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Wednesday, September 6, 2017

याद रखूंगा...

में बहोत कुछ भूल सकता हूँ।में आज तक बहोत कुछ भूल चुका हूं।कुछ ऐसा भी हैं कि में भूलना नहीं चाहता।ओर भूलबी नहीं पाऊंगा।मेरे एक साथिने मुजे ये पोस्टर भेजा,वो दोस्त सवाल वाला दोस्त हैं।सवाल न हो तो वो कुछ सेंड नहीं करता।सवाल ये था कि हमे क्या भूलना चाहिए और क्या याद रखें।
सवाल तो मुश्किल हैं।सबसे पहले मेने उसे सवाल किया।मेरा सवाल था भूलना क्यो हैं।ऐसा भी हो सकता हैं कि याद रखके जिया जाय।मगर याद रखके जीने से बहेतर हैं भूल के जिया जाय।
में ये भी मानता हूं कि ऐसा याद रखो जो जीवन में आगे जाके जरूरी हो।जीवन और व्यक्तिगत विकास में सहयोगी हो।ऐसा भूलना चाहिए जो हमे काम से दूर करता हो,कर्तव्यों को निभाने में अड़चन करती बातो को भूलना चाहिए।मुजे मेरे परिवार के साथ रहकर मेरे प्रति जिम्मेदारी बढ़ाने वाले विचार और व्यक्तिको याद रखना चाहिए।

#मेरा विचार:मेरी सरकार

Wednesday, August 23, 2017

On line innovation

नवाचार क्या हैं?
ग्रासरूट नवाचार क्या हैं?
इसका महत्व कैसे तय करें,कोन इसके बारेमें समजा सकता हैं?ये सारे सवाल जहां भी उठते है वहाँ जवाब के लिए एक ही व्यक्ति हैं 'पद्म श्री अनिल गुप्ता'।
पिछले दिनों से वो नव विचारको के लिए एक on line फोरम के ऊपर काम कर रहे हैं।समग्र भारत के कबच्चो को इस on line फोरम में जोड़ना चाहते हैं।भारत के बच्चे समजे ओर भाषा की कोई समस्या न हो ऐसा अभ्यासक्रम या फोरम बनाना चाहते हैं।गुजरात वाला बच्चा भी समजे, तमिल वालाभी समजे ओर पूर्वोत्तर के राज्यमें भी बच्चे जुड़े रहें।
अब क्या करे तो सामग्री तैयार करनेका रास्ता मीला।इस सवाल का जवाब sristi. इनोवेशन परिवार ने निकाला।तय ये हुआ कि प्रो.अनिल गुप्ता बच्चो के साथ काम करेंगे और उसे रिकॉर्ड करके कुछ रास्ता निकालने के बारे में सोचा।अब जो बातचीत अध्यापक बनके अनिल गुप्ता ने समजाई हैं वो बात ओन लाइन फोरम के माध्यम से सभी बच्चे समजे ऐसा करना हैं।काम अभी शुरू हैं।UNICEF का इसमें सहयोग हैं।आगे और अच्छा करने की लगन से बच्चों के साथ पूरी थिंकटैंक हैं।विश्वमें ग्रासरूट इनोवेशन की पहचान देनेवाले श्री अनिल गुप्ता का सीधा मार्गदर्शन हैं।
वाह...वाह...क्या बात हैं।अहमदाबाद में पुरादिन बारीश होने के बावजूद बच्चे जो आज आईआईएम अमदावाद में पहुंचे उनको अभिनंदन ओर उनका धन्यवाद अदा करता हूं।
अब बदलेगा इंडिया...
मेड इन इंडिया...
मेक इन इंडिया...
मेनेज इन इंडिया...

Sunday, August 20, 2017

क्या ओर कब...

हमारी जिंदगी।
हम ही जानते हैं कि केसी हैं।हमारे आसपास दो बातें हैं।knowledge ओर wisdom,इन दोनों के बीच हम हमारी जिंदगी को जैसे पसार कर रहे हैं।ऐसी जिंदगी जो हम किसी ओर के लिए जी रहे हैं।
ज्ञान हमे बोलना सिखाता हैं।बोल ने से व्यक्ति की पहचान होती हैं।हमारे पास जो जानकारी होती हैं उसके आधार पर हम बोलते हैं।मगर कहा जाता हैं कि क्या बोलना वो ठीक है,कहाँ ओर कैसे बोलना वो महत्वपूर्ण हैं।बोलने के लिए क्या वो तो मिल जाएगा मगर कहा बोलना वो सीखनें में कई लोगो की जिंदगी निकल जाती हैं।
मेरे पास ज्ञान है,तो में सफल बनूँगा ऐसा नहीं हैं।उस ज्ञान का कम और कैसे इस्तमाल करना हैं उसका विजन हैं तो ही में सफल रहूंगा।मुजे क्या नहीं कब के आधार पे सफलता मिलेगी।और वो कब का मुजे इंतजार रहेगा।
#सरकार...कब...
#DrB

Thursday, August 17, 2017

Bee The Change

भावेश पंड्या वार्ता रेकॉर्ड लिमकबरेकोर्ड iim इनोवेशन सृस्टि टीचर भावेश वर्ल्ड रिकॉर्ड हनी बीबी कलाम apj अब्दुल कलाम दो कलाम भावेश डॉ भावेश dr bhavesh pandya innovation bhavesh pandya.org iim dr kalam dr abdul kalam inoveshan innovation india record world record
अच्छी चीजें ओर अच्छी बातें हमे पसंद आती हैं।अच्छा या नया करने के लिए क्रिएटिव थिंकिंग जरूरी हैं।ऐसे बच्चों को खोज के उन्हें IGNIT एवॉर्ड दिया जाता हैं।आज 240 से अधिक बच्चे के सन्मान प्राप्त कर चुके हैं।ऐसे  बच्चो तक पहुंचने के लिए UNICEF ओर सृस्टि के सहायसे एक फोरम तैयार किया गया हैं।
भावेश पंड्या वार्ता रेकॉर्ड लिमकबरेकोर्ड iim इनोवेशन सृस्टि टीचर भावेश वर्ल्ड रिकॉर्ड हनी बीबी कलाम apj अब्दुल कलाम दो कलाम भावेश डॉ भावेश dr bhavesh pandya innovation bhavesh pandya.org iim dr kalam dr abdul kalam inoveshan innovation india record world record
मेरा सौभाग्य हैं कि इस कार्यमें मुजे जुड़नेका मौका मिला।15 अगस्त को इसे बच्चो को अर्पण किया गया।डॉ अनिल गुप्ता के मार्गदर्शनमें ये संपन हुआ।on line फोरम के निर्माण के लिए ऑफ लाइन ट्रेनिग की जा रही हैं।इसे रिकॉर्ड करने के बाद उसे अपलोड किया जाएगा।
भावेश पंड्या वार्ता रेकॉर्ड लिमकबरेकोर्डanil gupta dr bhavesh pandya dr anil gupta iim इनोवेशन सृस्टि टीचर भावेश वर्ल्ड रिकॉर्ड हनी बीबी कलाम apj अब्दुल कलाम दो कलाम भावेश डॉ भावेश dr bhavesh pandya innovation bhavesh pandya.org iim dr kalam dr abdul kalam inoveshan innovation india record world record
जैसे जैसे नए बच्चे जुड़ेंगे।वो क्रमशः मॉड्यूल करते रहेंगे।इस तरह बच्चो के विचार या कल्पना जो वैश्विक किया जाएगा।
गुजरात की प्रथम HD न्यूज़ चैनल Vtv ने उसे कवरेज दिया।इस काम मे जो भी जुड़े हैं,जो जुड़ना चाहते है उन सबका शुक्रिया।
इसके बारे में आप sristi.org से संपर्क करके अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।ऐसे नबचार के कार्यो से आपको अवगत कराता रहुगा।
ऐसे बच्चों के बारें में जानने के लिए 
जय हिंद...

Wednesday, August 16, 2017

इन्हें सलाम...


आज कल कुछ अच्छे संदेश आते हैं।में पिछले 2 सालों से प्रत्येक दिन एक पोस्ट शेर करता हूँ।मेरे कामसे जुड़े पोस्ट ज्यादा लिखता हूँ।कई सारे दोस्त ऐसे हैं जो मुजे विषय या सामग्री देते हैं।जो मुजे कुछ सामग्री भेजता हैं
उसे में लिखता हूँ तो भेजने वाले का यथायोग्य ओर कथायोग्य उल्लेख करता हूँ।मेरे एक दोस्त हैं।जनक दवे।उन्होंने आसाम की कोई एक स्कूल का फोटोग्राफ भेजा हैं।उन्होंने फेसबुक पे शेर किया था।श्री के.वी.पटेल (कावेरी डे केर स्कूल,महेसाणा)ओर श्री गुरुजी ने मुजे यर शेर किया हुआ आसाम का दूसरा फोटो हैं।
ऐसेही देश बनता हैं।उपदेश हर कोई भेजता हैं।ऐसी जानकारी जो शेर करने में गर्व हो ऐसा भी कोई शेर नहीं करता।मेरे दो दोस्त हैं।जिन्हें नेशनल आईसीटी एवॉर्ड प्राप्य होगा।राष्ट्रपति जी उन्हें सन्मानित करेंगे।किसी ने उनके लिये लिखा कि पिछले दो सालमें गुजरात मेम किसीको अर सन्मान नहीं मिला।अरे..भाई,इसी लिए तो नेशनल एवॉर्ड हैं।अगर हर साल कोई अच्छा काम करेगा तो नेशनल एवॉर्ड मिलेगा ।मिलनाभी चाहिए।इस बार श्री राकेश पटेल nvnd.blogspot.com ओर श्री पूरण गण्डलिया को आए सन्मान मिलेगा।ऐसी जानकारी और इन साथियो के बारेमें शेर करें।आप भी कुछ नया करते हैं तो मुजे जानकारी भेजे।
आज के इस फोटोग्राफ ओर अध्यापक ओर विद्यार्थियो को वंदन।

Monday, August 14, 2017

On line Creation...

आज हमारा आजाद दिन हैं।1947 के दिन हमारा देश आजाद हुआ था।इससे पहले हम अंग्रेजो के गुलाम थे।अंग्रेजो की शिक्षा व्यवस्था को हमने पकड़ा था।पिछले कुछ सालों से हमारी शिक्षा व्यवस्थामे सुधार हो रहा हैं।
समग्र भारतमें on line ट्रेनिग गुजरातने की थी।ये ट्रेनिग iim के सहयोग से हो पाई।
आज कुछ ऐसी आजादी नव विचारकोको मिलेगी।15 अगस्त से क्रिएटिव विचारो के लिए ऑन लाईन कोर्स आजशे शुरू होगा।हनी बी नेटवर्क परिवार के साथ सृस्टि का सहयोग आए काम कर रहा हैं।डॉ. अनिल गुप्ता का सीधा मार्गदर्शन मिल रहा है।आज सुबह 11 बजे इसको आप के सामने रखा जाएगा।
ऐसी संभावना सोचना ही बड़ी बात है।इस नवतर कार्य से जुड़ी सभी संस्था ओर व्यक्तिओका आभार व्यक्त करते हुए इस काम मे जुड़े होने को मेरा सौभाग्य मानता हूं।
#sristi innovation
#Honey Bee
#Dr Gupta
#chetan

Friday, July 21, 2017

शार्प नहीं...कोई बात नहीं...

आज कल शार्प का जमाना हैं!शार्प लोग ओर शार्प सामग्री हमे ज्यादा पसंद हैं!कहते हैं कि जिस के पास शार्पनेस हैं,वो कहि भी चलेगा!हर चीज को समझने में एक उदाहरण चाहिए!में शिक्षा से जुड़ा हूँ!मुजे इसके अलावा कुछ मालूम नही की हर चीज को समजने के लिए सहज और सरल के अलावा व्यावहारिक उदाहरण चाहिए!
मेरे साथ एक प्रोजेक्ट में एक साथी थे!वो मद्रास के रहनेवाले थे!वो मुजे सदैव मार्गदर्शन देते,प्यार करते और समजाते!एक बार उन्होंने कहा'अगर आपके पास चार पेंसिल हैं,तीन की पॉइंट गीस चुके हैं!एक पेंसिल बची हैं जो शार्प हैं!आप किस से लिखना पसंद करेंगे?
मेने उन्हें शार्प पेंसिल से लिखने की बात बताई!तब जाके उन्होंने कहा'शार्प होना अच्छा हैं,मगर कुछ न करने से शार्प दिखते हैं!तो कोई मतलब नहीं हैं!
जो काम करेगा,वो ही भूल करेगा!वो गलती करे तो इसका स्वीकार करना चाहिए!
कुछ न करने के बाद गलतिया निकलना आसान हैं!क्यो की वो गलती किसी के काम में से निकालनी हैं!काम करने वाला शार्प भले न हो!सिर्फ शार्प दिखने से काम नहीं होता!
हमे हमारी पहचान बनानी हैं!नही की हमारी ऐडवटाइज़ बना के प्रचार करना!जो काम करेगा वो ही जिस हुआ दिखेगा!आज ऐसा माहौल हैं कि टीम काम करके थकती हैं!तब जाके कोई नई व्यक्ति शार्प प्रेजेन्टेशन करके सारी क्रेडिट लेता हैं!
उस वख्त कोई नहीं दिखता,एमजीआर जब कोई पाद आके देखे तो मालूम पड़ता हैं कि काम किसने किया होगा!कुछ न करके,बहोत कुछ दिखाया जा सकता हैं!कुछ करके भी कुछ नहीं दिखा पानेमें कोई शर्म नहीं हैं!जो काम आपका हैं,अंततः उसकी क्रेडिट आपको मिलेगी जरूर!भले आज आप शार्प न दिखते हो!आज जो आपके पास हैं!सदैव आपके ही पास रहेगा!

Thursday, July 13, 2017

याद रखना...

हम आज जो हैं!
आज हमारे साथ जो भी कुछ हो रहा हैं!देखिए अगर बुरा होगा तो हमारी गलती!अगर अच्छा हुआ तो हमेशा वो किसी के सहयोग से हुआ होगा!
अगर कोई ऐसा हैं जिसे हम आज सहयोग नहीं दे सकते या किसी कारण वश सहयोग नहीं कर रहे हैं!में कहूंगा कि कोई समस्या निहि हैं! जिसने आप को सिखाया हैं उसे याद करके उस काम को आगे बढ़ा सकते हैं!
कोई कहता हैं कि कोई अपना निहि हैं!मगर में कहूंगा कि क्या आप किसी के संपूर्ण होबपाये हैं!हमारे साथ सिर्फ बदनाम होने के लिए अगर कोई जुड़ा हैं तो उसका तो नाम होना ही चाहिए!हमे ऐ ,नहीं भूलना हैं कि हम मदद करेंगे तो कोई आगे आएगा!कैसे विकास होगा!कैसे विश्व शांति होगी!कैसे विश्व सत्ता बनेंगे!
अगर मुझे आम आदमी पार्टी पसंद नही हैं तो इसका मतलब ये नहीं की में मतदान करने ही न जानेकी गोशना करूँ!कोई सहयोग करता हैं तब ये नहीं सोचता के मेरी इस हेल्प की किम्मत क्या है?!यहाँ में दो शब्दों के माद्यम से मेरी बात रखूंगा!
मूल्य और किम्मत...!
देखिर,
गांधी के मूल्य हैं! गांधी विचार के मूल्य हैं! एक बेईमान अधिकारी या नेता की कोई एक किम्मत हैं!हमे किसीभी समय सहयोग करने वाला भले शार्ट वे में अपनी किम्मत तय करें!हमे उन्हें मूल्यवान मानना चाहिए!जो कोई अपने पुराने दिन देखेगा तो समाज,परिवार और मित्रोमें से कई लोग आपको आपके ऊपर निर्भर दिखेंगे!कहते हैं,माँ बाप ने कितना किया।आज लड़का उन्हें घर में नहीँ रखता!क्या ऐसे माता पिता जो वृद्धाश्रम में रहते हैं उनके बच्चजे उन्हें भूल गए!जिस ने उन्हें मदद की उसे उनकी संतान भूली!हम कहेंगे, 'देखो,पढ़े पर लिखे नहीं!'जीवन में  कभीभी सहयोग करने वाले कोई व्यक्ति को भूलेंगे तो मातपिता को छोड़ने वाले पुत्र और  हमारे में क्या फर्क होगा!जो सच्चा हैं उसे आप भूल निहि सकोंगे!

सोचिए
क्या आपको सहयोग करने वाली वो व्यक्ति न होती तो?

Wednesday, July 12, 2017

आसपास की बात


हमारे आसपास!
जिसे हम विकास कहते हैं!जिसे आधुनिक समय के उपकरण कहते हैं!वैसे उपकरण आजकल हमारी जिंदगी को बदनाम और बरबाद करते हैं!
एक समय था!
जो लोग टेलीविजन को इडियट बोक्ष कहते थे वो ही लोग या उनके जैसे आज मोबाइल और खास करके एनरोइड मोबाईल या इसके जैसे उपकरण को वो दुश्मन मानते हैं!
एक तरफ जमाने के साथ कदम मिलाने के लिए हमे टेक्नोलॉजी का उपयोग करना आवश्यक हैं!हा, टेक्नोलॉजी हमारी दुश्मन बनेगी या हमे सपोर्ट करेगी वो हम तय करने चाहिए।
होता ये हैं कि हमने जिसे सपोर्ट के लिए ख़रीदा हैं हम उसके गुलाम बन जाते हैं!मेरी एक मित्रने मुझे ऐ पोस्टर भेजा हैं!
एक किताब जो की आधुनिक उपकरण के सहाय से कबरमें जा रही हैं!कहते हैं कि अच्छे चित्र कई सारे शब्द समजता हैं!हमारी आजकी परिस्थिति में आप इसे अवश्य समजेंगे!

Tuesday, July 11, 2017

हेरिटेज सिटी अमदावाद





अहमदाबाद की बात हैं!
कर्णावती नगर की बात हैं!
बादशाह अहमद शाह से जुडी एक बात हैं!
कहते हैं!एक बार बादशाह शिकार के लिए गए थे!उस समय एक कुत्ते पे सस्सा धाया,बादशाह ने शहर बसाया! उस वख्त ऐ देखकर अहमदशाह को हुआ की ऐ धरती में ऐसा कुछ हैं की एक सस्सा कुत्ते पे धाक जमाता हैं!ऐसी एक दन्तकथा जेसी बात हैं! हा,अहमदशाह ने इसे बसाया!विश्व के इतिहास में किसीभी समय,किसीभी वख्त,किसीभी नाम से आज का अहमदाबाद जुड़ा हैं!कुछ दिन पहेले यूनेस्को ने हमारे देश को,गुजरात को नइ पहेचान दी!आज अहमदाबाद के लोगो के लिए एक अच्छी खबर हैं!यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज सीटी में अहमदाबाद को गोषित किया गया है!कर्णावती या अहमदाबाद!मुझे कोई लेनादेना नहीं हैं!में किसीभी नाम से इसे प्यार करता हूँ!सन्मानित करता हूँ!
हा,अब क्या होगा! देखने के लिए हम बेठे हैं!आप और में इस ऐतिहासिक पल या शहर से जुड़े हैं!आह अमदावाद...वाह...अमदावाद...मगर पिछले कई सालो से सरकार में भाजप हैं!अब तो तिन साल से केन्द्रमें भाजपा की सरकार हैं!फिरभी नाम क्यों नहीं बदला!अब तो वर्ल्ड हेरिटेज सिटी होने के बाद तो नाम नहीं बदला जायेगा!
एक बात तय हैं! अहमदाबाद उसके नाम से नहीं!अपने स्थान से महँ हैं!अब विश्व में हमारी पहेचान बढ़ी हैं!अब हमसे अपेक्षा भी बढेगी!

sms:अहमदाबाद के रिक्शा ड्रायवर अब पैर के बदले सेड लाईट ते सिग्नल बताएँगे!

Monday, July 10, 2017

दबंग को दबाव्

आज कल बच्चे दबाव में हैं!बच्चो को घर में से दबाव झेलना पड़ता हैं!शिक्षा को सफलता या असफलता के मापदंड के लिए केंद्र में रखा जाता हैं!

आज एक शब्द सुनने को मिलता हैं!वर्च्युअल क्लास!सॉफ्ट मटेरियल और ऐसे ऐसे कई सारे नाम जो हम सुनते हैं इसका मतलब हैं मशीन का दबाव!
मुझे मेरे एक साथी ने पूछा,'छोटे बच्चों में किस बात का दबाव होता हैं?'मेने कहा ' बड़े जो पढ़ लिख के नहीं बन पाए,उस को बनाने का सपना,सपने को पूरा करने का दबाव बच्चो में होता हैं!
जैसे एक मशीन की सहायता से किसीभी चीज को पकड़ना,या पकड़ी हुई चीज को दबाना या उस के ऊपर दबाव बढ़ाने में हम सफल होते हैं!बस!इसी तरह आज कल शिक्षा से जुड़े लोग सफलता प्राप्ति के लिए पेरेंट्स पे दबाव बना ने के लिए कई सारे हथकंडे अपनाते हैं!
मेरी व्यक्तिगत सोच ऐसी हैं कि बच्चों को विविध विद्याशाखा के बारे में जानकारी नहीं हैं!आज कल के फैशन में डॉक्टर, इजनेर या ऐसी दो चार लाइन को छोड़ के कोई कुछ नया नहीं सोचता!
मेरा आप से अनुरोध है की आप आप के संतानों पे दबाव पैदा न करे।
मेरे एक करीबी दोस्त का लड़का अंग्रेजी माध्यम स्कुल में गया!मेरा मानना हैं कि शिक्षित परिवार का ये लड़का जल्द ही गुजराती माध्यम में वापस आएगा!अगर उसके मम्मी पापा शिक्षित हैं तो!गुजराती मातृभाषा वाला बच्चा अंग्रेजी में शिखता हैं तो क्या संस्कृत या उड़िया मेभी सिख सकता हैं!
आशा हैं हमारे दबंग घर के दबाव से बच पाएंगे!

Sunday, June 25, 2017

कई मतलब की कहानी...






कई कहानियां ऐसी होती हैं!जो कई सारे अर्थ निकालती हैं!पढ़ने वाले हर व्यक्ति को इस कहानी से अपने मतलब का अर्थ निकाल सकते हैं!
मगर इस कहानी को आप अवश्य पढ़ें...!
एक बार संख्या 9 ने 8 को थप्पड़ मारा
8 रोने लगा...
पूछा मुझे क्यों मारा..?

9 बोला...

मैं बड़ा हु इसीलए मारा..

सुनते ही 8 ने 7 को मारा
और 9 वाली बात दोहरा दी

7 ने 6 को..
6 ने 5 को..
5 ने 4 को..
4 ने 3 को..
3 ने 2 को..
2 ने 1 को..

अब 1 किसको मारे
1 के निचे तो 0 था !

1 ने उसे मारा नहीं
बल्कि प्यार से उठाया
और उसे अपनी बगल में
बैठा लिया

जैसे ही बैठाया...
उसकी ताक़त 10 हो गयी..!
और 9 की हालत खराब हो गई.

जिन्दगीं में किसी का साथ काफी हैं,
कंधे पर किसी का हाथ काफी हैं,
दूर हो या पास...क्या फर्क पड़ता हैं,

एक दूसरे के लिये जीने का नाम ही जिंदगी है! इसलिये वक़्त उन्हें दो जो
तुम्हे चाहते हों दिल से!

रिश्ते पैसो के मोहताज़ नहीं होते क्योकि कुछ रिश्ते मुनाफा नहीं देते पर
जीवन अमीर जरूर बना देते है "

भव्य जीवन की लालसा रखने या जीने में कोई बुराई नहीं हैं, लेकिन सावधान रहे क्योंकि आवश्यकताएँ पूरी हो सकती है, तृष्णा नहीं |एक सत्य ये भी है कि धनवानो का आधा धन तो ये जताने में चला जाता है की वे भी धनवान हैं |

आपका जीवन बेशुमार खुश हों...
शुभमस्तु...

Saturday, June 24, 2017

चाणक्य ओर...










सम्राट चंद्रगुप्त ने एक बार चाणक्य से कहा, चाणक्य,नि काश तुम खूबसूरत होते?

चाणक्य ने कहा, 'राजन, इंसान की पहचान उसके गुणों से होती है, रूप से नहीं।'
तब चंद्रगुप्त ने पूछा, 'क्या कोई ऐसा उदाहरण दे सकते हो जहां गुण के सामने रूप छोटा रह गया हो।'

तब चाणक्य ने राजा को दो गिलास पानी पीने को दिया।

फिर चाणक्य ने कहा, 'पहले गिलास का पानी सोने के घड़े का था और दूसरे गिलास का पानी मिट्टी के घड़े का, आपको कौन सा पानी अच्छा लगा।'

चंद्रगुप्त बोले, 'मटकी से भरे गिलास का।'

नजदीक ही सम्राट चंद्रगुप्त की पत्नी मौजूद थीं, वह इस उदाहरण से काफी प्रभावित हुई।

उन्होंने कहा, 'वो सोने का घड़ा किस काम का जो प्यास न बुझा सके।

मटकी भले ही कितनी कुरुप हो, लेकिन प्यास मटकी के पानी से ही बुझती है, यानी रूप नहीं गुण महान होता है।'

इसी तरह इंसान अपने रूप के कारण नहीं बल्कि उपने गुणों के कारण पूजा जाता है।

रूप तो आज है, कल
 नहीं लेकिन गुण जब तक जीवन है तब तक जिंदा रहते हैं, और मरने के बाद भी जीवंत रहते हैं।

Friday, April 21, 2017

हमने किया...

मेरे कई दोस्त हैं! कोई काम के कारण जुडा हैं!कोई सिर्फ प्यार से जुड़ा हैं और काम करतें हैं!कई पारिवारिक सदस्य हैं!

कुछ एइसे हैं जो परिवार से अधिक हैं!कुछ साथी जो सिर्फ शिक्षा के काम के लिए मुझसे जुड़े हैं! कुछ सिखाने को और सिखाने को जुड़े हैं!
ऐसे साथियों के साथ,कुछ नया करने के बारेंमें सोच रहे थे!हमने सोचा क्यों न एक blog बनाए और इसे सामूहिक तोर पे चलाए!

बीएस सोचा और इसका अमल किया!आज हम इतनी स्फ्रूर्ति से तो नहीं मगर एक अच्छा blog चला रहे हैं! आप भी आपकी बात उसमे रख सकते हैं!सबसे पहले तो मेरा आपसे अनुरोध हैं की आप हमारे blog को एक बार देखें और उसको चलाने के तरीके और एनी जानकारी के लिए हमें मार्गदर्शन दें!आशा रखते हैं!आपको हमारा ऐ छोटासा काम पसंद आया होगा!

वेसेतो हम चाहे वो सब कुछ कर सकते हैं! मगर हम चाहते नहीं हैं!ऐसा क्या हो गया की हमारी कोई ऐसी इच्छा ही नहीं होती की हम क्या करते हैं!या नया क्यों नहीं करते हैं! जेसे जेसे हम साथियो की इस काम के प्रति समाज बढाती हैं!आप मानो हमारा काम सरल हो गया हैं!हमारी जानकारी और उसे सब के साथ शेर करने की जो प्रक्रिया हैं!हम उसे किसी नए तरीके से देखते हैं! आपसे आशा रखते हैं की आप कोई भी जानकारी हो तो कृपया हमे भेजें!
उस जानकारी का हम जहा इस्तमाल करेंगे वहां आप को सन्मान दिया जायेगा!हम नेता नहीं हैं! बच्चो के साथ काम करते हैं!आप भी एक बार बच्चो सा मासूम भरोसा करके हमसे जुडिए!आप से भी नया विचार हम निकलवा लेंगे! 

Thursday, April 20, 2017

ગરીબ છતાં અમીર

એક પતિ-પત્ની ઘઉં તથા મસાલાની ખરીદી કરવા બજારમાં ગયા.
બધો સામાન ખરીદી લીધા પછી એક લાચાર મજૂરને પાસે બોલાવ્યો.
મજુરની આધેડ ઉંમર, છેક ઊંડી ઉતરી ગયેલી આંખો, વધી ગયેલી દાઢી.મેલાંદાટ કપડાં અને દૂરથી ગંધાતો એનો પરસેવો એની સંઘર્ષમય જિંદગીને બેનકાબ કરતા હતા.

આવા મજબૂર મજદૂર પાસેથી મજૂરીની રકમ માટે રકઝક કરી પતિ-પત્નીએ એના કરતા પણ નીચી માનસિકતા પ્રગટ કરી. કચવાતા મને ચાલીસ રૂપિયાનું કામ ત્રીસ રૂપિયામાં સ્વીકારી એ આધેડ સામાન અને સરનામું લઈને પરસેવે રેબઝેબ રવાના થયો. એક ગરીબને મજૂરીમાં દશ રૂપિયા ઓછા કરાવીને રાજી થયેલા પતિ-પત્ની ત્રીસ રૂપિયા એડવાન્સ આપવાની દાતારી કરી બેઠા. 

દંપતી ઘરે પહોંચ્યું. અડધી કલાક થઇ, કલાક થઇ, દોઢ કલાક થઇ, પછી શ્રીમતીએ ધીરેધીરે પતિને ધમકાવવાનું શરૂ કર્યું. "હું તમને કાયમ કહું છું કે અજાણ્યા માણસનો વિશ્વાસ ન કરવો. મેં તમારું હજાર વાર નાક વાઢ્યું છતાં તમારામાં અક્કલનો છાંટો આવતો નથી. જે માણસ રોજ ટંકનું લાવીને ટંકનું ખાતો હોય એને બાર મહિનાનું અનાજ મળી જાય તો મૂકે ? નક્કી એ નાલાયક આપણો સમાન લઈને ઘરભેગો થઇ ગયો હશે. ચાલો, અત્યારે જ બજારમાં જઈને તપાસ કરીએ અને ન મળે તો પોલીસસ્ટેશન જઈને ફરિયાદ કરીએ.

રસ્તામાં પતિ-પત્નીની નજર એક યુવાન મજૂર ઉપર પડી. યુવાન મજૂરને પેલા આધેડ મજૂર વિશે પૂછવા ઉભો રાખ્યો. એની લારીમાં જોયું તો એમનો જ સામાન હતો.પત્ની ગુસ્સામાં બોલી "પેલો ડોસો ક્યાં ?"ત્યારે યુવાન મજૂર બોલ્યો કે "બહેન એ છેલ્લા એક મહિનાથી બીમાર હતા. ભૂખ, બીમારી અને ગરમી એમ ત્રણગણા તાપને સહન ન કરી શક્યા. લૂ લાગવાથી એ રસ્તા પર પડીને મરી ગયા. પણ મરતાં પેલા મને કહેતા ગયા કે મેં આ ફેરાના રૂપિયા લઇ લીધા છે એટલે તું સામાન પહોંચાડી દેજે. હું તો મરતાં માણસનું વેણ પાળવા આવ્યો છું."ગરીબના દિલની અમીરી જોઈને પતિની આંખમાં આંસુ હતા.પરંતુ શરમથી ઝૂકી ગયેલી શ્રીમતીની આંખમાં તો પતિની આંખ સામે જોવાની પણ હિંમત નહોતી.

Tuesday, April 18, 2017

में कूड़ा क्यों रखु!

एक दिन एक व्यक्ति ऑटो से रेलवे स्टेशन जा रहा था। ऑटो वाला बड़े आराम से ऑटो चला रहा था। एक कार अचानक ही पार्किंग से निकलकर रोड पर आ गयी। ऑटो चालक ने तेजी से ब्रेक लगाया और कार, ऑटो से टकराते टकराते बची। कार चालक गुस्से में ऑटो वाले को ही भला-बुरा कहने लगा जबकि गलती कार- चालक की थी। ऑटो चालक एक सत्संगी था। उसने कार वाले की बातों पर गुस्सा नहीं किया और क्षमा माँगते  हुए आगे बढ़ गया। ऑटो में बैठे व्यक्ति को कार वाले की हरकत पर गुस्सा आ रहा था और उसने ऑटो वाले से पूछा तुमने उस कार वाले को बिना कुछ कहे ऐसे ही क्यों जाने दिया। उसने तुम्हें भला-बुरा कहा जबकि गलती तो उसकी थी।

हमारी किस्मत अच्छी है, नहीं तो उसकी वजह से हम अभी अस्पताल में होते। ऑटो वाले ने कहा साहब बहुत से लोग कूड़े से भरे ट्रक की तरह होते हैं। वे बहुत सारा कूड़ा अपने दिमाग में भरे हुए चलते हैं। जिन चीजों की जीवन में कोई ज़रूरत नहीं होती उनको मेहनत करके जोड़ते रहते हैं जैसे क्रोध, घृणा, चिंता, निराशा आदि। जब उनके दिमाग में इनका कूड़ा बहुत अधिक हो जाता है तो वे अपना बोझ हल्का करने के लिए इसे दूसरों पर फेंकने का मौका ढूँढ़ने लगते हैं। 

इसलिए मैं ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखता हूँ और उन्हें दूर से ही मुस्कराकर अलविदा कह देता हूँ। क्योंकि अगर उन जैसे लोगों द्वारा गिराया हुआ कूड़ा मैंने स्वीकार कर लिया तो मैं भी एक कूड़े का ट्रक बन जाऊँगा और अपने साथ साथ आसपास के लोगों पर भी वह कूड़ा गिराता रहूँगा।मैं सोचता हूँ जिंदगी बहुत ख़ूबसूरत है इसलिए जो हमसे अच्छा व्यवहार करते हैं उन्हें धन्यवाद कहो और जो हमसे अच्छा व्यवहार नहीं करते उन्हें मुस्कुराकर माफ़ कर दो। हमें यह याद रखना चाहिए कि सभी मानसिक रोगी केवल अस्पताल में ही नहीं रहते हैं। कुछ हमारे आस-पास खुले में भी घूमते रहते हैं । 
                                                         
खेत में बीज न डाले जाएँ तो कुदरत उसे घास-फूस से भर देती है।
उसी तरह से यदि दिमाग में सकारात्मक विचार न भरें जाएँ तो नकारात्मक विचार अपनी जगह बना ही लेते हैं।दूसरा नियम है कि जिसके पास जो होता है वह वही बाँटता है। "सुखी" सुख बाँटता है, "दु:खी" दुःख बाँटता है, "ज्ञानी" ज्ञान बाँटता है, भ्रमित भ्रम बाँटता है, और "भयभीत" भय बाँटता है। जो खुद डरा हुआ है वह औरों को डराता है।

Monday, April 3, 2017

स्टूडियो में...

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मातृभाषा कार्यक्रम के अनुरूप कहानियों का रिकोर्डिंग करना था!ग्सर्ट ने मुझे इस महत्वपूर्ण काम में जोड़ा हैं!

मेने GCERT के साथ रहकर समग्र गुजरात से जुड़े अध्यापको को पसंद करने के काम में योगदान दिया हैं! हमने कुल मिलके पचास से अधिक कहानिया रिकोर्ड की हैं!इस मेसे कई साड़ी कहानिया हमने पसंद की हैं! थोड़े दिनों बाद ये साडी कहानिया आप वन्दे गुजरात में देख पाएंगे! 
मुझे मेरी कहानी रिकोर्ड करने के साथ एन्य से से रिकोर्डिंग करवाना था! इस बझ से मुझे भी कहानी का रिकोर्डिंग करना था!सबसे मुश्किल काम ये की आगे बच्चे बेठे नहीं और उनके लिए कहानी कहनी हैं!यहा रिकोर्डिंग करते समय हमने बहोत आनद लिया!बहोत शिखा हैं!

मुझे मेरी एक साथी ने कहा हैं की मेरा चहेरा नही दिल अच्छा हैं!और इसी लिए मेने दिल से कहानी कही!15 मिनिट तक मेरी कहानी चली!एक भी रिटेक नही आया और कहानी ख़तम हुई!मुझे ख़ुशी हैं की मेने कहानी ऐसे साथियों के साथ कही जो नए विचारो के साथ चल रहे हैं! 

आज में यह कहूँगा की ऐसा कार करने से मातृभाषा के विकास के लिए जो भी होगा अच्छा होगा!आशा रखते हैं आपको भी यह कार्य उपयोगी होगा!

Friday, March 31, 2017

कलाम जी का पथ...



“You have to dream before your dreams can come true.”
our former President & eminent scientist APJ Abdul Kalam, also known as the India’s ‘Missile Man’.Kalan died on July 27, 2015 after he was hospitalized in a very critical condition at a private hospital in Shillong.
He was a renowned scientist and is considered to be the main brain behind India’s space launch vehicle (SLV) and missile programme.
Here are some of Kalam’s inspirational sayings through which he will be remembered forever.
10 step of kalam sir...
''Great dreams of great dreamers are always transcended.”
“Man needs his difficulties because they are necessary to enjoy success.”
“You see, God helps only people who work hard. That principle is very clear.”
“Let us sacrifice our today so that our children can have a better tomorrow.”
''To succeed in your mission, you must have single-minded devotion to your goal.”
''Look at the sky. We are not alone. The whole universe is friendly to us and conspires only to give the best to those who dream and work.”
''Let me define a leader. He must have vision and passion and not be afraid of any problem. Instead, he should know how to defeat it. Most importantly, he must work with integrity.”
If a country is to be corruption free and become a nation of beautiful minds, I strongly feel there are three key societal members who can make a difference. They are the father, the mother and the teacher.”
''My message, especially to young people is to have courage to think differently, courage to invent, to travel the unexplored path, courage to discover the impossible and to conquer the problems and succeed. These are great qualities that they must work towards. This is my message to the young people.”

Sunday, February 12, 2017

Kids Home Work...

सीआईएससीई (CISCE: Council for the Indian School Certificate Examinations) और सीबीएसई(CBSE: 

Central Board of Secondary Education) के स्कूलों में बच्चों पर लादे गए पाठ्यक्रम एवं होमवर्क के दबाव ने उनका शारीरिक विकास रोक दिया है। बड़ा पाठ्यक्रम और स्कूलों में मिलने वाले रोज-रोज के होमवर्क ने बच्चों का बचपन छीन लिया है। बच्चे स्कूल से घर आने के बाद भी हर समय होमवर्क, प्रोजेक्ट सहित अन्य गतिविधियों जुटे रहते हैं। खेलकूद जैसी गतिविधियों में भागीदारी के अभाव में बच्चों का मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है। हालांकि इधर सीबीएसई ने भी बच्चों के होमवर्क तथा पाठ्यक्रम के बोझ को कम करने के लिए पहल की है।


आइये देखें कि आरटीई (RTE : Right to Education), एनसीएफ (NCF) की गाइड लाइन क्या कहती है-
  • आरटीई में होमवर्क नहीं देने की बात कही गई है
  • एनसीएफ 2005 में रटंत पद्घति से दूर रहने की बात
  • पाठ्क्रम ऐसा हो जो आसानी से याद हो जाए
  • बच्चों को उनके स्तर के पाठ्यक्रम को ही पढ़ने को लागू किया जासीबीएसई की ओर से होमवर्क पर मांगे गए सुझाव
  • हर सप्ताह होमवर्क कितना दिया जाए?
  • होमवर्क किस प्रकार से पूरा किया जाए?
  • पूछा गया है कि क्या सभी विषयों के लिए होमवर्क हो?
  • क्या सभी बच्चों को बराबर होमवर्क दिया जाए?
  • क्या इंटरनेट को होमवर्क का हिस्सा बनाया जाए?
    इधर एक प्रवृत्ति और बढ़ी है कि आईएससीई एवं सीबीएसई से जुड़े निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों से इतर दूसरी किताबें थोप दी गई हैं। इन किताबों में बच्चों के स्तर को ध्यान में दिए बगैर ऐसा पाठ्यक्रम लाद दिया है जो उन बच्चों के स्तर का नहीं है। बार-बार पढ़ाने के बाद भी बच्चा जो कोर्स पढ़ रहा है, उसकी अपने जीवन में उपयोगिता सिद्घ नहीं कर पाता है। ऐसे में इस प्रकार के पाठ्यक्रम थोपने से बचना होगा।

    मानसिक दिक्कतों से अलग पढ़ाई के बोझ के कारण बच्चों का शारीरिक विकास भी नहीं हो पा रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चे की हड्डियों को इसी उम्र में बढ़त (Growth) मिलता है। शारीरिक मेहनत के अभाव में संभव नहीं है। बच्चे इंडोर गेम में अधिक भागीदारी करते हैं,  इस कारण से उन्हें सूरज की रोशनी नहीं मिल पाती है, ऐसे में उन्हें विटामिन डी भी नहीं मिल पाता है। इस कारण से शरीर का विकास ठप पड़ जता है। बच्चे के मानसिक विकास के लिए खेल जरूरी है।

Monday, January 30, 2017

વાહ રે બાપુ...ગાંધી બાપુ....



આજે મહાત્મા ગાંધીજીનો નિર્વાણ દિવસ છે.ગાંધીજીના જીવનનો એ જાદુ છે.કોઈપણ સાત્વિક માણસ માટે એ સતત જીજ્ઞાસાનો વિષય છે.જૂનાગઢના ડોક્ટર શેલાડીયાએ લખ્યું કે,'ગાંધીજીને પ્રત્યક્ષ જોયા હોત તો મને જીવતું જાગતું અધ્યાત્મ અનુભવવા મળત.મારા જન્મ પહેલા બાપુને કોઈએ ત્રણ ગોળીથી વીંધી નાખ્યા હતા.

આજે ગાંધીજીને માત્ર ભારતના રાષ્ટ્રપિતા તરીકે ઓળખીએ છીએ.જે એક અધુરી ઓળખાણ છે. ગાંધીએ સત્યાગ્રહો કર્યા. એવો પરિચય પણ ના આ. ગાંધીજીની પૂર્ણતા તો તેમના અધ્યાત્મમાં છે. ગાંધીના ખૂન થયાં પછી જગતભરના લોકોએ અંજલિ આપી છે. જે આજદિન સુધી અપાતી રહી છે.
આઈસ્ટાઈનને અંજલિ આપતાં કહેલું, "ભવિષ્યના લોકો એ માનવા થૈયાર નહીં થાય કે હાડમાંસ ધારણ કરનાર માણસ આટલો મહાન હોઈ શકે." ઓશોએ ગાંધીની કેટલીક વાતોની બહું જ કટુ આલોચના કરી છે પણ ઓશોએ ગાંધીને જેવી અંજલિ આપી છે તેવી અંજલિ બીજા કોઈ આપી શક્યા નથી. કારણ ગાંધીને ઓશો જે રીતે જોઈ શક્યા છે એ જોવા માટે દ્રષ્ટિ જોઈએ. ઓશોએ કહ્યું છે: "ગાંધી જેવા વ્યક્તિત્વને મેળવવા સ્વયં પૃથ્વીએ એક હજાર વર્ષની તપશ્ચર્યા કરવી પડે, ત્યારે ગાંધી મળે."
ગાંધી મૂળે આધ્યાત્મિક - ધાર્મિક માણસ હતાં. રાજનીતિમાં રહેવું પડ્યું અને સમગ્રજીવન એ એની નીયતિ હતી. તેથી જેમ જેમ આઝાદી નજીક આવતી ગઈ તેમ તેમ તેઓ સત્તાથી દૂર થતાં ગયા અને એક સ્થિતિ એવી આવી કે સ્વરં ગાંધીએ કહેવું પડ્યું, "મારું સાંભળે છે કોણ?"
ગાંધીની આસપાસ જે લોકો હતા તે કાંતો રાજનીતિજ્ઞો હતા અથવા રાજકારણીઓ હતાં.  ગાંધી સાથે રહેવું પડ્યું એ એમની મજબૂરી હતી. જેમ જેમ આઝાદી - સત્તા નજીક આવતી ગઈ તેમ તેમ આસપાસના લોકો ગાંધીથી દૂર થતાં ગયાં. કારણ ગાંધી સાથે ચાલવા જાય તો સત્તા છોડવી પડે તેમ હતી. અને એ લોકહિતના બહાના નીચે છોડવા કોઈ તૈયાર ન હતું.
ગાંધીજીના ખૂનની જવાબદારી માત્ર નથુરામ ગોડસે એકલાની નથી. આ તમામ સંકુચિત પરિબળો જવાબદાર છે. વીસમી જાન્યુઆરીએ ગાંધીની સાંજની પ્રાર્થના સભામાં ગ્રેનાઈડ ફેકાયેલ પણ સદ્ નસીબે નિષ્ફળ રહેલ. એ જ દિવસે પર્યાપ્ત માહિતી પોલીસને મળી હતી. છતાં ત્રીસ જાન્યુઆરી સુધી એ જવાબદાર ગુન્હેગારોને પોલીસે કેમ પકડ્યા? એ વખતે અંગ્રેજો શાસક ન હતાં.  આપણે જ શાસકો હતાં.  ગાંધીને જે અંગ્રેજો ન મારી શક્યા, જે મુસ્લિમો મારી ન શક્યા તેને હિન્દુઓ મારી શક્યાં.
કારણ ગાંધીની વ્યાપક ધર્મભાવના કોઈને માટે બંધ બેસતી ન હતી.
આજના દિવસે આવા પાવન પુરુષને વંદન કરીએ તેમાં જ આપણું કલ્યાણ છે.
ડૉ.શેલડિયા જૂનાગઢ.