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Sunday, December 10, 2017

अधिकार का कदम...

मतदान...
महादान...
मतदान मेरा अधिकार...
मतदान मेरा अधिकार,
अब बनेगी मेरी सरकार।

दान करेंगे,दान करेंगे।
गुजरात के युवा मतदान करेंगे।
दान करेंगे,दान करेंगे।
हमारे अधिकार से हम दान करेंगे।
दान करेंगे,दान करेंगे।
अवश्य अब हम,सदैव मतदान करेंगे।
एक दोस्त ने फोटो भेजा।
मुजे अच्छा लगा।गुजरात के किसी प्रदेश से मिला हैं ये फोटो।हमे भी मतदान के प्रति जागृत करेगी ये फोटो।शादी के बाद मंडप से सीधे आने वाले या,मतदान करके मंडप में बैठे हुए कई मतदार के लिए हमने देझबय सुना हैं।हम हमारे देश को बदलना हैं।हमारी सोच वाला बनाना हैं तो अवश्य मतदान करना पड़ेगा।
आप भी इस संदेश को अवश्य फैलाये।
हमे मतदान करना हैं।
हम अवश्य मतदान करेंगे।
आप भी,में भी हम सब,हमारे सब।

आई नहीं we... में नहीं हम...!
#we can...

मतदान महादान...

मतदान...
आज कल मतदान की बात हैं।
नेता पक्ष और प्रतिपक्ष आमने सामने जबान लड़ा रहे हैं।आखिरी व्यक्ति मतदार हैं।
आज एक दोस्त ने फोटो शेर किया हैं।हम ये सोचना हैं कि क्या हम करेंगे...!

We can...

हमे करना होगा।
बहोत सवाल होंगे।बहोत काम भी होंगे।
बहोत सारी विड़बना भी आएगी,काम बढ़ता जाता हैं।काम बढ़ता जाएगा।मगर हमे अब एक काम करना हैं।गुजरात के सरकार के निर्माण में हमे हमारा योगदान देना हैं।
आप ओर में।
एक अधिकार से सरकार बनायेगे।ओर हम बोल सके कि इस सरकार के चुनाव में मेने भी मतदान किया था।अगर देखा जाए तो लोकशाही का ये महापर्व हैं।मेरा,आपका ओर हमारा ये महोत्सव हैं।हम उसे अपने विचारों से सजाएं ओर अपने अधिकार का उपयोग करे।हम ऐसे प्रतिनिधि मतदान करे जो हमे अपना लगे।कोई धर्म,पार्टी,समाज के नजरिये से न देखे।उम्र  या किसी तरह का लोभ या डर से मतदान न करें।अपने पन का अहसास दे पाए ऐसी ही सरकार के गठन में आप अपना अमूल्य मतदान करे।दान अवश्य करें।

Monday, December 4, 2017

दो भगवान


भगवान।
वैसे देखा जाए तो सिर्फ नाम।
अगर सही मायनों में देखा जाय तो विश्व के सर्जक।आज हम विज्ञान के साथ ज्यादा ओर धर्म के साथ जरूरत के आधार पर जुड़के हैं।
आज ट्विटर पर ये फोटो मुजे मिला।एक छोटा बच्चा मूर्ति के पास हैं।बच्चे के हाथमें छाता हैं।छाते से बच्चा भगवान को दूप से बचाता हैं।
कहते हैं कि बच्चे भगवान का रूप होते हैं।तो कहना चाहिए कि भगवान भगवान को छाता दिख रहे हैं।काश हम भी धूप से बच पाते।
जय गणेश
#Bnoवेशन
#We can मुमकिन हैं...

Sunday, December 3, 2017

133: राजेन्द्र प्रसाद नॉट आउट


आज से 133 साल पहले की बात हैं।
उस दिन हमारे देशमें एक व्यक्ति का जन्म हुआ।उन्होंने पढ़ाई की।शिक्षा में वो बचपन से तेज थे।देश जब अंग्रेजो का गुलाम था,ये बात राजेन्द्र प्रसाद को पसंद नही थी।युबा अवस्थामें जाते जाते उन्होंने अपने आप को देश के प्रति समर्पित कर दिया।
देश आजाद हुआ।हमारे बंधारण के आधार पे राष्ट्रपति का चुनाव करना था।सभी दल ने एक साथ मिलके राजेन्द्र प्रसाद को इस जिम्मेवारी के लिए चुना।हमारे देश के प्रथम राष्ट्रपति,स्वतंत्र सेनानी ओर शिक्षाविद के साथ विचारक के रूप में हम उन्हें याद करते हैं।आज के इस पवित्र दिवस पर हम उन्हें याद करके अपना कर्तव्य अदा करें।
#india

Saturday, November 18, 2017

सफलता कैसे...!

आप की सफलता।
आप की विफलता।
आप के पूरे भविष्यको बनाने में आपकी दिन चर्या बहोत महत्वपूर्ण हैं।आयोजन के साथ काम करने से ओर धीरज रखने से हमे सबकुछ प्राप्त हो सकता हैं।हमारी दिनचर्या में ही हमारी भावी सफलता छुपी हैं।गांधी जी दोनों हाथोंसे लिख सकते हैं।वो जब अपने सही हाथ से लिख के थक जाते थे तब वो अपने उलटे हाथों से लिखते थे।अगर एक हाथ से थकने के बाद कोई भी आराम करेगा।तब जाके बापू रुकने के बजाय दूसरे हाथ से लिख ते थे।उनकी दिनचर्या ऐसी थी कि वो सारे काम करने के बाद ही सोते थे।उस वख्त आज़ादी की बजह से उन्हें बहोत लिखना पड़ता था।और तब जाके विश्व में सबसे अधिक पत्र लिखने का कीर्तिमान बापू के नाम से जुड़ा हैं।
जिन के जीवन में कोई ध्येय हैं तो इस पोस्टर को अवश्य अपना साथी बनाले।आए बात उन्हें कुछ कम समय में सफलता देगी।किसी को दिखाने के लिए नहीं,कोई देख पाए इतने मजबूत इरादे होने चाहिए।

#में ओर मेरी सोच

Thursday, November 16, 2017

शिक्षामें सुधार...

आजकल शिक्षामें बहोत कुछ नया हो रहा हैं।कुछ लोग नएपन को स्वीकार नहीं सकते हैं।एक समय था कि जब अध्यापक एक मात्र ज्ञान का स्त्रोत था।आज ऐसा नहीं हैं।कुछ लोग आधुनिक शिक्षा व्यवस्था ओर उनमे आनेवाले बदलाव को स्वीकृति नहीं दे सकते या देना नहीं चाहते।
जैसे प्रत्येक व्यक्ति सर्वगुण संम्पन नहीं हैं,वैसे प्रत्येक व्यक्ति सभी बातोंमें जानकारी रखता हो ऐसा नहीं हो सकता।आज पोस्टरमें जो लिखा हैं।वो संदेश शिक्षा से जुड़े सभी व्यक्तियो को उपयोगी हैं।सच्चा शिक्षक व्व नहीं जो बच्चो को पढाये,सच्चा शिक्षक वो हैं जो बच्चोंको शिखने के प्रति लगाव पैदा करे।मेण्य कभी मेरे ब्लोगमें ऐसा नहीं लिखता की में सर्वगुण संम्पन हु।मेनेतो कभी किसीका पोस्टर या बात भी लिखी हो तो उनके नाम से शेर किया हैं।
कुछ लोग ऐसे हैं जो अपनी सोच को बढ़ाने के बदले,जो सोच बदलने का प्रयत्न करते हैं उसे ही पागल गोशित करने का प्रयत्न करते हैं।कुछ लोग ऐसी वाहियात बातोंमें कहते हैंना कि चलती गाड़ी में चढ़ जाते हैं।ऐसे लोगो के लिए ओर शिक्षामें सुधार चाहने वाले सभी को आजका पोस्टर अर्पण करता हूँ।

Saturday, November 11, 2017

मेरे दोस्त...मेरे साथी...

भावेष पंड्या dr bhavesh pandya iim innovation teacher education वर्ल्ड record


लाइट...
साउंड...
एक्शन और बाइट...
पिछले कुछ सालों से ये काम शुरू हुआ हैं।आज मेरे एक दोस्तने मेरे कुछ वीडियो,प्रोग्राम ओर ऐसी क्लिप भेजी जो मेने किसी न्यूज़ चैनल या संस्था के लिए रिकॉर्ड किये थे।
आज तक मेरे सभी वीडियो मयजे भेजने वाले मेरे दोस्त राकेश पटेल का में शुक्रिया अदा करता हूँ।कुछ वीडियो आज से 10 साल पहले के हैं।इस वीडियो में में भी अपने आपको नहीं पहचान पाता।
पहले कुछ डर लगता था।अब केमेरे से डर नहीं लगता।हा, कुछ निजी कारणों से में खुद को टी.वी. के कार्यक्रमो से दूर रखता हु।फिरभी आज 30 से अधिक इंटरव्यू ओर 80 से अधिक live डिबेट या रिकॉर्डेड कार्यक्रम हैं।
#Love You राकेश...टेक्निकली सपोर्टर ओर मेरे टेक्निकली एडवाइजर का शुक्रिया जिसने मुजे मेरा डॉक्यूमेंट कुछ अच्छे तरीके से पहुंचाया।

Monday, November 6, 2017

क्या होगा...


आज हमारे आसपास पारिवारिक सवाल आशिक दिखाई देते हैं।संयुक्त परिवार के सामने आज विभक्त परिवार ज्यादा दिखते हैं।आजकल ऐसा क्यों होता हैं।इस बात को समजाने के लिए एक प्रसंग देखते हैं।

महाभारत का युद्ध चल रहा था -एक दिन दुर्योधन के व्यंग्य से आहत होकर "भीष्म पितामह" घोषणा कर देते हैं कि -

"मैं कल पांडवों का वध कर दूँगा"

उनकी घोषणा का पता चलते ही पांडवों के शिविर में बेचैनी बढ़ गई -

भीष्म की क्षमताओं के बारे में सभी को पता था इसलिए सभी किसी अनिष्ट की आशंका से परेशान हो गए|

तब -

श्री कृष्ण ने द्रौपदी से कहा अभी मेरे साथ चलो -

श्री कृष्ण द्रौपदी को लेकर सीधे भीष्म पितामह के शिविर में पहुँच गए -

शिविर के बाहर खड़े होकर उन्होंने द्रोपदी से कहा कि - अन्दर जाकर पितामह को प्रणाम करो -

द्रौपदी ने अन्दर जाकर पितामह भीष्म को प्रणाम किया तो उन्होंने - 
"अखंड सौभाग्यवती भव" का आशीर्वाद दे दिया , फिर उन्होंने द्रोपदी से पूछा कि !!

"वत्स, तुम इतनी रात में अकेली यहाँ कैसे आई हो, क्या तुमको श्री कृष्ण यहाँ लेकर आये है" ?

तब द्रोपदी ने कहा कि -

"हां और वे कक्ष के बाहर खड़े हैं" तब भीष्म भी कक्ष के बाहर आ गए और दोनों ने एक दूसरे से प्रणाम किया -

भीष्म ने कहा -

"मेरे एक वचन को मेरे ही दूसरे वचन से काट देने का काम श्री कृष्ण ही कर सकते है"

शिविर से वापस लौटते समय श्री कृष्ण ने द्रौपदी से कहा कि...

"तुम्हारे एक बार जाकर पितामह को प्रणाम करने से तुम्हारे पतियों को जीवनदान मिल गया है "

" अगर तुम प्रतिदिन भीष्म, धृतराष्ट्र, द्रोणाचार्य, आदि को प्रणाम करती होती और दुर्योधन- दुःशासन, आदि की पत्नियां भी पांडवों को प्रणाम करती होंती, तो शायद इस युद्ध की नौबत ही न आती "
वर्तमान में हमारे घरों में जो इतनी समस्याए हैं उनका भी मूल कारण यही है कि -

"जाने अनजाने अक्सर घर के बड़ों की उपेक्षा हो जाती है "


बड़ों के दिए आशीर्वाद कवच की तरह काम करते हैं उनको कोई "अस्त्र-शस्त्र" नहीं भेद सकता -

इस बात को हम भी परिवार में आजमाए।कुछ परिणाम ऐसे ही नहीं मिलते।जैसे कि आम का पेड़।जो पेड़ लगाता हैं वो आम नहीं खाता।

बड़े बड़े होते हैं।
उनके आशीर्वाद ही हमे शांति का रास्ता दिखता हैं।शांति से ही प्रगति होगी।काम को पूरा करने,गोल को प्राप्त करने के लिए हमे शांति चाहिए।जिसके लिए हमे ही कुछ करना हैं।
हम क्या ओर कैसे करेंगे,वो हमें तय करना हैं।जोभी करना हैं शांति से आगे बढ़ना हैं।

Sunday, November 5, 2017

Except Us

देश और दुनिया में आज का दिन कई कारणों से महत्वपूर्ण है।आज के ही दिन 1937 के दिन  एडोल्फ हिटलर ने गुप्तबैठक बुलाई थी। जर्मन जनता के लिए ज्यादा जगह लेने की अपनी योजना का खुलासा हिटलरने आज के दिन किया था।आज हिटलर को दुनिया दो तरीके से याद करती हैं।आज का दिन हिटलर के साथ विश्व की ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री के लिए भी महत्व पूर्ण हैं।

आजकल हम ऑटोमोबाइल के क्षेत्रमें  जो सुविधा प्राप्त होती हैं इस के लिए भी आजका दिन महत्व पूर्ण हैं।आज हम जो सुविधाए देख ते हैं,उसकी शुरुआत समजीए आजसे हुई थी।ऑटो मोबाइल के जमाने दुनियाका सबसे पहला पेटन आज के दिन 1895 में मिला था। आटो मोबाइल के लिए जॉर्ज बी सेल्डम को पहला पेटेंट मिला।उनके पेटन के बाद आज हम आधुनिक सुविधाए प्राप्त कर रहे हैं।

आजका दिन साल का 309 वा दिन हैं।ओर आज से 56 दिन साल बदलनें में बाकी हैं।वैसे तो हमारे लिए सभी दिन महत्वपूर्ण हैं।जैसे हम हमारे जन्म दिवस या दिन विशेष को याद करते हैं वैसेही आज का दिन दुनियामें कई लोगोकी जिंदगीमें जन्म दिवस होगा।शादिका दिन होगा,या किसी और तरीक़े से जुड़ा होगा।अगर देखा जाय तो कल से वेकेशन खत्म होने को हैं।बच्चे स्कूल जाएंगे।
वैसे तो जब हमारा कोई दिन अच्छा नहीं जाता तब किसी ओर के लिए वोही दिन विशेष रूप से अच्छा होता हैं।किसी के लिए बुरा दिन अपने लिए बुरा नहीं भी हो सकता हैं।
दिन अच्छा या बुरा अपने आप हम तय करते हैं।हम हर दिन अच्छा हो वैसा प्रयत्न करने के बजाय हम बुरे दिन को अच्छेमें परिवर्तित करके आगे बढ़े वोही आशा रख सकते हैं।
क्या करना चाहिए?अगर ऐसा सवाल होता हो तो एक बात तय करनी चाहिए कि कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।आज बुरा हैं तो कल अच्छा होगा।
कहते हैं की विश्वास को कोई नहीं हरा सकता।हमें भी अपने आपमें विश्वास रखना चाहिए कि 'जो हुआ,अच्छा हुआ।जो भी होगा अच्छा ही होगा।'
#शुभमस्तु...

Monday, October 30, 2017

विवेकानंद ओर शिवराम



विवेकानंद आने गुरु के पास थे।विवेकानंद तब भाषा का अभ्यास कर रहे थे।उनके गुरि शिवराम विद्वान थे।विद्वान होने पर भी वो गरीबी का सामना कर रहे थे।आसपास के लोग भी इन्हें सहकार देनेको तैयार थे,मगर शिवराम उनसे मांगते ही नहीं थे।शिवराम किसी से अपनी जरूरियात के बारे में नहीं कहते थे।शिवराम के इस स्वभाव के कारण उनका परिवार और स्वयं शिवराम तीन दिनोंसे भूखे थे।
आज उनके उपवास का चौथा दिन था।विवेकानंद उस समय विद्यार्थी थे।वो भी उनके गुरु शिवराम की इस स्थिति से अवगत नहीं थे।
शिवराम अपना शिक्षा कार्य कर रहेथे।तभी एक टपाली आया।उसने एक तार ओर 10 रूपिया दिया।शिवराम तार को पढ़कर रोने लगे।विवेकानंद जी ने उन्हें पूछा गुरुजी,क्या हुआ?ये सुनकर शिवराम जी ने वो तार विवेकानंद जी को बताया।ये तार काशी से आया था।जिसमें लिझ था 'मयजे स्वयम शंकर भगवान ने स्वप्नमें आके कहा हैं कि मेरा एक भक्त वराह मिहिर में हैं।उनका नाम शिवराम हैं।उन्हें सहाय करें,उन्हें सेवा पहुंचाए'!तार में लिखा था में शिवजी की आज्ञा से ये पैसा भेज रहा हूं।आए तार पढ़कर विवेकानंद ने कहा 'गुरुजी,आपने मुजे भी नही बताया?'विवेकानंद का सवाल सुनकर शिवराम जी ने के रडे,मुजे स्वयम परम् पिता सुन रहे हैं तो में मेरी समस्या उनके संतानों को क्यो सुनाऊ?
उनकी सेवा और विश्वास देखकर विवेकानंद प्रभावित हुए।ऐसे गुरुजीओ से शिक्षा पाएंगे तभी विवेकानंद बनेंगे।

#वेवेकानंद

Sunday, October 29, 2017

समय नहीं साल




समय समय बलवान,
नहीं मनुष्य बलवान।
काबे अर्जुन लुटियो,
वही धनुष वही बान।

समय बलवान हैं।व्यक्ति कभी बलवान नहीं हो सकती।आज आप जो पोस्टर देखते हैं,वो समय की ताकत दिखता हैं।समय के साथ जुड़ी हुई कुछ बाते देखते हैं।
कहते हैं कि गुजरा समय फिरसे वापस नहीं आता।इसका मतलब हैं कि समय हमारे हाथमें नहीं आता।समय निकलता जा रहा हैं।समय कभी खराब नहीं होता,परिस्थिति खराब होती हैं।
एक व्यक्ति,दूसरे से 20 मिनिट तक बात करेगा,ये 20 मिनिट गई जो वापस नहीं आती।मेरा मानना हैं कि इस बिस मिनिट की बात व्व ऐसे करें कि जिससे फिरसे समय वापस आये या ऐसी परिस्थिति का निर्माण हो जिससे समय वापस आनेका अहसास हो।
कहते हैं कि बंध घड़ी दिनमें 2 बार सच्चा समय दिखाती हैं।
कुछ चीजें ऐसी होती हैं,जो समय के साथ मृतपाय होती हैं।जैसे पेजर ओर लैंडलाइन की सुविधा।एक समय उनका चलन था।आज पेजर के बारेमें नई पीढ़ी कुछ नहीं जानती।एक समय पेजर का इस्तेमाल करने वाले आज पेजर का इस्तेमाल नहीं करते।उस वख्त हम कहेंगे कि इस्तमाल की हुई चीज का महत्व आज नहीं हैं।
कपड़े ऐसी चीज हैं जो आप बदल ते रहते हैं।कुछ पुराने हैं।जुछ छोटे या बड़े होते हैं।मगर हमारी स्किन हमे सदैव उपयोगी हैं।मुजे मालूम हैं वहां तक एक बार चोट लगनेके 50 से 52 दिनोंके बाद चमड़ी नई आती हैं।उस वख्त नई ओर पुरानी चमड़ी साथ मिल जाती हैं।थोड़े दिनों बाद होता ये हैं कि नई ओर पुरानी चमड़ी को आप अलग नही कर सकते।
पोस्टरमें आपने देखा होगा कि माँ और बच्चा,कुछ दिनों बाद या कुछ सालों बाद चित्र उलटा होता हैं।मगर स्थिति बदलती हैं।स्थिति बदली हुई हैं मगर पात्र वोही हैं।
समय कभी कहि नहीं जाता,में मानता हूं कि समय हमे आज की स्थितिमें आनेवाली स्थितिका सामना करने को कहती हैं।में इस विधान से असहमत हूं कि गया हुआ समय वापस नहीं आता।देखिए हमारे देश ने 1983 ओर उसके बाद दूसरी बार भी वर्ल्ड कप जीता हैं।क्या हम ये नहीं कह सकते हैं कि समय तो वापस आया हैं मगर साल बदला हैं। समय आएगा मगर साल बदलेगा।
इस्तमाल हुई हर सांस जरूरी हैं,फिरसे नही आती मगर नई सांस तक पहुंचाती हैं।चलते समय हमारे द्वारा उठाया पुराने समय वाला कदम हमे हमारे गोल तक पहुंचाने में सहयोगी हैं।मा तो अपने बच्चे से प्यार करेगी हीं, पोस्टर में पुरुष या पुत्रने आज के समय अपनी माँके प्यार का जवाब दिया हैं।समय नही बदला,परस्पर प्यार करने वाले नहीं बदले,मा ओर बीटा नहीं बदले।बदला हैं तो सिर्फ समय।साल बदला हैं।समय आएगा तब परिस्थिति वही होगी जिसके लिए हम प्रतिबद्ध रहे हो।
समय हमें सफल होने की प्रेरणा देता हैं,समय हमें विफल नहीं बनाता।जो समय हम इस्तमाल करे,वो  ऐसे करें कि उसे हम दूसरी बार समय के परिप्रेक्षमें योग्य व्यावस्थामें देखे तो हम खुद बोल पाए... समय नहीं बदला साल बदला हैं।
#$amay

Thursday, October 26, 2017

100 - 3= 100



કેટલીક બાબતો.આમ જોઈએ તો ખૂબ જ મહત્વની લાગે.કેટલુંક એવુંય હોય એ આપણું હોય તોય જતું કરવું પડે.આપણું હોવા છતાં છોડવું પડે પણ છોડ્યા પછીય કેટલી શાંતિ હોય કે શાંતિ થાય તે જોઈએ.વાત છે જર્મનીમાં આવેલ હોંગયા શહેરની.અહીંની એક શાળામાં શિક્ષકે એક દાખલો લખ્યો.આ સમીકરણ નો દાખલો હતો.શિક્ષકે બોર્ડ પર એક સમીકરણ લખ્યું. 

 36x + yx, 2/3yx + 3x (66y + 12x).b =0

અને વિદ્યાર્થીઓ તરફ જોઈને કહ્યું "આ સમીકરણનું સોલ્યુશન મારી પાસે નથી. આવાં   નાનકડાં સમીકરણને સોલ્વ કરવાનાં પરીક્ષામાં પુરા ત્રણ માર્ક મળશે. "
સાહેબનું આવું બોલેલું સાંભળી સૌ છોકરાં એકબીજા સાથે વાત કરવા લાગ્યાં. સાહેબે સૌથી આગળ બેઠેલ એક છોકરા તરફ આગળ વધ્યા.પછી તેઓએ જયૉમ તરફ ફર્યાં અને કહ્યું. " આ દાખલાનો પ્રોબ્લેમ સોલ્વ કરી શકશે...?"એક છોકરો.જ્યોમ એનું નામ.એ ઊભો થયો. એક પળનો પણ વિલંબ કર્યા વગર ડસ્ટર હાથમાં લીધું અને બોર્ડ પર લખેલું સમીકરણ ભૂંસી નાંખ્યું.
અને કહ્યું....
" પ્રોબ્લેમ સોલ્વ્ડ સર".
" જેનો કોઈ તાળો જ નથી તેની પાછળ સમય કેમ બરબાદ કરવો. ત્રણ માર્કની પાછળ બાકીનાં 97 માર્ક કેમ ગુમાવવા??!!
આપણી જિંદગીમાં પણ અમુક પ્રોબ્લેમ આવાં જ હોય છે. અને તેનું સોલ્યુશન પણ આ રીતે જ હોઈ શકે છે. દુર્લભ અને અપ્રાપ્ય ત્રણ માર્કની પાછળ આપણે 100% જિંદગી દાવ પર લગાવી દઈએ છે. અને એ લ્હાયમાં બાકીનાં 97% ખૂબસૂરત પળો જે આપણાં જ આધિપત્યમાં હોય છે તેને માણવાનું ભૂલી જઈએ છીએ.જિંદગી જીવવા માટે ભૂંસવાની કળા આત્મસાત કરવી જરૂરી છે.
જે 97 ગુણ મળે છે તેને બદલે આપણે 100 ગુણ માટે ફિકર કરીએ છીએ.એ 3 ગુણ છોડી દઈએ તોય 97 નું મેરીટ ખરાબ નથી.ખરાબ ન જ કહેવાય.છતાં હશે.
#જીવન ગણિત

Thursday, October 19, 2017

हैप्पी वाली दीवाली...

आज ख़ुशिका दिन हैं।
आज दीपावली का दिन हैं।आज के दिन हम पुराने साल को पूरा करते हैं।हमारी साल भरकी निष्फलता भूल कर हम नए साल की राह देखते हैं।हम अगर पिछले साल निष्फल हुए हैं,हमारा कुछ रुका पडा हैं तो हम इस आने वाले नए साल के लिए आशा रखते हैं।
आज का ऐ अंतिम दिवस मेरी गलतियों को भुलनेका दिन हैं।नए साल में नई उम्मीदों के साथ जब भी हम काम करे हमे पूर्ण सफलता प्राप्त हो ऐसी प्रभु से प्रार्थना।मेरे ओर आप के जीवनमें सारी खुशियां भले न मिले।हर दिन खुशी से भले न कटे मगर साल को जब पीछे मुड़के देखे तो सीधा हमे अच्छा दिखाई पड़े,सफलता का मार्ग दिखाई पड़े ऐसी अभ्यर्थना रखता हूँ।
मेरे जीवनमें आने वाले हर चढ़ाव उतारमें जिन्हें दुख पहुंचा हो उन्हें में ख़ुशी दे पाउ ऐसा प्रयत्न करूँगा।में आशा रखता हूं कि जिन्हें में मील नहीं पाया उन तकभी मेरी दुआ पहुंचे।मुजे प्यार करने वाले प्यार से जिले,मुझसे नफरत करने वाले किसी से नफरत न कर पाए,मुझसे दूरी रखने वालो कि भगवान से दूरी घटे।
में ओर मेरी निजी सरकार,में ओर मेरा प्यार कभी न हारेंगे,कभी न भूलेंगे।हम सारे देशमें खुशिया भरेंगे।
#शुभमस्तु

Sunday, October 15, 2017

9 रत्न सप्तरंग:2017


आज 15 एक्टोबर।सप्तरंगी फाउंडेशन पिछले आठ सालों से बच्चो के विचार एकत्र करने का काम कर रहे हैं।पहले साल हमने 1 बच्चे को खोजा हैं।पिछले साल हमने आठ बच्चो को पसंद किया था।पूरे साल की प्रक्रिया के बाद हम तक पहुंचने वाले विचारो से इस बार हम 9 बच्चो को पसंद कर रहे हैं।इन बच्चों को सप्तरंगी फाउंडेशन द्वारा आयोजित किये जाने वाली कॉन्फ्रेंस में निमंत्रित किया जाएगा।

इन 9 बच्चों के विचार के आधार पर उसका प्रोटोटाइप बनाया जाएगा।प्रोटोटाइप बनाने के बाद इस नवाचार को हम सृष्टि के माध्यम से नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन को भेजेंगे।

आप को ये जान के खुशी होगी कि इस बार हमें गुजरात,राजस्थान,महाराष्ट्र और हरियाणा से विचार प्राप्त हुए हैं।स्काय फाउंडेशन नेपाल से शिवा तवांग भी हमे 12 बच्चो के विचार भेज चुके हैं।हमारे इस साल के 9 बच्चोमे नेपाल के दो बच्चे हैं जिन्होंने हमे पहाड़ो में जीवन जीने वाले लोगो के लिए नए विचार भेजे हैं।बांग्लादेश के महमद यूनुस इस बार हमसे जुड़ हैं।उन्होंने आज 15 अक्टूबर को 30 बच्चो के साथ क्रिएटीविटी वर्कशॉप का आयोजन किया हैं।उनके विचार हमे दिवाली तक मील जाएंगे।

पूरे सालमें हमे 974 से अधिक on line नवाचार भेजने वाले बच्चो के नवाचार अच्छे हैं।उनके ऊपर भी हम काम करेंगे।मगर आज अब्दुल कलाम जी के जन्म दिवस के उपलक्ष्यमें आज हमारे 9 रत्न के लिए इस बार काम देखा जाएगा।

हमारे इन 9 विचार रत्नों में इस बार कुल 12 बच्चे हैं।
नेपाल से सोना कोइराला ओर मानसी राणा ने संयुक्त रूपमें एक विचार भेजा हैं।इस के उपरांत गांधीनगर के दहेगाम से शिल्पा पटेल भी पहली बार जुड़ी हैं।पहली बार पसंद हुई  हैं।कुछ बच्चे ऐसे हैं जो हमसे जुड़े हैं और इस बार उनके नवाचार पसंद किये गए हैं।जिसमें निर्जर दवे(पालनपुर,जिन्हें पिछली साल राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका हैं।)निष्क भट्टने किचन में काम करने की नई डिजाइन के लिए पसंद हुए हैं।इसके अलावा और भी विचार निष्क ने भेजे हैं। निष्क महेसाणा से हैं।जिनका विचार पिछले साल नेशनल लेवल में पसंद हो चुका हैं।कावेरी डे केअर स्कूल की अवनी पटेल अपने दफ्तर वाले विचार के साथ दूसरी बार पसंद हुई हैं।चैतन्य जानी इस बार प्रोटोटाइप के साथ अपने नवाचार भेजने में सफल हुए हैं।कच्छ के मयूरसिंह सोढा इस बार अपने परिकर की डिजाइन के प्रोटोटाइप ओर दूसरे नवाचार के लिए पसंद हुए हैं।चार्मी भट्ट ने अखरोट तोड़ने की मशीन का प्रोटोटाइप भेजा हैं।
महाराष्ट्र के सोलापुर से सिध्धराम मशाले ओर बाला साहेब वाघ ने सीर फाउंडेशन के माध्यम से दो बच्चों को पसंद किया था।महाराष्ट्र से 700 से अधिक विचार में से अभी प्रारंभिक 2 बच्चो के विचार हमने पसंद किए हैं।रिषीपाल जी ने हरियाणा में पहले से आयोजन करके क्रिएटीविटी वर्कशॉप के माध्यम से बच्चो को पसंद करने का काम कर लिया था।उत्तराखंड की सोनिया जी अभी अपने विचारों को देख रही हैं।कुछ दिनोंमें हम उत्तराखंड के 9 बच्चो के नाम गोशित करेंगे।इस बार हम चाहते थे कि हमारे क्रिएटीविटी वर्कशॉप 9 स्टेट में हो,मगर वो संख्या 6 तक रुकी हैं।अगले साल 10 वा साल हैं।हम अगले साल 10 स्टेट तक पहुंचने का प्रयत्न करेंगे।हम इस साल के विचार भेजने वाले 12 बच्चो की विशेष जानकारी के साथ मिलते रहेंगे।
#Bnoवेशन
#7रंगी