Sunday, October 1, 2017

में रावण हूँ...

में राम नहीं,रावण बनाना पसंद करूँगा।एक विद्वान और शक्ति के उपासक थे रावण।जिन्हें हम आजभी जलाते हैं।एक राजा जिसने किसीके कहने पर आपनी बीबी को निकाल दिया।अरे,बीबी को पूछते की क्या सही हैं,क्या गलत।ऐसे राजा की हम पूजा करते हैं जो अपनी सगर्भा बीबी को छोड़ते हैं।आज तक चीर हरण करने वाले दुर्योधन को किसीने कहीं भी जलाया हैं?

435 दिन तक सीता रावण के पास थी।रावण ने उसे छुआभी नहीं।रावण पंडित था।अभिमानी हो सकता हैं।उसमें भक्ति थी तो हिमालय उखाड़ दिया।उसमें अभिमान आया तो वो अंगद का पेरभी न हिला पाया।में महापंडित रावण को पसंद करूँगा।मेने ऊनको आज से नही,बचपन से आदर्श माना है।

मेरे एक करीबी दोस्त हैं।आज हम एक दुसरे से बात नहीं करते या नहीं करना चाहते।कुछ साल ऐसेही गुजरेंगे।हा, एक सामाजिक तौर पे प्रतिष्ठित हैं।मुजे मालूम हैं वहाँ तक वो भी रावण के करीब हैं।वो भी रावण को सन्मान देते हैं।मगर उनके पास राम के भी गुण हैं।सिर्फ सुनी हुई बात पे यकीन करते हैं।करने के लिए कारण भी होंगे।आज बात ये हैं कि रावण इस लिए की उन्होंने कोई गलती दूसरी बार नहीं की,एक बार की गलती कोई भी माफ करता हैं।मगर गलती फिरसे न हो तो।रावण भी इस बात को मानते थे।एक समय की मेरी गलती से मैने कुछ छोटे विचारक को मेरी टीम से दूर होते देखा हैं।में उन बच्चों से फिरसे जुड़ना चाहूंगा जो आज मेरे साथ नहीं हैं।मेरे पास नहीं हैं।मेरे पास उन बच्चों के लिए आयोजन हैं मगर बच्चे नहीं हैं।मुजे भी विश्वास हैं कि मेने तय किये हैं वो बच्चे फिरसे मुझसे जुड़ेंगे।क्या कोई महत्वपूर्ण क्रिकेट मेचमें कोई एक खिलाड़ी एक गलती से रनआउट होता हैं तो क्या उसे दूसरी बार नहीं खिलाना सही हैं।
किसीने कहा हैं...

में राम नहीं तो सीता कहासे लाउ।


में गलती का स्वीकार करूँ,मगर में तो कभी गलत होही नहीं सकता।ऐसी सोच रखने वाले गलती करते हैं और अपने आप को राम के सांजेमें डाल के मर्यादा का नाम देते हैं।मर्यादा तो रावण ने भी निभाई थी।मगर,जो जीतेगा वोही इतिहासमे अमर होता हैं।में अमर होना नहीं चाहता,क्योकि में राम बनना नहीं चाहता।

मुजे यकीन हैं कि दुर्योधन,शकुनि को छोड़ने वाले ये लोग रावण को जला रहे हैं।ऐसे लोग ही एक दिन मुजे भूल जाएंगे।और मुजे कोई भूले वोभी मुजे पसंद नहीं सो में रावण बनके ही मरना चाहूंगा।में हर साल जलना चाहूंगा।में रावण बनना चाहुगा।में रावण बनूँगा।
रावण के पास सोना था।पूरी लंका सोनेकी थी।रावण सोने में सुगंध डालना चाहता था।रावण मंदिर में से दुर्गंध दूर करना चाहता था।आज भी सुगंधित सोना नहीं मिलता।नहीं बना हैं।शराब में से गंध भी नहीं दूर हो पाई।रावण अपनी गलती को समझता ओर सुधरता।में भी समझता हूं और सुधारने का प्रयत्न करूँगा।
में ब्राह्मण हूं।और ब्राह्मन जैसा बनुगा।में राम की पूजा करूँगा मगर रावण बनुगा।मेरे जीवन में एक गलती दूसरी बार नहीं करूंगा,में रावण बनुगा।रावण पंडित था।उसके पास पुष्पक था।वो विज्ञान और टेक्नोलॉजी के उपयकर्ता थे।वो 32 कलामें निपुण थे।में भी निपुण होना चाहूंगा,में रावण बनना चाहूंगा।

में राम की पूजा करूँगा,मगर रावण बनना चाहूंगा।





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