं उसे देखो, जो होगा उसे देख लेंगे।'

2.अद्वैत भावना सहित भक्ति : 

परमात्मा के प्रति अद्वैत भावना से स्वयं को उस परम शक्ति के हाथों समर्पित कर दो। उसी की भक्ति करो। जिस पे भरोसा रखो उसे निभाओ। अगर आपने किसी को परम् शक्ति मानकर उसे सबकुछ अर्पण किया हैं तो उसके प्रति शंका न करें। कृष्ण के इस उपदेश के लिए हमे ये मानना हैं कि 'कोई शक्ति हैं जो हमे बचाते आ रही हैं,अधर्मियों ने तो कब से शस्त्र सजा रखे हैं। कुछ हैं जो हमे साथ देता हैं, ओर उस भरोसे को मत तोड़ो,उसे समर्पित हो जाओ।

3.ब्रह्म भावना द्वारा सम दृष्टि : 

सारे संसार को समान दृष्टि से देखो। सदैव ध्यान रखो कि संसार में एक सर्वव्यापी ब्रह्म है जो सर्वोच्च शक्ति है। जो आप का विरोध कर रहे हैं वो अक्षम होने का पुरावा दे रहे हैं। हमे बर्बाद करने के सोच वाले लोगो को उनके हाल पे छोड़ दो। वो बेहाल होने पर हैं। उनकी बर्बादी के मौकों को खोजने के लिए हम आबाद होना क्यो छोड़े?हमे किसीभी हाल में आगे जाना हैं।

4.इंद्रीय निग्रहम् और योग साधना : 

इंद्रियों को अपने साधाना पर केंद्रित करो। सभी प्रकार की माया से स्वयं को मुक्त करने और अपनी इंद्रियों का विकास करने का निरंतर प्रयास करते रहो। बिचार,आचार ओर गुस्सा इंद्रियों से ही हैं। अपनो पे गुस्सा याने थोड़ी देर के लिए सामने से खड़ा किया गया दुःख।और परायों पे गुस्से का तो कोई मतलब ही नहीं। क्यो किसी की बातों पे हम अपना जीवन बर्बाद करें।

5.शरणगति : 

जिन चीजों को तुम अपना कहते हो उसे उस दिव्य शक्ति को समर्पित कर दो। वो दिव्य शक्ति यानी बिश्वास ओर विश्वसनीयता। और उस समर्पण को सार्थक बनाओ, जिस के बजह से हम जीवन में आगे जाना तय कर चुके हैं।

आज आप और हम अर्जुन बन कर, अनवरत हर रोज अपने जीवन की महाभारत लड़ रहे हैं। हमारे इस शरीर रूपी रथ में पांच घोड़े जो है वो हमारी पांच ज्ञानेन्द्रिय याने आंख, नाक, कान, जीभ, त्वचा है। यह इन्द्रियां हर वक्त रूप, रस, श्रवन, गंध और स्पर्श में फंस कर भटकने को ललायित रहती है। 

ऐसे में हमारी बुद्धि ही हमारी सारथी का काम करती है और मन के वशीभूत हुए इन चंचल घोड़ों को सही मार्ग पर प्रेरित करने के प्रयास में लगी रहती है। आज हर रोज की भागदौड़ में त्रस्त हुआ मनुष्य जब खुद को असहाय और असहज पाता है तो ऐसे में, श्रीमद्भगवद्गीता एक या ग्रन्थ न होकर मनुष्य को सफलतापूर्वक जीवन जीने की कला सिखाने वाली संजीवनी का काम करती है। 

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कृष्ण को मालूम था।
कृष्ण दार्शनिक थे और भविष्य देख सकते थे। ओर समय आने का इंतजार करवाते थे।

Tuesday, August 28, 2018

जागु : राखी ओर खुशी


राखी का दिन।
भाई और बहन के प्यार का दिन।
बहन भाई की रक्षा के लिए उसे रक्षा कवच बांधती हैं। भाई प्यार से बहन को सन्मान देता हैं। जो भी हो,बहन है तो भाई का जैसे साथ हैं, सहयोग हैं। मेरी बहन पढ़ाई में बहोत तेज थी। नया सीखने में तेज मेरी जागु मुजे समजाने में बहोत सहज हैं। वो कोई भी बात मुजे पूछ सकती है सवाल कर सकती हैं। सवाल वो ही करते हैं जो प्यार करते हैं। वो भी मुजे बेतहाशा प्यार करती हैं। इस रक्षाबंधन के दिन मेने राखी बंधवाई। मेरी भाभी मुजे भी राखी बांधती हैं। मेरे मातृछाया ओर जादूगर के आश्रमघर की सारी बेटियों ने राखी बांधी।
जिससे जो बन पड़ता हैं, बहन को देता हैं। राखी के दिन भाई बहन को देता हैं।मेने दिया मगर इस बार जागु ने लिया नहीं। इस बार उसने कुछ प्यार से मांगा। उसने मुझसे प्यार से जो मांगा हैं वो देनेके लिए मेने सहमति दिखाई हैं।मेने उसे ऐसा ही करने के लिए हां कहा हैं। उसकी खुशी से अधिक मेरे लिए कुछ नहीं हैं।

उसने जो चाहा हैं वैसा ही होगा। क्यो की वो मेरी एकलौती बहन हैं। अगर देखा जाए तो उसने जो मांगा हैं, मेरी ओर मेरे परिवार के लिए खुशी से जुड़ा हैं। उसने बोला ओर आदेशित भी किया हैं।उसकी ओर 'मातृछाया' की खुशी की लिए उसकी बोली हुई बात को मानूँगा ओर आदेश का अमल भी करूँगा।

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अगर बहन राखी के दिन खाली हाथों से भाई भेजता हैं तो वो भाई    नहीं हैं।

Thursday, August 23, 2018

राम सीता और दंपति


राम और सीता
विश्वमें सर्वाधिक चर्चा में रहने वाले सीता और राम। जब भी दंपति में कोई तकरार होती हैं तो उन्हें सीताराम का उदाहरण दिया जाता हैं। 
सीताजी जब रामजी के पास थी उन्हें सुनहरा हिरन,सोने का हिरन लेनाथा। जब पूरी सोने से भरी लंकामें सीताजी थी तब उन्हें राम चाहिए थे। वो राम राम का जाप करती थी।
ये हमारी मानसिक स्थिति का उदाहरण हैं। हमारे में नहीं सती सीताजी की भी मानसिकता यही रही हैं। वैसा ही राम के लिए भी कहा जा सकता हैं। जब रावण सीतामाता का अपहरण करके माता सीता को ले गया तब रामजी सीते... सीते... करके लंका पहुंच गए। जब वो 14 साल बाद सीताजी के साथ अयोध्या आये तो एक धोबी के कहनेपर उन्होंने सीताजी का त्याग किया।
ऐसा क्यों होता हैं।

अगर घरमे बीबी कुछ सवाल करे तो हम परेशान हो जाते हैं। अगर बीबी को डांटकर बोलदे की तुम सवाल ज्यादा करती हो, मेरा दिमाग छटक जाता हैं। न खोने से या लड़ाई से दूर भागने वाली बीबी दो दिन सवाल नहीं करती तो हम परेशान हो जाते हैं। आज क्या खाना पकाऊ? इस सवाल के जवाब में ज्यादातर पति परेशान रहते हैं। मगर जो बीबी ने पूछे बगैर खाना पकाया तो समस्या हो जाएगी। क्यो, ऐसी मानसिकता क्यो।

कभी हमे ऐसा होता हैं...

@...
मेरी  माताजी...
मुजे हर बात पे पूछती हैं।
मेने उन्हें एकबार गुस्सा होक मना किया कि आप मुजे ऐसे न पूछताछ करे। मेने उन्हें जल्दबाजी में ये कहा कि आप मुजे समज नहीं पा रही हैं। आप मुजे कभी नहीं समजोगी, आप अपनी सोच के साथ ही जिलो। अब मुजे उस बात का दुःख हैं कि मैने मेरे माताजी को ऐसा कहा। आज में जो हु ओर आगे जो होगा माताजी के आशीर्वाद ओर सहयोग से होगा। वो मेरी हैं। मुझपर उनका अधिकार हैं।  वो मेरी सरकार हैं। मेने उन्हें इस के लिए माफ करने को भी कहा।रोकर मेने माफी माँगी ओर कहा की आप मुजे टोकिये,सवाल करिए आप के बगैर में अब में न रहूंगा। मा का प्यार कम नहीं हुआ मगर उनके सवालो के बगैर मुजे कुछ बेचैनी रही थी। आज भी उनको ऐसा कहने के कारण में अपने आप को कोस रहा हूँ। परिवार में जो आपको सबसे ज्यादा प्यार करेगा वो ही आपको सबसे ज्यादा काम करवाएगा ओर सवाल भी करेगा।

@...
मेरे एक दोस्त के घर में रोज एक सवाल आता हैं। सवाल सिर्फ सवाल हैं,मगर दोस्त एक ही सवाल से परेशान हैं। उन्होंने  दो शादी की हैं। पहली बीबी जिंदा हैं। दोनोने तलाक लिया हैं। तलाक मेरे दोस्तन ही माँगा था। अब दूसरी बीबी कहती हैं, तुम पहली बीबी को मिलते हो। अब दोनों अलग हो गए हैं। उस औरत ने भी दूसरी शादी करली हैं। एक सीआरसी को.कॉर्डिनेटर से उन्होंने शादी करली हैं।दोनों अलग शहरमें रहते हैं।फिर वो  नहीं मां रही हैं। मेरे दोस्त ने कहा अगर मुजे मिलना होता तो में ही तलाक क्यो लेता क्यो तलाक माँगता।

@...
भगवान राम और सीता माताकी मनोस्थिति ऐसी न थी। ये मनोभाव हैं। रामजी ओर सीताजी के उदाहरण से हमे दूर की नहीं जो पास हैं ,अपना हैं उसे महत्व देनेका इशारा किया हैं।मनोभाव हमारे हैं, उसके ऊपर हमे खुद विजय प्राप्त करना हैं। साथ साथ जो होगा, जो होगा अच्छा होगा।

@...
एक लड़की।
उसका नाम भाविका।
भाविका के बड़े भाई तम्बाकू ओर जर्दा वाला  मसाला खाया करते थे। भाविका भी अपने भाई से सुपारी लिया करती। ऐसा करते करते उसे भी आदत हो गई। भाविका ने अभी अभी 25 जनवरी को शादी की हैं। एक बार उसके पति को ये बात मालूम पड़ी। अब वो मानने को तैयार नहीं हैं कि भाविका सोपारी या तम्बाकू नहीं खा रही। मेने भी बहोत सालो तक गुटखा चबाया हैं। अब कभी कभी सुपारी खाता हूं। फिर से भाविका... मेने उसे पूछा उसने आखिरी बार मसाला कब खाया था। भाविका ने कहा 'जब हमारी शादी हुई और हम माताजी के दर्शन को गए उस दिन से उसे छोड़ना शुरू किया। शायद उसके एक महीने तक छुटपुट या कोई और स्वरूप मे जर्दा या तम्बाकू चबाई हैं। मगर अब तो कितने महीने हुए वो भी मालूम नहीं। मेने कहा 'तुम भाविका की बात मानते क्यो नहीं? उसके पति ने मुजे कहा 'अगर में मानलुगा तो शायद वो फिरसे खाना शुरू करदेगी। मेने कहा ये बाते तुम में तकरार बढ़ा सकती हैं। मेरे सवाल को सुनकर वो हंस के बोल 'तकरार भी तो उन्हों से करनी हैं ,जहाँ मुजे जितना नहीं हैं।' क्यो की वो मुजे प्यार करती हैं।

कोई भी कारण हो...
हम पास हैं उसे भूलकर,
जो हमारे पास नहीं हैं उसका ही हम विचार करते हैं। मेने मेरे ब्लॉग में हेंडर में लिखा हैं...


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कुछ ऐसा नहीं की हम न कर पाए! हम आज वोही करते हैं जो हम सोचते हैं! हमें ऐसा सोचना चाहिए जो हम नहीं कर पाते हैं!

Tuesday, July 24, 2018

વિદ્યાર્થીઓ અને હિંસા

રાજ્યની ખાનગી અને સરકારી શાળાઓના વિદ્યાર્થીઓ પોતાની બેગમાં છરી, ચપ્પા, બ્લેડ કે સોયા જેવાં ઘાતક હથિયાર સાથે સ્કૂલ કેમ્પસમાં ન પ્રવેશે તે માટે વિદ્યાર્થીઓની સ્કૂલબેગની સમયાંતરે ચકાસણી કરવા સૂચના આપવામાં આવી છે. સ્કૂલ કમિશનરની કચેરી દ્વારા આ વ્યવસ્થા જોવા તમામ ડીઇઓને તાકીદ કરાઇ છે. આ માટે  જુલાઈએ પરિપત્ર પણ બહાર પાડી દેવાયો છે. ઉલ્લેખનીય છે કે હરિયાણાના ગુરુગામમાં અને ગત જૂન મહિનામાં વડોદરાની ભારતી સ્કૂલમાં ધોરણ-૧૦ના વિદ્યાર્થી દ્વારા ધોરણ-૯ના વિદ્યાર્થીની છરીના ૩૦ જેટલા ઘા મારીને કરપીણ હત્યા કરવાના બનાવને પગલે શિક્ષણ વિભાગ દ્વારા શાળા સંકુલમાં વિદ્યાર્થીઓની સલામતી માટેની નક્કર વ્યવસ્થા ગોઠવવાની કવાયત હાથ ધરાઈ છે.
જેના ભાગરૂપે શિક્ષકોએ સૌપ્રથમ તો તમામ વિદ્યાર્થીઓને આ પ્રકારના હથિયાર નહીં લાવવા અને બેગમાં માત્ર અભ્યાસ માટેનાં પુસ્તકો તથા નોટબૂક જ લાવવા સમજાવવાનું રહેશે. કોઇ વિદ્યાર્થી આ પ્રકારનાં હથિયાર સાથે લાવતા હોય તો શિક્ષકનું ધ્યાન દોરવા મા ટે પણ સમજ અપાશે. સાથે બેગનું પણ રેન્ડમ ચેકીંગ કરવાનું રહેશે જેથી વિદ્યાર્થીઓ ચેકીંગના ડરથી પણ આ પ્રકારની વસ્તુઓ સાથે ન લાવે. સાથે શિક્ષકોને એવી પણ તાકીદ કરાઇ છે કે વિદ્યાર્થીઓને શારીરિક શિક્ષા ન કરાય તેમજ માનસિક ભાર  ન અપાય.
સ્કૂલમાં વિદ્યાર્થીઓની સલામતી માટે શિક્ષણ વિભાગ દ્વારા શાળાઓને સૂચવાયેલા પગલાં મુજબ સ્કૂલમાં કે ગામમાં વિદ્યાર્થીઓ વચ્ચે નાની મોટી બોલચાલ કે મારામારી જેવી ઘટના બનતી હોય છે આ પ્રકારની નજીવી બાબત મોટું સ્વરૂપ ધારણ ન કરે તે માટે વિદ્યાર્થીઓને સમજ આપી સુલેહ- સંપ કરાવો તેમજ તેમના વાલીનો સંપર્ક કરી કાઉન્સેલીંગ કરવાનું રહેશે. વિદ્યાર્થીઓની અનિયમિતતા, ગેરવર્તણૂંક સહિતની વિગતોની તેમના માતા-પિતાને જાણ કરવી અને શાળાના સ્ટાફ અને અન્ય વિદ્યાર્થી પ્રત્યે પૂર્વગ્રહ ન રહે તે માટે સમજ અપાશે. વિદ્યાર્થીઓમાં સકારાત્મક વિચાર જળવાય, ક્રોધ સહિતની નકારાત્મકતા દૂર થાય તે માટે પ્રાર્થના સમય દરમિયાન યોગનું આયોજન કરવા પણ કહેવાયું છે.

अमदावाद : कर्णावती



कुछ दिनों पहले की बात हैं।
गुजरात के किसी कॉलेज में यूथ पार्लमेंट थी।अमित शाह,सुब्रह्मण्यम स्वामी ओर अन्य विशेष वक्तव्य देने वाले महानुभाव थे।सुभर्मनियम और साम पित्रोडा की स्पीच को विशेष कवरेज मिला।अमित शाह को तो मीडिया कवरेज मिलना ही था।सभी ने अपने विषय में विशेष बात कही। सुब्रह्मण्यम स्वामिनी कहा की अमदावाद को कर्णावती नाम देने के लिए BJP 1990 से बोल रही हैं।नरेंद्र मोदी जब मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने प्रधानमंत्री को इस के लिए खत लिखा था।मगर आज वो प्रधानमंत्री हैं फिरभी कर्णावती नाम नहीं दे रहे हैं।क्यो?अपनी बात में उन्होंने गुजराती लोगो को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा बॉम्बे का मुम्बई करने में मुंबई वासी ओर महाराष्ट्र के लोग आगे आये थे।ऐसा ही चेन्नई के लिए हुआ।मगर गुजराती लोग ऐसा क्यों नहीं कर पाए,न करवा पाए।अब सुब्रह्मण्यम जी के बारेमें थोड़ा जान ले।वो भारत के सबसे बड़े वकीलों में से एक हैं।कोंग्रेस में राजीव गांधी के करीबी होने के बाद वो दूर हुए।इतने दूर हुए की आज कोंग्रेस स्वामी के नाम से डरती हैं।ऐसा नहीं हैं कि वो BJP में हैं तो BJP वालो को शांति हैं।वो BJP को भी आड़े हाथों लेते हैं।उनके किए खुदका मंत्री होना या न होना कोई फर्क नहीं पड़ता हैं।वो खुद गब्बर हैं।कोंग्रेस ओर BJP दोनो उनसे उतने ही डरते हैं।हमारे देश के फाइनांस मंत्री अरुण जेटली को वो नासमझ मंत्री मानते हैं।उन दोनों के अच्छे संबंध नहीं हैं।उन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदैव मध्यस्थि करते आये हैं।स्वामी एक विचारक ओर विवेचक हैं।स्वामी आजतक जो बोले हैं ऐसा होते आया हैं।उनका मानना हैं कि 2019 से पहले अयोध्या में रामजी मंदिर बन जायेगा।स्वामी ने भारत के राजकीय इतिहासमें जो कहा हैं,वो हुआ हैं।

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सुब्रह्मण्यम स्वामी एक ऐसे नेता हैं जिन्हें कोई भी पार्टी अपने पक्षमें लेना चाहती हैं,ओर लेनेके बाद उन्हें निकालना भी चाहती हैं।

Tuesday, May 29, 2018

में करूँगा....

में कुछ भी करूँगा।
मेने जो तय किया हैं वो में लेके रहुंगा।ऐसा जज्बा ओर ऐसा विश्वास बच्चे में सदैव रहता हैं।
जैसे कैसे भी बच्चा बड़ा होता हैं,उसका आत्मविश्वास क्यो मगर कम हो रहा हैं। ये हमने देखा हैं,हमने महसूस किया हैं।क्या हो सकता हैं।आज मुजे श्री नलिन पंडित सर की ओर से एक msg मिला।10 और 12 वी क्ष के नतीजे निकले हैं।उस के बाद जो बच्चे मर ने के लिए नदी,तालाब या नहर का उपयोग आत्महत्या करने में करते हैं।
यहाँ रिफ्यूजी टीम खड़ी रहती हैं।
इस टीम के मरने वाले को पानीमें से भर निकाल के बचने वाले व्यक्ति ज्यादातर 12 वी फेल हैं।कहिए,कहा गया आत्मविश्वास?फेल होने से जीवन खत्म नहीं होता,मरने से सवाल कम नहीं होते।मरने से कुछ सवाल ओर भी बड़े हो जाते हैं।
बछो का जो आत्म विस्जवास ओर बगैर डर के निर्णय लेने की क्षमता ही आगे बढ़ने में मदद करती हैं।मगर उस उम्र तक पहंचने तक वो स्टॉक खत्म हो जाता हैं, जो कभी वापस नहीं आ सकता।ऐसा क्यों होता हैं,हम क्या कर सकते हैं।सवाल ओर सुजाव पसंद आएंगे।

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में कर पाऊंगा।
इसका मतलब हैं, आधा काम हो गया।

Saturday, April 28, 2018

बहेतरीन दिन आएंगे...


बहेतरीन दिन सबको पसंद हैं।जीवन में बहेतरीन तरीके से जीना  किसे पसंद नहीं हैं।हम किसी व्यक्ति को सुख या बहेतरीन जिंदगी जीते हुए देखते हैं,हमे वैसी जिंदगी को जीने के ख्वाब आते हैं।
मगर सही बात ये हैं कि किसी के जीवन में बहेतरीन दिन वैसे ही नहीं आते।उसके लिए बहोत कुछ करना पड़ता हैं।बहोत कुछ संभालना ओर निभाना पड़ता हैं।अगर हम बहेतरीन जिंदगी जीने का ख्याल हैं तो हमे बुरे दिनों से लड़ना पड़ेगा।

बुरे दिन आते नहीं लाये भी नहीं जाते।बुरे दिन भगवान हमारे सामने लाते हैं।किसी ने खूब कहा हैं कि कभी हमे मंजिल तक पहुंचने के रास्ते में कुछ समस्याए आती हैं, तो उसका मतलब हैं भगवान हमारे रास्ते को ओर मजबूत करता हैं।हमारे आगे के रास्ते को साफ करने के लिए शायद भगवान ऐसे चक्रवात सामने लाते हैं।

हम भगवान और माँ को तू कहते हैं।हम जिसे तू कहते हैं वो हमसे करीब होता हैं।करीबी ओर दूरी दो व्यवस्था हैं।आज बुरे दिन हैं,कल बहेतरीन दिन आएंगे।आज के बुरे दिन ओर कल आने वाला बहेतरीन दिन हमारे लिए एक व्यवस्था हैं।

आज आपके दिन बुरे हैं।
आज आपके दिन आपके सामने सवाल बनकर खड़े हैं।आज आप को कोई समझ नहीं रहा हैं।मगर आप सच्चे हैं और आप किसी चीज के लिए प्रयत्न करते हैं तो ये सारी बुराइयां बहेतरीन तरीको से आपशे दूर होगी।

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बहेतरीन दिनों के इंतजार में जो व्यक्ति हिम्मत हारता हैं,उसे अपनी जिंदगी बुरे समय ही खत्म करनी पड़ेगी।मुजे मेरे बहेतरीन दिनों का इंतजार हैं,वैसी संभावना रखने वाले को परिणाम मिलना निश्चित हैं।

Tuesday, April 24, 2018

न हारो हिम्मत


मेरे एक दोस्त हैं।
उनका बेटा इस बार बारहवीं कक्षामें था।हमे उसे शुभकामना देने के लिए जाना था।हम उनके घर पहुंचे।वो बच्चा तो पढ़ाई में व्यस्त था।शुभकामना देने वाले उसे अंतिम दिनोंमें मिलकर उसके तैयारी का समय बिगड़ ते हैं।इसे शुभेच्छा नहीं कही जाती।
मेने पूछा उसकी तैयारी कैसी है,मम्मी जी बोलने लगी।अरे पिछले दो सालों से रोजाना बादाम का दूध पीता हैं।
में समज नहीं पाया कि उसके बचपन में उसके कॉन्सेप्ट क्लियर नहीं हुए होंगे तो वो रोजाना एक किलो भी बादाम खायेगा उसे याद नहीं रहेगा।
सीखी हुई चीज को याद रखने से नहीं उसके उपयोग करने से याद रहती हैं।याद रखे जब हमने बाइक या गाड़ी चलाना सिखाथा तब क्या हम मोबाइल के कॉन्टेक्ट में से फोन नंबर को खोज के लगा सकते थे।आज तो हम गाड़ी या बाइक चलाते मेसेज भी टाइप करते हैं।अगर इसे कोई कहेगा कि ये गाड़ी चलाना सिख गया हैं तो इसका मतलब उस ने गाड़ी सीखी।मोबाइल चलना आता था।अब दो अलग तरीको से काम को एक साथ करना कौशल्य माना जाता हैं।
फिर से बादाम की बात आते हैं...
किसी ने पोस्टर में लिखा हैं।सही बात हैं।हिरन घी नहीं खाता फिरभी घोड़े से आगे और तेज भागता हैं।
आप भी इस बातको माने।निपूणता प्राप्त करने के लिए बाह्य नहीं,अंदरूनी शक्ति चाहिए।बादाम बाह्य शक्ति हैं,कॉन्सेप्ट क्लियरिंग अंदरूनी विश्वास जगाता हैं।
हमे जो काम में सफक होना हैं,उस की अधिक से अधिक जानकारी हमारे पास होगी तो हमे बादाम खाने की कोई जरूरत नहीं हैं।


@#@
में कभी हिम्मत नहीं हारा।
जब मेरी वर्ल्ड फेमस फ़िल्म लाइफ स्माइल बनी तब में मेरे जीवन में सबसे दुखी था।
चार्ली...

Sunday, April 15, 2018

विचार बड़ा...


कोंन बड़ा।
ये तय करना संभव नहीं हैं।
बड़ापन हमेशा सापेक्ष होता हैं।
समजीए...
एक पेंसिल दूसरी पेंसिल से छोटी हैं,मगर वो दूसरी पेन या पेंसिल से बड़ी भी हो सकती हैं।आप जो पोस्टर देखते हैं वो सब कुछ समझ में लाने के लिए काफी हैं।कोई बड़ा या छोटा नहीं होता हैं।कोंन हमारे साथ हैं वो महत्वपूर्ण नहीं हैं।को किस परिस्थिति में हमारे साथ हैं,वो महत्वपूर्ण हैं।
हमारे जीवन में एक बात ये भी हैं कि हम कुछ कम समय या थोड़ी बात के आधार पर किसी को बड़ा या छोटा मानलेते हैं।
तलवार और सुई एक ही धातु से बनती हैं।दोनों को अपने अपने स्थान पर महत्व मिला हैं।जहाँ तलवार की बात हैं वहां सुई नहीं चलेगी।जहाँ तलवार बड़ी हैं वहाँ सुई का काम नहीं चल सकता।आशा रखते हैं हम भी हमारी जिंदगी में कुछ ऐसी बातों को महत्व दे जिसमें हमारी जिंदगी आसान और सुखमय होगी।बड़ा विचार हैं।अगर कोई गलत विचार बड़ा हो जाएगा तो अच्छे दिन नहीं आएंगे।मगर कोई अच्छा विचार बड़ा हो जाएगा तो अच्छे दिन आएंगे ही आएंगे।

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बड़ा कोई नहीं हैं।
बड़ा हैं स्थान।किसी छोटी चीज या व्यक्ति ने किस समय हमारी सहाय की हैं,किस परिस्थिति में हमारे साथ रहे हैं।ये बात ही महत्वपूर्ण हैं।और इस के आधार पर ही हम अपनी सोच बढ़ाये।

Tuesday, April 10, 2018

छोकु की कविता...


जब कोई रोता हैं,
कुछ न कुछ खोता हैं।

गम हो या हो फिकर,
निकलता हैं जब कोई रोता हैं।

कोंन नहीं रो रहा आज बाजार में,
जब कोई रोता हैं,वो चेन से सोता हैं।

-अशरफ 'छोकु'

एक युवा कवि हैं।हाल उनकी आयु शायद चालीस साल होगी।उत्तर प्रदेश के ईश मिजाजी 'छोकु' किए प्रसिद्ध रचना हैं।

जब कोई रोता हैं,
कुछ न कुछ खोता हैं।

या वो अपनी गलती खोदता हैं,याने उसकी गलती का स्वीकार किया हैं।या वो अपनी फिक्र या फिर खुदकी कोई ऐसी बात छोड़ता हैं।शायद वो अपनी जीवन की किसी बात का अहसास करवाने के लिए रो रहा हैं,संभव हैं।मगर रोने से व्यक्ति कुछ खोता हैं।


गम हो या हो फिकर,
निकलता हैं जब कोई रोता हैं।

रोने से गम या फिकर निकलती हैं।दिल साफ और मन हलका होता हैं।कुछ व्यक्ति सहज से रो लेते हैं।किसी भूखे को खाते देखकर भी सहज व्यक्ति रो सकती हैं।मगर ऐसी व्यक्ति जो स्वयं किसी के लिए प्रेरक ओर आवश्यक हो उसके रोने से कुछ तो ऐसा हैं ,की वो जो रो रहे हैं।रोने के लिए कुछ ऐसा भी नहीं 'कुछ ऐसा अपने साथ हुआ हैं,रोना आता हैं,मगर रोनेके बाद दिल साफ हो जाता हैं।

कोंन नहीं रो रहा आज बाजार में,
जब कोई रोता हैं,वो चेन से सोता हैं।

सब लोग आज रोते हैं,किसी का दिखता हूं।किसी का दो चार पांच साल के बाद दिखेगा।कोई सामने रोया हैं,कोई साथ में रोयेगा।कहते हैं कि जीवन में जो साथ चलेगा वो जगडेगा,मारेगा,रोयेगा ओर रुलाएगा।मगर साथ चलेगा।ऐसे लोगो को कभी नहीं भूलना चाहिए कि जिन्हों ने तुम्हारे लिए कभी वख्त नहीं देखा हो।आज वो नाखुश हैं,तो मारेंगे ओर चिल्लायेंगे।मगर जब वो आपके साथ हैं तो आप को रोने में भी लिज्जत मिलेगी।समय का सदुपयोग करना आवश्यक हैं,24 घंटे सबके लिए समान हैं,उसमें से अपने ओर अपनो के लिए हमे समय का आयोजन करना पड़ता हैं।अगर वो हो पाया तो भविष्य संवर सकता हैं।रोना ओर जीना साथ साथ हैं,तो चलो पहले जी ने का प्लान करते हैं।

@#@

मुजे रोना पसंद हैं।
क्यो की वो मेरा रोना हैं।
क्यो किसी के बारे में कुछ जानु या कहूं।मुजे मेरा जीवन पसंद हैं।क्यो की वो रोने से शुरू हुआ हैं।मगर में रोते हुए मरूँगा नहीं।

@ओशो...

Sunday, April 1, 2018

1 એપ્રિલ મૂર્ખ દિવસ:આયોજન દિવસ

આજે 1લી એપ્રિલ અર્થાત એપ્રિલ ફુલ ડે. આ એપ્રિલ ફુલ ડે નો એક રસપ્રદ ઇતિહાસ છે.આપને જાણવાની આપને મજા આવશે. 
આજ પહેલાં પણ આપણે કેલેન્ડરકી કહાની ને નામે આવી વિગતો જોઈ છે.રાજકોટ થી શ્રી શૈલેષભાઇ રંગપરિયા એ એક વાત મૂકી છે.એ આધારભૂત ઘટના ને આધારે આ વિગત એમણે શેર કરી અને હું આપને મોકલું છું.

મિત્રો, 1752ના વર્ષના સપ્ટેમ્બર મહીનાનું આ કેલેન્ડર જરા ધ્યાનથી જુઓ. કેલેન્ડર છાપનારાએ મોટો છબરડો કર્યો હોય એમ લાગે છે ને ? 2 તારીખ પછી સીધી 14મી તારીખ જ આવી ગઇ વચ્ચેના 11 દિવસ અદ્રશ્ય થઇ ગયા. આ કોઇ છબરડો નથી પણ એક વાસ્તવિકતા છે અને આ બિલકુલ સાચુ કેલેન્ડર જ છે. 

ઇંગ્લેન્ડમાં રોમન જુલીયન કેલેન્ડર અમલમાં હતુ. આ કેલેન્ડર વર્ષનો પ્રથમ મહીનો એપ્રિલ હતો અને છેલ્લો મહીનો માર્ચ હતો.એક કેલેન્ડર એવુંય હતું કે તેમાં ફેબ્રુઆરી મહિનો છેલ્લો હતો.365 ન થાય તો 29 અને થાય તો 28 દિવસ થતા.આ વખતે કોઈ ને એવું ધ્યાનમાં આવ્યું કે આવું દર ચસર વર્ષ પછી જ થાય છે.એ પછી કેટલાય વર્ષો ગયાં. છેવટે  1752ના સપ્ટેમ્બર મહીનામાં ઇંગ્લેન્ડ દ્વારા રોમન જુલીયન કેલેન્ડરને પડતુ મુકીને તત્કાલિન રાજા દ્વારા ગ્રેગેરીયન કેલેન્ડર અપનાવવામાં આવ્યુ જે અત્યારે પણ અમલમાં છે જેનો પ્રથમ મહીનો જાન્યુઆરી અને છેલ્લો મહીનો ડીસેમ્બર છે. 

હવે આ નવુ કેલેન્ડર અપનાવવામાં એક મોટી તકલીફ એ હતી કે રોમન જુલીયન કેલેન્ડર નવા ગ્રેગેરીયન કેલેન્ડર કરતા 11 દિવસ લાંબુ હતુ આથી ઇંગ્લેન્ડના રાજાએ ઓર્ડર કરીને 11 દિવસ રદ કર્યા અને 2જી તારીખ પછી સીધી જ 14મી તારીખ આવી. 1752ના સપ્ટેમ્બર મહીનામાં બધાએ 11 દિવસ ઓછુ કામ કર્યુ અને તો પણ બધાને પુરા મહીના માટે પગાર ચૂકવવામાં આવેલો હતો. આજે પણ એ જ રીતે આપણ ને 12 રજાઓ કર્મચારી તરીકે અધિકૃત રીતે આપવામાં આવે છે.11 દિવસ કામ કર્યા વગર પગાર.એક દિવસ જે સીધો ગણ્યો આમ 12 દિવસ નોકરી ન કરો તોય પગાર મળે.બસ,એ પછી અંગ્રેજોએ આ વાતને જાળવી રાખી અને નવું કેલેન્ડર વિશ્વમાં માન્યતા પામ્યું.આ એ જમાનાની વાત છે કે જ્યારે આખી દુનિયામાં અંગ્રેજોનું શાશન હતું.

ગ્રેગેરીયન કેલેન્ડર પ્રમાણે વર્ષનો પ્રથમ મહીનો જાન્યુઆરીથી શરુ થતો હતો આથી નવા વર્ષની ઉજવણી 1લી જાન્યુઆરીના રોજ શરુ કરી. પ્રજા તો રોમન જુલીયન કેલેન્ડર પ્રમાણે 1લી એપ્રિલને જ નવા વર્ષ તરીકે ઉજવવા ટેવાયેલી હતી એટલે ગ્રેગેરીયન કેલેન્ડર અપનાવવા છતા પ્રજાએ 1લી એપ્રિલને જ નવા વર્ષ તરીકે ઉજવવાનું ચાલુ રાખ્યુ.જુના રોમન જુલીયન કેલેન્ડરમાં નવાવર્ષનો પ્રારંભ એપ્રિલથી થતો આથી 1લી એપ્રિલને નવા વર્ષનો પ્રથમ દિવસ ગણવામાં આવતો.

રાજાને લાગ્યુ કે જો આમ જ ચાલતુ રહેશે તો નવા ગ્રેગેરીયન કેલેન્ડરનો કોઇ અર્થ નહી રહે આથી એમણે એક ખાસ આદેશ બહાર પાડ્યો અને જે માણસ 1લી એપ્રિલને નવા વર્ષ તરીકે ઉજવે એને " FOOL" ( મૂરખ) નો ખીતાબ આપવાનો શરુ કર્યો એટલે લોકો 1લી એપ્રિલને નવા વર્ષ તરીકે ઉજવવાનું ભૂલી ગયા. બસ ત્યારથી 1લી એપ્રિલને FOOL's DAY અર્થાત મૂરખાઓના દિવસ તરીકે ઓળખવામાં આવે છે.

@#@
કશું જ કારણ ન હોય.
કોઈ જ અગવડ ન હોય.
છતાં આપણું માણસ આપણાથી વાત ન કરે એ જ મારે મન જાણે હું 'એપ્રિલ ફૂલ' ઉજવતો લાગું.

Sunday, March 25, 2018

છોકરાં ની સમજ...

આપણે સમજીએ એવું જ વિદ્યાર્થી સમજે એવું નથી.થોડા દિવસ પહેલાં આઇઆઇએમ ખાતે જવાનું થયું.થોડા કામથી નવા કેમ્પસમાં જવાનું થયું.અહીં એક જગ્યાએ તદ્દન સહજ છોકરાં રમતાં. હતાં. આ બધાં થઈ ને કદાચ એ વખતે ત્યાં ત્રણ છોકરાં હતાં.મેં એ છોકરાં જોડે વાત કરી.એમની ચોપડી જોવા માંગી.સરસ રીતે લેખન કરેલું હતું.મેં એના પુસ્તકમાં જોયું.મેં ચોક્કસ પ્રવૃત્તિ અંગે તેના પુસ્તકમાં જોયું.

એ પુસ્તક અંગે હાલ કશું કહેવું નથી.એ પાન ઉપર દર્શાવેલ કામ કેવી રીતે કરવું.આ માટે શિક્ષક આવૃત્તિમાં વિશેષ રીતે લખાયું છે.આ વિદ્યાર્થી ના શિક્ષક પાસે શિક્ષક આવૃત્તિ ન હોય એવું બને.હશે,કોઈ થોડી સમજ ફેર સાથે વિદ્યાર્થીની સમજની ચકાસણી શિક્ષક ચોક્કસ અને સતત કરતાં હશે એવું જણાયું.બધી જ રીતે સમજ આધારે તૈયાર થયેલ આ વિદ્યાર્થી.એની નોટ અને ચોપડીના કેટલાક ફોટા. આપને ગમશે.

@705@
સવાલ એવો હોય કે એનો એક જ જવાબ હોય તો એ ફિક્સ ફ્રેમ થાય.3+5=8 થાય.પણ ..... +.....=8 નો જવાબ આપીએ તો અનેક જવાબ મળે.

Wednesday, March 21, 2018

नोबल पुरस्कार वाली कविता

साहित्यिक बातो में नोबल मिलना एक गौरव पूर्ण घटना हैं।समग्र भारत में से ये सन्मान श्री रवींद्रनाथ टैगोर को मिला हैं।आज में आपको एक ऐसे सर्जक की बात बताने जा रहा हूँ,जिन्हें अपनी एक कविता के लिए नोबल पुरस्कार मिला हैं। उन्हों ने जो कहा हैं,उसका हिंदी अनुवाद यहां दे रहा हूँ।ये बाते नोबेल पुरस्कार विजेता ब्राजीली कवियत्री  मार्था मेरिडोस की कविता "You Start Dying Slowly" का हिन्दी अनुवाद हैं।आशा हैं आपको पसंद आएगी।

1) आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप:
- करते नहीं कोई यात्रा,
- पढ़ते नहीं कोई किताब,
- सुनते नहीं जीवन की ध्वनियाँ,
- करते नहीं किसी की तारीफ़।

2) आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, जब आप:
- मार डालते हैं अपना स्वाभिमान,
- नहीं करने देते मदद अपनी और न ही करते हैं मदद दूसरों की।

3) आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप:
- बन जाते हैं गुलाम अपनी आदतों के,
- चलते हैं रोज़ उन्हीं रोज़ वाले रास्तों पे,
- नहीं बदलते हैं अपना दैनिक नियम व्यवहार,
- नहीं पहनते हैं अलग-अलग रंग, या
- आप नहीं बात करते उनसे जो हैं अजनबी अनजान।

4) आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप:
- नहीं महसूस करना चाहते आवेगों को, और उनसे जुड़ी अशांत भावनाओं को, वे जिनसे नम होती हों आपकी आँखें, और करती हों तेज़ आपकी धड़कनों को।

5) आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप:
- नहीं बदल सकते हों अपनी ज़िन्दगी को, जब हों आप असंतुष्ट अपने काम और परिणाम से,
- अग़र आप अनिश्चित के लिए नहीं छोड़ सकते हों निश्चित को,
- अगर आप नहीं करते हों पीछा किसी स्वप्न का,
- अगर आप नहीं देते हों इजाज़त खुद को, अपने जीवन में कम से कम एक बार, किसी समझदार सलाह से दूर भाग जाने की..।
तब आप धीरे-धीरे मरने  लगते हैं..!!

इसी कविता के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ।रवींद्रनाथ टागोर को जान गण मन के लिए ये सन्मान मिला।इससे आप समज पाओगे की ये कविता विश्व में कितनी महत्वपूर्ण होगी।

@702@
साहित्य सर्जक कभी नहीं मरते।
पेड़ो का उछेर करने वाले कभी नहीं मरते।हमे इन दोनों का सन्मान करना चाहिए।

Friday, February 23, 2018

કક્કો નહીં મૂળાક્ષરનો ક્રમ...


21 ફેબ્રુઆરી.
વિશ્વ માતૃભાષા દિવસ.
દુનિયાના તમામ દેશ આ સિવસ ને ઉજવે છે.ગુજરાતી કે ગુજરાતના નાગરિક તરીકે સૌએ એની ઉજવણી કરી.હુંય કોઈ જગ્યાએ આ કાર્યમાં જોડાયો.એક દૈનિક પેપરમાં થોડા દિવસ પહેલાં એક સમાચાર છપાયા.સમાચાર જાણે એમ કે, ગુજરાતી કક્કો બદલાયો.એનો અર્થ એવો થતો હતો કે ધોરણ એકના પાઠ્યપુસ્તકમાં કક્કો બદલાયો.આ થઈ મીડિયાની વાત.કેમ ક્રમ બદલાયો અને તેનાથી શીખવા શીખવવામાં શું ફેર પડે એ ચર્ચાનો વિષય છે.એના જવાબ પણ છે જ.

હવે આપણી વાત...

ગુજરાતી શીખવા અને શીખવવા માટે પાઠ્યપુસ્તકને માધ્યમ તરીકે રજૂ કરવામાં આવે છે.બોલનાર,છાપનાર અને વાંચનાર કોઈ ને એ ખબર નથી કે ગુજરાતમાં ક્યારેય પાઠ્યપુસ્તકમાં કક્કો ભણાવાયો જ નથી.

જુઓ...

ધોરણ એકમાં કક્કો ક્યારેય ચાલ્યો નથી.આ માટે જુના પાઠ્યપુસ્તકમાં આપેલ ક્રમ અંગે ચર્ચા કરીએ.અહીં વિવિધ વર્ષો દરમિયાન બદલાયેલા પુસ્તકમાં ક્યાં ક્રમે મૂળાક્ષર શીખવાયા હતા તે અંગેની જાણકારી આપી છે.

જુઓ...

1967:
ટ.. ન..જ..ય..
ક..થ..ભ..ચ...
ગ..મ..ત..ફ...
સ...ર...ઢ... ધ...
વ...હ...બ...ડ...
ઝ...ળ...લ...ખ...
પ...વ...દ...ઈ...
શ...ઇ...ઊ...ઉ...છ..ઠ...

1975:
જ...ચ...મ...ગ...
ન...ક...વ...લ...
ત...ર...ખ... ગ...
ર...સ...હ...બ...
છ...ય...શ...ઢ...
ઠ... ચ...અ... ભ...
ણ... ફ...ડ...ળ...
ઇ...ઘ...ઈ... ઉ...ઊ..


1980:

ન...મ...ક...ર...
જ..ગ...દ..ત..
પ...વ...ય...લ...
ખ...લ...અ... બ...
ભ...ઝ...ભ...સ...
ણ... ટ... હ...ધ...
ઇ...ઉ...ફ...થ...
ઇ..શ...ઠ... ઊ...દ...

2000

ગ...મ...ન..જ..
વ...ર..સ...દ...
ક...બ..અ... છ...
પ...ડ... ત...ણ... 
લ...ટ... ચ...ખ...
ઝ..હ...ઘ...ળ... ભ...ય...ધ...ફ...
ટ... ઠ... ઇ...ઈ.. શ..થ...ઉ...ઊ..


અરે...ગાંધીજી એ ચાલણ ગાડી બનાવડાવી હતી.એમાંય કક્કો ન હતો.એક માત્ર ગુજરાતના બાળકો ને માતૃભાષા શીખવવા માટે ગાંધી બાપુએ તૈયાર કરેલ આ પુસ્તક આજેય ગુજરાત વિદ્યાપીઠમાંથી ખરીદી શકાય છે.

એમ જ ટી.વી.માં સ્લોટ સાચવવા અને છાપીને જગ્યા ભરનાર કે વાંચનાર આ વિગતે અજાણ છે.કોઈ એક ચેનલે આખી વાતમાં પ્રકાશ પડ્યો.એય,માતૃભાષા દિવસે.

# Thanks etv
#Thanks Gujarat
#Thanks ગુજરાતી

कृष्ण दवे के साथ...


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कृष्ण दवे।
गुजरात के प्रसिद्ध साहित्यकार।
बाल साहित्य के निर्माण में उन्होंने अपनी अलग जगह बनाई हैं।बहोत सारे बच्चो के गाने उन्होंने सर्जन किये हैं।

आज से पहले हम मील थे।गुजरात का प्रथम बालकवि संमेलन हुआ था।सारे गुजरात के बालकवि उपस्थित थे।हम एक दूसरे से वहां मिले थे।ये बात आज से 3 साल पहले की हैं।बीच बीच में भी हमारा मिलना हुआ,मगर साथ बैठ के बात कर पाए वो संम्भव नहीं हुआ।ये मौका मिला पालनपुर में।

45 वा राज्य गणित,विज्ञान एवं पर्यावरण प्रदर्शन आयोजित हुआ था।इस दिनों वो एक विशेष कार्यक्रम में उपस्थित थे।बच्चो के साथ वो खानिबोर गाना करवाने वाले थे।बालसाहित्य के बारे में कुछ अलग से चर्चा होने वाली थी।में भी वहां था।

कृष्ण दवे जी का सरल एवं सहज व्यक्तित्व किसी व्यक्ति को प्रभावित कर सकता हैं।मुजे उनके गाने,कहानिया के साथ उनका व्यवहार भी पसंद आया।खुश नसीब हैं वो लोग जिन्हों ने श्री क्रुअहं5 दवे को सीधा सामने बैठके सुना।

#विद्यामंदिर
#GCERT

Saturday, February 17, 2018

आविष्कार ओर जीवन


आविष्कार क्या हैं।
नवाचार क्या हैं और उसे कैसे कोज जा सकता हैं।ऐसी कई सारी बाते हैं जो हम सुनते जरूर हैं मगर उसे समझने का प्रयत्न नहीं करते।
किसी चीज को खोजना उसका मतलब हैं उसके बारे में कुछ न कुछ नया सामने लाना।हम कुछ नया लाते हैं उसका मतलब ये हैं कि पुराना भी कुछ तो था।वैसी ही बात हमारे जीवन में भी देखने को  मिलती हैं।जब हम किसी भी बात में खुल के सामने आते है तो हमारा व्यक्तित्व पूर्णतः खिलता है। वही हमारा आविष्कार है। ऐसा आविष्कार जो हमे आगे बढ़ाता हैं।आविष्कार सिर्फ विज्ञान या भौतिक सुविधाओ से ही हुड नहीं हो सकते।आविष्कार कभी कभी हमारे जीवन में भी होते हैं।हम उस अविष्कार को जीवन का हिस्सा बनायेनंगे तो आसानी से नव जीवन को महक दिला पाएंगे।आप खिले,खिलते रहे और आविष्कार देते और दिखाते रहे।

#we can...

Saturday, February 10, 2018

जिम्मेदारी पी लो



जिम्मेदारी।
व्यक्तिको मजबूत बनाती हैं।
एक बार आप जिम्मेदारी उठाओ ओर से निभाने की ठान लो तो कभी आप थक नहीं सकते हैं।किसी ने खूब लिखा हैं कि 'जिम्मेदारी एक ऐसा टॉनिक हैं जो एक बार पी लेने से व्यक्ति कभी नहीं थकता।
किसी को दिया हुआ वचन निभाना बहोत मुश्किल होता हैं।अगर आप ने जिम्मेदारी ली हैं तो आप कभी नही थक सकते।एक पिता कभी अपनी जिम्मेदारी से थकता नहीं।एक पति या पत्नी कभी आने काम से थकती नहीं क्यो की उन्होंने जिम्मेदारी पी हुई हैं।
एक दोस्त हैं।
वो जिम्मेदारी निभाते हैं।
एक व्यक्ति के तौर पे पारिवारिक,सामाजिक और व्यावसायिक जिम्मेदारी को निभाते हुए वो अपने आप को आगे बढाने का काम करते हैं।कई बार वो ऐसी छोटी बातों में परेशान होते हैं जो बात परेशानी वाली हैं ही नहीं।कुछ लोग जिन्हें वीक ऐंड पसंद होता हैं।मेरे दोस्त वीक ऐंड में सबसे ज्यादा अस्वस्थ रहते हैं।
जब मेरी बात होती है तो में उन्हें कुछ करने को कहता हूं।में उन्हें कोई नई जिम्मेदारी का वहन करने में या कुछ ऐसा काम करने को कहता हूं जो वोही कर पाएंगे।
जैसे...
किसी बच्चे को खोजना...
उसे दोस्त बनाना और बाते करना...
उसे आदत न हो जाये ऐसी सहाय करना...
गाना सुनना जो हमे पसन्द है या गाना विशेष हैं...

मेने अगर कोई जिम्मेदारी ली है,में उसे निभाउंगा।क्या कोई व्यक्ति बिना सोचे कोई जिम्मेदारी लेगा?आप कहेंगे नहीं।इसका मतलब ये है कि हम जिम्मेदारी से ही जिम्मेदार बन सकते हैं।
आप भी अपनी जिम्मेदारी की ओर अगर जागृत होंगे तो आप भी नहीं थकेंगे।अगर आप ने सच मे जिम्मेदारी से कुछ तय किया है तो भगवान आपको सहाय करेंगे।

जिओ जिम्मेदारी से...

Friday, February 9, 2018

मेरे पैर देख के लिखलो...








एक बच्चा था।
वो कक्षा तीन में पढ़ता था।
उसका नाम भोलू।भोलू पढ़ने में कुछ ज्यादा ही कमजोर था।अध्यापक उन को पढ़ाते समय अच्छी प्रवृत्ति ओर ज्ञान का सर्जन करवाते थे।
एक दिन की बात हैं।

गुरुजी ने सभी बच्चों को एक टास्क दीया।उन्हों ने कहा 'आप पंखी के पैर को देखकर उसका नाम लिखो।पर्यावरण विषय के लेखक होने पर में भी ऐसी प्रवृत्ति को पाठ्यक्रम में लिखता हूँ।मेने ऐसी प्रवृत्तिनको लिखा हैं।
गुरुजी ने भोलू से भी कहा,पंखी के पैर देखकर तुम उसका नाम लिखो।ये सुनकर भोलू रोने लगा।गुरुजी को उसने बताया कि क्यो रो रहे हो।ये बात सुनकर भोलू ने कहा 'पंखी के पैर देखकर में उसका नाम नहीं लिख सकता।उसे रोता देखकर गुरुजी ने कहा 'तुम अपना नाम बताओ।ये सुनकर भोलू ने कहा 'गुरुजी,आप मेरे पैर देखके लिखलो।'
ये तो हुई एक जोक्स वाली बात।मगर ऐसे कई सारे सवाल होते हैं।जिनके बारें में बच्चो के जवाब रियल में सही थे।
बच्चा कहता हैं कि मेरे पैर देखकर मेरा नाम लिखो।मगर उसका दूसरा अर्थ ए भी हैं कि पंखी तो मैने कभी मेरे सामने बैठा हुआ नहीं देखा,में तो गुरुजी,रोज आपके साथ सामने बैठता हु।
आप भी ऐसे सवाल हैं तो मुझ तक पहुंचाए। 

Saturday, February 3, 2018

दोस्तो की सरकार


दोस्त मेरा आईना।
जब हम खुश हो,सामने दोस्त भी खुश हो।अगर में दुखी हूं तो दोस्त भी दुःखी हो।वैसा दोस्त कोंन हैं।
चार्ली चैप्लिन मानते थे कि आईना मेरा दोस्त हैं।क्यो की जब में रोता हु तो वो हंसता नहीं हैं।कुछ लोग कभी कभी ऐसे निर्णय लेते हैं जो कि उनके लिए महत्व पूर्ण हैं।उस वख्त वो ये नहीं सोचते कि सामने वाले को क्या हुआ होगा।जब आप गलत सवाल करते हैं तो आप को कोई भी कितने दिनों तक सही जवाब दे पाएगा?अगर सही तरीके से जीना हैं तो सवाल ओर जवाब दोनों सही और आवश्यक होने चाहिए।कभी कभी गलत सवाल सही जिंदगी को हमसे छीन लेता हैं।
दोस्त ऐसे होते हैं कि जो बिना कहे बात समझ ले।कुछ दिन पहले मेरे एक दोस्त ने मुजे कोल किया।वो तलाक ले चुके थे।उनका तलाक ऐसा था कि हम 5 साल तक अलग रहेंगे।बाद में?मैने पूछा।मेरे पूछते ही उन्हों ने बताया तब तक आदत हो जाएगी या माफी मांग लेंगे।मेने कहा,मगर क्या आप साथ नहीं रह सकते?दोस्त गंभीर हो के बोला पिछले कई समय से में प्रयत्न करता था मगर वो समझ नहीं पाए।

कुछ ऐसा भी आपने सुना होगा कि पति पत्नी बनके न जीने वाले अच्छे दोस्त बनके जीना सीख लेते हैं।दोस्त बने रहने के बाद आप ने जो ख्याल रखा वो ही अगर पति पत्नी के समय में समज लेते तो आज ये नोबत न आती।

एक पतिका जिम्मा हैं कि घर की जिम्मेदारी निभाए।सिर्फ बच्चे पैदा करना ही पति का काम नहीं।अब तो टेस्ट ट्यूब बेबी से भी बच्चे पैदा होते हैं।पति होना सिर्फ डिजिग्नेशन नहीं हैं।एक कर्म हैं।आप की बीबी आपको कुछ पूछ रही हैं और आप जवाब नहीं देते।क्या मतलब हैं।जवाब नहीं हैं या देना नहीं चाहते। आप जब जवाब देने से भी दूर हैं तो आप जीवन में रहके क्या करेंगे।

आज हैं उसे देखे।कल जो होगा उसे देख लेंगे।

आज आप ने जो तय किया हैं।उसे निभाओ।पति और पत्नी दोनों एक दूसरे के दोस्त हैं।मेरे एक दोस्त।वो अमेरिका हैं।उन्होंने 25 जनवरी को एक जिम्मेदारी निभाने का फैंसला लिया।फैंसला ये की उन्होंने जो भगवान के साक्षी में तय किया उसे निभाएंगे।मेने कहा आपने तय क्या किया,भगवान के सामने।उन्हों ने बोला मेरे आगे भगवान थे।मेरे पीछे आईना।दोनों कभी जुठ नहीं बताते।उनके सामने मेने तय किया हैं कि में भगवान के सामने बोली चीज को निभाउंगा।मेने कहा तय क्या किया?वो बोले 'मेरे दोस्त को मालूम हैं!मेरा दोस्त मेरी सरकार हैं।कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं जो घर के मंदिर और ड्रेसिंग टेबल के आईने के बीचमें बैठके अपने बाजू वाले दोस्त को भगवान,माताजी या आईने से भी अधिक सच्चा मानके उस दोस्त को अपनी बात बताते हैं।ये फ्रेंड से जो मेरी  बात हुई,मेने यहां लिखी।मेरे दोस्त का नाम में यहाँ बता नही सकता मगर आशा हैं।भगवान गणेश जी इस पवित्र निर्णय में  सहयोग करें।

#दोस्तो की सरकार