Wednesday, June 3, 2020

आप देखे, इसे खुद न करे


गमती निशाल

जहाँ में काम करता हु।
जहा में बच्चो के साथ काम करता हु। बच्चो के साथ काम करते हुए में भी खुद सिखाता हूँ ।हमारी स्कुल में एक प्रयोग हम करते हैं । प्रयोग ऐसा हैं की कुछ बच्चे करते है, कुछ हमे भी करना पड़ता ।हैनिस में एक बात ऐसी हैं की हम शिक्षक तीन और बच्चे साठ से अधिक हैं । हम रोज बच्चो को कुछ नया करने को कहते हैं। जब 20 बाते बच्चे नई करते है,तब हमारी  एक बारी बनती हैं। आज मेरी बारी थी। बच्चे तो बहोत कुछ नया दिखाते थे,मुझे भी कुछ ऐसा करना था,जो मेने कर दिखाया। आप भी देखे और इसे पसंद आने पर शेर करें।मगर मेरा अनुरोध हैं की आप इसे देखकर सीधा करने न  बेठे । मेने जो किया उसे आप को करने की जरूरत नहीं हैं। अगर आप को करना है तो पहले मुझसे एक बार बात करले।

कहते हैं जब जुकाम होता हैं तब नाक में से पानी निकलता हैं । यहाँ भी मेरे नाक से पानी निकल रहा हैं, कही ऐ की में मेरे नाक में पानी दाल रहा हु जो नाक की दूसरी और से निकल रहा हैं ।आपभी इसे क्र सकते हैं । जी से शारदी रहती हैं, शिर दर्द रहता है उन के लिए ये महत्त्व पूर्ण उपचार हैं । में फिर से अनुरोध करता हु की इसे करने से पहले आप मुज से पूर्ण जानकारी प्राप्त कराले और बाद में इसे करे ।

मेरे इस प्रयोग को देखने के लिए आप  यहाँ क्लिक  करें ।

मेरा संपर्क करने हेतु:

मोबाइल: 099250 44838

email : bhaveshpandya2008@gmail.com 

બહુ શ્રેણીય શિક્ષણ અને નવાચાર


આપણી આસપાસ અનેક પ્રકારની શિક્ષણ વ્યવસ્થા અંગે આપણે જાણીએ છીએ. આમ જોવા જીએ તો શાળાને આપણે શિક્ષણ માટેનું સ્થાન કહીએ છીએ. મોટી મોટી વાતો કરાવી હોય તો શાળા એ ગામનું ઘરેણું  છે.ગામનું મંદિર કે એવી અનેક વાતો આપણે કરીએ છીએ. સાદી રીતે સમજવા જઈએ તો મુખ્યત્વે બે પ્રકારની શાળાઓ હોય છે.કેટલીક શાળાઓમાં શિક્ષક અને વિદ્યાર્થીઓનું પ્રમાણ ચોક્કસ અને નિયમ મુજબનું હોય છે. કેટલીક શાળામાં વિદ્યાર્થીઓ વધારે કે શિક્ષકો ઓછા હોય છે.આમ વિવિધતા ધરાવતી શાળાઓ વચ્ચે શિક્ષણ કાર્ય કરવામાં આવે છે.ઓછા શિક્ષકો અને વધારે બાળકો એ માત્ર આપણા ગુજરાતની જ નહિ,સમગ્ર દેશ અને દુનિયાના તમામ દેશની આ સમસ્યા છે. શિક્ષકો ઓછા અને વિદ્યાર્થીઓ વધારે હોય તે સમયે બે બાબતો હોઈ શકે.

જેમાં એક જ ધોરણમાં નિયત કરતાં વધારે સંખ્યા હોય. બીજી સમસ્યા એ છે કે વિદ્યાર્થીઓની  સંખ્યા  ઓછી હોય ત્યારે એક શિક્ષક ને એક કરતાં વધારે ધોરણ સાથે શિક્ષણ કાર્ય કરવું પડે.આ પરિસ્થિતિને MGML  એટલે કે મળતી ગ્રેડ મળતી લેવલ તરીકે આ સસસ્યને જોઈ ઓળખી શકાય છે. આ માટે કે આવી સ્થિતિમાં શું કરી શકાય તે અંગેનો એક કાર્યક્રમ થયો. કમાંડ એન્ડ કંટ્રોલ સેલના માધ્યમથી દર શનિવારે રજુ થતા વિશેષ કાર્યક્રમમાં બહુ શ્રેણીય શિક્ષણ અંગેનો એક વિડીયો આપ જોઈ શકો છો.

માનનીય શ્રી વિનોદ રાવ સરના માર્ગદર્શન અને શ્રી ધર્મેશ રામાનુજ અને શ્રી પ્રકાશભાઈ ભટ્ટીના વિશેષ સહયોગ થકી આ કામ શક્ય બન્યું છે તેમને હું આ તબક્કે યાદ કરું છું.

આપ આ વિડીયો જોવા માટે અહીં ક્લિક કરો. 
આ વિડીયો અંગેના આપણા વિચારો અને સૂચનો આપ મણે મોકલશો તો ગમશે.
આપના વિશેષ સુચન કે મુંજવણ  માટે આપ ટેલીફોન કે મેલ દ્વારા સંપર્ક કરી શકશો.




Wednesday, March 25, 2020

ब्राह्मण और जनेउ


पिछले दिनों मैं हनुमान जी के मंदिर में गया था जहाँ पर मैंने एक ब्राह्मण को देखा, जो एक जनेऊ हनुमान जी के लिए ले आये थे | संयोग से मैं उनके ठीक पीछे लाइन में खड़ा था, मेंने सुना वो पुजारी से कह रहे थे कि वह स्वयं का काता (बनाया) हुआ जनेऊ हनुमान जी को पहनाना चाहते हैं, पुजारी ने जनेऊ तो ले लिया पर पहनाया नहीं | जब ब्राह्मण ने पुन: आग्रह किया तो पुजारी बोले यह तो हनुमान जी का श्रृंगार है इसके लिए बड़े पुजारी (महन्थ) जी से अनुमति लेनी होगी, आप थोड़ी देर प्रतीक्षा करें वो आते ही होगें | मैं उन लोगों की बातें गौर से सुन रहा था, जिज्ञासा वश मैं भी महन्थ जी के आगमन की प्रतीक्षा करने लगा।

थोड़ी देर बाद जब महन्थ जी आए तो पुजारी ने उस ब्राह्मण के आग्रह के बारे में बताया तो महन्थ जी ने ब्राह्मण की ओर देख कर कहा कि देखिए हनुमान जी ने जनेऊ तो पहले से ही पहना हुआ है और यह फूलमाला तो है नहीं कि एक साथ कई पहना दी जाए | आप चाहें तो यह जनेऊ हनुमान जी को चढ़ाकर प्रसाद रूप में ले लीजिए |

 इस पर उस ब्राह्मण ने बड़ी ही विनम्रता से कहा कि मैं देख रहा हूँ कि भगवान ने पहले से ही जनेऊ धारण कर रखा है परन्तु कल रात्रि में चन्द्रग्रहण लगा था और वैदिक नियमानुसार प्रत्येक जनेऊ धारण करने वाले को ग्रहणकाल के उपरांत पुराना बदलकर नया जनेऊ धारण कर लेना चाहिए बस यही सोच कर सुबह सुबह मैं हनुमान जी की सेवा में यह ले आया था प्रभु को यह प्रिय भी बहुत है | हनुमान चालीसा में भी लिखा है कि - "हाथ बज्र और ध्वजा विराजे, कांधे मूज जनेऊ साजे"।

 अब महन्थ जी थोड़ी सोचनीय मुद्रा में बोले कि हम लोग बाजार का जनेऊ नहीं लेते हनुमान जी के लिए शुद्ध जनेऊ बनवाते हैं, आपके जनेऊ की क्या शुद्धता है | इस पर वह ब्राह्मण बोले कि प्रथम तो यह कि ये कच्चे सूत से बना है, इसकी लम्बाई 96 चउवा (अंगुल) है, पहले तीन धागे को तकली पर चढ़ाने के बाद तकली की सहायता से नौ धागे तेहरे गये हैं, इस प्रकार 27 धागे का एक त्रिसुत है जो कि पूरा एक ही धागा है कहीं से भी खंडित नहीं है, इसमें प्रवर तथा गोत्रानुसार प्रवर बन्धन है तथा अन्त में ब्रह्मगांठ लगा कर इसे पूर्ण रूप से शुद्ध बनाकर हल्दी से रंगा गया है और यह सब मेंने स्वयं अपने हाथ से गायत्री मंत्र जपते हुए किया है |

ब्राह्मण देव की जनेऊ निर्माण की इस व्याख्या से मैं तो स्तब्ध रह गया मन ही मन उन्हें प्रणाम किया, मेंने देखा कि अब महन्त जी ने उनसे संस्कृत भाषा में कुछ पूछने लगे, उन लोगों का सवाल - जबाब तो मेरे समझ में नहीं आया पर महन्त जी को देख कर लग रहा था कि वे ब्राह्मण के जबाब से पूर्णतया सन्तुष्ट हैं अब वे उन्हें अपने साथ लेकर हनुमान जी के पास पहुँचे जहाँ मन्त्रोच्चारण कर महन्त व अन्य 3 पुजारियों के सहयोग से हनुमान जी को ब्राह्मण देव ने जनेऊ पहनाया तत्पश्चात पुराना जनेऊ उतार कर उन्होंने बहते जल में विसर्जन करने के लिए अपने पास रख लिया |

 मंदिर तो मैं अक्सर आता हूँ पर आज की इस घटना ने मन पर गहरी छाप छोड़ दी, मेंने सोचा कि मैं भी तो ब्राह्मण हूं और नियमानुसार मुझे भी जनेऊ बदलना चाहिए, उस ब्राह्मण के पीछे-पीछे मैं भी मंदिर से बाहर आया उन्हें रोककर प्रणाम करने के बाद अपना परिचय दिया और कहा कि मुझे भी एक जोड़ी शुद्ध जनेऊ की आवश्यकता है, तो उन्होंने असमर्थता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तो वह बस हनुमान जी के लिए ही ले आये थे हां यदि आप चाहें तो मेरे घर कभी भी आ जाइएगा घर पर जनेऊ बनाकर मैं रखता हूँ जो लोग जानते हैं वो आकर ले जाते हैं | मेंने उनसे उनके घर का पता लिया और प्रणाम कर वहां से चला आया।

शाम को उनके घर पहुंचा तो देखा कि वह अपने दरवाजे पर तखत पर बैठे एक व्यक्ति से बात कर रहे हैं , गाड़ी से उतरकर मैं उनके पास पहुंचा मुझे देखते ही वो खड़े हो गए, और मुझसे बैठने का आग्रह किया अभिवादन के बाद मैं बैठ गया, बातों बातों में पता चला कि वह अन्य व्यक्ति भी पास का रहने वाला ब्राह्मण है तथा उनसे जनेऊ लेने आया है | ब्राह्मण अपने घर के अन्दर गए इसी बीच उनकी दो बेटियाँ जो क्रमश: 12 वर्ष व 8 वर्ष की रही होंगी एक के हाथ में एक लोटा पानी तथा दूसरी के हाथ में एक कटोरी में गुड़ तथा दो गिलास था, हम लोगों के सामने गुड़ व पानी रखा गया, मेरे पास बैठे व्यक्ति ने दोनों गिलास में पानी डाला फिर गुड़ का एक टुकड़ा उठा कर खाया और पानी पी लिया तथा गुड़ की कटोरी मेरी ओर खिसका दी, पर मेंने पानी नहीं पिया

इतनी देर में ब्राह्मण अपने घर से बाहर आए और एक जोड़ी जनेऊ उस व्यक्ति को दिए, जो पहले से बैठा था उसने जनेऊ लिया और 21 रुपए ब्राह्मण को देकर चला गया | मैं अभी वहीं रुका रहा इस ब्राह्मण के बारे में और अधिक जानने का कौतुहल मेरे मन में था, उनसे बात-चीत में पता चला कि वह संस्कृत से स्नातक हैं नौकरी मिली नहीं और पूँजी ना होने के कारण कोई व्यवसाय भी नहीं कर पाए, घर में बृद्ध मां पत्नी दो बेटियाँ तथा एक छोटा बेटा है, एक गाय भी है | वे बृद्ध मां और गौ-सेवा करते हैं दूध से थोड़ी सी आय हो जाती है और जनेऊ बनाना उन्होंने अपने पिता व दादा जी से सीखा है यह भी उनके गुजर-बसर में सहायक है |

इसी बीच उनकी बड़ी बेटी पानी का लोटा वापस ले जाने के लिए आई किन्तु अभी भी मेरी गिलास में पानी भरा था उसने मेरी ओर देखा लगा कि उसकी आँखें मुझसे पूछ रही हों कि मेंने पानी क्यों नहीं पिया, मेंने अपनी नजरें उधर से हटा लीं, वह पानी का लोटा गिलास वहीं छोड़ कर चली गयी शायद उसे उम्मीद थी की मैं बाद में पानी पी लूंगा |

अब तक मैं इस परिवार के बारे में काफी है तक जान चुका था और मेरे मन में दया के भाव भी आ रहे थे | खैर ब्राह्मण ने मुझे एक जोड़ी जनेऊ दिया, तथा कागज पर एक मंत्र लिख कर दिया और कहा कि जनेऊ पहनते समय इस मंत्र का उच्चारण अवश्य करूं -- |

मैंने सोच समझ कर 500 रुपए का नोट ब्राह्मण की ओर बढ़ाया तथा जेब और पर्स में एक का सिक्का तलाशने लगा, मैं जानता था कि 500 रुपए एक जोड़ी जनेऊ के लिए बहुत अधिक है पर मैंने सोचा कि इसी बहाने इनकी थोड़ी मदद हो जाएगी | ब्राह्मण हाथ जोड़ कर मुझसे बोले कि सर 500 सौ का फुटकर तो मेरे पास नहीं है, मेंने कहा अरे फुटकर की आवश्यकता नहीं है आप पूरा ही रख लीजिए तो उन्हें कहा नहीं बस मुझे मेरी मेहनत भर का 21 रूपए दे दीजिए, मुझे उनकी यह बात अच्छी लगी कि गरीब होने के बावजूद वो लालची नहीं हैं, पर मेंने भी पांच सौ ही देने के लिए सोच लिया था इसलिए मैंने कहा कि फुटकर तो मेरे पास भी नहीं है, आप संकोच मत करिए पूरा रख लीजिए आपके काम आएगा | उन्होंने कहा अरे नहीं मैं संकोच नहीं कर रहा आप इसे वापस रखिए जब कभी आपसे दुबारा मुलाकात होगी तब 21रू. दे दीजिएगा |

इस ब्राह्मण ने तो मेरी आँखें नम कर दीं उन्होंने कहा कि शुद्ध जनेऊ की एक जोड़ी पर 13-14 रुपए की लागत आती है 7-8 रुपए अपनी मेहनत का जोड़कर वह 21 रू. लेते हैं कोई-कोई एक का सिक्का न होने की बात कह कर बीस रुपए ही देता है | मेरे साथ भी यही समस्या थी मेरे पास 21रू. फुटकर नहीं थे, मेंने पांच सौ का नोट वापस रखा और सौ रुपए का एक नोट उन्हें पकड़ाते हुए बड़ी ही विनम्रता से उनसे रख लेने को कहा तो इस बार वह मेरा आग्रह नहीं टाल पाए और 100 रूपए रख लिए और मुझसे एक मिनट रुकने को कहकर घर के अन्दर गए, बाहर आकर और चार जोड़ी जनेऊ मुझे देते हुए बोले मेंने आपकी बात मानकर सौ रू. रख लिए अब मेरी बात मान कर यह चार जोड़ी जनेऊ और रख लीजिए ताकी मेरे मन पर भी कोई भार ना रहे |

मेंने मन ही मन उनके स्वाभिमान को प्रणाम किया साथ ही उनसे पूछा कि इतना जनेऊ लेकर मैं क्या करूंगा तो वो बोले कि मकर संक्रांति, पितृ विसर्जन, चन्द्र और सूर्य ग्रहण, घर पर किसी हवन पूजन संकल्प परिवार में शिशु जन्म के सूतक आदि अवसरों पर जनेऊ बदलने का विधान है, इसके अलावा आप अपने सगे सम्बन्धियों रिस्तेदारों व अपने ब्राह्मण मित्रों को उपहार भी दे सकते हैं जिससे हमारी ब्राह्मण संस्कृति व परम्परा मजबूत हो साथ ही साथ जब आप मंदिर जांए तो विशेष रूप से गणेश जी, शंकर जी व हनूमान जी को जनेऊ जरूर चढ़ाएं...

उनकी बातें सुनकर वह पांच जोड़ी जनेऊ मेंने अपने पास रख लिया और खड़ा हुआ तथा वापसी के लिए बिदा मांगी, तो उन्होंने कहा कि आप हमारे अतिथि हैं पहली बार घर आए हैं हम आपको खाली हाथ कैसे जाने दो सकते हैं इतना कह कर उनहोंने अपनी बिटिया को आवाज लगाई वह बाहर निकाली तो ब्राह्मण देव ने उससे इशारे में कुछ कहा तो वह उनका इशारा समझकर जल्दी से अन्दर गयी और एक बड़ा सा डंडा लेकर बाहर निकली, डंडा देखकर मेरे समझ में नहीं आया कि मेरी कैसी बिदायी होने वाली है |

अब डंडा उसके हाथ से ब्राह्मण देव ने अपने हाथों में ले लिया और मेरी ओर देख कर मुस्कराए जबाब में मेंने भी मुस्कराने का प्रयास किया | वह डंडा लेकर आगे बढ़े तो मैं थोड़ा पीछे हट गया उनकी बिटिया उनके पीछे पीछे चल रह थी मेंने देखा कि दरवाजे की दूसरी तरफ दो पपीते के पेड़ लगे थे डंडे की सहायता से उन्होंने एक पका हुआ पपीता तोड़ा उनकी बिटिया वह पपीता उठा कर अन्दर ले गयी और पानी से धोकर एक कागज में लपेट कर मेरे पास ले आयी और अपने नन्हें नन्हा हाथों से मेरी ओर बढ़ा दिया उसका निश्छल अपनापन देख मेरी आँखें भर आईं।

मैं अपनी भीग चुकी आंखों को उससे छिपाता हुआ दूसरी ओर देखने लगा तभी मेरी नजर पानी के उस लोटे और गिलास पर पड़ी जो अब भी वहीं रखा था इस छोटी सी बच्ची का अपनापन देख मुझे अपने पानी न पीने पर ग्लानि होने लगी, मैंने झट से एक टुकड़ा गुड़ उठाकर मुँह में रखा और पूरी गिलास का पानी एक ही साँस में पी गया, बिटिया से पूछा कि क्या एक गिलास पानी और मिलेगा वह नन्ही परी फुदकता हुई लोटा उठाकर ले गयी और पानी भर लाई, फिर उस पानी को मेरी गिलास में डालने लगी और उसके होंठों पर तैर रही मुस्कराहट जैसे मेरा धन्यवाद कर रही हो , मैं अपनी नजरें उससे छुपा रहा था पानी का गिलास उठाया और गर्दन ऊंची कर के वह अमृत पीने लगा पर अपराधबोध से दबा जा रहा था।

अब बिना किसी से कुछ बोले पपीता गाड़ी की दूसरी सीट पर रखा, और घर के लिए चल पड़ा, घर पहुंचने पर हाथ में पपीता देख कर मेरी पत्नी ने पूछा कि यह कहां से ले आए तो बस मैं उससे इतना ही कह पाया कि एक ब्राह्मण के घर गया था तो उन्होंने खाली हाथ आने ही नहीं दिया

સ્વાતિ રાવલ: ભારતનું ગૌરવ


Add caption

ગુજરાતની આ દીકરી સ્વાતિ રાવલે કોરોના મહામારી સામેના યુદ્ધમાં એક એવું અદભૂત કામ કર્યું છે કે ભારતના વડાપ્રધાન સહિત સૌ સ્વાતિ રાવલને અભિનંદન આપી રહ્યા છે.

મૂળ ભાવનગરના વતની સ્વાતિ રાવલ અત્યારે એર ઈંડિયામાં પાઇલોટ તરીકે એમની સેવાઓ આપે છે. એ એર કમાંડકર તરીકે ફરજ બજાવે છે. કોરોનાને કારણે સમગ્ર વિશ્વમાં સૌથી વધુ મૃત્યુ થયા છે એવા ઇટાલીમાં ફસાયેલા ભારતીય વિદ્યાર્થીઓને ભારત પરત લાવવાના હતા.

ઇટાલીમાં અત્યારે સૌથી ખરાબ પરિસ્થિતિ છે ત્યારે પોતાનો કે પરિવારનો વિચાર કર્યા વગર બે સંતાનોની માતા એવા સ્વાતિબેન એર ઈંડિયાના બોઇંગ 777 દ્વારા ઇટાલીમાં ફસાયેલા ભારતીય વિદ્યાર્થીઓને ભારત પરત લાવવાના કામમાં જોડાયા. પાઇલોટ તરીકે બોઇંગ 777 લઈને ઇટાલી ગયા અને 263 વિદ્યાર્થીઓ તથા ભારતીય નાગરિકોને સહી સલામત ભારત લાવ્યા.

ભારત આવ્યા બાદ ગુજરાતની આ દીકરીએ પરિવાર અને રાષ્ટ્ માટે એક અદભૂત કામ કર્યું. સ્વાતિ રાવલ 14 દિવસ માટે આઇસોલેશનમાં જતા રહ્યા. દિલ્હીના એના જ ઘરમાં અલગ રૂમમાં એકલા જ રહે છે. એમને કાંઈ નથી થયું આમ છતાં તકેદારીના ભાગ તરીકે ઘરમાં જ રહેતા સંતાન કે અન્ય સભ્યોને એ મળતા નથી. એની જમવાની થાળી પણ એના રૂમમાં જાય છે એ જમવા માટે પરિવારના સભ્યો સાથે બેસતા પણ નથી.

મિત્રો, ગુજરાતની આ દીકરી એના વર્તન દ્વારા આપણને સૌને એક મહત્વનો સંદેશ આપે છે. આપ આપના પરિવાર અને દેશને આબાદ રાખવા માંગતા હોય તો મહેરબાની કરીને ઘરની બહાર ન નીકળો. આપણા માટે આ તબક્કો સૌથી મહત્વનો છે. નિષ્ણાંતોના કહેવા પ્રમાણે જો થોડા દિવસનો આ તબક્કો પસાર કરી દઈએ તો આપણે મહદઅંશે કોરોના સામેની લડાઈમાં સફળતા મેળવીશું.

આવતીકાલથી ચૈત્રી નવરાત્રિ શરૂ થાય છે. માતાજીને પ્રસન્ન કરવા અને માના રાજીપા માટે જાત જાતના વ્રત કરતા હોઈએ છીએ. આ ચૈત્રી નવરાત્રિમાં નવ દિવસ ઘરમાં રહેવાનું વ્રત કરીએ. અઘરું છે પણ અશક્ય નથી. આપણી થોડી ગાફલાઈ કરોડો લોકોના સમર્પણ પર પાણી ફેરવી દેશે.

પ્લીઝ, પ્લીઝ, પ્લીઝ ઘરમાં રહો અને બીજાને ઘરમાં રાખો તેમજ આરોગ્ય વિભાગ અને પોલીસની સુચનાઓનું પાલન કરો.

જીતશું આ જંગ,
હશે પ્રજાનો સંગ.

Monday, March 23, 2020

सही रुद्राक्ष की पहेचान



आप भी कर सकते हैं असली रुद्राक्ष की पहचान, जानिए कैसे
यदि आप किसी मंदिर या मठ से रुद्राक्ष की माला खरीदते हैं तो आप को किसी ज्योतिषाचार्य से जांच कराने की जरूरत नहीं, आप खुद कर सकते हैं असली रुद्राक्ष की पहचान

 किसी भी शहर के बाजार में रुद्राक्ष आसानी से मिल जाता है, लेकिन उसकी पहचान करना ग्राहकों के लिए थोड़ा कठिन काम होता है। ज्यादातर लोग रुद्राक्ष खरीदने के बाद या तो किसी ज्योतिषाचार्य की शरण  लेते हैं या फिर घर के बुजुर्गों से असली, नकली के बारे में पूछते हैं। लेकिन आप स्वयं बिना किसी से पूछे असली और नकली रुद्राक्ष में भेद कर सकते हैं वह भी किसी लैब या ज्योतिषाचार्य की मदद लिए बगैर।

कई लोग लाभ के लालच में कैमिकल का इस्तेमाल कर इसका रंग रूप असली रूद्राक्ष जैसा कर देते है व इसके ऊपर धारिया बना कर मंहगे भाव में बेच देते है। कई बार दो रुद्राक्षों को बड़ी सफाई से जोड़ कर बेचा जाता है। आपने देखा होगा कि कई रूद्राक्षों पर गणेश, सर्प, शिवलिंग की आकृति बना कर भी लाभ कमाया जाता है।

रूद्राक्ष का उपयोग केवल धारण करने में ही नहीं होता है अपितु हम रूद्राक्ष के माध्यम से किसी भी प्रकार के रोग कुछ ही समय में पूर्णरूप से मुक्ति प्राप्त कर सकते है। ज्योतिष के आधार पर किसी भी ग्रह की शांति के लिए रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है।  रूद्राक्ष की महिमा का वर्णन शिवपुराण, रूद्रपुराण, लिंगपुराण श्रीमद्भागवत गीता में पूर्ण रूप से मिलता है।

रूद्राक्ष धारण करने से जहां आपको ग्रहों से लाभ प्राप्त होगा वहीं आप शारीरिक रूप से भी स्वस्थ रहेंगे।  ऐसी और भी अनेक बातों के कारण रूद्राक्ष मंहगे भाव में बेच दिय जाते हैं पर देखा जाये तो जो आदमी अध्यात्मिक विश्वास में रुद्राक्ष खरीदता है अगर उसे ऐसा रुद्राक्ष मिल जाये तो उसे कोई लाभ नही बल्कि उसके अध्यात्मिक मन के साथ धोखा होता है। आप ने कभी भी कोई रुद्राक्ष लेना तो विश्वसनीय स्थान से ही खरीदे। परन्तु आप भी अपने ढंग से जान सकते है असली और नकली रुद्राक्ष कैसे होते है।   

 कैसे करें असली रुद्राक्ष की पहचान
1.रुद्राक्ष की पहचान के लिए रुद्राक्ष को कुछ घंटे के लिए पानी में उबालें यदि रुद्राक्ष का रंग न निकले या उस पर किसी प्रकार का कोई असर न हो, तो वह असली होगा। इसके अलावा आप रुद्राक्ष को पानी में डाल दें अगर वह डूब जाता है तो असली नहीं नहीं नकली। 
2. रुद्राक्ष सरसों के तेल मे डालने पर रुद्राक्ष अपने रंग से गहरा दिखे तो समझो वो एक दम असली है।
3. प्रायः गहरे रंग के रूद्राक्ष को अच्छा माना जाता है और हल्के रंग वाले को नहीं। असलियत में रूद्राक्ष का छिलका उतारने के बाद उस पर रंग चढ़ाया जाता है। बाजार में मिलने वाली रूद्राक्ष की मालाओं को पिरोने के बाद पीले रंग से रंगा जाता है। रंग कम होने से कभी- कभी हल्का रह जाता है। काले और गहरे भूरे रंग के दिखने वाले रूद्राक्ष प्रायः इस्तेमाल किए हुए होते हैं, ऐसा रूद्राक्ष के तेल या पसीने के संपर्क में आने से होता है।
4.   रूद्राक्ष की पहचान के लिए उसे सुई से कुरेदें। अगर रेशा निकले तो असली और न निकले तो नकली होगा।
5. नकली रूद्राक्ष के उपर उभरे पठार एकरूप हों तो वह नकली रूद्राक्ष है। असली रूद्राक्ष की उपरी सतह कभी भी एकरूप नहीं होगी। जिस तरह दो मनुष्यों के फिंगरप्रिंट एक जैसे नहीं होते उसी तरह दो रूद्राक्षों के उपरी पठार समान नहीं होते। हां नकली रूद्राक्षों में कितनों के ही उपरी पठार समान हो सकते हैं।

અમેરિકા અને અફઘાનિસ્તાન: યુદ્ધમાં ભારત.


અમેરિકા એટ્લે જગત જમાદાર. ત્યાં રિપબ્લિકન કે ડેમોક્રેટ પાર્ટીની સરકાર હોય. અમેરિકાનું આંતરિક રાજકારણ ગમેતેં હોય. જગત જમાદારી કરવા આ પાર્ટીઓ વિશ્વ સામે ઍક બની જાય છે. જગત જમાદાર એટલાં માટે કહેવાય કે અમેરિકા ધારે તેં દેશમાં સૈન્ય મોકલી શકે. ત્યાં લોકશાહી ને નામે પોતાને માટે યોગ્ય સરકાર ને જીતદિબશાકૈ આ બધુ અમેરિકા કરતું રહ્યુ છે. અત્યાર સુધીમાં અનેક દેશો ઉપર સીધા યા વાંકા કે પોતનાં વ્યક્તિગત સ્વાર્થ માટે અમેરિકા હુમલો કરે છે. હા, છેલ્લાં ઍક દાયકામાં જગત જમાદારનાં દાંત ખાટા પણ થયાં હોય એવું બન્યુ છે.

વિએતનામ,ક્યુબા,ઇરાક, સૉમલિયા અને કેન્યા સામે આ જગત જમાદાર કશું કરી શક્યા નથી. આવી જ ઘટના હવે અફઘાનિસ્તાનમાં જોવા મલે છે. સામાન્ય રીતે યુદ્ધ એટ્લે બે દેશ વચ્ચે થાય છે. પણ અફગાનમાં કશુંક જુદું થયુ છે. અમેરિકા આજે અફઘાનિસ્તાન સામે નહીં પરંતું આ દેશના તાલિબાની સંઘઠન વચ્ચે થયુ છે. દુનિયાના ઇતિહાસમાં આ યુદ્ધ સૌથી લાંબુ ચાલ્યું છે. વર્ષ 2001 ની 7સાતમી ઓક્ટોબરનાં દિવસે અમેરિકાએ શરું કરેલ આ યુદ્ધ આજેય તાલિબાનો સાથે ચાલે છે. ઓસામા બિન લાદેન અફઘાનિસ્તાનમાં હતો. તેને પકડી  મારી નાખવામાં આવ્યો. જગત જમાદાર આંતકવાદ સામે લડવા તૈયાર હોય છે. હવે અમેરિકા થાક અનુભવે છે. અમેરિકાના બજેટમાં મોટો હિસ્સો અમેરિકા સૈન્ય પાછળ ખર્ચ કરે છે. સેના પાછળ ખર્ચ થાય છે તેનો ચૉપન ટકા હિસ્સો બીજ દેશોમાં ચાલતા યુદ્ધ માટે અમેરિકા વાપરે છે. અત્યાર સુધીમાં 6 લાખ કરતાં વધારે સૈનિકો બીજા દેશમાં લડતા લડતા મૃત્યુ પામ્યા છે. આ વાત થઈ અમેરિકાના સ્વભાવની. હવે આપણે વાત કરીશું ભારત દેશના અફઘાનિસ્તાન સાથેના વ્યવહાર અંગે.
અફઘાનિસ્તાન આપણાં દેશનો પડોશી દેશ છે. આપણાં દેશે અફઘાનિસ્તાન સાથે પડોશી ધર્મ નિભાવેલ છે.

યુદ્ધ પછી અફઘાનિસ્તાન ને બને એટલી મદદ કરી આ દેશને ઉભો થવા સહાય કરી છે. અરે... અફઘાનિસ્તાન સ્થિત હરી નદી ઉપર ભારત 1976 થી ઍક બન્ધ બનાવવા જઇ રહેલ છે.  થોડો સમય આંતરિક અશાંતિ ને લીધે આ બંધનું કામ અટકી ગયું હતુ.ત્યાર પછી 1988 અને 2006માં આ બંધ બાંધવાનું કામ ફરી શરું કરવામાં આવ્યુ. વર્ષ 2016માં ભારતના વડાપ્રધાને આ બન્ધ ખુલ્લો મુક્યો હતો. આ કારણે અફઘાનિસ્તાનનાં ખૂબ મોટા વિસ્તાર ને સિંચાઈની સુવિધા પૂરી થાશે.માત્ર સિંચાઈ નહીં, માર્ગ વ્યવહારમાં પણ ભારતે તેનાં પડોશી ને મદદ કરી છે.ડેલારામ અને ઝારાજને જોડતો અફઘાનિસ્તાન નો સૌથી લાંબો હાઈ વે આપણાં દેશના બોર્ડર ઓરગેનાઇજેશન દ્વારા તૈયાર થયો છે.218 કિલોમીટર લાંબો આ રસ્તો બનવાથી બાર કે પંદર કલાકની મુસાફરી હવે ત્રણ કલાકમાં પુરી થઈ શકે છે. આ માર્ગ અફઘાનિસ્તાન નો મહત્વના માર્ગો પૈકીનો ઍક માર્ગ છે. આ હાઇવે ના કામ મે અટકાવવા તાલિબાનીઓ એ વિરોધ કર્યો. આ વિરોધ પ્રદર્શનમાં ભારતીય છ સૈનિક સહીત 130 કરતાં વધારે મૃત્યુ થયાં હતાં. અરે...

તાલિબાનીની હિમ્મત તૌ જુઓ. અફઘાનિસ્તાનની સંસદ ને ઉડાવી દીધી. કોઈ કશું ન કરી શક્યું. હા, વિશ્વની સૌથી મોટી લોકશાહી હોવાને નાતે ભારતે અહિ નવું સંસદ ભવન બનાવી આપ્યું છે.ઉપરાંત સૈનિક મદદમાં ત્રણ એમ.આઈ.25 હેલિકોપ્ટર મફત આપ્યાં ઉપરાંત સૈન્ય ને જરૂર પૂર્તિ બધી મદદ તો ભારતની ખરી જ. આમ આજે કહી શકાય કે ભારત વિશ્વમાં પોતાની આગવી તાકાત અને પ્રતિભા ઊભી કરવામાં સફળ રહ્યુ છે. વિશ્વનું સૌથી મોટુ માર્કેટ અને દુનિયાનું ત્રીજા નંબરનું અર્થતંત્ર હોઇ ભારત ને આજે કોઈ પણ દેશ તુચ્છ માણી શકે એમ નથી. આ જ કારને ટ્રમ્પ સતત ભારત જોડે સંબંધો વધારવા આતુર જણાય છે. અમેરિકા અને અફઘાનિસ્તાન વચ્ચે સમાધાન માટે ભારત ઍક મહત્વની ભૂમિકામાં જોવા મલે છે. વિશ્વ આજે ભારત ને તેની તાકાત અને કૌશલ્ય ને લીધે આગવું મહત્વ આપે છે ત્યારે પડોશી દેશ માટે ભારતે કરેલ પ્રયત્ન ભવિષ્યમાં દક્ષિણ એશિયામાં શાંતિ સ્થાપવા માટે મહત્વનું પગલું બનશે.


રંગ રંગ રંગીલા:

આજે ભારત ને આઇટી હબ તરીકે અને વિશ્વના સૌથી યુવાન ધરાવતાં દેશ તરીકે ઓળખવામાં આવે છે. આપણે આશા રાખીએ કે આ જ કારણે આપણે વિષગુરુ બનીએ.



કોરોના: હાલ અને પછી...

कोरोना के बाद दिखेंगे ऐसे फोटोग्राफ


સમગ્ર દુનિયાની સાથે સાથે ભારત પણ કોરોના સામે જંગ લડી રહ્યુ છે. જેને ધ્યાને રાખી આજે સમગ્ર દેશમાં સ્વંભૂ જનતા કર્ફ્યુનું પાલન કરવામાં આવી રહ્યું છે. રસ્તાઓ વેરાન બન્યા છે. ત્યારે આ જંગમાં મદદ માટે એક માત્ર ભારતીય ઉદ્યોગપતિ બહાર આવ્યા છે. દેશમાં કોરોનાના વધતા કેસને ધ્યાને રાખી આનંદ મહિન્દ્રાએ મદદ કરવાની જાહેરાત કરી છે. મહિન્દ્રાએ દર્દીઓ અને સંદિગ્ધોને મદદ કરવા માટે પોતાના રિઝોટર્સ તથા સાથે સાથે પોતાની આખી સેલેરી આપી મોનિટરીની મદદ કરવાની જાહેરાત કરી છે.

સમગ્ર દેશમાં જનતા કર્ફ્યુ. દેશમાં વધતા કોરોનાના કહેરને ધ્યાને રાખી વડાપ્રધાન મોદીએ જનતા કર્ફ્યુનું પાલન કરવા અપીલ કરી હતી, જેને દેશની જનતાએ અમલમાં ઉતારી છે. દેશમાં હાલ કોરોના પોઝિટીવની સંખ્યા 340 થઈ ગઈ છે. ત્યારે આવા સમયે લોકોને ખાસ સલાહ છે કે, તેઓ ઘરમાંથી બહાર ન નિકળે.


મદદ માટે ભારતના ઉદ્યોગપતિ આગળ આવ્યા જેમાં મહિન્દ્ર ગ્રુપના ચેરમેન આનંદ મહિન્દ્રાએ રવિવારના રોજ જાહેરાત કરી છે કે, તેમની કંપની આ સંભાવનાઓ પર કામ કરવાનું શરૂ કરી રહી છે. તેઓ આ માટે વેંટિલેટર પણ તૈયાર કરી રહ્યા છે. સાથે જ તેમણે જાહેરાત કરી છે કે, તેમની ક્લબો મહિન્દ્રા રિઝોર્ટ્સ દર્દીઓની સારસંભાળ માટે ટેંપરરી ફેસિલિટી તરીકે ઉપયોગમાં લઈ શકાશે. સાથે જ તેમની કંપની અન્ય સુવિધા માટે તૈયાર છે જે સરકાર અને ભારતીય સેનાને સંપૂર્ણ મદદ કરશે.

ટ્વીટર પર સતત લોકોને જાગૃત કરતા મહિન્દ્રાએ આ બિમારીથી બચવા લોકોને સાવધાની રાખવા જણાવી રહ્યા છે. તેમણે જણાવ્યું છે કે, અનેક રિપોર્ટ વાંચ્યા બાદ જાણવા મળ્યું છે કે, ભારતમાં હાલ કોરોના સ્ટેજ 3 પણ આવી રહ્યું છે. આનંદ મહિન્દ્રાએ એવું પણ જણાવ્યું છે કે, ફંડ માટે અમે લોકો પ્રેરિત કરી રહ્યા છે. તેથી લોકોએ આગળ આવી ફંડ આપવું. મહિન્દ્રા ખુદ પોતાની 100 ટકા સેલેરી આપી રહ્યા છે. આગામી દિવસોમાં વધુ મદદની પણ ખાતરી આપી છે.