Sunday, September 15, 2019

स्किल है तो क्या करे?




15 ऑक्टोबर
भारत रत्न अब्दुल कलाम जी का जन्म दिवस। पिछले 9 सालों से हम उसे बच्चो के साथ मना रहे हैं। इस बार 15 ऑक्टोबर 2019 को हम फिरसे नॅशनल कोन्फ्रंफ बच्चो के लिए करेंगे। 7स्किल फाउंडेशन के चेरमेंन श्री प्रवीणजी माली नॅशनल के लिए बड़े उत्साहित हैं।जो हमे प्रेरणा एवं सहयोग के साथ मार्गदर्शन दे रहे हैं। इस बार आयोजन कुछ बड़ा हैं।हम गुजरात में चार प्रांतीय और एक स्टेट लेवल की क्रिएटिविटी की कार्यशाला करेंगे। इन पांच में से हम पचास बच्चो को सन्मानित करेंगे। अन्य स्तर या स्किल के साथी भी निराश न हो। हमारी तय की गई 7 स्किल जैसे...

1.खुद करना

🥇
खुद करे...

जैसे सबसे तेज लिखना
ड्राइंग बनाना
तबले बजाना
उलटे पैर चलाना
खाना खाना
खुद जो कर पाए जैसे...

चित्र बनाना
रंगोलो बनाना
Act...

2.निखार लाना

🥇🥇
निखार करे...


सर्जनात्मक
सुशोभन
ब्युटिटिप्स
हेर डिजाइन
सेल्फ क्रिएशन(कविता,शायरी,वार्ता,गीत)

Act...

3.वाद संवाद

🥇🥇🥇
लींन रहे

जैसे
योगा
कराठे
कोई भी खेल
ध्यान
योग
सिद्धि
विशेष सिद्धि

4.लींन रहना

🥇🥇🥇🥇
लींन रहना

जिस में 3 और चार दोने के  प्रकार समाये जा सके हैं।

5.पहचानना

🥇🥇🥇🥇🥇

पहचानना
संग्रहित करना
नाव सर्जन कर के नया बनाना
पहचान पाना(सभी देशों के पाट नगर)पुरानी चीजो में नई टेक्निक या विचार जोड़ना।

6.नाटक नाटक

🥇🥇🥇🥇🥇🥇

नाटक नाटक से सीधा मतलब हैं।

जय से

माइम
अभिनय
एकपात्र
विषभूषा
स्टेज शो

Act...

7.राग रागिनी

🥇🥇🥇🥇🥇🥇🥇

राग रागिनी

जिसमे संगीत गायन और वाद्य के साथ विशेष कौशल्य प्राप्त करने वालो के लिए यह विभाग हैं।
उसमें भी हर स्किल के 3 व्यक्तिको यानी 21 लोगो को नॅशनल लेवल पे सन्मानित करेंगे।

नए विचार खोजने हेतु इसे पढ़े...


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हम मूर्ख है...



एक बार एक अजनबी किसी के घर गया । वह अंदर गया और मेहमान कक्ष में बैठ गया । वह खाली हाथ आया था तो उसने सोचा कि कुछ उपहार देना अच्छा रहेगा । उसने वहाँ टंगी एक पेन्टिंग उतारी और जब घर का मालिक आया ।उसने पेन्टिंग देते हुए कहा, यह मै
आपके लिए लाया हूँ । घर का मालिक, जिसे पता था कि यह मेरी चीज मुझे ही भेंट दे रहा है, सन्न रह गया । अब आप ही बताएँ कि क्या वह भेंट पा कर, जो कि पहले से ही उसका है, उस आदमी को खुश
होना चाहिए ?

मेरे ख्याल से नहीं । लेकिन यही चीज हम भगवान के साथ भी करते हैं । हम उन्हें रूपया, पैसा चढाते हैं और हर चीज जो उनकी ही बनाई है, उन्हें भेंट करते हैं । लेकिन मन  में भाव रखते है की यह चीज मै भगवान को दे रहा हूँ और सोचते हैं कि ईश्वर खुश हो जाएगें ।

मूर्ख हैं हम। हम यह नहीं समझते कि उनको इन सब चीज़ों की कोई जरुरत नहीं । अगर आप सच में उन्हें कुछ देना चाहते हैं तो अपनी श्रद्धा दीजिए, उन्हें अपने हर एक श्वांस में याद कीजिये और विश्वास कीजिए, प्रभु जरुर खुश होगें ।

अजब हैरान हूँ भगवन्,
तुझे कैसे रिझाऊं मैं ।
कोई वस्तु नहीं ऐसी,
जिसे तुझ पर चढाऊं मैं ।

भगवान ने जवाब दिया : संसार की हर वस्तु तुझे मैनें दी है । तेरे पास अपनी चीज़ सिर्फ़ तेरा अहंकार है, जो मैनें नहीं दिया। उसी को तू मेरे अरपण कर दे । तेरा जीवन सफल हो जायेगा।


#एक विचार

क्यों हम आगे का सोचकर दुखी होते है? हमे भी 'सरकार' की तरह पंच वर्षीय योजना अपने जीवन में अमली करनी चाहिए।

Monday, July 15, 2019

नवाचार क्या और कहां...



हम सोचते हैं।
क्या हम नया सोचते हैं।
नया सोचने के लिए क्या चाहिए?
सवाल का जवाब हैं समस्या। कुछ भी हो नया सोचने के लिए समस्या कहाँ मिलेगी?ये भी एक बढ़िया सवाल हैं। हमे समस्या आसपास ऐ ही मिलेगी।

जैसे...

काम करते लोगो के पास।
नये बांधकाम की साइडों पर।
सोसायटी या गाव के चौराहे पर।

जैसे समजीए...

पहले पेन्सिल आती थी। कुछ सालों से साथ में पीछे रब्बर भी आता हैं। ये विचार किसने किया होगा? 

अगर गाडी के आगे और पीछे वाइपर है तो साइड में क्यों नहीं? वजनदार भारिखम तिजोरी को घर में फिक्स करते समय क्या हालत होती हैं? बूढ़े लोग चीजे भूल जाते हैं। 

सवाल और समस्या हर किसी को नहीं दिखती। इस के लिए हमे प्रयत्न करना चाहिए की हम समस्या देख सके। समझ सके और उस के सामने का जवाब भी खोज सके।

7स्किल फाउंडेशन एक ऐसा राष्ट्रिय नवाचार एवं स्किल का शोधक जूथ हैं जो आप के नवाचार और स्किल दोनों को प्रस्थापित करने का काम करेंगी।

आप अपने विचार 


संयोजक
7स्किल फाउंडेशन
गुजरात

Tuesday, May 28, 2019

घर में वाहन हैं...अवश्य पढ़ें...

आजकल के समय में लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट में यात्रा करना पसंद बेहद कम करते हैं। क्योंकि आजकल के समय में लोग अपना वाहन खरीदने में ज्यादा ठीक समझते हैं. लेकिन अब दोपहिया वाहनों के लिए कल से पूरे देश में 2 नियम लागू होंगे तो, इस खबर को आखिर तक जरूर पढ़े. आज के शीर्षक के मुताबिक जिनके घर में है बाइक और स्कूटी उनके लिए बुरी खबर पूरे देश में लागू होंगे तो नियम है।

तो चलिए जानते हैं उन दो बड़े नियमों के बारे में

सबसे पहले हम आपको बताते हैं कि, अगर आप भी बाइक और स्कूटी या किसी भी प्रकार का अन्य दो पहिया वाहन चलाते हैं तो, आपको यह खबर आखिर तक जरूर पढ़नी चाहिए तो, चलिए हम आपको सबसे पहले नियम के बारे में बताते हैं जो, कल से लागू हो जाएगा। दरअसल दोपहिया वाहनों पर व्यक्तिगत बीमा कवर ₹200000 की क्लेम राशि हुआ करती थी लेकिन अब इस को बढ़ाकर ₹1500000 कर दिया गया है।

दूसरा बड़ा फैसला भी जान लीजिए...

अब आपको दूसरे बड़े फैसले के बारे में बताते हैं। दरअसल अब आपको दो पहिया वाहन खरीदने के लिए 5 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस लेना अनिवार्य हो जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता देते हैं कि हमने इस विषय के बारे में बुरी खबर इसलिए बताइ। क्योंकि अब आपको इन दोनों चीजों के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे।

Saturday, May 25, 2019

“छत्तीसगढ़ में आठवीं के बच्चे ऐसे क्यो?

इस दौर में हम ज्ञान द्वारा सत्य की सुंदरता और सहजीवन को सींचने के बदले आत्ममुग्धता में डूब रहे हैं। इन परिस्थितियों के लिए शिक्षा भी उत्तरदायी है। वह विकास की अनुगामी बन चुकी है। शिक्षा जिस विकास की अनुगामी है उसका अर्थ बढ़ोत्तरी है। इस बढ़ोत्तरी को धन या संपत्ति के रूप में संग्रहित कर सकते हैं। इसके आधार पर कम या ज़्यादा का निर्णय कर सकते हैं। ऐसे सामाजिक विभाजन कर सकते हैं जिसमें एक समूह के पास विकास का परिणाम होगा और दूसरे के पास इसका अभाव होगा। इस पृष्ठभूमि में स्थापित कर दिया गया है कि शिक्षा जैसे औजार इस विकास में सहयोग करेंगे।

भारतीय परंपरा में आर्थिक और सामाजिक पर्यावरणीय विकास एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। हम विचार और वस्तु में दोहन का संबंध देखने के बदले सृजन और सहअस्तित्व का रिश्ता बनाते हैं। ऐसी शिक्षा के लिए केवल औपचारिक प्रयासों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता है। हमारे घर, समुदाय और सांस्कृतिक गतिविधियां भी शिक्षित करने का माध्यम हैं। हमें इन माध्यमों और अपनी भूमिकाओं पर विचार करने की ज़रूरत है।

हमें सोचना होगा कि खुद शिक्षित होने के बाद अपने बच्चों को शिक्षित करने के दौरान हम शिक्षा की प्रक्रियाओं से जुड़ने और उसमें योगदान करने का कितना प्रयास करते हैं।

हमें स्कूल जो बता देता है, उसे हम मान लेते हैं। हम मन लेते हैं कि स्कूल जो भी करता है हमारे बच्चों की भलाई के लिए करता है लेकिन इस ‘भलाई’ के कार्य में आपके योगदान का क्या? हमारी भूमिका ‘सामान’ खरीदने वाले ग्राहक की तरह होती जा रही है जो केवल सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास करता है।

हिन्दुस्तान में स्कूलों को इस बात से कोई मतलब ही नहीं है कि बाहर उनके स्कूल के बच्चे क्या कर रहे हैं। यही हाल अभिभावकों का भी है, जिन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि स्कूल में उनके बच्चे क्या कर रहे हैं। अभिभावक और स्कूल के बीच संवाद बहुत कम होता जा रहा है।

विचार कीजिए कि आप पढ़ने-पढ़ाने के अलावा बच्चे के संसार के बारे में जानने की कितनी कोशिश करते हैं। हमारी दिनचर्या में बच्चों से बात करने का कितना हिस्सा है? कब हम उनके मीठे व कड़वे अनुभव से खुद को जोड़ते हैं? कब उनसे दुनियादारी की बातें करते हैं? कब स्कूल से हम उसकी गतिविधियों के बारे में सवाल करते हैं? स्कूल कब बच्चे के अनुभवों के बारे में अभिभावक को बताता है? कब अभिभावक और शिक्षक बैठकर बच्चे की कमज़ोरी और मज़बूती पर चर्चा करते हैं? इन सारे सवालों को हम केवल स्कूल के भरोसे नहीं छोड़ सकते हैं।

ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के दौर में ज्ञान केवल उत्पादन का साधन नहीं है, बल्कि उत्पादन के अन्य संसाधनों को डिक्टेट करने वाला निवेश है। अर्थ प्रधान दुनिया में शिक्षा एक वस्तु के समान बन चुकी है जो आर्थिक लाभों के उद्देश्य से उपयोग में लाई जा रही है।  हमारा ध्यान केवल उन्हीं दक्षताओं पर है जो उत्पादन व्यवस्था के लिए उपयोगी है। इसी व्यवस्था का प्रमाण है कि औपचारिक शिक्षा व्यवस्था हर क्षेत्र के लिए विशेषज्ञता का प्रमाणपत्र बांट रही है।

#Bno...

छत्तीसगढ़ से में अवगत हु।
2010 ओर 11 के बीच वहाँ काम किया हैं।
ये समस्या का समाधान भी वहां के एक अधिकारी ने किया था। उनके बारे में फिर कभी।

Friday, May 24, 2019

विजया मुले


जो दूरदर्शन को नजदीक से फॉलो करते रहे हैं, उन्हें टीवी का मशहूर ऐनिमेटेड गाना ‘एक चिड़िया अनेक चिड़िया’ बेशक याद होगा। 80 दशक के अंत और 90 की शुरूआत में यह गाना घर-घर पॉपुलर हुआ था। गाने को रोजाना दूरदर्शन पर प्रसारित किया जाता था। इस फेमस गाने का निर्देशन कर मशहूर हुईं फिल्ममेकर विजया मुले का 98 साल की उम्र में रविवार को उनके दिल्ली स्थित आवास पर निधन हो गया।

विजया मुले इस 7 मिनट की फिल्म के कारण ही लोगों के दिलों में जगह नहीं बनाई थी बल्कि वह अपने अन्य कामों के लिए भी मशहूर हैं। मुले को बेस्ट सिनेमा राइटिंग के लिए नेशनल अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। यह केवल फिल्ममेकर नहीं बल्कि फिल्म हिस्टोरियन भी थीं।

मुले ने डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकिंग में भी हाथ अजमा चुकी हैं।। कहा जा जाता है कि विजया मुले पूर्व दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की करीबी दोस्त भी थीं। मुले पटना फिल्म सोसायटी की फाउंडर मेंबर भी रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली फिल्म सोसायटी में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। फिल्मों के अलावा मुले ने शिक्षा क्षेत्र में भी काम किया था।

Wednesday, May 22, 2019

સમજે કોણ...



પ્રેમનો પણ કેવો અનોખો છે. પ્રેમ એટલે લાગણી અને આત્મિયતા.દરેક વ્યક્તિ જેને  પોતાના સમજતો હોય તેવા સૌને પ્રેમ કરે છે. પરંતુ જીવનના સંબંધમાં એક સંબંધ એવો પણ હોય છે. જેમાં લોહીનો સંબંધ ન હોવા છતા અન્ય સંબંધ કરતા વિશેષ હોય છે. આ સંબંધમાં ક્યારેક નોક-જોખ, મજાક-મસ્તી ચાલતું જ હોય છે અને આમ જ જીવનની ગાડી ચાલ્યા કરે છે.

લાઇફ પાટર્નર સાથેના સંબંધમાં ક્યારેક કોઇ વાતને લઇને મતભેદ સર્જાતા હોય છે. પાર્ટનરમાંથી કોઇને જો ગુસ્સો આવે ત્યારે તેમના વડે કંઇક બોલાઇ જાય છે.

ઘણી વખત તમારા પાર્ટનરને ખરાબ પણ લાગી શકે છે. તો આવી પરિસ્થિતીમાં થોડા સમય બાદ ભૂલ કરનારે પોતાની ભૂલ સ્વીકારીને માફી માંગી લેવી જોઇએ. 

કેટલીક વ્યક્તિ માને છે, અમે એકબીજાને પ્રેમ કરીએ છીએ તેથી એકબીજાના સ્વભાવને પણ ઓળખીએ છીએ. તેથી ક્યારેય અમને ખોટું નથી લાગતું. ઘણી વ્યક્તિ એમ પણ કહે છે કે પોતાની વ્યક્તિ પાસે થોડી માફી મંગાય. કેટલીક વ્યક્તિ ને એમ જ હોય છે કે આ વખતેય મારી જ જીત થશે. તો આવા વ્યક્તિને કહેવું છે કે બિલકુલ માફી માંગવી જ જોઇએ. શક્ય છે કે સામે વાળાએ જ્યારે જ્યારે sori કીધું હોય ત્યારે તેને સબંધ ને મહત્વ આપ્યું હોઈ શકે.

સામાન્ય રીતે કોઇ વ્યક્તિ સામે છીંક ખાઇએ, કે કોઈને રસ્તામાં ભટકાઇ જઇએ તો એક શિષ્ટાચારના ભાગરૂપે આપણે સોરી શબ્દ કહીએ છીએ. તો સાવ અજાણી કે જાણીતી વ્યક્તિને પણ તમે સોરી કહીને દિલગીરી વ્યક્ત કરી શકતા હોઇએ તો તમારે તમારી ભૂલ માટે જે વ્યક્તિને પ્રેમ કરો છો તેની આગળ તો પોતાની દિલગીરી વ્યક્તિ કરવી જ જોઇએ.

ઘણી વખત મનથી આપણે દિલગીર હોઇએ, અને આશા રાખીએ પાર્ટનર તેને સમજે તો એ શક્ય ન પણ બને. મનમાં વિચારવા કરતાં, થોડા સમય અબોલા રહે, અને સંબંધમાં દૂરી વધે તે પહેલા જ પોતાની ભૂલનો સ્વીકાર કરી લેવો જોઇએ. પછી એમ કહેવાય કે મને ડર હતો કે હું આ વિગત કેવી રીતે જણાવું. તમે એ ન સાંભળી શકો.એ માટે તમને એ વાત ન કરી.

 માફી માંગવાથી કોઇ વ્યક્તિ નાની કે મોટી નથી થઇ જતી, પરંતુ પોતાની ભૂલનો સ્વીકાર કરવાથી સંબંધમાં વિશ્વાસ, પ્રેમ વધુ ગાઢ બને છે. તે સાથે લાઇફ પાર્ટનરના મનમાં તમારા માટે માન વધશે. તેથી જ્યારે પણ ભૂલ સમજાય ત્યારે માફી માંગી લેવી જોઇએ. કોઈએ એક વખત પાર્ટનરે કીધું હોય કે તું જે છે મારા લીધે જ છે. મારા વડે,મારા ઉપયોગ થકી આપ આટલે છો. જો સત્ય હોય તો સ્વીકારવું જ પડે. આપના પાર્ટનરે આવું આપને ગુસ્સામાં કહ્યું હોય. અહીં વિચાર એ કરવો કે પાર્ટનર ને આટલો ગુસ્સો આવ્યો કેમ?

જ્યારે જીવનનો હિસ્સો એવો પાર્ટનર કોઈ ભૂલ સ્વીકારી લે અને તમે એને એ જ ભૂલ માટે સતત વાગોવો કે વારંવાર કહી સંભળાવો ત્યારે સામેની વ્યક્તિ ગમેતે બોલવા માંડે. ઘર કે ગાડીમાંથી ગેટ આઉટ કહ્યું હોય તે વાત મિત્ર ભૂલી જાય અને તમે સતત એ મિત્રને દરેક વાતે ખોટા સાબિત કરો ત્યારે ભૂલ થયા કરતાં તેના સ્વીકાર ને ન માનનાર અભિમાની હોઈ શકે.