Sunday, March 4, 2018

Smile & स्माइल...

एक ऐसा शब्द हैं जिसका मतलब हमे मालूम ही हैं।हमारी वजह से कभी किसी को दुःख पहुंचता हैं।कभी हमारे कारण किसी को खुशिका अहसास होता हैं।
कुछ साल पहले सभी के चहरे पर स्माइल दिखे ऐसी सोच डॉ अनिल गुप्ता ने रखी।बात तो छोटी थी मगर उसे अमल करना मुश्किल था।
धीरे धीरे बात बढ़ती गई।अमदावाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ओर वाघबक़री चाय का सहयोग मिला।सहयोग मिला मगर अब काम क्या करना था वो भी तय करना था।
आईआईएम अमदावाद के सामने वाले ब्रिज के नीचे की जगह को कॉर्पोरेशन से लिया गया।सृष्टि ओर स्वयं अनिल गुप्ता के मार्गदर्शन में इसे स्कूल के योग्य बनाया गया।
यहाँ आइसोलेटेड विस्तार से बच्चे  आने लगे।चेतन,सागर,हिरल ओर अन्य साथियों ने इस के लिए काम किया।बच्चे आने लगे,बच्चे पढ़े इस लिए iim ओर अन्य विद्यार्थीओने जिम्मेदारी ली।को कब पढ़ाने आएगा,क्या पढ़ायेगा आए सारी तैयारी हो चुकी थी।डॉ अनिल गुप्ता चाहते थे कि यहां बच्चे आये और अपनी शिक्षा को अच्छे से प्राप्त करे।
बस,सारी टीम उसमें जुड़ी।हमने इस सेंटर के लिए बुक्स इकठ्ठा की।सारे गुजरात और बाहर से हमने किताबो को भेटमें लिया।करीब करीब 3 हजार किताबे जो बच्चे इस्तमाल कर पाए वैसी हमने इकठ्ठा की।
कुछ दिनों पहले मेरा स्माइल सेंटर में जाना हुआ।में ओर चेतन दोनों साथ थे।बच्चो से बात की,उनकी बातें सुनी।एक छोटा विचार आज आईआईएम के सामने खड़े होके अपना भविष्य बना रहे हैं।

Thanks

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#IIM के स्टूडेंट
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