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Tuesday, September 1, 2020

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आज सारे विश्व में कोरोना महामारी हैं। दुनिया के ज्यादातर देश इस कि जपेट में आ चुके हैं। इसी बजह से आज सारी दुनिया का वेपार एवं व्यवहार जैसे रुका पड़ा हैं। सबसे प्रभावित आगड़ कोई विभाग है तो शिक्षा,सुरक्षा एवं व्यापार। इन में मुजें शिक्षा से जुड़े रहनेका अवसर मिला हैं।आज शिक्षा में ओर 

विश्व मे कोरोना महामारी चल रही हैं। सारी दुनिया इस से ग्रस्त हैं। कहिए तो गुजरात की शिक्षा भी इस से अछुती नही हैं। कोरोना के कारण आज भी स्कूल शुरू नही हुए हैं। यहां यह भी स्पस्ट करना आवश्यक है कि गुजरात में स्कूल बन्ध हैं, शिक्षा कार्य नहीं।


गुजरात एक समृद्ध राज्य हैं। #GUCSET के माध्यम से #BISAG की सहायता से ओर कुछ सरकार से जुड़े कर्मवीरों की तरफ से कुछ ऐसा सोचा गया जिस से शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा कार्य न रुके। आप गिनते हुए थक जाओगे।

दूरदर्शन...यू ट्यूब...work  on प्लेस...QR कोड,वर्च्युअल क्लास जैसी ओर ICT के जानकार शिक्षकों के माध्यम से अलग अलग और बहोत सारी ऐप या उपकरण के माध्यम से ये संभव हुआ हैं। आज हर कक्षा के भिन्न भिन्न विषय के सभी एकम को बच्चो तक पहुंचाने का प्रयास हो रहा हैं।

सरकार की संवेदनशीलता का यह एक परिचय है कि शिक्षामंत्री एवं शिक्षा सचिव इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए सभी तरह की समस्या के सामने सहायता प्रदान करते हैं। जहाँ जगह मिली वहाँ आज किसी न किसी कक्षा का कोई न कोई विषय चलता है जिस का रिकॉर्डिंग भी हो रहा है और तुरंत इसे एडिट किया जा रहा हैं। सचिव श्री विनोद राव जी के मार्गदन के साथ SPD पी.भारती की प्रेरणा एवं GCERT के नियामक डॉ टी.एस।जोशी एवं OIC TT श्री प्रकाशभाई त्रिवेदी के सहयोग से आज स्कूल बन्ध है,शिक्षा का काम रुका नहीं हैं।

आज के हालात में यही एक रास्ता है जिसे सरकार ने अमल किया हैं। आप 'Gujarat e class से यु ट्यूब के ऊपर कक्षा 3 से सभी कक्षा के लिए कार्यक्रम यहाँ मिलते हैं। आज से कक्षा एक ओर दो के शैक्षिक कार्यक्रम भी दूरदर्शन से प्रसारित होंगे और यू ट्यूब पे अपलोड किए जाएंगे।इस मुहिम में आप का सहयोग आवश्यक हैं। आप अपने सुजाव भी भेज सकते हैं।


Friday, May 24, 2019

विजया मुले


जो दूरदर्शन को नजदीक से फॉलो करते रहे हैं, उन्हें टीवी का मशहूर ऐनिमेटेड गाना ‘एक चिड़िया अनेक चिड़िया’ बेशक याद होगा। 80 दशक के अंत और 90 की शुरूआत में यह गाना घर-घर पॉपुलर हुआ था। गाने को रोजाना दूरदर्शन पर प्रसारित किया जाता था। इस फेमस गाने का निर्देशन कर मशहूर हुईं फिल्ममेकर विजया मुले का 98 साल की उम्र में रविवार को उनके दिल्ली स्थित आवास पर निधन हो गया।

विजया मुले इस 7 मिनट की फिल्म के कारण ही लोगों के दिलों में जगह नहीं बनाई थी बल्कि वह अपने अन्य कामों के लिए भी मशहूर हैं। मुले को बेस्ट सिनेमा राइटिंग के लिए नेशनल अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। यह केवल फिल्ममेकर नहीं बल्कि फिल्म हिस्टोरियन भी थीं।

मुले ने डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकिंग में भी हाथ अजमा चुकी हैं।। कहा जा जाता है कि विजया मुले पूर्व दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की करीबी दोस्त भी थीं। मुले पटना फिल्म सोसायटी की फाउंडर मेंबर भी रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली फिल्म सोसायटी में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। फिल्मों के अलावा मुले ने शिक्षा क्षेत्र में भी काम किया था।

Wednesday, May 15, 2019

अपनी स्किल को फैलाए...


सर्जनात्मकता किसीबकी जागीर नहीं हैं।हम देखने का नजरिया बदलना हैं।ऐसा करने से हम नया सर्जन कर पाएंगे।हमारे आसपास ऐसी बहोत सी चीजें ऐसी होती हैं,  जिससे हम अच्छे से नई चीज बना सकते हैं।
महाराष्ट्र सोलापुर से कई दोस्तो से में जुड़ा हूं।एक शिक्षक हैं जो रोजाना नई चीजें बना लेते हैं। कुछ लोग जो ऐसी चीजें बना लेते हैं, वो अपने घर का सुशोभन कर सकता हैं। जो चीज हमारे काम की नहीं हैं उस के सामने ऐसी फिजूल की सामग्री से सब जैसे नया बना सकते हैं।ऐसे सर्जकों को हम स्थान देना चाहते हैं।अगर आप के पास कोई ऐसी स्किल हैं तो आप हमारा संपर्क करें।

#Bno...

किसी टूटी हुई चीज से कुछ नया बनाना।
किसी भी टूटे हुए व्यक्ति को खड़ा करना।
किसी को टूटते हुए बचाने के लिए खुद टूट जाना।

ये तीनो कला हैं। कुछ लोग तोड़ने में तो कुछ लोग टूटने में कौशल्य रखते हैं।

Tuesday, April 16, 2019

बर्ड फिडर में नवाचार

हरे रंग की प्लेट


इनोवेशन क्या हैं।
इनोवेशन कैसे होते हैं।
मुजे अगर कुछ सोचना हैं तो किस ओर सोचु? आए और ऐसे अनेक सवाल होते हैं। ऐसे ही सवालों के लिए एक बात यहाँ में रखता हूँ।

संस्थान का नाम:
युवा ग्रीन फाउंडेशन,
खरसदा : महेसाणा

संस्थान का नाम:
कावेरी दे केर स्कूल, महेसाणा।


आप कहेंगे एक स्कूल और एक फाउंडेशन में क्या नवाचार हैं। बात ये हैं कि इन लोगोने पिछले साल 40.000 बर्ड फीडर दिए थे। उनकी लागत 38 रुपया थी,मगर वो सबको फ्री में दे रहे थे। अगर परिणाम लक्षी कार्यकर के लिए अगर कहे तो वो किये गए काम को पीछे मुड़कर देखते हैं। युवाग्रीन फाउंडेशन के सहयोगी एवं मार्गदर्शक श्री के.वी.पटेल ने इसे देखा। उनके लिए पिछले वर्ष के काम का परिणाम ओर गलतियां देखनेका यह समय था।उन्होंने देखा कि प्लास्टिक से बने पिछले साल का बर्ड फीडर थे वो 20%से ज्यादा लोगो के पास नहीं थे। वो टूट चुके थे या  कुडे के समानमें थे। अब सवाल ये था कि प्लास्टिक के इस्तेमाल ओर डिजाइन के कारण अगर उसका उपयोग नहीं हो रहा हैं तो वो सिर्फ प्लास्टिक हैं।प्लास्टिक पर्यावरण को नुकसान पहुंचता हैं। अगर ये पूरा प्लास्टिक स्पेरो या किसी पक्षी के लिए काममे नहीं हैं तो वो सिर्फ प्लास्टिक हैं। हर दाई में 70 ग्राम प्लास्टिक से बनी चीज। श्री के.वी.पटेल और KDS के डायरेक्टर श्रीमती जयश्रीजी पटेल ने साथ मिलकर सोचा। उन्होंने ऐसी डिजाइन के बारे में सोचा जो की एक्सट्रा प्लास्टिक का उपयोग हो और हमारी ओर से कमसे कम प्लास्टिक लगे। बस,क्या था। उन्हें ने एक ऐसा तरीका खोज लिया। उन्होंने इस साल के लिए जो मॉडल बनवाया उस में उन्होंने सिर्फ एक डिजाइन वाली प्लेट ही दी। उसमें दाने भरने के लिए बोटक व्यक्ति खुद की लगाएगा। उसका अर्थ ये हुआ की जितनी प्लेट वो देंगे,प्लास्टिक की उतनी बोटल स्थानीय प्रदूषण फैलाने से दूर रहेगी। उनका उपयोग पर्यावरण के प्रदूषण को कुछ हद तक बढने से  रुकेगा।
इस विचार को आप सांजे ओर ऐसा कुछ नया करे। सिर्फ नया नहीं, पुराने विचार में भी कुछ हम नया सोचे तो हो सकता हैं।

जय हिंद:

श्री के.वी.पटेल को वर्ष 2017 में राष्टपति भवन में आयोजित FOIN में विशेष निमंत्रण प्राप्त करने वाले शिक्षक हैं।उन्हें सृष्टि पुरस्कार भी मिल चुका हैं। शिक्षा से जुड़े नवाचार के लिए वो अपनी पहचान के साथ काम कर रहे हैं।

Monday, December 24, 2018

बेरहमी के उदाहरण...



दोस्तों इतिहास में कई ऐसे योद्धा हुए है जो दिल के बहुत ही उदार इंसान थे। जिनके मरने के बाद भी लोग उनको याद करते रहे हैं। लेकिन इसके विपरित कई सारे ऐसे भी क्रूर यौद्धा हुए हैं। जिनको खून की नदिया बहाना पसंद था। जिनके सामने जाने मात्र से ही इंसान की डरकर जान निकल जाती थी। इन योद्धाओं के इशारों पर कई लोगों का कत्ल कर दिया जाता था। आज आपको इस आर्टिकल के माध्यम से ऐसे कुछ लोगों के बारे में बता रहे है। जिनके पास रहम नाम की कोई चीज नहीं थी।


1-तैमूर लंग – तैमूर लंगड़े के बारे में बता दे कि वह किसी राजवंश की पैदाइश नहीं था। लेकिन इस लंगड़े ने अपनी तलवार के दम पर भारत सहित दक्षिण, पश्चिम और मध्य एशिया पर राज किया था। इसके बारे मे कहा जाता है कि इस लगंड़े ने दिल्ली में एक ही दिन मे लाखों लोगों को मार दिया था। लोग इसके सामने आने से भी कतराते थे।


2-गायक जूलियस सीज़र – यह शख्स कहने मात्र को तो एक गायक था। लेकिन इसकी क्रूरता इतनी थी कि इसने अपने आप को भगवान घोषित कर दिया था। कहा जाता है कि जिसने में भी इसको भगवान मानने से इंकार कर दिया। इसने उन लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी थी। कहा जाता है कि यह इतना क्रूर था। कि लोगों को शेर के पिंजरे में डलवा देता था। इसने चार साल तक शासन किया था। इस दौरान इसन  लाखों लोगों की हत्या कर दी थी।  


3-चंगेज खान –  दोस्तों अगर सबसे क्रूर शासक की बात कर तो  चंगेज खान का नाम सबसे पहले आता है। यह चंगेज खान मंगोलिया का महान योद्धा था। जिसने अपनी तलवार के दम पर पूरे एशिया पर कब्जा कर लिया था। यह भारत में भी आया था। लेकिन सिंधु नदी के तट से दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिस के द्वारा हार स्वीकार करने पर वापस लौट गया। कहा जाता है कि इसने अपने जीवन काल में लाखों लोगों को मौत की नींद सुलाई थी।

सरकुम:
बे रहमी से नफरत हो सकती हैं, प्यार नहीं।ऐसे शाशक जिन्हें हम सिर्फ शाशक के नाम से जानते हैं। ऐसे सशक्त लोगो की जरूरत हैं जो ऐसे सामने आए और अपने अधिकार मांगे।

Saturday, November 17, 2018

ગંદો માણસ


દુનિયા નો સૌથી ગંદો માણસ મળી ગયો છે. જેને છેલ્લા 65 વર્ષ થી એક વાર પણ સ્નાન નથી કર્યુ. દક્ષિણ ના ઈરાની પ્રાંત ના આ માણસ ને સાબુ અને પાણી થી ગણો ડર લાગે છે. માટે તેને છેલ્લા 65 વર્ષ થી સ્નાન નથી કર્યુ. જે વ્યક્તિ આજે ગણોજ ગંદો લાગે છે.

જેનું માનવું છે જો તે પાણી થી સ્નાન કરશે તો તે પાગલ બની જશે. જેની પાસ રેહવા માટે ખુદ નું ઘર પણ નથી. હાલ તે રણ માં રહી ને પોતાનો ગુજારો કરી રહ્યો છે. જયારે તેને ભૂખ લાગે ત્યારે તે આજુબાજુ ના નાના મોટા ગામડા માં જઈ ભીખ માંગી ખાઈ લે છે. સાથે જ તે પાણી થી જરૂર દરે છે પણ તેને ઘણીજ માત્રામાં પાણી પીવું ગમે છે.ગામ લોકો એ તેને સ્નાન કરાવવાની કોશિશ કરી હતી. પણ તે માણસ પાણી ને જોઈ ભાગી ગયો હતો.

Monday, September 24, 2018

संभावना ओर सच


आपके पास पहले से मौजूद ज्ञान और जानकारी में खुद को और भी मजबूत कर लें। अगर वो जानकारी पक्की है तो उसे आदर करे।  फिर इस बात का पता लगाएँ, कि आपको क्या चाहिए। समजीए...

पहले कोई बीमार था।
धीरे धीरे अब उसमें सुधार है।
अगर सुधार है तो आप को मानना होगा की कुछ संभावना हैं।
अपने आपको हर जरूरी जानकारी से अवगत कराएँ, फिर इन सभी को कुछ ऐसे इकट्ठे करें, जो आपके काम आए। अगर कुछ अच्छा होने के लिए कुछ बुरा करना इसका मतलब है, उस के प्रति भाव प्रकट करना। जो मा होती है, वोही दवाई खिलाती हैं। 

उदाहरण के लिए, अगर आप किसी टेस्ट को पास करना चाहते हैं, तो पहले ये तय करें, कि आपको पहले से कितना आता है और आपको कितना और पढ़ना है। पहले आपको पहले से मालूम जानकारी को दोहरा लें, फिर आपके नोट्स, टेक्स्टबुक या आपके लिए मददगार अन्य सोर्स से और भी ज्यादा जानकारी अपने की कोशिश करें। जानकारी बदल भी सकती हैं। आज से कुछ सालों पहले किताबो ने गूजरात की जो जानकारी है, वो आज सही नहीं हो सकती। जानकारी को सही मायने में ओर परिस्थिति के सामने देखना चाहिए।

सरकुम:

कुछ नहीं होता,
जब सीखने बैठते है।
पुराना सामने होता है।
नए में समज की कमी  हैं।
सो, पढ़ाई वैसे ही छूट जाती है।

बच्चे की गलती क्या थी,
बच्चा समज नहीं पाया हैं।
सरकार सामने ये गुनहगार आज,
हाथ जोड़ के रो खड़ा है,आँख मूंद के खड़ा है।


Thursday, August 9, 2018

ऐसा ही होता हैं....


बच्चे अनुकरण से सीखते हैं।
हम जैसा करेंगे बच्चे वैसा ही करेंगे।आज कल जब मम्मी पापा मोबाइल नहीं छोड़ रहे हैं तो बच्चे केसे किताब पढेंगे।
एक फोटोग्राफ जो मुजे किसी ने भेजा हैं।एक माँ अपने बच्चों के साथ प्रवासमें हैं।जहाँ बैठने की जगह नहीं हैं,वहाँ बच्चो के साथ बैठकर खुद भी किताब पढ़ती हैं।अगर मा के हाथों में मोबाइल होता तो बच्चा भी मोबाइल के लिए तैयार था।यहाँ माँ भी किताब पढ़ती हैं।बच्चा भी उन्हें देखकर वैसा ही काम करेगा जो उसकी मम्मी कर रही हैं।

@#@
आज भी हम वोही करते हैं,जो हमने देखा हैं।हम वैसा ही करना चाहिए जो हमने न सुना न देखा हो।

Tuesday, August 7, 2018

प्रात : वंदन ...


जो जिसको चाहे
वो उसे कब हासिल होती है..!

जिम्मेदारियां अक्सर..
ख्वाहिशों की कातिल होती हैं..!


जिम्मेदारी एक ऐसा शब्द हैं जो सुनने में अच्छा हैं मगर...
कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी बात को जता नहीं सकते मगर वो उसमें खरे उतरते हैं।कुछ लोग खास होते हैं।कुछ तो खासम खास होते हैं।कुछ इस लिए याद रहते हैं,की उन्हें हम भूल नहीं सकते हैं।कुछ इस लिए भुलाने पड़ते हैं कि वो भूलना चाहते हैं।कुछ लोगो को उनकी जिम्मेदारी का अहसास नहीं होता हैं।उन्हें हर वख्त बस... अपनी ही तस्वीर दिखती हैं।शायद वो जिम्मेदारी का अर्थ नहीं समझते होंगे।

किसी को मिलना,उसे समझना और समजाना सरल नहीं हैं।मगर कई बार एक शब्द सब कुछ बिगाड़ देता हैं,वो शब्द हैं 'जिम्मेदारी'।
मेरी क्या जिम्मेदारी?
कोई मेरी जिम्मेदारी नहीं ले रहा हैं।
मुजे कुछ होगा तो मेरे पीछे कोंन हैं।
तुम अपनी जिम्मेदारी निभाना भूल चुके हो।
मेरी जिम्मेदारी लेने के बाद तुम कितनी जिम्मेदारी निभाओगे?
में सब कुछ छोड़ दु मगर मेरी जिम्मेदारी आप कैसे निभाएंगे।


जिम्मेदारी से जुड़े कुछ और भी सवाल हो सकते हैं।प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी अलग अलग होती हैं।जिम्मेदारी स्वीकारने का विकल्प नहीं है,जिम्मेदारी निभानी भी एक जिम्मेदारी हैं।कुछ जिम्मेदारी ही हमारी ख्वाहिशो को तोड़ देती हैं।

@#@

कुछ जिम्मेदारियां लेनी नही,निभानी होती हैं।एक बाप अपनी बच्ची के लिए क्यो बुरा सोचेगा?पापा की बात मानो...

Thursday, August 2, 2018

हार ओर जीत



मेरी खुशी।
आज का एक पोस्टर हैं।
जो आप की खुशी केलिए हार मानले,उसे आप कभी हर नहीं सकते।बस,इसी बयान के आधार पर एक बात तय हैं।हमे ऐसे लोगो की खुशी के लिए हारना पड़ता हैं,जो जीत जाए इसके लिए हम दुआ करते हैं।कुछ दिन ,महीने या साल गुजर जाते हैं मगर व्यक्ति सदैव अपने दुःख वाले दिनों को याद करता हैं।जिसनके लिए हम जिंदा हैं,उस को हारते हुए हम कैसे देख सकते हैं।समय,स्थान या परिस्थिति या पूर्व जन्म के प्रकोप से हम दिक्कतों का सामना कर रहे होते हैं।मगर हमे सिकुड़ कर बैठना नहीं हैं।वो ही जीतता हैं,जो हरा पता हैं।

@#@

मेने इस तरह से मेरी जिंदगी को आसान कर दिया,
किसी से माँगली माफी, किसी को माफ करदिया।

Monday, March 12, 2018

अब आगे...

ऋचा ने गाया।
में कहता हूं कि अच्छा गाया।
उसे संतोष नहीं हुआ हैं।वो कहती थी कि में ओर अच्छा कर सकती थी।मगर नहीं कर पाई।यहां से सात आर्टिस्ट को पसंद किया जाएगा।उसमें से विजेता पसंद होंगे।गुजरात भ्रह्म समाज द्वारा आयोजित ये दूसरा पड़ाव हैं।बहोत सारी सामाजिक प्रवृत्ति से जुड़ा ये ट्रस्ट संगीत में भी विशेष कर रहा हैं।
कुछ दिनोंमें तय होगा की मेगा फाइनल में रुचा गायेगी की नहीं।अगर वो नहीं भी गाती हैं तो मुजे कोई दुख नहीं हैं।उस के पास ओर भी वख्त हैं।वो जरूर कुछ खास करेगी।आज अगर में कहूँगा की ऋचा गायेगी तो मुजे ख़ुशी होगी तो एक बात तय हैं कि उसे भी खुशी होगी।अपने परफॉर्मेंस से वो ज्यादा खुश नहीं थी।फिरभी देखते हैं।मुजे यकीन हैं कि उसने अच्छा गाया था।और आगे इस कार्यक्रम में या अन्य कार्यक्रम में गायेगी।
शुभमस्तु...
# ऋचा can मुमकिन हैं।

@#@
अगर हम सफल नहीं होते हैं,तो सफलता थोड़ी दूर हैं,असंभव नही हैं।सख्त परिश्रम ही हमे निष्फलता से दूर करता हैं।

Wednesday, November 29, 2017

आज की दुनिया


आज की सुबह।
मेरी जिंदगी की नई सुबह।
रात होती हैं तो लगता हैं हाश होगी।
जब,रात गुजर जाती हैं तो सुबह होती हैं।वो सुबह कभी तो आएगी...एक अद्भुत गाना।

सुबह से निकले हैं,राही रात को पहुचेंगे,
देखेंगे,समजेंगे साथी,नए तरीके खोजेंगे।
#राही:व्यक्ति
आज सुबह मेरी अमदावाद में होंगी।मेरे सुबह सुबह ही अहमदाबाद शांत लगता हैं।सूर्योदय से पहले अगर खिड़की नहीं खुली तो कब 10 बजे व्व मालूम नहीं पड़ता।शहेर में दिन नही समय चलता हैं।रात नही होती,रात का सन्नाटा भी नहीं होता।रडे ऐसी ऑफिसमें बारिश,गर्मी या ठंडी समान हैं।यह किसी से कोई भेदभाव नहीं हैं।हाला की अमदावाद शहर का प्रत्येक व्यक्ति चलता हैं तो ही जाके शहर भागता हैं।
आज का दिन मेरे कुछ खास दिनोंमें से एक हैं।
अमदावाद में पहुंचने पर जैसे आज खुशी हुई।
मेरी सरकार:मेरा अमदावाद
#Thanks दादा दी...
#Thanks सरकार...
91.1 गुडमोर्निंग अमदावाद...

Sunday, November 26, 2017

शादी की पत्रिका


एक व्यक्ति।
जो काम करता हैं।
बस,उसी में जुड़ा रहता हैं।
स्वयं उसका स्वभाव ही ऐसा हो जाता हैं।बात हैं चेतन पटेल की।कल उसकी शादी थी।में भी इस ख़ुशिका हिस्सा बना।मेरी खुशियों से जुड़ी नहीं आपको चेतन की शादी की बात करूंगा।जो चेतन को जानते हैं उन्हें ये बात नई नहीं लगेगी।चेतन इनोवेशन को ही खोजता ओर अमल करता और करवाता हैं।
उसकी शादी की पत्रिका को उसने बहोत सुंदर तरीके से छापा हैं।आज तक हुए बहोत सारे इनोवेशन में से कुछ पसंदीदा इनोबेशन उसने अपनी पत्रिका में छपवाये थे।आप को आए पत्रिका देखके ही चेतन की जीवन शैली के बारे में मालूम पड़ता हैं।
शादिमें एक बात जो मेने तब देखी जब शादी के वख्त गानो के साथ वहां की महिलाएं धार्मिक श्लोक ओर स्तुतिका पठन सामूहिक तोर पे करती दिखी।
चेतन ओर आवृत्ति को अपनी शादीशुदा जिंदगी के लिए शुभकामना।
#चेतनावृत्ति...

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