Wednesday, March 7, 2018

कहा न जाये,सहा न जाये...

कुछ ऐसा होता हैं।
कुछ ऐसा नहीं भी होता हैं।
पिछले एक महीने से अधिक समय हुआ।समजो भारत भ्रमण ओर गुजरात भ्रमण कर रहा हूँ।वैसे तो अकेले रहने की आदत नहीं हैं।कहिके की मुजे डर लगता हैं।कई बार गया हूँ।अकेले रहने का भी बहोत होता हैं।
जब में अकेला होता हूं।अकेला पन महसूस करता हूँ
कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो ज्यादातर अकेले रहते हैं।जो अकेले हैं वो ही अकेलेपन का अहसास समज सकते हैं।
जब हम अकेले होते हैं।सारे दिन या सारा समय अकेले नहीं होते हैं।अकेले होने के वख्त हम जो करते हैं वो दिन में शायद नहीं कर सकते।
अगर मेरे पास संजय जैसी दृष्टि होती तो में डोर से सब कुछ देख सकता।थोड़ी देर पहले हम बात करते हो,अचानक कोई आ जाये या,कुछ ऐसा हो तो हम बात नहीं करेंगे या,अपना जो भी काम करते होंगे उसे बदलते हैं,बदलना पड़ता हैं।
में सुबह 5 बजे बिस्तर को छोड़ देता हूँ।मेरे लिए सुबह तब हैं जब में बिस्तर छोड़ू।अगर मुजे कोई कहता हैं कि मुजे सुबह उठने हैं।उस वख्त मेरे लिए सबसे पहली बात ये होती हैं कि में जिन्हें उठा रहा हूँ ,वो पहले अपना बिस्तर छोड़े।
एक बार बिस्तर से उठ ने के बाद क्या दूसरे काम या बाते नहीं हो सकती?सुबह का समय आज के काम को तय करने और शांति से आगे बढ़ने के किए इस्तमाल करना चाहिए।
सारी रात आराम करने के बाद,सुबह खुशनुमा होती हैं।अगर रातभर जागे भी हैं तो सबसे पहले अपने बिस्तर को ही छोड़ना चाहिए।
जब हम अकेले होते हैं तो सुबह सुबह सबकुछ याद आता हैं।उस वख्त अपने आप हमें तय करना हैं कि हम आज क्या करेंगे।एक सवाल अपने आपसे पूछना हैं।आज का दिन कहि गलत तो निकल नहीं रहा हैं।क्या हमारे किसी छोटेसे चुटकले से सारा दिन सुधरता या बिगड़ता तो नहीं हैं।ये तय करने की जिम्मेदारी हमारी हैं।जो भी हैं,उसे साथ लेकर चलना हैं।अब उसे प्यार से सुधारेंगे एमजीआर अपने शरीर या मन को अस्वस्थ नहीं करेंगे।
मेने बहोत बार कहा हैं।मेने बहोत बार लिखा भी हैं।जो हैं इसे देखो,जो होगा उसे देखलेंगे।कुछ घण्टो पहले जो व्यक्ति बात कर रहाथा, कल रात तक जो भी हुआ,आज एकदम से नहीं बदलेगा।कुछ समस्या हो सकती हैं।कुछ सवाल हो सकते हैं,मगर हमे इसे धीरे से साइड करना हैं,ओर अपनी मंजिल को पाना हैं।

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खुशिया बाटने से बढ़ती हैं।
समस्या सामने से आती हैं।
हमे समस्या को बुलाना नहीं हैं।
हमे खुशिया बढ़ानी है,हम ही बढ़ा पाएंगे।
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