Wednesday, October 17, 2018

मेरे रंग मेरे सपने...


मेरे सपने,मेरे अपने।
आज तक बहोत सपने देखे हैं।बहोत सारे सपने यरे हुए हैं। जो मिजे मिला हैं,उसे पाने को लोग तरसते हैं। आज भी में उसे महसूस करता हूँ। आज में आप को मेरे ऐसे ही एक ख्वाब की बात करूंगा। ये ख्वाब वैसे मेरा हैं मगर बहोत सारे साथियो ने उसे पूरा करने में सहयोग रहा हैं। बहोत सारे साथी आज भी जुड़े हुए हैं। कुछ छूट गए कुछ को छोड़ना पड़ा। कुछ लोगो ने मुजे भी रिजेक्ट किया।मगर वो ख्वाब के करीब में पहुंचा हूँ।18 साल के संपर्क ओर बच्चो से सरोकार के कारण आज हम ये कर पाए हैं।

7रंगी स्किल फाउंडेशन जो आज से सात साल से कार्यरत हैं।राज्य और देश के कई हिस्सों में इस फाउंडेशन ने शिक्षा के लिए काम किया हैं। आईआईएम के साथ मिलकर हमने नेपाल और बांग्लादेश के अध्यापको के साथ काम किया। हमे ओर उन्हें सीखने को मिला। 7 रंगी क्या हैं...?

जीवन हो विचार...
अच्छे होने चाहिए। सुख दुख,क्रोध, गम ओर खुशी।हर एक भाव के लिए एक रंग हैं।कहते हैं मूल तह 3 रंग हैं।
रेड
ब्लू
ओर
ग्रीन

इन तीन रंग में से कोई भी रंग बन सकता हैं। अब 7 रंगी तो मेघ धनुष में दिखाई देते हैं। उन सैट रंग को हम जा...नी...वा...ली...पी...ना...रा...के नाम से जानते हैं।हमने इस रंगों के पहले अक्षर को लेकर कुछ नए नाम दिए हैं। जैसे

जा: व्यक्तिगत रूप में करेगा(गुजराती में कहते हैं जाते करे)
नी: निखारेंगे
वा: वाद संवाद
ली: लीन रहेंगे(ध्यान मग्न रहेंगे)
पी: पिछाने गे...
ना:नाटक या अभिनय
रा: राग रागिनी संगीत


ऐसे स्किल में बच्चों को खोजना ओर उन्हें प्रस्थापित करने के लिए एक फाउंडेशन तैयार किया गया हैं।आज तक ये फाउंडेशन उन फॉर्मल था,उसे अब कुछ दिनों में एक रजिस्टर्ड फाउंडेशन के तौर पे तैयार करने जा रहे हैं। आज पूरे देश के प्रतिनिधि को होंगे और उन्हें उन के राज्य में को सपोर्ट करेगा उसका मामला तय होने के अंतिम पड़ाव में हैं।

आप भी जुड़िये ओर आगे सहयोग भी देते रहिए।छोटे बच्चे हमारी राष्ट्र की पहचान हैं।विश्व में हमारे देश की पहचान देने के लिए इस मिशन में आप अवश्य जुड़े।

सरकुम:
क्या होगा मालूम नहीं।
कैसे होगा,ओर क्यो  पता नहीं।
जो भी होगा, जैसे होगा,मेरा होगा अच्छा होगा।
आज को देखा हैं, कल को नहीं, सब जुठ हैं यही सही।
कल जो होगा ,देख लेंगे।जो होगा अच्छा होगा बुरा नहीं।

Tuesday, October 16, 2018

मेरा होंसला...

वर्ष 2018 में गांधी बापू को 150 साल हुए। सारी दुनियामें इस महात्मा के दिन को अलग अलग तरीको से मनाया गया। हमारे देश मेम इस महानुभव की जानमा तिथिको दो साल तक मनाया जाएगा।
बापू के नाम से हैं।
कोई विरोध करने का सवाल नहीं हैं। GCERT के द्वारा गांधी गाथा के नाम से एक सीरीज का रिकॉर्डिग हो रहा हैं। हमारे राज्य के विशेष व्यक्तो उस  श्रेणी में गांधीजी से जुड़ी बातें ओर अपना दृष्टिकोण रखते हैं। ये सारी सीरीज दूरदर्शन में प्रसारित होगी।
GcERT से इसे दूरवर्ती के माध्यम से  मा. विनायगिरी गोसाई सर के मार्गदर्शन से ये कार्यक्रम तैयार होगा। श्रीमती अमीबहन जोशी को.ऑर्डिनेटबकर रही है 
सृष्टि के संयोजक, भारत के राष्ट्रपति के पूर्व सलाहकार ओर आईआईएम अमदावाद के पूर्व अध्यापक ओर पद्मश्री अनिल गुप्ता जी ने आज विविध विषय के ऊपर अपने विचार रखे। इस कार्यक्रम में जुड़ने के लिए मुजे GCERT ने मौका दिया। आज हमने पूरा दिन ये कार्य किया और जैसे संतोष हुआ।
आज दोपहर के बाद BISAG स्टूडियो में ये रिकॉर्डिग सम्पन हुआ। दूसरी तरफ गूजरात आयोजन पंच के पूर्व उपाध्यक्ष ओर प्रसिद्ध पत्रकार एवं साहित्यकार विष्णु पंड्या सर का भी एक अभिनव वक्तव्य रिकॉर्ड किया गया। मुजे खुशी हैं कि GCERT ने मुजे इस काम मे जिदने का अवसर दिया। एक साथ 5 एपिसोड का रिकॉर्डिग हुआ। ये बहोत बड़ा काम हैं। एक दिन में 5 एपिसोड कोई छोटी बात नहीं हैं।


सरकुम:


शिक्षामें गांधी गाथा।
अद्भूद विषय ओर अद्भुत वक्ता।
मेरे मार्गदर्शक ओर प्रेरक मेरे नव विचारो को मान्यता देने वाली 'सरकार..'
आप से इतना ही आदर करता रहूंगा,सीखता रहूँगा।




Monday, October 15, 2018

नजर ओर नजरिया...


प्यार करते हैं हम तुम्हे इतना,
दो आंखे तो क्या, दो जहां में समाए न इतना।


कुछ दिन ऐसे होते हैं।
जहां हर तरफ से खुशिया सामने से आती हैं।
कुछ वख्त ऐसा भी आता हैं कि खुशिया तो दूर खाना पीना भी हराम हो जाता हैं। ऐसा इस किए होता हैं कि हम अधिक आस लगाए बैठे होते हैं। कुछ बाते ऐसी होती हैं जिसमे आस से ज्यादा विश्वास होता हैं। विश्वास अगर सच्चाई के साथ हैं तो ठीक हैं। मगर अधूरी जानकारी के साथ आप ने विश्वास को जोड़ा हैं तो आप को इसका जवाब समय देगा।

समय आने पर हमें हकीकत का पता चलता हैं,ओर तब जाकर बहोत देर हो चुकी होती हैं। मगर उसका अफसोस करने से कोई फायदा नहीं हैं। जब संभाल लेने की बात थी अपने आप जो न संभाल पाए अब पछताए क्या होवत हैं जब चिड़िया चूब गई खेत। 
नजर ओर नजरिये का सवाल हैं।यहां किसी लयर को समझने वाले ने ताश के पत्तो में से love लिख दिया हैं। अगर कुछ सही हैं तो उसे सराहो ओर अगर गलत हैं तो उसमें सुधार करो। छोड़ने ओर तोड़ने के अलावा और भी जीबन में लक्ष होने चाहिए।

सरकुम:

जो कुछ था, तेरा न था।
अब जो कुछ हैं सिर्फ तेरा हैं।
रहमो करम की बात यही,
तू साथ में होते तेरा संगाथ नहीं।

#अशरफ छोकु

Sunday, October 14, 2018

जीवन के रंग

जीवन के रंग।
हमे पसंद हो या ना पसंद हो। रंग हमारे जीवन में जुड़ेही होते हैं। हमारे जीवन मे कभी खुशी या  कभी गम के रंग बिखरे होते हैं। कभी खुशी के रंगों का जैसे तालाब होता हैं।
कुछ लोग सालो तक नहीं भुलाये जाते। कुछ लोग पल में याद आते हैं। कुछ को पलभर याद करने से जैसे दिन सुधर या बीगड़ सकता हैं।

कुछ दिनों पहले की बात हैं।

जमाना भले बदले मगर ध्येय नहीं बदलना चाहिए। कुछ कम लोग होते हैं जो अपने इरादों को कभी नहीं छुपाते। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी स्थिति और व्यबस्था के आगे कुछ कर नहीं सकते। 

आज मेरी व्यवस्था ये हैं कि में जहाँ हु मुजे वहाँ रहना नहीं हैं। जहाँ पहुंचना हैं वहाँ तक पहुंचने के लिए ओर भी समय लग सकता हैं। मुजे उस समय का इंतजार रहेगा जब मैने जो चाहा हैं, वैसा तब होगा जब मेरी सोचको में स्थापित हुई देखूंगा।

भिन्न भिन्न रंग जीवन मे न आये तो जीवन का चित्र सुंदर नहीं बनता। कभी प्यार, कभी सच्चाई, कभी सहजता,कभी ध्येय दिखाने का तरीका ओर कभी कभी सब समज ते हुए भी समजदारी न होने जैसा बर्ताव करना।

जीवन में ऐसे रंग ही जीवन को खूबसूरत बनाते हैं। वैसे तो 3 रंगों से दुनिया चलती हैं।उन 3 रंगों में ही सारे रंग का निर्माण होता हैं।जो 3 रंग सारे रंग बनाते हैं उनकी पहचान भी अलग से हैं।

रेड:  शौर्यता,क्रांति ओर क्रोध
यलो: आलस,गभीरता ओर ताजगी
नीला: गहराई,विशालता ओर गभीरता


इन तीन रंगों से ही सारे रंग बनते हैं।इसका मतलब ये हुआ कि शौर्यता,क्रांति ओर क्रोध के साथ आलस,गंभीरता ओर ताजगी
 के अलावा गहराई,विशालता ओर गंभीरता ऐसे क्षेत्र हैं जिससे जीवन चलता हैं।

अगर आपको सारे रंग पसंद हैं इसका मतलब आप के जीबन में वो तीन रंग है और आप उसे भी उतना ही प्यार करते हैं।


सरकुम:

रंग
मेरे रंग
जीवन के रंग
जीवन के संग

जो होता हैं, रंग में दिखाया जाता हैं। जो दिखाया जाता हैं, उसे समजाया नहीं जाता। जीवन कुदरत के रंगों से चले तो जीवन का चित्र खूबसूरत होगा।

एक अद्भुत कलाकार: मोरे

कुछ दिनों पहले मेरा महाराष्ट्र के सोलापुर में जाना हुआ। अक्कलकोट की एक कॉंफ़र्न्स में मुजे वक्तव्य देना था। मेरे वक्तव्य के बाद मुजे एक अध्यापक मील। उनका नाम सुनिल मोरे । वो  शिंदखेडा जिला धुलियामें प्रायमरी टीचर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। सर फौंडेशन के द्वारा आयोजित इस कॉन्फरन्स मे हिस्सा लेने अक्कलकोट वो आये थे। उन्होंने आर्ट अँड क्राफ्ट विषय के माध्यम मे एक हस्तशिल्पकार के जैसा काम किया हैं। उन्होंने नारियल का पेड जिसे कल्पवृक्ष बोला जाता है लेकीन इस कल्पवृक्ष का फल नारीयल हैं। जीससे खोबरा निकालके उसका छिलका बाहर कुडेदान मे कचरे मे कुछ काम का नही आता वैसे हम फेंक देते हैं। ये समजके फेक देते है की उससे कुछ नहीं होगा। मगर मोरे जी ने उसी छिलके से पिछले 10 सालोमे करीब 1000 क्राफ्ट आर्टिकल्स बनाये है ।जो पुरी तरह से केवल हात से और उनकी कल्पकता से बनाई हैं। मेरा मानना हैं कि वो अपनी बात अच्छे से लिझे तो उनके नाम पर भी कीर्तिमान बन सकते हैं।

संपर्क:

सुनिल मोरे, प्रा.शिक्षक
शिंदखेडा ता.शिंदखेडा जि.धुलिया (महाराष्ट्र)
मो.9604646100



सरकुम:

कलाकार कभी जुड़ता नहीं।
कलाकार हमेशा जुड़े रहता हैं।
वो नया सर्जन करता हैं,वो सर्जन हार न होते हुए भी वो सर्जक हैं।कुछ लोग ऐसे ही अद्भुत परिवर्तन लाने में सफल होते हैं। कोई परिबर्तन असम्भव नहीं हैं,अगर वो आप दिल से करना चाहते हैं।


Friday, October 12, 2018

अब ये नहीं दिखते...

पैसा फेंको तमाशा देखो।
दिल्ही का कुतुब मीनार देखो...
आप ने ये गाना सुना होगा,ये उस जमाने की बात हैं जब हमारे पास मनोरंजन के कुछ साधन नहीं थे। उस वख्त ये सब गाँव गाँव गुमते थे और एक पैसा 4 पैसा से 50 पैसे तक दिखाया जाता था।
आज तो ऐसी चीजें हमे मूजियम में देखने को मिलती हैं। ऐसी चीजें आज लुप्त हो रही हैं जैसे इंसानो में से पूंछ लुप्त हो गई हो। ये ऐसी कला थी जिस को लोग उस वख्त काम आती थी जब बारीश न होती हो और कोई काम न हो। इस खेल को देखने के लिए पैसा और अनाज या सब्जी के बदले भी ये फ़िल्म पट्टी देखने को मिलती थी।
आज तो टेक्नोलोजी के कारण ऐसी बहोत सारी कलाए मृतप्राय हैं। और इसे बचने की जिम्मेदारी के
हमे ही निभानी हैं।

सरकुम:
जो हैं उसे याद करेंगे।
जो कहा गया उसे भी याद रखेंगे।
कुछ भी हो,जैसा भी हो,नया सवेरा लाएंगे।

Thursday, October 11, 2018

सर सन्मान...आज मेरा कल आपका...


स्टेट इनोवेशन ऐंड रिसर्च फाउंडेशन, सोलापुर महाराष्ट्र के सर सन्मान में जाना हुआ। 2006 से ऐ फाउंडेशन महाराष्ट्र और देश के अन्य राज्यों के इनोवेशन को खोजने ओर प्रस्थापित करने में सक्रिय हैं। आईआईएम अमदावाद, सृष्टि इनोबेशन ओर हनी बी नेटवर्क से जुड़कर इस संस्थान ने अपना नाम राष्ट्रीय फलक पर फैलाने में सफलता हांसिल की हैं।
सोलापुर डिस्ट्रिक्ट के अक्कलकोट में नेशनल एज्युकेशन इनोबेशन कॉंफ़र्न्स का आयोजन हुआ। मुजे इस कॉंफ़र्न्स मे शामिल होने का अवसर प्राप्त हुआ।
सिद्धाराम जी मशाले और बाला साहब बाघ ओर राज्य के विविध जिल्ला आयोजको के द्वारा अक्कलकोट में भव्य कॉंफ़र्न्स संभव हुई।
मुजे सर सन्मान से सन्मानित किया गया। मेरे लिए गौरवपूर्ण बात हैं कि भारतमें सबसे पहला सर सन्मान मुजे प्राप्त हुआ हैं। आज से मुजे आप प्यार से सर भावेश पंड्या कह सकते हैं। इस यरे से सन्मान के लिए में सर फाउंडेशन का शुक्रिया अदा करता हूँ।


सरकुम:
2014 में डॉक्टर का सन्मान
2018 में आप के द्वारा सर सन्मान
2018 का सन्मान मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं। मेरे समग्र देश में शिक्षा से जुड़े 'सरकार के शिक्षक' द्वारा किये गए नवाचार के प्रतिनिधि बनना महत्व पूर्ण हैं। में नव विचारक भले नहीं हूं, में सरकार का मुलाजिम हूं, ओर मुजे उस पर गर्व हैं।