Thursday, September 6, 2018

बदलाव जरूरी हैं।


हम बदल सकते हैं।
हम बदलाव चाहते हैं।
हमे बदलने के लिए खुद काम करना हैं। हमारे विचार से कुछ बदलाव सम्भव नहीं हैं। उस के लिए हमे खुद करके दिखाना पड़ता हैं।

कुछ बाते ऐसी होती हैं जिस को समय जवाब देता हैं। दुनिया बदल ने का सबसे अच्छा और पहला काम ये हैं कि अपने आपको बदला जाए। हमे अपना बदलाव कहा करना हैं, वो खुद हम नहीं बता पाएंगे। अगर हम कोई कुछ कहेगा तो सबसे पहले हमें ये तय करना हैं कि हमे वो कहने वाला कोंन हैं। क्यो की हो सकता हैं, सामने वाली व्यक्ति सिर्फ ओपिनियन देती हो।

अगर कोई बदलाव लाना हैं तो अपने काम के लिए लाना आवश्यक हैं। में महाराष्ट्र में था। मेरे एक दोस्त के साथ हमने रात को एक बजे खाना खाया। अब वो दोस्त हैं कि मुजे रोज कहते हैं,चलो रात को खाना खाते हैं,गुमते हैं। मगर उन्हें कोन समजाये की वो गलती थी,अब नहीं दोहराई जाएगी। हा, ये सच हैं कि जब जब वो मुजे गुमने ओर खाने को कहते हैं,में उन्हें समजा नहीं पाता हु ओर मना भी नहीं कर पाता हूँ। क्यो...की उनके साथ मेने देर रात को गुमना ओर खाना खाया हैं। अब उस दोस्त के साथ मुजे मेरे में सुधार करना होगा कि मेरे विचार दर्शाने होंगे वो मुजे ही तय करना हैं। और तब ही बदलाव आएगा।

हम अपने आप से काम करके ही बदलाव ला सकते हैं।हमारे विचार या सोच उतनी महत्वपूर्ण नहीं हैं।क्यो की आप जो सोचते हैं,वही सामने वाला सोचे ये जरूरी नहीं हैं। में अगर आज रात को 12 बजे तक आप से बात करूंगा तो आप फिरसे किसी ओर दिन  ऐसे देर रात मुझसे बात करोगे। अब यहाँ मेरा ओपिनियन ये हैं कि मुजे जवाब तो देना ही पड़ेगा। जवाब देना भी चाहिए मगर समय देखे। जब कोई हमारा खास होता है तो ठीक हैं। वरना रात को मैसेज या कोल का जवाब देने से ओपिनियन ऐ बनता हैं कि वो आप के लिए महत्वपूर्ण हैं। शायद आप के लिए उनका इतना महत्व न हो, सामने वाला अब रोज ऐसा करेगा। दो दिन पहले एक जवाब देने से अब रोज का जमेला होता हैं। जैसे मुजे एक बार खाने के बाद अब रोज गुमने ओर खाने के न्योते मिलते हैं।
मेरे एक दोस्त कहती हैं।
में जो भी करू,मगर में मेरी जिम्मेदारी नहीं भूलूंगी। मेरी जिम्मेदारी से ही में जुडी रहूँगी। ठीक हैं,सही निर्णय हैं मगर मेरा मानना हैं कि अपने बारे में लोग क्या बात करें और क्या नहीं वो हमें हमारे से ही गोशित करना हैं। सिर्फ हमारे ओपिनियन से कुछ नहीं होगा।


@#@
में तुम से प्यार करता हु।
मेने इस बात के लिए अपने आपको बदल कर देखा हैं। में प्यार करता हु वो मेरा ओपिनियन नहीं,मगर मेरा प्यार  दूसरे प्यार करने वालो के लिए उदाहरण है। ओर तब ही अपने विचार और आचार का फर्क सामने आता हैं।
Post a Comment