Showing posts with label 7रंगी.... Show all posts
Showing posts with label 7रंगी.... Show all posts

Friday, May 25, 2018

खेल और बच्चे

छोटे बच्चे।
छुट्टियों में अपनी थोड़ी मनमानी कर सकते हैं।मेरे एक दोस्त हैं।लालजीभाई देसाई।वो ज्यादातर mgs या whats aep में संदेश नहीं भेजते।अपना इस काम में से बचाया हुआ समय वो राष्ट्रनिर्माण के काम में लगाते हैं।एक अच्छे अध्यापक,प्रधानाचार्य ओर व्यक्ति के तौर पे में उन्हें पिछले 10 साल से अधिक समय से जनता हुं।
कुछ दिनों पहले उन्होंने मुजे एक फोटो भेजा।
बच्चे खेलते थे।पेड़ पे चढ़े थे।फोटो खींचने वाले ने खूबसूरत क्लिक की हैं।बच्चे छुट्टियोंमें ही क्यो रोज बरोज खेलने चाहिए।पेड़ पे चढ़ना,दौड़ना,कूदना ओर गाना बजाना ओर दिमाग की कसरत जैसे खेल खेलना महत्वपूर्ण हैं।मेने आगे भी लिखा हैं कि ऐसा रोज होना चाहिए।
अब जो नहीं हो रहा हैं,उस के लिए रोने से अच्छा हैं,कुछ दिनों तक तो होता हैं।मेरा यकीन हैं कि लालभाई के बच्चे ऐसे ही खेलते होंगे।

@#@
खेल खेलने से मन और कर्म का विकास होता हैं।सामूहिक भावना बढ़ती हैं,ओर आत्म विश्वास बढ़ता हैं।

Thursday, May 24, 2018

आई can ओर IQ





We can मुमकिन हैं।मेरे किसी दोस्त ने कहा कि तुम ऐसा क्यों लिख              रहे हो,मेने कहा कुछ ऐसा होता हैं कि जो हम अकेले नहीं रह सकते।जब अकेले कुछ होनाही नहीं हैं तो क्यो we can नहीं...
आत्म विश्वास महत्व पूर्ण हैं।मेरे एक दोएत ने मुजे ये पोस्टर भेजा हैं।जिस में लिखा हैं कि आपके I Can आपके IQ से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।हमे विश्वास रखना हैं कि हम कर सकते हैं।अच्छे आईक्यू वाले सब कर सकते हैं ऐसा नहीं हैं।और आई केन वाले जो कर सकते हैं वो आईक्यू वाले नहीं कर सकते।आप आईक्यू वाले हैं कि आई केन वाले..!

@#@
We can मुमकिन हैं।
आई केन बढ़िया हैं मगर we केन मुमकिन हैं बहोत बढ़िया हैं।

Sunday, May 20, 2018

एक विचारक

एक कलाकार।
एक सर्जक... एक विचारक।
ये तीनो सदैव अपने विचारों को अपने तरीको से पेश करते हैं।एक चित्रकार ने मटके को अपना किरदार बनाया हैं।इस चित्र में मटका एक हैं। इसे पकड़ने वाले भी अलग अलग हैं।समजीए कोई भी तीन व्यक्ति हैं।उन्होंने मटके को अपने तरीके से पकड़ा हैं।तीनो किरदार ओरत के हैं।अगर मटका जिम्मेदारी हैं तो उस जिम्मेदारी को तीनों ने अपने तरीको से निभाया हैं।ओरत याने मा...बेटी या जीवन साथी।सर्जक ज्यादा बोल ते नहीं,वो अपनी बात को अपने तरीके से दिखाते हैं,समजाते हैं।

तीनो ने एक पुरूष को अपने तरीके से पकड़के रखा हैं।मटका अगर पुरुष हैं तो तीन तरीके से वो पकड़ के रखे हैं।कुछ दिनों पहले की बात हैं।एक व्यक्ति को पुलिस ने पकड़ा।उसके हाथ में शराब की बोतल थी।पुलिस ने कहा तुम्हारे हाथ में क्या हैं? उस व्यक्ति ने अपने हाथ दिखाए।हाथ में शराब की बोतल थी।पुलिस वाला उस व्यक्ति को कुछ कहे बिना निकल गया।बाद में थानेदार का कोल आया कि तुम शराब पीते हो,तुम्हे सजा होगी।उस व्यक्ति ने कहा जी में नहीं पीता हु, यहाँ किसी के लिए लेके खड़ा रहा हूँ।अगर ये बात गुजरात में होती तो समस्या थी,मगर ये राजस्थान की सरकार थी।हुआ कुछ नहीं,मगर जो व्यक्ति शराब को हाथ भी नहीं लगाता था उसे एक 10 या 15 घंटो तक परेशान रहना पड़ा बात ये हैं कि पुलिस उस व्यक्ति को पुलिस ने दू....र से शराब के साथ उस को देख था।राजस्थान में शराब की बिक्री कानूनन हैं।मगर सार्वजनिक स्थल पे शराब पीना अपराध हैं।ज्यादातर शराब को खरीद ने वाले काली पॉलीथिन बेग में शराब लेके जाते हैं।शराब पीने वाले भी छुपाते हुए काली बेग में लेके जाते हैं।पुलिस दूर से बोटल के साथ खड़े व्यक्ति को देखती हुई पास आ गई।मगर उस व्यक्ति में कोई हड़बड़ाहट नहीं थी। क्यो की वो शराब नहीं पीता था।

अब फिर से चित्रकार की बात करते हैं।
एक ही चीज को अलग नजरिये से देखने और पकड़ ने में भिन्नता हैं।कलाकार ने अपनी बात को ओरत की जिम्मेदारी के माध्यम से समजाया हैं।आप भी इस चित्र को अपने तरीके से देखिए ओर चिंतन कीजिए।क्या किसी ने मटके को इस तरीके से पकड़ा हैं की मटके को नुकसान हो!?जी नहीं,उस व्यक्ति को पुलिस ने कुछ नहीं किया।12 या 15 घंटो की जद्दोजहद के बाद आज शांति हैं।बस,एक चित्र ओर राजस्थान की घटना के माध्यम से आप अपने नजरिये में विश्वास बढ़ाएंगे ऐसी आशा रखता हूँ।

@#@
गुजरात में सरकार शराब की पाबंदी लगाई हुए हैं।मगर ऐसे कई राज्य हैं जहाँ शराब की छूट हैं फिरभी बहोत सारे लोग शराब नहीं पीते हैं।चित्र के बारे में ही कहे तो शराब की बंदी से नहीं,जो नहीं पीते हैं वो राजस्थान में भी नहीं पीते।वहां सरकार का डर नहीं, व्यक्ति की जिम्मेदारी महत्व पूर्ण हैं।

Thursday, May 17, 2018

મન ને જીતવાની ટેવ છે....


હું ક્યાં કોઈ ને માટે જીવું છું.
પણ,તું કોઈના પાછળ મરે તો છે જ.કોઈના લીધે મનની શાંતિ ઓછી થાય એવું ન કરીએ.આ માટે આપણું મન શાંત રાખીએ.એવું ઘણું હોય જે જાહેરમાં ન કરી શકાય કે ન બોલી શકાય.આવી સ્થિતિ આવેતો મન કાબુમાં ન રહે.જો....એવું થાય તો મનમાં સવાલ થાય.આ સમયે હશે,એવું જ હોય કે એવો જ કે એવી જ છે એવું માનવું. થોડી વારમાં રાહત થઈ જશે.

રાહત થાય જ ને...
મન ચલિત છે.જે કામમાં આવ્યા હોઈએ એમાં ધ્યાન ન હોય તો એ મન સ્થિર નથી.મન સ્થિર નથી તો સવાલ અને સ્વ ના જ જવાબ સાચા લાગશે.આ વખતે કહેવાય કે બીજાના લીધે મનની શાંતિ હણાઈ ગઈ.

@#@
તને ક્યારે દુઃખ થાય?
કોઈ ને દુઃખ થયું એવું કોઈ સમજી ન શકે ત્યારે મને તો દુઃખ થાય.

Sunday, May 6, 2018

वाह फोटो...


कुछ फोटोग्राफ खास होते हैं।जब हम कहि गुमने जाते हैं तो हमे फोटोग्राफी करने की इच्छा होती हैं।कुछ फोटोग्राफ अच्छे कहिए कि इतने अच्छे होते हैं कि हम उसे देखकर waw बोल देते हैं।

कुछ फोटोग्राफ ट्रिक से बनाये जाते हैं।कुछ फोटोग्राफ को प्लान करके खिंचे जाते हैं।ऐसे ही आज का एक फोटोग्राफ जो आपको पसंद आएगा।आप के पास भी ऐसे फोटो हैं तो आप मुजे भेजे।

आप को पसंद आने वाला फोटो और ऐसी कोई जानकारी हैं तो आप मुजे भेजे।
आप bhaveshpandya2008@gmail.com
या 09925044838 पर व्हाट्स एप करे।आप फोटो के साथ उसकी थोड़ी जानकारी भी भेजे।

@#@
चलो अच्छे फोटो भेजे,
आस पास से उसको खोजे।
फोटो को करेंगे शेर,
आप बनोगे शमशेर।

Saturday, May 5, 2018

મારે તો રોજ મોજ...


માનો તો મોજ છે.
બાકી સમસ્યા તો રોજ છે.
આપણી આસપાસ સમસ્યાઓ જ ન હિટ તો કદાચ નવી શોધ કે સંશોધન ન થયા હોય.આજે આપણે મોજમાં રહેવા માટે સમસ્યા સામે રોજ લડાઈ કરીએ છીએ.
સવાલ હોય તો જવાબ હોય.જવાબ હોય પણ સવાલ ન જ હોય.આ જીવન છે.રોજ સમસ્યા કોને ન આવે.કોઈ માણસ એવો નથી કે જે એમ કહે કે આજના દિવસમાં મારી સામે કોઈ સમસ્યા ન આવી.એક બને જ નહીં.કોઈ નિષ્ફળતા કે નબળાઈ ને પકડી ન રાખી તે સવાલના સમાધાન કે સમસ્યા સામે શું કરી શકાય તે સ્પષ્ટ થાય છે.આવું થાય તો જ મજા આવે નહીંતર સમસ્યા તો રોજ આવે જ.આ સમસ્યા માટે જ્યારે સામસામે સહમતી થાય ત્યારે રાહત થાય,શાંતિ થાય અને સુખદ અનુભવ થાય.
આવો આનંદ એક અદભૂત આનંદ છે.તેને એ જ સમજી શકે જે આ સવાલો સામે થી પસાર થયો હોય.જોડો ક્યાં ડંખે છે એ પહેરનાર જ જણાવી શકે.આવઉબજ સમસ્યા કે સવાલ જે રોજ સામે આવે છે એને માટે છે.આ માટે સમસ્યા રોજ છે.ઓન,સારું કરનાર કહી શકે કે આ સમસ્યા કે સવાલ સાથેની થોડી અમુજણ જોડે રહી ને એના જવાબ કે વિગત મળી જાય ત્યારે થાય કે આજ જીવન છે.સવાલ તો રોજ છે.પણ,મારે તો મોજ છે.


@#@
મારે કોઈ સવાલ નથી.
રહ્યા નથી.રહેશેય નહીં.
આ માટે આભાર કે મને કોઈ સવાલ નથી.

Friday, April 27, 2018

બચપણ...


કાંતો પાછી સમજણ આપ,
કાંતો પાછું બચપણ આપ.

કહેવાય છે કે બાળકના જીવનના શરૂઆતના પાંચ વર્ષ દરમિયાન જે આપીએ એ આજીવન એની સાથે રહે છે.

એક વિધાન એવું છે કે જો બાળપણમાં બાલકથા નહીં મળે તો ઘડપણમાં હરિકથા નહીં મળે.વાત પણ સાચી.બાળપણમાં  જો બાળવાર્તા કે બાલકથા ન મળી હોય તો જીવન ઘડતર શક્ય નથી.સંસ્કાર ઘડતર માટે બાળપણનું ઘડતર ખૂબ જરૂરી છે.આ માટે જ બાલકથાઓ એક માત્ર રસ્તો છે.પંચતંત્ર...ઇસપની વાતો,મુલ્લા નસરુદ્દીન,અરેબિયન નાઈટ્સ કે એવી બધી જ વાર્તાઓ જીવન ઘડતર માટે છે.

મોરારીબાપુ કહે છે કે જીવનમાં સુખી થવા માટે બાળક બનવું જરૂરી છે.બાળક બનવા માટે મોટપ ઓછી કરીએ.આપણે બાળકનું ઘડતર કરવા માટે નિયમો બનાવીએ એ વાત ખોટી.યોગ્ય ઘડતર માટે જરૂરી છે બાલકથાઓ.આ કથાઓ આજના જમાનામાં ઓનલાઈન પણ છે જ.

તો આજના બાળકો ને બાલકથા આપીએ અને તેમને જીવનના અંતિમ સમયે હરિકથાનું આયોજન કરીએ.

@#@
બાળક ને બચાવવા નહીં,બાળકને વિકસાવવા માટે બાલકથાઓ જરૂરી છે.આપણે બાળક હતા જ.તો કોઈ ને મોટા થતાં અટકાવવાનો બદલે હાલ એનો અધિકાર આપીએ.

Tuesday, April 24, 2018

जीवन की ABCD


आजकल बलात्कार के बारे में चर्चा हैं।को सी उम्र के साथ बलात्कार होगा तो क्या सजा तय होगी वो भी चर्चा में हैं।केंद्रीय कैबिनेट ने इस के लिए तैयारी कर ली हैं।राष्ट्रपति महोदय ने इसे मंजूर कर लिया हैं।आगे अब इस के ऊपर थोड़े दिन चर्चा होगी।आज जो तीन बुरी खबरों ने देश को हिला दिया हैं इसे देखा जायेतो वो बाते पहले जान लेते हैं।
12000 करोड़ की रेमण्ड कम्पनी का मालिक आज बेटे की बेरुखी के कारण किराये के घर में रह रहा है।

अरबपति महिला मुम्बई के पॉश इलाके के अपने करोड़ो के फ्लैट में पूरी तरह गल कर कंकाल बन गयी! विदेश में बहुत बड़ी नौकरी करने वाले करोड़पति बेटे को पता ही नहीं माँ कब मर गयी।

सपने सच कर आई. ए. एस. का पद पाये बक्सर के क्लेक्टर ने तनाव के कारण आत्महत्या की।_

ये तीन घटनायें बताती हैं जीवन में पद पैसा प्रतिष्ठा ये सब कुछ काम का नहीं। यदि आपके जीवन में खुशी संतुष्टी और अपने नहीं हैं तो कुछ भी मायने नहीं रखता।

क्या जीवन में सफलता या सिद्धि हांसिल करने के बाद जीवन आसान हो जाता है ऐसा हमारा मानना हैं तो वो गलत हैं।जीवन में सफलता के बाद जो प्राप्त होता हैं,शायद कहीं पे उसे हम चिंता समझते हैं।
चिंता व्यक्ति को जीते जी मार देती हैं।चिंता जीवन से दूर करती हैं,शांति को खत्म करने के बाद व्यक्ति का जीवन रुष्क हो जाता हैं।

वरना एक क्लेक्टर को क्या जरुरत थी जो उसे आत्महत्या करना पड़ा।

खुशियाँ पैसो से नहीं मिलती अपनों से मिलती है। पैसा बहुत कुछ है, लेकिन सब कुछ नही है, जीवन आनन्द के लिए है, चाहे जो हों बस मुस्कुराते रहना चाहिए।

यदि हम चिंतित हो, तो खुद को थोड़ा आराम दों कुछ आइसक्रीम, चॉकलेट, केक लो या कुछ मनपसन्द कार्य करो।एमजीआर होता ये हैं कि हम कुछ कर नहीं सकते हैं।
इस बात को सांजे ने के लिए हमे ABCD सीखनी पड़ती हैं।क्या हैं जीवन की ABCD इस के बारे में देखते हैं।

A B C....?
Avoid Boring Company​
​मायूस संगत से दूरी​।

D E F...?
Dont Entertain Fools​
_मूर्खो पर समय व्यर्थ मत करों।

G H I...?
Go For High Ideas​
​ऊँचे विचार रखो​।

J K L M...?
Just Keep A Friend Like Me​
मेरे जैसा मित्र रखों।

_N O P...?
Never Overlook The Poor n Suffering​
गरीब व पीड़ित को कभी अनदेखा मत करों।

Q R S...?
Quit Reacting To Silly Tales​_
​मूर्खो को प्रतिक्रिया मत दो​।

T U V...?
Tune Urself For Ur Victory​
​खुद की जीत सुनिश्चित करों।

W X Y Z...?
We Xpect You To Zoom Ahead In Life​
हम आपसे जीवन मे आगे देखने की आशा करते हैं.

यदि आपने चाँद को देखा, तो आपने ईश्वर की सुन्दरता देखी!

यदि आपने सूर्य को देखा, तो आपने ईश्वर का बल देखा!

और यदि आपने आईना देखा तो आपने ईश्वर की सबसे सुंदर रचना देखी!

इसलिए स्वयं पर विश्वास रखो.

जीवन में हमारा उद्देश्य होना चाहिए :-

​9, 8, 7, 6, 5, 4, 3, 2, 1, 0​

जीवन को खुश होकर जीने के लिए हमे नीचे दी गई जानकारी को समझना हैं।
देखे...
9 - गिलास पानी
8 - घण्टे नींद
7 - यात्रायें परिवार के साथ
6 - अंकों की आय
5 - दिन हफ्ते में काम
4 - चक्का वाहन
3 - बेडरूम वाला फ्लैट
2 - अच्छे बच्चें
1 - जीवन साथी
0 - चिन्ता...?

जीवन जीने में हम ABCD का इस्तेमाल करेंगे तो हमारा जीवन शांति से पूर्ण होगा।

@#@
जीवन में जो तय किया हैं।
उसे निभाने के लिए कुछ छोड़ना भी पड़ता हैं।जीवन में छोड़ना याने जीवन को शांति के लिए पकड़ना।

Friday, April 20, 2018

સફળથવા માટે....

કામયાબ થવું દરેકને ગમે.
કોઈ ને કામયાબી એટલે કે સફળતા આમ જ મળે.કોઈ ને વારસામાં તો જોઈ ને સ્વ બળે આ સફળતા મળે.
સાગળતા મેળવવા માટે કેટલું કરવું પડે.કોઈ એક વ્યક્તિ સતત મથે,મજૂરી કરે,ઉભહો થાય,પછડાય પાછો આયોજન કરે.વિચારે અમલ કરે,મહેનત કરે પાછો ઊભો થાય.ત્યારે ક્યાંક જાહેરમાં કોઈ વાત કરે ને કે 'નસીબદાર...'અરે...નસીબદાર તો અનિલ અંબાણી છે.મુકેશ અંબાણી ને તો આજેય મહેનત કરવી પડે છે.અમિતાભ બચ્ચન આજે તેલ થી ક્રીમ સુધીની સામગ્રી વેચે છે.અભિષેકની ફિલ્મની ટિકિટ કોઈ લેનાર નથી.આવા તો અનેક ઉદાહરણ આપણી આસપાસ જોવા મળે છે.દારાસિંગ મહેનત કરી ને દુનિયામાં નામ કમાયું.એના દીકરા ને આજે સૌ એક નામચીન બાપના દીકરા તરીકે ઓળખે છે.પ્રમોદ મહાજન નો દીકરો રાહુલ મહાજન.નસીબદાર રાહુલ મહાજન છે.આવા અનેક નસીબદાર આપણે જોઈએ છીએ.આપણી આસપાસ આવા અનેક નસીબના બળિયા જોવા મળે છે.કેટલાક તો એવા કે માનવામાં ન આવે.આવું જ એક નામ છે નરેન્દ્ર હિરવાણી. સ્પિનર તરીકે એક જ મેચમાં 10 વિકેટ લેવાનો વિશ્વ કીર્તિમાં કર્યા પછી ક્યાંય ન દેખાયા.વિનોદ કામ્બલી અને સચિન તેંડુલકર બન્નેના ગુરુ કે કોચ એક.રામકાંત આચરેકર ના બંને ચેલાઓ એ વિશ્વ રેકોર્ડ પોતાને નામ કર્યો હતો.વિશ્વની સૌથી મોટી ભાગીદારી કરનાર આ બન્ને મિત્રો એક જ સમયે ભારતીય ક્રિકેટ ટીમમાં આવ્યા.આજે સચિન વિશ્વમાં ઓળખાય છે.કામ્બલી ઓળખાય પણ બીજી...ત્રીજી રીતે.સચિન આગળ ભારત રત્ન લખાય છે.એવું કામ્બલી ને નથી.
કારણ...

આ બધી જ વાત માટે એક વાત કહું કે કારણ એ કે આ અસફળ થનાર ને વચ્ચે છાંયડો આવી ગયો હતો.આ છોયડામાં તે આરામ કરવા ગયા.સુઈ ગયા.એટલે જ કહેવાય ને કે...સફળ થવા માટે સતત સામે પ્રશ્નો આવે તે જરૂરી છે.અગર છાંયડો આવશે તો કદાચ પરિણામ આ ન હોઈ શકે.

@#@
સફળતા માટે મથવું પડે.
મથવા માટે વિચારવું જ પડે.
આ વિચારવા માટે જાણવુંય પડે.
જાણેલું હોય તો આપણ ને નહીં તો કોઈને કામ લાગશે જ.

Friday, April 6, 2018

વિશ્વાસ...

આ શબ્દ ને નિભાવવામાં અનેક વર્ષો જાય છે.પણ તેને ગુમાવવામાં સેકન્ડ પણ લાગતી નથી.બંને તરફી એક સમાન જવાબદારી હોય તો જ વિશ્વાસ ટકે. કોઈએ સરસ કહ્યું છે કે જીવનનો દોરો ગૂંચવાય ત્યારે સામેથી તુંય મદદ કરજે.કારણ સામેનો એક છેડો તારા હાથમાં હશે.જીવન એમ જ પસાર થાય એ કરતાં વિશ્વાસ સાથે પસાર થાય તો જીવવાની મજા આવે.આખી દુનિયામાં વિશ્વાસ જ એક એવી સામગ્રી છે જે જીતવા માટે ઉપયોગી છે.

હું કરી શકું.
આ કામ મારાથી શક્ય છે.

આ બધાં માટે સૌથી પહેલી શરત છે વિશ્વાસ.વિશ્વાસ શબ્દ પછી સીધો જે શબ્દ છે એને કહેવાય જવાબદારી જવાબદારી હોય અને નિભાવીએ તો જ વિશ્વાસ ટકે. જવાબદારી હોય એટલે વિશ્વાસ પણ વધે જ.વગર વિશ્વાસે કોઈની જવાબદારી લેવીય નકામી છે.દરેકની જવાબદારી આપણી ભલે ન હોય.જેની જવાબદારી આપણી હોય ત્યાં વિશ્વાસ એટલો જ જરૂરી છે.

@#@
વિશ્વાસ...જવાબદારી...અધિકાર અને આત્મસન્માન.આ બધા એવા શબ્દો છે કે જેનો અર્થ નહિ સમજાય તો ચાલશે.પણ,આવી પડે ત્યારે એમાં ખરા ઉતરાય તો જ ખરું.

Tuesday, April 3, 2018

એક નવું સૂત્ર..

આજે ગાંધીઆશ્રમ જવાનું થયું.એક મિત્રએ અનોખું કામ કર્યું હતું.આજે એમના એ કાર્યનો વિરામ દિવસ કહી શકાય.ગાંધી બાપુએ સાબરમતીથી દાંડી સુધી યાત્રા કરી હતી.મારા મિત્ર જન્મથી બાપુ.એમણે દાંડી થી સાબરમતી ઊંઘી યાત્રા કરી.આજે તેઓ આવવાના હતા.હું તેમને મળવા ગયો.ખૂબજ ભાવથી તેમણે આ યાત્રા કરી.મારે મન ખુશી એ વાતે કે તેમણે વિધિ (મહારાષ્ટ્ર) ની દીકરીએ બનાવેલ કાગળની 1800 પેન ખરીદી અને આ યાત્રા દરમિયાન આપી.અમારી શોધેલી દીકરીની પેન દાંડીથી સાબરમતી સુધી સારા કામમાં વપરાઈ.
@...
હવે બીજી વાત...
બાપુના આશ્રમમાં બાપુ આવ્યા.
અમે ગાંધી આશ્રમના મુખ્ય કેંન્દ્ર બાપુના ચરખા પાસે ગયા.અહીં બાપુ અને કસ્તુરબાની રહેવાની જગ્યા છે.બાપુએ સાબરમતી આશ્રમ છોડતાં કીધું હતું કે સ્વરાજ્ય લીધા વગર અહીં પરત નહીં ફરું.આ દિવસ એમનો આ સાબરમતી આશ્રમ ખાતે છેલ્લો દિવસ.
બધું જોઈ ચર્ચા કરી.નામ પાકું યાદ નથી પણ કદાચ હેતલબેન આ આશ્રમમાં ગાઈડ તરીકે જવાબદારી નિભાવે છે.એ ચરખો ચલાવવાની અહીં સમજ આપે છે.તેમણે વાત વાતમાં એક સરસ સમજ આપી. બાજુમાં બેઠેલ બેને પૂછ્યું 'ચરખો ચલાવવાનું આવડતાં કેટલો સમય લાગે?!'આ સવાલ સાંભળી હેતલબેને કહ્યું 'બે કલાકની તાલીમ અને એક અઠવાડિયાની પ્રેક્ટિસ પછી આવડી જાય.એમનું આ સૂત્ર મને ખુબ ગમ્યું.વાત પાછી એમ બની કે એમણે આ વાત હિન્દીમાં કીધી.મને એમ કે તેઓ હિન્દી જ જાણતાં હશે.મેં થોડીવાર હિન્દીમાં વાત કરી.પછી ખબર પડી કે વધારે પડતાં લોકો સાથે ગાઈડ તરીકે હિન્દીમાં વાત કરવી પડતી હોય તે હિન્દી બોલે છે.આ બેન અને તેમનું સૂત્ર જાને કાયમ યાદ રાખવા જેવું લાગ્યું.

@#@
જીવનમાં દરેક બાબતે સંતોષ ન હોય.કોઈ વાતે ઉણપ વર્તાય તે જરૂરી છે.જો એવું ન થાય તો...નવું કરવાનું સુજે જ નહીં.

Sunday, April 1, 2018

साथ दे तो...











धारा भी साथ दे तो ओर बात हैं।
आप जराभी साथ देतो, ओर बात हैं।
जिंदगी गुजर सकती हैं,एक पैर पर।
दूसरा भी साथ दे तो ओर बात हैं।

शायद कुंवर 'बैचेन' ने लिखा हैं।आज दो दिनों बाद मोबाइल हाथ में आया तो मुजे सबसे अच्छी ये बात लगी।और मैने उस पे लिखना शुरू किया।

किसी ने कहा हैं...
अपने हाथों कि तकदीर तो मत देखो।
वो भी जी लेते हैं,जिन के हाथ नहीं होते।

अगर एक पैर हैं,तो ठीक हैं।मगर दो पैर हैं और चलने में दोनों साथ दे रहे हैं।बहोत अच्छी बात हैं।हम कितने भी बड़े क्यो न हो जाए।हमे किसी न किसी की जरूरत होती हैं।किसी को निभाने के लिए,जीवन पसार करने के लिए  जिन लोगो का साथ चाहिए उनका साथ मीले तो अच्छी बात हैं।

किसी का साथ में होना इसका मतलब ये नहीं हैं कि उसके आसपास होना।उसका मतलब हैं साथ होने का अहसास होना।अब ये अहसास फोन से बात करके मिलता हैं।अब आप सोचिए।आप बहार हैं।समजीए तो ही आगे की बात समज में आएगी।अब फिर से...

आप बाहर हैं।किसी काम से जुड़े हैं।आप काम से समय निकाल कर सुबह 7 बजे से रात को एक बजे तक कोल करते हैं।सामने वाले को कॉल रिसीव नहीं करना हैं ऐसा नहीं हैं।उन्हें आदत नहीं हैं कि वो फोन साइलेंट रखे।उन्हों ने फोन साइलेंट किया।अब....

अब दूसरे दिन...
क्या होगा।आप समजे वैसा कोई झगड़ा नहीं होगा।हुआ ऐ की दूसरे दिन कोल आया।जवाब मिला कल तो सायलेंट था,आज कहि पे मुजे जाना था।सोचा आपको बताऊ, मगर अब थोड़े देर में हम निकल रहे हैं।आप को फोन किये बगैर निकलने को मन नहीं करता था।अब बहार जाने के बाद रात को आएंगे,ओर smg करेंगे,अब में घर पे हु।आप अभी भी बाहर हैं,आप सिर्फ smg पढ़ सकते हैं।आप 12 बजे या आसपास  smg पढ़ेंगे।आप खुश हो जाओगे की अब मेरा परिवार सुरक्षित हैं।

अगर घर पे पहुंच ने का smg आपको मिलता हैं,तब आपको आराम होता हैं।कुछ लोगो के साथ रहने के बाद उनकी जैसे आदत होती हैं।आप तो परिबार के सदस्यों के लिए बेचैन हैं।

अब तीसरी बात...
आप सोचेंगे...
अगर कल बात हुई होती,फोन सायलेंट न होता तो कुछ बात करता...

दूसरा दिन sms से खत्म हुआ।कुछ बाते ऐसी होती हैं जिसे नापा नहीं जा सकता हैं।साथ चलने वाले अगर दोनों पैर किसी एक राह के बदले दूसरे राह पर चले तो....!कुछ तय हुआ था कि कुछ भी हो, तय किया गया था कि कुछ लोगो को इग्नोर करेंगे।मगर हुआ ऐ की जिन्हें इग्नोर करना था,उन के साथ मिलके पार्टी करली।अब...!दोनों पैर साथ कहा चले।कोई भी हो टीम तब सफल होती हैं जब एक  बॉलर हो,दूसरा बेस्टमेन कोई फील्डर भी हो।सभी अलग अलग काम में मास्टर हैं मगर बात कैप्टन की मानते हैं।अगर दो पैर हैं तो दोनों कैप्टन हैं।मगर एक कि बात दूसरा मानता नहीं हैं।

कई बार ऐसा होता हैं कि अपनी सही बात गलत समय पे करने से हमे बहोत भुगतना पड़ता हैं।में मेरे एक दोस्त को बहोत बार कहता हूं कि आप का जीवन सदैव ऐसे लोगो के आसपास हैं जो आपके अपने हैं।आप व्यक्ति को पहचान ने में गलत करते हैं।कुछ बाते ऐसी होती हैं,जिस में हम साफ हैं,मगर सामने वाले को इस में कुछ खास दिखाई देता हैं।ऐसी स्थिति में हम ये नहीं कहेंगे कि दोनों पैर साथ हैं,ये अलग बात हैं के एक पेर को रास्ता पहले से मालूम  हैं,मगर दूसरा थोड़ा देरी से समझता हैं।थोड़ी देर में मालूम होता हैं कि दोनों रास्ते अलग नहीं... पैर अलग हैं और एक रास्ते पे भी चलते हैं।कभी कुछ गलती होती हैं तो सुधार लेते हैं।

मुजे इतना मालूम हैं, की जो आप को जितनी इज्जत देता हैं,प्यार और सन्मान देता हैं।हम उससे अधिक देने का प्रयत्न करना चाहिए।हर बार अलग सोचना सही हैं,गलत सोचना सही में गलत हैं।
कुछ बाते समजाने या कहने से नही,अनुभव और परिस्थिति के सामने आने से समझ में आती हैं।मगर आज का ये शेर बहोत खूब हैं।
धारा भी साथ दे तो ओर बात हैं।
आप जराभी साथ देतो, ओर बात हैं।
जिंदगी गुजर सकती हैं,एक पैर पर।
दूसरा भी साथ दे तो ओर बात हैं।



@#@
कुछ ना कहो,
कुछ भी ना कहो।
क्या कहना हैं,क्या सुनना हैं।
समय का ये पल,थमसा गया हैं।
ओर इस पल में कोई न ही हैं...!
बस एक में हु, बस एक तुम हो।

Saturday, March 31, 2018

જીવાતું જીવન


જીવન માં કેટલાક ગુણ આપો આપ ઉતરી આવતા હોય છે. અવગુણ અગણિત  હોવાના લીધે આપણે ફક્ત ગુણ ની જ વાત કરી રહ્યા છીએ.કેટલાક ગુણ એવા હોય છે જે આપના વિચાર અને વર્તન માં હોય છે.આવા કારણે વ્યક્તિ મહાન બની જાય છે.આપણા અવગુણ  સદગુણના વિશાળ પડછાયા માં  ઢંકાઈ જાય  છે.

 રાત્રે સુવાની  તૈયારીમાં હતો અને થયું ચાલો લાસ્ટ મેસેજ જોઈને લંબાવું.પણ છેલ્લો મેસેજ એવો હતો કે એના વિચાર સતત આવતા રહ્યા.આ વિચાર એક લેખના સ્વરૂપમાં પ્રકટ કરવાના હતા.મુદ્દો माफ करना सीखिए,क्योकि हमभी भगवान से यही उम्मीद रखते हैं।વાત માફ કરવાની હતી,માફ કોને કરવા, ક્યારે કરવા, કેમ કરવા,કેટલી હદ સુધી માફ કરી શકાય,કેવી રીતે માફ કરવા ,કોને કોને માફ કરી શકાય, કેવી  પરિસ્થિતિમાં માફ કરી શકાય,ઈતિહાસમાં માફ કરવાનાં ઉદાહરણ પણ નજર સામે આવવા લાગ્યા. આવા અનેક વિચાર આવ્યા પછી આ લેખ માટે બેઠો.બે-ચાર વખત વિચાર આવ્યો કે ચલો લખવાનાર સાથે વાત કરીને પછી લખું.પણ મેસેજ માં સ્પષ્ટ સૂચના  આપેલી હતી કે આપ આપના વિચારો પ્રકટ કરી શકો છો.મતલબ કોઈના અભિપ્રાય કે સહકાર વગર લખવાનું હતું.પછી આંગળીઓ ના ટેરવાં  અને કમ્પ્યુટર.'ટેરવાં શબ્દને લીધે એક ઐતિહાસિક વાર્તા યાદ આવી ગઈ , એ વાર્તા “ લોક હૈયા ભીનાં –ભીનાં  માં કનુ આચાર્ય એ લખેલી છે.આકાશ વાણી રાજકોટ પરથી એ નાટ્ય સ્વરૂપે પ્રસારિત પણ થઈ ગઈ એ વાર્તા માં પણ માફ કરવાની વાત જ આવે છે.લોક હૈયા  ભીનાં – ભીનાં  એ બનાસકાંઠા ની  ઐતિહાસિક લોક કથાઓ છે.એ અંગે ક્યારેક ફરી...તો માફ કરો.માફ કરવાની વાતમાં આગળ....

 આ સંસારમાં આપણે છીએ.આપણી ઘણી બધી ભૂલ કોઈએ ક્યારેક માફ કરી હશે. આપણે પણ આ જગત માં આવ્યા છીએ તો આપણા થી થતી નાની નાની ભૂલ સુધારવા મથવું જોઈએ.આમ કરવાથી કે કિઈને માફ કરવાથી હૃદય વિશાળ બને છે. જે નાની નાની ભૂલોને માફ કરી શકે છે એ જ માણસ  મોટી ભૂલોને  માફ  કરીને પોતાની મહાનતા સાબિત કરી શકે છે.

કેટલાક લોકો એવા જ હોય કે એમાંની આંખો ફક્ત  લોકો ની ભૂલ જ શોધતી હોય છે. આવા માણસોને ગુસ્સો બહુ ઝડપી મગજ પર સવાર થઈ જાય છે. ક્રોધ માં લોકો  સામે વાળાને અપમાનિત પણ કરી દેતા હોય છે.કેટલાક લોકોને પૂર્વાનુભવોને લીધે સામેવાળી વ્યક્તિ પર ગુસ્સો આવી જાય છે. કેટલાક લોકોને ક્રોધ એટલો ઝડપી આવી જાય છે કે એમાંની પાસે માફ કરવાનો સમય રહેતો નથી.

ઉદાહરણ તરીકે જોઈએ. કોઈ ચોક્કસ જગ્યા જવા માટે બહુ ઉતાવળ છે.આપ આનન ફાનનમાં ગાડી લઈને ઘરથી બહાર નીકળો છો, એજ સમયે કોઈ રોંગ સાઈડ માંથી બાઇક સવાર ફોન પર વાત કરતો આવી જાય છે.એવીતો જોરદાર ચિચુયાટા  વાળી બ્રેક અને સાથે ગાળ પણ...

@#@
આવી જ પરિસ્થિતિ  બીજી વાર થઈ  જાય.કોઈ મધુર ગીત વગાડતા વગાડતા અને ઘરમાંથી સારા સંવાદો સાથે વિદાય લીધી છે. જવાની કોઈ ઉતાવળ નથી  અને કોઈ બાઇક વાળો કે ગાડી વાળો  અચાનક રફ ડ્રાઇવિંગ કરી નજીક આવી ગયો. આ વખતે આપના ચહેરા પરના સ્મિત સાથે સામેવાળા ને પણ વિચારમાં મૂકી દે. મન જેટલું શાંત હોય એટલું સારું,તો જ તમે સામે વાળાને માફ કરી શકો.

વાસ્તવિક રીતે જોવા જઈએ તો માફ કોને – કોને કરી દેવા જોઈએ. બાળકને હંમેશાં માફ કરીદેવો જોઈએ. બાળકએ પરમપિતાએ આપેલી અણમોલ ભેટ છે. બાળકને હજી આ નઘરોળ દુનિયાના પૂરા સારા- નરસા  અનુભવો હોતા નથી માટે હર હાલતમાં બાળકને માફ કરી દેવો જોઈએ. નજીકનાં સ્નેહીઓ અને મિત્રોને પણ ભૂલ કરેજ. આ વખતે  તમારા થી માફ થઈ શકે એવી  હોય એમાં એમને માફ કરી દેવા જોઈએ.જ્યારે તમે એમને માફ કરી શકતા નથી તો એ લોકો તમારી જિંદગી માંથી દૂર થઈ જાય છે. એક એવો સમય આવે છે કે એમના વગર તમને ખાલીપો લાગે છે.ખાલીપો કોઈ દિવસ જીવનમાં સાચું સુખ ન આપી શકે.

પતિએ પત્ની ને અને પત્નીએ પતિ  ને માફ કરવાની ટેવ રાખવી જોઈએ.તમે એની જ્ગ્યા એ હો ત્યારે તમને કેટલી તકલીફ પડે એનો વિચાર અને એણે તમારી સેવાઓને ધ્યાને લઈને માફ કરી દેવી જોઈએ.પોતાના માતા-પિતાને હરહાલતમાં કે ગમેતેવી ભૂલો થાય તો પણ માફ કરી દેવા જોઈએ.

શિક્ષક તરીકેનો વ્યવસાય સ્વીકારેલો છે. એમને બાળકો ને માફ કરવાનો ગુણ ખાસ કેળવવો જોઈએ. શાળાના બાળકો એ દેશ ની સંપતિ છે. તમે ઘેર થી ગુસ્સે થઈને આવ્યા હો અને એ ગુસ્સો બાળકો પર ઉતારવાનો કોઈ અધિકાર શિક્ષક ને નથી.બાળક સમાજ ની અલગ-અલગ પરિસ્થિતિ  માંથી આવતું હોવાથી એના જુદા –જુદા  આનુભવો અણે પ્રશ્નો હોવાના શિક્ષકે બાળકોને સાંભળવાની ટેવ પાડવી જોઈએ.જે માણસ સારી રીતે સાંભળી શકે એ જ કોઈ પણ પ્રશ્ન નો ઉકેલ લાવી શકે છે.માફક નાં આવે તો શિક્ષક ની નોકરી છોડી દેવી  જોઈએ પણ બાળકોને ક્યારેય શારીરિક શિક્ષા ન કરવી જોઈએ.આપણી પાસે ઘણું બધુ જ્ઞાન હોય એના લીધે બાળકના  સામાન્ય પ્રશ્ન પર ક્રોધિત ન થાતાં એની સહજતા થી જવાબ આપવો જોઈએ.

 જ્યારે તમે એક માણસ તરીકે કોઈ પરિસ્થિતિનો    સામનો કરી રહ્યા છો એ સમય એક એવો મોડ આવે છે કે જો તમે જતું કરો. એટલે કે  માફ કરો તો  એ મુદ્દો પૂરો થાય એમ છે પણ તમે તમારી જીદ નાં લીધે માફ નથી કરતાં અને  પછી સમય એવો આવે છે કે તમે એ બે મિનિટ ન સાચવો એમાં તમારે બે-ચાર વર્ષ સુધી કોર્ટ-કચેરીના ધક્કા ખાવા પડે.આજીવન ભોગવવું પડે.આવી કોઈ ઘટના હોય તો સમયને પારખીને માફ કરતાં શીખી જવું જોઈએ. દરેક અનુભવ જાતે જ લેવોએવું  નથી  કેટલાક અનુભવો બીજાઓના આધારે પણ શીખી શકાય છે.

એક વખત ઉના કોડીનાર તાલીમમાં જવાનું થયું. જ્યાં દીપકભાઈ તેરૈયાઆવ્યા હતા. એમણે ક્રોધ માટે એક સરસ ઉદાહરણ આપ્યું હતું કે એક કાચના ગ્લાસને તને હાથથી અડધો કલાક પકડી રાખો તો ઠીક છે પણ એ જ ગ્લાસ ને તમે બે વર્ષ  સુધી પકડી રાખો તો પછી ગ્લાસનું તો કઈ ન થાય પણ તમારો હાથ કાપવો પડે. ક્રોધનું પણ એવું જ છે જેટલો લાંબો સમય રાખો એટલો એ તમારા માટે નુકસાન કારક છે.એનો એક માત્ર ઉપાય.....માફ કરવું.......  પરમપિતા પરમાત્મા થી પણ આપણે આજ અપેક્ષા રાખીએ છીએ.

(કાંતિલાલ પરમાર ના મોકલેક લેખને આધારે.)

@#@
એક વિચાર આવ્યો.
એક વિષય નક્કી કર્યો.
કેટલાક મિત્રોને મેં એ વિશે લખવા કીધું.
13 મિત્રોએ લખીને મોકલ્યું.હવે કોનું લખું.છેવટે જેણે પહેલું મોકલ્યું એનું લખ્યું.આમ હવે બીજાનું મોકલેલું આપ જોઈ શકશો.

Friday, March 30, 2018

मम्मी पापा...

मेरे पापा... वाह रे वाह...!
मेरी मम्मी... वाह रे वाह...!
पापा मम्मी वाह वाह वाह...!
मम्मी पापा वाह वाह वाह वाह...!

एक छोटासा गाना, छोटे बच्चों का गाना।मेरा गाना हैं,मेने लिखा हैं।बहोत बार मेने गाया हैं,बहोत बार गाते हुए सुना हैं।

ये दो ऐसे तीर्थ स्थान हैं,की हमे कहीं यात्रा करने की आवश्यकता नहीं हैं।पहले किसी कक्षा में एक इकाई थी।शंकर,पार्वती बैठे थे।उन्हों ने गणेश और कार्तिकेय को विश्व के सभी पवित्र स्थानों की प्रदक्षिणा कण्व को कहा।
हुआ ये की कार्तिकेय निकल गए,गणेश जी नहीं जा पाए।उन्हों ने शंकर ओर पार्वती को बिठाकर उनकी प्रदक्षिणा करली।शंकर भगवान ये देखकर खुश हुए।
में भी यही कहना चाहता हूं।मेरी भी सोच यही हैं।पोस्टर में आप देख रहे हैं कि माता पिता बच्चे की सहाय कर रहे हैं।सामने ही एक बच्चा बैठा हैं।वो शायद अनाथ हैं।बाजू में लिखी लाइन को में फिरसे नहीं लिखूंगा।आप भी समझदार हैं।

@#@
मा बाप स्वर्ग नहीं,स्वर्ग से अधिक हैं।

Sunday, March 25, 2018

आप बच्चो के फोटो भेजे...

एक छोटा बच्चा।
सभी को प्यारा लगता हैं।
कहते हैं,बच्चे भगवान का रूप होते हैं।बच्चे हमारे परिवार में हैं।बच्चे हमारे आसपास में हैं।हम जहाँ काम करते हैं,वहां भी बच्चे हैं।जब हम पाठ्यपुस्तक लिखते हैं तब दो शब्द सामने आते हैं।एक हैं बच्चा ओर दूसरा शब्द हैं विद्यार्थी।अब सवाल ये आता हैं कि घर में जो होते हैं उसे बच्चा कहते हैं।जो स्कूल में आता हैं उस को लिखने के लिए विद्यार्थी शब्द हैं।यहाँ बच्चा ओर विद्यार्थी नहीं,यहाँ बच्चो की निर्दोषता के लिए भी हमे गर्व होना चाहिए।मेरी ऋचार्मी से मेरा झगड़ा रोजाना बात हैं।कुछ दिनों पहले एक जगड़ा हुआ।समाधान जल्दी नहीं हो पाया।कल समाधान हो गया।वो भी मजबूत समाधान।में कायम कहता हूं जो हैं इसे देखो,जो होगा उसे देखलेंगे।मेने यहीं तय किया हैं।में ऐसे ही जीवन जी रहा हूँ।आज का पोस्टर किसी ने भेजा था।मुजे मेरे बच्चों का बचपन याद करावे वाले दोस्त का शुक्रिया।

@705@
बच्चो के कोई भी फोटोग्राफ अगर हैं तो आप मुजे सेंड करे।हम आजके पोस्टर मे हैं वैसे क्यूट फोटो अल्बम कर रहे हैं।अगर आप के पास नाम और पता हैं तो बी भेजे...!हो सकता हैं बच्चे स्कूल में हो,बाग में या घर में।हमे बच्चो की फोटो चाहिए।aap bhaveshpandya2008@gmail.com ओर 7rangiskill@gmail. com  पर मेल कर सकते हैं।

Monday, March 19, 2018

हास्य कविता स्त्रिलीग:पुलिंग

पुण्यतिथि पे याद करना हमारे संस्कार हैं।आज 18 मार्च को हास्य कवि श्री काका हाथरसी जी की पुण्यतिथि थी।मेरे एक दोस्त हैं।जानी सर के नामसे में उन्हें बुलाता हु।वो कभी कभी कुछ भेजते हैं।आज उन्होंने मुजे एक कविता भेजी।काका हाथरसी उनका तख़लूस था।उनका असली नाम: प्रभुलाल गर्ग था।उनकी एक रचना विश्व प्रसिद्ध हैं।आज उनकी पुण्य तिथि पर में ये शेर करता हूँ।

स्त्रीलिंग, पुल्लिंग

काका से कहने लगे ठाकुर ठर्रा सिंग,
दाढ़ी स्त्रीलिंग है, ब्लाउज़ है पुल्लिंग।

ब्लाउज़ है पुल्लिंग, भयंकर गलती की है,
मर्दों के सिर पर टोपी पगड़ी रख दी है।

कह काका कवि पुरूष वर्ग की किस्मत खोटी,
मिसरानी का जूड़ा, मिसरा जी की चोटी।

दुल्हन का सिन्दूर से शोभित हुआ ललाट,
दूल्हा जी के तिलक को रोली हुई अलॉट।

रोली हुई अलॉट, टॉप्स, लॉकेट, दस्ताने,
छल्ला, बिछुआ, हार, नाम सब हैं मर्दाने।

पढ़ी लिखी या अपढ़ देवियाँ पहने बाला,
स्त्रीलिंग जंजीर गले लटकाते लाला।

लाली जी के सामने लाला पकड़ें कान,
उनका घर पुल्लिंग है, स्त्रीलिंग है दुकान।

स्त्रीलिंग दुकान, नाम सब किसने छाँटे,
काजल, पाउडर, हैं पुल्लिंग नाक के काँटे।

कह काका कवि धन्य विधाता भेद न जाना,
मूँछ मर्दों को मिली, किन्तु है नाम जनाना।

ऐसी-ऐसी सैंकड़ों अपने पास मिसाल,
काकी जी का मायका, काका की ससुराल।

काका की ससुराल, बचाओ कृष्णमुरारी,
उनका बेलन देख कांपती छड़ी हमारी।

कैसे जीत सकेंगे उनसे करके झगड़ा,
अपनी चिमटी से उनका चिमटा है तगड़ा।

मंत्री, संतरी, विधायक सभी शब्द पुल्लिंग,
तो भारत सरकार फिर क्यों है स्त्रीलिंग?

क्यों है स्त्रीलिंग, समझ में बात ना आती,
नब्बे प्रतिशत मर्द, किन्तु संसद कहलाती।

काका बस में चढ़े हो गए नर से नारी,
कंडक्टर ने कहा आ गयी एक सवारी।
Thanks जानी सर...

@701@
साहित्य के सर्जक जब विशेष साहित्य की रचना करते हैं,तब उनके मन में कुछ नया करने का भाव होता हैं।कुछ नया वो ही कर सकता हैं जो सर्जनशीलताको विशेष स्थान देता हैं।

Sunday, March 18, 2018

मा बाप

आज के जमाने में बच्चो के लिए मा बाप सब करते हैं।एक पोस्टर जो इस बात को अच्छे से समजा देता है।माँ के लिए बच्चा कलेजे से अधिक हैं।पिताजी का जो भी हैं,बच्चो का ही हैं।
बच्चे अगर दुखी होते हैं,निराश होते हैं तब मा बाप के लिए जैसे  परीक्षा हो जाती हैं।कोई भी मा बाप अपने बच्चों के लिए बुरा नहीं सोचते।एक तरीके से देखा जाए तो हमे दिखेगा की माँ बाप अपनी दुनिया में सबसे अधिक अगर फिक्र करते हैं तो अपने बच्चों के लिए।कहिए कि माँ बाप आने बच्चो के लिए जिंदा रहते हैं।
बच्चे कुछ भी करे,मा बाप को वो कभी जुटला नहीं सकते हैं।और आगे ऐसा होता हैं तो नहीं होना चाहिए।कई सारी संस्थान हैं जो वृद्धाश्रम का संचालन करते हैं।में कहता हूं कि ऐसी संस्थान बनाने से ही बच्चे अपने माबाप को छोड़  ने का सोचते हैं।
में आज हिन्दू कैलेंडर के पहले दिन अनुरोध करता हूँ कि किसी भी बुजुर्ग को वृद्धाश्रम में न जाना पड़े ऐसा हम संकल्प करते हैं।अगर ये पढ़ने वाले में से किसी के मा बाप अलग रहते हैं,या वृद्धाश्रम में हैं तो वो सोचे।अगर अलग रहते हैं तो उन्हें मिले, कोल करें।अगर वृद्धाश्रम में हैं तो उन्हें वापस घर लाये।
उन्होंने अपना कलेजा ओर दिमाग आपको दीया हैं।आप भी उन्हें अंतिम दिवसों में सन्मान ओर बेहद प्यार करें।


@#@
अगर जिंदगीमें कुछ भी नहीं हैं,
मगर आप हैं,मतलब आप के माबाप हैं।हमारे अस्तित्व को निखारने वालो को दुखी नहीं करना चाहिए।

Friday, March 16, 2018

सब कुछ सम्भव है...

कुछ लोग खास होते हैं।
कुछ लोगो के अहसास भी खास हिट हैं।टीवी चैनल और न्यूज़ पेपर में पढ़ा।समाचार दुखद थे। वैश्विक विज्ञानी ओर विश्व में बहोत से लोगो के प्रेरक स्टीफन हॉकिंग का देहांत हुआ।कह सकते हैं कि ब्रमांडमे वो विलीन हो गए।आज के दिन बहोत सारे लोग पैदा हुए होंगे,बहोत से लोग मर भी गए होंगे।
मगर,स्टीफन....

उनका जन्म 8 जनवरी 1942 के दिन  लंडन हुआ था।गेगेलियो के जन्म दिवस पर वो पैदा हुए थे। विश्व के गणित शात्री स्टीफन हॉकिंग 21 साल के थे तभी उनको मोटर न्यूरॉन डिसीस नाम की बीमारी हुई।  चिकित्सको ने कहा की ऐसी बीमारी वाले व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा 2 साल जी सकते है। उन्होंने कहा कि मेरे हाथ काम नहीं कर रहे है, किन्तु मेरा दिमाग तो काम कर सकता है!? 
बस इसी काम या विचार को लेकर उन्होंने काम शुरू किया।ब्लेक होल के बारे में  उन्हों ने रिसर्च किये। कुछ सालों बाद बीमारी के कारण उनकी आवाज भी चली गई उन्हों ने रोबॉटिक आवाज को अपनी आवाज बना दी।  शरीर का 90% पार्ट काम नही करता था।

एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मुजे मोत का डर नही है ओर मुजे  मरने की जल्दी नही है। मेरे ऊपर जिम्मेदारी हैं।मेरे  बहोत सारे काम है,जो पूरे कर ने है। उनकी  पूरी जिंदगी एक कुर्सी में पसार हुई।  उनको लिखने का शोख था।  मगर वो लिख नही पाते थे। अपने सहयोगी की मदद से 1988 में  एक बूक लिखी 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम '। ये बुक कुछ ही महीनों में विज्ञान के क्षेत्र में बेस्ट सेलर बूक बन गई। खगोल भौतिकशास्त्रमें आइनस्टाइन के बाद सबसे ज्यादा उनका प्रदान महत्व पूर्ण है।विश्वमें  उनको आइनस्टाइन नंबर 2 कहा जाता था। उन्होंने 1993 में दूसरी बूम 'ब्लेक होल्स एन्ड बेबी यूनिवर्सिस एन्ड अधर असेसद नामक किताब  प्रकाशित किया। 2001 में  ' ध यूनिवर्स इन अ नतशेलद पुस्तक ने भी विज्ञान जगत में सबसे अलग विचार के लिए धूम मचा दी।

अपनी पुत्री के साथ मिलके उन्होंने अपनी आत्मकथा भी  लिखी।हॉकिंगने एक कोंफ़र्न्स मे बताया था कि पृथ्वी पर बढ़ती जनसंख्या ओर ऊर्जा के कारण 600 साल बाद पृथ्वी अगन गोला बन जाएगी।उनका मानना हैं कि एसा होने का कारण भी मनुष्य ही होगा। टेक्नोलॉजी विनाशकरी साबित हो सकती है।

उनसे जुड़ी बातोंका योग तो देखो।गेलेलियो के पुण्यतिथि पे उनका जन्म हुआ और आईन्स्टाइन के जन्मदिन पर उन का देहांत हुआ था।आज के दिन उतना ही।अब उनके बारे में फिर बात करेंगे।

#मेरे दोस्त की सहाय...

Wednesday, March 14, 2018

कुछ नया...

कुछ अलग हैं तो मजा हैं।
कुछ नया हैं तो पसंद हैं,कुछ नया होगा तो अवश्य पसंद आएगा।मेरे एक दोस्त हैं।कुमार मनीष उनका नाम हैं।जब भी उनका कोई मेसेज या मेल मिलता हैं।कुछ खास होता हैं।जब भी वो कोल करते हैं,कुछ अच्छा या नया काम देते हैं,समझते हैं या समजाते हैं।
कुछ दिनों पहले की बात हैं।वो दिन विश्व महिला दिबस था।एक दिन पहले उन्होंने मुजे कोल किया।उन्होंने कहा 'आप को में कुछ भेज रहा हु,आप उसे ज्यादा से ज्यादा शेर करें।
मुजे हुआ कोई संदेश या कोई ऐसी जानकारी होगी जो मुजे शेर करनी हैं।मेने उनके whats aep  संदेश का इंतजार किया।उन्होंने मुंजे कुछ पोस्टर भेजे।आप को होगा कि पोस्टर भेज उसमें क्या हैं।मगर आपको भी ये पोस्टर देखकर मालूम होगा कि क्या नयापन हैं।
सदैव नया सोचने के लिए हमे कुछ नया करना पड़ता हैं।में कुछ ऐसे लोगो को जानता हूँ,जो रोज नया करते हैं।ऐसे लोगो के बारेमें ओर उन के काम के बारे में जानना बहोत रोचक होता हैं।

#Thanks कुमार...

Wednesday, March 7, 2018

कहा न जाये,सहा न जाये...

कुछ ऐसा होता हैं।
कुछ ऐसा नहीं भी होता हैं।
पिछले एक महीने से अधिक समय हुआ।समजो भारत भ्रमण ओर गुजरात भ्रमण कर रहा हूँ।वैसे तो अकेले रहने की आदत नहीं हैं।कहिके की मुजे डर लगता हैं।कई बार गया हूँ।अकेले रहने का भी बहोत होता हैं।
जब में अकेला होता हूं।अकेला पन महसूस करता हूँ
कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो ज्यादातर अकेले रहते हैं।जो अकेले हैं वो ही अकेलेपन का अहसास समज सकते हैं।
जब हम अकेले होते हैं।सारे दिन या सारा समय अकेले नहीं होते हैं।अकेले होने के वख्त हम जो करते हैं वो दिन में शायद नहीं कर सकते।
अगर मेरे पास संजय जैसी दृष्टि होती तो में डोर से सब कुछ देख सकता।थोड़ी देर पहले हम बात करते हो,अचानक कोई आ जाये या,कुछ ऐसा हो तो हम बात नहीं करेंगे या,अपना जो भी काम करते होंगे उसे बदलते हैं,बदलना पड़ता हैं।
में सुबह 5 बजे बिस्तर को छोड़ देता हूँ।मेरे लिए सुबह तब हैं जब में बिस्तर छोड़ू।अगर मुजे कोई कहता हैं कि मुजे सुबह उठने हैं।उस वख्त मेरे लिए सबसे पहली बात ये होती हैं कि में जिन्हें उठा रहा हूँ ,वो पहले अपना बिस्तर छोड़े।
एक बार बिस्तर से उठ ने के बाद क्या दूसरे काम या बाते नहीं हो सकती?सुबह का समय आज के काम को तय करने और शांति से आगे बढ़ने के किए इस्तमाल करना चाहिए।
सारी रात आराम करने के बाद,सुबह खुशनुमा होती हैं।अगर रातभर जागे भी हैं तो सबसे पहले अपने बिस्तर को ही छोड़ना चाहिए।
जब हम अकेले होते हैं तो सुबह सुबह सबकुछ याद आता हैं।उस वख्त अपने आप हमें तय करना हैं कि हम आज क्या करेंगे।एक सवाल अपने आपसे पूछना हैं।आज का दिन कहि गलत तो निकल नहीं रहा हैं।क्या हमारे किसी छोटेसे चुटकले से सारा दिन सुधरता या बिगड़ता तो नहीं हैं।ये तय करने की जिम्मेदारी हमारी हैं।जो भी हैं,उसे साथ लेकर चलना हैं।अब उसे प्यार से सुधारेंगे एमजीआर अपने शरीर या मन को अस्वस्थ नहीं करेंगे।
मेने बहोत बार कहा हैं।मेने बहोत बार लिखा भी हैं।जो हैं इसे देखो,जो होगा उसे देखलेंगे।कुछ घण्टो पहले जो व्यक्ति बात कर रहाथा, कल रात तक जो भी हुआ,आज एकदम से नहीं बदलेगा।कुछ समस्या हो सकती हैं।कुछ सवाल हो सकते हैं,मगर हमे इसे धीरे से साइड करना हैं,ओर अपनी मंजिल को पाना हैं।

@#@
खुशिया बाटने से बढ़ती हैं।
समस्या सामने से आती हैं।
हमे समस्या को बुलाना नहीं हैं।
हमे खुशिया बढ़ानी है,हम ही बढ़ा पाएंगे।