Tuesday, July 7, 2020

ઍક જીંદગી...જીવતી વારતા...

કેટલાય વર્ષો ગયા.
1999માં શિક્ષક તરીકે જોડાયો. ત્યારે શાળામાં બાળકોને વાંચવામાં તકલીફ પડે.ખાસકરીને જોડાક્ષર વાંચવામાં તકલીફ પડે. એનો રસ્તો કર્યો. જોડાક્ષર વગરની વાર્તાઓ લખી. લખાતી ગઇ.પાઠ્યક્રમ આધારે વાર્તાઓ લખી.વર્ષ 2006માં મારી શાળાની પ્રવૃત્તિઓની નોંધ લેવાઈ.આઇઆઇએમ દ્વારા મારી પસંદગી સર રતન ટાટા એવોર્ડ માટે થઈ. પ્રોફેસર વિજય શેરીચંદ દ્રારા આ કામને પ્રોત્સાહન આપવામાં આવ્યુ.એ પછી તો શિક્ષણ સાથે જોડાયેલ વિવિધ કામ કરવાની તક મળી.

વર્ષ 2008માં લીમ્કા બુક ઓફ રેકોર્ડ થી શરું થઈ 2014માં વર્લ્ડ રેકોર્ડ સુધીની સફર પૂરી થઈ. શ્રી અનિલ ગુપ્તા સર જોડે કામ કરતાં કરતાં સૃષ્ટિ સન્માન મળ્યું.વર્લ્ડ રેકોર્ડ યુનિવર્સીટી દ્રારા માનદ ડોક્ટરેડની પદવી એનાયત થઈ. આ બધાં પાછળ ઍક માત્ર કારણ વાર્તા. બાળકોને ગમે એવી વાર્તા. છેલ્લાં કેટલાંક સમયથી આ વાર્તાઓ 90.4fm ઉપર રેકોર્ડ કરી. શ્રી અભિજીત જી અને શ્રી અનિકેત ઠાકર દ્વારા આ વાર્તાઓને માટે ખાસ લાગણી દર્શાવવામાં આવી.લગભગ 40 કરતાં વધારે વાર્તાઓ રેકોર્ડ કરી. આજથી આ વાર્તાઓ રેડિયો ઉપર નિયમિત પ્રસારિત થશે. 90.4 fm નાં ટેક્નિકલ સહયોગી શ્રી નરેશભાઈ ઠાકોર અને મારી વાર્તાઓ માટે જીગલ તૈયાર કરનાર #RJ અંજલી રાણાનો આ તબક્કે આભાર માનું છું.

કોઇના કોઈ તબક્કે મારી વાર્તાઓને મહત્વ આપી મને પ્રોત્સાહિત કરનાર ગૂર્જર પ્રકાશનના શ્રી મનુભાઈ શાહ. નવભારત સાહિત્ય મંદિરના શ્રી જયેશ શાહ. આઇઆઇએમ વિગ 7 નાં શ્રી અવિનાશ ભંડારી,મેઘા ગજ્જર,સંકેત સાવલીયા,લેખ નાકરાણી સહીત સૌ સભ્યોને કેમ ભુલાય.સૃષ્ટિ.org નાં શ્રી રમેશભાઈ પટેલ,શ્રી ચેતન પટેલ અને સૌ સહયૉગીઓનો આભાર માનું છું. સાથે #UNICEF નાં તત્કાલીન ઉમાશ્રી, હાલના શ્રીમતી પુષ્પા જોશી,શ્રી હરેશ ચૌધરી, #Room 2 રીડનાં સૌ સાથી. રીચ 2 ટીચનાં સહયોગી સહીત રખેવાળ, BK ન્યૂઝ, ગુજરાત સમાચાર અને સંદેશ જેવા સૌ પ્રકાશન ગૃહનો આ તબક્કે આભાર માનું છું. આજથી શરું થતી મારી વાર્તાઓ આપ મંગળવારે બપોરે 12 .00 વાગે અને રાત્રે 9.00 વાગે સાંભળી શકશો. આજ વાર્તાનું પુન: પ્રસારણ આપ શુક્રવારે બપોરે12.00 વાગે અને રાત્રે 9.00 વાગે સાંભળી શકશો. 

આપ પણ મારી સાથે જોડાઇ શકો. આપ આવી કોઈ જીવતી વાર્તાની વિગત જાણતાં હોવ તો મારા સુધી પહોંચાડવા અનુરોધ કરું છું.

Monday, June 22, 2020

गणेश जी...


कुच्छ साल पहले की बात हैं। 
कही से एक गीत चला था।  वाई से उसे गीत कहा नहीं जा सकता। 
वो एक पैरोडी सोंग या कुच्छ ऐसा ही कहा जा सकता हैं। उसे गीत भी मान लो तो कोई हरकत नहीं हैं।  इस पैरोडी ने बहोत लोगो को खुश किया था। कई लोगो ने उस की नक़ल करते हुए कुछ ऐसा बनाया था।  ऐसा ही बना ने के बारें में मैंने भी सोचा।  मुझे मेरे दो शीर यानी दो बच्चियों ने सहाय करते हुए हम ने एक पैरोडी बनाई।  हमारे लिए समस्या थी पैरोडी किस पर बनाई जाए।  थोडा सोचने के बाद हमने गणेश जी के उपर पैरोडी बनाने के बारे में तय किया। किसी भी संगीत के साधन के बगेर हम ने इसे घर में ही रिकोर्ड किया। आप को भी अवश्य सुनने और देखने में ख़ुशी होगी।  रुचार्मी परिवार के द्वारा बनाई गई इस पैरोडी सोंग को सुन ने के लिए आप यहा क्लिक   करें।  


Saturday, June 20, 2020

पद्मजा का अनूठा कार्य


आप मानते हैं की कोई सरकारी जॉब छोड़ दे?
क्या आप मानेगे की कोई व्यक्ति अधिकारी हो और अपने मिशन के लिए अपनी सरकारी ओफिसर की जिम्मेदारी छोड़ दे? आंध्सरप्ररदेश सरकार में ब्कालोक डेवलपमेंट ऑफिसर की जिम्मेदारी छोडकर कुछ ऐसा काम करें जिस में उन्हें कोई लाभ व्यक्तिगत रूप से नहीं मिलने वाला हैं?

अगर आप ऐसी व्यक्ति को मिलना चाहते हैं तो आप को आंद्रप्रदेश की पद्म जा को मिलना पड़ेगा। वो वर्ष 2007 से ये काम कर रही हैं। वो किसी से पैसा नहीं मांगती,इन के काम को देखकर जो पैसा उन्हें मिलता है,उसी से वो अपने काम को आगे बढ़ा रही हैं।पद्मजा को सृष्टि सन्मान मिला हैं। इस सन्मान को पाने के बाद उन्हों ने खा की ये मेरा नहीं, मुज से जुड़े लोगो का सन्मान हैं।ट्रायबल क्षेत्र में वो काम कर रही हैं।आंद्रप्रदेश के पार्वती पुरम जंगल के पास  विनायक नगर डिस्ट्रिक में वो काम कर रही हैं। पद्मजा का मानना हैं की  लोगो के स्वास्थ्य से जुडी समस्याओ को खत्म करना और उन्हें आरोग्य के प्रति जागृत करना सबसे बड़ी सेवा कही जाती हैं।उन का मानना हैं की हमारा कर्म ही हमारे साथ चलती हैं।पद्मजा एक साध्वी जैसा जीवन पसर कर रही हैं।पद्मजा के बारें में जान्ने  के लिए  यहाँ क्लिक करें

Thursday, June 18, 2020

राष्ट्रपति भवन में FOIN


आज तक मुझे चार बार राष्ट्रपति भवन जाने का मौका मिला हैं। सभी समय कुछ नये काम से जाना हुआ हैं। एक बार FOIN (फेस्टिवल ऑफ़ इनोवेशन में जाने का अवसर मिला) एक बार मेरा सन्मान होने वलता तो जाने का अवसर मिला हैं । क्रिएटीविटी करने वाले बच्चो के साथ राष्ट्रपति भवन में बच्चो के साथ  काम करने का अवसर मिला हैं। में एक सरकारी स्कुल का शिक्षक हु।मुझे ऐ सारे मौके Srishti .org   के माध्यम से ही मिल पाया हैं। कुछ ऐसे लोग वहा आये जिहे देखकर मुझे अहसास हुआ की ये लोग जो है वो ही हकीकत में देश की सेवा करते हैं। ऐसे लोग जो पूरे भारत से आये थे और उन्होंने ऐसा काम किया जिसे आज राष्ट्रपति भवन में सन्मानित किया गया

पद्मश्री अनिल गुप्ता जिन्हें लोग ग्रासरूट इनोवेशन गुरु के नाम से पहचानते हैं।वैसे ही ये तत्कालीन नॅशनल इनोवेशन फाउन्डेश के स्थापक सदस्य एवं वाइस चेरमेन रहे हैं। आज भी वो एन.आई.एफ में सेवा दे रहे है, जुड़े हुए हैं। उन के मार्गदर्शन से सिखा और सिखाने का मेने प्रयत्न किया हैं।उन के साथ एन.आई.एफ के चेरमेन और पद्म भूषन सन्मानित आर. माशेलकर सर के साथ काम करने का अवसर मिला हैं। फेस्टिवल ऑफ़ इनोवेशन जिसे (FOIN) भी कहते है। सृष्टि सन्मान के साथ देश से आये ग्रासरूट इनोवेटसे रूबरू मिलने का और उन के काम को आप तक पहुँचने का मुझे मौका मिला इस के लिए में हनी बी नेटवर्क, सृष्टि एवं इन से जुड़े सभी साथियों का आभार प्रगट करता हु। इन दिनों बच्चो के साथ क्रिएटीविटी पर काम करनेका मुझे मौका मिला हैं।  आप यहा कुच्छ ऐसे लोगो के बारे में आप यहाँ देख सकें इस लिए कम शब्दों में परिचय के साथ उनका इंटरव्यू आप देख पाएंगे।ये एसे लोग हैं जिन्हें हम नहीं पहचान पाते अगर सृष्टि ने शोध यात्रा के दोरान उसे ग्रास रूट से खोजा न होता  ऐसे नवाचार करने वाले FOIN में आते हैं। इस से हम सबसे पहले समजते हैं 

FOIN क्या है ,उसमें क्या होता है,इस के बारे में, FOIN के लिए क्लिक करे। 






Wednesday, June 17, 2020

गुजरात के नव सर्जक राष्ट्रपति भवन में

पद्म श्री अनिल गुप्ता (स्थापक सृष्टि,हनी बी नेटवर्क)

हर दो साल के बाद राष्ट्रपति भवन मे नवसर्जको के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन होता हैं। हनी बी नेटवर्क एवं सृष्टि के माध्यम से श्री अनिल गुप्ता द्वारा साल में दो बार shodh यात्राका आयोजन होता हैं। जब गर्मी का मौसम होता है, तब शोधयात्रा गरमी वाले स्थान में टी की जाती हैं। इस परिवार के श्री रमेशभाई पटेल एवं श्री चेतन पटेल द्वारा शोधयात्रा के पूर्व प्री प्लान होता हैं।बहोत सारे लोग जिन्हें नवाचार में रूचि है,वो इस यात्रा में जुड़ते हैं। दिन में आठ से पंद्रह किलोमीटर चलना होता हैं।  रस्ते में आने वाले गाव में कुछ नया करने वाले लोगो कोखोजा जाता हैं।  उन्हें तो मालुम भी नहीं होता की उन का काम कितना बड़ा हैं, मगर ग्रासरूट इनोवेशन के गुरु अनिल गुप्ता इन को पहचान लेते हैं,उन्हें सन्मानित करवाते हैं।  वैसे ही हमारे कुछ ग्रासरूट इनोवेटर्स राष्टपति सन्मान पाते हैं। 

गुजरात से कुच्छ इनोवेटर को ये मौका मिला है। हमारे साथी और आज केनेडा स्थाई हुए केतन ठाकर इस बात को समजा रहे हैं।   इस काम के बारें में जानकारी के लिए क्लिक करे  और  दिया गया ये वीडियो देखे। 

Tuesday, June 16, 2020

वेल्लन एन और हर्बल ट्रीटमेंट



भारत में केरला।  सबसे शिक्षित राज्य का गौरव हमारे देश में केरल के पास हैं।  ग्रासरूट इनोवेटर का नाम हैं वेल्लन एन. जो की  बयानार डिस्ट्रिक्ट से आये हैं। इस डिस्ट्रिक में  सुलतान तहसील में काम कर रहे हैं। ये तहसील भोत ही अंतरियाल प्रदेश में पड़ता हैं।  वहा शिक्षा एवं सुविधा में भोत पिछड़ा हुआ प्रदेश हैं। यहा आरोग्य से जुडी सुविधाओ का अभाव है,इस कारण वेल्लन एन. ने हर्बल ट्रीटमेंट में खासा काम किया है। ट्रायबल बेल्ट में वो काम क्र रहे हैं केरल सरकार  ने इस हर्बल की जानकारी को फेलाया और स्थानीय लोगो को सिखाया भी हैं केरल स्टेट गवर्मेंट ने उन के काम को देखते हुए और इस काम को बढ़ावा मिले इस लिए एक डॉक्युमेंट्री का निर्माण किया हैं  हर्बल ट्रीटमेंट के माध्यम से उन्हों ने भोत सरे लोगो को स्वास्थ के संबधित जाग्रति के लिए आगे बढ़ाने में प्रोत्साहन दिया हैं 

उन के पास हर्बल ट्रीटमेंट की जो जानकारी हैं,इसे भी स्थानीय सरकार द्वारा पुस्तिका के स्वरूप में प्रकाशित किया हैं। वेल्लन एन. का मानना है की हमारी कुदरती संपदा को हमे ही संभालना है और हमे ही उस में ज्यादा से ज्यादा संशोधन करने हैं । आज केरल के छोटे से ट्रायबल प्रदेश के  वेल्लन एन. के काम एवं उन से जुडी बातो के लिए , हर्बल ट्रीटमेंट के बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें

Monday, June 15, 2020

हर्बल मेडिसिन और एना कुट्टी


केरला से एक महिला 
उन का नाम  एना कुटी जोसेफ हैं। 
वो किसान हैं, उन के पास ढाई एकड़ जमीन हैं। 
इस जमीं में से उन्होंने कुछ हिस्सा हर्बल खेती के लिए निकला हैंइस खेत में वो भिन्न भिन्न प्रकार की वनस्पति की खेती कराती हैं।  आसपास के कई गाव से उन के पास लोग सरवर के लिए आते हैं। पठारी,बुखार,जुकाम,साँस लेने में दिक्कत होना, मसा,भगंदर एवं  हड्डियों की परेशानी जेसी समस्या से जुज रहे लोग उन के पास आते हैं। 

सिर्फ जितना खर्च उन्हें होता है उतना ही पैसा वो लेती हैं।  उन से बात चित करने में हमे दिक्कत आ रही थी क्यों की वो पढ़ी लिखी नहीं हैं, n वो हिंदी समज पाती  हैं। मेरे और एना जोसेफ के बिच एन.आई.एफ के साथी क्रिश मेथ्यु ने हमारी समस्या को कम कर दिया। में सवाल करता उसे वो केरलियन भाषा में वो अनुवाद करके एना अम्मा को कहते,अम्मा जवाब देती उसे क्रिश अंग्रेजी में हमे बताते।  अनेकतामे एकता यही तो हमारे देश की सच्चाई हैं। अम्मा से बात करते हुए मालूम पड़ा की उन के पिताजी भी हर्बल मेडिसिन के बड़े जानकार थे।  अम्मा ने ये सब आप ने पिताजी से सिखा हैं

उन के पास जितनी हर्बल की जानकारी है, उसे उन्हों ने एक किताब के माध्यम से छपाने का प्रयत्न किया हैं।  हम आशा रखते हैं की उन की किताब जल्द से जल्द प्रकाशित हो और हर्बल मेडिसिन में उन के द्वारा किये गए प्रयोग एवं सरवर की जानकारी सभी तक पहुंचेकेरल के ट्रायबल बेल्ट  में गरीब लोगो के लिए वो ये काम सेवा के रूप में पैसा लिए बगेर रही हैं। आप उन के काम को समाज ने और देखने के लिए यहा क्लिक  करे



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