Sunday, January 14, 2018

मेरा साया मेरी खुशी



व्यक्तिकभी अकेला,कभी किसी के साथ।व्यक्ति जब अकेला महसूस करता हैं।उसे ये लगता हैं मेरे साथ कोई नहीं हैं।ऐसा होता नहीं हैं।आज मकर सक्रांति हैं।
में जब घर में था,अकेला था।में घर से भर आया...मेरा साया तुरन्त मेरे साथ,मुझसे आगे आया।
मेरा साया यानी मेरी ख़ुशी।जब में प्रकाश में होता हूं,मेरी खुशी मुजे मेरे साथ होनेका हौसला देती हैं।मुजे मालूम हैं,की मुजे प्रकाश में रहना हैं।मेने मेरा प्रकाश तय कर लिया हैं।एक गाना हैं 'तुम बे सहारा होतो,किसी का सहारा बनो'  
हम रोज एक समान खुशी चाहते हैं।ऐसा संम्भव नहीं हैं।जब त्योहार आहे हैं अपने याद आते हैं।अपने होने परभी कुछ दूर होते हैं।जो पास नही  होते हैं फिरभी साथ होते हैं।
किसी ने खूब कहा हैं।
सब से शांत जगह धर्म धर्मस्थल होता हैं।गाँधीआश्रम एक ऐसा स्थान हैं कि में जब भी जाता हूं मुजे कभी अकेला पन महसूस नहीं हुआ।अगर मंदिर मस्जिद के नजरिये से देखे ..
घर से मंदिर हैं बहोत दूर,
घर से मंदिर हैं बहोत दूर।

चलो,

किसी रोते हुई बच्चे को हसाया जाए।आज हम जो जिंदगी जी रहे हैं।वैसा जीने के लिए कई लोग दिन रात एक कर रहे हैं।अगर में अकेलापन महसूस करता हु तो में भर निकल कर मेरी खुशियो के साथ खुश रहूं।
जी...
आज के दिन भर निकलो,
किसी अनजान बच्चे से बात करो।कुश करो।आप को भी खुशी मिलेगी।उसकी जिंदगी में ख़ुशी क्या हैं वो आप सुनेगे तो शायद आप को रोना भी आ सकता हैं।

नव विचार से सर्जन होगा,
नए भारत को सजा ना होगा।
देश को अपनी बढ़ाएंगे,
नया सवेरा लाएंगे।


#जी 
आज से तय करो कि रोज किसी को खुशी देंगे...

एक खुशी,एक आशा का किरन...

#we can मुमकिन हैं?
#Bnoवेशन.

Sunday, December 31, 2017

31.12.2017

आज 2017 का अंतिम दिवस हैं।सबसे पहले ये बात करलू की साल बदला हैं,में नहीं।में ओर मेरा काम नहीं बदले गा।में इस साल को अच्छे और बुरे संदर्भ में देखने की जगह में इस साल को मेरे साथ जुड़े 365 दिनों के रूप में देखता हूँ।सबसे पहले तो आज 2017का समापन हो रहा है आने वाला नववर्ष 2018 आपके सम्पूर्ण परिवार के  मंगल मय, सुख समृद्धि एवं खुशियों से भरा रहे। वर्ष 2017 में जाने अनजाने कोई गलती हो गई हो तो मुजे क्षमा करें।
कुछ गलतियां ऐसी होती हैं जिसे कोई और भुगतता हैं।मेने ऐसी गलती की हैं,में भी ऐसी गलती का शिकार बना हु।पिछले साल की हुई गलती यो को आज भूल के नए सालमे में आगे देखना चाहूंगा।
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સેલ્ફી ની જગ્યાએ,કોઈકનું દુઃખ ખેંચી શકો તેવો પ્રયત્ન કરજો. દુનિયા તો શું,ઈશ્વર પોતે પણ LIKE કરશે.
मेरे एक दोस्त ने मुजे आज भेजा।किसी का दुःख कम करने का प्रयत्न कभी मुजे खुद दुःखी कर चुका हैं।में जितना हो सकेगा उतना ओरो के दुःख दूर करने की कोशिश करूंगा।भगवान like करता हैं तो भी तो आज कोई हमे like करता हैं।भगवान का शुक्र हैं जो कुछ पिछले साल हुआ,मेरी जिंदगी में महत्वपूर्ण रहा और  आगे मुजे इससे ओर आगे सोचने का,समजने का ओर कुछ नया करने का जैसे भगवान ने चांस दिया हैं।थक ने के बाद जो आराम मोयला हैं,शायद यही आराम आज में महसूस करता हूँ।भगवान का Like ये मौका like करता हूँ।
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Invest your energy into something that is going to contribute to your growth.
Always let your actions speak louder than your words.

केयूर पनारा(सृष्टि इनोवेशन) ने मुजे आज ये मेसेज भेजा।मुजे पसंद आया तो आपको शेर करता हूँ।जो मेरे ग्रोथ में मेरे साथ हैं,में उनके पीछे ही मेरी शक्ति को खर्च करूँगा।हमे हमारे काम को बोलने देना हैं,हमारी आवाज नहीं,हमारा काम हमारी पहचान होनी चाहिए।
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“दुनिया का सबसे अच्छा तोहफा “वक्त” है।क्योंकी,
जब आप किसीको अपना वक्त देतें हैँ, तो आप उसे अपनी “जिंदगी” का वह पल देतें हैं,जो कभी लौटकर नहीं आता।परिमल (मांडवी, कच्छ) ने मुजे ये भेजा।समय की दौड़ के साथ काम लेते समय कभी कभी जो अपने होते हैं,उन्हें हम समय नहीं दे पाते।उसमें आयोजन का महत्व हैं।समय सबके लिए 24 घंटे समान हैं।इस बात को ध्यान में रखते हुए इस साल सफलता पूर्वक इस बात को संभाले रखने का प्रयत्न करने का मेरे सभी व्यक्तिओ को विश्वास दिलाता हूं।मेरे खाने पीने के समय और अंदाज से जो मेरे साथी हैं में उन्हें आश्वस्थ करना चाहता हूं जी 2018 साल खत्म होने तक में खाने के बारे में सबको कोई फरियाद न हो वैसा करूँगा।
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શું ફરક પડે ક્રીસમસ હોય કે ઈદ,મને અંતરમાં છે માણસ બનવાની જીદ.
भारती जी भावनगर  ने मुजे ये भेजा था।मेने कुछ थोड़ा फर्क करके मेरे लिए फिर से लिख दिया।


अब आगे नही,
नए साल की शुभ कामना से पहले, पुराने साल को ढेर सारा प्यार।
जो आज हैं उसे देखलो,
जो कल होगा,उसे देखलेंगे।

नए साल में पुराने सवाल न हो,ओर नई सफलता के रास्ते खुले वोही प्रार्थना से आज मेरे विचारों को लिखने से रुकता हूं।

Friday, December 29, 2017

ऐसी खुशी

हम खुश हैं?
क्या हम सचमुच खुश हैं।
हमे कैसे मालूम पड़े की सामने वाली व्यक्ति खुश हैं।आज कहीं से निकलते समय कुछ बच्चों को देखा।उनके पास खेलने के लिए कुछ नहीं था।फ़िरभी 3 या 4 बच्चे खेल रहे थे।खुश थे।सिर्फ बच्चे ही ऐसे होते हैं जो अपने चहरे पर गलत दिखा नहीं सकते।खेलने के एक भी साधन के बगैर वो खुश थे।बहोत खुश थे।

में भी खुश हो गया,उनकी खुशी देखकर।
याद रखने के लिए कुछ छिपा के रखा हैं।

हर कोई हर बात पे कुश नहीं हो सकता,प्रत्येक व्यक्ति किसी एक बात पे तो खुश रह सकता हैं।ये मेरा मानना हैं।आज में खुश हूं।आज का दिन मुझे याद रहेगा।मेरे हिस्से क्या आएगा मालूम नहीं हैं,हा मेरे हिस्से खुशियां अवश्य होगी।
#मेरी खुशियां

Wednesday, December 27, 2017

टिकट कहाँ है...?

 टी सी ने बर्थ के नीचे छिपी लगभग तेरह - चौदह साल की लडकी से पूछा टिकिट नहीं है साहब काँपती हुई हाथ जोड़े लडकी बोली,

"तो गाड़ी से उतरो " टीसी ने कहा,

इसका टिकट मैं दे रहीं हूँ,
पीछे से ऊषा भट्टाचार्य की आवाज आई जो पेशे से प्रोफेसर थी ।

"तुम्हें कहाँ जाना है ?" लड़की से पूछा"

पता नहीं मैम !

तब मेरे साथ चल बैंगलोर तक ! ""
तुम्हारा नाम क्या है ?

चित्रा !

"बैंगलोर पहुँच कर ऊषाजी ने चित्रा को अपनी एक पहचान के स्वंयसेवी संस्थान को सौंप दिया और अच्छे स्कूल में एडमीशन करवा दिया, जल्द ही ऊषा जी का ट्रांसफर दिल्ली होने की वजह से चित्रा से कभी-कभार फोन पर बात हो जाया करती थी,

करीब बीस साल बाद ऊषाजी को एक लेक्चर के लिए सेन फ्रांसिस्को (अमरीका) बुलाया गया । लेक्चर के बाद जब वह होटल का बिल देने रिसेप्सन पर गई तो पता चला पीछे खड़े एक खूबसूरत दंपत्ति ने बिल भर दिया था,"तुमने मेरा बिल क्यों भरा ?मैम, यह बम्बई से बैंगलोर तक के रेल टिकट के सामने कुछ नहीं है।

अरे चित्रा ! ! ? ? ?

(चित्रा कोई और नहीं इंफोसिस फाउंडेशन की चेयरमैन सुधा मुर्ति थी, एवं इंफोसिस के संस्थापक श्री नारायण मूर्ति जी की पत्नी थी। यह उन्ही की लिखी पुस्तक से लिया गया कुछ अंश)
देखा आपने!
कभी आपके द्वारा भी की गई सहायता किसी की जिन्दगी बदल सकती है।

Tuesday, December 26, 2017

फिर अकेला...

भावेष पंड्या bhavesh pandya dr bhavesh pandya innovation world record limca record भावेष
जब में पढ़ता था।
स्कूल में शिखाया जाता था कि मनुष्य सामाजिक प्राणी हैं।समाज में वो जुड़ता हैं।साथ चलता हैं।कभी आगे तो कभी पीछे हो जाता हैं।कभी समज नहीं पाता हैं,कभी समजा नहीं पाता हैं।एक तरफ काम और दूसरी तरफ जिम्मेदारी ओर समाज से जुड़ने का,जुड़े रहने का अवसर या जिम्मेदारी !14 तारीख़ को गुजरात में चुनावी उत्सव था।उस वख्त हमारे परिवार में शोक का माहौल था।सीधे परिवार के सदस्य के देहांत का दिन था।परिवार जैसे टूट चुका था।आज उनकी 13 वी हैं।
ॐ शांति
#बाबू मोशाय...

मेरा दोस्त


कुछ दोस्त खास होते हैं।
वो सदैव आसपास होते हैं।श्री जयेश पटेल।उनकी लाडली खुश्बू की शादी होने वाली हैं।एपेंडिक्स का ऑपरेशन करना था।ग्राम भारती में प्रणव मुखर्जी सर IGNIT सन्मान के लिए आने वाले थे।
शिक्षकों को IGNIT एवॉर्डी ओर अन्य बच्चो के साथ जुड़ना था।सृष्टि के सहयोग और GCERT के आदेश से इन शिक्षकों को नेशनल वर्कशॉप में कार्य करने का अवसर मिला।श्री जयेश पटेल शायद नहीं भी आते तो उनके पास रीजन था।मगर वो आये।बाकी के सभी सहकर्मी का शुक्रिया,मगर श्री जयेश पटेल का विशेष रूप से सुक्रिया।
#Thanks jayn
#खुश्बू की खुश्बू...

IGNIT:2017

बच्चो के नवाचार।
APJ अब्दुल कलाम सन्मान समारोह का आयोजन हुआ।नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन,हनी बी नेटवर्क ओर सृष्टि इनोवेशन के सहयोग से संम्पन हुआ।पिछले 8 सालों से ये सन्मान दिया जाता हैं।
इस बार पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी और गुजरात के राज्यपाल ओ.पी.कोहली उपस्थित रहे।एन आई एफ के चेरमेन डॉ आर.माशेलकर जी की विशेष उपस्थिति में आयोजित हुआ।29 नवाचार के लिए 56 बच्चो को यहाँ सन्मानित किया गया।22 दिसम्बर 2017 के दिन ग्राम भारती अमरापुर में ये आयोजन संम्पन हुआ।21 तारीख को क्रिएटीविटी वर्कशॉप में जुड़ने के लिए GCERT ने शिक्षकों को जोड़ने में सहयोग किया।नवाचार प्राप्त करने वाले एवॉर्डी  बच्चो के साथ गुजरात के बच्चो ने अपने विचार बाटें।GCERT की ओर से में सृष्टि का शुक्रिया अदा करूँगा की गुजरात के अध्यापको को ये मौका दिया।GCERT ने भी सहयोग किया।बच्चो के ओर शिक्षकों के नवाचार के लिए आए कार्यशाला एवं सन्मान समारोह नई ऊर्जा संचारक होगा।

Sunday, December 17, 2017

कलाम:काम को महत्व दो...

अब्दुल कलाम।मेरे ओर मेरे जैसे कई के पथदर्शक।
आज के समय में उनके जैसे व्यक्तिको पथदर्शक मानने वाले बहॉत सारे लोग हैं।आज उनके देहांत के बाद भी उनकी सोच को आगे बढाने वाले व्यक्ति ओर संस्था हैं।
आज उनका एक पोस्टर आपको शेर करता हूँ।अपने काम के प्रति लगाव रखने के लिए उन्होंने एक संदेश दिया हैं।अपने काम और तरक्की में इतना समय लगाओ की किसी की बुराई करने का समय न मिले।हम क्यो किसी की बुराई करें।
जैसे किसी को अधिकार से वंचित रखना हिंसा हैं।वैसे ही किसी को काम करने से रोकना या अड़चने पैदा करना भी एक अत्याचार हैं।अगर में आपको सहाय नही कर सकता कोई बात नहीं।मगर मेरा फर्ज हैं कि में आपको काम से न रोकू।
अगर में काम नहीं कर रहा हूँ तो मेरे पास समय हैं।मगर मेरे पास काम नहीं हैं तो में उस वख्त से किसी को नीचा दिखानेका प्रयत्न करता हूँ ।इसका मतलब यही हैं कि जिसके पास काम नहीं या काम छोड़ ने के बाद 2 घंटे का समय हैं।वो अपने फ्री टाइम को महत्व देता हैं।किसी की बुराई करने में कुछ पल लगते हैं।हर बार कोई सोरी बोलेगा ओर फिर से हम उसकी गलती भूल जाएंगे वैसा नहीं हैं।
कुछ काम और गलती कभी नहीं भूले जाते।हमारे  पास काम हैं।जिम्मेदारी हैं।हम समाज में जी रहै हैं।शादी की खुशी या मौत का मातम सभी को होता हैं।किसी के पापा गुजर जाते हैं।उस दिन या तारीख को वो  सदैव याद करके दुखी होते हैं।तो समझीए जिस दिन किसी का बाप या बाप जैसी कोई व्यक्ति गुजर जाती हैं तो क्या एक दिन में व्यक्ति उसे भूल सकती हैं।अरे...दुखी होने की बात ही कहा हैं।आगे आओ ओर इतना काम करो कि आप को आपके नाम को कोई रोक न सके।भले शादी हो या मोत का मातम।कलाम सर उनके परिवार के सदस्य के देहांत के बाद भी सीधे दिल्ही काम के लिए निकले थे।उस वख्त मिसाइल बनाने के काम में जुड़ गए थे।
दो दोस्तों की बात हैं।एक बरोडा से हैं और दूसरे सूरत से।दोनों दोस्त नियमित बात करते हैं। शुक्रवार को ज्यादा बात करते क्यो की एक दोस्त शुक्रवार को फ्री होते हैं।तब बात करते हैं।बरोडा वाले दोस्तने कहना हैं कि सूरत वाले दोस्त पिछले 5 शुक्रवार से उनसे बात नहीं करते हैं।दोनों दोस्तो का झगड़ा मुजे तक पहुंचा।मेण्य कहा उन्हें कुछ काम हुआ होगा।बरोडा वाले दोस्त के लिए सूरत वाले ने कहा कि उन्होंने कभी उनसे बात करने से मना नहीं किया हैं।वो कहते हैं कि में उनसे प्यार करता हूँ और बाते भी करता हूँ।मगर सूरत वाले दोस्त ने बताया कि अब बरोडा वाले मुजे मेरी ही नजरो से गिराना चाहते हैं।
मुजे मालूम हैं कि मेरे दोनों दोस्त इस बात को पढेंगे ओर समजेगे।
मेरे उस दोस्त के झगड़े में मुजे भी जोड़ा गया।वो शायद मेरे इस लेख को पढेंगे।में उन्हें ये जताना चाहता हूं कि 'कलाम जी के पथ पे हम,कलाम पंख से जुड़ेंगे...!ऐसा मेने तय किया था।बच्चो के ओर शिक्षा से जुड़े नवाचार से काम करते हुए में कुछ करना चाहता हूं।कुछ पाना चाहता हूं।में उसे पाके ही रहूंगा।आज से नहीं जब कलाम सर ने विज़न2020 दिया तब से में इस काम को पकड़के आगे बढ़ रहा हूँ।
में सिर्फ काम करता हूँ।मेरे काम को बारबार किसी को समजाने में समय खर्च नहीं करना चाहता। पर मेरी मानसिक स्थिति को अगर कोई बारबार चेलेंज करेगा तो में उसे सहन नहीं कर सकता।मे शिक्षा विभाग से जुड़ा हु।मेरे एक आदरपात्र अधिकारी थे।जो आज निवृत्त हैं।निवृत्त होने परभी वो मेरे लिए सन्मानिय हैं।में अगर कुछ लिखता हूँ तो वो उसके ऊपर कॉमेंट करते हैं।उनकी कॉमेंट में अगर वो मेरी गलती निकाल ते हैं तो में उनसे माफी मांगता हूं।अगर वो गलत हैं तो वो भी अपनी बात को मांन लेते हैं।ज्यादातर वो मेरे विरोधी होने का भाव दिखता हैं,मगर ऐसा नहीं हैं।में उन्हें सन्मान देता हूँ।देता रहूंगा।वो मेरी बुराई नहीं करते,वो मेरी गलती खोज के मुजे समजाते हैं।
आज में एक बात समजता हु की अगर कोई आपकी बुराई करे तो समजना हैं कि वो व्यक्ति बुरा हैं।कोई गलती दिखता हैं तो वो हमारे सहयोगी हैं।सदैव सहयोग प्राप्त करके अपने आपको आगे रखने की सोच के साथ अगर किसी से जुड़े हैं।कुछ काम हुआ हैं।और अब ऐसा लग रहा हैं कि अब साथ काम नहीं हो सकेगा तो इसका मतलब ये हैं कि काम में विक्षेप हो उसे दूर करो।
में किसीकी बुराई नहीं करता।
में किसी को छोड़ नहीं सकता।
में किसी को धोखा नहीं दे सकता।
में कभी किसी को जरूरत से ज्यादा सहन भी नहीं कर सकता।अगर हमारे शरीर में कोई एक उंगली पक जाती हैं या उंगली में कैंसर हुआ हैं तो वो केंसर वाले हिस्से को हम काट लेते हैं।और अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाते हैं।
बस...मे कुछ ऐसा सोचूंगा।जब तय हुआ था कि काम करेंगे और आगे बढ़ेंगे तो इसका मतलब हैं कि काम को महत्व देंगे।हर वख्त सिर्फ ऐसी बाते जिसका माहौल या मतलब नहीं हैं उसके पीछे कब तक समय बर्बाद करे।
आज कुछ कम समय में ज्यादा काम करने का समय हैं।कुछ लोग अपने काम को महत्व देते हैं।कुछ लोग काम को छोड़ के महत्व देते हैं।इस दोनों में में काम के लिए गलती निकाल ने वाले के साथ जुड़े रहना चाहूंगा।भले मेरे भाई,बीबी या कोई पारिवारिक दोस्त हो,में काम करूंगा।मेरे काम को जो भी डिस्टर्ब करेगा में उसे कभी अपना नहीं समजुगा।
कलाम सर के परिवार में देहांत हुआ।वो एक दिन आये और श्याम तक वापस चले गए।कुछ लोगो ने उनके बारे में कुछ खरीखोटी सुनने का भी हुआ होगा। मुजे काम हैं।
मुजे काम करना हैं।
मेरे कुछ गोल हैं,में उसे पाके ही शांत रहूंगा।तबतक कोई अब मुजे अशांत नहीं कर पाऊंगा।मेरे साथ जो हैं,वो मेरे साथ रहेंगे।मगर अब सीधे परिणाम या अंतिम लक्ष्य पालने तक में बिचमें कोई छोटे विषय में अपना समय और शक्ति खर्च नहीं करूंगा।जिसे जो समझना हैं , वो समजे।
जब हम बात करते हैं तो इसका अर्थ ये नहीं कि समय हैं।या काम नहीं हैं।आप के कॉल को महत्व देते हुए उसको सन्मान देते हैं।मगर वो व्यक्ति अगर हमारे सहयोग को भूल के सिर्फ गुदगुदी वाली या महत्व नहीं हैं वैसी बाते करता हैं तो मतलब हैं कि उसे सिर्फ टाइम पास के समय बात करने का नंबर चाहिए।वैसे गुदगुदी वाले नंबर दूसरे हैं।
काम ही करो,किसी की बुराई नहीं।क्योकि आप आज जिन की बुराई करते हैं,शायद उससे अधिक बुराई व्व व्यक्ति ओरो से सुनता हैं।आप बुराई में बढ़ोतरी करके अब आपका महत्व कम कर चुके हैं।
आप का महत्व आप ने कम किया हैं।जब साथ मिलके हमने जो तय किया हैं,उतना न होने तक में सुनता रहूंगा।अब मुजे भी सुनने की आदत हो गई हैं।मगर आज में कहता हूं कि मुजे बदनाम करने वाले या आक्षेप करने वाले सभी को में नहीं मेर समय जवाब देगा।
@थकान
#आई केन मुमकिन हैं...

Thursday, December 14, 2017

आराध्या की सोच

एक छोटी बच्ची।
घरमें अपने परिवार के साथ रहती हैं।घरमें सभी सुविधा हैं।ऐसी कोई चीज नहीं जो सुख सुविधा के लिए हो और इस बच्ची के घर न हो।
सभी सुविधा के बीच एक सवाल ये हैं कि सारी सुविधा वयस्को के लिए हैं।जैसे आए वॉश बेसिन।घरमें कुल मिला के चार वॉश बेसिन हैं  इस गुड़िया की हाइट का एक भी वॉशबेसिन नहीं हैं।
अब रोज की जरूरत हैं।रोज दिन में दो बार ब्रश करना हैं।हर बार हाइट का प्रॉब्लम सामने आता हैं।छोटी बच्ची सदैव छोटी नहीं रहने वाली।इस लिए इस कि हाइट को देखते हुए कुछ फर्क किसी भी सुविधा में नहीं किया जाता।करेगा भी कोन।अब रोज की मगजमारी करने से अच्छा हैं,इसका कुछ रास्ता निकाला जाए।आराध्या नामकी इस गुड़िया ने अपना रास्ता खुद निकाला हैं।आप भी ऐसे कोई फोटोग्राफ हैं तो उसकी जानकारी मुझतक पहुंचाए।
#Bnoवेशन

मेरा अधिकार

आज का दिन।
गुजरात चुनाव में दूसरे चरण का मतदान हो रहा हैं।93 विधानसभा सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान होगा।कुल मिलाके 2 करोड़ से अधिक मतदार मतदान करने के लिए अधिकृत हैं।
आज मतदार का दिन हैं।पिछले 2014 में लोकसभा और 2012 में विधानसभा के सापेक्ष में देखा जाय तो अबतक का मतदान कम दिखाई पड़ता हैं।आचारसंहिता का अमल ओर उसमें से कुछ दूसरे टीको के रास्ते अपनाते हुए उम्मीदवार आज अपना आखरी जोर लगाएंगे।
आप भी इस अधिकार का उपयोग कर चुके होंगे।आशा हैं।आप के इस प्रयत्न से लोकशाही को जीवंत रहेनेमें सुविधा होगी।
#लोकमत