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Wednesday, October 24, 2018

आखरी मौका...


वो रिश्ता ही नहीं जो एक तरफा हो। सोच और रिश्ते बदलने के लिए नहीं बदलाव लाने के लिए होते हैं।अगर कोई एक व्यक्ति किसी बात को अपने स्वाभिमान से जोड़ता हैं तो उसे भी समझना चाहिए के स्वाभिमान हर किसी का होता हैं।

अगर कोई जवाब नहीं दे रहा हैं उसका मतलब ये नहीं कि वो बोलेगा नहीं। हो सकता हैं अभी वो बोलना नहीं चाहते। कोई भोंकता हैं तो उसके सामने भोंकना आवश्यक नहीं हैं।

एक फोटो किसी की औकात दिखा देती हैं।
कुछ दिनों पहले की बात हैं। में एक कॉंफ़र्न्स में था। वहां किसी जे मेरे साथ फोटो खिंचवाई। जिस ने सवाल उठाया वो तो #मी2 तक पहुंच गए। 
वहाँ बहोत सारे लोग थे।
मेरे साथ किसी ने प्यार से तो किसी ने दोस्ती में या तो किसी ने भड़ास निकालने के लिए फोटो खिंचवाई होंगी। बहोत सारे कॉमन दोस्त आज कल सोसियल मिडियामें हैं। किसी ने वो फोटोग्राफ देखे होंगे। बड़े लोगो को दिखाने वाले भी सेवक होते हैं। 

अब हुआ ये की...
वो फोटो शेर किये गए।
बस, ग्रुप में बैठे हुए फोटो थे।
शायद उस दिन मेरे 500 से अधिक फोटो शेर हुए होंगे।मगर अपनी विफलताओं को छुपाने वाले मुजे सवाल करने लगे। 

1.क्या आइआइएम आप का हैं। 
2. आप आईआईएम से कैसे जुड़ सकते हैं।
3.आप आईआईएम में दूसरों को चांस क्यो नहीं देते हैं।


सोसियल मीडिया में बहोत सारी कॉमेंट हुई। उसमें से कुछ कॉमेंट भद्दी कही जा सकती हैं। जो लोगो ने अच्छी नजर से उसे देखा उन्होंने अच्छी कॉमेंट की।कुछ लोगो ने अपने विचार मुझपे प्रस्तुत किये। एक महानुभव जिनके पास मेरे लिए सोचने के अलावा कोई काम नहीं हैं। उन्होंने तो #मी2 तक का सोच डाला। मेने उस वाकिए को बहोत दिनों तक जेला ओर महसूस किया।

500 फोटोग्राफ खिंचवाए होंगे।
5 की चर्चा करने वाले बहोत थे। उसमें 1 की तो सलोने हद करदी। आईआईएम के बारे में सवाल थे।

तो जानिए...


आईआईएम एक ऐसी संस्था हैं जो नए विचारों को पुरस्कृत करता हैं। किसान से लेकर कलेक्टर ओर कोई भी वहाँ अपेक्षित हैं, अगर कुछ अच्छा और नया किया हैं। वहां किसी के बाप की नहीं चलती। 

आज मेरे पास समय नहीं हैं।
मुजे ये भी मालूम हैं की मुजे से भिड़कर तुम्हारा ही सन्मान बढ़ेगा। में ये तक तुम्हे देना नहीं चाहता। ओर हा स्कूल छोड़ा नही हैं। आज भी कक्षा 1 से 10 के किसी भी विषय में (मुजे से सवाल करने वाले से अधिक) जनता हूं। 

2 गिनिस रिकॉर्ड
3 एशिया रिकॉर्ड
4 नेशनल रिकॉर्ड
3 नेशनल एवॉर्ड

पूरे भारत के 70 हजार शिक्षक और 40 हजार बच्चो का नेटवर्क बना पाए हैं।2020 तक 1 लाख शिक्षक और 75 हजार बच्चो तक पहुंचने का इरादा हैं।

मुजे जो सन्मान मील हैं वो 2014 तक के हैं।

ये सब 2014 तक का हैं।
ब्रिटिश काउंसिल ने 4 साल रिसर्च करके मुजे होनाररी डॉक्टरेट दिया हैं। आज तक कभी आईआईएम में मेरा सन्मान नहीं हुआ। न होगा न होने दूंगा। 

गूजरात के 3 टीचर्स को राष्ट्रपति भवन की गेलेरी में स्थान दिलवा पाए हैं। आईआईएम के माध्यम से 16 टीचर्स राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा पाए हैं। 40 को नेशनल इनोबेशन तक पहुंचा पाए हैं।

जो सिर्फ बाते करते हैं।
वो सिर्फ बाते करे। काम करना हैं तो साथ में जुड़जाओ। समय आने पर आपका भी सन्मान होगा। आज जिनका हुआ हैं या हो पाया हैं उन्होंने सिर्फ FB में बाते नहीं कि ओर भी बहोत किया हैं। आज कुछ नहीं कहता हूं,उसका मतलब ये नहीं कि कह नहीं पा रहा हूँ। मानलो की आप को मौका दे रहा हूँ। आज के बाद बोलने में ओर लिखने में मुजे सीधा बीचमें न गुसेटो, वरना आप कुछ भी करने के काबिल न रहोगे। मुजे रोज पढ़ने वालों को बुरा लग सकता हैं। ऐसा पढ़ने की ओर मुजे लिखने की आदत नहीं हैं।


बस,
प्यार से...


सरकुम:
संवाद के तरीके होते हैं।
आप जैसा करोगे,वैसा ही में करूँगा।



शरद का स्वागत



चारुचंद्र की चंचल किरणें,
खेल रहीं हैं जल थल में,


स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है
अवनि और अम्बरतल में।

पुलक प्रकट करती है धरती,
हरित तृणों की नोकों से,

मानों झूम रहे हैं तरु भी,
मन्द पवन के झोंकों से।

सरकुम:
बोलने से बात शुरू होती हैं।
न बोलने से बात खत्म नहीं होती।
समय तो आता ओर जाता रहता हैं,
कभी यादे तो कभी अहसास से हाश होती हैं।

ગંદો માણસ