Saturday, December 2, 2017

We can...?



जो है उसे देखो,
जो होगा उसे देखलेंगे।

मेरे दोस्त ने आज मुजे ये संदेश दिया।हररोज मुजे दोस्त व्हाट्स एप या अन्य व्यवस्था के माध्यम से संदेश देते हैं।इस संदेश के पीछे उन्होंने लिखा था की इन दो लाइन पर में लिखू।
मेरा लिखना एकदम सरल और सहज मुद्दों पर होता हैं।ये ऊपर वाली बात तो एकदम से अलग थी।
मेण्य उसे दो बार पढा।जो हैं इसे देखो।ये वर्तमान में जीने की बात हैं।में आप को दो उदाहरण देता हूं।

जो हैं उसे देखो... 
मेरे एक दोस्त।वो शादी से परत आ रहै थे।वहां से वो गाड़ी में बेठे।कुछ आगे चलते गाड़ी में पंक्चर हो गया।उनके  पास दो विकल्प थे।एक वो दूसरी गाडीमें चला जाय।उनकी नियत  प्रगति को पाने के लिए आगे बढ़ते रहै।उनका दूसरा रास्ता था वे उस पंचर वाली गाड़ी के साथ खड़े रहें।वो व्यक्ति गाड़ी वाले के साथ खड़े रहे।उन्होंने  टायर चेंज किया और प्रगति की ओर बढ़े।
किसी के साथ कुछ समय चलने के बाद अगर कोई दिक्कत हैं तो उसे सुधारनी चाहिए,नहीं कि उसे छोड़ देना चाहिए।
एक प्रसिद्ध कहानी हैं।एक व्यक्ति ने आश्रम बनाया।
यह व्यक्ति सदैव सबको सहयोग करता था।उस के सहयोग से बहोत लोग कुछ पा रहे थे,पाने की आस में जुड़ रहे थे।व्यक्ति अपने आपमें विशेष होने का लोग कहते थे।लोग इस आश्रम से या व्यक्ति से जुड़ ते जा रहे थे।एक दिन की बात हैं।अपने आश्रम से सभी काम निपटा के सभी लोग जा रहे थे।अंत में आश्रम की वो व्यक्ति ओर उनके एक साथी रुके।दोनों एक ही काम कर रहे थे,जिस बजह से किसी को जल्दी जाने का मौका भी नहीं था।दोनों व्यक्ति आश्रम में काम को प्राधान्य देते हुए उसे निपटाकर बहार निकल।अब हमारी दूसरी कहानी शुरू होगी।
वो व्यक्तिभी आश्रम से निकले।साथ में उनसे जुड़े साथी भी थे।दोनों आश्रम के बाहर आते दिखाते थे।किसी गाड़ी को देखकर व्यक्ति ने हाथ उठाया।दोनों को गाड़ी में बिठाया गया।दोनों गाडीमें बैठे ही थे कि गाड़ी ने शुरू होने से मना कर दिया।आधे घंटे तक इस के पीछे श्रमनकरने के बादभी गाड़ी शुरू नहीं हुई।दोनों को था कि अगर गाड़ी चालू हो जाती तो मंजिल पा लेते।अब ...!गाड़ी से उतर के दोनों कुछ दूर गए।दोनों गाड़ी को ओर परस्पर एक दूसरे को देखते हैं।कहते हैं ना आश हैं वहाँ राह हैं।क्या मालूम क्या हुआ कि थोड़ी देर में दोनों वापस आये।गाड़ी में बैठे।सिर्फ मैन को मनाने के लिए गाड़ी को शुरू करने के लिए दोनों आश्रमवासी ने गाड़ी वाले को कहा।गाड़ी थोड़ी देर के बाद शुरू हो गई।
अब दूसरी वाली बात आती हैं।मगर उस से पहले बात बनती हैं कि जो हैं उसे देखो।।।और उस को सही भाव से जो अच्छा हैं वो ही हुआ हैं ऐसा समज  के जुड़के रहने वाले सभी सिद्धि को प्राप्त करते हैं।गाड़ी बिगड़ने के बाद भी उस के साथ जुड़ा रहना वो तो जो हैं उसे देखो,ओर जो तकलीफ हुई या गाड़ी शुरू करने के तक जो श्रम हैं उसे 'जो होगा उसे देख लेंगे...'वाली बात से जुड़ जाता हैं।
में कहूंगा कि हर जवाबदेही को निभाते हुए जो हैं उसे देखो,ओर जो होगा उसे देखलेंगे वाले बोधन को जीवन के हर मोड़ पर भी हम चिपका के देख सकते हैं।समज के अमल करके कुछ प्राप्त कर सकते हैं।
गाड़ी हैं तो पंक्चर होगा,गाड़ी हैं तो बिगड़ेगी मगर जों गाड़ी लेके निकले हैं उसे कभी नही छोड़ेंगे।धीरे धीरे मगर गति को बनाये रखेंगे।

#we can मुमकिन हैं...!
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