Tuesday, April 24, 2018

न हारो हिम्मत


मेरे एक दोस्त हैं।
उनका बेटा इस बार बारहवीं कक्षामें था।हमे उसे शुभकामना देने के लिए जाना था।हम उनके घर पहुंचे।वो बच्चा तो पढ़ाई में व्यस्त था।शुभकामना देने वाले उसे अंतिम दिनोंमें मिलकर उसके तैयारी का समय बिगड़ ते हैं।इसे शुभेच्छा नहीं कही जाती।
मेने पूछा उसकी तैयारी कैसी है,मम्मी जी बोलने लगी।अरे पिछले दो सालों से रोजाना बादाम का दूध पीता हैं।
में समज नहीं पाया कि उसके बचपन में उसके कॉन्सेप्ट क्लियर नहीं हुए होंगे तो वो रोजाना एक किलो भी बादाम खायेगा उसे याद नहीं रहेगा।
सीखी हुई चीज को याद रखने से नहीं उसके उपयोग करने से याद रहती हैं।याद रखे जब हमने बाइक या गाड़ी चलाना सिखाथा तब क्या हम मोबाइल के कॉन्टेक्ट में से फोन नंबर को खोज के लगा सकते थे।आज तो हम गाड़ी या बाइक चलाते मेसेज भी टाइप करते हैं।अगर इसे कोई कहेगा कि ये गाड़ी चलाना सिख गया हैं तो इसका मतलब उस ने गाड़ी सीखी।मोबाइल चलना आता था।अब दो अलग तरीको से काम को एक साथ करना कौशल्य माना जाता हैं।
फिर से बादाम की बात आते हैं...
किसी ने पोस्टर में लिखा हैं।सही बात हैं।हिरन घी नहीं खाता फिरभी घोड़े से आगे और तेज भागता हैं।
आप भी इस बातको माने।निपूणता प्राप्त करने के लिए बाह्य नहीं,अंदरूनी शक्ति चाहिए।बादाम बाह्य शक्ति हैं,कॉन्सेप्ट क्लियरिंग अंदरूनी विश्वास जगाता हैं।
हमे जो काम में सफक होना हैं,उस की अधिक से अधिक जानकारी हमारे पास होगी तो हमे बादाम खाने की कोई जरूरत नहीं हैं।


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में कभी हिम्मत नहीं हारा।
जब मेरी वर्ल्ड फेमस फ़िल्म लाइफ स्माइल बनी तब में मेरे जीवन में सबसे दुखी था।
चार्ली...

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एक चमत्कार