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Friday, January 11, 2019

मिस थाईलैंड: सफाई कामदार की बेटी


मा सदैव मा होती हैं।
आप जो तस्वीर देख रहे हैं, वो थाईलैंड की हैं। बात हैं वर्ष 2015 की। वहाँ मिस थाईलैंड की प्रतियोगिता थी। विजेता गोशित किये गए। जिस लड़की को मिस थाईलैंड का खिताब मिला वो साधारण परिवार से तालुक रखती हैं।

उसकी माँ ने उसे पालपोसकर बड़ा किया हैं। उस के पापा नहीं हैं, उसकी मम्मी सफाई कामदार के तौर पे कूड़ा उठानेका काम करती हैं। अपनी ट्रॉफी ओर स्कार्फ लेके जब मिस थाईलैंड आपीने घर को निकली तब उसके पीछे स्थानीय मीडिया का जमावड़ा था। घर जाने से पहले रास्ते में उसने एक औरत के पैरों में अपनी ट्रॉफी रखकर उनका चरण स्पर्श किया, ये औरत उसकी माँ थी।

अपनी पहचान बनाने के लिए जिस ने उन्हें पाला उनके आगे नतमस्तक होना एक आदर्श विचार और व्यक्तित्व की पहचान हैं। आप के पास भी ऐसे फोटो हैं, तो कृपया हम तक पहुंचाए।

सरकुम:

मां...
सिर्फ शब्द काफी हैं।

बा...
सिर्फ विचार काफी हैं।

Thursday, December 27, 2018

मेरे दिलमे तेरी धड़कन...


एक बच्चा।
जो मर रहा था।
उसका हार्ट किसी ओर को दिया गया।
मरने वाले का नाम जॉन स्मिथ था। उसकी मम्मी का नाम रेलया जिम ओर जिसे हार्ट दिया गया उस लड़कीका नाम सोजन्वे।

आप जो तस्वीर देखते हैं, उस तस्वीर में एक माँ अपने बच्चे की हार्टबीट किसी ओर के शरीर में पहली बार सुन रही हैं। इस से अधिक यहाँ मेरे लिए लिखना सम्भव नहीं हैं।

सरकुम:
जिसे हम प्यार करते हैं उस को हम बिना बोले ही समज लेते हैं। जिनसे प्यार करते हैं उनकी धड़कन भी हम महसूस करते हैं। 

Thursday, December 20, 2018

जीवंत जीवन ऐसा होता हैं...

बच्चे को माता-पिता ने राक्षस समझ कर छोड़ दिया था,एक महिला ने सहारा दिया,फिर क्या हुआ पढ़े।

नाइजीरिया के एक गांव में एक 2 साल का लड़का बिलकुल हड्डियों के ढ़ांचे में तब्दील हो गया था. उसके माता-पिता ने उसे अशुम, राक्षस मानकर सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया था. माता -पीता के अंधविश्वास की सज़ा एक मासूम बच्चे को यह मिली की वह बच्चा भूख के मारे कचराकुंडियों जो कुछ मिल जाता था खा लेता और अपनी भूख मिटाने की कोशिश करता रहता था.

नाइजेरिया में मानवतावादी संघठन में काम करनेवाली अंजा रिंगरेन लोवेन ने इस बच्चे (होप) को जब देखा तो भूख और प्यास से बेताब था. अंजा ने उसे पानी पिलाया और खाना खिलाया. फिर उसे अस्पताल ले गई उसका इलाज करवाया. बच्चे के शरीर में कीड़े पड़ चुके थे.

अंजा ने फिर उसे अपने 'अफ्रीकन चिल्ड्रेन्स ऐड एजुकेशन एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन' द्वारा चलायें जा रहे बाल विकास केंद्र में शामिल किया और अब वह वहां दूसरे बच्चों के साथ खुश और स्वस्थ हैं. अंजा ने उसे स्कूल में भी दाखिल कर दिया हैं और वह अब पढ़ाई कर रहा हैं.


अंजा ने स्वंय एक नाइजेरियाई व्यक्ति से विवाह किया हैं और उनको एक लड़का हैं. आज दुनिया में चारों तरफ मानवता की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं ऐसे में अंजा जैसे कुछ लोग मानवता के लिए उम्मीद का किरण साबित होते हैं. ऐसे लोगों से हर किसी ने सबक लेने के ज़रूरत हैं।

सरकुम:

क्या हम ऐसे बच्चों के लिए कुछ कर सकते हैं? सोचा तो हैं, ऐसा काम कुछ हो भी रहा हैं। इसे फैलाने के लिए हमारे पास पैसा नहीं हैं। आज 14 बच्चे ऐसे हमारे पास हैं। पेसो के बगैर समस्या कम नहीं होती। कभी कभी बढ़ती हैं।

Friday, December 14, 2018

एक व्यवस्था: किन्नर

आम आदमी के जन्म से लेकर मृत्यु तक अलग अलग धर्मों के अलग अलग रीती रिवाज होते हैं। जो लग भग हर कोई जानता है क्योंकि इनके रीती रिवाज को हर कोई देख सकता है। लेकिन आज आपको किन्नरों के अंतिम संस्कार को लेकर कुछ जानकारी देंगे जो बहुत ही कम लोग जानते हैं। जी हाँ दोस्तों, कहा जाता है कि किन्नर की दुआओं में बहुत जल्दी असर होता है। 

अगर किसी घर में किसी बच्चे का जन्म होता है तो वहां किन्नर जरूर जाते हैं और बच्चे को अच्छे जीवन की दुआएं देते हैं। आपको बतादें किसी किन्नर के मरने पर उसके अंतिम संस्कार आम आदमी के अंतिम संस्कार के विपरीत होता है और इनका अंतिम संस्कार रात में किया जाता है ताकि आम आदमी देख न सके।


इनका मानना है यदि कोई व्यक्ति किन्नर का अंतिम संस्कार को देखेगा तो वो किन्नर फिर से किन्नर का ही जन्म पाता है। किन्नर के अंतिम संस्कार के पहले मजूद सभी किन्नर बॉडी को जूते चप्पल से भी पीटते हैं। अब आपके मन में ये सवाल जरूर उठेगा कि आखिर किन्नर के अंतिम संस्कार के पहले बॉडी को क्यों पीटते हैं जूते चप्पल से। 

दोस्तों, ये सच्चाई जानकर आपको हैरानी होगी कि किन्नर ऐसा इसलिए करते हैं ताकि उस जन्म में किए सारे पापों का प्रायश्चित हो सके और वो इंसान दोबारा किन्नर के रूप में वापस न आये।

@#@
साथ जीना हैं तो दोबारा भी पैदा होंगे,
अकेले रहने को तो पल भी एक जीवन हैं।
क्यो आस लगाए बैठेंगे किसी के कारण,
हमे जिंदा रहने का वजूद आपसे मिला हैं।

Monday, December 10, 2018

एक ऐसी भी कहानी...

हमारा देश सभी धर्मों का सन्मान करता हैं। हर धर्म को पहचानने के लिए हम सब ने अपने दिमाग में कई तस्वीरें बना रखी हैं। अगर किसी व्यक्ति ने पगड़ी पहन रखी हैं तो वह पंजाबी ही होगा या किसी ने अगर धोती पहनी हैं तो वह हिन्दू होगा या फिर किसी व्यक्ति ने अगर टोपी लगायी हैं और दाढ़ी रखी हैं तो वह मुसलमान ही होगा लेकिन यह सब हमारे दिमाग का सिर्फ एक मज़हबी फ़ितूर मात्र हैं।पर कभी आपने सोचा कि मुस्लिम सिर्फ दाढ़ी क्यों रखते हैं मूछें नहीं? आईएं आज हम आप को बताते हैं मुस्लिम धर्म से जुड़ी एक दिलचस्प बात। कहा जाता हैं कि हिन्दू धर्म ही सबसे पुराना और सनातन धर्म हैं। 
हिन्दू धर्म का इतिहास कितना पुराना हैं इस बात की पुष्टि अभी तक नहीं हुई हैं, वही इस्लाम धर्म लगभग 1400 साल पुराना हैं।वेद व्यास जी अभी तक 18 पुराण लिख चुके हैं और भविष्य पुराण उनमे से एक हैं। हिन्दू धर्म के अंतर्गत कई तरह के पुराण और ग्रन्थ लिखे गए हैं और उन्ही ग्रन्थों में से एक भविष्य पुराण में इस्लाम से जुड़ी भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी। इस पुराण में लगभग 50000 श्लोक थे लेकिन तक्षशिला विश्व विद्यालय में रखे इस ग्रन्थ को मुग़ल शासन काल में जला दिया गया पर उस किताब में से 129 अध्याय और लगभग 14000 श्लोक बच गए थे।इस किताब में यह पहले से ही उल्लेखित था कि उस वक़्त के तात्कालीन राजा हर्षवर्धन के साथ और कई राजा, अलाउदीन, तुगलक, तैमुर, बाबर, और अकबर जैसे मुगलों का इस काल आना होगा। इस पुराण में ईसाई धर्म के प्रमुख ईसा मसीह के जन्म का भी प्रमाण मिलता हैं।लेकिन इससे पहले भी अपने भारत देश की शक्ति कम होती देख एक और राजा हुए, जो राजा भोज के नाम से जाने गए और उन्होंने तय किया कि अपनी मातृभूमि की रक्षा करने के लिए दुनिया जीतने निकलना ही पड़ेगा। अपनी दस हज़ार सेना को साथ लेकर कई विद्वानों और कालीदास जैसे बुध्हिजीवी राजा के साथ आगे बढ़े।सिन्धु नदी पार करके गंधार और कशमीर में शठ राजाओं को हरा कर राजा भोज की सेना ईरान और अरब होते हुए मक्का पहुची। वहां के मरुस्थल में पहुच कर जब वहां उन्होंने एक शिवलिंग देखा तो उसकी पूजा करते हुए वह भगवान् शिव का ध्यान करने लगे।भगवान् शिव भी राजा भोज की प्रार्थना सुनकर उनसे बात करने आये और उनसे कहा कि तुम्हे यहाँ नहीं आना चाहियें था वत्स। तुम्हे मक्केश्वेर , जिसे आज हम मक्का के नाम से जानते हैं उसके बजाये उज्जैन महाकालेश्वेर को पूजना चाहियें। 

आगे कहा गया हैं कि, इस स्थान पर अब एक राक्षस त्रिपुरासुर, जिसका मैंने वध किया था, उसके मानने वालें लोगों को असुरराज बाली से संरक्षण प्राप्त हो रहा हैं और इस समुदाय का प्रमुख उत्पात मचा रहा हैं इसलिए तुम इस मलेच्छ जगह से चले जाओ।भगवान् शिव की बात सुनकर राजा भोज जब लौटने लगे तब “महा-मद” नामक व्यक्ति वहा आ गया और राजा भोज से कहा कि आप का आर्यधर्म विश्व का सर्वश्रेष्ट धर्म हैं, लेकिन मैं आपके शिव की मदद से ही एक ऐसे धर्म की स्थापना करूँगा जो अपनी क्रूरता के लिए जाना जायेगा। इसे मानने वालो को अपना लिंगाछेदन (खतना) कर के, बिना तिलक और बिना मुछों के सिर्फ दाढ़ी रखना अनिवार्य होगा। मेरा यह सम्प्रदाय उन्हें बहुत प्रिय होगा जिसे कुछ भी खाना ,जिसमे मांस स्वीकार्य होगा और अपनी इस बात का यकीन दिलाने के लिए मैं आपके देश में आकर अपने मूंछ के बाल को त्याग दूँगा।

कश्मीर के हजरत बल मज्जिद में आज भी हजरत मोहम्मद के मुछों के उन बालों को सुरक्षित रखा गया हैं। हजरत के उस बाल को “मोई-ए-मुकद्दस” के नाम से जाना जाता हैं। हर मुस्लिमों के लिए उस बाल का दर्शन हो सके इसके लिए साल में एक या दो बार ही उस बक्से को खोला जाता हैं।

कुछ बाते देखी और पढ़ी हैं।कुछ बाते कहासे खोजी गई हैं।बात सिर्फ यरे हैं कि सभी धर्म एक दूसरे के सहयोग से बढ़ सकते हैं।

 और ग्रन्थ लिखे गए हैं और उन्ही ग्रन्थों में से एक भविष्य पुराण में इस्लाम से जुड़ी भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी। इस पुराण में लगभग 50000 श्लोक थे लेकिन तक्षशिला विश्व विद्यालय में रखे इस ग्रन्थ को मुग़ल शासन काल में जला दिया गया पर उस किताब में से 129 अध्याय और लगभग 14000 श्लोक बच गए थे।
इस किताब में यह पहले से ही उल्लेखित था कि उस वक़्त   
लेकिन इससे पहले भी अपने भारत देश की शक्ति कम होती देख एक और राजा हुए, जो राजा भोज के नाम से जाने गए और उन्होंने तय किया कि अपनी मातृभूमि की रक्षा करने के लिए दुनिया जीतने निकलना ही पड़ेगा। अपनी दस हज़ार सेना को साथ लेकर कई विद्वानों और कालीदास जैसे बुध्हिजीवी राजा के साथ आगे बढ़े।
सिन्धु नदी पार करके गंधार और कशमीर में शठ राजाओं को हरा कर राजा भोज की सेना ईरान और अरब होते हुए मक्का पहुची। वहां के मरुस्थल में पहुच कर जब वहां उन्होंने एक शिवलिंग देखा तो उसकी पूजा करते हुए वह भगवान् शिव का ध्यान करने लगे।
भगवान् शिव भी राजा भोज की प्रार्थना सुनकर उनसे बात करने आये और उनसे कहा कि तुम्हे यहाँ नहीं आना चाहियें था वत्स। तुम्हे मक्केश्वेर , जिसे आज हम मक्का के नाम से जानते हैं उसके बजाये उज्जैन महाकालेश्वेर को पूजना चाहियें। 

आगे कहा गया हैं कि, इस स्थान पर अब एक राक्षस त्रिपुरासुर, जिसका मैंने वध किया था, उसके मानने वालें लोगों को असुरराज बाली से संरक्षण प्राप्त हो रहा हैं और इस समुदाय का प्रमुख उत्पात मचा रहा हैं इसलिए तुम इस मलेच्छ जगह से चले जाओ।
भगवान् शिव की बात सुनकर राजा भोज जब लौटने लगे तब “महा-मद” नामक व्यक्ति वहा आ गया और राजा भोज से कहा कि आप का आर्यधर्म विश्व का सर्वश्रेष्ट धर्म हैं, लेकिन मैं आपके शिव की मदद से ही एक ऐसे धर्म की स्थापना करूँगा जो अपनी क्रूरता के लिए जाना जायेगा। इसे मानने वालो को अपना लिंगाछेदन (खतना) कर के, बिना तिलक और बिना मुछों के सिर्फ दाढ़ी रखना अनिवार्य होगा। मेरा यह सम्प्रदाय उन्हें बहुत प्रिय होगा जिसे कुछ भी खाना ,जिसमे मांस स्वीकार्य होगा और अपनी इस बात का यकीन दिलाने के लिए मैं आपके देश में आकर अपने मूंछ के बाल को त्याग दूँगा।

कश्मीर के हजरत बल मज्जिद में आज भी हजरत मोहम्मद के मुछों के उन बालों को सुरक्षित रखा गया हैं। हजरत के उस बाल को “मोई-ए-मुकद्दस” के नाम से जाना जाता हैं। हर मुस्लिमों के लिए उस बाल का दर्शन हो सके इसके लिए साल में एक या दो बार ही उस बक्से को खोला जाता हैं।

कुछ बाते देखी और पढ़ी हैं।
कुछ बाते कहासे खोजी गई हैं।
बात सिर्फ यरे हैं कि सभी धर्म एक दूसरे के सहयोग से बढ़ सकते हैं।

सरकुम:

मुजे धर्म पसंद हैं।
धर्म के द्वारा मेने जो कर्म किये हैं वो भी मेने ही किये हैं। हिन्दू हु, ओर गणेश जी को सामने रखकर जो कहा हैं, निभाया हैं।

धर्म मेरी आस्था, आस्था से जीवन।
जीवन से सरोकार, जीवन ही सरकार।

Sunday, December 9, 2018

लोग हैं...



तू अपनी खूबियां ढूंढ,
कमियां निकालने के लिए
                                    लोग हैं |

अगर रखना ही है कदम तो आगे रख,
पीछे खींचने के लिए
                                    लोग हैं |

सपने देखने ही है तो ऊंचे देख,
नीचा दिखाने के लिए
                                    लोग हैं |

अपने अंदर जुनून की चिंगारी भड़का,
जलने के लिए
                                    लोग हैं |

अगर बनानी है तो यादें बना,
बातें बनाने के लिए
                                 लोग हैं |


तू बस संवार ले खुद को,
आईना दिखाने के लिए
                                    लोग हैं |

खुद की अलग पहचान बना,
भीड़ में चलने के लिए
                                    लोग है |

तू कुछ करके दिखा दुनिया को,
तालियां बजाने के लिए
                                    लोग हैं |

Wednesday, October 24, 2018

आखरी मौका...


वो रिश्ता ही नहीं जो एक तरफा हो। सोच और रिश्ते बदलने के लिए नहीं बदलाव लाने के लिए होते हैं।अगर कोई एक व्यक्ति किसी बात को अपने स्वाभिमान से जोड़ता हैं तो उसे भी समझना चाहिए के स्वाभिमान हर किसी का होता हैं।

अगर कोई जवाब नहीं दे रहा हैं उसका मतलब ये नहीं कि वो बोलेगा नहीं। हो सकता हैं अभी वो बोलना नहीं चाहते। कोई भोंकता हैं तो उसके सामने भोंकना आवश्यक नहीं हैं।

एक फोटो किसी की औकात दिखा देती हैं।
कुछ दिनों पहले की बात हैं। में एक कॉंफ़र्न्स में था। वहां किसी जे मेरे साथ फोटो खिंचवाई। जिस ने सवाल उठाया वो तो #मी2 तक पहुंच गए। 
वहाँ बहोत सारे लोग थे।
मेरे साथ किसी ने प्यार से तो किसी ने दोस्ती में या तो किसी ने भड़ास निकालने के लिए फोटो खिंचवाई होंगी। बहोत सारे कॉमन दोस्त आज कल सोसियल मिडियामें हैं। किसी ने वो फोटोग्राफ देखे होंगे। बड़े लोगो को दिखाने वाले भी सेवक होते हैं। 

अब हुआ ये की...
वो फोटो शेर किये गए।
बस, ग्रुप में बैठे हुए फोटो थे।
शायद उस दिन मेरे 500 से अधिक फोटो शेर हुए होंगे।मगर अपनी विफलताओं को छुपाने वाले मुजे सवाल करने लगे। 

1.क्या आइआइएम आप का हैं। 
2. आप आईआईएम से कैसे जुड़ सकते हैं।
3.आप आईआईएम में दूसरों को चांस क्यो नहीं देते हैं।


सोसियल मीडिया में बहोत सारी कॉमेंट हुई। उसमें से कुछ कॉमेंट भद्दी कही जा सकती हैं। जो लोगो ने अच्छी नजर से उसे देखा उन्होंने अच्छी कॉमेंट की।कुछ लोगो ने अपने विचार मुझपे प्रस्तुत किये। एक महानुभव जिनके पास मेरे लिए सोचने के अलावा कोई काम नहीं हैं। उन्होंने तो #मी2 तक का सोच डाला। मेने उस वाकिए को बहोत दिनों तक जेला ओर महसूस किया।

500 फोटोग्राफ खिंचवाए होंगे।
5 की चर्चा करने वाले बहोत थे। उसमें 1 की तो सलोने हद करदी। आईआईएम के बारे में सवाल थे।

तो जानिए...


आईआईएम एक ऐसी संस्था हैं जो नए विचारों को पुरस्कृत करता हैं। किसान से लेकर कलेक्टर ओर कोई भी वहाँ अपेक्षित हैं, अगर कुछ अच्छा और नया किया हैं। वहां किसी के बाप की नहीं चलती। 

आज मेरे पास समय नहीं हैं।
मुजे ये भी मालूम हैं की मुजे से भिड़कर तुम्हारा ही सन्मान बढ़ेगा। में ये तक तुम्हे देना नहीं चाहता। ओर हा स्कूल छोड़ा नही हैं। आज भी कक्षा 1 से 10 के किसी भी विषय में (मुजे से सवाल करने वाले से अधिक) जनता हूं। 

2 गिनिस रिकॉर्ड
3 एशिया रिकॉर्ड
4 नेशनल रिकॉर्ड
3 नेशनल एवॉर्ड

पूरे भारत के 70 हजार शिक्षक और 40 हजार बच्चो का नेटवर्क बना पाए हैं।2020 तक 1 लाख शिक्षक और 75 हजार बच्चो तक पहुंचने का इरादा हैं।

मुजे जो सन्मान मील हैं वो 2014 तक के हैं।

ये सब 2014 तक का हैं।
ब्रिटिश काउंसिल ने 4 साल रिसर्च करके मुजे होनाररी डॉक्टरेट दिया हैं। आज तक कभी आईआईएम में मेरा सन्मान नहीं हुआ। न होगा न होने दूंगा। 

गूजरात के 3 टीचर्स को राष्ट्रपति भवन की गेलेरी में स्थान दिलवा पाए हैं। आईआईएम के माध्यम से 16 टीचर्स राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा पाए हैं। 40 को नेशनल इनोबेशन तक पहुंचा पाए हैं।

जो सिर्फ बाते करते हैं।
वो सिर्फ बाते करे। काम करना हैं तो साथ में जुड़जाओ। समय आने पर आपका भी सन्मान होगा। आज जिनका हुआ हैं या हो पाया हैं उन्होंने सिर्फ FB में बाते नहीं कि ओर भी बहोत किया हैं। आज कुछ नहीं कहता हूं,उसका मतलब ये नहीं कि कह नहीं पा रहा हूँ। मानलो की आप को मौका दे रहा हूँ। आज के बाद बोलने में ओर लिखने में मुजे सीधा बीचमें न गुसेटो, वरना आप कुछ भी करने के काबिल न रहोगे। मुजे रोज पढ़ने वालों को बुरा लग सकता हैं। ऐसा पढ़ने की ओर मुजे लिखने की आदत नहीं हैं।


बस,
प्यार से...


सरकुम:
संवाद के तरीके होते हैं।
आप जैसा करोगे,वैसा ही में करूँगा।



शरद का स्वागत



चारुचंद्र की चंचल किरणें,
खेल रहीं हैं जल थल में,


स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है
अवनि और अम्बरतल में।

पुलक प्रकट करती है धरती,
हरित तृणों की नोकों से,

मानों झूम रहे हैं तरु भी,
मन्द पवन के झोंकों से।

सरकुम:
बोलने से बात शुरू होती हैं।
न बोलने से बात खत्म नहीं होती।
समय तो आता ओर जाता रहता हैं,
कभी यादे तो कभी अहसास से हाश होती हैं।

एक चमत्कार