Saturday, June 13, 2020

संकुल फ़ीस लेंगे या नहीं? महामंथन


आज VTv न्यूस पर महामंथन देखा।गुजरात की सब से पहली HD news चेनल के तौर पे इसे जाना जाता हैं। सदैव निष्पक्ष और ज्यादा जानकारी के कारण में सिर्फ एक ही लोकल चेनल देखता हूँ। जो है VTv। इस चैनल में सबसे लंबा रोजाना कोई कार्यक्रम है तो वो है ' महामंथन'। आज के महा मंथन कार्यक्रम में #BJP के श्री महेश कसवाला, कोंग्रेस से श्री नरेंद्र रावत,शिक्षाविद एवं कटार लेखक श्री अशोक पटेल और पूर्व शिक्षा अधिकारी श्री के.आर.पोटा जी भी उपस्थित थे। कुछ बाते हुई। मे  कार्यक्रम में जुड़ने के लिए 30 मिनिट तक कोल करता रहा। कार्यक्रम के शुरू से अंत तक। में मेरे सवाल नहीं पहुंचा पाया इस बात का मुझे खेद हैं। इस कार्यक्रम में #इसुदान गढवी अच्छा संचालन कर रहे हैं।सच को सच और जुठ को जुठ कहने में वो हिचकिचाहट नहीं रखते। मेने कई बार उन्हें किसी भी बड़े पैनलिस्ट को डांटते या रोकते हुए देखा हैं। आज की बात के लिए में  कहूंगा की चर्चा करनी थी गरीबी की रेखा पर और चर्चा चली रेखा की गरीबी पर। आज के महामंथन का विषय था स्कुल में फ़ीस लेने के लिए कुछ लोग दबाव बना रहे हैं। लोग याने संस्थान के संचालक।

मेरा कोल नहीं लग पाया सो मुझे हुआ की में मेरे सवाल और कुछ लोगो ने जो जानकारी छिपाई उस के बारे में कुछ लिखू। सबसे पहली बात है कोंग्रेस के नेता की। न उन की सरकार है न उनकी कोई शैक्षिक संस्थान होगी। वो सिर्फ लोगो को दबाव न करने के बारे में बोल रहे थे। वो और बोले भी क्या। उन्होंने अपनी बात रखी और 3 बार उन्हें चांस मिला, जो की एक पैटर्न होती है कि सभी पैनलिस्ट को चांस मिले। उन्होंने जो कहा में उस बात को नहीं लिखूंगा, क्यों की उन्होंने अपने पक्ष के बजाय सीधे व्यक्तिगत कैसे सुधार हो इस के बारे में कुछ जानकारी दी, जिसमें BJP  पेनलिस्ट नेताने उन से बड़ी आवाज में बिच बिच बोलते रहे। किसी स्वामीनारायण इंटर नॅशनल स्कुल के संचालक श्री बंकिम शाह भी पैनल में थे। 



उन का कहना था कि हमने हंमारे स्टाफ को 70% पगार लेने के लिए तैयार कर लिया और हमे कोई सवाल या समस्या नहीं। होती तो भी थोड़े live टी.वी. पर बोलते। गुजरात की TRP में सबसे पहली चार चेनल में से किसी एक चैनल पर तो अच्छी बातें करेंगे। डिबेट में वो क्या बोलते? मगर मेरा उन से सवाल था की अगर आप इंटर नेशनल स्कुल के संचालक है तो कृपया आप ये बताये की दुनिया के कोन से दूसरे देश में उन की दूसरी ब्रांच हैं। अगर दूसरे देश में कोई ब्रांच नही है तो इसे सिर्फ नाम से इन्टर नॅशनल के नाम से लोगो से धोखाधड़ी कर रहे हैं। कुछ तीन चार संकुल के बारे में उन्हों ने बताया जो सारे एक डिस्ट्रिक्ट या गुजरात के संकुल थे।मेरा सरकार एवं #इसुदान जी से अनुरोध है की ऐसी मुहीम चले की ऐसे संचालक इंटर डिस्ट्रिक संकुल नाम रखे ऐसा प्रावधान हो। ऐसे संचालक बाते बड़ी बड़ी करते है मगर सही बात नहीं बताते। जैसे की क्या इंटर नॅशनल स्कुल में कोई गरीब का बच्चा है। #RTE के तहत उन की कितनी स्कुल में उन्होंने प्रवेश दिया हैं, और कितने बच्चे RTE से पढ़ते हैं। उन की फीस तो सरकार देती हैं। RTE के प्रवेश के संदर्भ में किसी ने कहा कि कुछ पेरन्ट्स ऑडी लेकर गुमते हैं। ऑडी में गुमने पर चर्चा हुई। संचालक एवं वाली भी ऑडी वाले ही होंगे। 3 महीने पढ़ाया नही है, लोक डाउन में संकुल बंध थे,फिरभी 70% पगार दिया। फ़ीस तो पिछले साल की उन के पास पहले से थी। 

श्री अशोक पटेल जी जो शिक्षा विद बन के बैठे थे। उन को सदैव सरकार के प्रवक्ता के रूप में सुनता और पढ़ता आया हूँ। वो लिखते भी हैं। बाते बड़ी बड़ी करने को लेकर वो शिक्षाविद से ज्यादा उन की खुद की बाते करने आये ऐसा लगा। उन्होंने क्या दान दिया इस ऐ अच्छा इस हालत में कैसे काम किया जाय वो अपेक्षा रखी थी। 1 लाख से अधिक पगार लेने वाले 38 हजार दान में दिए वो गुजरात को सुनाकर बैठे रहे। उन्हों ने कहा कि अभी फ़ीस नहीं माग रहे है। मगर माफ़ भी नहीं कर रहे हैं। अरे उन्हें कहना चाहिए जब तक शिक्षा का काम रेग्युलर नहीं होता वो फ़ीस नहीं देनी या कुछ प्रतिशत ही देने को वो बोल सकते थे। एक अखबार में लिखने के बाद कोई कुछ सवाल करे तो कभी जवाब नही देते और जो आज जवाब दिए वो भी सामान्य थे। उन्हें मालूम नहीं है कि FRC (फ़ीस रेग्युलेशन कमिटी) के कारण 8 हजार लेने वाले संकुल आज 14 हजार के धनी बन पाए हैं। ये है FRC का फायदा। 

 योगा की फीस या खेल की फीस अभी माफ़ करें। अरे गधे को भी मालुम है कि सरकारी स्कूल भी बन्ध है, वो भी योगा करते रहे हैं। योगा की फीस, फला ढिंकना फ़ी का पत्र पठन करने वाले श्री के.आर. पोटा जी ये कैसे भूल गए की जब वो शिक्षा अधिकारी थे तब से एक नियम है, की संकुल में स्कुल की परमिशन चाहिए तो जितने कर्मचारी की जरूरत होती है, उन के सरकारी नियम की तहत एक साल का पगार स्कुल के बेलेन्स शीट या बैंक में दिखानी हैं। अगर ये नियम है तो 70% पगार शिक्षक क्यों ले? शायद पोटा जी ये भी भूल गए की ये फ़ीस की समस्या बड़ी फ़ीस वाली स्कुल की ही हैं। FRC के जानकार, बंधारण की कलम बार बार बोलने और लिखने वाले पोटा जी उन के पास में बैठे संचालक को ये पूछ सकते थे। श्री बंकिम शाह ने कहा की 10000 से अधिक प्राइवेट स्कूल के संचालक ये कार्यक्रम देखते हैं। गुजरात में 16368 प्राइवेट संकुल हैं। क्या श्री अशोक पटेल एवं श्री पोटा जी ये कैसे भूल गए की पिछले कितने सालो से प्री स्कुल से डीम्ड यूनिवरसीटी की मान्यता मिलनी शुरू हुई। एक समय था जब स्व. नलिन भट्ट शिक्षा मंत्री थे, उन्होंने आज तक के इतिहास में सबसे ज्यादा सरकारी ग्रांटेड आश्रम शाला एवं हाईस्कूल की परमिशन बन्ध करवाई थी।श्रीमती आनंदीबेन पटेल के शिक्षा मंत्री होते समय  प्राइवेट संकुल को सबसे अधिक परमिशन मिली हैं।

मेने स्क्रीन पर श्री महेश कसवाला जी को देखा तब से मुझे मालूम था। मुझे मालूम था कि वो  लंबे हाथ कर के,और केमेरे के सामने राइट हाथ की ऊँगली दिखाकर कोंग्रेस के व्यक्ति को कहेंगे की आप ने किया होता तो हमे न करना पड़ता।  में अगर कोल करपाता तो उनसे पूछता की वो कृपया  RTI से जानकारी प्राप्त करे की गुजरात की पहली प्राथमिक,पहली माध्यमिक,पहली कॉलेज या पहली प्राइवेट यूनिवर्सिटी की मान्यता किस साल में मिली, उसे कितने साल हुए? नलिन भट्ट आज जिन्दा नहीं हैं। उनके बारे में न लिखता। मगर तब वो शिक्षा मंत्री थे, जब अल्प विकसित और  अन्तरियाल विस्तार में चलने वाली कितनी आश्रम शाला बन्ध हुई।और इस के बाद कितनी प्राइवेट संकुल को मान्यता मिली।  तब सरकार में कोण थे। मुजें BJP या कोंग्रेस से नहीं। कहने वाले कहते है कोंग्रेस ने ये किया होता तो हम न करते। मगर शॉपिंग सेंटर में परमीशन  दिए हैं। वो भी PTC, Bed या BSC कॉलेज या संस्थान शॉपिंग सेंटर में खुले है जो आज भी हैं। सवाल सीधा था। फ़ीस का क्या करे। कोई दबाव कर सकता हैं? जवाब भी वही है, की पिछले 3 महीने से शिक्षा कार्य बन्ध है तो उसका रिबेट मिलेगा क्या? आप वापस करना नही चाहते। और वो अन्तर्राष्ट्रीय संचालक कहते है, आज नहीं तो 6 महीने बाद मगर फ़ीस देनी चाहिए।

अरे! 3 महीने के वापस दो या इन 3 महीने की छोड़ दो। श्रीमान महेश जी को जब देखता हूं हाथ लम्बा कर के बोलते हैं। आज तो मुझे ऐसा लगा की कोई बहार से उन्हें फोन पे जानकारी देता था। उन्होंने 3 बार डिबेट चालू होने पर भी कोल रिसीव किये। ठीक हैं। अगर इसुदान जी के बदले में होता तो चालू डिबेट में 3 से 4 बार फोन पे बात करने वाले को डिबेट से बहार भेज देता।


और अंतमें...

इंटर नॅशनल...???
एक देश में भी दो संकुल नहीं हैं।

CBSE संकुल....

उस की परमिशन की पहली शर्त है कि ट्रस्ट के पास 5 एकड़ जमीन होनी चाहिए। गुजरात की कितनी CBSC संकुल के नाम पे चलने वाले ट्रस्ट के पास इतनी जमीं हैं? बड़ा नाम रखने से बड़ी फ़ीस मिलती है।CBSE मतलब सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एज्युकेशन। पोटा सर ये कैसे भूले की सेकंडरी में कक्षा 1 से 5 नहीं गिने जाते। प्राथमिक शिक्षा के लिए राज्य सरकार स्वायत्त है। वो CBSC में कैसे आता हैं। सभी सिर्फ नाम देते है, CBSC या बड़े नाम इंटरनॅशनल  के नाम से लाखों में फ़ीस लेते हैं। लोकड़ाउँन से पहले  DPS का तो बड़ा गफला आया था। हाइकोर्ट तक बात आई थी। परमिशन केंसल करने का प्रस्ताव था, बिना डरे वो आज फ़ीस माग रहे हैं नाम बड़े और इंटरनेशनल रखते हुए,CBSE दिखाते हुए उनकी  परमिशन जिल्ला समिति से लेकर चलाते हैं। 

आज फ़ीस के लिए दबाव करने वाले क्या जब शिक्षा कार्य नही हुआ उन महीनों की फीस रिफंड देंगे। एक पपेट की तरह शिक्षा विद की जगह श्री अशोक पटेल ने  शिक्षामंत्री ने उन को सामने से कॉल किया। ये जानकारी को VTv  शेर करने के बजाय श्री अशोक पटेल कोई सुजाव देने में असमर्थ रहे। वैसे भी उन की कलम या कथन में कभी शिक्षाविद नहीं दिखा। शिक्षा से सवाल हैं तो ज्यादा विद्यार्थी एक से आठ में हैं। सरकारी शिक्षक को सवाल करते तो अच्छा होता। कोलेज से जुड़े अध्यापक को बात करने से कम विद्यार्थियो से जुडी जानकारी मिलेगी।

मेरा इसुदान जी से अनुरोध है कि फोन के साथ आप मेल आईडी भी दे, जब आप के मनो मंथन का विषय तय कर लो तो हम फोन के बजाय मेल या मेसेज दे, जिस से चर्चा गरीबी की रेखा पर हो,नहीं की रेखा की गरीबी पर। गढवी जी का दोष नहीं हैं।  जो  FB जैसे भद्दे सोसियल मिडिया जैसे चालु माध्यम पर बंधरणीय कलम और अधिनियम लिखने वाले आज 2 बार बाइट में भी ऐसा बोले की इसुदान जी को रोकना एवं टोकना पड़ा। भाई श्री महेशजी कसवाला बॉडी लेंग्वेज के जानकार केमेरे के सामने ऊँगली उठाकर बोलने वालों को गलत प्रभाव खड़ा करने को या दबाव बढ़ाने वाले व्यक्ति के रूप में मानते हैं। मेरी भी यही राय हैं।

कोई सच बोलेगा तो पोटा जी उसे FB से ब्लॉक करेंगे।श्रीमान महेश जी कोंग्रेस को कोसेंगे।श्री अशोक जी तो खुद का प्रचार कर के चले गए। संचालक छ महीनों बाद पूरी फ़ीस वसूलने को कहकर चले गए। मतलब चर्चा करने आये थे गरीबी की रेखापर और आधी जानकारी के कारण रेखा की गरीबी पर बोलते रहे। शिक्षाविद एवं पूर्व अधिकारी भी पूरी जानकारी देने में असमर्थ रहे.। VTv मेरा प्रिय चेनल हैं। गुजराती न्यूस चेनल में में सिर्फ Vtv देखता हूँ।इसुदान जी को मैने बहोत से लोगो को बुच मारने से दूर करते देखा हैं। इसुदान जी को मेरा अनुरोध है की अगर वो चाहे तो मेरे सवाल  कल के पैनलिस्ट को भेजे।

मेने जो लिखा है उस के लिए अगर  किसी पैनलिस्ट या किसी को भी इस बात पर सवाल है तो कृपया मुझे लिखे, संपर्क करें।


लास्ट अपडेट:

शिक्षा मंत्री का महत्वपूर्ण निर्णय:

શિક્ષણમંત્રીનો મહત્વનો નિર્ણય, સ્કૂલ સંચાલકો ફી માટે નહીં કરીશકે દબાણ. કોરોનાનાં કપરાં કાળમાં ઉદ્યોગ-રોજગાર બંધ હતા. તેવામાં સ્કૂલો પણ બંધ છે. જેને કારણે ફી ભરવા મામલે વાલીઓએ પણ વિરોધ કર્યો હતો. જે બાદ રાજ્યના શિક્ષણમંત્રી ભૂપેન્દ્રસિંહ ચૂડાસમાએ કહ્યું છે કે, સ્કૂલ સંચાલકો 3 મહિના સુધી ફી ભરવા મામલે દબાણ નહીં કરી શકે.

શિક્ષણમંત્રી ભૂપેન્દ્રસિંહ ચૂડાસમાએ જણાવ્યું કે, ચાલુ વર્ષની ફીમાં કોઈપણ જાતનો વધારો કરવામાં આવશે નહીં. 15 ઓગસ્ટ સુધી રાજ્યની શાળાઓ બંધ રહેશે. ત્રિમાસિક ફી ભરવા માટે સ્કૂલ સંચાલકો દબાણ કરી શકશે નહીં. ત્રિમાસિકને બદલે માસિક ફી ભરી શકાશે. કોરોના કાળમાં ફી લેવા માટે દબાણ કરાશે તો ચલાવી નહીં લેવાય અને શાળા સામે કાર્યવાહી કરવામાં આવશે.જો કોઈ ફરિયાદ કરશે તો તેના આધારે શિક્ષણ વિભાગ દ્વારા કાર્યવાહી કરવામાં આવશે. આ ઉપરાંત વાલીઓ માસિક હપ્તાથી ફી ભરી શકશે.સ્ટેશનરી અને ટ્રાન્સપોર્ટેશન સહિનાં ચાર્જ માગશે તો કાર્યવાહી કરવામાં આવશે. સપ્ટેમ્બર મહિનાની ફી ભરશો તો ચાલશે.યુનિફોર્મ અને પુસ્તકો માટે પણ પૈસા નહીં લઈ શકે.  
ખાનગી શાળાઓ પર નજર રાખવામાં આવશે.

https://m.dailyhunt.in/news/india/gujarati/abtak-epaper-abtak/shikshanamantrino+mahatvano+nirnay+skul+sanchalako+phi+mate+nahi+karishake+daban-newsid-n191112050;Skp

शायद मेरा लिखा सर ने पढ़ा होगा।

09925044848

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