Tuesday, April 10, 2018

छोकु की कविता...


जब कोई रोता हैं,
कुछ न कुछ खोता हैं।

गम हो या हो फिकर,
निकलता हैं जब कोई रोता हैं।

कोंन नहीं रो रहा आज बाजार में,
जब कोई रोता हैं,वो चेन से सोता हैं।

-अशरफ 'छोकु'

एक युवा कवि हैं।हाल उनकी आयु शायद चालीस साल होगी।उत्तर प्रदेश के ईश मिजाजी 'छोकु' किए प्रसिद्ध रचना हैं।

जब कोई रोता हैं,
कुछ न कुछ खोता हैं।

या वो अपनी गलती खोदता हैं,याने उसकी गलती का स्वीकार किया हैं।या वो अपनी फिक्र या फिर खुदकी कोई ऐसी बात छोड़ता हैं।शायद वो अपनी जीवन की किसी बात का अहसास करवाने के लिए रो रहा हैं,संभव हैं।मगर रोने से व्यक्ति कुछ खोता हैं।


गम हो या हो फिकर,
निकलता हैं जब कोई रोता हैं।

रोने से गम या फिकर निकलती हैं।दिल साफ और मन हलका होता हैं।कुछ व्यक्ति सहज से रो लेते हैं।किसी भूखे को खाते देखकर भी सहज व्यक्ति रो सकती हैं।मगर ऐसी व्यक्ति जो स्वयं किसी के लिए प्रेरक ओर आवश्यक हो उसके रोने से कुछ तो ऐसा हैं ,की वो जो रो रहे हैं।रोने के लिए कुछ ऐसा भी नहीं 'कुछ ऐसा अपने साथ हुआ हैं,रोना आता हैं,मगर रोनेके बाद दिल साफ हो जाता हैं।

कोंन नहीं रो रहा आज बाजार में,
जब कोई रोता हैं,वो चेन से सोता हैं।

सब लोग आज रोते हैं,किसी का दिखता हूं।किसी का दो चार पांच साल के बाद दिखेगा।कोई सामने रोया हैं,कोई साथ में रोयेगा।कहते हैं कि जीवन में जो साथ चलेगा वो जगडेगा,मारेगा,रोयेगा ओर रुलाएगा।मगर साथ चलेगा।ऐसे लोगो को कभी नहीं भूलना चाहिए कि जिन्हों ने तुम्हारे लिए कभी वख्त नहीं देखा हो।आज वो नाखुश हैं,तो मारेंगे ओर चिल्लायेंगे।मगर जब वो आपके साथ हैं तो आप को रोने में भी लिज्जत मिलेगी।समय का सदुपयोग करना आवश्यक हैं,24 घंटे सबके लिए समान हैं,उसमें से अपने ओर अपनो के लिए हमे समय का आयोजन करना पड़ता हैं।अगर वो हो पाया तो भविष्य संवर सकता हैं।रोना ओर जीना साथ साथ हैं,तो चलो पहले जी ने का प्लान करते हैं।

@#@

मुजे रोना पसंद हैं।
क्यो की वो मेरा रोना हैं।
क्यो किसी के बारे में कुछ जानु या कहूं।मुजे मेरा जीवन पसंद हैं।क्यो की वो रोने से शुरू हुआ हैं।मगर में रोते हुए मरूँगा नहीं।

@ओशो...
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