Thursday, February 27, 2020

स्कुल कैसे हो...



आज कल अब रॉड पे बड़े पोस्टर लगेंगे। हमारी स्कुल में इतना बड़ा केम्पस हैं। हम इंटर नॅशनल स्कुल हैं। हम ये करते है, वो करते हैं। कुछ लोग अपनी स्कुल को अलग दिखाते हैं। परमिशन गुजरात सरकार के नियमो से लेते है और पाठ्यक्रम हर सत्र के बाद बदलते हुए अपने आप को, अपनी स्कुल को अभिनव दिखाने का प्रयत्न करते हैं।

जैसे CBSC:

सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एज्युकेशन। इसका मतलब है कि सेकंडरी स्कूल ही CBSC हो सकती हैं।अगर ऐसा है तो कक्षा 1 से 5 को कोण CBSC कह सकता हैं। मगर पेरेंट्स कुछ नहीं देखते।

जैसे इंटरनॅशनल:

इंटर नॅशनल का सीधा मतलब है आंतर राष्ट्रीय। जो स्कुल अपने आप को इंटर नॅशनल स्कुल कहते है उन की अपने देश को छोड़ियो अपने शहर में भी दूसरी ब्रांच नहीं होती। मगर पेरेंट्स कुछ नहीं देखते।

जैसे जॉय फूल:

एप्रिल फूल जैसा ये शब्द पैरंट्स के लिए शायद यही अर्थ लेकर आता हैं। जहाँ बच्चो को उन की उम्र के अनुसार आनंद मिले ऐसा होना चाहिए। आनंद के साथ वो कुछ जानकारी से अवगत हो। मगर ऐसी स्कुल हो तो कोई बात नहीं, सिर्फ ऐसा नाम लिखकर पैसा लेते हैं। मगर पैरंट्स कुछ नहीं देखते।

जैसे ड्युअल लेंग्वेज:

बच्चा पचपन से दूसरी भाषा से अवगत हैं। उसे लिखने की जरूरत नहीं हैं। जिन बच्चों की मातृभाषा अलग हैं उन्हें भी इस स्कुल में एडमिशन लेते समय ड्युअल लेंग्वेज को प्रचारित किया जाता हैं।गुजरात में एक तरफ जहाँ अंग्रेजी माद्य्यम भी सफल नहीं हुए वहाँ ड्युअल लेगबेज याने दो भाषा में सीखना, ऐसा किसी ने देखा हैं? मगर हम उसे जाहेरात में देखते हैं। मगर पेरन्ट्स कुछ नहीं देखते।

जैसे अभिनव स्कुल:

नवतर आयोजन...
नवतर शैली या प्रकार...
नवतर शब्द या विचार...

इनोवेशन... स्किल...इवेल्यूएशन...एक्सीलेटर लर्निग, पीअर लर्निग के नाम से स्कुल चलते हैं। अगर कोई कहे की हमारे बच्चे इनोबेशन करेंगे या कर पाएंगे। पेरेंट्स खुश।अगर NIF की फिगर को देखा जाय तो 60 से 70000 बच्चो को मिलने के बाद 30 इनोबेटर्स मिलते हैं। क्या कोई ऐसी प्रचार या नाम लिखने वाली स्कुल में इतने बच्चे पढ़ते है? अगर हा, तो फिर से सवाल तो ये है कि 30 बच्चे पसंद होते हैं।NIF की स्थापना और उस के चयन के ख़ास टूल्स हैं। तो ऐसे नाम से स्कुल क्यों चलाये हैं। क्या गरीब बच्चों में इनोबेशन के विचार या स्किल नहीं होते? मेने आज तक 500 से अधिक वर्कशॉप बच्चो के साथ किए हैं। अगर हर वर्क शॉप में 50 बचसहे है तो उन 2500 से आज तक 3 बच्चे अपने इनोबेशन दे पाए हैं। ऐसे बच्चे होते है जिन्हें हम वातावरण दे सकते हैं । इस के लिए स्कुल की आवश्यकता नहीं हैं। स्किल याने समजीए की गाना। क्या हर व्यक्ति अच्छा गा पाती हैं? अगर नहीं तो स्किल स्कुल में पढ़ने वाला हर बच्चा गीत गाने में माहिर होना चाहिए।

ऐसी मानसिकता ही हमे खर्च करने पर मजबूर करती हैं। सुनिए ऐसी प्राइवेट स्कूल के सामने सरकारी स्कूल भी हैं।

जैसे NVND:

पंचमहाल में नवा नदिसर प्रायमरी स्कुल। जहाँ स्किल डेवलोपमेन्ट की सुविधा प्रदान होती हैं। भारत में एक अनोखा स्कुल हैं।यहाँ के बच्चे ड्रोन और रॉबर्ट बनाते हैं।

जैसे जूनागढ़ कन्या विद्यालय:

प्राइवेट स्कूल के सामने ये स्कुल आज खड़ा हैं।जो बस की ट्रांसपोर्ट की सुविधा देती हैं। यहाँ बच्चे रियल में जॉय फूल पढ़ते हैं। शिक्षा से जुडी क्वॉलिटी कें लिए उसे गुजरात में जाना जाता हैं।


शांति निकेतन,मोरबी:

एक बात देखो।
स्किल
इनोबेशन
एक्सीलेटर लर्निग


सब एक साथ देखने को मिलेगा। कोई दम्भ या आडंबर नहीं। बीएस, बच्चो की स्कुल और मनोरम्य नजारा। जहाँ प्राइवेट स्कूल को छोड़कर लोग यहाँ एडमिशन लेते हैं।

गमती निशाल:

जहाँ बच्चे सिर्फ अखबार से पढ़ते हैं। स्कुल के सभी बच्चों को पढ़ना लिखना आता है और वो सब news paper से होता हैं। चित्र,मूर्ती निर्माण, पपेट शो,कार्टून, संगीत में सभी बच्चे निपुण हैं। यहां का MR एक बच्चा अमित भांडवा भी ढोलक बजा सकता हैं। स्कुल में बच्चो से ज्यादा पेड़ हैं। रन में 100 से अधिक पेड़ हैं। जो स्किल बच्चो में है उस बजह से ये सम्भव हुआ हैं।

आज सरकारी स्कूल सभी सुविधा से सज्ज हैं। आप भी गलत प्रचार में न आकर नजदीकी सरकारी स्कूल में अपना प्रवेश प्राप्त करने की व्यवस्था करें। क्योंकि...


अधिक मेरिट वाले
अधिक अधिकार के साथ
अधिक सुविधा और सुश्रुषा के लिए सरकारी स्कुल में प्रवेश प्राप्त करें।


(कोई खानगी स्कुल वाले इस ब्लॉग पोस्ट के लिए, डराने या धमाका ने की कोशिश न करे ...)

Tuesday, February 25, 2020

अमेरिका में रूमा देवी का सन्मान...



न्यूयाॅर्क में भारतीय वाणिज्यिक दूतावास ने ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान की अध्यक्ष रूमा देवी जी को आमंत्रित कर सम्मानित किया जहां उन्होंने एक कार्यक्रम में अमेरिकन प्रतिनिधियों को संबोधित कर राजस्थान की शिल्प कलाओं के विकास पर वार्ता की। कौंसल जनरल आॅफ इंडिया के प्रमुख संदीप चक्रवर्ती ने इस दौरान उम्मीद जताई कि अमेरिका के हाई स्कुल व कालेज विद्यार्थी भारत में बाङमेर जाकर हमारे आर्ट ओर क्राफ्ट का अध्ययन करेंगे। जिसके फलस्वरूप अमेरिका के हाई स्कुल व कालेज अपने पाठ्यक्रमों में इसे शामिल कर पढा सकेंगे। कार्यक्रम में पर्यटन व शिक्षा के क्षेत्र से संबंधित प्रतिनिधि मंडल को संस्थान के सचिव विक्रम सिंह ने पावर प्रजेंटशन के माध्यम से बाङमेर व राजस्थान की विभिन्न सांस्कृतिक धरोहरों पर प्रस्तुतिकरण दिया गया।इस वख्त 7स्किल कीबोर्ड से मुझे जुड़ने का मौका मिला। वहीं मैंसाचुसेट्स स्टेट के नीमध शहर की पब्लिक लाइब्रेरी में राजस्थान की शिल्प कलाओं पर आयोजित कार्यशाला में जीवंत प्रदर्शन व नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोङने पर रूमा देवी का उदबोधन हुआ ।

न्यूयार्क में हुआ अभिनंदन समारोह

प्रवासी भारतीयों ने रूमा देवी के अमेरिका आगमन पर अभिनंदन व प्रीति भोज का आयोजन रखा जिसमें न्यूयाॅर्क व न्युजर्सी शहर से बङी संख्या में प्रवासीयों ने भाग लिया। इससे पूर्व वांशीगटन डीसी व वर्जीनिया में रूमा देवी का भव्य स्वागत हुआ। ज्ञातव्य है कि विश्व के विख्यात विश्व विद्यालय हार्वर्ड में स्पीकर के तौर पर आमंत्रित हो वहां अपना लेक्चर देने के उपरांत रूमा देवी अमेरिका प्रवास
के दौरान वहां विभिन्न प्रान्तो में आयोजित कार्यक्रमों में शिरकत कर 26 फरवरी को बाङमेर पहुंच रही हैं जहाँ स्थानीय लोगों द्वारा रखे सम्मान समारोह में अपने अनुभवों को स्थानीय हस्तशिल्पीयों के सम्मुख रखेंगी।

देखें, आगे क्या होता है।





वर्षों तक वन में घूम-घूम,
बाधा-विघ्नों को चूम-चूम,
सह धूप-घाम, पानी-पत्थर,
पांडव आये कुछ और निखर।
सौभाग्य न सब दिन सोता है,
देखें, आगे क्या होता है।

मैत्री की राह बताने को,
सबको सुमार्ग पर लाने को,
दुर्योधन को समझाने को,
भीषण विध्वंस बचाने को,
भगवान् हस्तिनापुर आये,
पांडव का संदेशा लाये।

कृष्ण की चेतावनी
‘दो न्याय अगर तो आधा दो,
पर, इसमें भी यदि बाधा हो,
तो दे दो केवल पाँच ग्राम,
रक्खो अपनी धरती तमाम।
हम वहीं खुशी से खायेंगे,
परिजन पर असि न उठायेंगे!

दुर्योधन वह भी दे ना सका,
आशीष समाज की ले न सका,
उलटे, हरि को बाँधने चला,
जो था असाध्य, साधने चला।
जब नाश मनुज पर छाता है,
पहले विवेक मर जाता है।
कृष्ण की चेतावनी
हरि ने भीषण हुंकार किया,
अपना स्वरूप-विस्तार किया,
डगमग-डगमग दिग्गज डोले,
भगवान् कुपित होकर बोले-
‘जंजीर बढ़ा कर साध मुझे,
हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे।

यह देख, गगन मुझमें लय है,
यह देख, पवन मुझमें लय है,
मुझमें विलीन झंकार सकल,
मुझमें लय है संसार सकल।
अमरत्व फूलता है मुझमें,
संहार झूलता है मुझमें।
कृष्ण की चेतावनी
‘उदयाचल मेरा दीप्त भाल,
भूमंडल वक्षस्थल विशाल,
भुज परिधि-बन्ध को घेरे हैं,
मैनाक-मेरु पग मेरे हैं।
दिपते जो ग्रह नक्षत्र निकर,
सब हैं मेरे मुख के अन्दर।

‘दृग हों तो दृश्य अकाण्ड देख,
मुझमें सारा ब्रह्माण्ड देख,
चर-अचर जीव, जग, क्षर-अक्षर,
नश्वर मनुष्य सुरजाति अमर।
शत कोटि सूर्य, शत कोटि चन्द्र,
शत कोटि सरित, सर, सिन्धु मन्द्र।
कृष्ण की चेतावनी
‘शत कोटि विष्णु, ब्रह्मा, महेश,
शत कोटि विष्णु जलपति, धनेश,
शत कोटि रुद्र, शत कोटि काल,
शत कोटि दण्डधर लोकपाल।
जञ्जीर बढ़ाकर साध इन्हें,
हाँ-हाँ दुर्योधन! बाँध इन्हें।

‘भूलोक, अतल, पाताल देख,
गत और अनागत काल देख,
यह देख जगत का आदि-सृजन,
यह देख, महाभारत का रण,
मृतकों से पटी हुई भू है,
पहचान, इसमें कहाँ तू है।
कृष्ण की चेतावनी
‘अम्बर में कुन्तल-जाल देख,
पद के नीचे पाताल देख,
मुट्ठी में तीनों काल देख,
मेरा स्वरूप विकराल देख।
सब जन्म मुझी से पाते हैं,
फिर लौट मुझी में आते हैं।

‘जिह्वा से कढ़ती ज्वाल सघन,
साँसों में पाता जन्म पवन,
पड़ जाती मेरी दृष्टि जिधर,
हँसने लगती है सृष्टि उधर!
मैं जभी मूँदता हूँ लोचन,
छा जाता चारों ओर मरण।
कृष्ण की चेतावनी
‘बाँधने मुझे तो आया है,
जंजीर बड़ी क्या लाया है?
यदि मुझे बाँधना चाहे मन,
पहले तो बाँध अनन्त गगन।
सूने को साध न सकता है,
वह मुझे बाँध कब सकता है?

‘हित-वचन नहीं तूने माना,
मैत्री का मूल्य न पहचाना,
तो ले, मैं भी अब जाता हूँ,
अन्तिम संकल्प सुनाता हूँ।
याचना नहीं, अब रण होगा,
जीवन-जय या कि मरण होगा।
कृष्ण की चेतावनी
‘टकरायेंगे नक्षत्र-निकर,
बरसेगी भू पर वह्नि प्रखर,
फण शेषनाग का डोलेगा,
विकराल काल मुँह खोलेगा।
दुर्योधन! रण ऐसा होगा।
फिर कभी नहीं जैसा होगा।

‘भाई पर भाई टूटेंगे,
विष-बाण बूँद-से छूटेंगे,
वायस-श्रृगाल सुख लूटेंगे,
सौभाग्य मनुज के फूटेंगे।
आखिर तू भूशायी होगा,
हिंसा का पर, दायी होगा।’
कृष्ण की चेतावनी
थी सभा सन्न, सब लोग डरे,
चुप थे या थे बेहोश पड़े।
केवल दो नर ना अघाते थे,
धृतराष्ट्र-विदुर सुख पाते थे।
कर जोड़ खड़े प्रमुदित,
निर्भय, दोनों पुकारते थे ‘जय-जय’!


साभार- कविताकोश

Saturday, February 22, 2020

वनवासी लड़की IAS बनी: केरल

 केरल में एक जगह है. वायनाड. यहां से राहुल गांधी सांसद हैं. लेकिन आज हम इसकी बात किसी और वजह से कर रहे हैं. वायनाड से ही इतिहास रचने वाली एक और लड़की है. श्रीधन्या सुरेश. केरल की पहली ट्राइबल लड़की, जिसने IAS की परीक्षा क्लियर की.

श्रीधन्या ने 22 साल की उम्र में UPSC (यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन) का पहला अटेम्प्ट दिया. आखिरकार तीसरे अटेम्प्ट में उनकी 410वीं रैंक आई. 2019 में. लेकिन श्रीधन्या के लिए ये इतिहास रचना आसान नहीं था.


उनके पिता मनरेगा में मजदूरी करते थे. और बाकी समय धनुष-तीर बेचा करते थे. उन्हें सरकार की तरफ से थोड़ी सी ज़मीन मिली थी घर बनवाने के लिए, लेकिन पैसों की कमी की वजह से वो उसे पूरा बनवा भी नहीं पाए. उसी घर में श्रीधन्या अपने माता-पिता, और दो भाई-बहनों के साथ रहती आ रही थीं.
पोज़ुथाना गांव के कुरिचिया जनजाति से आती हैं श्रीधन्या. पैसों की कमी के बावजूद उनके पेरेंट्स ने उनको पढ़ाया लिखाया. कोझीकोड के सेंट जोसफ कॉलेज से उन्होंने ग्रेजुएशन की. जूलॉजी में. पोस्ट ग्रेजुएशन भी वहीं से किया. उसके बाद वो केरल के अनुसूचित जनजाति विकास विभाग में क्लर्क के तौर पर काम करने लगीं. उसके बाद वायनाड के एक आदिवासी हॉस्टल में वार्डन के तौर पर काम किया. वहीं पर उनकी मुलाक़ात हुई श्रीराम समाशिव राव से. ये वायनाड के कलेक्टर थे उस समय. उन्होंने श्रीधन्या को UPSC का एग्जाम देने के लिए मोटिवेट किया.

तीसरे अटेम्प्ट में जब श्रीधन्या का सेलेक्शन इंटरव्यू के लिए हुआ, तो उनके पास दिल्ली जाने के पैसे भी नहीं थे. किसी तरह उनके दोस्तों ने मिलकर 40,000 रुपये इकठ्ठा किए. तब जाकर वो दिल्ली आ पाईं.

7स्किल को दिए इंटरव्यू में श्रीधन्या ने बताया,
मैं राज्य के सबसे पिछड़े जिले से हूं. यहां पर आदिवासी जनजाति काफी संख्या में है, लेकिन अभी तक कोई आदिवासी IAS ऑफिसर नहीं बना. वायनाड से UPSC की तैयारी करने वालों की संख्या वैसे भी कम ही है. मुझे उम्मीद है कि मेरे सेलेक्शन से और भी लोगों को मेहनत करने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी.

श्रीधन्या के सेलेक्शन के बाद उनके अधबने घर में मीडिया का तांता लग गया था. उसी घर में बैठकर उन्होंने इंटरव्यू दिए, अपनी कहानी सुनाई. उनसे प्रियंका गांधी भी मिलने आई थीं. और राहुल गांधी ने भी श्रीधन्या के लिए ट्वीट कर उन्हें बधाई दी.

Wednesday, February 12, 2020

संस्कृत भाषा की मजा...





संस्कृत हमारी भाषा हैं। कहते हैं सभी भाषाओं की जननी संस्कृत हैं। वैज्ञानिकों ने शोध कर के बताया कि कॉम्प्यूटर सबसे अधिक संस्कृत को एक्सेप्ट करता हैं। इस भाषा की बहोत सारी नवली बाते हैं।उस में से एक आप के लिए।
न नोननुन्नो नुन्नोनो नाना नाना नना ननु।
नुन्नोऽनुन्नो ननुन्नेनो नानेना नन्नुनन्नुनुत्।।

 -हे नाना मुख वाले (नानानन)! वह निश्चित ही (ननु) मनुष्य नहीं है जो जो अपने से कमजोर से भी पराजित हो जाय। और वह भी मनुष्य नहीं है (ना-अना) जो अपने से कमजोर को मारे (नुन्नोनो)। जिसका नेता पराजित न हुआ हो वह हार जाने के बाद भी अपराजित है (नुन्नोऽनुन्नो)। जो पूर्णनतः पराजित को भी मार देता है (नुन्ननुन्ननुत्) वह पापरहित नहीं है (नानेना)।


एक ही वर्ण को अलग अलग लिखने से क्या चमत्कार हुआ आप ने देखा होगा। एक्सी कोई बात या सर्जन आप के पास हैं तो अवश्य हम तक पहुंचाए।

Monday, February 10, 2020

कोफ़ी पेंटिग


युग्वी केतुल सोनी। आठवी कक्षा में पढ़ती हैं। उसका शोख पेंटिंग हैं।आप जो ये पेंटिग देख रहे है वो 42 मिनिट में तैयार किया हैं। कोफ़ी पिते समय बची हुई कोफ़ी से पेंटिग किया हैं। उस के परिवार में सभी व्यक्ति किसीन किसी कला में माहिर हैं।उस के नानाजी एक अच्छे और मैजे हुए पपेटियर हैं। उन की मम्मी शिक्षा से जुडी हैं।ऐसे कलाकारों को खोजने के लिए 7स्किल फाउंडेशन कार्यरत हैं। अपनी प्रतिभा को पहेचान वाली युग्वी आज तक भोज्य सारे चित्र अलग अलग तरीकेसे बनाये हैं। अगर कोई सपोर्ट मिलाता है तो उस के चित्रों का प्रदर्शन करना चाहेंगे।अभी के लिए युग्वी को ढेर सारी शुभकामना एवं अभिनन्दन।




Sunday, February 9, 2020

1000 तक के पहाड़े: एक मूर्खतापूर्ण विचार



आप की ये बात हजम नहीं हुई
4 साल से 1000 के पहाड़े और 1 लाख बच्चे सुन रहा हु।

मैथ में 5 क्षेत्र हैं।
संख्याज्ञान
गणित की 4 प्रक्रिया
गूंजाश
अपूर्णाक
भूमिति

पहाड़े अगर देखा जाय तो 100 में से 0.01 % हिस्सा हैं।

अक्षय खत्री जी को अभिनन्दन।रमेश तन्ना जी ने अच्छा लिखा हैं।
आप ने रमेश तन्ना जी से लिखवाया है कि आप प्रकाश जावड़ेकर जी को प्रभावित कर पाए। गुजरात के CM सर से भी आप ने ये काम बताया हैं। 4 साल से 1 लाख बच्चे कहते हो। 1 लाख बच्चे है तो1000 स्कुल मानते हैं। गुजरात में 36578 Govt स्कुल हैं। 14 हजार से अधिक प्राइवेट स्कूल हैं। क्या आप ने जहाँ काम किए ऐसी100 स्कुल के नाम भी दे पाओगे?

रिकॉर्ड किसी का और आप की आदत से मजबूर किसी की सिद्धि को अपने नाम करना। जैसे जहांगीर को ही देखलो।

अमदावाद आप ने आप की कंपनी लॉन्च करी तब से में 1 लाख और पहाड़े सुन रहा हु। आप की डीसा वाली स्कुल में std:6 के बच्चे 7 का पहाड़ा नहीं बोल पा रहे हैं।

एक बार आप ने मुझे कुछ फोन पे बताया था। मेने आप के दर्शन पाने के लिए 2 बार श्री Rajendra D Joshi सर को बिनती कर चूका हूँ। शायद उनकी व्यस्तता के कारण ये संभव नहीं हो पाया। आप  डीसा और पालनपुर आते जाते रहते हो।
कभी न कभी हम आमने सामने होंगे।
गणित के बारे में आप के रेकॉर्ड होल्डर या किसीभी व्यक्ति से चर्चा,संवाद या प्रक्रिया के बारे में बात करने का चेलेंज करता हु । सिर्फ आप हां बोलो...

आप 1000 के पहाड़े के नाम से मुर्ख बनाने निकले हो। आज फिर कहुगा.... आप मुर्ख बना सकते है,जीनियस नहीं।

आप बाते करते है इंटरनॅशनल की और आयोजन होता है कॉर्पोरेशन लेवल का। इस बात को मैने महसूस किया हैं। जहाँ तक रेकॉर्ड की बात हैं उन को सलाम मगर तेजस शाह आप की आदत है कि किसी की सिद्धि को अपने नाम करना। कीजिए...आप व्यवसायी हैं। और मुर्ख बनाने में आप माहिर हो। कोई एक व्यक्ति 1000 तक पहाड़े रट्टे मारके याद करलेता है। रेकोर्ड भी होता हैं। मगर आप का 1 लाख बच्चो का दावा में तो नहीं मान सकता।
मुझे था कि जोशी सर मुझसे आप को मिलवाएंगे मगर वो शायद व्यस्तता के कारण नहीं कर पाए होंगे। आप जोशी सर के पैसो से बिल्डिंग बना सकते हो,विद्याधाम नहीं।
 12 जुलाई
15 जुलाई
19 जुलाई
20 जुलाई
16 अगस्त तक मेने मेसेज से,कोल से और तो और  दो बार जोशी सर को  मिलकर तेजस शाह को मिलने के लिए विनती की, मगर कुछ नहीं हुआ।आज 7 माह हुए हैं।

आप लंबे समय तक सभी को मुर्ख नहीं बना सकते। में चाहूंगा कि  तेजस जी में आप के इस गुब्बारे को फोड़ के दिखाऊ। मेरी तैयारी है। आप के 1000 तक पहाड़े के लिए और आप के जुठ को साबित करने को में चर्चा करने को तैयार हूँ। आप जब चाहे, जहा चाहे ओपन चर्चा करते है और वीडियो रेकॉर्डिंग भी करेंगे। खर्च में उठाऊंगा।

HRD मिनिस्टर और गुजरात के CM को 1000 के पहाड़े के लिए आप प्रेजेन्टेशन अच्छा कर पाए होंगे। मगर आप को आज तक गुजरात में सरकारी स्कूल में इसे फैलाने की परमिशन क्यों नहीं मिली?

मुझे 15 तक पहाड़े आते हैं। std: 1 से 10 किसी भी क्लास का गणित में गिन सकता हूँ। मुझे 16 के पहाड़े की आवश्यकता नहीं हैं।आप को मालूम नहीं होगा मगर  पहाड़े 1. 1. 1 से 1. 10. 10 नहीं होते। 1.11.11 या 9.11.99 भी पहाडे का हिस्सा हैं।

आप या आप की कंपनी का कोई भी बन्दा (रेकॉर्ड होल्डर सहित) पहाडे और पहाड़े शिखाने का सही तरीका बताए,मेरी चेलेंज है कि आप या आप का कोई व्यक्ति भी नहीं बता पायेगा। सिर्फ बाते करने से नही चलता। विश्वके गणित शात्री माने जाने वाले  श्री अरुण वैध सर अमदावाद से थे।वो मैथ ओलम्पियाड के आयोजक रहे हैं। विश्वके 164 देशों के लिए आयोजित मैथ ओलम्पियाड में  3 बार  चेरमेंन रह चुके हैं। उन की एक किताब में इस के बारे में लिखा हैं । पहाड़े कैसे सिखाए। सुरसिंह जी(राजकोट) को पूछो जिन्होंने पहाड़े शिखाने पर  PHD किया हैं।
फिरसे कहूंगा

आप मुर्ख बना सकते है, जीनियस नहीं।


भावेश पंड्या
09925044838
7स्किल फाउंडेशन,गुजरात

(तेजस जी मेने जो लिखा हैं, नशा करके नहीं लिखा हैं)