Wednesday, July 11, 2018

ऐसा भी होता हैं।


आज कल शिक्षा में बहोत सारी नई बाते जुड़ चुकी हैं।आजकल शिक्षा व्यवस्था इतनी तेजी से बदल रही हैं।मगर में आप को कुछ नई बात बताने जा रहा हूँ।क्या हमें एडमिशन लेने में मुश्किल हैं।कोई कहेगा हा तो कोई कहेगा ना।
अगर हम एडमिशन किसी शहर में लेना हैं तो ये मुश्किल हैं।
अब पढ़िए...

अमदावाद में एक स्कूल हैं।
आप कहेंगे तो तो महेगा होगा।प्ले ग्रुप में एडमिशन के लिए लाखों रुपया खर्च करना पड़ता होगा।
मगर यहाँ बात कुछ अलग हैं।सभी सुविधाओं के साथ चलने वाली स्कूल महंगी नही हैं।अनर्थकारी  शिक्षा व्यवस्था के नाम से चलने वाली स्कूल कुछ अलग हैं।अखिलभाई यहां के संचालक हैं।वो कहते हैं कि एडमिशन के लिए हम 15 दिन के  लिए बच्चो को साथ में रखते हैं।वैसे तो हम 15 दिन में बच्चों को समझ सकते हैं,खोज लेते हैं मगर सबसे अलग बात ये हैं कि यह एडमिशन के लिए जन्म कुंडली के चौथे ओर पाँचमें स्थान में विद्या ओर कला का स्थान हैं।अगर ये स्थान जन्म समय अलग हैं तो ही आपको एडमिशन मिलेगा।
यश,शिक्षा कला और संस्कार का दावा करने वाला ये शिक्षा संकुल आज भी जन्म पत्रिका की मदद से आगे एडमिशन देता हैं।बॉस की कलम ओर शाही से लिखने वाला बच्चा इसी स्कूल से होगा वो तय हैं।इस संकुल का फ्लोर गोबर से लीपा हुआ हैं।यहां गायो की सेवा और धार्मिक प्रतिकृति की झलक से ये संकुल कार्यरत हैं।
जितेंद्र नामक संसहलक हैं वो कहते हैं कि अगर कोई कहता हैं कि ऐसी शिक्षा से नोकरी नहीं मिलेगी ऐसा मानने वाले पेरेंट्स को सिलेबस बगैर स्कूल में पढ़ाने में विश्वास नहीं है तो उन्हें घर वापस भेजा जाता हैं।
इस स्कुल का एक बच्चा जो मेथ्स की कॉम्पिटिशन में वर्ल्ड चेम्पियन हैं।वो नेशनल चेम्पियन बन चुका हैं।संगीत,चित्र ओर ऐसी सभी स्किल के लिए यहाँ अच्छा वातावरण और आयोजन हैं।बच्चे यहाँ संस्कृत में चर्चा और संवाद करते हैं।यहां पड़ने वाले बच्चे सिर्फ दो या तीन महीने की तैयारी के बाद बोर्ड एक्जाम देते हैं और उतीर्ण हुए हैं।आप भी अमदावाद में हेमचंद्राचार्य गुरुकुल में जाये तो आप को आए सब सच में देखने को मिलेगा।

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ऐसी स्कूल होनी चाहिए।में सिर्फ इतना कहूंगा कि जन्म पत्रिका के विचार को छोड़कर सब चलता हैं।
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ગંદો માણસ