Tuesday, April 25, 2017

तेजबहादुर से तेज सोसियल मिडिया


हमारा देश लोकतान्त्रिक देश हैं!विश्व में सबसे बड़ी लोकशाही हमारे देश में हैं! जब भारत का सामान्य चुनाव होता हैं तब विश्व के सबसे अधिक मतदार मतदान करते हैं!हमारे देशमें सभी नागरिको को विचार और वाणी स्वतंत्रता का अधिकार मिला हैं!कोई कुछ भी बोल सकता हैं! आज कल सोसियल मिडिया में ऐसे निवेदन आ रहे हैं!कभी नेताओ के बारें में तो कभी कोई व्यवस्था के बारें में!कई बार तो हम सोचे समजने के अलावा इसे सिर्फ फोरवर्ड करते हैं!

आधुनिक समय में सोसियल मीडिया में कुछ ऐसा दिखता हैं की हम सिर्फ उसे मजाक में ले लेते हैं!यहाँ एक जानकारी देना चाहूँगा की अपने देश में एक बार इमर्जन्सी लगी थी!समग्र देश के सभी विपक्षी नेताओ को जेल में बांध करदिया गया था!उस वख्त कोंग्रेस की सरकार थी!श्रीमती इंदिरा गाँधी प्रधानमत्री थी!इस बात को लेके आज भी राजकीय नेता और पक्ष अपनी बाते करते हैं!उस वख्त ऐसा था!आज ऐसा हैं!मगर एक बात तय हैं की आज एक नया शब्द मिला हैं!इस शब्द को हम सोसियल मिडिया के नाम से जानते हैं!आज भारत में जनसँख्या से अधिक सिमकार्ड उस हो रहे है!

आज ये बात करने का एक अलग अंदाज है! अलग विचार हैं!कुछ दिन पहले एक समाचार मिला हैं!तेज बहादुर नाम के एक सिपाही की यहाँ बात हैं!उन्हों ने खाने के बारेमें शिकायत की थी!उनकी शिकायत में उन्होंने कहा था की हमें खाना अच्छा नहीं मिल रहा हैं!उसने फोटो और वीडियो वायरल किया था!उसने यह विडिओ प्रधानमत्री को शेर किया था!बात चली!भारत सरकार के गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने तुअरांत कारवाही की!चीफ सेक्रेटरी ने इसकी रिपोर्ट बनाई और तेज बहादुर को सस्पेंड किया गया!रिपोर्ट में तेज बहादुर को अनुशाशन हीनता के लिए जिम्मेदार मना गया!बीएसएफ ने अपना एक निवेदन जारी किया!

यहाँ तक अगर देखा जाए तो एक प्रोसेस हैं!फ़रियाद,उसके आधार पर तपास और रिपोर्ट को देखने के बाद निर्णय या सजा!ऐसी प्रोसेस में कोई विरोध नहीं हैं!यहाँ में एक बात पूछूँगा की क्या आपने कभी संसद की केंटिन में खाया हैं!जितने पेसे हम भिखारी को देते हैं सिर्फ उतने पेसो से हमारे गरीब संसद सदस्य केंटिन में खाना खाते हैं! आज बाजपा की सरकार हैं!इस से पहेले किसी और की सरकार थी!आगे भी सरकारे आएँगी मगर बदलेगी!ऐ जो सिपाही तेज बहादूर हैं उसको निलंबित किया गया हैं!सही बात ये हैं की सरकार ने अपने खिलाफ आवाज को दबाने की कोशिश की हैं!इस से पहेले हमारे पुलिस और ऐसी फ़ोर्स के कई जवान मानसिक रूप से परेह्सं हो के आत्महत्या कर चुके हैं!इस वख्त क्यों जिम्मेदार अधिकारी को निलंबित नहीं किया जाता!हमें मरने से बचने वाला सिपाही अगर मरता हैं!किसी का नाम लिख के मरता हैं!उस के खिलाफ न कोई जांच होती हैं न कोई सवाल!बात ये हैं की आज से पहेले भी तेज बहादुर अपनी शिकायत कई बार कर चूका हैं!उसको इतना परेशां किया गया हैं की उसने विआरएस के लिए भी अरजी दे राखी हैं!

कुछ साल पहले की बात हैं!हमारे मिडिया कर्मी जो भी बात चलाते हैं!लोग इसे भूल जाते हैं!थोड़ी बहोत चर्चा होती हैं!आज से कई साल पहले बोफोर्स का गोताला आया था!इसे ऐसे उठाया की दूसरे चुनाव में राजिव गाँधी की सरकार बुरी तरह से हारी!मिडिया ने वाह वाही करली!थोड़े सालो बाद जब कारगिल युध्ह हुआ!हम जीते अटल बिहारी बाजपाई जी उस वख्त प्रधानमंत्री थे!उस चुनाव में उन्हों ने कारगिल की जित को केश करना चाह!हाला की शाइनिंग इण्डिया नहीं चला!मगर पाकिस्तान से जो हम जीते थे उसमें बोफोर्स के ही तोप थे जिस की बजह से हम युध्ह जीते थे!

हमारे सिपाही जो बोर्डर पे लड़ते हैं उनके लिए बखतर ख़रीदे गए यहे!समाजवादी नेता ज्योर्ज फर्नाडिस हमारे रक्षा मंत्री थे!उस समय किसी ने कहा ‘यह बख्तर सही  नहीं हैं!इस की खरीदी में गफला हुआ हैं!मिडिया में बात आई!किसीने पैसा खाया,किसी ने खिलाया!ऐ बात बांध हुई!थोड़े समय बाद किसी पाकिस्तानी हमले में हमारे सिपाही वोही बखतर लेके सामने से आने वाली गोली का इन्तजार कर रहे थे!मगर वो बख्तर ऐसा था की  गोली रुक ने के बजाय आरपार चली गई!इस बख्तर के भरोसे कई सिपाही शहीद हुए!उसकी खरीदी करने वाले नेता और अधिकारी को क्या हुआ!कहा गए हमारे सोसियल एक्टिविस्ट?

अब फिर से तेज बहादुर की बात पे आते हैं!उन्हें निकला गया!सही गलत की बात नहीं हैं!यहाँ बात हैं हमारे मिडिया की!ख़ास कर के सोसियल मिडिया में सक्रीय रहने वाले कई लोग इस से कोमेंट करने लगे!किसी ने लिखा की ‘घर में खाने के बारें में जबान न चलाए!नेता न बने वरना निकल दिए जाओगे!यह गलत हैं!क्या हम इस गंभीर मुद्दे को मजाक में लेंगे!क्या हमारे लिए घर परिवार छोड़ने वाले सिपाही को खाना अच्छा नहीं मिलना चाहिए?

इस बात को दो तरीको से देखते हैं!एक तो ये की तेज बहादूर का जो भी हुआ!इसे हमें एक सरकारी तंत्र के आधार पे समजना चाहिए!दूसरा ये की सिर्फ मजा लेने के लिए हमें ऐसे कोमेंट नहीं करने चाहिए!क्यों...सिर्फ लैक इकठा करना हमारा मकसद हैं!क्या हम कभी हमारी बहन के फिगर के बारेमें कोमेंट करते हैं!क्या हम कभी अपने माँ बाप के बारें में कुछ ऐसा लिखेंगे की जो मजाक बने!क्या तेज बहादुर को मालूम नहीं होगा की उस के उपरी अधिकारी के बारें में वो प्रधानमंत्री को कुछ बताएगा तो प्रधान मंत्री या गृह मंत्री खुद इन्क्वायरी नहीं करेंगे और इसे गुनहगार ठहराया जायेगा!आप सोचभी नहीं सकते की क्या बीती होगी उस परिवार में जिस ने सालो तक अपनी परिवार की जिम्मेदारी छोड़ के देश की सेवा की!क्या उसे ये बदला देना या तेज बहादुर की बात की मजा लेना सही हैं!


आज तो ऐ बात आप तय करें की देश के सिपाही,ऑर्ट और शिक्षा से जुड़े किसी भी मुद्दे को मजाक न बनाया जाए!जब तक ऐसा होगा हम हमारी जिम्मेदारी चुके ऐसा कहा जायेगा! आज से हम संकल्प करें की जिससे हमारे देशवासी ऐसी कोई कोमेंट करें तो हम उसे बढ़ावा न दे!और ऐसी जानकारी को न फेलाए! 

Sunday, April 23, 2017

आप और क्या क्या रखोगे...

एक प्राइवेट स्कुल के संचालक बेठे हैं!उनके सामने एक छोटा बच्चा और उसके पिता जी खड़े हैं!स्कुल बुक्स,किताबें,पेन,पेन्सिल और ड्रेस भी रखती हैं!कई स्कुल में तो हर दिन ड्रेस बदलता हैं!

ऐसा करने से शिक्षा में क्या सुधर होगा वो मालुम नहीं हैं!हां,संचालक को फायदा जरूर होगा!ऐसी सोच और समज को एक छोटे से चित्र के माद्यम से उसने अच्छी तरह पेश किया हैं!इंडियन न्यूज़ मेगेजिनके कार्टोनिस्ट समीर का ये कार्टून पेरेंट्स के साथ प्राइवेट स्कुल के संचालको के साथ भी टेडी मात मगर प्यार से कहते हैं!  
आज के समय में ऐसे चित्रकार अपनी अलग बातें लेके आते हैं और अपनी पहचान बनाते हैं!समीर भिन्न भिन्न विषय के उपर कार्टून बनाके समग्र भारत और विदेशोमें भी अपने कार्टून का मंचन कर चुके हैं!

Saturday, April 22, 2017

अब टीचर बाल काटेंगे!

भारतमें कार्टूनिस्ट को पसंद करना हो तो में अभिषेक को पसंद करूँगा!उनकी सोच ओरो से अलग चलती हैं!आज कल स्कुल में बच्चो और टीचर्स के बिच जो बाते सामने आती हैं!उसमें से एक हैं की प्राइवेट स्कुल वाले कुछ ऐसा करते हैं की वो ज्यादा पैसा इकठ्ठा कर सके!
आज कल तो कई राज्य की सरकार ने भी प्राइवेट स्कुल की फ़ीस को तय करनेका एक कानून बनाया हैं!अब हमारे संचालक क्या करेंगे?
कुछ संचालक ऐसे होते हैं जो पैसा कमाके उसी पैसो से गरीब बच्चो को पढ़ते हैं!आज राईट टू एज्युकेशन ने कहा की 25 % गरीब बच्चे खानगी स्कुल में पढाओ!अच्छे अच्छे अमीरों को मेने गरीब होते हुए देखा हैं!
अभिषेक ने अपने इस विकली कार्टन में एक ऐसीही बात छेडी!बच्चे  पिता को एक छोटे बच्चे की माँ कहती हैं की स्कुल से सूचना मिली हैं की अब मुन्ना के बाल भी स्कुल कहेगी उसी दुकान से कटवाने होंगे!नए सलमें और क्या क्या नया आया हैं!देखेंगे!आप के पास भी ऐसी कोई जानकारी या कार्टून हैं तो मुझे भेजे!

Friday, April 21, 2017

हमने किया...

मेरे कई दोस्त हैं! कोई काम के कारण जुडा हैं!कोई सिर्फ प्यार से जुड़ा हैं और काम करतें हैं!कई पारिवारिक सदस्य हैं!

कुछ एइसे हैं जो परिवार से अधिक हैं!कुछ साथी जो सिर्फ शिक्षा के काम के लिए मुझसे जुड़े हैं! कुछ सिखाने को और सिखाने को जुड़े हैं!
ऐसे साथियों के साथ,कुछ नया करने के बारेंमें सोच रहे थे!हमने सोचा क्यों न एक blog बनाए और इसे सामूहिक तोर पे चलाए!

बीएस सोचा और इसका अमल किया!आज हम इतनी स्फ्रूर्ति से तो नहीं मगर एक अच्छा blog चला रहे हैं! आप भी आपकी बात उसमे रख सकते हैं!सबसे पहले तो मेरा आपसे अनुरोध हैं की आप हमारे blog को एक बार देखें और उसको चलाने के तरीके और एनी जानकारी के लिए हमें मार्गदर्शन दें!आशा रखते हैं!आपको हमारा ऐ छोटासा काम पसंद आया होगा!

वेसेतो हम चाहे वो सब कुछ कर सकते हैं! मगर हम चाहते नहीं हैं!ऐसा क्या हो गया की हमारी कोई ऐसी इच्छा ही नहीं होती की हम क्या करते हैं!या नया क्यों नहीं करते हैं! जेसे जेसे हम साथियो की इस काम के प्रति समाज बढाती हैं!आप मानो हमारा काम सरल हो गया हैं!हमारी जानकारी और उसे सब के साथ शेर करने की जो प्रक्रिया हैं!हम उसे किसी नए तरीके से देखते हैं! आपसे आशा रखते हैं की आप कोई भी जानकारी हो तो कृपया हमे भेजें!
उस जानकारी का हम जहा इस्तमाल करेंगे वहां आप को सन्मान दिया जायेगा!हम नेता नहीं हैं! बच्चो के साथ काम करते हैं!आप भी एक बार बच्चो सा मासूम भरोसा करके हमसे जुडिए!आप से भी नया विचार हम निकलवा लेंगे! 

Thursday, April 20, 2017

ગરીબ છતાં અમીર

એક પતિ-પત્ની ઘઉં તથા મસાલાની ખરીદી કરવા બજારમાં ગયા.
બધો સામાન ખરીદી લીધા પછી એક લાચાર મજૂરને પાસે બોલાવ્યો.
મજુરની આધેડ ઉંમર, છેક ઊંડી ઉતરી ગયેલી આંખો, વધી ગયેલી દાઢી.મેલાંદાટ કપડાં અને દૂરથી ગંધાતો એનો પરસેવો એની સંઘર્ષમય જિંદગીને બેનકાબ કરતા હતા.

આવા મજબૂર મજદૂર પાસેથી મજૂરીની રકમ માટે રકઝક કરી પતિ-પત્નીએ એના કરતા પણ નીચી માનસિકતા પ્રગટ કરી. કચવાતા મને ચાલીસ રૂપિયાનું કામ ત્રીસ રૂપિયામાં સ્વીકારી એ આધેડ સામાન અને સરનામું લઈને પરસેવે રેબઝેબ રવાના થયો. એક ગરીબને મજૂરીમાં દશ રૂપિયા ઓછા કરાવીને રાજી થયેલા પતિ-પત્ની ત્રીસ રૂપિયા એડવાન્સ આપવાની દાતારી કરી બેઠા. 

દંપતી ઘરે પહોંચ્યું. અડધી કલાક થઇ, કલાક થઇ, દોઢ કલાક થઇ, પછી શ્રીમતીએ ધીરેધીરે પતિને ધમકાવવાનું શરૂ કર્યું. "હું તમને કાયમ કહું છું કે અજાણ્યા માણસનો વિશ્વાસ ન કરવો. મેં તમારું હજાર વાર નાક વાઢ્યું છતાં તમારામાં અક્કલનો છાંટો આવતો નથી. જે માણસ રોજ ટંકનું લાવીને ટંકનું ખાતો હોય એને બાર મહિનાનું અનાજ મળી જાય તો મૂકે ? નક્કી એ નાલાયક આપણો સમાન લઈને ઘરભેગો થઇ ગયો હશે. ચાલો, અત્યારે જ બજારમાં જઈને તપાસ કરીએ અને ન મળે તો પોલીસસ્ટેશન જઈને ફરિયાદ કરીએ.

રસ્તામાં પતિ-પત્નીની નજર એક યુવાન મજૂર ઉપર પડી. યુવાન મજૂરને પેલા આધેડ મજૂર વિશે પૂછવા ઉભો રાખ્યો. એની લારીમાં જોયું તો એમનો જ સામાન હતો.પત્ની ગુસ્સામાં બોલી "પેલો ડોસો ક્યાં ?"ત્યારે યુવાન મજૂર બોલ્યો કે "બહેન એ છેલ્લા એક મહિનાથી બીમાર હતા. ભૂખ, બીમારી અને ગરમી એમ ત્રણગણા તાપને સહન ન કરી શક્યા. લૂ લાગવાથી એ રસ્તા પર પડીને મરી ગયા. પણ મરતાં પેલા મને કહેતા ગયા કે મેં આ ફેરાના રૂપિયા લઇ લીધા છે એટલે તું સામાન પહોંચાડી દેજે. હું તો મરતાં માણસનું વેણ પાળવા આવ્યો છું."ગરીબના દિલની અમીરી જોઈને પતિની આંખમાં આંસુ હતા.પરંતુ શરમથી ઝૂકી ગયેલી શ્રીમતીની આંખમાં તો પતિની આંખ સામે જોવાની પણ હિંમત નહોતી.

Wednesday, April 19, 2017

હું એકાંતનો માણસ...

એટલે કોઈને ગમતો નથી...
હું જાત ઘસી નાખતો માણસ,
એટલે કોઈને ગમતો નથી...!

અજાણ્યા પર વિશ્વાસ હું, પોતાનાં જાણી મુકી દઉં ;
હું સાચા બોલો માણસ- એટલે કોઈને ગમતો નથી.

ખુશ રાખી હરકોઈને,
દોસ્ત- રાત આખી હું રડતો,
હું લાગણીનો સાગર, એટલે કોઈને ગમતો નથી.

ઉદાસીના વાદળ ઓગાળી સ્મિત સૌને આપું છું,
હું રહું સદાય મોજીલો, એટલે કોઈને ગમતો નથી!

કોઈને સાથ સંગાથ આપવા,
સૌથી પહેલાં દોડું છું ;
હું છું ખુદનો સથવારો, એટલે કોઈને ગમતો નથી.

અરે, હરાવી પોતાને ,
હું બીજાને જીતાવું છું ;
છતાં મોઢે રાખું મુસ્કાન, એટલે કોઈને ગમતો નથી.

(મારા એક મિત્રએ મોકલેલ કવિતા...)

Tuesday, April 18, 2017

में कूड़ा क्यों रखु!

एक दिन एक व्यक्ति ऑटो से रेलवे स्टेशन जा रहा था। ऑटो वाला बड़े आराम से ऑटो चला रहा था। एक कार अचानक ही पार्किंग से निकलकर रोड पर आ गयी। ऑटो चालक ने तेजी से ब्रेक लगाया और कार, ऑटो से टकराते टकराते बची। कार चालक गुस्से में ऑटो वाले को ही भला-बुरा कहने लगा जबकि गलती कार- चालक की थी। ऑटो चालक एक सत्संगी था। उसने कार वाले की बातों पर गुस्सा नहीं किया और क्षमा माँगते  हुए आगे बढ़ गया। ऑटो में बैठे व्यक्ति को कार वाले की हरकत पर गुस्सा आ रहा था और उसने ऑटो वाले से पूछा तुमने उस कार वाले को बिना कुछ कहे ऐसे ही क्यों जाने दिया। उसने तुम्हें भला-बुरा कहा जबकि गलती तो उसकी थी।

हमारी किस्मत अच्छी है, नहीं तो उसकी वजह से हम अभी अस्पताल में होते। ऑटो वाले ने कहा साहब बहुत से लोग कूड़े से भरे ट्रक की तरह होते हैं। वे बहुत सारा कूड़ा अपने दिमाग में भरे हुए चलते हैं। जिन चीजों की जीवन में कोई ज़रूरत नहीं होती उनको मेहनत करके जोड़ते रहते हैं जैसे क्रोध, घृणा, चिंता, निराशा आदि। जब उनके दिमाग में इनका कूड़ा बहुत अधिक हो जाता है तो वे अपना बोझ हल्का करने के लिए इसे दूसरों पर फेंकने का मौका ढूँढ़ने लगते हैं। 

इसलिए मैं ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखता हूँ और उन्हें दूर से ही मुस्कराकर अलविदा कह देता हूँ। क्योंकि अगर उन जैसे लोगों द्वारा गिराया हुआ कूड़ा मैंने स्वीकार कर लिया तो मैं भी एक कूड़े का ट्रक बन जाऊँगा और अपने साथ साथ आसपास के लोगों पर भी वह कूड़ा गिराता रहूँगा।मैं सोचता हूँ जिंदगी बहुत ख़ूबसूरत है इसलिए जो हमसे अच्छा व्यवहार करते हैं उन्हें धन्यवाद कहो और जो हमसे अच्छा व्यवहार नहीं करते उन्हें मुस्कुराकर माफ़ कर दो। हमें यह याद रखना चाहिए कि सभी मानसिक रोगी केवल अस्पताल में ही नहीं रहते हैं। कुछ हमारे आस-पास खुले में भी घूमते रहते हैं । 
                                                         
खेत में बीज न डाले जाएँ तो कुदरत उसे घास-फूस से भर देती है।
उसी तरह से यदि दिमाग में सकारात्मक विचार न भरें जाएँ तो नकारात्मक विचार अपनी जगह बना ही लेते हैं।दूसरा नियम है कि जिसके पास जो होता है वह वही बाँटता है। "सुखी" सुख बाँटता है, "दु:खी" दुःख बाँटता है, "ज्ञानी" ज्ञान बाँटता है, भ्रमित भ्रम बाँटता है, और "भयभीत" भय बाँटता है। जो खुद डरा हुआ है वह औरों को डराता है।

Monday, April 17, 2017

what इस innovatio

प्रत्येक वस्तु या क्रिया में परिवर्तन, प्रकृति का नियम है। परिवर्तन से ही विकास के चरण आगे बढ़ते हैं। परिवर्तन एक जीवन्त, गतिशील और आवश्यक क्रिया है, जो समाज को वर्तमान व्यवस्था के अनुकूल बनाती है। परिवर्तन जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में होते हैं। इन्ही परिवर्तनों से व्यक्ति और समाज को स्फूर्ति, चेतना, ऊर्जा एवं नवीनता की उपलब्धि होती है।

Innovation is the action or process of innovating.
"
Innovation is crucial to the continuing success of any Organization."

Innovation is a new idea, device or process. Innovation can be viewed as the application of better solutions that meet new requirements, inarticulated needs, or existing market needs.

कहा गया है-

"Change is variation from a previous state or mode of existence."

परिवर्तन अच्छा है या बुरा इस संबंध में शिक्षाविद किल पैट्रिक की स्पष्ट अवधारणा है-
“ परिवर्तन विचाराधीन बात का पूर्ण या आंशिक परिवर्तन है। इसका तात्पर्य यह नहीं है कि परिवर्तन अच्छी बात के लिए है या बुरी बात के लिए।”

इस प्रकार परिवर्तन की प्रक्रिया 
विकासवादी (Evolutionary) 
संतुलनात्मक (Horeostatic) 
एवं नवगत्यात्मक (Heomobilistice)  परिवर्तन से जुड़ी होती है।

परिवर्तन एवं नवाचार एक दूसरे के अन्योन्याश्रित (Inter dependent) है। परिवर्तन समाज की मॉंग की स्वाभाविक प्रक्रिया से जुड़ा तथ्य है। इसलिए परिवर्तन, नवाचार और शिक्षा का आपसी संबंध स्पष्ट है-

“ नवाचार कोई नया कार्य करना ही मात्र नहीं है, वरन् किसी भी कार्य को नये तरीके से करना भी नवाचार है।

नवाचार का शिक्षा पर प्रभाव


व्यक्ति एवं समाज में हो रहे परिवर्तनों का प्रभाव शिक्षा पर भी पड़ा है। शिक्षा को समयानुकुल बनाने के लिए शैक्षिक क्रियाकलापों में नूतन प्रवृत्तियों ने अपनी उपयोगिता स्वंयसिद्ध कर दी है।

ट्रायटेन के अनुसार-

“शैक्षिक नवाचारों का उद्भव स्वतः नहीं होता वरन् इन्हें खोजना पड़ता है तथा सुनियोजित ढंग से इन्हें प्रयोग में लाना होता है, ताकि शैक्षिक कार्यक्रमों को परिवर्तित परिवेश में गति मिल सके और परिवर्तन के साथ गहरा तारतम्य बनाये रख सकें।”

इस प्रकार “नवाचार एक विचार है, एक व्यवहार है अथवा वस्तु है, जो नवीन और वर्तमान का गुणात्मक स्वरूप है।”

Sunday, April 16, 2017

प्रॉब्लम....थिंक....सोल्यूशन...

वर्तमान समय में शिक्षा पूर्णतया निःशुल्क एवं बालकेन्द्रित है। हमारी सरकार के द्वारा विद्यालय को सभी भौतिक सुविधायें उपलब्ध करायी जा चुकी हैं, जैसे -विद्यालय भवन, विद्युत व्यवस्था, पाठ्यपुस्तकें, स्कूल यूनीफार्म, मध्यान्ह भोजन, छात्रवृत्ति, शिक्षण अधिगम सामग्री के लिए धनराशि आदि।
यह सत्य है इन सभी सुविधाओं से विद्यालयों में छात्र नामांकन संख्या में अति वृद्धि हुई है। परन्तु गुणवत्तापरक शिक्षा में अभी भी आशानुरूप सफलता नहीं मिली है। जहॉं संख्यात्मक वृद्धि (quantity)होती है, वहां गुणात्मक वृद्धि (quality) में कमी आ जाती है। इस कमी को दूर करने के लिए आवश्यक है कि कक्षा में रूचिपूर्ण शिक्षण पद्धति अपनाई जाये जैसे- भ्रमण विधि, खेल विधि, कहानी विधि, प्रदर्शन विधि, करके सीखना, प्रोजेक्ट विधि, केस स्टडी विधि तथा विभिन्न  प्रकार की अन्य शैक्षिक गतिविधियांॅ आदि।

इस सीरीज  के माध्यम से प्रोजेक्ट विधि एवं केस स्टडी विधि पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला जाएगा। इन नवाचारी शिक्षण पद्धतियों से शिक्षण कार्य करने में  अध्यापक एवं बच्चों दोनो के लिए ही शिक्षण अधिगम एक रूचिपूर्ण प्रक्रिया बन सकेगी। इन पद्धतियों में शिक्षक एक सलाहकार / सुगमकर्ता के रूप में कार्य करेगा तथा छात्र को कार्य करके सीखने का अवसर प्रदान करेगा। इस प्रकार राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 के प्रमुख उद्देश्य हैं, कि बच्चों के पुस्तकीय ज्ञान को उनके बाहरी जीवन से जोड़ा जाये, यह उद्देश्य भी इन पद्धतियों से प्राप्त हो सकेगा। भयमुक्त वातावरण में छात्र स्वतंत्र होकर अपना कार्य सुगमता से कर सकता है। जिससे उनमें  अभिव्यक्ति, अन्वेषण, निर्णय लेने, स्व मूल्यांकन करने की क्षमता तथा सृजनात्मक, रचनात्मक, आत्मविश्वास आदि कौशलों का विकास हो सकेगा।

प्रोजेक्ट विधि: 


प्रोजेक्ट (योजना) विधि शिक्षण की नवीन विधि मानी जाती है। इसका विकास शिक्षा में सामाजिक प्रवृत्ति के फलस्वरूप हुआ। शिक्षा इस प्रकार दी जानी चाहिए जो जीवन को समर्थ बना सके। इसके प्रवर्तक जान ड्यूबी के शिष्य डब्ल्यू0एच0 किलपैट्रिक थे। यह विधि अनुभव केन्द्रित होती है। यह बालकों के समाजीकरण पर विशेष बल देती है।

योजना विधि में छात्रों के जीवन से संबंधित समस्याओं को वास्तविक रूप में प्रस्तुत किया जाता है। छात्र समस्या की अनुभूति करते हैं। समस्या समाधान की योजना तैयार की जाती है। इसके लिए अनेक सूचनाओं को एकत्रित किया जाता है। शिक्षक केवल निर्देशक / सुगमकर्ता का कार्य करता है। छात्र स्वंय विषय वस्तु सामग्री का अध्ययन करके समस्या का समाधान करते है।

विद्यार्थियों को क्रियात्मक रूप से विभिन्न विषयों का ज्ञान प्राप्त करने की दिशा में योजना पद्धति (प्रोजेक्ट मेथेड) का बहुत महत्व है। इस पद्धति की विशेषताओं को जानने से पहले हमें इसकी आवश्यकताओं तथा योजना शब्द के अर्थ से परिचित होना आवश्यक है।

केस स्टडी विधि :

शिक्षा तकनीकि के आर्विभाव तथा विकास के साथ शिक्षा की प्रक्रिया में अनेक परिवर्तन हुए तथा नये आयामों का विकास हुआ। पिछले 25 वर्षो के अन्तराल में कक्षा शिक्षा में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए है। छात्रों की उपलब्धियों में स्थान, कक्षा-शिक्षण के स्वरूप, प्रक्रिया, अनुदेशन प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गयी है क्योंकि छात्रों की उपलब्धियों इन्हीं पर आश्रित होती है। शिक्षक छात्रों की व्यक्तिगत भिन्नता को शिक्षण में महत्व देते है। व्यक्तिगत भिन्नता को जानते हुए व्यक्तिगत अध्ययन की आवश्यकता होती है।

बालक की भिन्नताओं के होते हुए भी प्रकृति तथा स्वभाव संबंधी सामान्य विशेषताए होती है। बालक के द्वारा अनुभव किये जाने योग्य अमूर्त वस्तुओं के अध्ययन के लिए कतिपय प्रविधियां विकसित की गयी है। इनमें से केस स्टडी प्रमुख है।





संक्षेप में कहा जा सकता है कि नवाचार शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से बच्चों का सर्वांगीण विकास तो होगा ही साथ ही उनका सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन भी हो सकेगा।


Saturday, April 15, 2017

इन शोध:1 रुचा भावेश

પાલનપુર સ્થિત વિદ્યામંદિર સ્કુલ માં અભ્યાસ કરતી ઋચા પંડ્યા.હાલ ધોરણ દસમાં અભ્યાસ કરે છે.સંગીતના શોલ્હ સાથે ઈલેક્ટ્રોનિક મીડિયામાં કારકિર્દી બનાવવાનું વિચારતી ઋચા નવતર વાતોને સમજવા અને તે માટે કશુક પ્રયત્નો કરવાનું તે સતત ચાલુ રાખે છે.
સહ અભ્યાસિક પ્રવૃત્તિઓ અને સમાજ સેવાના કામ કરવાનું તેને ખૂબ જ ગમે છે.પરિવારમાં નાની બેન અને મમ્મી પપ્પા સાથે તે ડીસા રહે છે.સંગીતમાં ગાયન અને વાદ્યમાં પોતાની અનોખી કુનેહ ધરાવનાર ઋચાને ભણવા કરતાં સહ અભ્યાસિક પ્રવૃત્તિમાં વધારે રસ છે.આસપાસ બનતી ઘટનાઓ અને તે અંગેની બાબતોનો અબ્યાસ કરવાનું વિશેષ શોખ ધરાવતી ઋચા નાની નાની સમસ્યાઓ માટે નાના નાના વિચારો કરવાનું સતત ચાલુ રાખે છે.
એક વખત એવું બન્યું.તેની સોસાયટીમાંથી એક ગાડીની ચોરી થઇ.પોલીસની કાર્યવાહી કરી પરંતુ ચોર પકડી ન શકાયા.ક્રીમ પેટ્રોલ અને એવી સીરીયલમાં મોબાઈલ લોકેશન ધ્વારા ગુહ્નો ઉકેલવામાં પોલીસને તેણે જોઈ હોઈ તેને એક વિચાર આવ્યો.ઋચાના કહેવા મુજબ જો ગાડી બનાવનાર કંપની ગાડી બનાવે ત્યારે જ તેમાં એક સીમકાર્ડ ફીટ કરીને જ આપે.આ સીમકાર્ડ એ રીતે ફીટ કરવું કે અન્ય કોઈને તે નાગે સમજ ન પડે.આ સીમકાર્ડનો નંબર તેની  ગાડી ખરીદનાર ને આપવાનો.આ ગાડીમાં આપેલ સીમકાર્ડનો નંબર ગાડીની આર.સી.બુકમા લખીને આપી શકાય. આ રીતે ખૂબ જ સરળ રીતે દરેક ગાડીને ટ્રેક કરી  શકાય.આમ જ્યારે આધુનિક સમયમાં ગાડીઓ અને ચોરીના બનાવ વધી રહ્યાં છે ત્યારે આ વિચાર ખૂબ જ અસરકારક બની શકે.આધુનિક સમયમાં મોટી અને મોઘી ગાડીઓ અને ગાડીની ચોરી બાબતે જે સમસ્યાઓ જોવા મળે છે.આ સમસ્યાના સમાધાન માટે અહી એક નવો જ વિચાર આપવામાં આવેલ છે.
ઋચાના જણાવ્યા મુજબ જૂની કે જીપીએસ વગરની ગાડીના માલિકો પણ કોઈ એક સીમકાર્ડની ખરીદી કરીને પોતાની ગાડીમાં રાખે.આમ કરવાથી તેમની ગાડી ચોરાય તોય ગાડીમાંના સીમકાર્ડને આધારે તે ગાડી સુધી પહોંચી શકાય.સમગ્ર ગુજરાતથી આવેલ અનેક નવતર વિચારો પૈકી ઋચાનો નવતર વિચાર આઈ.આઈ.એમ ખાતે આઈડીયા કોમ્પીટીશન માટે અંતિમ સોળ વિચારમાં પસંદ થયો.વંદે ગુજરાત ચેનલનો પ્રોમો ગાવા ઉપરાંત અનેક કાર્યક્રમના નિર્માણમાં સહયોગ કરી પ્રોફેશનલ ઓળખ ઊભી કરનાર ઋચા પંડ્યાને શુભકામના.