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Saturday, August 11, 2018

जरूरत ओर शोध


जरूरत शोध की जननी हैं।
आप को ये विधान सांजे ने के लिए ओर कुछ नहीं करना हैं।सिर्फ फोटो को देख कर समज़ लेना हैं।अगर देखा जाए तो आए तय हैं कि जब हम किसी की जरूरत होती हैं,हम उस सुविधा या व्यवस्था के लिए कुछ नया खोज लेते हैं।
कोई व्यक्ति अपने कद के कारण एक बेंच पे नहीं सो सकता था। अब करें भी तो क्या करें।उन्हों ने एक नया रास्ता निकाला जो में आपको शेर कर रहा हूँ।

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जीवन में सुविधा नही,साहस और समर्पण महत्वपूर्ण हैं।रास्ते तो बहोत निकलेंगे,अगर मनमे ठाना हैं तो कुछ तो होगा।

Wednesday, August 8, 2018

शिक्षा और स्किल



शिक्षा को हम देखते हैं।उसे समझ ने का प्रयत्न करते हैं।हमारे आसपास कुछ ऐसे लोग ओर ऐसी घटनाएं होती हैं।इस कि हझ से हमे ओर भी चिंतन करने का मौका मिलता हैं।
आज कल शिक्षा में रटना ओर लिखवाना या कहिए पेपर देखकर उसको वोमिट करना एक सामान्य   रास्ता हैं।सिर्फ मेरिट केओ ध्यान में रखकर हमे भविष्य दिखाई पड़ता हैं।
सिर्फ रटलेने से हमारा भविष्य ओर सामने वाले कि समज को हम जान ने का दावा करते हैं।क्या हमारा वो दावा सही हैं?अगर है तो सभी जगह रटने से पास हुए लोग तो नजर नहीं आते हैं।ज्यादा तर रोजगारी प्राप्त करने वाले स्किल से ही आमदनी का रास्ता खोजते हैं।अगर स्किल से कामना है तो रटकर जीवन बर्बाद करना जरूरी नहीं हैं।
आज स्किल इंडिया की बात अभी शुरू हुई हैं।आगे स्किल से ही हम अपना ओर देश का विकास कर पाएंगे।


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स्किल वाला बेरोजगार नही होता।
रटने वाला स्किल वाला नहीं होता।

Tuesday, July 24, 2018

એવું જ હોય...



આધુનિક સમયમાં અનેક સુવિધાઓ આપણી આસપાસ જોવા મળે છે.આવી જ એક સુવિધા એટલે સેલફોન.સેલ ફોનના જમાનામાં વૃદ્ધ,યુવાન કે બાળક પણ સેલફોનથી દૂર રહી શકતો નથી. આજે દરેક ઘરે સરેરાશ સેલ ફોન છે. દરેક બાળકને સેલફોન એટલેકે મોબાઈલમાં બધું જ આવડે છે. આ ઉપકરણનો યોગ્ય ઉપયોગ થાય તપ તે ખૂબ જ ઉપયોગી અને હાથવગું સાધન છે. જો બાળકની ઉંમર પ્રમાણે યોગ્ય ઉપયોગ કરાવવામાં આવે તો બાળકનો માનસિક વિકાસ યોગ્ય રીતે થાય છે.આજ હવે એવી પરિસ્થિતિ નું નિર્માણ થઈ રહ્યું છે કે દાદા દાદી મોઢે વાર્તા કહેતા નથી.કદાચ એટલો સમય નથી.ક્યાંક સાથે સંયુક્ત કુટુંબ ન હોવાથી આવું થાય છે. આજે દાદા કે દાદી જાતે વાર્તા કહેવાને બદલે યુટ્યુબ માં વાર્તા નો વીડિઓ જોવે છે.કારણ હવેનો  જમાનો હવે સેલફોનનો છે.

મારાં એક  મિત્ર છે. તે શિક્ષણના વ્યવસાય સાથે જોડાયેલાં છે.તેમના પતિ અને પરિવાર શિક્ષિત અને આર્થિક સંમ્પન છે. તેમનો પુત્ર હાલ પહેલા ધોરણમાં ભણે છે.તેનું નામ નીક. થોડા સમય પહેલા એને પોતાનો ફોન જોઈએ એવી માંગણી કરી. એ કહે: “મમ્મી મારો ફોન નંબર આપ મારે મારા friend ને આપવો છે.'' એને ઘરના એક બે નંબર આપ્યા.આ જોઈ છોકરો કહે: 'મને મારો નંબર જોઈએ છે. બોલો હવે પહેલા ધોરણના બાળકોને પોતાના ફોન નંબર જોઈએ છે.સમય એવો આવતાં વાર નહિ લાગે કે શિક્ષકોની જેમ બાળકોને પણ પોતાના સેલ ફોન શાળા માં જમા કરાવવા પડશે.આજે અહીં બે પોસ્ટર છે.એક પોસ્ટર આધુનિક સમય પ્રમાણે જન્મ લેતા બાળક ને આધારે કટાક્ષ છે.જ્યારે બીજું પોસ્ટર બાળકોને માટે ખાસ સર્જક બાળકો માટે છે.

Monday, July 2, 2018

हमारा ignite


आप सभी को मेरा नमस्कार।आप माता पिता हो या गुरुजन।आप से मेरा निवेदन है कि इग्नाइट कंपटीशन में आप सहयोगी बने।आप बच्चो तक ये जानकारी शेर करें।उनतक पहुंचाए।वर्ष: 2018 के  पुरस्कारों की घोषणा डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जन्मदिवस पर की जाएगी।यहाँ ये जानकारी देना आवश्यक हैं कि ये नाम या पुरस्कार 15 अक्टूबर 2018 को गोशित किये जायेंगे। आप सभी से निवेदन है कि अपने अपने बच्चों से Idea कंपटीशन करवाएं।आप सरकारी स्कूल में या प्राइवेट स्कूल में हो।आप पेरेंट्स हो,अधिकारी या संचालक हो।आप इस कार्य में सहयोग कर सकते हैं।कक्षा 1 से 12 तक के बच्चों के  नवाचार या आइडियाज लिखकर नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन की साइट पर ऑनलाइन सबमिट करें।अगर आप on line नहीं कर सकते हैं तो ऑफलाइन भी भेज सकते हैं। उसके अलावा आप...

Sir फाउंडेशन,सोलपुर(महाराष्ट्र)
सप्तरंगी फाउंडेशन,(गुजरात) हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय को भी आईडिया भेज सकते हैं!आप के  जो भी आईडिया हमारे पास आएंगे हम नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के पास जमा करवा देंगे ।आपके बच्चों का एक छोटा सा आईडिया उनके पूरी जिंदगी को बदल सकता है Idea कंपटीशन में पुरस्कारों की घोषणा के बाद राष्ट्रपति महोदय द्वारा बच्चों को सम्मानित किया जाता है। उनका जो भी idea होगा उसको पेटेंट करवाने में भी नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन पूरा सहयोग करती है ।NIF का यह प्रयास है कि किसी भी क्षेत्र में कोई भी बच्चा जो कि इनोवेटिव विचार रखता है, वह पीछे ना रहे। उन बच्चों को भी एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराकर उनके Idea आविष्कार को देश के सामने लाया जाए। हरियाणा व उसके आसपास के राज्यों में Idea कंपटीशन करवाने के लिए हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय से संपर्क कर सकते हैं ।ऐसी आइडिया कॉम्पिटिशन के जरिये मीले हुए नवाचार को हम NIF तक पहुंचाते हैं। हमारी टीम आपके विद्यालय में आकर बच्चों के साथ इंडिया कंपटीशन करवाने में सहयोग करेगी।इसके लिए आप को कोई खर्च नहीं करना हैं।आप मेरे ब्लॉग से कैसे विचार इकठ्ठा करना हैं इस के बारे में दी गई पुरानी जानकारी का उपयोग कर सकते हैं।
हमे सप्तरंगी फाउंडेशन के माध्यम से आपके विचार NIF तक पहुंचाने में गर्व महसूस होगा।

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विचार सदैव अकेला होता हैं।उस के आधार पर लाभ प्राप्त करने वाले एक से अधिक या बहोत सारे व्यक्ति होते हैं।

Tuesday, June 26, 2018

સાચું શું...


કેટલીક બાબતો જોઈએ.
આ વિગતો ને આધારે આપણે જ નક્કી કરીએ કે શું કરવું જોઈએ.સમય સાથે કદમ મિલાવનાર જ સફળ થાય છે.આ માટે બે બાબતો જોઈએ.

પહેલી વાત એ કે નોકિયાએ એન્ડ્રોઇડ ના સ્વિકાર્યુ. સાથે બીજી વાત એ કે યાહૂએ ગુગલને નકારી દીધી. આ બે વાર્તા કે વાર્તાઓ પુરી થઇ. આ બે વાર્તાઓ માં શું શીખ્યા?

આ બે સત્ય બાબતો ને આધારે નીચેની બાબતો સમજી શકાય.

● જોખમો લો.
● બદલાવને સ્વીકારો
● તમે સમય સાથે બદલતા નથી તો તમે નાશ પામી શકો છો.

આ સાથે બીજી બે વાર્તાઓ જોઈએ.

1. ફેસબુકે વોટસ્ અપ અને ઇન્સટાગ્રામ ખરીદી લીધી.
2. ફ્લિપકાર્ટે મંત્રા ખરીદી લીધી અને ફ્લિપકાર્ટે ખરીદેલ મંત્રાએ જબોંગ ખરીદી લીધી.
    આ બે બીજી વાર્તાઓ પણ પુરી થઇ.બોલો શું સત્ય...સાથે શું શીખ્યા?

● તમારા પ્રતિસ્પર્ધીઓને તમારા સાથીદાર બનાવી બને તેટલા વધુ શક્તિશાળી બનો.

● ટોચ સુધી પહોંચો અને પછી સ્પર્ધા ના કરશો.

● હંમેશા નવુ નવુ અપનાવતા રહી નવું શિખતા રહો.

આ ઉપરાંત આવી જ બીજી બે બાબત જોઈએ.

1. કર્નલ સેન્ડર્સે 65 વર્ષની વયે કેએફસી(KFC) ની સ્થાપના કરી હતી.

2. જેકમા, જેમને કેએફસી(KFC) માં નોકરી ના મળી, અને અલીબાબા કંપની શરૂ કરી. આ બે વિગત કે વાર્તાઓ પુરી થઇ

બોલો ...શું શીખ્યા?

● ઉંમર એ ફક્ત એક આંકડો છે.
● માત્ર તે જ સફળ થાય છે જે સતત પ્રયત્નો કરતાં રહે છે.


અને છેલ્લે એક વાત જે નક્કી કરવા જેવી છે.
લમ્બોર્ગીનીની સ્થાપના એક ટ્રેક્ટરના માલિકે બદલો લેવાની ભાવનાથી કરી હતી. કારણ કે તેમનુ અપમાન ફેરારીના માલિક એન્ઝી ફેરીરીએ કર્યુ હતુ. વાર્તા પુરી થઇ.

શું શીખ્યા?

● ક્યારેય કોઈપણ વ્યક્તિને નાનો ન સમજશો!!
● સફળ થઇ ને સાબિત કરવુ એજ શ્રેષ્ઠ બદલો છે.

આ સાથે એમ પણ કહેવાય કે...

◆ સખત મહેનત કરો!
◆ તમારા સમયનું યોગ્ય રોકાણ કરો!
◆ શું તમે કામ માં ખુશ છો!
◆ નિષ્ફળતાથી ગભરાશો નહી!


આવું બધું ગણું વાંચવા સામે આવે છે.કેટલુંક ગમતું નથી.કેટલુંક પસંદ નથી.બોલો એમાં કોનો વાંક.


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સફળતા કોઈના કહેવાથી નહીં,સખત પરિશ્રમ અને નવ વિચારથી જ આવે છે.

Thursday, June 14, 2018

गांधी के विचार



गांधी एक व्यक्ति।
गांधी एक विचार।
कहिए कि गांधी एक विचारधारा।
आज भी गांधी विचार से जीने वाले लोग हमारी आसपास होते हैं।ऐसे लोग जो हमारे लिए आदर्श होते हैं।किसी एक जगह जब गांधी को याद करना होता हैं,सभी उन्हें चरखे के लिए याद करते हैं।

गांधी याने चरखा ही नहींआज के समय में अगर गांधी हिट तो शायद टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देते।बापू बेरिस्टर थे,ओर अपने कर्म को वो लोगो के सामने रखते थे।कुछ लोग उन्हें जुनवानी कहते हैं।कुछ लोग उन्हें अशक्त कहते हैं।मगर गांधी एक विश्व विभूति हैं।दुनियाका कोई देश ऐसा नहीं जहाँ बापू के नाम का रास्ता या चोक न हो।
आज के समय में गांधीजी को अहिंसा के लिए याद करना जरूरी हैं।किसी के सन्मान को ठेस पहुंचाना एक तरफ से हिंसा हैं।ऐसी हिंसा के लिए हम हमारी जिंदगी को बर्बाद करते हैं।किसी का अपमान करना अगर हिंसा हैं तो किसी को सन्मान देना अहिंसा माना जाना चाहिए।महर ऐसा नहीं हैं।


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सिर्फ बाते करने से जीवन गांधी जैसा नहीं होता,जो कहते हैं उसे करना भी पड़ता हैं।निभाना भी पड़ता हैं।

Wednesday, June 13, 2018

हमारी जिम्मेदारी

व्यक्तिगत और सामूहिक।
हम दो तरीके से काम करते हैं।
हर बार सफलता मिलने के लिए ही हम प्रयत्न करते हैं।मगर वो संभव नहीं हो रहा हैं।
जब हमारे बहोत सारे प्रयत्न के बावजूद भी हम सफल नहीं होते हैं तो हमे दुख होता हैं।मैनेजमेंट में सफलताके लिए 14 प्रयत्नों को समजाया गया हैं।क्या हमारे पास एक ही काम 14 तरीको से या 13 से अधिकबार करने की धीरज हैं।
कोई लक्कड़ हार 95 वे बार कुहाड़ी को मार के पेड़ काटने की कोशिश करता हैं,हो सकता हैं 95 प्रयत्नों के बाद वो असफल रहा हो।अब हीग ये की कोई दूसरा व्यक्ति सिर्फ 5 बार कुहाड़ी मारकर पेड़ काट लेता हैं।किस के प्रयत्नों से ये हुआ!पहले लक्कड़ हारे के कारण या दूसरे ने ही ये कर लिया।
हम असफल होंगे तो वो असफलता हमारी हैं।अगर हम सफल होंगे तो लोग उसके बाद हमे विशेष व्यक्ति बनादेंगे।कहते हैं कि ताला खोलने के लिए अगर 10 चाबी हैं,तो हमे दस चाबी खत्म होने तक हमारी कोशिश नहीं छोड़नी चाहिए।


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कोशिश करना हमारा कर्तव्य हैं,कर्तव्य को पूरा करने का हौंसला ओर शक्ति भगवान या कुदरत से मिल जाती हैं।

Wednesday, May 30, 2018

गर्मी और हम


गर्मी का मौसम हैं।सभी परेशान हैं। आज ओर कल का तापमान 48.00 डिग्री हुआ।समजीए की सूर्य की गर्मी का 48 % हिस्सा जी हमारे ऊपर गिरा हो।सरकार क्या करेगी।हमे ही कुछ करना पड़ेगा।
आइए हम सब  मिल के अब 55 डिग्री का लक्ष्य लेकर चलें । या 7% कम करने का कुछ सोचे।
हम क्या के सकते हैं...आज हम नीचे की बाते करते हैं।

- और अधिक पेड़ काटें ।
- सड़कें चौड़ी करें । 
- चारो तरफ सीमेंट के जंगल खड़े करें
- सभी पब्लिकेशन के अखबार मंगाए ताकि बांस-पेड़ समाप्त हो जाएं
- खूब जोड़ी कपड़े​, जूते रखे
- बहूत सारे टूय्ब वेल खोदें
- खूब प्लास्टिक प्रयोग करें
- नदियों में रोज कचरा डालें
- रात-दिन वातानुकूल, कूलर चलाऐं
- आटोमोबाइल्स को चौबीस घंटे चालू रखे,
- पानी सिर्फ आर ओ का पियें 
- साईकिल पर प्रतिबंध लगवा दें
- देश में धुंवा व प्रदुषण पैदा करने वाले कारखाने लगाए
- वह सभी कार्य करे जिससे ओजोन छिद्र अपने जीवनकाल में खूब बड़ा हो जाय
- खूब जी भर कर पानी ढोले
- खूब डिस्पोजेबल सामान प्रयोग करें 
और घर अनावश्यक सामान से भर दें।
- रोज सुबह शाम पाइप लगाकर पीने के पानी से घर के सामने का सड़क धोएं, कार को रोज स्नान करवाए, पम्प चलाकर भूल जाये जबतक पड़ोसी आकर न कहे पम्प बन्द न करें । पानी की खूब बर्बादी करें ।
व नई पीढ़ी के लिए संदेश छोड़कर जाएं।55 तक पहुंचने के लिए उपरोक्त बाते करने से तो हम जल्द पहुँचपाएँगे।अगर कम करना हैं तो हमे खुद पेड़ लगाने होंगे यही एक रास्ता हैं।

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एक व्यक्ति आज अपना पेड़ लगाए तो 5 साल में गर्मी कम हो सकती हैं

Friday, May 25, 2018

खेल और बच्चे

छोटे बच्चे।
छुट्टियों में अपनी थोड़ी मनमानी कर सकते हैं।मेरे एक दोस्त हैं।लालजीभाई देसाई।वो ज्यादातर mgs या whats aep में संदेश नहीं भेजते।अपना इस काम में से बचाया हुआ समय वो राष्ट्रनिर्माण के काम में लगाते हैं।एक अच्छे अध्यापक,प्रधानाचार्य ओर व्यक्ति के तौर पे में उन्हें पिछले 10 साल से अधिक समय से जनता हुं।
कुछ दिनों पहले उन्होंने मुजे एक फोटो भेजा।
बच्चे खेलते थे।पेड़ पे चढ़े थे।फोटो खींचने वाले ने खूबसूरत क्लिक की हैं।बच्चे छुट्टियोंमें ही क्यो रोज बरोज खेलने चाहिए।पेड़ पे चढ़ना,दौड़ना,कूदना ओर गाना बजाना ओर दिमाग की कसरत जैसे खेल खेलना महत्वपूर्ण हैं।मेने आगे भी लिखा हैं कि ऐसा रोज होना चाहिए।
अब जो नहीं हो रहा हैं,उस के लिए रोने से अच्छा हैं,कुछ दिनों तक तो होता हैं।मेरा यकीन हैं कि लालभाई के बच्चे ऐसे ही खेलते होंगे।

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खेल खेलने से मन और कर्म का विकास होता हैं।सामूहिक भावना बढ़ती हैं,ओर आत्म विश्वास बढ़ता हैं।

Thursday, May 24, 2018

आई can ओर IQ





We can मुमकिन हैं।मेरे किसी दोस्त ने कहा कि तुम ऐसा क्यों लिख              रहे हो,मेने कहा कुछ ऐसा होता हैं कि जो हम अकेले नहीं रह सकते।जब अकेले कुछ होनाही नहीं हैं तो क्यो we can नहीं...
आत्म विश्वास महत्व पूर्ण हैं।मेरे एक दोएत ने मुजे ये पोस्टर भेजा हैं।जिस में लिखा हैं कि आपके I Can आपके IQ से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।हमे विश्वास रखना हैं कि हम कर सकते हैं।अच्छे आईक्यू वाले सब कर सकते हैं ऐसा नहीं हैं।और आई केन वाले जो कर सकते हैं वो आईक्यू वाले नहीं कर सकते।आप आईक्यू वाले हैं कि आई केन वाले..!

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We can मुमकिन हैं।
आई केन बढ़िया हैं मगर we केन मुमकिन हैं बहोत बढ़िया हैं।

Sunday, May 20, 2018

एक विचारक

एक कलाकार।
एक सर्जक... एक विचारक।
ये तीनो सदैव अपने विचारों को अपने तरीको से पेश करते हैं।एक चित्रकार ने मटके को अपना किरदार बनाया हैं।इस चित्र में मटका एक हैं। इसे पकड़ने वाले भी अलग अलग हैं।समजीए कोई भी तीन व्यक्ति हैं।उन्होंने मटके को अपने तरीके से पकड़ा हैं।तीनो किरदार ओरत के हैं।अगर मटका जिम्मेदारी हैं तो उस जिम्मेदारी को तीनों ने अपने तरीको से निभाया हैं।ओरत याने मा...बेटी या जीवन साथी।सर्जक ज्यादा बोल ते नहीं,वो अपनी बात को अपने तरीके से दिखाते हैं,समजाते हैं।

तीनो ने एक पुरूष को अपने तरीके से पकड़के रखा हैं।मटका अगर पुरुष हैं तो तीन तरीके से वो पकड़ के रखे हैं।कुछ दिनों पहले की बात हैं।एक व्यक्ति को पुलिस ने पकड़ा।उसके हाथ में शराब की बोतल थी।पुलिस ने कहा तुम्हारे हाथ में क्या हैं? उस व्यक्ति ने अपने हाथ दिखाए।हाथ में शराब की बोतल थी।पुलिस वाला उस व्यक्ति को कुछ कहे बिना निकल गया।बाद में थानेदार का कोल आया कि तुम शराब पीते हो,तुम्हे सजा होगी।उस व्यक्ति ने कहा जी में नहीं पीता हु, यहाँ किसी के लिए लेके खड़ा रहा हूँ।अगर ये बात गुजरात में होती तो समस्या थी,मगर ये राजस्थान की सरकार थी।हुआ कुछ नहीं,मगर जो व्यक्ति शराब को हाथ भी नहीं लगाता था उसे एक 10 या 15 घंटो तक परेशान रहना पड़ा बात ये हैं कि पुलिस उस व्यक्ति को पुलिस ने दू....र से शराब के साथ उस को देख था।राजस्थान में शराब की बिक्री कानूनन हैं।मगर सार्वजनिक स्थल पे शराब पीना अपराध हैं।ज्यादातर शराब को खरीद ने वाले काली पॉलीथिन बेग में शराब लेके जाते हैं।शराब पीने वाले भी छुपाते हुए काली बेग में लेके जाते हैं।पुलिस दूर से बोटल के साथ खड़े व्यक्ति को देखती हुई पास आ गई।मगर उस व्यक्ति में कोई हड़बड़ाहट नहीं थी। क्यो की वो शराब नहीं पीता था।

अब फिर से चित्रकार की बात करते हैं।
एक ही चीज को अलग नजरिये से देखने और पकड़ ने में भिन्नता हैं।कलाकार ने अपनी बात को ओरत की जिम्मेदारी के माध्यम से समजाया हैं।आप भी इस चित्र को अपने तरीके से देखिए ओर चिंतन कीजिए।क्या किसी ने मटके को इस तरीके से पकड़ा हैं की मटके को नुकसान हो!?जी नहीं,उस व्यक्ति को पुलिस ने कुछ नहीं किया।12 या 15 घंटो की जद्दोजहद के बाद आज शांति हैं।बस,एक चित्र ओर राजस्थान की घटना के माध्यम से आप अपने नजरिये में विश्वास बढ़ाएंगे ऐसी आशा रखता हूँ।

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गुजरात में सरकार शराब की पाबंदी लगाई हुए हैं।मगर ऐसे कई राज्य हैं जहाँ शराब की छूट हैं फिरभी बहोत सारे लोग शराब नहीं पीते हैं।चित्र के बारे में ही कहे तो शराब की बंदी से नहीं,जो नहीं पीते हैं वो राजस्थान में भी नहीं पीते।वहां सरकार का डर नहीं, व्यक्ति की जिम्मेदारी महत्व पूर्ण हैं।

Thursday, May 17, 2018

મન ને જીતવાની ટેવ છે....


હું ક્યાં કોઈ ને માટે જીવું છું.
પણ,તું કોઈના પાછળ મરે તો છે જ.કોઈના લીધે મનની શાંતિ ઓછી થાય એવું ન કરીએ.આ માટે આપણું મન શાંત રાખીએ.એવું ઘણું હોય જે જાહેરમાં ન કરી શકાય કે ન બોલી શકાય.આવી સ્થિતિ આવેતો મન કાબુમાં ન રહે.જો....એવું થાય તો મનમાં સવાલ થાય.આ સમયે હશે,એવું જ હોય કે એવો જ કે એવી જ છે એવું માનવું. થોડી વારમાં રાહત થઈ જશે.

રાહત થાય જ ને...
મન ચલિત છે.જે કામમાં આવ્યા હોઈએ એમાં ધ્યાન ન હોય તો એ મન સ્થિર નથી.મન સ્થિર નથી તો સવાલ અને સ્વ ના જ જવાબ સાચા લાગશે.આ વખતે કહેવાય કે બીજાના લીધે મનની શાંતિ હણાઈ ગઈ.

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તને ક્યારે દુઃખ થાય?
કોઈ ને દુઃખ થયું એવું કોઈ સમજી ન શકે ત્યારે મને તો દુઃખ થાય.

Sunday, May 6, 2018

वाह फोटो...


कुछ फोटोग्राफ खास होते हैं।जब हम कहि गुमने जाते हैं तो हमे फोटोग्राफी करने की इच्छा होती हैं।कुछ फोटोग्राफ अच्छे कहिए कि इतने अच्छे होते हैं कि हम उसे देखकर waw बोल देते हैं।

कुछ फोटोग्राफ ट्रिक से बनाये जाते हैं।कुछ फोटोग्राफ को प्लान करके खिंचे जाते हैं।ऐसे ही आज का एक फोटोग्राफ जो आपको पसंद आएगा।आप के पास भी ऐसे फोटो हैं तो आप मुजे भेजे।

आप को पसंद आने वाला फोटो और ऐसी कोई जानकारी हैं तो आप मुजे भेजे।
आप bhaveshpandya2008@gmail.com
या 09925044838 पर व्हाट्स एप करे।आप फोटो के साथ उसकी थोड़ी जानकारी भी भेजे।

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चलो अच्छे फोटो भेजे,
आस पास से उसको खोजे।
फोटो को करेंगे शेर,
आप बनोगे शमशेर।

Saturday, May 5, 2018

મારે તો રોજ મોજ...


માનો તો મોજ છે.
બાકી સમસ્યા તો રોજ છે.
આપણી આસપાસ સમસ્યાઓ જ ન હિટ તો કદાચ નવી શોધ કે સંશોધન ન થયા હોય.આજે આપણે મોજમાં રહેવા માટે સમસ્યા સામે રોજ લડાઈ કરીએ છીએ.
સવાલ હોય તો જવાબ હોય.જવાબ હોય પણ સવાલ ન જ હોય.આ જીવન છે.રોજ સમસ્યા કોને ન આવે.કોઈ માણસ એવો નથી કે જે એમ કહે કે આજના દિવસમાં મારી સામે કોઈ સમસ્યા ન આવી.એક બને જ નહીં.કોઈ નિષ્ફળતા કે નબળાઈ ને પકડી ન રાખી તે સવાલના સમાધાન કે સમસ્યા સામે શું કરી શકાય તે સ્પષ્ટ થાય છે.આવું થાય તો જ મજા આવે નહીંતર સમસ્યા તો રોજ આવે જ.આ સમસ્યા માટે જ્યારે સામસામે સહમતી થાય ત્યારે રાહત થાય,શાંતિ થાય અને સુખદ અનુભવ થાય.
આવો આનંદ એક અદભૂત આનંદ છે.તેને એ જ સમજી શકે જે આ સવાલો સામે થી પસાર થયો હોય.જોડો ક્યાં ડંખે છે એ પહેરનાર જ જણાવી શકે.આવઉબજ સમસ્યા કે સવાલ જે રોજ સામે આવે છે એને માટે છે.આ માટે સમસ્યા રોજ છે.ઓન,સારું કરનાર કહી શકે કે આ સમસ્યા કે સવાલ સાથેની થોડી અમુજણ જોડે રહી ને એના જવાબ કે વિગત મળી જાય ત્યારે થાય કે આજ જીવન છે.સવાલ તો રોજ છે.પણ,મારે તો મોજ છે.


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મારે કોઈ સવાલ નથી.
રહ્યા નથી.રહેશેય નહીં.
આ માટે આભાર કે મને કોઈ સવાલ નથી.

Friday, April 27, 2018

બચપણ...


કાંતો પાછી સમજણ આપ,
કાંતો પાછું બચપણ આપ.

કહેવાય છે કે બાળકના જીવનના શરૂઆતના પાંચ વર્ષ દરમિયાન જે આપીએ એ આજીવન એની સાથે રહે છે.

એક વિધાન એવું છે કે જો બાળપણમાં બાલકથા નહીં મળે તો ઘડપણમાં હરિકથા નહીં મળે.વાત પણ સાચી.બાળપણમાં  જો બાળવાર્તા કે બાલકથા ન મળી હોય તો જીવન ઘડતર શક્ય નથી.સંસ્કાર ઘડતર માટે બાળપણનું ઘડતર ખૂબ જરૂરી છે.આ માટે જ બાલકથાઓ એક માત્ર રસ્તો છે.પંચતંત્ર...ઇસપની વાતો,મુલ્લા નસરુદ્દીન,અરેબિયન નાઈટ્સ કે એવી બધી જ વાર્તાઓ જીવન ઘડતર માટે છે.

મોરારીબાપુ કહે છે કે જીવનમાં સુખી થવા માટે બાળક બનવું જરૂરી છે.બાળક બનવા માટે મોટપ ઓછી કરીએ.આપણે બાળકનું ઘડતર કરવા માટે નિયમો બનાવીએ એ વાત ખોટી.યોગ્ય ઘડતર માટે જરૂરી છે બાલકથાઓ.આ કથાઓ આજના જમાનામાં ઓનલાઈન પણ છે જ.

તો આજના બાળકો ને બાલકથા આપીએ અને તેમને જીવનના અંતિમ સમયે હરિકથાનું આયોજન કરીએ.

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બાળક ને બચાવવા નહીં,બાળકને વિકસાવવા માટે બાલકથાઓ જરૂરી છે.આપણે બાળક હતા જ.તો કોઈ ને મોટા થતાં અટકાવવાનો બદલે હાલ એનો અધિકાર આપીએ.

Tuesday, April 24, 2018

जीवन की ABCD


आजकल बलात्कार के बारे में चर्चा हैं।को सी उम्र के साथ बलात्कार होगा तो क्या सजा तय होगी वो भी चर्चा में हैं।केंद्रीय कैबिनेट ने इस के लिए तैयारी कर ली हैं।राष्ट्रपति महोदय ने इसे मंजूर कर लिया हैं।आगे अब इस के ऊपर थोड़े दिन चर्चा होगी।आज जो तीन बुरी खबरों ने देश को हिला दिया हैं इसे देखा जायेतो वो बाते पहले जान लेते हैं।
12000 करोड़ की रेमण्ड कम्पनी का मालिक आज बेटे की बेरुखी के कारण किराये के घर में रह रहा है।

अरबपति महिला मुम्बई के पॉश इलाके के अपने करोड़ो के फ्लैट में पूरी तरह गल कर कंकाल बन गयी! विदेश में बहुत बड़ी नौकरी करने वाले करोड़पति बेटे को पता ही नहीं माँ कब मर गयी।

सपने सच कर आई. ए. एस. का पद पाये बक्सर के क्लेक्टर ने तनाव के कारण आत्महत्या की।_

ये तीन घटनायें बताती हैं जीवन में पद पैसा प्रतिष्ठा ये सब कुछ काम का नहीं। यदि आपके जीवन में खुशी संतुष्टी और अपने नहीं हैं तो कुछ भी मायने नहीं रखता।

क्या जीवन में सफलता या सिद्धि हांसिल करने के बाद जीवन आसान हो जाता है ऐसा हमारा मानना हैं तो वो गलत हैं।जीवन में सफलता के बाद जो प्राप्त होता हैं,शायद कहीं पे उसे हम चिंता समझते हैं।
चिंता व्यक्ति को जीते जी मार देती हैं।चिंता जीवन से दूर करती हैं,शांति को खत्म करने के बाद व्यक्ति का जीवन रुष्क हो जाता हैं।

वरना एक क्लेक्टर को क्या जरुरत थी जो उसे आत्महत्या करना पड़ा।

खुशियाँ पैसो से नहीं मिलती अपनों से मिलती है। पैसा बहुत कुछ है, लेकिन सब कुछ नही है, जीवन आनन्द के लिए है, चाहे जो हों बस मुस्कुराते रहना चाहिए।

यदि हम चिंतित हो, तो खुद को थोड़ा आराम दों कुछ आइसक्रीम, चॉकलेट, केक लो या कुछ मनपसन्द कार्य करो।एमजीआर होता ये हैं कि हम कुछ कर नहीं सकते हैं।
इस बात को सांजे ने के लिए हमे ABCD सीखनी पड़ती हैं।क्या हैं जीवन की ABCD इस के बारे में देखते हैं।

A B C....?
Avoid Boring Company​
​मायूस संगत से दूरी​।

D E F...?
Dont Entertain Fools​
_मूर्खो पर समय व्यर्थ मत करों।

G H I...?
Go For High Ideas​
​ऊँचे विचार रखो​।

J K L M...?
Just Keep A Friend Like Me​
मेरे जैसा मित्र रखों।

_N O P...?
Never Overlook The Poor n Suffering​
गरीब व पीड़ित को कभी अनदेखा मत करों।

Q R S...?
Quit Reacting To Silly Tales​_
​मूर्खो को प्रतिक्रिया मत दो​।

T U V...?
Tune Urself For Ur Victory​
​खुद की जीत सुनिश्चित करों।

W X Y Z...?
We Xpect You To Zoom Ahead In Life​
हम आपसे जीवन मे आगे देखने की आशा करते हैं.

यदि आपने चाँद को देखा, तो आपने ईश्वर की सुन्दरता देखी!

यदि आपने सूर्य को देखा, तो आपने ईश्वर का बल देखा!

और यदि आपने आईना देखा तो आपने ईश्वर की सबसे सुंदर रचना देखी!

इसलिए स्वयं पर विश्वास रखो.

जीवन में हमारा उद्देश्य होना चाहिए :-

​9, 8, 7, 6, 5, 4, 3, 2, 1, 0​

जीवन को खुश होकर जीने के लिए हमे नीचे दी गई जानकारी को समझना हैं।
देखे...
9 - गिलास पानी
8 - घण्टे नींद
7 - यात्रायें परिवार के साथ
6 - अंकों की आय
5 - दिन हफ्ते में काम
4 - चक्का वाहन
3 - बेडरूम वाला फ्लैट
2 - अच्छे बच्चें
1 - जीवन साथी
0 - चिन्ता...?

जीवन जीने में हम ABCD का इस्तेमाल करेंगे तो हमारा जीवन शांति से पूर्ण होगा।

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जीवन में जो तय किया हैं।
उसे निभाने के लिए कुछ छोड़ना भी पड़ता हैं।जीवन में छोड़ना याने जीवन को शांति के लिए पकड़ना।

Friday, April 20, 2018

સફળથવા માટે....

કામયાબ થવું દરેકને ગમે.
કોઈ ને કામયાબી એટલે કે સફળતા આમ જ મળે.કોઈ ને વારસામાં તો જોઈ ને સ્વ બળે આ સફળતા મળે.
સાગળતા મેળવવા માટે કેટલું કરવું પડે.કોઈ એક વ્યક્તિ સતત મથે,મજૂરી કરે,ઉભહો થાય,પછડાય પાછો આયોજન કરે.વિચારે અમલ કરે,મહેનત કરે પાછો ઊભો થાય.ત્યારે ક્યાંક જાહેરમાં કોઈ વાત કરે ને કે 'નસીબદાર...'અરે...નસીબદાર તો અનિલ અંબાણી છે.મુકેશ અંબાણી ને તો આજેય મહેનત કરવી પડે છે.અમિતાભ બચ્ચન આજે તેલ થી ક્રીમ સુધીની સામગ્રી વેચે છે.અભિષેકની ફિલ્મની ટિકિટ કોઈ લેનાર નથી.આવા તો અનેક ઉદાહરણ આપણી આસપાસ જોવા મળે છે.દારાસિંગ મહેનત કરી ને દુનિયામાં નામ કમાયું.એના દીકરા ને આજે સૌ એક નામચીન બાપના દીકરા તરીકે ઓળખે છે.પ્રમોદ મહાજન નો દીકરો રાહુલ મહાજન.નસીબદાર રાહુલ મહાજન છે.આવા અનેક નસીબદાર આપણે જોઈએ છીએ.આપણી આસપાસ આવા અનેક નસીબના બળિયા જોવા મળે છે.કેટલાક તો એવા કે માનવામાં ન આવે.આવું જ એક નામ છે નરેન્દ્ર હિરવાણી. સ્પિનર તરીકે એક જ મેચમાં 10 વિકેટ લેવાનો વિશ્વ કીર્તિમાં કર્યા પછી ક્યાંય ન દેખાયા.વિનોદ કામ્બલી અને સચિન તેંડુલકર બન્નેના ગુરુ કે કોચ એક.રામકાંત આચરેકર ના બંને ચેલાઓ એ વિશ્વ રેકોર્ડ પોતાને નામ કર્યો હતો.વિશ્વની સૌથી મોટી ભાગીદારી કરનાર આ બન્ને મિત્રો એક જ સમયે ભારતીય ક્રિકેટ ટીમમાં આવ્યા.આજે સચિન વિશ્વમાં ઓળખાય છે.કામ્બલી ઓળખાય પણ બીજી...ત્રીજી રીતે.સચિન આગળ ભારત રત્ન લખાય છે.એવું કામ્બલી ને નથી.
કારણ...

આ બધી જ વાત માટે એક વાત કહું કે કારણ એ કે આ અસફળ થનાર ને વચ્ચે છાંયડો આવી ગયો હતો.આ છોયડામાં તે આરામ કરવા ગયા.સુઈ ગયા.એટલે જ કહેવાય ને કે...સફળ થવા માટે સતત સામે પ્રશ્નો આવે તે જરૂરી છે.અગર છાંયડો આવશે તો કદાચ પરિણામ આ ન હોઈ શકે.

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સફળતા માટે મથવું પડે.
મથવા માટે વિચારવું જ પડે.
આ વિચારવા માટે જાણવુંય પડે.
જાણેલું હોય તો આપણ ને નહીં તો કોઈને કામ લાગશે જ.

Friday, April 6, 2018

વિશ્વાસ...

આ શબ્દ ને નિભાવવામાં અનેક વર્ષો જાય છે.પણ તેને ગુમાવવામાં સેકન્ડ પણ લાગતી નથી.બંને તરફી એક સમાન જવાબદારી હોય તો જ વિશ્વાસ ટકે. કોઈએ સરસ કહ્યું છે કે જીવનનો દોરો ગૂંચવાય ત્યારે સામેથી તુંય મદદ કરજે.કારણ સામેનો એક છેડો તારા હાથમાં હશે.જીવન એમ જ પસાર થાય એ કરતાં વિશ્વાસ સાથે પસાર થાય તો જીવવાની મજા આવે.આખી દુનિયામાં વિશ્વાસ જ એક એવી સામગ્રી છે જે જીતવા માટે ઉપયોગી છે.

હું કરી શકું.
આ કામ મારાથી શક્ય છે.

આ બધાં માટે સૌથી પહેલી શરત છે વિશ્વાસ.વિશ્વાસ શબ્દ પછી સીધો જે શબ્દ છે એને કહેવાય જવાબદારી જવાબદારી હોય અને નિભાવીએ તો જ વિશ્વાસ ટકે. જવાબદારી હોય એટલે વિશ્વાસ પણ વધે જ.વગર વિશ્વાસે કોઈની જવાબદારી લેવીય નકામી છે.દરેકની જવાબદારી આપણી ભલે ન હોય.જેની જવાબદારી આપણી હોય ત્યાં વિશ્વાસ એટલો જ જરૂરી છે.

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વિશ્વાસ...જવાબદારી...અધિકાર અને આત્મસન્માન.આ બધા એવા શબ્દો છે કે જેનો અર્થ નહિ સમજાય તો ચાલશે.પણ,આવી પડે ત્યારે એમાં ખરા ઉતરાય તો જ ખરું.

Tuesday, April 3, 2018

એક નવું સૂત્ર..

આજે ગાંધીઆશ્રમ જવાનું થયું.એક મિત્રએ અનોખું કામ કર્યું હતું.આજે એમના એ કાર્યનો વિરામ દિવસ કહી શકાય.ગાંધી બાપુએ સાબરમતીથી દાંડી સુધી યાત્રા કરી હતી.મારા મિત્ર જન્મથી બાપુ.એમણે દાંડી થી સાબરમતી ઊંઘી યાત્રા કરી.આજે તેઓ આવવાના હતા.હું તેમને મળવા ગયો.ખૂબજ ભાવથી તેમણે આ યાત્રા કરી.મારે મન ખુશી એ વાતે કે તેમણે વિધિ (મહારાષ્ટ્ર) ની દીકરીએ બનાવેલ કાગળની 1800 પેન ખરીદી અને આ યાત્રા દરમિયાન આપી.અમારી શોધેલી દીકરીની પેન દાંડીથી સાબરમતી સુધી સારા કામમાં વપરાઈ.
@...
હવે બીજી વાત...
બાપુના આશ્રમમાં બાપુ આવ્યા.
અમે ગાંધી આશ્રમના મુખ્ય કેંન્દ્ર બાપુના ચરખા પાસે ગયા.અહીં બાપુ અને કસ્તુરબાની રહેવાની જગ્યા છે.બાપુએ સાબરમતી આશ્રમ છોડતાં કીધું હતું કે સ્વરાજ્ય લીધા વગર અહીં પરત નહીં ફરું.આ દિવસ એમનો આ સાબરમતી આશ્રમ ખાતે છેલ્લો દિવસ.
બધું જોઈ ચર્ચા કરી.નામ પાકું યાદ નથી પણ કદાચ હેતલબેન આ આશ્રમમાં ગાઈડ તરીકે જવાબદારી નિભાવે છે.એ ચરખો ચલાવવાની અહીં સમજ આપે છે.તેમણે વાત વાતમાં એક સરસ સમજ આપી. બાજુમાં બેઠેલ બેને પૂછ્યું 'ચરખો ચલાવવાનું આવડતાં કેટલો સમય લાગે?!'આ સવાલ સાંભળી હેતલબેને કહ્યું 'બે કલાકની તાલીમ અને એક અઠવાડિયાની પ્રેક્ટિસ પછી આવડી જાય.એમનું આ સૂત્ર મને ખુબ ગમ્યું.વાત પાછી એમ બની કે એમણે આ વાત હિન્દીમાં કીધી.મને એમ કે તેઓ હિન્દી જ જાણતાં હશે.મેં થોડીવાર હિન્દીમાં વાત કરી.પછી ખબર પડી કે વધારે પડતાં લોકો સાથે ગાઈડ તરીકે હિન્દીમાં વાત કરવી પડતી હોય તે હિન્દી બોલે છે.આ બેન અને તેમનું સૂત્ર જાને કાયમ યાદ રાખવા જેવું લાગ્યું.

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જીવનમાં દરેક બાબતે સંતોષ ન હોય.કોઈ વાતે ઉણપ વર્તાય તે જરૂરી છે.જો એવું ન થાય તો...નવું કરવાનું સુજે જ નહીં.

Sunday, April 1, 2018

साथ दे तो...











धारा भी साथ दे तो ओर बात हैं।
आप जराभी साथ देतो, ओर बात हैं।
जिंदगी गुजर सकती हैं,एक पैर पर।
दूसरा भी साथ दे तो ओर बात हैं।

शायद कुंवर 'बैचेन' ने लिखा हैं।आज दो दिनों बाद मोबाइल हाथ में आया तो मुजे सबसे अच्छी ये बात लगी।और मैने उस पे लिखना शुरू किया।

किसी ने कहा हैं...
अपने हाथों कि तकदीर तो मत देखो।
वो भी जी लेते हैं,जिन के हाथ नहीं होते।

अगर एक पैर हैं,तो ठीक हैं।मगर दो पैर हैं और चलने में दोनों साथ दे रहे हैं।बहोत अच्छी बात हैं।हम कितने भी बड़े क्यो न हो जाए।हमे किसी न किसी की जरूरत होती हैं।किसी को निभाने के लिए,जीवन पसार करने के लिए  जिन लोगो का साथ चाहिए उनका साथ मीले तो अच्छी बात हैं।

किसी का साथ में होना इसका मतलब ये नहीं हैं कि उसके आसपास होना।उसका मतलब हैं साथ होने का अहसास होना।अब ये अहसास फोन से बात करके मिलता हैं।अब आप सोचिए।आप बहार हैं।समजीए तो ही आगे की बात समज में आएगी।अब फिर से...

आप बाहर हैं।किसी काम से जुड़े हैं।आप काम से समय निकाल कर सुबह 7 बजे से रात को एक बजे तक कोल करते हैं।सामने वाले को कॉल रिसीव नहीं करना हैं ऐसा नहीं हैं।उन्हें आदत नहीं हैं कि वो फोन साइलेंट रखे।उन्हों ने फोन साइलेंट किया।अब....

अब दूसरे दिन...
क्या होगा।आप समजे वैसा कोई झगड़ा नहीं होगा।हुआ ऐ की दूसरे दिन कोल आया।जवाब मिला कल तो सायलेंट था,आज कहि पे मुजे जाना था।सोचा आपको बताऊ, मगर अब थोड़े देर में हम निकल रहे हैं।आप को फोन किये बगैर निकलने को मन नहीं करता था।अब बहार जाने के बाद रात को आएंगे,ओर smg करेंगे,अब में घर पे हु।आप अभी भी बाहर हैं,आप सिर्फ smg पढ़ सकते हैं।आप 12 बजे या आसपास  smg पढ़ेंगे।आप खुश हो जाओगे की अब मेरा परिवार सुरक्षित हैं।

अगर घर पे पहुंच ने का smg आपको मिलता हैं,तब आपको आराम होता हैं।कुछ लोगो के साथ रहने के बाद उनकी जैसे आदत होती हैं।आप तो परिबार के सदस्यों के लिए बेचैन हैं।

अब तीसरी बात...
आप सोचेंगे...
अगर कल बात हुई होती,फोन सायलेंट न होता तो कुछ बात करता...

दूसरा दिन sms से खत्म हुआ।कुछ बाते ऐसी होती हैं जिसे नापा नहीं जा सकता हैं।साथ चलने वाले अगर दोनों पैर किसी एक राह के बदले दूसरे राह पर चले तो....!कुछ तय हुआ था कि कुछ भी हो, तय किया गया था कि कुछ लोगो को इग्नोर करेंगे।मगर हुआ ऐ की जिन्हें इग्नोर करना था,उन के साथ मिलके पार्टी करली।अब...!दोनों पैर साथ कहा चले।कोई भी हो टीम तब सफल होती हैं जब एक  बॉलर हो,दूसरा बेस्टमेन कोई फील्डर भी हो।सभी अलग अलग काम में मास्टर हैं मगर बात कैप्टन की मानते हैं।अगर दो पैर हैं तो दोनों कैप्टन हैं।मगर एक कि बात दूसरा मानता नहीं हैं।

कई बार ऐसा होता हैं कि अपनी सही बात गलत समय पे करने से हमे बहोत भुगतना पड़ता हैं।में मेरे एक दोस्त को बहोत बार कहता हूं कि आप का जीवन सदैव ऐसे लोगो के आसपास हैं जो आपके अपने हैं।आप व्यक्ति को पहचान ने में गलत करते हैं।कुछ बाते ऐसी होती हैं,जिस में हम साफ हैं,मगर सामने वाले को इस में कुछ खास दिखाई देता हैं।ऐसी स्थिति में हम ये नहीं कहेंगे कि दोनों पैर साथ हैं,ये अलग बात हैं के एक पेर को रास्ता पहले से मालूम  हैं,मगर दूसरा थोड़ा देरी से समझता हैं।थोड़ी देर में मालूम होता हैं कि दोनों रास्ते अलग नहीं... पैर अलग हैं और एक रास्ते पे भी चलते हैं।कभी कुछ गलती होती हैं तो सुधार लेते हैं।

मुजे इतना मालूम हैं, की जो आप को जितनी इज्जत देता हैं,प्यार और सन्मान देता हैं।हम उससे अधिक देने का प्रयत्न करना चाहिए।हर बार अलग सोचना सही हैं,गलत सोचना सही में गलत हैं।
कुछ बाते समजाने या कहने से नही,अनुभव और परिस्थिति के सामने आने से समझ में आती हैं।मगर आज का ये शेर बहोत खूब हैं।
धारा भी साथ दे तो ओर बात हैं।
आप जराभी साथ देतो, ओर बात हैं।
जिंदगी गुजर सकती हैं,एक पैर पर।
दूसरा भी साथ दे तो ओर बात हैं।



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कुछ ना कहो,
कुछ भी ना कहो।
क्या कहना हैं,क्या सुनना हैं।
समय का ये पल,थमसा गया हैं।
ओर इस पल में कोई न ही हैं...!
बस एक में हु, बस एक तुम हो।