Friday, December 14, 2018

एक व्यवस्था: किन्नर

आम आदमी के जन्म से लेकर मृत्यु तक अलग अलग धर्मों के अलग अलग रीती रिवाज होते हैं। जो लग भग हर कोई जानता है क्योंकि इनके रीती रिवाज को हर कोई देख सकता है। लेकिन आज आपको किन्नरों के अंतिम संस्कार को लेकर कुछ जानकारी देंगे जो बहुत ही कम लोग जानते हैं। जी हाँ दोस्तों, कहा जाता है कि किन्नर की दुआओं में बहुत जल्दी असर होता है। 

अगर किसी घर में किसी बच्चे का जन्म होता है तो वहां किन्नर जरूर जाते हैं और बच्चे को अच्छे जीवन की दुआएं देते हैं। आपको बतादें किसी किन्नर के मरने पर उसके अंतिम संस्कार आम आदमी के अंतिम संस्कार के विपरीत होता है और इनका अंतिम संस्कार रात में किया जाता है ताकि आम आदमी देख न सके।


इनका मानना है यदि कोई व्यक्ति किन्नर का अंतिम संस्कार को देखेगा तो वो किन्नर फिर से किन्नर का ही जन्म पाता है। किन्नर के अंतिम संस्कार के पहले मजूद सभी किन्नर बॉडी को जूते चप्पल से भी पीटते हैं। अब आपके मन में ये सवाल जरूर उठेगा कि आखिर किन्नर के अंतिम संस्कार के पहले बॉडी को क्यों पीटते हैं जूते चप्पल से। 

दोस्तों, ये सच्चाई जानकर आपको हैरानी होगी कि किन्नर ऐसा इसलिए करते हैं ताकि उस जन्म में किए सारे पापों का प्रायश्चित हो सके और वो इंसान दोबारा किन्नर के रूप में वापस न आये।

@#@
साथ जीना हैं तो दोबारा भी पैदा होंगे,
अकेले रहने को तो पल भी एक जीवन हैं।
क्यो आस लगाए बैठेंगे किसी के कारण,
हमे जिंदा रहने का वजूद आपसे मिला हैं।

Monday, December 10, 2018

दो बहनें

एक और ऐसी कहानी दो बहनों पूनम और कोमल की है । इनकी भी स्थिति बहुत खराब थी। दोनों बहनों की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि ये लोग अपनी शिक्षा भी जारी नहीं रख पाए थे, घर की हालात भी ठीक नहीं थी। 

ऐसे में इनके लिए PMKVY एक उम्मीद की किरण बनकर आया। दोनों बहनों ने पीएमकेवीवाई से कौशल प्रशिक्षण पाठ्यक्रम किया। कौशल प्रशिक्षण के बाद अब दोनों बहने कपड़ा कंपनी के कर्मचारी के रूप में काम कर रही हैं । अब न केवल वे खुशी से अपने परिवारों का समर्थन व सहयोग करते हैं लेकिन बल्कि दोनों बहने उन महिलाओं के लिए एक आदर्श मॉडल बन गईं हैं जो अपने कौशल के माध्यम से आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना चाहते हैं।

कुल मिलाकर कहें तो पीएमकेवीवाई, हर युवा और भारतीय महिला के लिए उज्ज्वल कल का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। यह सिर्फ परिवर्तन और उपलब्धियों की कहानियां भर नहीं हैं, बल्कि हर युवाओं/ महिलाओं को सही दिशा के साथ उन्हें कौशल युक्त और बेहतर आजीविका संपन्न बनाना है।
सरकुम:
सरकार के लिए कोई पार्टी का मतदार नहीं होता। योजना सब को मिलती हैं। हमें उसका लाभ लेना चाहिए। फिर ऐसा न हो कि कोई कहे ' सरकार ने उसे ' समजा नहीं।

एक ऐसी भी कहानी...

हमारा देश सभी धर्मों का सन्मान करता हैं। हर धर्म को पहचानने के लिए हम सब ने अपने दिमाग में कई तस्वीरें बना रखी हैं। अगर किसी व्यक्ति ने पगड़ी पहन रखी हैं तो वह पंजाबी ही होगा या किसी ने अगर धोती पहनी हैं तो वह हिन्दू होगा या फिर किसी व्यक्ति ने अगर टोपी लगायी हैं और दाढ़ी रखी हैं तो वह मुसलमान ही होगा लेकिन यह सब हमारे दिमाग का सिर्फ एक मज़हबी फ़ितूर मात्र हैं।पर कभी आपने सोचा कि मुस्लिम सिर्फ दाढ़ी क्यों रखते हैं मूछें नहीं? आईएं आज हम आप को बताते हैं मुस्लिम धर्म से जुड़ी एक दिलचस्प बात। कहा जाता हैं कि हिन्दू धर्म ही सबसे पुराना और सनातन धर्म हैं। 
हिन्दू धर्म का इतिहास कितना पुराना हैं इस बात की पुष्टि अभी तक नहीं हुई हैं, वही इस्लाम धर्म लगभग 1400 साल पुराना हैं।वेद व्यास जी अभी तक 18 पुराण लिख चुके हैं और भविष्य पुराण उनमे से एक हैं। हिन्दू धर्म के अंतर्गत कई तरह के पुराण और ग्रन्थ लिखे गए हैं और उन्ही ग्रन्थों में से एक भविष्य पुराण में इस्लाम से जुड़ी भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी। इस पुराण में लगभग 50000 श्लोक थे लेकिन तक्षशिला विश्व विद्यालय में रखे इस ग्रन्थ को मुग़ल शासन काल में जला दिया गया पर उस किताब में से 129 अध्याय और लगभग 14000 श्लोक बच गए थे।इस किताब में यह पहले से ही उल्लेखित था कि उस वक़्त के तात्कालीन राजा हर्षवर्धन के साथ और कई राजा, अलाउदीन, तुगलक, तैमुर, बाबर, और अकबर जैसे मुगलों का इस काल आना होगा। इस पुराण में ईसाई धर्म के प्रमुख ईसा मसीह के जन्म का भी प्रमाण मिलता हैं।लेकिन इससे पहले भी अपने भारत देश की शक्ति कम होती देख एक और राजा हुए, जो राजा भोज के नाम से जाने गए और उन्होंने तय किया कि अपनी मातृभूमि की रक्षा करने के लिए दुनिया जीतने निकलना ही पड़ेगा। अपनी दस हज़ार सेना को साथ लेकर कई विद्वानों और कालीदास जैसे बुध्हिजीवी राजा के साथ आगे बढ़े।सिन्धु नदी पार करके गंधार और कशमीर में शठ राजाओं को हरा कर राजा भोज की सेना ईरान और अरब होते हुए मक्का पहुची। वहां के मरुस्थल में पहुच कर जब वहां उन्होंने एक शिवलिंग देखा तो उसकी पूजा करते हुए वह भगवान् शिव का ध्यान करने लगे।भगवान् शिव भी राजा भोज की प्रार्थना सुनकर उनसे बात करने आये और उनसे कहा कि तुम्हे यहाँ नहीं आना चाहियें था वत्स। तुम्हे मक्केश्वेर , जिसे आज हम मक्का के नाम से जानते हैं उसके बजाये उज्जैन महाकालेश्वेर को पूजना चाहियें। 

आगे कहा गया हैं कि, इस स्थान पर अब एक राक्षस त्रिपुरासुर, जिसका मैंने वध किया था, उसके मानने वालें लोगों को असुरराज बाली से संरक्षण प्राप्त हो रहा हैं और इस समुदाय का प्रमुख उत्पात मचा रहा हैं इसलिए तुम इस मलेच्छ जगह से चले जाओ।भगवान् शिव की बात सुनकर राजा भोज जब लौटने लगे तब “महा-मद” नामक व्यक्ति वहा आ गया और राजा भोज से कहा कि आप का आर्यधर्म विश्व का सर्वश्रेष्ट धर्म हैं, लेकिन मैं आपके शिव की मदद से ही एक ऐसे धर्म की स्थापना करूँगा जो अपनी क्रूरता के लिए जाना जायेगा। इसे मानने वालो को अपना लिंगाछेदन (खतना) कर के, बिना तिलक और बिना मुछों के सिर्फ दाढ़ी रखना अनिवार्य होगा। मेरा यह सम्प्रदाय उन्हें बहुत प्रिय होगा जिसे कुछ भी खाना ,जिसमे मांस स्वीकार्य होगा और अपनी इस बात का यकीन दिलाने के लिए मैं आपके देश में आकर अपने मूंछ के बाल को त्याग दूँगा।

कश्मीर के हजरत बल मज्जिद में आज भी हजरत मोहम्मद के मुछों के उन बालों को सुरक्षित रखा गया हैं। हजरत के उस बाल को “मोई-ए-मुकद्दस” के नाम से जाना जाता हैं। हर मुस्लिमों के लिए उस बाल का दर्शन हो सके इसके लिए साल में एक या दो बार ही उस बक्से को खोला जाता हैं।

कुछ बाते देखी और पढ़ी हैं।कुछ बाते कहासे खोजी गई हैं।बात सिर्फ यरे हैं कि सभी धर्म एक दूसरे के सहयोग से बढ़ सकते हैं।

 और ग्रन्थ लिखे गए हैं और उन्ही ग्रन्थों में से एक भविष्य पुराण में इस्लाम से जुड़ी भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी। इस पुराण में लगभग 50000 श्लोक थे लेकिन तक्षशिला विश्व विद्यालय में रखे इस ग्रन्थ को मुग़ल शासन काल में जला दिया गया पर उस किताब में से 129 अध्याय और लगभग 14000 श्लोक बच गए थे।
इस किताब में यह पहले से ही उल्लेखित था कि उस वक़्त   
लेकिन इससे पहले भी अपने भारत देश की शक्ति कम होती देख एक और राजा हुए, जो राजा भोज के नाम से जाने गए और उन्होंने तय किया कि अपनी मातृभूमि की रक्षा करने के लिए दुनिया जीतने निकलना ही पड़ेगा। अपनी दस हज़ार सेना को साथ लेकर कई विद्वानों और कालीदास जैसे बुध्हिजीवी राजा के साथ आगे बढ़े।
सिन्धु नदी पार करके गंधार और कशमीर में शठ राजाओं को हरा कर राजा भोज की सेना ईरान और अरब होते हुए मक्का पहुची। वहां के मरुस्थल में पहुच कर जब वहां उन्होंने एक शिवलिंग देखा तो उसकी पूजा करते हुए वह भगवान् शिव का ध्यान करने लगे।
भगवान् शिव भी राजा भोज की प्रार्थना सुनकर उनसे बात करने आये और उनसे कहा कि तुम्हे यहाँ नहीं आना चाहियें था वत्स। तुम्हे मक्केश्वेर , जिसे आज हम मक्का के नाम से जानते हैं उसके बजाये उज्जैन महाकालेश्वेर को पूजना चाहियें। 

आगे कहा गया हैं कि, इस स्थान पर अब एक राक्षस त्रिपुरासुर, जिसका मैंने वध किया था, उसके मानने वालें लोगों को असुरराज बाली से संरक्षण प्राप्त हो रहा हैं और इस समुदाय का प्रमुख उत्पात मचा रहा हैं इसलिए तुम इस मलेच्छ जगह से चले जाओ।
भगवान् शिव की बात सुनकर राजा भोज जब लौटने लगे तब “महा-मद” नामक व्यक्ति वहा आ गया और राजा भोज से कहा कि आप का आर्यधर्म विश्व का सर्वश्रेष्ट धर्म हैं, लेकिन मैं आपके शिव की मदद से ही एक ऐसे धर्म की स्थापना करूँगा जो अपनी क्रूरता के लिए जाना जायेगा। इसे मानने वालो को अपना लिंगाछेदन (खतना) कर के, बिना तिलक और बिना मुछों के सिर्फ दाढ़ी रखना अनिवार्य होगा। मेरा यह सम्प्रदाय उन्हें बहुत प्रिय होगा जिसे कुछ भी खाना ,जिसमे मांस स्वीकार्य होगा और अपनी इस बात का यकीन दिलाने के लिए मैं आपके देश में आकर अपने मूंछ के बाल को त्याग दूँगा।

कश्मीर के हजरत बल मज्जिद में आज भी हजरत मोहम्मद के मुछों के उन बालों को सुरक्षित रखा गया हैं। हजरत के उस बाल को “मोई-ए-मुकद्दस” के नाम से जाना जाता हैं। हर मुस्लिमों के लिए उस बाल का दर्शन हो सके इसके लिए साल में एक या दो बार ही उस बक्से को खोला जाता हैं।

कुछ बाते देखी और पढ़ी हैं।
कुछ बाते कहासे खोजी गई हैं।
बात सिर्फ यरे हैं कि सभी धर्म एक दूसरे के सहयोग से बढ़ सकते हैं।

सरकुम:

मुजे धर्म पसंद हैं।
धर्म के द्वारा मेने जो कर्म किये हैं वो भी मेने ही किये हैं। हिन्दू हु, ओर गणेश जी को सामने रखकर जो कहा हैं, निभाया हैं।

धर्म मेरी आस्था, आस्था से जीवन।
जीवन से सरोकार, जीवन ही सरकार।

Sunday, December 9, 2018

स्किल ओर योजनाए

दुनिया  ये  मानकर चल रही रही है कि एक अरब का देश भारत  …आने वाले दौर में शक्तिशाली होने वाला है।  लेकिन वास्तविकता ये है कि  देश की आधी आबादी अब भी कुशल होने के लिए संघर्ष कर रही है,…इसलिए लगता है कि ये  ये सपना बहुत दूर है। इस वास्तविकता को हकीकत में बदला जा सकता था और यही वजह है कि भारत सरकार ने इस चुनौती को प्रमुखता के साथ स्वीकार कर लिया है
किसी  ने एक प्रसिद्ध कहावत  कहा है कि ‘ एक बार को  मोटर्स के बिना उड़ना संभव है, लेकिन ज्ञान और कौशल के बिना ये असंभव है “।  यही स्किल यानी कौशल ,सभी मिशनों की रीढ़ की हड्डी या कहें  अहम भूमिका अदा करती है और एक देश विकास  केवल तभी कर सकता है जब उसके कर्मचारियों में तकनीकी, औद्योगिक और सॉफ्ट स्किल का सबसे अच्छा ज्ञान हो। या कहें वो तकनीकी रूप से कौशल हो।
2015 में, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने कौशल भारत कार्यक्रम  का आगाज किया । इस मिशन के तहत, भारतीय युवाओं के लिए उनके पेशेवर कौशल को  और बेहतर तरीके से पॉलिश करने का सर्वोत्तम मंच पेश किया । स्किल इंडिया का मकसद ही भारत भर में  व्यावसायिक प्रशिक्षण देना है  …इस योजना का मकसद भारत के युवाओं को अच्छी तरह से स्किल बनाने या कहें तैयार करना मकसद  है। इस कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) की शुरुआत की गई, ये योजना  मूल रूप से उन छात्रों के लिए है, जो अपने कौशल प्रशिक्षण का खर्च नहीं उठा सकते।
भारत सरकार का ये कदम मील का पत्थर साबुत हुआ। इस योजना ने उद्योग-संबंधित कौशल प्रशिक्षण के साथ लाखों भारतीय युवाओं को जोड़ने और  उन्हें सशक्त बनाने में मदद किया। साथ ही उनके लिए इस प्रशिक्षण ने बेहतर आजीविका के लिए द्वार खोल दिए । आइए  कुछ ऐसे ही  सफलता की कहानियों पर एक नज़र डालते हैं-
उदाहरण के तौर पर हम लाइफ सांइंस को देख सकते हैं। ये मौजूदा दौर में शीर्ष मांग वाले क्षेत्रों में से एक है जो फिलवक्त  17 फीसद  सीएजीआर की गति से बढ़ रहा है।  लेकिन अभी भी  इस सेक्टर  में कुशल काम करने वालों की कमी है, हम इसी उभरते क्षेत्र से एक प्रेरणा दायक कहानी बताते हैं-
ये हैं हेमंत झा| आप हेमंत झा से मिलिए। जब तक पीएमकेवीवाई की शुरूआत   नहीं हुई थी , तब वे बिहार के कटिहार जिले के एक सामान्य  युवा थे। लेकिन इन्होंने पीएमकेवीवाई के साथ कौशल प्रशिक्षण लिया, प्रशिक्षण के बाद इनका जीवन इस तरह से बदल जाएगा या कहें इतने बड़े पैमाने पर बदलाव आएगा …ऐसा उन्होंने सोचा नहीं था।  पीएमकेवीवाई के तहत झा को लाइफ साइंस स्किल डेवलपमेंट कोर्स के तहत  प्रशिक्षित किया गया, प्रशिक्षण के बाद वे एक सफल चिकित्सा प्रतिनिधि बनने के लिए तैयार किए गए। पीएमकेवीवाई ने उन्हें एक बेरोजगार युवक से एक शीर्ष अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा ब्रांड के कर्मचारी  के रूप में बदल दिया । फिलवक्त वे सन फार्मा के कर्मचारी हैं। एक तरह से कहें कि पीएमकेवीवाई से झा के सपनों को पंख मिला और उनका जीवन बदल गया।
इस योजना के तहत ना केवल पुरूषों बल्कि इन संभावित विकास पाठ्यक्रमों ने भारतीय महिलाओं के लिए भी अद्भुत काम किया। पिछले 3 वर्षों में, 3 लाख महिलाओं को अपनी आजीविका अर्जित करने के लिए इस योजना के तहत प्रशिक्षित किया गया । एक छोटे से प्रशिक्षण ने इन महिलाओं के जीवन को बदल दिया या कहें अब तक की ये साधारण महिला , अब खुद हीरो बन चुकी हैं।
अब सफलता की दूसरी कहानी देश के पूर्वी छोर से सुनिए । पूर्वोत्तर से सफलता की ये पहली खबर है। त्रिपुरा के एक दूरदराज के गांव से एक आदिवासी महिला ने खेती के क्षेत्र में बेहतरीन काम किया । किसी ने सोचा भी नहीं था कि ये लोग अब तक की पारंपरिक खेती में बदलाव करेंगे। इन इलाकों में पारंपरिक खेती तब पर्याप्त नहीं थी,अब भी यह पर्याप्त नहीं है। यही वजह है जब एक पूरा गांव अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे थे.. ऐसे दौर में बदलाव जरूरत थी और इन महिलाओं ये बदलाव किया भी ।
अब आप नित्या देवी निहोतिया से मिलें, इन्होंने सफलता के लिए कम दूरी की यात्रा तय की है। निहोतिया ने पीएमकेवीवाई के जरिए ही रबड़ बागान कार्य में प्रशिक्षण लाया। प्रशिक्षण के बाद उसने रबर बागान नर्सरी की शुरूआत की । इस नर्सरी के जरिए अब निहोतिया को 4,000 रुपये प्रति माह का मुनाफा होता है । अब निहोतिया ना केवल पीएमकेवी के लिए आभारी हैं, बल्कि अब वो अपने अनुभव को साझा भी करना चाहती है। निहोतिया के मुताबिक दूसरों को सही समय पर सही जानकारी मिल जाए तो कई समस्याओं का निदान हो जाता है।

सरकुम:
शिक्षा को सीखने से जोड़ना जरूरी है,उसे गुणाकन से जोड़कर देखने से बाहरी समस्या बढ़ जाती है। 

लोग हैं...



तू अपनी खूबियां ढूंढ,
कमियां निकालने के लिए
                                    लोग हैं |

अगर रखना ही है कदम तो आगे रख,
पीछे खींचने के लिए
                                    लोग हैं |

सपने देखने ही है तो ऊंचे देख,
नीचा दिखाने के लिए
                                    लोग हैं |

अपने अंदर जुनून की चिंगारी भड़का,
जलने के लिए
                                    लोग हैं |

अगर बनानी है तो यादें बना,
बातें बनाने के लिए
                                 लोग हैं |


तू बस संवार ले खुद को,
आईना दिखाने के लिए
                                    लोग हैं |

खुद की अलग पहचान बना,
भीड़ में चलने के लिए
                                    लोग है |

तू कुछ करके दिखा दुनिया को,
तालियां बजाने के लिए
                                    लोग हैं |

Friday, December 7, 2018

मेरा संपर्क करो...



साथ में प्रेस नोट हैं।
प्रेसनोट में लिखा हैं कि एक शिक्षक उल्टा लिख भी सकते हैं। पढ़ भी सकते हैं। उन्होंने लिम्का रिकॉर्ड के लोए आशा व्यक्त की हैं। मेरे उनसे कोई सीधा संपर्क नहीं हैं। मगर वो अगर रिकॉर्ड करना चाहते हैं और कोई अड़चन हैं तो मेरा संपर्क करे।
ऐसे अध्यापक ओर नवाचार या नई बात करने वालो को यथायोग्य स्थान पर पहुंचाने के विचार के साथ हम 7रँगी स्किल फाउंडेशन चला रहे हैं। हमारे सभी स्थापक सदस्य इस बात पे जोर लगाए हुए हैं कि हमे ऐसी स्किल वाले लोगो को खोजना हैं।
कुछ दिनों पहले मे whats aep से थोड़े समय दूरी बनाए हुए था। उत्तर प्रदेश से मेरे मार्गदर्शक ओर मित्र डॉ. अवनीश यसद्व ने मुजे कहा था। आप ये बन्ध न करो। बहोत सारे लोग हैं जो तुमसे सिखाते हैं, जुड़ना चाहते हैं। ऐसे कुछ और साथी भी थे जिन की आज्ञा से मैने whats aep फिरसे शुरू किया हैं। उनके हर सूचना को अमल किया हैं। ओट ऐसे ही इस सोसियल मीडिया के माध्यम से ऐसी स्किल को खोजने में जुटे रहेंगे।

सरकुम:

स्किल हैं तो पहचान हैं।
पहचान हैं तो नाम हैं ओर रहेगा।
नाम हैं तो काम मिलेगा और मिलता रहेगा। हुकुम मानो या न मानो, हर रोज नया सोचना ओर उसमें सफल भी होना पड़ेगा।

Wednesday, December 5, 2018

21वीं सदी में भारत

21वीं सदी में भारत की प्राथमिक शिक्षा नीतिगत बदलाव के दौर से गुजर रही है. इस नीतिगत बदलाव की कहानी को आगे बढ़ाने के लिए अनेक कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं. कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए रणनीतियों की शृंखला बनाई जा रही है. इस सभी का उद्देश्य एक है कि शिक्षा के क्षेत्र में सीखने के संकट (लर्निंग क्राइसिस) का समाधान कैसे खोजा जाए? शिक्षा का अधिकार कानून 2009 लागू होने के बाद से स्कूलों में बच्चों का नामांकन बढ़ा है. स्कूलों में बच्चों का ठहराव सुनिश्चित करने और बच्चों का प्रदर्शन बेहतर करने की रणनीतियों पर अमल की कोशिशें हो रही हैं. शिक्षा को आनंददायक बनाने के प्रयासों को प्रोत्साहित किया जा रहा है.
स्कूलों में भयमुक्त वातावरण बनाने की रणनीतियों पर विमर्श हो रहा है. स्कूल और समुदाय के बीच संवाद शुरू करने के लिए विद्यालय प्रबंधन समिति को सक्रिय बनाने. बच्चों के माता-पिता और अभिभावकों को स्कूल में बुलाने और बच्चों की शैक्षिक प्रगति से उनको अवगत कराने की बात हो रही है. शिक्षा को बच्चों के मौलिक अधिकार के रूप में देखने की कोशिश हो रहा है ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे. हर बच्चे को मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा के दायरे में लाने के लिए सरकारी और ग़ैर-सरकारी संगठनों के तरफ़ से काफ़ी प्रयास हो रहे हैं. सभी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना शिक्षा के क्षेत्र में संचालित होने वाले तमाम कार्यक्रमों का प्रमुख उद्देश्य है.
इसे हासिल करने के लिए शिक्षाविद्, शैक्षिक प्रशासन से जुड़े अधिकारी, शिक्षक और शिक्षक प्रशिक्षक अपने-अपने स्तर पर काम कर रहे हैं. बच्चों का मूल्यांकन करने पर जोर दिया जा रहा है ताकि बच्चों के शैक्षिक प्रदर्शन में होने वाले बदलाव की सैद्धांतिक व्याख्या हो सके. बदलाव को आँकड़ों में प्रस्तुत किया जा सके. लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव की कोई भी योजना अल्पकाल में शैक्षिक स्तर बढ़ाने जैसे लक्ष्य को हासिल करने के लिए सही रणनीति, बेहतर समझ और ज़्यादा समन्वय के साथ काम करने की जरूरत को महत्व देती है. आज बात बच्चों में सीखने की समस्याओं के समाधान में उठाए जा सकने वाले संभावित क़दमों की….
शिक्षकों की संख्याः विद्यालयों में सीखने का माहौल बनाने और बच्चों को प्रेरित करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. अगर सरल शब्दों में कहें तो स्कूल एक ऐसी जगह है जहाँ छात्र-शिक्षक आपस में विभिन्न शैक्षणिक सामग्री का उपयोग करके संवाद और बातचीत के माध्यम से सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में शामिल होते हैं. अध्यापक अपने अनुभवों को समृद्ध करता है. बच्चे पुराने अनुभवों के ज़मीन पर नए अनुभवों को जोड़ते हुए ज्ञान निर्माण की प्रक्रिया से अवगत होता है. यहाँ वह पढ़ना-लिखना, खुद को अभिव्यक्त करना, बाकी बच्चों के साथ समायोजन करना, खेल और अन्य सामूहिक गतिविधियों में शामिल होने का कौशल विकसित करता है. अगर किसी स्कूल में छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित नहीं है तो बच्चों के सीखने की प्रक्रिया बाधित होती है.
भारत में एकल शिक्षक स्कूलों की स्थिति बताती है कि आने वाले दस-बीस सालों में भी यथास्थिति का यह माहौल टूटने वाला नहीं है. नई नियुक्तियों के लिए सरकार तैयार नहीं है. तमाम पद खाली पड़े हैं. 12वीं पास लोगों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जा रही है, इससे स्थिति ढाक के तीन पात वाली ही बनी रहती है. इसलिए शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दीर्घकालीन रणनीति में छात्र-शिक्षक अनुपात को बेहतर व संतुलित बनाने की दिशा में सरकारी प्रयासों की गति देने की जरूरत है. इसके अभाव में तमाम रणनीति और कार्यक्रम आधे-अधूरे उद्देश्यों की प्राप्ति में ही सफल होंगे. हम यह कह सकते हैं कि अगर सभी बच्चों को शिक्षित करने का उद्देश्य सामने है तो संभव है कि यह उद्देश्य साक्षरता के दायरे से थोड़ा ही आगे बढ़ पाए. देश के लिए मानव संसाधन की गुणवत्ता और भविष्य में वैश्विक स्तर पर चुनौतियों के समाधान की दिशा में इसे बेहतर रणनीति नहीं माना जा सकता है. इस क्षेत्र में पर्याप्त सुधार की गुंजाइश है.

सरकुम:
देश के लिए मानव संसाधन की गुणवत्ता और भविष्य में वैश्विक स्तर पर चुनौतियों के समाधान की दिशा में इसे बेहतर रणनीति नहीं माना जा सकता है. इस क्षेत्र में पर्याप्त सुधार की गुंजाइश है.