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Thursday, August 9, 2018

ऐसा ही होता हैं....


बच्चे अनुकरण से सीखते हैं।
हम जैसा करेंगे बच्चे वैसा ही करेंगे।आज कल जब मम्मी पापा मोबाइल नहीं छोड़ रहे हैं तो बच्चे केसे किताब पढेंगे।
एक फोटोग्राफ जो मुजे किसी ने भेजा हैं।एक माँ अपने बच्चों के साथ प्रवासमें हैं।जहाँ बैठने की जगह नहीं हैं,वहाँ बच्चो के साथ बैठकर खुद भी किताब पढ़ती हैं।अगर मा के हाथों में मोबाइल होता तो बच्चा भी मोबाइल के लिए तैयार था।यहाँ माँ भी किताब पढ़ती हैं।बच्चा भी उन्हें देखकर वैसा ही काम करेगा जो उसकी मम्मी कर रही हैं।

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आज भी हम वोही करते हैं,जो हमने देखा हैं।हम वैसा ही करना चाहिए जो हमने न सुना न देखा हो।

Tuesday, August 7, 2018

प्रात : वंदन ...


जो जिसको चाहे
वो उसे कब हासिल होती है..!

जिम्मेदारियां अक्सर..
ख्वाहिशों की कातिल होती हैं..!


जिम्मेदारी एक ऐसा शब्द हैं जो सुनने में अच्छा हैं मगर...
कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी बात को जता नहीं सकते मगर वो उसमें खरे उतरते हैं।कुछ लोग खास होते हैं।कुछ तो खासम खास होते हैं।कुछ इस लिए याद रहते हैं,की उन्हें हम भूल नहीं सकते हैं।कुछ इस लिए भुलाने पड़ते हैं कि वो भूलना चाहते हैं।कुछ लोगो को उनकी जिम्मेदारी का अहसास नहीं होता हैं।उन्हें हर वख्त बस... अपनी ही तस्वीर दिखती हैं।शायद वो जिम्मेदारी का अर्थ नहीं समझते होंगे।

किसी को मिलना,उसे समझना और समजाना सरल नहीं हैं।मगर कई बार एक शब्द सब कुछ बिगाड़ देता हैं,वो शब्द हैं 'जिम्मेदारी'।
मेरी क्या जिम्मेदारी?
कोई मेरी जिम्मेदारी नहीं ले रहा हैं।
मुजे कुछ होगा तो मेरे पीछे कोंन हैं।
तुम अपनी जिम्मेदारी निभाना भूल चुके हो।
मेरी जिम्मेदारी लेने के बाद तुम कितनी जिम्मेदारी निभाओगे?
में सब कुछ छोड़ दु मगर मेरी जिम्मेदारी आप कैसे निभाएंगे।


जिम्मेदारी से जुड़े कुछ और भी सवाल हो सकते हैं।प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी अलग अलग होती हैं।जिम्मेदारी स्वीकारने का विकल्प नहीं है,जिम्मेदारी निभानी भी एक जिम्मेदारी हैं।कुछ जिम्मेदारी ही हमारी ख्वाहिशो को तोड़ देती हैं।

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कुछ जिम्मेदारियां लेनी नही,निभानी होती हैं।एक बाप अपनी बच्ची के लिए क्यो बुरा सोचेगा?पापा की बात मानो...

Thursday, August 2, 2018

हार ओर जीत



मेरी खुशी।
आज का एक पोस्टर हैं।
जो आप की खुशी केलिए हार मानले,उसे आप कभी हर नहीं सकते।बस,इसी बयान के आधार पर एक बात तय हैं।हमे ऐसे लोगो की खुशी के लिए हारना पड़ता हैं,जो जीत जाए इसके लिए हम दुआ करते हैं।कुछ दिन ,महीने या साल गुजर जाते हैं मगर व्यक्ति सदैव अपने दुःख वाले दिनों को याद करता हैं।जिसनके लिए हम जिंदा हैं,उस को हारते हुए हम कैसे देख सकते हैं।समय,स्थान या परिस्थिति या पूर्व जन्म के प्रकोप से हम दिक्कतों का सामना कर रहे होते हैं।मगर हमे सिकुड़ कर बैठना नहीं हैं।वो ही जीतता हैं,जो हरा पता हैं।

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मेने इस तरह से मेरी जिंदगी को आसान कर दिया,
किसी से माँगली माफी, किसी को माफ करदिया।

Monday, March 12, 2018

अब आगे...

ऋचा ने गाया।
में कहता हूं कि अच्छा गाया।
उसे संतोष नहीं हुआ हैं।वो कहती थी कि में ओर अच्छा कर सकती थी।मगर नहीं कर पाई।यहां से सात आर्टिस्ट को पसंद किया जाएगा।उसमें से विजेता पसंद होंगे।गुजरात भ्रह्म समाज द्वारा आयोजित ये दूसरा पड़ाव हैं।बहोत सारी सामाजिक प्रवृत्ति से जुड़ा ये ट्रस्ट संगीत में भी विशेष कर रहा हैं।
कुछ दिनोंमें तय होगा की मेगा फाइनल में रुचा गायेगी की नहीं।अगर वो नहीं भी गाती हैं तो मुजे कोई दुख नहीं हैं।उस के पास ओर भी वख्त हैं।वो जरूर कुछ खास करेगी।आज अगर में कहूँगा की ऋचा गायेगी तो मुजे ख़ुशी होगी तो एक बात तय हैं कि उसे भी खुशी होगी।अपने परफॉर्मेंस से वो ज्यादा खुश नहीं थी।फिरभी देखते हैं।मुजे यकीन हैं कि उसने अच्छा गाया था।और आगे इस कार्यक्रम में या अन्य कार्यक्रम में गायेगी।
शुभमस्तु...
# ऋचा can मुमकिन हैं।

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अगर हम सफल नहीं होते हैं,तो सफलता थोड़ी दूर हैं,असंभव नही हैं।सख्त परिश्रम ही हमे निष्फलता से दूर करता हैं।

Wednesday, November 29, 2017

आज की दुनिया


आज की सुबह।
मेरी जिंदगी की नई सुबह।
रात होती हैं तो लगता हैं हाश होगी।
जब,रात गुजर जाती हैं तो सुबह होती हैं।वो सुबह कभी तो आएगी...एक अद्भुत गाना।

सुबह से निकले हैं,राही रात को पहुचेंगे,
देखेंगे,समजेंगे साथी,नए तरीके खोजेंगे।
#राही:व्यक्ति
आज सुबह मेरी अमदावाद में होंगी।मेरे सुबह सुबह ही अहमदाबाद शांत लगता हैं।सूर्योदय से पहले अगर खिड़की नहीं खुली तो कब 10 बजे व्व मालूम नहीं पड़ता।शहेर में दिन नही समय चलता हैं।रात नही होती,रात का सन्नाटा भी नहीं होता।रडे ऐसी ऑफिसमें बारिश,गर्मी या ठंडी समान हैं।यह किसी से कोई भेदभाव नहीं हैं।हाला की अमदावाद शहर का प्रत्येक व्यक्ति चलता हैं तो ही जाके शहर भागता हैं।
आज का दिन मेरे कुछ खास दिनोंमें से एक हैं।
अमदावाद में पहुंचने पर जैसे आज खुशी हुई।
मेरी सरकार:मेरा अमदावाद
#Thanks दादा दी...
#Thanks सरकार...
91.1 गुडमोर्निंग अमदावाद...

Sunday, November 26, 2017

शादी की पत्रिका


एक व्यक्ति।
जो काम करता हैं।
बस,उसी में जुड़ा रहता हैं।
स्वयं उसका स्वभाव ही ऐसा हो जाता हैं।बात हैं चेतन पटेल की।कल उसकी शादी थी।में भी इस ख़ुशिका हिस्सा बना।मेरी खुशियों से जुड़ी नहीं आपको चेतन की शादी की बात करूंगा।जो चेतन को जानते हैं उन्हें ये बात नई नहीं लगेगी।चेतन इनोवेशन को ही खोजता ओर अमल करता और करवाता हैं।
उसकी शादी की पत्रिका को उसने बहोत सुंदर तरीके से छापा हैं।आज तक हुए बहोत सारे इनोवेशन में से कुछ पसंदीदा इनोबेशन उसने अपनी पत्रिका में छपवाये थे।आप को आए पत्रिका देखके ही चेतन की जीवन शैली के बारे में मालूम पड़ता हैं।
शादिमें एक बात जो मेने तब देखी जब शादी के वख्त गानो के साथ वहां की महिलाएं धार्मिक श्लोक ओर स्तुतिका पठन सामूहिक तोर पे करती दिखी।
चेतन ओर आवृत्ति को अपनी शादीशुदा जिंदगी के लिए शुभकामना।
#चेतनावृत्ति...